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                <title>Child Protection - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Child Protection RSS Feed</description>
                
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                <title>NCPCR के विशेष अभियान में 3,800 से ज्यादा बच्चे बाल मजदूरी से मुक्त, 575 से अधिक एफआईआर दर्ज; पुनर्वास पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने 12 जून से 31 अगस्त तक चलाए गए विशेष 'अखिल भारतीय बचाव और पुनर्वास' अभियान के तहत 3,800 से अधिक बच्चों को बाल श्रम और शोषण से मुक्त कराया। राज्य प्रशासनों और पुलिस के समन्वय से चलाए गए इस अभियान में 575 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गईं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/in-the-special-campaign-of-ncpcr-more-than-3800-children/article-164709"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/ncpcr.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने 12 जून 2026 को एक विशेष 'अखिल भारतीय बचाव और पुनर्वास' अभियान शुरू किया, जो 31 अगस्त तक चला। आधिकारिक जानकारी के अनुसार केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत एक वैधानिक संस्था, एनसीपीसीआर ने बाल मज़दूरी में लगे बच्चों और तस्करी एवं शोषण के शिकार होने वाले बच्चों की पहचान, बचाव और पुनर्वास के काम को तेज करने के लिए संबंधित राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, जिलाधिकारियों, श्रम विभागों, पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम किया।</p>
<p>एनसीपीसीआर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर बाल मजदूरी और तस्करी वाले स्थानों पर गहन और लक्षित बचाव अभियान चलाने का अनुरोध किया। राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से बचाव अभियान, बचाये गये बच्चों, दर्ज प्राथमिकी, पुनर्वास, पुनर्स्थापना, मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने, मुआवजे और अन्य जानकारी लेने के उपायों आदि के बारे में नियमित डेटा उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया गया।</p>
<p>कार्यान्वयन की निगरानी करने और क्षेत्रीय स्तर की समस्याओं का समाधान करने के लिए, एनसीपीसीआर ने जिला प्रशासनों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य बचाव अभियानों की समीक्षा करना, परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करना, कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) का समय पर जमा होना सुनिश्चित करना तथा संबंधित विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करना था।</p>
<p>एनसीपीसीआर ने सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों के जरिए जागरूकता और जनसंपर्क अभियान भी चलाया, जिसके तहत इस विशेष अभियान, बाल श्रम की रिपोर्टिंग करने तथा बचाव के बाद बच्चों के पुनर्वास एवं उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के महत्व के बारे में जानकारी प्रसारित की गयी। इस अभियान की निरंतर और सक्रिय निगरानी से, एनसीपीसीआर ने राज्य अधिकारियों के सहयोग से 3,800 से अधिक बच्चों को सफलतापूर्वक मुक्त कराया। इसके अलावा, अभियान के दौरान 575 से अधिक प्राथमिकियां दर्ज की गयीं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 16:39:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मानव तस्करी का प्रयास विफल: किशोरी सुरक्षित, एक संदिग्ध गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[भारत-नेपाल सीमा रुपईडीहा पर एसएसबी ने मानव तस्करी प्रयास विफल किया। 15 वर्षीय नेपाली किशोरी सुरक्षित, युवक हिरासत में लेकर नेपाल पुलिस को सौंपा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/human-trafficking-attempt-foiled-on-india-nepal-international-border-teenage-girl/article-141837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(18)1.png" alt=""></a><br /><p>बहराइच। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिला स्थित भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रुपईडीहा चेक पोस्ट पर सुरक्षा एजेंसियों ने मानव तस्करी के एक प्रयास को विफल कर दिया। एसएसबी की बीआईटी टीम और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के संयुक्त प्रयास से 15 वर्षीय नेपाली नाबालिग किशोरी को सुरक्षित बरामद किया गया, जबकि उसके साथ मौजूद एक युवक को हिरासत में लेकर नेपाल पुलिस को सौंप दिया गया।</p>
<p>जांच के दौरान किशोरी ने अपनी पहचान नेपाल के जुमला जिले निवासी सीरू दमाई (15) के रूप में बताई। उसके साथ मौजूद युवक साहिल कुरेशी (19) ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह उसे विवाह और रोजगार का झांसा देकर भारत ला रहा था। नाबालिग होने के कारण मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की गई।  </p>
<p>किशोरी की मां से संपर्क कर सूचना दी गई। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे एनजीओ के सहयोग से नेपाल स्थित संरक्षण गृह भेजा गया, जबकि युवक को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए नेपाल पुलिस के हवाले कर दिया गया। अभियान में एसएसबी, महिला पुलिस बल और सामाजिक संस्थाओं की अहम भूमिका रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 18:46:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>श्रीलंका सरकार का बड़ा फैसला, नाबालिगों के सोशल मीडिया उपयोग पर लग सकता है बैन</title>
                                    <description><![CDATA[ऑनलाइन कंटेंट से बढ़ती चिंताओं के बीच श्रीलंका सरकार नाबालिगों की सोशल मीडिया पहुंच सीमित करने पर विचार कर रही है। अंतिम निर्णय नीति तय होने के बाद होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-sri-lankan-government/article-141069"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>कोलंबो। श्रीलंका की सरकार ऑनलाइन कंटेंट के हानिकारक प्रभावों से जुड़ी चिंताओं में वृद्धि के बीच सोशल मीडिया तक नाबालिग बच्चों की पहुंच सीमित करने पर विचार कर रही है। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी। डिजिटल अर्थव्यवस्था के उप मंत्री एरंगा वीरारत्ने ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी दुर्घटनाओं में वृद्धि के बाद विद्यार्थियों और नाबालिगों के सोशल मीडिया के उपयोग पर संभावित सीमाओं का पता लगाने के लिए चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध लगाने का निर्णय जनसंचार मंत्रालय या शिक्षा मंत्रालय के तहत आएगा। एक बार नीति को अंतिम रूप देने के बाद, अधिकारी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे। </p>
<p>डिजिटल अर्थव्यवस्था के उप मंत्री एरंगा वीरारत्ने ने कहा कि सरकार अभी तक किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंची है, लेकिन देश को सोशल मीडिया कंटेंट से नाबालिग बच्चों के दिमाग को होने वाले नुकसान को संज्ञान में लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियां नियंत्रण लागू करने के लिए स्थानीय दूरसंचार प्रदाताओं के साथ काम कर सकती हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था के उप मंत्री एरंगा वीरारत्ने ने कहा कि इसी तरह के उपाय पहले ही कई देशों में अपनाये जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यक तकनीकी क्षमता पहले से मौजूद है और इसे श्रीलंका में लागू किया जा सकता है। </p>
<p>मंत्री ने कहा कि किसी भी प्रतिबंध के लिए लागू करने से पहले एक औपचारिक सरकारी नीति और एक व्यापक योजना की आवश्यकता होगी। विश्व स्तर पर सरकारें साइबरबुलिंग, नाबालिगों के हानिकारक कंटेंट के संपर्क में आने और बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य के बारे में ङ्क्षचताओं के कारण बच्चों की सोशल मीडिया मौजूदगी पर निगरानी बढ़ा रही हैं। इसका एक प्रमुख उदाहरण ऑस्ट्रेलिया है, जहां दिसंबर 2025 में नाबालिगों के लिए दुनिया का पहला सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू हुआ। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 16:27:56 +0530</pubDate>
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