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                <title>कर्नाटक कांग्रेस ने लिया मुसलमानों को 4 फीसदी आरक्षण बहाल करने का संकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[सिद्धारमैया ने कहा, ''आरक्षण के नाम पर, सरकार दो धर्मों के बीच दरार पैदा करने के अपने छिपे हुए एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रही है। एक से लेना और दूसरे को देना कैसे सही है? राज्य में भाजपा का समय खत्म हो गया है।"]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/karnataka-congress-vows-to-restore-4-reservation-for-muslims/article-40980"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/site-photo-size-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक कांग्रेस ने सत्ता में आने पर मुसलमानों के लिए आरक्षण बहाल करने का वादा किया है। यह आश्वासन भाजपा सरकार द्वारा ओबीसी (2बी) वर्गीकरण के तहत मुसलमानों के लिए 04 प्रतिशत आरक्षण समाप्त करने के बाद आया है।</p>
<p>प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी के शिवकुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा,'' सरकार सोचती है कि आरक्षण को संपत्ति की तरह बांटा कजा सकता है। यह संपत्ति नहीं है। यह (अल्पसंख्यकों का) अधिकार है। हम नहीं चाहते कि उनका चार प्रतिशत खत्म कर दिया जाए और किसी बड़े समुदाय को दे दिया जाए। वे (अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य) हमारे भाई और परिवार के सदस्य हैं। हम यह सब खत्म कर देंगे और मुसलमानों को ओबीसी सूची से हटाने का कोई आधार नहीं है।"</p>
<p>कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने जाति और धर्म के बीच विभाजन पैदा करने और चुनावी लाभ हासिल करने के लिए आरक्षण मैट्रिक्स को बदल दिया है। उन्होंने कहा, '' भाजपा ने अवैध आरक्षण की घोषणा की है।"</p>
<p>सिद्धारमैया ने कहा कि नया आरक्षण भी अलोकतांत्रिक है, जिसे अदालत में रद्द किया जाएगा। जेडीएस विधायक दल के नेता एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि भाजपा सरकार धर्मों के बीच दरार पैदा करने के अपने छिपे हुए एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रही है। </p>
<p>उन्होंने कहा, ''आरक्षण के नाम पर, सरकार दो धर्मों के बीच दरार पैदा करने के अपने छिपे हुए एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रही है। एक से लेना और दूसरे को देना कैसे सही है? राज्य में भाजपा का समय खत्म हो गया है।"</p>
<p>वास्तव में, यह कर्नाटक में एचडी देवेगौड़ा की सरकार थी जिसने मुसलमानों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण दिया था। कुमारस्वामी ने आरोप लगाया, ''अब, भाजपा सरकार ने इसे छीन लिया है।"</p>
<p>इस बीच कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए इसे बहाल करने की मांग की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Mar 2023 17:02:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>RSS-BJP का देश को हिन्दू-मुस्लिम और धर्मों के बीच बांटने का एजेंडा: गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[गहलोत ने भोपाल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के लाउडस्पीकर से जुड़े सवाल पर आए बयान पर यह प्रतिक्रिया दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/--jaipur-news--rrs-bjp-agenda-to-divide-country-between-hindu-muslim-and-religions--gehlot/article-8971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/ashok-gehlot-vs-satish-poonia.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि आरएसएस और बीजेपी का एकमात्र एजेंडा देश को हिंदू-मुस्लिम और धर्मों के बीच बांटना है। गहलोत रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत कर रहे थे। गहलोत ने भोपाल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के लाउडस्पीकर से जुड़े सवाल पर आए बयान पर यह प्रतिक्रिया दी।</p>
<p><br /> गहलोत ने कहा कि अभी तो यह शुरुआत है, आने वाले समय में यह लोग मुझ पर और सरकार पर और बड़े अटैक करेंगे। आज पूरे देश में हिंसा और तनाव का माहौल है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में बैठक बुलाई, तब उन्होंने सांसद किरोड़ी मीणा को लेकर कहा कि बाकी सांसद तो कुछ नहीं कर रहे, जो किरोड़ी मीणा करता है, वह तुम सब करो,मतलब धमाल पट्टी करो, हिंसा होगी, अशांति रहेगी तो काम रुकेगा, सरकार का और विकास भी इससे रुकेगी। गहलोत ने आरोप लगाया कि इनकी सोच विकास को ठप करना है।<br /><br /><strong>करौली घटना में निर्दोष फंसे तो छोड़ देंगे:</strong><br />गहलोत ने कहा कि करौली में हुई घटना को हमने तो रोक दिया। रामनवमी पर सब धर्मों ने मिलकर जुलूस भी निकाले, लेकिन करौली में हुआ प्रयोग रामनवमी पर 7 राज्यों में हुआ और वहां दंगे भड़क गए। जब दंगा होता है और जो पकड़े जाते हैं, उनमें गलती करने वाले भी होते हैं और कई बार निर्दोष भी फंस जाते हैं। करौली घटना में हो सकता है निर्दोष लोग फंस गए, तो उन्हें छोड़ देंगे, लेकिन आप निर्दोषों पर बुलडोजर कैसे चला रहे हो। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लोगों के घर तोड़े जा रहे हैं, क्योंकि इनका एजेंडा बहुत खतरनाक है, जिसे जनता और युवा पीढ़ी को समझना होगा। गांधी जी ने कहा था कि मैं हिंदू हूं मुझे गर्व है, हम सब यही बात कहते हैं कि हमें हिंदू होने पर गर्व है, लेकिन दूसरे धर्मों का सम्मान भी करना चाहिए।</p>
<p><br /><strong> मन्दिर गिराते हैं और मुद्दा भी बनाते हैं:</strong><br />गहलोत ने अलवर के राजगढ़ में तोड़े गए मंदिर के मामले में कहा कि राजगढ़ नगर पालिका में 35 में से 34 पार्षद भाजपा के हैं और भाजपा के बोर्ड में ही पालिका की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया। मंदिर भी गिराते हैं और उसे मुद्दा भी बनाते हैं, क्योंकि इनका इरादा ध्रुवीकरण करने का है और कांग्रेस को बदनाम करने का है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 May 2022 16:38:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर पहुंचा हिजाब का विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[चाकसू स्थित निजी कॉलेज में बुर्का पहनकर पहुंची छात्राएं, कॉलेज प्रशासन ने ड्रस कोड में आने को कहा, छात्राओं और परिजनों ने की नारेबाजी, हिजाब प्रकरण से जोड़ने का आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/620764d0dabb4/article-4390"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/hisab_jaipur.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हिजाब का मसला कर्नाटक से निकलकर जयपुर तक पहुंच गया है। दरअसल शुक्रवार को जयपुर के अल्बर्ट हॉल पर हिजाब पहनकर मुस्लिम महिलाओं ने प्रदर्शन किया। जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने हिजाब मामले में उचित समय पर सुनवाई करने का आश्वासन दिया है। साथ ही सभी के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का आश्वासन दिया है। <br /><br /><strong>आपत्तिजनक पोस्ट शेयर करने पर एएसआई और कांस्टेबल सस्पेंड </strong><br />सोशल मीडिया पर हिजाब से जुड़ी आपत्तिजनक पोस्ट शेयर करना कमिश्नरेट के दो पुलिसकर्मियों को भारी पड़ गया। मामला सामने आने के बाद यातायात पुलिस के एएसआई सतवीर सिंह और जवाहर सर्किल में तैनात कांस्टेबल रमेश को डीसीपी ट्रैफिक श्वेता धनखड़ और डीसीपी हैड क्वार्टर अरशद अली ने सस्पेंड कर दिया। कांस्टेबल रमेश ने आपत्तिजनक पोस्ट एक ग्रुप में शेयर की थी। इसी पोस्ट को एएसआई सतवीर ने अन्य व्यक्ति को भेज दिया। इस पोस्ट को लेकर शुक्रवार को सुभाष चौक इलाके में लोगों ने विरोध किया। डीसीपी नॉर्थ परिस देशमुख ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराया। </p>
<p><strong>चाकसू स्थित निजी कॉलेज में बुर्का पहनकर पहुंची छात्राएं,<br /></strong></p>
<p><strong> कॉलेज प्रशासन ने ड्रस कोड में आने को कहा, <br /></strong></p>
<p><strong>छात्राओं और परिजनों ने की नारेबाजी, <br /></strong></p>
<p><strong>हिजाब प्रकरण से जोड़ने का आरोप</strong></p>
<p> चाकसू। निमोड़िया मोड के निकट कस्तूरी देवी महाविद्यालय में बुर्कापहनकर आई छात्राओं को कुछ लोगों ने कॉलेज पोशाक में आने, अंदर नहीं घुसने देने और अन्य छात्रों द्वारा इसका विरोध करने की बात कही तो हंगामा हो गया। इस पर छात्राओं ने संविधान में पोशाक पहनने की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए नाराजगी जताई। मामले की जानकारी मिलते ही कुछ अभिभावक भी मौके पर पहुंच गए, इस पर कॉलेज प्रशासन ने मुख्य द्वार बंद कर दिया। इसके बाद अभिभावकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान अभिभावकों एवं कॉलेज प्रशासन के बीच बहस भी हुई। वहीं, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी लगाए। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाइश कर मामले को शांत कर दिया। हालांकि दोनों ही पक्ष मीडिया से बात करने से बचते नजर आए। वहीं, कॉलेज प्रशासन का कहना है कि हिजाब प्रकरण से इस घटना को जोड़ना गलत है, केवल कॉलेज पोशाक में आने की बात कही गई थी। थाना अधिकारी जितेन्द्र वर्मा ने बताया कि समझाइश कर मामला शांत कर दिया है, अब कोई विवाद नहीं है। <br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Feb 2022 13:25:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अफगान संकट</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले सप्ताह भारत और पाकिस्तान में अफगानिस्तान को लेकर एक दिन मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%85%E0%A4%AB%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F/article-3444"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/fggdaasas.jpg" alt=""></a><br /><p>पिछले सप्ताह भारत और पाकिस्तान में अफगानिस्तान को लेकर एक दिन मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। पाकिस्तान के सम्मेलन में 57 देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधियों के अलावा अफगानिस्तान, रूस, अमेरिका व चीन और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में भारत को आमंत्रित नहीं किया गया। गौरतलब है कि भारत ने पिछले दिनों जब अफगानिस्तान पर पड़ोसी देशों के सुरक्षा सलाहकारों का सम्मेलन हुआ था तब भारत ने पाकिस्तान व चीन दोनों को आमंत्रित किया था, लेकिन दोनों देशों ने उसका बहिष्कार किया। भारत ने विदेश मंत्रियों का जो सम्मेलन बुलाया था उसमें मध्य एशिया के पांचों मुस्लिम गणतंत्रों के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया। ये देश पाकिस्तानी सम्मेलन में नहीं गए। पाकिस्तानी सम्मेलन में सिर्फ अफगानिस्तान था, जबकि भारतीय सम्मेलन में अफगानिस्तान से संबंधित सभी विषयों पर चर्चा की गई। सम्मेलन में शामिल कजाकिस्तान किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान ने भारत सहित अफगानिस्तान की हालात पर चिंता व्यक्ति की। इन सभी देशों पर अफगानिस्तान की हर घटना का असर पड़ रहा है। ये सभी देश अफगानिस्तान के पड़ोसी हैं। सभी देशों की बड़ी चिंता यह थी कि आखिर अफगानिस्तान की जमीन से होने वाले आतंकवाद से कैसे बचा जाए? भारत शुरू से ही इस बात पर जोर देता रहा है कि अफगानिस्तान को आतंकवाद का नया ठिकाना बनने से रोकना होगा। ऐसा नहीं हुआ तो पाकिस्तान के बाद वह भी दुनियाभर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना शुरू कर देगा। अफगानिस्तान इस समय न केवल भुखमरी और कंगाली से जूझ रहा है, बल्कि तालिबानी शासन भी जनता के लिए संकट बना हुआ है। अफगानिस्तान में तालिबानी सत्ता के चार महीने से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन अभी तक वहां से यह संकेत नहीं मिला कि तालिबानी शासन दुनिया के साथ मिलकर चलना चाहता है। अफगानिस्तान के पड़ोसी देश इस बात से भी चिंतित हैं कि बड़ी संख्या में शरणार्थी उनके यहां पहुंच रहे हैं। तालिबानी लड़ाकों और अन्य आतंकी गुटों के बीच चल रहे संघर्ष से नागरिक खासा चिंतित हैं। महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों पर जुल्म ढाए जा रहे हैं। सभी पड़ोसी देश चिंतित हैं, लेकिन भारत की चिंताएं विशेष हैं। सभी पड़ोसी देश अफगानिस्तान की मदद को तैयार हैं, लेकिन तालिबानी सत्ता किसी के हितों को समझने को तैयार नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%85%E0%A4%AB%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F/article-3444</link>
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                <pubDate>Wed, 22 Dec 2021 17:45:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कॉन्ट्रैक्ट है मुस्लिम निकाह, हिंदू विवाह की तरह कोई संस्कार नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम निकाह एक अनुबंध या कॉन्ट्रैक्ट है, जिसके कई अर्थ हैं, यह हिंदू विवाह की तरह कोई संस्कार नहीं और इसके टूट जाने से बने कुछ अधिकारों एवं दायित्वों से पीछे नहीं हटा जा सकता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B9--%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%82-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/article-1803"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/justice.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बेंगलुरु।</strong> कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम निकाह एक अनुबंध या कॉन्ट्रैक्ट है, जिसके कई अर्थ हैं, यह हिंदू विवाह की तरह कोई संस्कार नहीं और इसके टूट जाने से बने कुछ अधिकारों एवं दायित्वों से पीछे नहीं हटा जा सकता। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी बेंगलुरु के भुवनेश्वरी नगर में 52 साल के एजाजुर रहमान की एक याचिका पर की है, जिसमें 12 अगस्त, 2011 को बेंगलुरु में एक पारिवारिक अदालत के प्रथम अतिरिक्त प्रिंसिपल न्यायाधीश का आदेश रद्द करने का अनुरोध किया गया था।<br /> <br /> <br /> उल्लेखनिय है कि रहमान ने अपनी पत्नी सायरा बानो को पांच हजार रुपये के ‘मेहर’ के साथ विवाह करने के कुछ महीने बाद ही ‘तलाक’ शब्द कहकर 25 नवंबर, 1991 को तलाक दे दिया था, इस तलाक के बाद रहमान ने दूसरी शादी की। जिससे वह एक बच्चे का पिता बन गया। बानो ने इसके बाद गुजारा भत्ता लेने के लिए 24 अगस्त, 2002 में एक दीवानी मुकदमा दाखिल किया था, पारिवारिक अदालत ने आदेश दिया था कि वादी वाद की तारीख से अपनी मृत्यु तक या अपना पुनर्विवाह होने तक या प्रतिवादी की मृत्यु तक 3,000 रुपये की दर से मासिक गुजारा भत्ते की हकदार है।<br /> <br /> <br /> न्यायमूर्ति कृष्णा एस दीक्षित ने याचिका खारिज करते हुए 25,000 रुपये के जुर्माने के साथ 7 अक्टूबर को अपने आदेश में कहा कि निकाह एक अनुबंध है जिसके कई अर्थ हैं, यह हिंदू विवाह की तरह एक संस्कार नहीं है, यह बात सत्य है। न्यायमूर्ति दीक्षित ने विस्तार से कहा कि मुस्लिम निकाह कोई संस्कार नहीं है और यह इसके समाप्त होने के बाद पैदा हुए कुछ दायित्वों एवं अधिकारों से भाग नहीं सकता।<br /> <br /> पीठ ने कहा कि तलाक के जरिए विवाह बंधन टूट जाने के बाद भी दरअसल पक्षकारों के सभी दायित्वों एवं कर्तव्य पूरी तरह समाप्त नहीं होते हैं’’ उसने कहा कि मुसलमानों में एक अनुबंध के साथ निकाह होता है और यह अंतत: वह स्थिति प्राप्त कर लेता है, जो आमतौर पर अन्य समुदायों में होती है। अदालत ने कहा कि यही स्थिति कुछ न्यायोचित दायित्वों को जन्म देती है, वे अनुबंध से पैदा हुए दायित्व हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Oct 2021 10:45:30 +0530</pubDate>
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