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                <title>Textile Industry - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भारत-अमेरिका समझौते को लेकर कांग्रेस ने बोला केंद्र सरकार पर हमला, कहा-कपास किसानों को होगा बड़ा नुकसान </title>
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                        <![CDATA[कांग्रेस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को किसान विरोधी बताया है। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अमेरिकी कपास के सस्ते आयात से भारतीय कपड़ा उद्योग और करोड़ों कपास किसानों को खरबों का नुकसान होगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-attacked-the-central-government-regarding-the-india-us-agreement-and/article-143364"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(11)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने भारत-अमेरिका के बीच हाल में हुए व्यापार समझौते पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने देश के किसानों के हितों को नजरअंदाज कर यह समझौता किया है और इससे खासकर कपास किसानों को बड़ा नुकसान होने की संभावना है। कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में इस समझौते से देश के कपड़ा उद्योग पर गंभीर प्रभाव पडऩे की आशंका जताई है। उनका कहना था कि इस समझौते से वस्त्र क्षेत्र को खरबों रुपये तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है और इससे किसानों से लेकर निर्यातकों तक पूरी श्रृंखला प्रभावित हो सकती है।</p>
<p>सुरजेवाला के अनुसार यदि अमेरिकी कपास और संबंधित कृषि उत्पादों का आयात शुल्क मुक्त या कम शुल्क पर बढ़ता है तो इसका भारतीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों पर दबाव पड़ेगा। अमेरिका अपने किसानों को भारी सब्सिडी देता है, जिससे वहां की कपास अपेक्षाकृत सस्ती होती है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में भारतीय कपास उत्पादकों की जिनिंग इकाइयों यानी कपास की पहली प्रोसेसिंग यानी कपास को रेशों को बीजों से अलग करने की प्रक्रिया वाली इकाइयाँ तथा स्पिनिंग मिलें यानी कताई मिलें जहां कपास के रेशों से कताई करके सूत तैयार करने वाली मिलों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>उन्होंने आशंका जताई है कि यदि अमेरिका के साथ बंगलादेश जैसे देशों के व्यापारिक प्रबंध और मजबूत होते हैं, तो भारतीय परिधान निर्यात को अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ सकती है। भारत पहले से वैश्विक बाजार में तीखी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है, ऐसे में कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता और निर्यात ऑर्डर में कमी आने से कपड़ा उद्योग के लिए नयी चुनौती बन सकता है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत का कपड़ा और परिधान उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में से एक है। यह क्षेत्र लाखों किसानों, बुनकरों, श्रमिकों और लघु एवं मध्यम उद्यमों से जुड़ा हैऔर यदि सस्ते आयात के कारण घरेलू कीमतों में गिरावट आती है और मिलों का लाभांश घटेगा और इसका सीधा असर रोजगार और ग्रामीण आय पर पड़ सकता है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में कपास उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और इनकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था वस्त्र उद्योग से गहराई से जुड़ी है। पार्टी का कहना है कि किसी भी बड़े आयात झटके से इन राज्यों में किसानों और छोटे उद्योगों की आय पर व्यापक असर पड़ सकता है।</p>
<p>सुरजेवाला ने कहा कि विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि विदेशी कृषि उत्पाद आयात करने और इसके बढऩे से घरेलू कीमतों में गिरावट आना स्वाभाविक है और इससे निर्यात प्रतिस्पर्धा कमजोर होती है और इससे किसानों और मिल मालिकों को खरबों रुपये की आर्थिक हानि उठानी पड़ सकती है। यह पूछने पर कि अमेरिका के साथ इस समझौते से किसानों को कितना नुकसान हो सकता है, सुरजेवाला ने कहा कि यह मामला आंकड़ों का नहीं, बल्कि देश के किसानों के हित का है जिसे नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उनका कहना था कि सरकार किसानों के लिए एमएसपी की घोषणा करती है लेकिन देती नहीं है। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 17:23:16 +0530</pubDate>
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                <title>भारत-अमेरिका व्यापार मुद्दे पर निशिकांत दुबे ने दी राहुल गांधी को खुली बहस की चुनौती, टैरिफ संरचना को लेकर झूठ बोलने का लगाया आरोप</title>
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                        <![CDATA[भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर खुली बहस की चुनौती दी है। दुबे ने राहुल के कपास और टैरिफ संबंधी दावों को 'फर्जी नैरेटिव' बताया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/nishikant-dubey-challenged-rahul-gandhi-for-an-open-debate-on/article-143199"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(15).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों, कपास आयात और उसके भारतीय किसानों व वस्त्र उद्योग पर प्रभाव को लेकर खुली सार्वजनिक बहस की चुनौती दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में निशिकांत दुबे ने गांधी द्वारा साझा किए गए एक वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि वह भारत-अमेरिका व्यापार और टैरिफ संरचना को लेकर बड़ा झूठ फैला रहे हैं। राहुल गांधी ने दावा किया था कि अमेरिकी बाजार में भारतीय परिधानों पर 18 प्रतिशत शुल्क लगता है, जबकि बांग्लादेश को शून्य शुल्क का लाभ मिलता है। उन्होंने इस मुद्दे को अमेरिका से कपास आयात से भी जोड़ा था।</p>
<p>निशिकांत दुबे ने इन दावों को खारिज करते हुए आरोपों के तथ्यात्मक आधार पर सवाल उठाए और राहुल गांधी से अमेरिका से कपास आयात की वास्तविक आवश्यकता और उसके पैमाने को स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने भारत में कपास उत्पादन, कपास किसानों की मौजूदा स्थिति, वस्त्र मिलों की हालत और व्यापक व्यापारिक वास्तविकताओं पर भी स्पष्टीकरण मांगा।</p>
<p>भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का बयान भ्रम पैदा करने के उद्देश्य से दिया गया है और उन्होंने इसे फर्जी नैरेटिव करार दिया। उन्होंने कथित बाहरी प्रभावों और वैचारिक संबंधों का भी उल्लेख करते हुए राहुल गांधी को किसी भी मंच पर बहस के लिए चुनौती दी।यह बयान ऐसे समय आया है जब सत्तारूढ़ सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है।</p>
<p>गौरतलब है कि, दुबे ने हाल ही में लोकसभा में एक  प्रस्ताव पेश कर अलग आरोपों के आधार पर राहुल गांधी की सदस्यता समाप्त करने की मांग भी की है, जिसमें उन्होंने 1978 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़े संसद के एक प्रकरण का हवाला दिया है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 18:07:49 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>राहुल गांधी ने साधा केंद्र सरकार पर निशाना, बोलें-अमेरिका के साथ समझौता कपास किसान, कपड़ा निर्यातक दोनों पर गहरी चोट</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका कपास समझौता किसानों और कपड़ा निर्यातकों के लिए घातक है। उन्होंने इसे "नरेंद्र सरेंडर मोदी" की नीति बताते हुए लाखों परिवारों की आजीविका पर संकट जताया।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-targets-central-government-says-agreement-with-america-is/article-143141"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/rahul-gandhi-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता कर मोदी सरकार कपास उत्पादक किसान और कपड़ा निर्यातक दोनों को गहरा झटका दिया है। राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, 18 प्रतिशत टैरिफ बनाम जीरो प्रतिशत-आइए समझाता हूं, कैसे झूठ बोलने में माहिर प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट इस पर भ्रम फैला रहे हैं और किस तरह से वो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से देश के कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को धोखा दे रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, बांग्लादेश को अमेरिका में गारमेंट्स निर्यात पर शून्य प्रतिशत टैरिफ का फायदा दिया जा रहा है - शर्त बस इतनी है कि वो अमेरिकी कपास आयात करें। भारत के गारमेंट्स पर 18 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा के बाद जब मैंने संसद में बंगलादेश को मिल रही खास रियायत पर सवाल उठाया, तब मोदी सरकार के मंत्री का जवाब आया -'अगर यही फायदा हमें भी चाहिए तो अमेरिका से कपास मंगवानी होगी। आखिर, ये बात तब तक देश से छुपाई क्यों गई। और, ये कैसी नीति है। क्या यह सचमुच में कोई विकल्प है - या फिर'आगे कुआं, पीछे खाई की हालत में फंसाने वाला जाल।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर हम अमेरिकी कपास मंगवाते हैं तो हमारे अपने किसान बर्बाद हो जाएंगे। अगर नहीं मंगवाते, तो हमारा टेक्सटाइल उद्योग पिछड़कर तबाह हो जाएगा और अब बांग्लादेश यह संकेत दे रहा है कि वह भारत से कपास आयात भी कम या बंद कर सकता है।</p>
<p>भारत में कपड़ा उद्योग और कपास की खेती आजीविका की रीढ़ हैं। करोड़ों लोगों की रोजी रोटी इन्हीं पर टिकी है। इन क्षेत्रों पर चोट का मतलब है लाखों परिवारों को बेरोजगारी और आर्थिक संकट की खाई में धकेल देना। उन्होंने कहा, एक दूरदर्शी और राष्ट्रहित में सोचने वाली सरकार ऐसा सौदा करती जो कपास किसानों और कपड़ा एक्सपोर्टर्स-दोनों के हितों की रक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करती, लेकिन इसके ठीक उलट, नरेंद्र सरेंडर मोदी और उनके मंत्रियों ने ऐसा समझौता किया है जो दोनों क्षेत्रों को गहरी चोट पहुंचाने वाला साबित हो सकता है।</p>]]>
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                <pubDate>Sat, 14 Feb 2026 12:23:34 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार समझौता: अमेरिका ने बांग्लादेशी वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाकर 19% किया, द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूती पर दिया जोर</title>
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                        <![CDATA[अमेरिका-बांग्लादेश के बीच नए व्यापार समझौते से आयात शुल्क घटेगा। वस्त्र, कृषि, ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा, जिससे द्विपक्षीय आर्थिक संबंध मजबूत होंगे।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/us-bangladesh-trade-agreement-us-reduced-import-duty-on-bangladeshi-goods/article-142561"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)8.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और बांग्लादेश के बीच एक पारस्परिक व्यापार समझौता हुआ है, जो बांग्लादेश वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाकर 19 प्रतिशत कर देगा और कुछ वस्त्र एवं परिधान उत्पादों पर छूट प्रदान करेगा और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने बताया कि यह समझौता एक ऐसा तंत्र स्थापित करेगा जिसके तहत बांग्लादेश के कुछ कपड़ों और परिधान एवं उत्पादों को शून्य पारस्परिक आयात शुल्क प्रदान किया जाएगा। इसके तहत अमेरिकी मूल की सामग्रियों का उपयोग करके बनाए गए कुछ कपड़ा और परिधान उत्पादों के लिए भी छूट दिया गया है। पात्रा आयात की मात्रा का निर्धारण बांग्लादेश द्वारा उपयोग किये गये कपास और मानव निर्मित फाइबर के साथ-साथ अमेरिकी सामग्री के इस्तेमाल के आधार पर किया जाएगा।</p>
<p>व्हाइट हाउस के बयान में बताया गया है कि बांग्लादेश लगभग 3.5 अरब डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद करेगा, जिसमें गेहूं, सोया, कपास और मक्का शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 15 वर्षों में लगभग 15 अरब डॉलर ऊर्जा उत्पादों की भी खरीददारी बांग्लादेश द्वारा की जाएगी। साथ ही इसमें अमेरिकी विमानों के खरीद का भी उल्लेख किया गया है।</p>
<p>यह समझौता 2013 में हस्ताक्षरित अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार और निवेश सहयोग मंच समझौते (टीआईसीएफए) पर आधारित है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे एक-दूसरे के बाजारों तक अभूतपूर्व पहुंच के रूप में वर्णित किया है। अमेरिका और बांग्लादेश ने कहा कि इस समझौते का उद्देश्य द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को गहरा करना और दोनों देशों के निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करना है।</p>
<p>सौदे के तहत, बांग्लादेश, अमेरिकी औद्योगिक और कृषि सामानों के लिए महत्वपूर्ण तरजीही बाजार पहुंच प्रदान करेगा, जिसमें रसायन, चिकित्सा उपकरण, मशीनरी, मोटर वाहन और पुर्जे, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी उपकरण, ऊर्जा उत्पाद, सोयाबीन, डेयरी उत्पाद, गोमांस, पोल्ट्री, ट्री नट्स और फल शामिल हैं।</p>
<p>दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को प्रभावित करने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें बांग्लादेश, अमेरिकी वाहन सुरक्षा और उत्सर्जन मानकों को स्वीकार करने, चिकित्सा उपकरणों और फार्मास्यूटिकल्स के लिए अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) प्रमाणपत्रों को मान्यता देने और अमेरिकी पुनर्मानिर्मित वस्तुओं और पुर्जों पर प्रतिबंध हटाने के लिए सहमत हुआ है।</p>
<p>बांग्लादेश ने विश्वसनीय सीमाओं के पार डेटा के मुफ्त हस्तांतरण की अनुमति देने और विश्व व्यापार संगठन में इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण पर सीमा शुल्क पर स्थायी रोक का समर्थन करने पर भी सहमति जतायी है। साथ ही कृषि आयात के लिए विज्ञान और जोखिम-आधारित मानकों को अपनाने, बीमा क्षेत्र में बाधाओं को कम करने, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने और अच्छी नियामक प्रथाओं को लागू करने की भी प्रतिबद्धता जताई है।</p>
<p>इसके अतिरिक्त बांग्लादेश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त श्रम अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लिया है, जिसमें जबरन श्रम से उत्पादित वस्तुओं के आयात को प्रतिबंधित करना और श्रम कानूनों में संशोधन करके संघों की स्वतंत्रता और सामूहिक सौदेबाजी की पूरी तरह से रक्षा करना एवं प्रवर्तन को मजबूत करना शामिल है। समझौते में पर्यावरण संरक्षण, भ्रष्टाचार विरोधी उपाय, बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा और सब्सिडी तथा राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों के कारण होने वाली विकृतियों को दूर करने की प्रतिबद्धताएं भी शामिल हैं। बांग्लादेश भौगोलिक संकेतों पर महत्वपूर्ण प्रावधानों पर सहमत हुआ है, विशेष रूप से पनीर और मांस उत्पादों के लिए।</p>
<p>दोनों देशों ने यह भी कहा कि वे आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन बढ़ाने, शुल्क चोरी का मुकाबला करने, निर्यात नियंत्रण पर सहयोग करने और निवेश पर जानकारी साझा करने के लिए आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि अमेरिका के निर्यात-आयात बैंक और अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास वित्त निगम सहित अमेरिकी संस्थान पात्रता और कानून के अधीन बांग्लादेश में महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश का समर्थन करने पर विचार करेंगे।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 11:49:57 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>बजट 2026-27 : खाद, हथकरघा और हस्तशिल्पों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक एकीकृत कार्यक्रम की घोषणा, आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना शुरू </title>
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                        <![CDATA[बजट 2026-27 में सरकार ने वस्त्र उद्योग हेतु एकीकृत कार्यक्रम, महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल, समर्थ 2.0 मिशन, राष्ट्रीय फाइबर योजना और टेक्स ईको पहल की घोषणा की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/budget-2026-launch-of-comprehensive-integrated-program-for-textile-industries/article-141560"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/500-px)-(8).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार देश में वस्त्र उद्योगों के लिए एक व्यापक एकीकृत कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को यहां लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते यह यह बात कही। </p>
<p>उन्होंने कहा, इस कार्यक्रम के तहत खाद, हथकरघा और हस्तशिल्पों को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल का शुभारंभ किया जायेगा। इसके अलावा वस्त्र कौशल इको-सिस्टम को बढ़ावा और आधुनिकता के लिए समर्थ 2.0 मिशन तथा प्राकृतिक, मानव निर्मित और नयी पीढी के फाइबर में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना शुरू की जायेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि परम्परागत कपड़ा कलस्टर को आधुनिक बनाने के लिए वस्त्र उद्योगों के लिए विस्तार और रोजगार योजना के साथ साथ जारी योजनाओं के एकीकरण और उन्हें बढावा देने के लिए राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम भी शुरू किया जायेगा। साथ ही विश्व स्तरीय और टिकाऊ वस्त्रों  के लिए 'टेक्स इको' पहल  भी शुरू की जायेगी। उन्होंने कहा कि देश में टेक्सटाइल पार्कों को बढावा देने के लिए इनकी चुनौती के स्तर पर स्थापना दी जायेगी। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 14:39:33 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                            </item>
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                <title>बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग खतरे में</title>
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                        <![CDATA[भारत के खिलाफ लगातार जहर उगल रही बांग्लादेश की यूनुस सरकार को लगता था कि पाकिस्तान का साथ पाकर वह सफल हो जाएगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/bangladeshs-textile-industry-is-in-danger/article-141040"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)77.png" alt=""></a><br /><p>भारत के खिलाफ लगातार जहर उगल रही बांग्लादेश की यूनुस सरकार को लगता था कि पाकिस्तान का साथ पाकर वह सफल हो जाएगा। लेकिन, भारत ने ऐसा दांव खेला कि बिना कोई कदम उठाए या एक भी शब्द बोले बांग्लादेश की रीढ़ ही तोड़ दी। बांग्लादेश जिस उद्योग के दम पर सांसें ले रहा था, वही उद्योग अब अपनी आखिरी सांस गिन रहा है। इसकी वजह प्रत्यक्ष न सही, लेकिन परोक्ष रूप से भारत को ही बताया जा रहा है। एक्सपर्ट का कहना है कि भारत के सस्ते धागों के जाल में उलझकर बांग्लादेश कब बर्बादी के मुहाने पर खड़ा हो गया, उसे आभास भी नहीं हुआ। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले कपड़ा उद्योग पर अब गंभीर संकट के बादल छाने लगे हैं।</p>
<p><strong>कारखानों पर ताले की नौबत : </strong></p>
<p>हालात इतने बदतर हो गए हैं कि अगले महीने कई कारखानों पर ताला लगाने की नौबत आ गई है। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन ने घोषणा की कि अगर जनवरी अंत तक यार्न के ड्यूटी फ्री आयात की सुविधा बहाल न हुई तो 1 फरवरी से देश की सभी स्पिनिंग यूनिटें उत्पादन बंद कर देंगी। राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड ने वाणिज्य मंत्रालय की सिफारिश पर बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम के तहत यह सुविधा निलंबित कर दी। सरकार का कहना है कि सस्ते आयात से घरेलू मिलें तबाह हो रही हैं। गारमेंट निर्यातक भारत से कॉटन यार्न 78 प्रतिशतद् और चीन से पॉलिएस्टर मंगा रहे हैं, जो स्थानीय उत्पाद से सस्ता और बेहतर है। 2025 में 70 करोड़ किलो यार्न आयात पर 2 अरब डॉलर खर्च हुए। पिछले 3 से 4 माह के गैस संकट ने हालात बिगाड़ दिए।</p>
<p><strong>उत्पादन क्षमता गिर गई :</strong></p>
<p>अनियमित आपूर्ति, ऊंची कीमतों से उत्पादन क्षमता 50 प्रतिशत गिर गई। उद्योग को 2 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, वहीं मिल मालिकों को सब्सिडी और आर्थिक पैकेज का इंतजार है। चेयरमैन सलीम रहमान ने कहा, बाजार डंप हो गया। 12,000 करोड़ टका का स्टॉक पड़ा है। 50 से ज्यादा मिलें बंद, हजारों बेरोजगार। एसोसिएशन की मांगें स्पष्ट हैं कि 10 से 30 काउंट कॉटन यार्न पर ड्यूटी फ्री आयात समाप्त, गैस पर सब्सिडी व नियमित आपूर्ति में छूट, बैंक ऋणों पर ब्याज राहत, सरकार से संवाद। इस कदम से 10 लाख नौकरियां खतरे में हैं। अंतरिम सरकार को चेतावनी दी गई। मिलर्स और बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के बीच विवाद तेज। मिलर्स दावा करते हैं कि घरेलू क्षमता मांग पूरी कर सकती है।</p>
<p><strong>बांग्लादेशी गारमेंट्स प्रभावित :</strong></p>
<p>भारत के यार्न निर्यातक ने कहा,बॉन्डेड सुविधा हटने से बांग्लादेशी गारमेंट्स प्रभावित होंगे। गौरतलब है कि कपड़ा क्षेत्र बांग्लादेश अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, 80 प्रतिशत निर्यात और 40 लाख रोजगार इसी क्षेत्र से लोगों को मिलता है। गैस संकट, आयात निर्भरता और नीतिगत अनिश्चितता ने इसे कमजोर किया। अगर 1 फरवरी को मिलों पर ताले लगे तो आर्थिक मंदी और सामाजिक अशांति बढ़ सकती है। ज्ञात हो कि बांग्लादेश का सबसे बड़ा उद्योग कपड़ा है, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। जारा और एचएनएम जैसे ब्रांड भी बांग्लादेश से बनकर जाते हैं, तब दुनिया पहनती है। बांग्लादेश अकेले हर साल करीब 47 अरब डॉलर के रेडीमेड कपड़े दुनिया को निर्यात करता है। इन कपड़ों को बनाने के लिए बांग्लादेश यार्न यानी धागे का आयात भारत से करता है।</p>
<p><strong>कारोबार डूबने की कगार पर :</strong></p>
<p>भारत से सस्ते धागे खरीदो, उससे कपड़े बनाओ और दुनिया को बेच दो। लेकिन, बांग्लादेश को इन सस्ते धागों की ऐसी लत पड़ी कि आज उसी धागे में उलझकर उसका अरबों डॉलर का कारोबार डूबने की कगार पर पहुंच गया है। आलम ये है कि उसके मिल मालिकों ने सरकार से साफ कहा है कि अगर कुछ नहीं किया तो 1 फरवरी से सारी कपड़ा मिलें बंद हो जाएंगी। बांग्लादेश में धागे का लोकल उत्पादन उतना नहीं होता, जितना उसके कपड़ा उद्योग को जरूरत है। लिहाजा वह भारत और चीन से सस्ते धागे का आयात करता है। भारत का धागा अच्छी क्वालिटी और सस्ता होने के नाते ज्यादा खरीदता है। उसे प्रति किलोग्राम 3 से 5 फीसदी सस्ता भी पड़ता है। भारत से सस्ते धागे का आयात इतना ज्यादा हुआ कि बांग्लादेश की लोकल मिलों के पास करीब 10 हजार करोड़ रुपये का स्टॉक जमा हो गया, जिसे खरीदने वाला कोई नहीं है।</p>
<p><strong>परिणाम गंभीर होंगे :</strong></p>
<p>एक तरफ तो बांग्लादेश के कपड़ा निर्यातक सस्ते धागे के आयात के पक्ष में हैं, क्योंकि लोकल धागा महंगा और क्वालिटी में भी अच्छा नहीं होता। अगर आयात बंद हुआ तो लागत बढ़ेगी और उत्पादन में देरी आएगी, जिससे ऑर्डर्स में कमी आ सकती है। अगर सरकार के कदम से आयात रुकता है तो उत्पादकों को ऊंची कीमतों पर लोकल धागा खरीदना पड़ेगा। गौरतलब है कि बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग पर भारत की हालिया कार्रवाइयों,जैसे लैंड बॉर्डर से आयात में सख्ती और व्यापार में बाधाओं का गहरा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। इससे बांग्लादेशी परिधान की विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो सकती है, उत्पादन लागत बढ़ सकती है, और कच्चा माल महंगा होने से वहां की स्पिनिंग मिलें बंद होने की कगार पर आ सकती हैं। यदि वहां की सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो इसके आर्थिक और सामाजिक परिणाम गंभीर हो सकते हैं।</p>
<p><strong>-अशोक भाटिया</strong><br /><strong>यह लेखक के अपने विचार हैं।</strong></p>]]>
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                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/bangladeshs-textile-industry-is-in-danger/article-141040</link>
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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 12:34:03 +0530</pubDate>
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