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                <title>अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर आस्था के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के मौलाना इलियास द्वारा एक न्यूज चैनल में  देवाधिदेव महादेव के बारे में की गई अभद्र एंव आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष गिरीराज गौतम के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल द्वारा शिकायत दर्ज कराई एवं  देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/playing-with-faith-in-the-name-of-freedom-of-expression-cannot-be-tolerated/article-11667"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/456.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । उत्तर प्रदेश के मौलाना इलियास द्वारा एक न्यूज चैनल में  देवाधिदेव महादेव के बारे में की गई अभद्र एंव आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष गिरीराज गौतम के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल द्वारा शिकायत दर्ज कराई एवं  देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा ।<br /><br /> गिर्राज गौतम ने कहा कि हम सभी धर्मो का सम्मान करते है लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कोई भी  हमारे आराध्य देवी - देवताओं के विरुद्ध कुछ भी अनर्गल अपमानजनक टिप्पणी करेगा तो उसे कानूनी रूप से सजा मिलनी चाहिए । इस देश में सभी को अपने धर्म को मानने का अधिकार है परंतु यह नहीं भूलना चाहिए कि सनातन संस्कृति हजारों वर्षों से भारत की पहचान रही है। शिव से ही संपूर्ण ब्रह्मांड का उदय हुआ है और सभी शिव में समाप्त हो जाते है। बिना शब्दों के अर्थों को जाने कुछ भी कह देने से देश ही नहीं बल्कि दुनिया में रहने वाले प्रत्येक हिंदू की आस्था को ठेस पहुंचती है । ऐसे व्यक्ति देश में सांप्रदायिक वातावरण को बिगाड़ने का भी काम करते हैं । ऐसे लोगों पर सरकार एवं प्रशासन को कठोर कार्रवाई करनी चाहिए । रावत ने कहा कि उन्हें उम्मीद है उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई करेगी। गौतम ने बताया कि परिवाद के माध्यम से  शिकायत दर्ज करवाई है । इस व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से समस्त राष्ट्र से माफी मांगने चाहिए । प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह भानावत, युवा नेता रवि चौधरी, किशोर सिंह राठौड़, शुभम सैनी, देव गौतम, दीपक सोनी आदि उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 18:43:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>गहलोत सरकार का बड़ा फैसला, अलवर प्रकरण की जांच सीबीआई को, एसपी का यूटर्न  बलात्कार की आशंका से इनकार नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी ने चेताया, पूरे देश को कॉल करेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A5%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%AB%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%BE--%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%86%E0%A4%88-%E0%A4%95%E0%A5%8B--%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%AA%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A8--%E0%A4%AC%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B6%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%87%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/article-4021"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/25.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अलवर विमंदित नाबालिग पीड़िता प्रकरण में विपक्ष की लगातार मांग के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया है। राज्य सरकारजल्दी केन्द्र को अनुशंसा भेजेगी। यह फैसला रविवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री निवास पर वीसी के माध्यम से हुई उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में गृह राज्यमंत्री राजेन्द्र यादव, सीएम निरंजन आर्य, एसीएस गृह अभय कुमार, डीजीपी एमएल लाठर, एडीजी क्राइम आरपी मेहरडा, एडीजी सिक्योरिटी एस सेंगथिर, एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रिंसीपल डॉ.सुधीर भण्डारी और जेके लॉन अस्पताल अधीक्षक डॉ.एके शुक्ला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। <br /> <br /> अलवर। शहर में बीते मंगलवार एक मूक बधिर बालिका के साथ हुई दर्दनाक घटना के मामले में अब एसपी तेजस्विनी गौतम का यू टर्न सामने आया है। रविवार को गुरुद्वारा कमेटी के सदस्य एसपी से मिले तो उनको बताया गया कि रेप की आशंका से इनकार नहीं किया गया। वहीं, इससे दो दिन पहले एसपी ने कहा था कि शुक्रवार को पुलिस को मिली मेडिकल रिपोर्ट में बालिका के साथ दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने गुरुद्वारा कमेटी के सदस्यों को बताया कि अभी पुलिस के स्तर पर हर एंगल से जांच जारी है। हमारी जांच पूरी नहीं हुई है। मैंने अभी तक के तथ्य बताए थे। <br /> <br /> <strong>दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी ने चेताया, पूरे देश को कॉल करेंगे</strong><br /> गुरूद्वारा कमेटी के सदस्य आत्मा सिंह लुबाना व अन्य सदस्यों ने प्रशासन को चेताया कि चार दिन में अपराध का खुलासा नहीं किया गया तो पूरे देश के समाज के लोगों को कॉल करेंगे। इसके बाद बड़ा आंदोलन किया जाएगा।<br /> <br /> <strong>सांसद दीया ने सरकार को घेरा</strong><br /> भाजपा सांसद दीया ने अलवर पुलिस पर बड़े सवाल खड़े करते हुए राज्य सरकार को घेरा है। एक वीडियो मेसेज जारी कर बताया कि राजस्थान वीरों की और वीरांगनाओं की धरती है लेकिन आज ये रेप कैपिटल बन गया है। मुझे खुद को शर्म आती है कि आज में एक ऐसे राजस्थान में जी रही हूं, जहां हमारी बहन बेटियां सुरक्षित नहीं है।<br /> <br /> <strong>जल्द होगा खुलासा : जूली </strong><br /> मंत्री टीकाराम जूली रविवार को अलवर प्रकरण पीड़िता के परिवारजनों से मिले। उन्होंने परिजनों से  कहा कि पुलिस को निर्देशित किया है कि मामले का जल्द से जल्द खुलासा करें। मामले में भाजपा द्वारा राजनीतिक रोटियां सैंकी जा रही है। वहीं पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा भी पीड़िता के परिजनों से मिले और 1 लाख रुपए सहायता राशि स्वयं की आय से देने की घोषणा की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Jan 2022 11:56:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हाईकोर्ट से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें पढ़े यहां......</title>
                                    <description><![CDATA[मिरासी समुदाय को एमबीसी में शामिल करने को लेकर राज्य सरकार चार माह में करें निर्णय-हाईकोर्ट : बिना तैयारी पेश की गई जनहित याचिका पर कोर्ट नहीं ले सकती प्रसंज्ञान-हाईकोर्ट : बिना वैक्सीन लगवाए प्रवेश से रोकना जनहित में सही]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%88%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A3-%E0%A4%96%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%82----/article-2355"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/hc2.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>NEWS1.</strong> <strong>बिना तैयारी पेश की गई जनहित याचिका पर कोर्ट नहीं ले सकती प्रसंज्ञान-हाईकोर्ट</strong><br />जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सिलिकोसिस पीडित खान श्रमिकों के लिए बने डीएमएफटी फंड का उपयोग नहीं करने से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका में दखल से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि भले ही याचिकाकर्ता ने जनहित याचिका के जरिए महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है, लेकिन बिना तैयारी और आवश्यक सूचनाएं एकत्रित किए बिना पेश प्रकरण पर सुनवाई की अनुमति नहीं दी जा सकती। सीजे अकील कुरैशी और जस्टिस रेखा बोराणा की खंडपीठ ने यह आदेश बाबूलाल जाजू की जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हम याचिकाकर्ता के लिए कोर्ट के दरवाजे हमेशा के लिए बंद नहीं कर रहे हैं। यदि याचिकाकर्ता मामले में आवश्यक दस्तावेज और पूरी तैयारी के साथ आते हैं तो अदालत ज्यादा गंभीरता से उस पर विचार करेगी।</p>
<p><br />जनहित याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने खनन कार्य में लगे श्रमिकों और सिलिकोसिस बीमारी से पीड़ितों की देखभाल के लिए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट बना रखा है। इसके तहत राज्य सरकार ने एक फंड का गठन किया है। डीएमएफटी नियम, 2016 के तहत फंड का साठ फीसदी बजट उच्च वरीयता वाले मदों पेयजल, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण आदि के लिए और चालीस फीसदी अन्य वरीयता में शामिल मदों में करने का प्रावधान है। इसके बावजूद राज्य सरकार उच्च वरीयता के मदों में फंड को खर्च नहीं कर रही है। जिससे खान श्रमिकों के हितों का हनन हो रहा है।<br /><br /><br /><strong>NEWS2. बिना वैक्सीन लगवाए प्रवेश से रोकना जनहित में सही</strong><br />जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि कोरोना से बचाव के लिए एक भी वैक्सीन नहीं लगवाने वाले व्यक्ति का हाईकोर्ट में प्रवेश रोकना व्यापक जनहित में है। इसके अलावा परिसर में प्रवेश देने के लिए इस तरह की शर्त लगाना अव्यवहारिक भी नहीं है। अदालत ने कहा कि दो बार मौका देने के बाद भी न तो याचिकाकर्ता और ना ही उनके वकील अदालत में पैरवी के लिए पेश हुए हैं। इससे लगता है कि याचिकाकर्ता को इस मुद्दे पर कोई दिलचस्पी नहीं है। ऐसे में अदालत मामले में स्व प्रेरणा से प्रसंज्ञान नहीं ले सकती। सीजे अकील कुरैशी और जस्टिस रेखा बोराणा की खंडपीठ ने यह आदेश परमेश्वर पिलानिया की जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिका में चुनौती दी गई अधिसूचना वकीलों, पक्षकारों और नियमित रूप से आने वाले कोर्ट स्टाफ की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। ऐसे में इस तरह की शर्त को अव्यवहारिक नहीं कहा जा सकता। जनहित याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट प्रशासन ने गत एक जुलाई को नोटिफिकेशन जारी कर कोरोना वैक्सीन की एक भी डोज नहीं लगवाने वालों का प्रवेश हाईकोर्ट में प्रतिबंधित कर दिया था। जिसे चुनौती देते हुए कहा गया कि अदालत को मामले में स्व प्रेरणा से प्रसंज्ञान लेकर दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए।</p>
<p> </p>
<p><strong>NEWS3. मिरासी समुदाय को एमबीसी में शामिल करने को लेकर राज्य सरकार चार माह में करें निर्णय-हाईकोर्ट</strong><br />जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मिरासी समुदाय को एमबीसी में शामिल करने के मामले में कहा है कि किसी भी जाति या समुदाय विशेष को एमबीसी में शामिल करने या नहीं करने के संबंध में निर्णय लेने का अधिकार राज्य सरकार को है। हाईकोर्ट को इस संबंध में दखल का अधिकार नहीं है। वहीं इस मुद्दे को अंतहीन समय तक लंबित भी नहीं रखा जा सकता। ऐसे में राज्य सरकार को निर्देश दिए जाते हैं कि याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए जाने वाले विस्तृत अभ्यावेदन का परीक्षण कर चार माह में उचित निर्णय लिया जाए। न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव और न्यायाधीश फरजंद अली की खंडपीठ ने यह आदेश राजकुमार मिरासी की ओर से दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए दिए।<br /><br />याचिका में कहा गया कि कई दशकों से समारोह में गा-बजाकर लोगों का मनोरंजन करने वाले लोगों को मुस्लिम मिरासी नाम दिया गया है। इस वर्ग के लोग शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से काफी पिछडे हुए हैं। ऐसे में उन्हें एमबीसी वर्ग में शामिल कर लाभान्वित किया जाए। इस संबंध में आवश्यक दस्तावेजों के साथ राज्य सरकार को कई बार अभ्यावेदन भी दिया जा चुका है, लेकिन उन पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाए। जिसका निस्तारण करते हुए खंडपीठ ने इस संबंध में याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए जाने वाले अभ्यावेदन को चार माह में निस्तारित करने को कहा है।</p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Nov 2021 18:30:40 +0530</pubDate>
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                <title>कॉन्ट्रैक्ट है मुस्लिम निकाह, हिंदू विवाह की तरह कोई संस्कार नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम निकाह एक अनुबंध या कॉन्ट्रैक्ट है, जिसके कई अर्थ हैं, यह हिंदू विवाह की तरह कोई संस्कार नहीं और इसके टूट जाने से बने कुछ अधिकारों एवं दायित्वों से पीछे नहीं हटा जा सकता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B9--%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%82-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/article-1803"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/justice.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बेंगलुरु।</strong> कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम निकाह एक अनुबंध या कॉन्ट्रैक्ट है, जिसके कई अर्थ हैं, यह हिंदू विवाह की तरह कोई संस्कार नहीं और इसके टूट जाने से बने कुछ अधिकारों एवं दायित्वों से पीछे नहीं हटा जा सकता। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी बेंगलुरु के भुवनेश्वरी नगर में 52 साल के एजाजुर रहमान की एक याचिका पर की है, जिसमें 12 अगस्त, 2011 को बेंगलुरु में एक पारिवारिक अदालत के प्रथम अतिरिक्त प्रिंसिपल न्यायाधीश का आदेश रद्द करने का अनुरोध किया गया था।<br /> <br /> <br /> उल्लेखनिय है कि रहमान ने अपनी पत्नी सायरा बानो को पांच हजार रुपये के ‘मेहर’ के साथ विवाह करने के कुछ महीने बाद ही ‘तलाक’ शब्द कहकर 25 नवंबर, 1991 को तलाक दे दिया था, इस तलाक के बाद रहमान ने दूसरी शादी की। जिससे वह एक बच्चे का पिता बन गया। बानो ने इसके बाद गुजारा भत्ता लेने के लिए 24 अगस्त, 2002 में एक दीवानी मुकदमा दाखिल किया था, पारिवारिक अदालत ने आदेश दिया था कि वादी वाद की तारीख से अपनी मृत्यु तक या अपना पुनर्विवाह होने तक या प्रतिवादी की मृत्यु तक 3,000 रुपये की दर से मासिक गुजारा भत्ते की हकदार है।<br /> <br /> <br /> न्यायमूर्ति कृष्णा एस दीक्षित ने याचिका खारिज करते हुए 25,000 रुपये के जुर्माने के साथ 7 अक्टूबर को अपने आदेश में कहा कि निकाह एक अनुबंध है जिसके कई अर्थ हैं, यह हिंदू विवाह की तरह एक संस्कार नहीं है, यह बात सत्य है। न्यायमूर्ति दीक्षित ने विस्तार से कहा कि मुस्लिम निकाह कोई संस्कार नहीं है और यह इसके समाप्त होने के बाद पैदा हुए कुछ दायित्वों एवं अधिकारों से भाग नहीं सकता।<br /> <br /> पीठ ने कहा कि तलाक के जरिए विवाह बंधन टूट जाने के बाद भी दरअसल पक्षकारों के सभी दायित्वों एवं कर्तव्य पूरी तरह समाप्त नहीं होते हैं’’ उसने कहा कि मुसलमानों में एक अनुबंध के साथ निकाह होता है और यह अंतत: वह स्थिति प्राप्त कर लेता है, जो आमतौर पर अन्य समुदायों में होती है। अदालत ने कहा कि यही स्थिति कुछ न्यायोचित दायित्वों को जन्म देती है, वे अनुबंध से पैदा हुए दायित्व हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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