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                <title>girdawari - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>गिरदावरी में गड़बड़ी, मार झेल रहे किसान</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी केन्द्रों पर बेचने में हो रही परेशानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/error-in-girdawari--farmers-are-suffering/article-111530"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में मेहनतकश किसानों की समस्याएं थमने का नाम नहीं ले रही है। धरतीपुत्रों ने कड़ी मेहनत कर खेतों में गेहूं फसल की बुवाई थी, लेकिन जब फसल कटाई के बाद बेचने का समय आया तो गिरदावरी में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ रही है। हालात यह है कि पटवारियों ने किसानों की गिरदावरी में गेहूं की जगह सरसों की फसल दर्ज कर दी है। इससे किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि खेत में जिस फसल की बुवाई की है, उसे गिरदावरी में बदल दिया है। इससे किसानों को समर्थन मूल्य पर उपज बेचने में परेशानी हो रही है। सरकारी केन्द्रों पर उपज बेचने के लिए गिरदावरी की जरूरत होती है। ऐसे में अब किसानों को इस समस्या के समाधान के लिए विभागों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। </p>
<p><strong>खरीद केन्द्रों पर पहुंचे तो सामने आया सच</strong><br />किसान रामजीलाल व हर्षवर्धन ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में गेहूं की बुवाई की थी। इस दौरान पटवारी की ओर से ऑनलाइन गिरदावरी की गई थी। जिसमें गेहूं की जगह सरसों की फसल दर्शा दी गई। जब वह समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए सरकारी केन्द्रों पर पहुंचे तो ऑनलाइन गिरदावरी में गलत फसल दर्ज होने की जानकारी मिली। गिरदावरी के बिना कोई भी किसान सरकारी केन्द्रों पर अपनी फसल नहीं बेच सकता है। ऐसे में सरकारी केन्द्रों पर मौजूद कर्मचािरयों ने उनकी गेहूं फसल की सरकारी कांंटे तुलाई नहीं की। जिससे उनकी निराश होकर लौटना पड़ा। इस सम्बंध में अब पटवार कार्यालय पर चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। </p>
<p><strong>सरकारी केन्द्रों पर गेहूं बेचने की होड़</strong><br />कोटा जिले सहित हाड़ौती में इस साल गेहूं का बम्पर उत्पादन हुआ है। वहीं सरकार ने भी किसानों को राहत देने के लिए इस बार समर्थन मूल्य और बोनस को बढ़ा दिया है। इस कारण किसानों में सरकारी केन्द्रों पर गेहूं बेचने की होड़ मची हुई है। जिले के विभिन्न स्थानों पर स्थित सरकारी केन्द्रों पर इन दिनों में काफी संख्या में किसान गिरदावरी लेकर गेहूं बेचने के लिए पहुंच रहे हैं। इसी दौरान कई किसानों की गिरदावरी में फसलों के सॅम्बंध में गड़बड़ी के मामले सामने आ रहे हैं। खरीद केन्द्र के कर्मचारी उन्हें संशोधित गिरदावरी लाने के बाद ही बाद ही फसलों की तुलाई करवाने के बारे में समझाइश कर  भेज रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ऑनलाइन गिरदावरी में गलत फसल दर्ज होने के कारण समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऑनलाइन गिरदावरी में संशोधन के लिए चक्कर लगाना पड़ता है।<br /><strong>- नेमीचंद नागर, किसान </strong></p>
<p>खरीद केन्द्रों पर गिरदावरी में गेहूं की जगह सरसों की फसल दर्ज करने के कई मामले हमारे सामने आ रहे है। सही गिरदावरी लाने के बाद किसानों की फसल की तुलाई करवाई जा रही है। <br /><strong>- विष्णुदत्त शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी, राजफैड</strong></p>
<p>अगर किसी किसान की गिरदावरी में गलत फसल दर्ज हो गई तो वह तहसील परिसर में आकर संशोधन करवा सकता है। गिरदावरी में गेहूं की जगह सरसों की गलत फसल दर्ज होने को सुधारा जाएगा।<br /><strong>- रामनिवास, नायब तहसीलदार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Apr 2025 17:07:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ना नेटवर्क ना तकनीक का ज्ञान, किसान कैसे करें गिरदावरी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के अधिकांश जिलों में एप से गिरदावरी का आंकड़ा काफी कम हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-network--no-knowledge-of-technology--how-can-farmers-do-girdawari/article-59769"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/na-network,-na-takneek-ka-gyan,-kisaan-kese-kre-girdavari...kota-news-17-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। तकनीकी संसाधनों के उपलब्ध होने से ज्यादा जरूरी यह है कि तकनीक का इस्तेमाल करने वालों को इसके लिए दक्ष किया जाए। फसल बीमा योजना में किसान गिरदावरी के वास्ते सरकार ने जो एप लॉन्च किया है उसके नतीजों को देखते हुए यह जरूरत ज्यादा महसूस होती दिख रही है। बीते एक माह में कोटा जिले में केवल 25 प्रतिशत किसान ही इस एप के माध्यम से आॅनलाइन गिरदावरी कर पाए हैं। जिले में किसानों की संख्या के हिसाब से यह आंकड़ा काफी कम है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि एप के प्रति किसान अभी उतनी दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं, जितनी की उम्मीद की जा रही थी। इसके पीछे प्रमुख कारण किसानों का तकनीकी रूप से दक्ष न होना है।</p>
<p><strong>किसानों को यह आ रही दिक्कत</strong><br />यह सही है कि गिरदावरी के आधार पर ही किसान को फसलों के खराबे पर मुआवजा मिलता है। इस काम के लिए ज्यादातर किसानों को पटवारियों पर निर्भर रहना पड़ता है। इधर, पटवारी भी काम के बोझ के कारण समय पर गिरदावरी नहीं कर पाते। इस व्यवस्था को सरल बनाने तथा प्रत्येक किसान को अपनी फसल की स्थिति की स्वयं जांच करने में सक्षम बनाने के लिए ही यह एप लॉन्च की गई है। इसकी प्रक्रिया को पूरा करने में कई तरह दिक्कत आ रही है। मसलन जिले के कई गांवों में मोबाइल नेटवर्क नहीं आता है। जिससे एप का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। वहीं कई किसानों के पास एंडायड फोन नहीं है तो कई किसान इस प्रक्रिया को पूरा ही नहीं कर पा रहे हैं। जिससे गिरदावरी एप से गिरदावरी का आंकड़ा कम है।</p>
<p><strong>प्रमुख जिले व गिरदावरी का प्रतिशत (एप)</strong><br /><strong>जिला       कुल खसरे       पटवारी-गिरदावर     गिरदावरी%</strong><br />कोटा                807116       458369    25.79<br />गंगानगर              4664745      120461     2.58<br />हनुमानगढ़        2985882      297445    9.96<br />झुंझुनूं              650525       72661                11.17<br />बीकानेर          4262046       66881                15.69<br />अलवर             1754892       388540    22.13<br />जयपुर           1976449       444472    22.49<br />टोंक             968866       233632    24.11<br />करौली             778759       20997                 26.96<br />भीलवाड़ा        2124520       589850    27.76</p>
<p><strong>तकनीक के व्यापक प्रचार-प्रसार की जरूरत</strong><br />कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक के व्यापक प्रचार-प्रसार की जरूरत है। किसान तकनीकी रूप से जितने ज्यादा दक्ष होंगे, उनको एप का उतना ही ज्यादा फायदा मिलेगा। किसान खुद गिरदावरी करेगा तो सही रिपोर्ट फीड करेगा। इसमें फजीर्वाड़े की आशंका इसलिए भी नहीं है क्योंकि सत्यापन भी पटवारी के माध्यम से आॅनलाइन ही होना है। समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद व फसल बीमा क्लेम में गिरदावरी की जरूरत होती है। देखा जाता है कि इसमें पटवारी सही एरिया दर्ज नहीं करते। इसका नुकसान किसानों को होता आया है। तकनीक का व्यापक इस्तेमाल होने लगा तो पटवारियों के कार्य बहिष्कार आंदोलन के दौरान भी गिरदावरी करना आसान हो जाएगा। किसान अपनी रिपोर्ट खुद बनाएंगे तो मुआवजा भी वाजिब मिल सकेगा। </p>
<p><strong>25 प्रतिशत तक पहुंचा आंकड़ा</strong><br />आंकड़ों के मुताबिक अब तक कोटा जिले में केवल 25 प्रतिशत किसानों ने इस एप के जरिए गिरदावरी कराई है। इसी तरह की स्थिति प्रदेश के अन्य जिलों की भी है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में एप से गिरदावरी का आंकड़ा काफी कम हैं। वहां भी तकनीकी ज्ञान का अभाव सामने आया है। उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा किसान गिरदावरी एप लॉन्च करने के बाद अब किसान अपने खेत का खसरा नंबर डाल कर स्वयं फसल की गिरदावरी कर सकेंगे। आगामी गिरदावरी किसान इसी एप्लीकेशन से स्वयं के स्तर पर कर सकेंगे। सरकारी स्तर पर गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर ही अनाज उत्पादन का आंकलन व खाद्य नीति तय की जाती है। </p>
<p>हमारे गांव में मोबाइल का नेटवर्क पूरी तरह से नहीं आता है। मकानों के छतों पर जाकर मोबाइल से बात करनी पड़ती है। ऐसे में यहां पर किसान गिरदावरी एप का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। वहीं अधिकांश किसानों को एप का संचालन करना भी नहीं आता है।<br /><strong>- भूरी सिंह, किसान आमली गांव</strong></p>
<p>किसानों की मदद के लिए ही यह एप बनाया गया है। ऐसे में किसान तकनीकी रूप से जितने ज्यादा दक्ष होंगे, उनको एप का उतना ही ज्यादा फायदा मिलेगा। किसान खुद गिरदावरी करेगा तो सही रिपोर्ट फीड करेगा। इसलिए किसानों को स्वयं ही अपने स्तर पर दक्ष होना होगा।<br /><strong>- गोविन्द गुप्ता, कृषि पर्यवेक्षक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Oct 2023 20:36:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>CM गहलोत ने ओलावृष्टि से फसल खराबे के आकलन के लिए विशेष गिरदावरी के दिए निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[ 8 मार्च को हुई ओलावृष्टि एवं बेमौसम वर्षा से फसल खराबे के संबंध में राज्य में कार्यरत 7 बीमा कंपनियों को अभी तक कुल 2546 सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-ashok-gehlot-gave-instructions-for-special-girdawari-for-assessment-of-crop-damage-due-to-hailstorm/article-5870"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/ashok1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक  गहलोत ने 8 मार्च को हुई ओलावृष्टि एवं बेमौसम वर्षा के कारण प्रदेश के विभिन्न जिलों में रबी 2021-22 (संवत् 2078) में बोई गई फसलों को हुए नुकसान की आवश्यकतानुसार विशेष गिरदावरी शीघ्र करवाकर किसानों को राहत देने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><br /> गहलोत ने निर्देश दिए हैं कि फसल खराबे का आकलन कर प्रभावित काश्तकारों को नियमानुसार मुआवजा देेने के लिए विशेष गिरदावरी का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद राजस्व विभाग ने जिला कलेक्टरों को उनके जिले में फसलों में हुए नुकसान की शीघ्र विशेष गिरदावरी करवाकर रिपोर्ट आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग को भिजवाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।</p>
<p><br />कृषि विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 8 मार्च को हुई ओलावृष्टि एवं बेमौसम वर्षा से फसल खराबे के संबंध में राज्य में कार्यरत 7 बीमा कंपनियों को अभी तक कुल 2546 सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इनमें प्रमुख रूप से भीलवाड़ा से 174, बूंदी से 229, चित्तौड़गढ़ 694, झालावाड़ से 238, जोधपुर से 527, कोटा से 249 तथा टोंक से 297 इंटीमेशन प्राप्त हुई हैं। योजना के प्रावधानों के अंतर्गत सर्वेक्षण के दौरान पात्र पाई गई इंटीमेशन को बीमा क्लेम का भुगतान संबंधित बीमा कंपनी द्वारा किया जाएगा।</p>
<p><br />उल्लेखनीय है कि प्रदेश के प्रतापगढ़, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, पाली, भीलवाड़ा एवं जोधपुर जिलों में 8 मार्च को हुई ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान की प्रारम्भिक सूचना मिली थी। इसके आधार पर मुख्यमंत्री ने विशेष गिरदावरी कर जल्द से जल्द रिपोर्ट भिजवाने के निर्देश दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Mar 2022 14:28:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गहलोत ने दिए आठ जिलों में फसल खराब की विशेष गिरदावरी के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेश के चूरू, झुंझुनू, सीकर, जयपुर, चित्तौड़गढ़, करौली, भीलवाड़ा एवं हनुमानगढ़ जिलों में पाला पड़ने की सूचना मिली है। इन जिलों में विशेष गिरदावरी के निर्देश दिए गए हैं जिससे फसल खराबे की स्थिति में नियमानुसार कृषि आदान अनुदान दिया जा सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61c30bc9ec644/article-3442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/ashok_gehlot_630x4003.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेश के चूरू, झुंझुनू, सीकर, जयपुर, चित्तौड़गढ़, करौली, भीलवाड़ा एवं हनुमानगढ़ जिलों में पाला पड़ने की सूचना मिली है। इन जिलों में विशेष गिरदावरी के निर्देश दिए गए हैं जिससे फसल खराबे की स्थिति में नियमानुसार कृषि आदान अनुदान दिया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Dec 2021 17:34:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>किसानों को राहत देने के लिए CM गहलोत के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[बेमौसमी बारिश से फसलों में नुकसान की कराएं विशेष गिरदावरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-cm-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/article-1801"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/whatsapp-image-2021-10-20-at-17.40.30.jpeg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> मुख्यमंत्री  अशोक गहलोत ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बेमौसमी बारिश से फसलों को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने किसानों को राहत देने के लिए तुरंत प्रभाव से विशेष गिरदावरी कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि जिला कलेक्टर फसलों में हुए नुकसान का जल्द आंकलन कराएं, जिसके आधार पर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की कार्यवाही की जा सके।</p>
<p><br />  गहलोत फसलों में नुकसान को लेकर बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में समीक्षा कर रहे थे। संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर तथा कृषि विभाग के अधिकारी भी इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े। मुख्यमंत्री ने बैठक में प्रदेश में डीएपी खाद की उपलब्धता एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को मुआवजे के वितरण की भी समीक्षा की। <br />  गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार दलहनी एवं तिलहनी फसलों में डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) के उपयोग को बढ़ावा देगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एसएसपी की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता है और स्थानीय स्तर पर इस उर्वरक का उत्पादन भी हो रहा है। ऐसे में जिला कृषि अधिकारी किसानों के बीच जाकर उन्हें डीएपी के वैकल्पिक उर्वरक के रूप में इस खाद के उपयोग को अपनाने की सलाह दें। किसानों को बताया जाए कि सिंगल सुपर फॉस्फेट तथा यूरिया का मिश्रण तिलहनी एवं दलहनी फसलों के लिए अन्य उर्वरकों की तरह ही लाभदायक और किफायती है।</p>
<p><br /> कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने बताया कि विभाग की ओर से गोष्ठियों एवं कॉल सेंटर के माध्यम से किसानों को एसएसपी के उपयोग के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। जिला कलेक्टरों को भी डीएपी के समुचित वितरण के संबंध में मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन एवं सहायता राज्यमंत्री राजेन्द्र सिंह यादव एवं कृषि राज्यमंत्री भजन लाल जाटव ने भी विचार व्यक्त किए।</p>
<p><br /> प्रमुख शासन सचिव राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं सहायता आनंद कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर विशेष गिरदावरी के संबंध में विभाग की ओर से जिला कलेक्टरों को शीघ्र ही आदेश जारी किए जा रहे हैं।  बैठक में कृृषि विभाग की ओर से बताया गया कि 16 अक्टूबर से 18 अक्टूबर के दौरान राज्य के कई जिलों में बेमौसमी बरसात से खरीफ की सोयाबीन, धान, मूंग, बाजरा एवं उड़द की फसलों को नुकसान पहुंचने की सूचना प्राप्त हुई है। इसी प्रकार जिन खेतों में रबी की सरसों एवं चने की बुआई हो गई थी, उनमें भी बीज नष्ट होने के कारण किसानों को दुबारा बुआई करनी पड़ेगी। विशेषकर पूर्वी राजस्थान के कोटा, बूंदी, झालावाड़, बारां, करौली, धौलपुर, सवाई माधोपुर, भरतपुर, अलवर, टोंक, दौसा आदि जिलों में फसलों में नुकसान की प्रारंभिक सूचना प्राप्त हुई है।</p>
<p><br /> कृषि आयुक्त डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि इस वर्ष जुलाई में हुई अतिवृष्टि के कारण फसलों को हुए नुकसान की मुख्यमंत्री के निर्देश पर विशेष गिरदावरी कराई गई थी। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर 7 जिलों-बारां, बूंदी, धौलपुर, झालावाड़, कोटा, सवाई माधोपुर एवं टोंक के 3704 गांवों में 6 लाख 79 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में 33 प्रतिशत एवं इससे अधिक खराबे का आकलन किया गया है। जिसके आधार पर करीब 12 लाख 11 हजार प्रभावित किसानों को कृषि आदान-अनुदान वितरित किए जाने के संबंध में कार्यवाही की जा रही है। इसके तहत अधिकतम 2 हैक्टेयर तक के मुआवजे का प्रावधान है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Oct 2021 18:51:42 +0530</pubDate>
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