<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/crops/tag-6971" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>crops - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/6971/rss</link>
                <description>crops RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>असर खबर का - नहर में बढ़ाया जलप्रवाह, होने लगी मॉनिटरिंग, टेल क्षेत्र तक पानी पहुंचाने में जुटे अधिकारी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[अधिकारियों ने मौके पर जाकर जलप्रवाह की निगरानी शुरू कर दी है। 
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news----water-flow-in-the-canal-has-increased--monitoring-has-begun--and-officials-are-working-to-deliver-water-to-the-tail-end/article-132895"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)-(16).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रबी सीजन की फसलों में सिंचाई के लिए पानी की डिमांड होने लगी है। वहीं गेहंू की बुवाई भी गति पकड़ने लगी है। इस कारण खेतों में नहरी पानी की डिमांड होने लगी है। ऐसे में सीएडी प्रशासन ने कोटा बैराज की दायीं नहर में जलप्रवाह बढ़ा दिया है। इसके अलावा विभागीय अधिकारी टेल क्षेत्र तक पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में जुट गए हैं, ताकि रबी फसलों विशेषकर सरसों, चने व गेहूं को समय पर सिंचाई की सुविधा मिल सके। पूर्व में दायीं नहर में 2550 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। मंगलवार को जलप्रवाह की मात्रा बढ़ाकर 4050 क्यूसेक कर दी गई है। अधिकारियों की टीमें माइनरों और वितरिकाओं की लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं, ताकि बीच रास्ते में कहीं भी रिसाव, अवरोध या अघोषित कटान की स्थिति न बने।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />नहरों की मरम्मत और साफ-सफाई नहीं होने के सम्बंध में 12 नवंबर को दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि मौसम साफ होने के बाद रबी फसलों की बुवाई का कार्य शुरू हो गया है। दायीं और बायीं नहर से जुड़ी वितरिकाएं कई जगह पर कचरे से अटी पड़ी हैं वही कुछ स्थानों से क्षतिग्रस्त भी हो रही है। पूर्व में इनकी साफ-सफाई और मरम्मत का कार्य किया गया था, लेकिन यह खानापूर्ति तक सीमित होने से टेल क्षेत्र में नहरी पानी पहुंचने में विलम्ब हो सकता है। हर साल जर्जर नहरी तंत्र के कारण टेल क्षेत्र के किसानों को नहरी पानी के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ता है। इस साल भी क्षतिग्रस्त वितरिकाओं के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद सीएडी अधिकारी के हरकत में आए और टेल क्षेत्र में नहरी पानी में जुट गए।</p>
<p><strong>जिले में गेहूं व सरसों की पैदावार ज्यादा</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार गेहूं की बुवाई के लिए खेतों में नमी होना जरूरी है। वर्तमान में गेहूं की फसल बुवाई हो रही है। इसलिए गेहूं की फसल को निर्धारित मात्रा में पानी देना जरूरी है। राजस्थान में रबी की फसल में सबसे ज्यादा गेहूं और सरसों की पैदावार की जाती है। गेहूं के लगातार बढ़ रहे भावों से अब इसकी खेती मुनाफा किसानों को दे रही है। इसलिए हर साल गेहूं का रकबा बढ़ता जा रहा है। इस कारण अधिकांश किसान गेहूं की बुवाई करना चाहते हैं। इसके अलावा सरसों और चना फसल के प्रति भी किसानों का रूझान बना हुआ है। इन फसलों के लिए पानी की दरकार बनी हुई है। </p>
<p><strong>क्षतिग्रस्त वितरिकाओं की करवाई मरम्मत</strong><br />मौसम खुलने के बाद रबी फसलों में सिंचाई के लिए पानी की मांग तेज हो गई है। इस समय गेहूं की फसल को पानी की ज्यादा जरूरत है। इसके लिए सीएडी विभाग की ओर से दायीं नहर में जलप्रवाह किया जा रहा है। इसके बावजूद टेल क्षेत्र में स्थित कई खेतों में पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी नहीं पहुंच पा रहा था। गत दिनों सीएडी के अधिकारियों ने वितरिकाओं में आ रहे अवरोधों को हटा दिया है। वहीं क्षतिग्रस्त हो रही दीवारों की भी मरम्मत करवा दी है।  इसके बाद नहर में जलप्रवाह की मात्रा को बढ़ा दिया है। अब सीएडी के अधिकारियों ने मौके पर जाकर जलप्रवाह की निगरानी शुरू कर दी है। अधिकारियों की टीमें जलप्रवाह में बाधक बन रहे अवरोधों को हटाने में जुट गई है। </p>
<p>गेहूं और चने की फसल को इस समय पानी की सबसे ज्यादा जरूरत रहती है। पिछले सप्ताह पानी धीमा था, अब प्रवाह बढ़ने से फसल बच जाएगी।<br /><strong>- सुनील नागर, किसान</strong></p>
<p>टेल क्षेत्र में अक्सर पानी देरी से पहुंचता है, लेकिन इस बार अधिकारी लगातार नहर पर नजर रख रहे हैं। उम्मीद है कि बी में पानी की कमी नहीं होगी।<br /><strong>- रेखालाल गुर्जर, किसान</strong></p>
<p>रबी सीजन में सिंचाई की मांग बढ़ना स्वाभाविक है। हमने दायीं नहर का डिस्चार्ज बढ़ा दिया है और फील्ड टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। <br /><strong>- सागर कुमार, कनिष्ठ अभियंता, सीएडी</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news----water-flow-in-the-canal-has-increased--monitoring-has-begun--and-officials-are-working-to-deliver-water-to-the-tail-end/article-132895</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news----water-flow-in-the-canal-has-increased--monitoring-has-begun--and-officials-are-working-to-deliver-water-to-the-tail-end/article-132895</guid>
                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 12:48:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-11/11-%28700-x-400-px%29-%2816%29.png"                         length="1236254"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सात साल से नहीं बना ढगारिया नहर मार्ग, फसल तैयार, खेतों से निकालना मुश्किल, किसानों की बढ़ी परेशानी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[मार्ग पर गहरे गड्ढे होने से कई बार उपज से भरी ट्रॉली पलटने से किसानों का होता है नुकसान ।
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-dhagaria-canal-road-has-not-been-constructed-for-seven-years--the-crops-are-ready-for-harvest--but-it-s-difficult-to-get-them-out-of-the-fields--increasing-the-problems-for-farmers/article-131315"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews-(10).png" alt=""></a><br /><p>देईखेड़ा। क्षेत्र के छप्पनपुरा, ढगारिया, रेबारपुरा, पापड़ली, खोता, लक्ष्मीपुर और पचीपला गांवों को जोड़ने वाला ढगारिया नहर मार्ग पिछले सात वर्षों से बदहाल हालात में है। सड़क पर वर्षों से ग्रेवल नहीं डाले जाने के कारण यह गड्ढों और कीचड़ से भरी पड़ी है। बरसात के बाद स्थिति और भी खराब हो गई है, जिससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>फसल तैयार, पर रास्ता बना मुसीबत</strong><br />करीब 3000 बीघा जमीन के किसानों की आजीविका इस मार्ग पर निर्भर है, लेकिन सड़क की जर्जर हालत के चलते खेतों से फसल निकालना कठिन हो गया है। छप्पनपुरा निवासी गिरिराज मीणा, ढगारिया के विष्णु कुमार, रेबारपुरा के सुरेश रायका, पापड़ली के भंवरसिंह और खोता के लेखराज सैनी ने बताया कि मार्ग पर इतने गहरे गड्ढे हैं कि ट्रैक्टर-ट्रॉली तक निकालना जोखिमभरा हो गया है। कई बार उपज से भरी ट्रॉली पलटने से किसानों को नुकसान झेलना पड़ा है।</p>
<p><strong>प्रशासन से कई बार गुहार, पर सुनवाई नहीं</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि वे बार-बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अवगत करा चुके हैं, पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र ग्रेवल निर्माण नहीं कराया गया तो फसल को मंडी तक पहुंचाना चुनौती बन जाएगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ढगारिया नहर मार्ग का शीघ्र सुधार कार्य शुरू कराया जाए, ताकि किसानों और ग्रामीणों को राहत मिल सके।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />यह मार्ग क्षेत्र के कई गांबो को जोड़ने के साथ साथ सैंकड़ों किसानों के खेतों में आवाजाही का एक मात्र रास्ता है प्रशासन को प्राथमिकता से यंहा सड़क निर्माण करवाना चाहिए सीएडी व सम्बंधित विभाग को प्रस्ताव भिजवा रखें है। <br /><strong>- के.सी. वर्मा, जिला परिषद सदस्य। </strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-dhagaria-canal-road-has-not-been-constructed-for-seven-years--the-crops-are-ready-for-harvest--but-it-s-difficult-to-get-them-out-of-the-fields--increasing-the-problems-for-farmers/article-131315</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-dhagaria-canal-road-has-not-been-constructed-for-seven-years--the-crops-are-ready-for-harvest--but-it-s-difficult-to-get-them-out-of-the-fields--increasing-the-problems-for-farmers/article-131315</guid>
                <pubDate>Mon, 03 Nov 2025 17:08:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-11/ews-%2810%29.png"                         length="509056"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों पर मौसम ने बरपा कहर : बेमौसम बारिश से सोयाबीन की 60 प्रतिशत फसल नष्ट, मुआवजे की आस बाकी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[क्षेत्र बेमौसम की बरसात से सोयाबीन, मूंग व उड़द की फसल हुई नष्ट ।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/soybean-crops-are-suffering-a-double-blow--with-farmers-still-waiting-for-compensation/article-129376"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/co5py-of-news.png" alt=""></a><br /><p> देईखेड़ा। इस बार क्षेत्र के किसानों पर मौसम ने कहर बरपा दिया है। लगातार हुई बेमौसम बारिश से सोयाबीन की करीब 60 प्रतिशत फसल पहले ही नष्ट हो चुकी थी, वहीं हाल की बारिश ने खेतों में खड़ी फसल को फिर से हरा कर किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। किसान अब मजबूरी में दवा डालकर फसल सुखाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे कटाई संभव हो सके। इस अतिरिक्त खर्च ने पहले से परेशान किसानों की आर्थिक स्थिति पर और बोझ डाल दिया है। किसानों का कहना है कि दोबारा हरियाली आने से फसल के दाने सिकुड़ने लगे हैं, जिससे उपज और वजन दोनों में कमी आने की आशंका है। </p>
<p>वहीं खेत खाली न होने से सरसों और गेहूं की बुवाई में भी देरी हो रही है। झपायता के किसान रामेश्वर नागर ने बताया कि फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन बारिश ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। अब दवा डालकर किसी तरह फसल को सुखाने की कोशिश कर रहे हैं। जिला परिषद सदस्य किशनचन्द्र वर्मा ने कहा कि सरकार की ओर से अब तक सोयाबीन, मूंग और उड़द की बर्बाद हुई फसलों के लिए मुआवजे की घोषणा नहीं की गई है। वहीं लबान क्षेत्र के किसान राजेन्द्र मीणा, महेश मीणा और रामावतार मीणा ने कहा कि ह्लन राम से राहत मिली, न राज से।ह्व किसानों का कहना है कि यदि शीघ्र राहत की घोषणा नहीं की गई तो अगली फसल की तैयारी भी अधर में रह जाएगी।</p>
<p>क्षेत्र बेमौसम की बरसात से सोयाबीन मूंग व उड़द की फसल नष्ट हो चुकी है, जिसके नुकसान की रिपोर्ट भी सरकार को सम्बंधित विभाग भेज चुके है। परन्तु सरकार ने भी तक भी फसल खराबे के लिये मुवावजा वितरित कर किसानों को राहत पहुंचाने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की है, जिससे किसान अपनी आगामी फसल के लिये राहत महसूस करें।  <br /><strong>-दिनेश व्यास देईखेड़ा। </strong></p>
<p>कृषि विभाग के साथ मिलकर क्षेत्र क्रॉफ कटिंग कर फसल के नुकासान का आंकलन कर रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है। फसल खराबे के लिये मुवावजा हेतु को दिशा निर्देश सरकार से प्राप्त नही हुए है। <br /><strong>-राजेन्द्र मीणा, तहसीलदार, इंदरगढ़।</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/soybean-crops-are-suffering-a-double-blow--with-farmers-still-waiting-for-compensation/article-129376</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/soybean-crops-are-suffering-a-double-blow--with-farmers-still-waiting-for-compensation/article-129376</guid>
                <pubDate>Sat, 11 Oct 2025 16:24:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-10/co5py-of-news.png"                         length="615647"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पानी में डूबी मेहनत, हर तरफ बर्बादी का मंजर</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[हाड़ौती में एक हजार हैक्टेयर में हुआ खराबा।
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hard-work-drowned-in-water--scene-of-ruin-everywhere/article-126226"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design-(1)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। इस साल लगातार बारिश के दौर ने सब्जी उत्पादक किसानों को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। हाड़ौती क्षेत्र में खेतों में जलभराव से सब्जियों की फसलें खराब हो गई है। भारी बारिश के चलते अनाज, दलहन और तिलहन उगाने वाले किसानों को ही नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि सब्जी उत्पादक किसानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। यहां तक की बंैगन और भिंडी की फसल चौपट हो गई है। वहीं आगे आने वाली फसल में भी खेत तैयार नहीं होने की वजह से देरी हो रही है। इसकी वजह से किसानों की टमाटर, मिर्ची, गोभी और बैगन के पौधे खराब जैसी हो गई है। इससे किसानों को करोड़ो का नुकसान हुआ है। हाड़ौती में करीब 10 हजार हैक्टेयर में पूरे साल में सब्जी की फसल उगाई जाती है। इनमें से वर्तमान में करीब 1000 हैक्टेयर के आसपास में खराबा हुआ है। इस कारण त्यौहारी सीजन में सब्जियों के दामों में तेजी आ सकती है। </p>
<p><strong>पौध तैयार, लेकिन नहीं हो पाई रोपाई</strong><br />उद्यानिकी विभाग के संयुक्त निदेशक आरके जैन बताया कि सब्जी की फसल का उत्पादन करने वाले किसानों को भी लगातार बारिश के कारण अच्छा खासा नुकसान पहुंचा है। खेतों में जाकर हालत देखे तो सामने आया कि बैगन और भिंडी की फसल खेत में पानी भर जाने के चलते गल गई है. वहीं, रबी के सीजन के लिए किसानों ने बैगन, फूल गोभी और पत्ता गोभी की पौध तैयार कर रखी थी, लेकिन वह भी पानी की वजह से वह खराब हो गई। कई खेतों में किसान की पौध ही लगातार बड़ी होती जा रही है. वह उसको खेत में रोप नहीं पा रहे हैं, क्योंकि बारिश थमने का नाम नहीं ले रही है. इससे खेत पूरी तरह से गिले हैं। उनमें पौध रोपाई करना संभव नहीं हो पा रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो 2 महीने की देरी हो जाएगी। दूसरी तरफ अगली रबी की फसल में भी नुकसान होगा।</p>
<p><strong>खेतों से नहीं निकल पा रहा पानी</strong><br />उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार 15 जून से लगातार बारिश हो रही है और खेत सूख नहीं पा रहे हैं। अगले रबी सीजन में आने वाली सब्जियां के लिए किसान यहां पर अगस्त के अंत और सितंबर में पौध की तैयारी कर लेते हैं और रोपाई भी शुरू हो जाती है। पत्ता गोभी, फूल गोभी, टमाटर, मिर्च की पौध किसानों ने तैयार कर ली है, लेकिन खेतों में पानी है, यह पौध भी बड़ी होती जा रही है, फिर भी वे रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। कुछ समय बाद यह पौध रोपाई करने लायक भी नहीं रहेगी। वहीं खुले में पौध तैयार करने वाले किसानो को नुकसान भी हुआ है। बारिश से पौध खेत में ही गलकर खराब हो गई है या पनप ही नहीं पाई है।</p>
<p><strong>धान लगाया, अब उत्पादन में होगी देरी </strong><br />किसानों के अनुसार खरीफ के सीजन में 15 जून से ही भारी बारिश हो रही थी, ऐसे में सोयाबीन, मूंग, उड़द और मक्का की फसल को किसान नहीं कर पाए थे, जिसके बाद अधिकांश किसानों ने इधर-उधर से धान के पौधे लेकर खेत में रोप दी थी। अब इस धान का उत्पादन नवंबर तक होगा, ऐसे में जहां पर सब्जी को बोने का समय ही अगस्त अंतिम सप्ताह से लेकर सितंबर तक होता है, इसमें देरी हो जाएगी और फसल का उत्पादन भी इन किसानों को देरी से मिलेगा। यह उत्पादन दिसम्बर के माह में आएगा। भारी बारिश के चलते किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। किसानों के खेत अभी पानी से भरे हैं, जब खेत खाली होंगे तब तक उनको और नुकसान हो जाएगा।</p>
<p><strong>सब्जियो के दामों में आ सकती है तेजी</strong><br />सब्जी उत्पादक किसान रामभरोस और जानकीलाल ने बताया कि लगातार बारिश के कारण सब्जी का प्रोडक्शन आने में एक माह की देरी होगी, यह बढ़ भी सकती है। सब्जी के प्रोडक्शन में गैप आएगा, हालांकि दूसरे राज्यों से सब्जी की आपूर्ति हो जाएगी, लेकिन पूरे राजस्थान में ही फसल खराब है, इसलिए दाम भी बढ़ना तय है। सवा महीने पहले ही पत्ता गोभी उत्पादन के लिए कवर्ड एरिया तैयार नर्सरी लगाई है। खेत में रोपाई के लिए पौध तैयार भी है, लेकिन पौध में कचरा हो गया है और बारिश के चलते हुए उसमें प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ खेत भी अब तैयार नहीं है, इसलिए रोपाई भी नहीं कर पा रहे हैं। अगर बारिश नहीं रुकती है तो वह रोपाई नहीं कर पाएंगे। उनकी लगाई हुई भिंडी और बैगन भी खराब हो गए हैं।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />- 10000 हैक्टेयर में हाड़ौती में सब्जी की खेती<br />- 1000 हैक्टेयर में सब्जियों को पहुंचा नुकसान<br />- बंैगन और भिंडी की फसल में अधिक खराबा<br />- अब सब्जियों के दामों में तेजी की संभावना</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />भारी बारिश के चलते सब्जी उत्पादक किसानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। यहां तक की बंैगन और भिंडी की फसल चौपट हो गई है। वहीं आगे आने वाली फसल में भी खेत तैयार नहीं होने की वजह से देरी हो रही है।  टमाटर, मिर्ची, गोभी और बैगन के पौधे भी खराब हो गए हैं।<br /><strong>- लक्ष्मीचंद नागर, सब्जी उत्पादक किसान</strong></p>
<p>बैगन और भिंडी की फसल खेत में पानी भर जाने के चलते गल गई है. वहीं, रबी के सीजन के लिए किसानों ने बैगन, फूल गोभी और पत्ता गोभी की पौध तैयार कर रखी थी, लेकिन वह भी पानी की वजह से वह खराब हो गई। अरबी की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा है।<br /><strong>- आरके जैन, संयुक्त निदेशक, उद्यानिकी विभाग कोटा</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hard-work-drowned-in-water--scene-of-ruin-everywhere/article-126226</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hard-work-drowned-in-water--scene-of-ruin-everywhere/article-126226</guid>
                <pubDate>Mon, 08 Sep 2025 17:00:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/untitled-design-%281%296.png"                         length="568603"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - खरीफ फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[कलक्टर के निर्देश के बाद तीन विभागों की टीमें शुक्रवार को खेतों में जाकर नुकसान का सर्वे करने में जुट गई है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---instructions-to-survey-the-damage-caused-to-kharif-crops/article-122366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । मानसून की लगातार बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेत पानी से भरे हुए हैं। समय रहते पानी की निकासी नहीं हो पाने से  सोयाबीन व उड़द की फसलें खराब हो गई हैं। कोटा जिले सहित हाड़ौती में सबसे ज्यादा सोयाबीन की बुवाई होती है। ऐसे में लगातार बारिश के कारण इस फसल को अधिक नुकसान पहुंचा है। जिला कलक्टर ने शुक्रवार को खरीफ फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कम्पनियों के प्रतिनिधियों की टीम बनाई गई, जो खेतों में जाकर फसलों में हुए नुकसान का आंकलन करेगी। जिला कलक्टर ने सर्वे की रिपोर्ट तैयार कर सात दिन में प्रशासन को सौंपने के निर्देश जारी किए है। कलक्टर के निर्देश के बाद तीन विभागों की टीमें शुक्रवार को खेतों में जाकर नुकसान का सर्वे करने में जुट गई है।  </p>
<p><strong>निर्देश मिलते ही खेतों में पहुंची टीमें</strong><br />जिला कलक्टर ने शुक्रवार से फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए थे। ऐसे में राजस्व विभाग से पटवारी, कृषि विभाग से पर्यवेक्षक और बीमा कम्पनी के प्रतिनिधियों की अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। शुक्रवार को बारिश नहीं होने के कारण तीनों विभागों की संयुक्त टीमें खेतों में पहुंची और फसलों में नुकसान का आंकलन शुरू कर दिया गया। जिले के सुल्तानपुर और इटावा क्षेत्र के खेतों में जलभराव होने से फसलों को अधिक नुकसान पहुंचा हैं। किसानों के अनुसार लगातार बारिश के कारण यहां पर खेत तालाब में बन गए हैँ। पानी की निकासी नहीं हो पाई है। इस कारण बीज गल चुके हैं। वहीं अब सोयाबीन और उड़द की बुवाई का समय भी निकल चुका है। ऐसे में अब इन क्षेत्रों में अधिकांश खेत खाली ही रहेंगे। </p>
<p><strong>कृषि विभाग ने हाड़ौती में माना 30 फीसदी खराबा</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस साल हाड़ौती क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई का लक्ष्य 12 लाख हैक्टेयर से अधिक निर्धारित किया गया था। इस बार जून माह में ही मानसून का आगाज और फिर लगातार बारिश होने से बुवाई का रकबा 10 लाख हैक्टेयर रह गया यानी लगभग दो लाख हैक्टेयर में बुवाई नहीं हो पाई। इसके बाद भी मूसलाधार बारिश से खेतों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। ऐसे में कृषि विभाग ने फसलों में नुकसान में प्रारम्भिक सर्वे किया था, जिसमें हाड़ौती क्षेत्र में फसलों में 30 फीसदी खराबा होना माना गया है। बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान सोयाबीन की फसल को पहुंचा है।  खेतों में पानी भरने से फसलें गल गई और बीज अंकुरित नहीं हो पाए। इस कारण किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा। </p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाई थी किसानों की पीड़ा</strong><br />जुलाई माह में लगातार बारिश होने से फसलों में नुकसान होने के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 30 जुलाई को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया था कि मानसून की लगातार बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेत पानी से भरे हुए हैं। समय रहते पानी की निकासी नहीं हो पाने से  सोयाबीन व उड़द की फसलें खराब हो गई हैं। कोटा जिले सहित हाड़ौती में सबसे ज्यादा सोयाबीन की बुवाई होती है। ऐसे में लगातार बारिश के कारण अधिक नुकसान सोयाबीन को पहुंचा है। इस बार कई किसान तो दो-दो बार सोयाबीन की बुवाई कर चुके हैं।  खेतों में पानी भरने से फसलें गल गई हैं। </p>
<p>तेज बारिश के कारण खेतों में पानी का भराव होने से सोयाबीन की फसल तो पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। बड़ी मुश्किल से बीज लेकर खेतों में बुवाई की थी। अब तो सब कुछ बर्बाद हो चुका है। अब समझ नहीं आ रहा कि क्या करें।<br /><strong>- नेमीचंद नागर, किसान </strong></p>
<p>जिला कलक्टर ने शुक्रवार को खरीफ फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके लिए राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कम्पनियों के प्रतिनिधियों की टीम बनाई गई, जो खेतों में जाकर फसलों में हुए नुकसान का आंकलन करने में जुट गई है। <br /><strong>- अतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग कोटा</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---instructions-to-survey-the-damage-caused-to-kharif-crops/article-122366</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---instructions-to-survey-the-damage-caused-to-kharif-crops/article-122366</guid>
                <pubDate>Sat, 02 Aug 2025 14:24:41 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-08/1ne1ws-%281%294.png"                         length="729004"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - मौसम खुला तो खेतों में पहुंचे अधिकारी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[नवज्योति ने बारिश से फसलों के नुकसान की खबर को प्रकाशित किया था।  
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---officials-reached-the-fields-when-the-weather-cleared/article-121172"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(2)33.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून की लगातार बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेत पानी से भरे हुए हैं। समय रहते पानी की निकासी नहीं हो पाने से  सोयाबीन व उड़द की फसलें खराब हो गई हैं। अब मौसम साफ होने के बाद कृषि विभाग ने नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है। रविवार को अवकाश होने के बाद विभाग की टीमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंची और फसलों में खराबे की स्थिति का आकलन किया। इस दौरान कई खेतों में पानी भरा नजर आया। वहां पर खरीफ फसलें ज्यादा प्रभावित हुई हैं। कोटा जिले सहित हाड़ौती में सबसे ज्यादा सोयाबीन की बुवाई होती है। ऐसे में लगातार बारिश के कारण अधिक नुकसान सोयाबीन को पहुंचा है। इस बार कई किसान तो दो-दो बार सोयाबीन की बुवाई कर चुके हैं। अब बुवाई की प्रक्रिया अनिश्चित काल के लिए टल गई है। </p>
<p><strong>कहीं सोयाबीन तो कहीं मूंग में नुकसान</strong><br />किसानों ने समय पर रात दिन मेहनत करके फसल की बुवाई की, लेकिन इसके बाद लगातार हुई मूसलाधार बारिश से खेतों में पानी भर गया। जिससे खरीफ की फसलें खासकर सोयाबीन को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरने से फसलें गल गई हैं। बीज अंकुरित नहीं हो रहे हैं। जो अंकुरित हो भी रहे हैं, वे कुछ ही दिनों में नष्ट हो रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक सर्वे में सामने आया कि कोटा जिले के अनेक गांवों में खेत जलमग्न हैं, जिससे फसलों की जड़ों में सड़न शुरू हो गई है। वहीं बारां में सोयाबीन और मक्का की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। झालावाड़ में भारी बारिश के कारण मूंग की फसलें पूरी तरह से गल गई हैं। कई जगह तो बारिश इतनी अधिक हुई कि खेतों की मेड़ें टूट गईं और पानी निकलने का रास्ता नहीं रहा।</p>
<p><strong>अब क्या करेंगे कुछ समझ नहीं आ रहा</strong><br />इटावा क्षेत्र के किसान मांगीलाल, भरोसीलाल ने बताया कि इस साल क्षेत्र में लगातार बारिश हुई है। इससे फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। इस क्षेत्र में अधिकांश किसानों ने सोयाबीन की फसल पर दांव लगाया है। इसके बाद धान की बुवाई की थी। तेज बारिश के कारण खेतों में पानी का भराव होने से सोयाबीन की फसल तो पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। बड़ी मुश्किल से बीज लेकर खेतों में बुवाई की थी। अब तो सब कुछ बर्बाद हो चुका है। अब समझ नहीं आ रहा कि क्या करें। दुबारा से बुवाई करने के लिए फिर से खाद-बीज की व्यवस्था करनी पड़ेगी। इसके लिए रुपयों की व्यवस्था करना मुश्किल होगा। ऐसे में अब तो खेतों को खाली रखने की नौबत आ गई है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाई थी किसानों की पीड़ा</strong><br />इस साल लगातार बारिश होने से फसलों को काफी नुकसान होने के सम्बंध में 17 जुलाई को किसानों की पीड़ा से सम्बंधित समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि जिले सहित संभाग के कई क्षेत्रों में सैंकड़ों किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है। पिछले दिनों लगातार बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। खेत लबालब पानी से भरे हुए हैं। समय रहते पानी की निकासी नहीं हो पाई। इसके चलते सोयाबीन व उड़द की फसलें खराब गई है। कई किसान तो दो-दो बार सोयाबीन की बुवाई कर चुके हैं। किसान प्रकृति के आगे बेबस सा नजर आ रहा है। पिछले वर्ष भी किसानों की खरीफ की फसल अतिवृष्टि की भेट चढ़ गई थी। इसके बाद कृषि विभाग ने बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ टीम बनाकर नुकसान का सर्वे करने का निर्णय किया। इसके बाद टीमों ने सर्वे शुरू कर दिया है।</p>
<p>हमने 12 बीघा में सोयाबीन बोई थी, मगर लगातार पानी भरे रहने से पौधे गलने लगे हैं। बीमा करवाने से पहले ही फसल खत्म हो गई। अब दोबारा बुवाई की स्थिति नहीं है।<br /><strong>- गणेशलाल, किसान </strong></p>
<p>मौसम खुलने के बाद खेतों में फसलों को हुए नुकसान को लेकर सर्वे शुरू कर दिया है। जिन खेतों में पानी लम्बे समय तक भराव रहा है वहां पर ज्यादा नुकसान होने की संभावना है। सर्वे पूरा होने के बाद ही खराबे का सही आकलन हो सकेगा।<br /><strong>- अतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---officials-reached-the-fields-when-the-weather-cleared/article-121172</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---officials-reached-the-fields-when-the-weather-cleared/article-121172</guid>
                <pubDate>Mon, 21 Jul 2025 15:02:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-07/news-%282%2933.png"                         length="695058"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या हम केवल टैक्स देने के लिए, सुविधाएं पाने के नहीं हैं हकदार! </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[पानी और छांव की कमी, किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या। 
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/are-we-not-entitled-to-get-facilities-just-to-pay-tax/article-108712"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/news-(1)42.png" alt=""></a><br /><p>छीपाबड़ौद। हरनावदाजागीर छीपाबड़ौद राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण लहसुन मंडियों में से एक है। हरनावदाजागीर लहसुन मंडी इस समय अव्यवस्थाओं का शिकार है। यहां देशभर से हजारों की संख्या में किसान अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति इतनी दयनीय है कि न छांव की कोई व्यवस्था है न स्वच्छ पेयजल उपलब्ध है और न ही सरकारी दर पर भोजन की सुविधा। सरकार को करोड़ों रुपये का टैक्स देने वाले इन अन्नदाताओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है।</p>
<p><strong>किसानों का मुश्किल भरा इंतजार, सरकारी मदद नदारद</strong><br />राजस्थान और आसपास के अन्य राज्यों से आने वाले किसान यहां अपनी लहसुन बेचने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं लेकिन मंडी में व्याप्त अव्यवस्थाओं के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। धूप में खुले आसमान के नीचे बैठकर किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। खासकर गर्मी के इस मौसम में पानी और छांव की कमी किसानों के लिए सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।</p>
<p><strong>दे रहे करोड़ों का टैक्स, जिम्मेदार नहीं ले रहे सुध </strong><br />स्थानीय किसानों ने बताया कि वे सरकार को करोड़ों का टैक्स देते हैं, फिर भी उनके लिए कोई बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं करवाई जा रही। ऐसे में सरकार और प्रशासन की उदासीनता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p><strong>अन्नपूर्णा रसोई योजना पर नहीं हुआ अमल, नवज्योति ने उठाई थी आवाज</strong><br />इससे पहले भी दैनिक नवज्योति ने अन्नपूर्णा रसोई घर की स्थापना को लेकर एक प्रमुख खबर प्रकाशित की थी। इस योजना के तहत किसानों को रियायती दरों पर भोजन उपलब्ध कराने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक सरकार या प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। वहीं एक किसान ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि "हम अपनी फसल लेकर दूर-दूर से आते हैं, सरकार को टैक्स देते हैं, लेकिन हमारे लिए छांव तक की व्यवस्था नहीं है। क्या हम केवल टैक्स देने के लिए हैं, सुविधाएं पाने के हकदार नहीं?"  किसानों ने मंडी में फैली अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि प्रशासन उनकी मांगों को अनसुना कर रहा है। जल्द ही किसान इस मुद्दे पर प्रशासन से ठोस जवाब मांग सकते हैं। यदि स्थिति नहीं सुधरी तो आंदोलन की चेतावनी भी दी जा रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />यहां कुछ लोग खाली ट्रैक्टर लगाकर जगह घेर लेते हैं। जिससे मंडी में आने वाले किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मंडी में न तो पीने के पानी की व्यवस्था है, न ही सरकारी दर पर भोजन उपलब्ध हो रहा है और न ही छांव की कोई सुविधा है। हमें अपनी लहसुन की बोली लगाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन प्रशासन हमारी परेशानियों की ओर ध्यान नहीं दे रहा। <br /><strong>- कैलाश लववंशी, किसान। </strong></p>
<p>हम दूर-दराज से लहसुन बेचने के लिए यहां आते हैं, लेकिन यहां सुविधाओं का अभाव है। न छांव की व्यवस्था है, न पीने का पानी मिल रहा है, और न ही सस्ती दरों पर भोजन उपलब्ध है। हमें घंटों तक खुले आसमान के नीचे इंतजार करना पड़ता है। प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।<br /><strong>- मुरली मनोहर, किसान, मनोहरथाना निवासी। </strong></p>
<p>सरकार को करोड़ों का टैक्स देने वाले हम किसानों के लिए यहां एक घूंट पानी तक नसीब नहीं हो रहा। धूप में खड़े-खड़े लहसुन की बोली लगाने का इंतजार करना हमारी मजबूरी बन गई है।  क्या यही है किसानों की असली स्थिति? बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में हमें केवल परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>- राकेश लोधा, किसान।   </strong></p>
<p>हमारी प्राथमिकता मंडी में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। जहां तक टेंट या छाया की बात है, पिछले वर्षों में भी यह व्यवस्था नहीं थी। <br /><strong>- फूलचंद्र मीणा, मंडी सचिव, छबड़ा।</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/are-we-not-entitled-to-get-facilities-just-to-pay-tax/article-108712</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/are-we-not-entitled-to-get-facilities-just-to-pay-tax/article-108712</guid>
                <pubDate>Wed, 26 Mar 2025 16:29:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-03/news-%281%2942.png"                         length="480480"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - किसानों की फसलों को मिला जीवनदान, अब किसानों को नहरी पानी भी सुचारू रूप से मिलने लगा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ भण्डेड़ा क्षेत्र के दुगारी कस्बे में स्थित कनकसागर डेम की प्रथम कैनाल में मुख्य सड़क पर नहरी पानी निकासी अब जाकर बहाल हुई है]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/effect-of-news---farmers--crops-got-a-new-lease-of-life/article-103739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer34.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। भण्डेड़ा क्षेत्र के दुगारी कस्बे में स्थित कनकसागर डेम की प्रथम कैनाल में मुख्य सड़क पर नहरी पानी निकासी अब जाकर बहाल हुई है। अब किसानों के खेतो में रबी फसलों को नहरी पानी मिलने लगा है। क्षेत्रीय किसानों का कहना था कि थैंक्यू दैनिक नवज्योति... जो हमारी नहरी पानी की समस्या को प्रमुखता से उजागर किया गया है। नहरी पानी के बिना क्षेत्रीय खेतों में फसलें बर्बाद होने की कगार पर थी, जो अब नहरी पानी मिलने से बच पाएगी। क्षेत्रीय किसानों में भी खुशी की लहर है। जानकारी अनुसार क्षेत्र के दुगारी कनकसागर डेम से निकल रही प्रथम केनाल से करीबन तीन से चार गांव के किसानों को नहरी पानी मिलता था। मगर जहाँ से केनाल निकल रही थी, जो दो गांवों की मुख्य सड़क के नीचे से गुजर रही थी। जो इस वर्ष की बारिश का लंबे समय तक दुगारी कनकसागर बांध में चली चादर के पानी से सड़क क्रॉसिंग की जगह पर केनाल क्षतिग्रस्त हो गई थी। जो इस समय चल रहे नहरी पानी के प्रवाह मुख्य सड़क से ऊपर की तरफ ही नहरी पानी व्यर्थ में बह रहा था एवं दूसरी तरफ के किसानों के खेतो में नहरी पानी नही पहुंच पा रहा था। जिससे किसानों की लगभग 800 बीघा भूमि में फसलें बर्बाद होने के कगार पर चल रही थी। किसानों की इस समस्या को दैनिक नवज्योति ने गंभीरता से लेते हुए गत 4 फरवरी को सड़क से नहरी पानी निकालने की जगह हो रही अवरुद्ध.... इस शीर्षक द्वारा प्रमुखता से समाचार प्रकाशित करवाकर संबंधित विभाग को अवगत करवाया गया। तब जाकर संबंधित विभाग ने सुध लेकर मोके पर पहुंचकर प्रथम केनाल पर कुम्हारिया गांव - दुगारी के बीच सड़क पर नहरी पानी का पाइप रखा तो मोके पर किसान खुद ही झीकरा निकालने लग गए थे। अब किसानों के खेतों में नहरी पानी पहुंचने लगा है। समय पर नहरी पानी मिलने से पैदावार सहित रबी फसलों को भी जीवनदान मिलेगा।  </p>
<p>क्षेत्रीय किसान शंभू गुर्जर, मुकेश प्रजापत, मन्नालाल कहार, हेमराज भोपा, राजेंद्र कुशवाह, गणेश हरिजन, शंकर हरिजन, मोहन गुर्जर, गोवर्धन सैनी, मुकुट बिहारी दाधीच, राजेंद्र सैनी आदि का कहना था कि जल संसाधन विभाग द्वारा मुख्य सड़क पर पाइप लगा दिया है। पाइप के दोनों तरफ झीकरे के ढेरों को केनाल से किसानों ने साफ कर दिया है। जिससे यहां पर आवागमन में भी समस्या नही आएगी। अब किसानों को नहरी पानी भी सुचारू रूप से मिलने लगा है। मौके पर किसानों ने आमजन की समस्या का समाधान करवाने के लिए नवज्योति की प्रशंसा की है। इस संबंध में भी दैनिक नवज्योति ने गत 7 फरवरी के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। गौरतलब है कि बीती 6 फरवरी को इस समस्या को लेकर भाजपा पदाधिकारी के नेतृत्व में नैनवां उपखंड अधिकारी के नाम प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया था।  </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/effect-of-news---farmers--crops-got-a-new-lease-of-life/article-103739</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/effect-of-news---farmers--crops-got-a-new-lease-of-life/article-103739</guid>
                <pubDate>Mon, 10 Feb 2025 15:24:06 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-02/257rtrer34.png"                         length="614731"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डीएपी खाद की भारी किल्लत, फसल बुवाई में आ रही बाधा </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[जिम्मेदार हर बार की तरह इस बार भी धरतीपुत्रों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं करवा पाएं है।
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/there-is-a-huge-shortage-of-dap-fertilizer--hindrance-in-sowing-crops/article-93573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/27rtrer-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। डीएपी खाद की किल्लत मारा मारी हो रही है। क्षेत्रीय अन्नदाताओं को रबी फसल बुवाई के लिए डीएपी खाद की आवश्यकता हो रही है। यह समय पर उपलब्ध नहीं होने से फसल बुवाई में बाधा आ रही है। अन्नदाताओं ने अपने खेतों की हंकाई-जुताई करके तैयारी पूर्ण कर रखी है। फसल बुवाई का समय निकलता जा रहा है। इस सीजन की बुवाई के लिए डीएपी खाद नही मिल पा रहा है। इसकी वजह से अन्नदाता परेशान हो रहे है। जिम्मेदार क्षेत्र में खाद की किल्लत को दूर नहीं कर पा रहे है। अन्नदाताओ का कहना है कि इस समय सरसों की फसल की बुवाई के लिए खेतों की हंकाई-जुताई कर तैयार कर रखें है। मंहगें दामों में रबी फसलों के लिए बीज तो खरीद लिया। इसके साथ बुवाई के लिए डीएपी खाद उपलब्ध नही हो रहा है। जो सरसों फसल की बुवाई का समय निकलता जा रहा है। समय पर डीएपी उपलब्ध होता तो क्षेत्र में सरसों की फसल का रकबा बढ़ता। मगर खाद उपलब्ध नहीं होने से समय बीत जाएगा जो बाद में मजबूरन जौ, गेहूं, चना, मसूर रबी फसलों की बुवाई करनी पड़ेगी। इस समय भी खाद उपलब्ध होगा तो इसके लिए भी खाद का इंतजार करना पड़ेगा। आखिर करें तो क्या करें। फसल की बुवाई से पहले से परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जो  कटाई तक व उपज को बेचने जाने तक अन्नदाताओ की कड़ी परीक्षा होती है। मगर फिर भी अन्नदाता निराश नही होतें है। उपज भी कभी-कभार तो पूरा खर्च करवाने के बाद भी एक दाना तक हाथ नही लग पाता है। इस समय बुवाई के लिए खाद को लेकर परेशानी चल रही है। जिम्मेदार हर बार की तरह इस बार भी धरतीपुत्रों को समय पर खाद उपलब्ध नहीं करवा पाएं है।</p>
<p><strong>क्षेत्रीय किसानों का यह कहना</strong><br />रबी फसल बुवाई के लिए समय बीतता जा रहा है। मगर फसल बुवाई के लिए डीएपी खाद उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जो किसानों को खाद के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जिम्मेदार जल्द इस समस्या को दूर करें।<br /><strong>- फूंदीलाल माली, किसान निवासी सादेड़ा</strong></p>
<p>इस समय सरसों, तारामीरा फसल की बुवाई का समय चल रहा है। मगर डीएपी नही मिलने से खेतों की हंकाई-जुताई कर तैयार कर रखें है। खाद नही मिलने से समय पर बुवाई नही हो पा रही है। मजबूरन किसान परेशान हो रहे है। संबंधित विभाग खाद की किल्लत को जल्द दूर करें।<br /><strong>- कैलाश मीणा, किसान निवासी गुजरियाखेड़ा </strong></p>
<p>सरसों फसल के लिए डीएपी खाद जरूरी होता है। इससे फसल अच्छी ग्रोथ लेती है व पैदावार भी अधिक देती है। मगर डीएपी के लिए भागादौड़ी शुरू हो रही है। समय पर खाद उपलब्ध हो तो फसलों की बुवाई भी समय पर हो सके। तो पैदावार भी अच्छी हो सके। <br /><strong>- देवीशंकर गुर्जर, किसान निवासी रामगंज </strong></p>
<p>पहले से ही हाथ खाली थे। जो खाद नही ले सके हैं। अब कुछ उपज हाथ लगी है, जिसे बेचकर पैसा हाथ में आया है। अब छह बीघा जमीन में रबी फसल की बुवाई के लिए डीएपी खाद उपलब्ध नही हो पा रहा है। जो इधर-उधर भटकने को मजबूर होना पड़ रहा है।<br /><strong>- कालूलाल भील, किसान निवासी कल्याणपुरा</strong></p>
<p>किसान का कहना है कि छह बीघा जमीन हंकाई-जुताई कर तैयार कर रखी है। डीएपी खाद के लिए तीन-चार बार बांसी व अन्य कस्बों में पहुंच गए। पर खाद ही उपलब्ध नही हो रहा है। जो सरसों की बुवाई में देरी हो रही है। अभी तैयार खेत देखें, नही जा रहे है। जल्द खाद उपलब्ध हो तो भागादौड़ी भी खत्म हो।<br /><strong>- हीरालाल बैरवा, किसान निवासी फतेहपुरा </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कल एक गाडी डीएपी की 358 बैग डीएपी कोटा से मगंवाया गया था। जिन्हें एक किसान को 2 बैग देकर वितरण किया गया है। <br /><strong>- नरेन्द्र सिंह, व्यवस्थापक, क्रय विक्रय सहकारी समिति बांसी </strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/there-is-a-huge-shortage-of-dap-fertilizer--hindrance-in-sowing-crops/article-93573</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/there-is-a-huge-shortage-of-dap-fertilizer--hindrance-in-sowing-crops/article-93573</guid>
                <pubDate>Mon, 21 Oct 2024 15:02:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-10/27rtrer-%282%291.png"                         length="360808"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लगातार बारिश ने फेरा किसानों की उम्मीदों पर पानी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[गांवों में भी खेतों में पानी भरने से फसलें पीली पड़ चुकी हैं। 
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/continuous-rain-has-dashed-the-hopes-of-farmers/article-90869"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(10)1.png" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। क्षेत्र में इस साल भी अतिवृष्टि के चलते खरीफ की फसलें नष्ट होने से किसानों में चिंता की लहर दौड़ गई है। क्षेत्र के किसान पिछले कई वर्षों से ग्लोबिंग वार्मिंग की मार झेल रहे हैं। इस साल रबी की फसलों में भी मार्च के महीने में तेज गर्मी व लू चलने के कारण गेहूं, चने व अन्य खरीफ की फसलों की पैदावार के उत्पादन में काफी कमी हो गई थी। किसानों ने बताया कि 90% खेतों में अभी भी फसलें खड़ी हैं। जिनमें बेमौसम चल रही लगातार बारिश का पानी भर गया है। जिसके कारण फसलें गल कर नष्ट होने के कगार पर हैं। वहीं कई स्थानों पर फसलें बड़ी होने के कारण आड़ी पड चुकी हैं। सोयाबीन के पत्तों में पीलापन आता जा रहा है। इस वर्ष भी बारिश की अधिकता के चलते किसानों को फसलों में नुकसान झेलना पड़ा है। पूर्व के वर्षों में भी तेज बारिश के चलते खरीफ की पैदावार पर असर पड़ा था। इस वर्ष भी लगातार बारिश आने से किसानों की रही सही उम्मीदों पर भी पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है। लगातार बारिश होने से किसान एक बार फिर बर्बादी के कगार पर पहुंच चुके हैं। दिन-रात कड़ी मेहनत करने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि बढ़िया बारिश होने से खेत सोना उगलेंगे। लेकिन प्राकृतिक आपदा के चलते खेतों में पानी भरने से सोयाबीन एवं उड़द की फसल में नुकसान की आशंका है। सोयाबीन की फसल की बुवाई के बाद अच्छी बारिश के कारण किसानों के खेतों में सोयाबीन की फसल लहलहाने लगी थी। लेकिन लगातार बारिश होने के कारण  पैदावार पर असर पड़ने लगा था। </p>
<p><strong>खेतों में कीचड़ से भारी नुकसान की आशंका</strong><br />पिछले तीन-चार सालों से लगातार किसान दोहरी मार झेल रहा है। इस वर्ष रबी की फसल में एकदम से गर्मी पड़ने के कारण पैदावार कम हो गई थी। गेहूं की पैदावार में कमी दर्ज की गई थी। वहीं इस वर्ष सोयाबीन की फसल में तेज बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया। उसके बाद अब खेतों में फसलों के साथ कीचड़ नजर आ रहा है। जिससे फसल खराब होने लगी हैं। ड्रेनेज सिस्टम सही नहीं होने से पड़ी अधिक मार: किसानों ने बताया कि ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त नहीं होने के कारण भी किसानों के खेतों में अधिक पानी भरा है। जिससे अधिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर खेतों  में कीचड़ ही कीचड़ दिखाई दे रहा है। जिससे किसानों की फसलें खराब हो गई हैं। किसान पुष्पेंद्र मीणा, ओमप्रकाश मीणा, पुष्पदयाल मीणा, सोहनलाल मीणा, सीताराम भील, रूपचंद मीणा ने बताया कि सोयाबीन, मूंगफली, उड़द की फसलें बारिश होने के कारण नुकसान हुआ है। जिससे किसानों की कमर टूट गई है। </p>
<p><strong>पानी के कारण फसलें पड़ीं पीली</strong><br />क्षेत्र के अमरपुरा, किशोरपुरा, नयागांव, नापाहेड़ा, जाखड़ोंद आदि गांवों में भी खेतों में पानी भरने से फसलें पीली पड़ चुकी हैं। जिससे किसानों को फसलें खराब होने का डर सता रहा है। किसान धन्नालाल यादव, युवराज नागर, नितेश शर्मा आदि ने बताया कि लगातार हुई बारिश के चलते चारों ओर पानी ही पानी हो जाने से खेतों में अधिक मात्रा में पानी भर गया। जिससे फसलें खराब होने का खतरा मंडरा रहा है।</p>
<p>तेज बारिश के चलते हैं किसने की फैसले खराब होने के कगार पर पहुंच चुकी है। फसलों का सर्वे कर करके किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की गई है। कई खेतों में जहां पर पानी भरा है, फसलें गलने के कगार पर है। किसानों को अब बारिश होने के बाद से ही खेतों में नमी के चलते एवं खेतों में पानी भर जाने से फसल की जड़ों को पर्याप्त मात्रा में धूप नहीं मिलने से अंदर ही अंदर फसल सड़ने का खतरा भी मंडराने लगा है। <strong>- जगदीश कलमंडा, किसान नेता, भारतीय किसान संघ</strong></p>
<p>किसान फसलों को अपने बच्चों की तरह पालते हैं। इस वर्ष भी सभी किसानों ने बीज कीटनाशक एवं अन्य दवाइयों पर काफी खर्च कर दिया है। इसके बाद अगर फसल हाथ में नहीं आती है तो किसानों की कमर टूट जाएगी। वर्तमान में तेज बारिश के चलते फासले खराब होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं। बारिश अगर इसी तरह होती रही तो फसल पूर्ण तरह से खराब हो सकती है।<br /><strong>- मायाराम गोचर, किसान</strong></p>
<p>आजीविका का एक मात्र खेती ही साधन है। खेती की पैदावार का किसान के संपूर्ण परिवार पर असर पड़ता है। वर्तमान में भी किसानों ने महंगा बीज व हंकाई-जुताई के साथ-साथ कीटनाशकों व अन्य कृषि कार्यों में हजारों रुपया खर्च किया है। लेकिन क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण फसलों को पर्याप्त धूप व अनुकूल तापमान नहीं मिलने के कारण व खेतों में पानी भराव तथा अधिक नमी के चलते फसलें विकसित होने की बजाय खराब होने की आशंका है। नुकसान का तत्काल प्रशासन की ओर से सर्वे करवाने की मांग की गई है।<br /><strong>- नरेंद्र दाधीच, किसान </strong></p>
<p>किसानों के द्वारा सोयाबीन की फसल की बुवाई करने के बाद से ही बढ़िया बारिश होने के कारण अच्छी फसल की उम्मीद थी। लेकिन लगातार बारिश चलने से फसलों में नुकसान के आशंका है अधिक बारिश के चलते फसल सड़ने के कगार तक पहुंच चुकी है।<br /><strong>- बाबूलाल शर्मा, किसान </strong></p>
<p>बीमा कंपनियों द्वारा खड़ी फसल का कोई भी मुआवजा नहीं दिया जाता है। फसल काटने के बाद अगर किसान का नुकसान होता है तो उसकी भरपाई बीमा कंपनी द्वारा की जाती है। राज्य सरकार की तरफ से जो भी निर्देश मिलेंगे, उसी के अनुसार किसानों के हित में कार्य किया जाएगा।<br /><strong>- बाबूलाल मीणा, डीईओ, सीएडी, सुल्तानपुर </strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/continuous-rain-has-dashed-the-hopes-of-farmers/article-90869</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/continuous-rain-has-dashed-the-hopes-of-farmers/article-90869</guid>
                <pubDate>Wed, 18 Sep 2024 18:26:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-09/630400-size-%2810%291.png"                         length="544404"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खेत बने तालाब...फसलें तबाह, काश्तकारों के अरमानों पर फिरा पानी</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[मवेशियों के लिए चारा तक नहीं बचा।
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/fields-turned-into-ponds---crops-destroyed--farmers--hopes-shattered/article-89782"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>सांवतगढ़। सांवतगढ़ सहित आसपास के क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से सैकड़ों बीघा खेतों में पानी भर गया है। इस वजह से फसलें तबाह हो गई है। ऐसे में किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया। लंबे समय जिसे फसल को तैयार किया और उसक कटने का मौका आया तो पानी भरने से गल गई। ऐसे में अन्नदाताओं की सारी मेहनत पर पानी फिर गया और लाखों रुपए खर्च करने और दिन रात जागकर फसल की रखवाली की लेकिन  उनको मुनाफे के नाम पर एक ढेला तक नहीं मिल पाया। किसानों का आरोप है कि अभी तक प्रशासन द्वारा कोई सर्वे नहीं करवाया गया है। किसानों का कहना है कि बाजार से महंगे उर्वरक खरीदकर के हमने उड़द, मक्का, सोयाबीन, धान की फसलों की बुवाई की थी लेकिन लगातार हो रही बारिश से खेतों में पानी भर गया है और फसलें लगातार नष्ट हो रही है। जिससे हमें आर्थिक नुकसान हो रहा है। अभी तक फसल खराबे को लेकर कोई सर्वे नहीं करवाया गया है। इसको लेकर भी हम असमंजस में हैं। सरकार और प्रशासन से अनुरोध है कि जल्द ही सर्वे करवाकर हमको फसल खराबे का उचित मुआवजा दे।</p>
<p><strong>खाळ पर बनी दोनों पुलिया के उपर 2 फिट पानी, आवागमन बाधित</strong><br />सांवतगढ़ के नैनवां रोड पर बनी खाळ की पुलिया पर 2 फीट तक पानी की चादर चलने आवागमन बाधित हो गया और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बूंदी से जयपुर जाने वाली रोडवेज बस को सांवतगढ़ से ही वापस बूंदी डिपो के लिए लौटना पड़ा। साथ ही निजी बसें भी इस रूट पर नहीं आई। ग्रामीणों का कहना है कि इस पुलिया की ऊंचाई कम होने के कारण बरसात के दिनों में बार-बार आवागमन बाधित हो जाता है। इधर, सोरण रोड पर खाळ पर बनी पुलिया के ऊपर भी पानी का तेज बहाव रहा जिससे गली मोहल्लों और खेतों में पानी घुस गया।</p>
<p><strong>क्षेत्रवासियों की पीड़ा</strong><br />करीब 6 बीघा मक्का सोयाबीन की फसल की बुवाई की थी लगातार हो रही बारिश से खेतों में पानी भर जाने से फसल चौपट हो गई है। प्रशासन से विनम्र अनुरोध है कि सर्वे करवाकर उचित मुआवजा दिलवायें।<br /><strong>- किसान राकेश किराड,सांवतगढ़।</strong></p>
<p>चार बीघा मक्का की फसल में लगातार हो रही बारिश से फसल जल मग्न हो गई है। महंगे उर्वरक लाकर बुवाई की थी लेकिन अब 1 रुपए की भी आमदनी के आसार नहीं है।<br /><strong>- किसान सोजीलाल प्रजापत,सांवतगढ़।</strong></p>
<p>14 बीघा में उड़द की फसल की बुवाई की थी अब तक 12 बीघा उड़द की फसल पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। और बची हुई फसल भी नष्ट होने के कगार पर हैं।<br /><strong>- किसान रामधन नागर,सांवतगढ़।</strong></p>
<p>खाळ का पानी खेतों में भर गया है जिससे 5 बीघा धान 3 बीघा उड़द और 2 बीघा मक्का की फसल नष्ट हो गई है। और साथ ही पशुओं के चारे में भी पानी भर गया है। अन्य जगह नहीं होने के कारण पशुओं को भी पानी में बांधने के लिए मजबूर हैं।<br /><strong>- किसान रामरतन नागर सांवतगढ़।</strong></p>
<p>लगातार बारिश और खाळ का पानी खेत में भर जाने से 5 बीघा मक्का और 1 बीघा उड़द की फसल पूरी तरह से गल गई है। जिससे आर्थिक नुकसान वहन करना पड़ रहा है। <br /><strong>- किसान पप्पू किराड सांवतगढ़।</strong></p>
<p>सार्वजनिक निर्माण विभाग की अनदेखी के चलते सांवतगढ़ से बांसी जाने वाले रास्ते पर छोटी पुलिया बना दी गई। जबकि ग्रामीणों ने यहां पिलर वाली बड़ी पुलिया बनाने की मांग की थी। लेकिन उस वक्त विभागीय अधिकारियों ने बात को अनसुना कर दिया। और नतीजा यह हुआ कि आज बरसात के दिनों में यह मार्ग बंद हो जाने से कई राहगीर परेशान होते हैं।<br /><strong>- रामप्रसाद राठौर,सांवतगढ़।</strong></p>
<p>सांवतगढ़ खाळ की पुलिया पर चादर चलने से बसों को अन्य रूट से ले जाना पड़ा जिससे डीजल का अधिक भार वहन करना पड़ा और यात्री भी परेशान रहे। <br /><strong>- शंकर गुर्जर,निजी बस संचालक।</strong></p>
<p>ग्राम सांवतगढ़ में बारिश से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है व जल मग्न हो गई है । सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा बांसी रोड़ पर पुलिया छोटी व कम ऊंचाई की बनाने के कारण खेतों में पानी भर गया। आवागमन के साधन बाधित हो गए जिससे किसानों व आमजन को भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस बाबत क्षेत्रीय सांसद व उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है। <br /><strong>- अर्चना कंवर, सदस्य पंचायत समिति हिंडोली।</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सभी पटवारी अपने-अपने क्षेत्र में गिरदावरी कर रहे हैं,जहां फसल खराब होगी उसको गिरदावरी में दर्शाया जाएगा। <br /><strong>- भूपेंद्र सिंह हाड़ा, नायब तहसीलदार, उप तहसील दबलाना</strong></p>
<p>पूरी तरह से सर्वे कर के ही सांवतगढ़ के खाळ की पुलिया बनाई गई है। अत्यधिक बारिश होने से यह हालात बन गए हैं। सभी बांधों के ओवरफ्लो के कारण करीब-करीब सब जगह ऐसे हालात बने हुए है। <br /><strong>- रामरतन नरानिया, एईएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग नैनवां</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/fields-turned-into-ponds---crops-destroyed--farmers--hopes-shattered/article-89782</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/fields-turned-into-ponds---crops-destroyed--farmers--hopes-shattered/article-89782</guid>
                <pubDate>Fri, 06 Sep 2024 18:06:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-09/1rtrer-%281%299.png"                         length="548776"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोरेल नदी से सटे गांवों के खेतों में पहुंचा पानी, पानी से खेत हुए जलमग्न, फसलें हुई खराब </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ लालसोट उपखंड क्षेत्र में कोथून रोड पर मोरेल नदी के किनारे स्थित विजयपुरा, लोरवाड़ा, मटलाना, समेल, राजपुरा आदि गांवों में नदी का पानी खेतों में पहुंच जाने से खेत जलमग्न हो गए तथा खेतों में बोई हुई मूंगफली व तिल की फसल खेतों में पानी भराव के कारण पूरी तरह खराब हो गई।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/water-reached-the-fields-of-the-villages-adjacent-to-the/article-88234"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/pze-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>दौसा। लालसोट उपखंड क्षेत्र में कोथून रोड पर मोरेल नदी के किनारे स्थित विजयपुरा, लोरवाड़ा, मटलाना, समेल, राजपुरा आदि गांवों में नदी का पानी खेतों में पहुंच जाने से खेत जलमग्न हो गए तथा खेतों में बोई हुई मूंगफली व तिल की फसल खेतों में पानी भराव के कारण पूरी तरह खराब हो गई। फसल खराब होने को लेकर किसानों में मायूसी एवं चिंता का माहौल बना नजर आया। किसानों ने अपनी फसल बर्बादी को लेकर मुआवजे की प्रशासन से गुहार की है। भाजपा जिला महामंत्री हरकेश मटलाना ने बताया कि खेतों में मोरेल नदी का पानी भर जाने से मूंगफली की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है।  मटलाना ने बताया कि प्रशासन शीघ्र ही फसल खराबे का सर्वे करा कर पीड़ित किसानों को मुआवजा दिलवाने की कार्यवाही करें। वहीं सहायक कृषि अधिकारी राजेंद्र शर्मा ने बताया कि अतिवृष्टि से किसानों की फसलों में जो नुकसान हुआ है उस नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना प्रधानमंत्री किसान बीमा योजना से किसानों को फसलों में हुए नुकसान की भरपाई हो सकेगी। उन्होंने यह भी बताया कि जल भराव वाले खेतों में जड़ गलन रोग होने से भी फसलों में नुकसान की संभावना है।</p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/water-reached-the-fields-of-the-villages-adjacent-to-the/article-88234</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/water-reached-the-fields-of-the-villages-adjacent-to-the/article-88234</guid>
                <pubDate>Wed, 21 Aug 2024 15:11:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-08/pze-%282%295.png"                         length="502248"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        