<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/space-science/tag-69680" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Space Science - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/69680/rss</link>
                <description>Space Science RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>होली पर लगने जा रहा साल का पहला चंद्र ग्रहण : भारत के अलावा इन देशों में दिखेगा असर, पढ़े क्या होता है ग्रहण</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[आगामी 3 मार्च को वर्ष का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे 'रेड मून' के रूप में देखा जाएगा। उज्जैन की जीवाजी वेधशाला के अनुसार, यह ग्रहण 3 घंटे 28 मिनट तक रहेगा। भारत के पूर्वी हिस्सों में यह दृश्य होगा, हालांकि उज्जैन में सूर्यास्त और चंद्रोदय के समय के कारण इसे स्पष्ट देखना चुनौतीपूर्ण होगा।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-first-lunar-eclipse-of-the-year-is-going-to/article-145062"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/chandra-grahan--2026.png" alt=""></a><br /><p>उज्जैन। खगोलीय घटना के तहत 3 मार्च को होने वाला इस वर्ष का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। उज्जैन स्थित वेधशाला ने इसको लेकर विज्ञाप्ति जारी की है। जिसमें चन्द्र ग्रहण के बारे में जानकारी दी गई है। उज्जैन स्थित शासकीय जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रकाश गुप्त ने जारी विज्ञप्ति में बताया कि चंद्र ग्रहण की स्थिति में पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के मध्य सीधी रेखा में आ जाती है। पूर्ण चंद्र ग्रहण की अवस्था में पृथ्वी की छाया से चंद्रमा का पूरा भाग ढक जाता है, जिससे सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता और पूर्ण ग्रहण दिखाई देता है। इस दौरान चंद्रमा ताम्रवर्ण का प्रतीत होता है, जिसे सामान्यत: रेड मून कहा जाता है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि 3 मार्च पूर्णिमा के दिन पूर्ण चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 19 मिनट 7 सेकंड पर प्रारंभ होगा। ग्रहण का मध्यकाल शाम 5 बजकर 03 मिनट 7 सेकंड पर रहेगा तथा मोक्ष सायंकाल 6 बजकर 47 मिनट 6 सेकंड पर होगा। इस प्रकार ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 28 मिनट रहेगी। ग्रहण का प्रतिशत 155.5 होने के कारण चंद्रमा पूर्ण ग्रहण की स्थिति में रहेगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि यह ग्रहण भारत के पूर्वी भाग, जहां सूर्यास्त शीघ्र होता है, वहां देखा जा सकेगा। इसके अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर क्षेत्र तथा अमेरिका में भी यह नजर आएगा। डॉ. गुप्त ने बताया कि उज्जैन में ग्रहण के प्रारंभ के समय धूप रहेगी और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 31 मिनट पर होगा। सैद्धांतिक रूप से यह ग्रहण भारत में दृश्य रहेगा, लेकिन उज्जैन में सूर्यास्त के समय पूर्व दिशा में पूर्णिमा का चंद्रमा आंशिक ग्रहण लगी हुई स्थिति में उदित होगा। ग्रहण की समाप्ति का समय 6 बजकर 45 मिनट 6 सेकंड बताया गया है।</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट किया कि उज्जैन में सूर्यास्त के बाद केवल लगभग 17 मिनट तक ही ग्रहण की स्थिति रहेगी। जब तक चंद्रमा क्षितिज से पर्याप्त ऊपर आकर स्पष्ट रूप से दिखाई देने की स्थिति में पहुंचेगा, तब तक ग्रहण समाप्त हो चुका होगा। इस कारण उज्जैन में इसे नग्न आंखों से देख पाना संभव नहीं होगा। उन्होंने यह भी बताया कि टेलिस्कोप से ग्रहण देखने के लिए चंद्रमा का पर्याप्त ऊंचाई पर आना आवश्यक है, ङ्क्षकतु उसके पहले ही ग्रहण समाप्त हो जाएगा। इसलिए टेलिस्कोप से भी ग्रहण का अवलोकन संभव नहीं हो सकेगा।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-first-lunar-eclipse-of-the-year-is-going-to/article-145062</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-first-lunar-eclipse-of-the-year-is-going-to/article-145062</guid>
                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 18:00:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-03/chandra-grahan--2026.png"                         length="131274"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नासा को मिली बड़ी कामयाबी, जेम्स वेब टेलीस्कोप से डार्क मैटर का अब तक का सबसे विस्तृत नक्शा तैयार</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[जेम्स वेब टेलीस्कोप की मदद से वैज्ञानिकों ने डार्क मैटर का अब तक का सबसे विस्तृत नक्शा बनाया। अध्ययन से ब्रह्मांडीय संरचना और गुरुत्वीय लेंसिंग की नई समझ मिली।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/nasa-gets-a-big-success-the-most-detailed-map-of/article-141102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(12)3.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। वैज्ञानिकों ने नासा के जेम्स वेब टेलिस्कोप की मदद से अंतरिक्ष में डार्क मैटर का अब तक का सबसे विस्तृत नक्शा तैयार किया है। यह शोध ब्रिटेन की डरहम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की टीम ने किया है। डार्क मैटर को ब्रह्मांड की सबसे बड़ी पहेलियों में से एक माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्रह्मांड में मौजूद कुल पदार्थ का बड़ा हिस्सा डार्क मैटर ही है, लेकिन यह न तो देखा जा सकता है और न ही यह रोशनी को उत्सर्जित, परावर्तित या अवशोषित करता है। यही वजह है कि सामान्य दूरबीनों से इसे सीधे देखना संभव नहीं है।</p>
<p>डार्क मैटर का द्रव्यमान (मास) जरूर होता है और इसी कारण इसमें गुरुत्वाकर्षण शक्ति होती है। वैज्ञानिकों ने इसी गुण का उपयोग कर इसका नक्शा तैयार किया। डार्क मैटर की गुरुत्वाकर्षण शक्ति दूर स्थित आकाशगंगाओं से आने वाली रोशनी को मोड़ देती है, जिससे वे आकाशगंगाएं टेढ़ी-मेढ़ी या विकृत दिखायी देती हैं। इस प्रक्रिया को गुरुत्वीय लेंसिंग कहा जाता है।</p>
<p>लगभग 10 लाख दूरस्थ आकाशगंगाओं की आकृति और रोशनी में आए इस बदलाव को मापकर वैज्ञानिक यह पता लगाने में सफल रहे कि डार्क मैटर कहां है और उसकी मात्रा कितनी हो सकती है। डरहम विश्वविद्यालय के कम्प्यूटेशनल कॉस्मोलॉजी प्रोफेसर रिचर्ड मेसी ने कहा कि कई दूर की आकाशगंगाएं असामान्य आकार में दिखाई देती हैं और यह इस बात का संकेत है कि उनके सामने डार्क मैटर मौजूद है। उन्होंने कहा कि इसी तरीके से जेम्स वेब टेलीस्कोप डार्क मैटर को देख पाता है, भले ही वह स्वयं अदृश्य हो।</p>
<p>इस नए नक्शे से यह भी पुष्टि हुई है कि डार्क मैटर बेतरतीब ढंग से फैला नहीं है, बल्कि वह उन संरचनाओं से गहराई से जुड़ा है, जिन्हें हम ब्रह्मांड में देख सकते हैं। जिस क्षेत्र का अध्ययन किया गया है, वह सेक्सटैंस तारामंडल में स्थित है। इस हिस्से का अध्ययन पहले भी किया गया था, लेकिन इतनी बारीकी से कभी नहीं। यह क्षेत्र पृथ्वी से दिखाई देने वाले पूर्ण चंद्रमा की चौड़ाई से लगभग ढाई गुना बड़ा है।</p>
<p>डरहम विश्वविद्यालय के शोधकर्ता गैविन लिरॉय ने कहा कि पहले के नक्शे ऐसे थे जैसे धुंधले शीशे से डार्क मैटर को देखना, लेकिन जेम्स वेब टेलीस्कोप के उच्च गुणवत्ता वाले आंकड़ों से अब तस्वीर कहीं ज्यादा साफ हो गयी है। जेम्स वेब टेलीस्कोप की मदद से इस बार लगभग 10 लाख आकाशगंगाओं की पहचान की जा सकी, जो हबल टेलीस्कोप के सबसे गहरे सर्वेक्षण से भी दोगुनी है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह नक्शा भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों और ब्रह्मांड को समझने के प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/nasa-gets-a-big-success-the-most-detailed-map-of/article-141102</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/nasa-gets-a-big-success-the-most-detailed-map-of/article-141102</guid>
                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 18:47:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-01/1200-x-600-px%29-%2812%293.png"                         length="447058"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        