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                <title>Iran Relations - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Iran Relations RSS Feed</description>
                
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                <title>महमूद कोमाती का दावा : हिज़्बुल्लाह को मध्य पूर्व संघर्ष के समाधान में रूस की भूमिका की उम्मीद, ट्रंप पर लगाया बाधाएँ और रुकावटें खड़ा करने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[हिज़्बुल्लाह नेता महमूद कोमाती ने मध्य पूर्व संकट में रूस की सक्रिय भूमिका की वकालत की है। उन्होंने कहा कि रूस के ईरान और अरब देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध शांति स्थापित कर सकते हैं, लेकिन अमेरिकी बाधाएं समाधान में रोड़ा अटका रही हैं। कोमाती के अनुसार, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अमेरिका को अंततः रूस के प्रभाव की आवश्यकता होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/mahmoud-komati-claims-hezbollah-expects-russias-role-in-resolving-middle/article-150161"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hizbullah1.png" alt=""></a><br /><p>बेरुत। हिज़्बुल्लाह के राजनीतिक परिषद के उप प्रमुख महमूद कोमाती ने बताया कि हिज़्बुल्लाह को उम्मीद है कि रूस, जिसके ईरान सहित मध्य पूर्वी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध हैं, इस क्षेत्र में संघर्ष के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कोमाती ने कहा, “आज, रूस, ईरान के साथ अपने संबंधों और क्षेत्रीय स्तर पर कई अरब देशों और लेबनान के साथ अपने निष्ठापूर्ण संबंधों के कारण, एक भूमिका निभा सकता है और हम इसकी उम्मीद करते हैं। लेकिन, दुर्भाग्य से, संयुक्त राज्य अमेरिका रूस की किसी भी भूमिका में बाधाएँ और रुकावटें पैदा कर रहा है।</p>
<p>इस बीच, आज अमेरिका और विशेष रूप से (राष्ट्रपति डोनाल्ड) ट्रम्प, ईरान को प्रभावित करने और युद्धविराम हासिल करने के लिए रूस की ओर रुख कर रहे हैं। देर-सवेर, उन्हें रूस की आवश्यकता होगी।” राजनेता के अनुसार, हिज़्बुल्लाह रूस के रुख, क्षेत्र में उसकी नीतियों और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार मानव और राज्य अधिकारों की रक्षा को सकारात्मक रूप से देखता है। उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, दुर्भाग्य से, आज यह क्षेत्र अमेरिकी वर्चस्व, उसकी आक्रामकता, हत्या और विनाश से ग्रस्त है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 13:08:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने की खामेनेई के प्रतिनिधि अब्दुल हकीम मजीद इलाही से मुलाकात, निधन पर जताया शोक</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ईरानी प्रतिनिधि से मुलाकात कर अयातुल्ला खामेनेई की हत्या पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने भारत-ईरान के तीन हजार साल पुराने संबंधों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की चुप्पी को निराशाजनक बताया। मसूद ने जोर दिया कि ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए भारत को संतुलित विदेश नीति अपनानी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-mp-imran-masood-met-khameneis-representative-abdul-hakim-majeed/article-145202"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/imran-masood.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के भारतीय प्रतिनिधि अयातुल्लाह अब्दुल हकीम मजीद इलाही से मंगलवार को मुलाकात कर उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। मुलाकात के बाद मसूद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा "किसी भी देश के प्रमुख का इस तरह जाना अत्यंत दुखद है। भारत और ईरान के संबंध सदियों पुराने हैं। मैं खामेनेई साहब की मृत्यु और जिस प्रकार उनकी हत्या की गई, उस पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करने आया था। मैंने भारत में उनके प्रतिनिधि से मिलकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।"</p>
<p>उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान ईरान के प्रतिनिधि ने कहा कि भारत और ईरान की दोस्ती करीब तीन हजार वर्ष पुरानी है। मसूद ने कहा खामेनेई साहब को भारत के बारे में गहरी जानकारी थी। उनका भारत के प्रति विशेष लगाव था। ईरान का महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू की विचारधारा से विशेष संबंध रहा है, जो मानवता और शांति के सिद्धांतों पर आधारित थी।</p>
<p>इमरान मसूद ने आगे कहा कि यह पूरा घटनाक्रम बेहद चिंताजनक है। ईरान हमारा पारंपरिक मित्र देश रहा है, जिसके साथ हमारे महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंध हैं। हमारे तेल आयात का बड़ा हिस्सा ईरान से आता रहा है। ऐसे में जब भारत संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इज़राइल जैसे देशों के साथ भी संबंध बनाए हुए है, तो उसे तटस्थ और संतुलित रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हमारी विदेश नीति स्पष्ट होनी चाहिए, लेकिन इस मुद्दे पर समर्थन में एक शब्द भी न बोलना आश्चर्यजनक और निराशाजनक है।</p>
<p>गौरतलब है कि, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के लेख के बाद कांग्रेस के लोकसभा सांसद इमरान मसूद ने ईरान के सर्वाेच्च धार्मिक नेता के भारतीय प्रतिनिधि हकीम मजीद इलाही से मुलाकात कर शोक जताया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 17:40:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इराक को चेतावनी, कहा-अल मलिकी बने प्रधानमंत्री तो मदद नहीं करेगा अमेरिका</title>
                                    <description><![CDATA[डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि नूरी अल-मलिकी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने पर अमेरिका इराक की मदद नहीं करेगा। उन्होंने उनके पिछले कार्यकाल को अराजक और असफल बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/president-donald-trump-warns-iraq-that-america-will-not-help/article-141103"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(13)3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर इराक के पूर्व प्रधानमंत्री नूरी कमाल अल-मलिकी सत्ता में वापस आते हैं, तो अमेरिका अब इराक की मदद नहीं करेगा। ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, मुझे पता चला है कि इराक नूरी अल-मलिकी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने की भूल करने जा रहा है। पिछली बार मलिकी सत्ता में थे तो उनका देश गरीबी और अराजकता में डूब गया था। ऐसा दोबारा नहीं होने देना चाहिए।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, अल-मलिकी की नीतियों और विचारधाराओं के कारण, अगर वह चुने जाते हैं, तो अमेरिका अब इराक की मदद नहीं करेगा। हमारी मदद के बिना इराक के सफल, समृद्ध और स्वतंत्र होने की संभावनाएं शून्य प्रतिशत हैं। उल्लेखनीय है कि 2006 से 2014 तक प्रधानमंत्री के रूप में काम करने वाले अल-मलिकी को शनिवार को इराक की संसद में मुख्य शिया गुट ने सरकार बनाने के लिये मनोनीत किया था। अगले चरण में इराक के राष्ट्रपति अल-मलिकी को प्रधानमंत्री पद के लिये मनोनीत करेंगे, हालांकि देश में अभी कोई राष्ट्रपति नहीं है। </p>
<p>इराक की संसद मंगलवार को एक राष्ट्रपति चुनने वाली थी, लेकिन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पर सहमति न बनने के कारण यह प्रक्रिया स्थगित हो गयी। इराक में राष्ट्रपति का पद महज एक औपचारिकता होता है, इसलिए अल-मलिकी का चुना जाना लगभग तय है। इराक की संसद का शिया गुट पड़ोसी ईरान का करीबी है। ऐसे में अल-मलिकी के सत्ता में आने से इराक-ईरान संबंध सुधरने की संभावना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 17:55:30 +0530</pubDate>
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