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                <title>rights - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मतदाता अधिकारों पर कांग्रेस का बड़ा बयान, वोटिंग को  मौलिक अधिकार का दर्जा देने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 'मतदान के अधिकार' को वैधानिक के बजाय मौलिक अधिकार बनाने की वकालत की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि इससे मतदाताओं को सर्वोच्च संवैधानिक और न्यायिक संरक्षण मिलेगा, जिससे मनमाने ढंग से अयोग्य ठहराने और मतदाता दमन जैसी कोशिशों पर रोक लगेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congresss-big-statement-on-voter-rights-advocating-for-making-voting/article-157658"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/jairam-ramesh-2-(2).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा देने की मांग करते हुए रविवार को कहा कि इससे इस अधिकार को सर्वोच्च स्तर का संवैधानिक और न्यायिक संरक्षण प्राप्त होगा। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर एक बयान में कहा कि भारत में मतदान का अधिकार फिलहाल मौलिक नहीं बल्कि वैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का प्रावधान किया गया है जबकि मतदान की व्यवस्था जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951 के तहत संचालित होती है।</p>
<p>रमेश ने कहा कि पिछले सात दशकों से इस बात पर बहस जारी है कि मतदान का अधिकार केवल वैधानिक अधिकार है अथवा इसे मौलिक अधिकार का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने मार्च 2023 में 'अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ' मामले में न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी के असहमति वाले फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया था। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय मतदाताओं को उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों, वित्तीय हितों और राजनीतिक चंदे के स्रोतों के बारे में जानने के अधिकार, मतपत्र की गोपनीयता तथा 'नोटा' के माध्यम से सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार करने के अधिकार को मान्यता दे चुका है। ऐसे में मतदान के अधिकार को केवल वैधानिक अधिकार बने रहना विसंगति है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा दिए जाने से मतदाता दमन अथवा मनमाने ढंग से अयोग्य ठहराए जाने जैसे मामलों के खिलाफ अधिक प्रभावी संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 17:45:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>समान नागरिक संहिता से आदिवासी समुदाय को कोई नुकसान नहीं, हर व्यक्ति को आत्म-सम्मान के साथ जीने का अधिकार : अमित शाह</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रामलीला मैदान में आदिवासियों को आश्वस्त किया कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। मोदी सरकार ने गुजरात और उत्तराखंड में आदिवासियों को इससे बाहर रखा है। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर आयोजित इस समागम में धर्मांतरण और आरक्षण जैसे मुद्दे भी उठे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/uniform-civil-code-causes-no-harm-to-tribal-community-every/article-154921"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/amit-shah.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आदिवासी समुदाय के लोगों से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) नहीं डरने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें इससे कोई नुकसान नहीं होगा। शाह ने यहां के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 'तू-मैं एक रक्त, वनवासी-ग्रामवासी-नगरवासी, हम सब भारतवासी' नाम से आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम को संबोधित करते हुए कहा, "यह समागम आने वाले वर्षों तक जनजातियों के 'महाकुंभ' के रूप में जाना जाएगा। आप देश के दूर-दराज के इलाकों से, पारंपरिक वेशभूषा में, अपने वाद्य यंत्रों के साथ और अपनी संस्कृति के गीत गाते हुए यहाँ आए हैं, तो मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूँ कि मैंने अपने जीवन में कभी भगवान बिरसा मुंडा को नहीं देखा, लेकिन आज भगवान बिरसा मुंडा साक्षात मेरे सामने प्रकट हुए हैं। मैं आप सभी को नमन करता हूँ। "</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारे संविधान निर्माताओं ने हर व्यक्ति को अपने मूल धर्म में आत्म-सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया है। लोगों को लालच देकर किसी का धर्म बदलने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। अब हमें दिल्ली की इस धरती से अपने धर्म की रक्षा करने की शपथ लेनी चाहिए और यह हमें हमारी संस्कृति और हमारे देश से जोड़े रखेगी।" केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, "मैं मध्य प्रदेश और गुजरात से आए अपने सभी भाइयों और बहनों का, मध्य प्रदेश और गुजरात के भील और मुंडा समुदायों का, छत्तीसगढ़ के गोंड और कोलाम समुदायों का, झारखंड और ओडिशा के संथाल और उरांव समुदायों का, पूर्वोत्तर के बोडो, कार्बी, दिमासा, खासी, गारो और चकमा समुदायों का, और आंध्र प्रदेश के चेंचु समुदायों का तहे दिल से स्वागत करता हूँ। मैं दोनों संगठनों का गहरा आभार व्यक्त करना चाहता हूँ कि उन्होंने मुझे अपने जीवनकाल में इस अद्भुत आयोजन का साक्षी बनने का यह अवसर दिया।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाई जा रही है। यह जल, यह वन और ये पहाड़ हमारे आदिवासी भाइयों की आजीविका का स्रोत हैं और एक अभेद्य दुर्ग हैं जो उनकी पहचान और संस्कृति की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा, "आज यदि दुनिया में कोई ऐसा मॉडल है जो सबसे अधिक टिकाऊ है, तो वह हमारे जनजातीय समुदायों द्वारा बनाया गया मॉडल है और हम इसकी रक्षा के लिए आगे आए हैं। सभी जनजातियों ने बिना किसी लिखित नियम के 'अनेकता में एकता' और 'एकता में अनेकता' के मंत्र को साकार करने का काम किया है।"</p>
<p>शाह ने कहा, "हज़ारों साल पहले त्रेता युग में भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाकर हमें बहुत साफ़ तौर पर यह समझाया था कि हम सब एक हैं। जो लोग हमें बाँटना चाहते हैं, वे यह नहीं जानते कि जब निषाद राज ने मदद का हाथ बढ़ाया, तो भगवान राम ने उन्हें अपना परम मित्र बनाकर वनवासियों का सम्मान किया था। आज का यह सम्मेलन और यहाँ मौजूद लाखों आदिवासी लोग उन लोगों के लिए एक बड़ा संदेश हैं, जो फूट डालने का काम कर रहे हैं।"</p>
<p>उन्होंने " समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर एक साजिश शुरू हुई है कि इसके जरिये आदिवासी लोगों को उनकी संस्कृति, उनकी परंपराओं, उनके रीति-रिवाजों और उनके जीने के अधिकार से वंचित कर देगा। आज, नरेन्द्र मोदी सरकार के गृह मंत्री के तौर पर मैं इस मंच से यह साफ़ कर देना चाहता हूँ कि यूसीसी की कोई भी पाबंदी आदिवासी समुदाय या आदिवासी व्यक्तियों पर नहीं लगाई जाएगी। यूसीसी किसी भी आदिवासी अधिकार का उल्लंघन नहीं करेगा। हमने दो राज्यों में यूसीसी लागू किया है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है विशेषकर गुजरात और उत्तराखंड विशेष प्रावधान करके नरेन्द्र मोदी सरकार ने सभी आदिवासी समुदायों को यूसीसी से बाहर रखा है। इस संदेश के साथ अपने गाँवों, पहाड़ों, जंगलों में जाएँ और सभी आदिवासी समुदायों को जागरूक करें कि यूसीसी से डरने की कोई ज़रूरत नहीं है।"</p>
<p>आयोजकों ने इस आयोजन को आदिवासी पहचान और 'राष्ट्रीय एकता' की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के रूप में पेश किया है, जिसका नारा है 'तू मैं एक रक्त, वनवासी-ग्रामवासी-नगरवासी, हम सब भारतवासी.' जेएसएम के एक पदाधिकारी ने बताया कि प्रतिभागियों से देश के विभिन्न हिस्सों से पारंपरिक परिधानों में आने की उम्मीद है, जबकि दिल्ली में स्वयंसेवकों ने 20 अलग-अलग समितियों के माध्यम से आवास, भोजन, परिवहन और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था की है. भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर आयोजित इस कार्यक्रम में पारंपरिक वेशभूषा में देश के कोने-कोने से जनजाति समाज के लोग राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे और लोक संस्कृति के साथ शोभा यात्रा निकाली। इस समागम का आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े 'वनवासी कल्याण आश्रम' ने किया था, जिसमें कई संवेदनशील मुद्दे उठाये गये। इस समागम का सबसे बड़ा मुद्दा धर्मांतरण का रहा। </p>
<p>समागम में आये जनजातीय समाज के लोगों का कहना था कि धर्म परिवर्तन के बाद भी कुछ लोग आदिवासी आरक्षण का लाभ ले रहे हैं, जिससे मूल जनजातीय समाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। इसके अलावा फर्जी अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाण पत्र, आदिवासियों की जमीनों पर कब्ज़ा और तथाकथित 'लव जिहाद' और 'लैंड जिहाद' जैसे मुद्दे उठाये। समागम के आयोजकों का कहना था कि कुछ विदेशी ताकतें और मिशनरी संगठन आदिवासियों को उनकी सांस्कृतिक पहचान से अलग करने की कोशिश कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 May 2026 13:19:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>डीके सुरेश का केंद्र पर हमला: कांग्रेस बंगाल की तरह कर्नाटक में नहीं देगी SIR की अनुमति, कार्यकर्ताओं के लिए जागरूकता बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व सांसद डी.के. सुरेश ने कहा कि कांग्रेस कर्नाटक में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) को पश्चिम बंगाल की तरह लागू नहीं होने देगी, क्योंकि इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की। साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार पर चुनावी प्रक्रिया और अर्थव्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/dk-sureshs-attack-on-the-centre-congress-will-not-allow/article-154230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/west-bengal-sir.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। पूर्व सांसद डी. के. सुरेश ने सोमवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) जिस तरह पश्चिम बंगाल में लागू की गयी, कांग्रेस कर्नाटक में उस तरह इसे लागू नहीं होने देगी, क्योंकि इससे मतदाताओं के अधिकारों पर असर पड़ सकता है। सुरेश ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को अपने मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एसआईआर प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति से निपटने और राज्य में मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए जागरूकता बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही है। चुनाव आयोग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग उनके हाथों में है। हमें नहीं पता कि वे क्या करेंगे।” साथ ही उन्होंने प्रस्तावित चुनावी प्रक्रिया को लेकर आशंका व्यक्त की।</p>
<p>डी के सुरेश ने आरोप लगाया कि 12 साल सत्ता में रहने के बावजूद केंद्र सरकार ने ‘दो औद्योगिक घरानों’ के हितों की रक्षा के लिए आम जनता पर बोझ डाल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया, “ केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने ये टिप्पणियां किस संदर्भ में कीं। अगर अर्थव्यवस्था संकट में है, तो इसके लिए उनकी सरकार जिम्मेदार है।” भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं को भ्रष्टाचार के आरोपों में फंसाया जाता है, लेकिन सत्ताधारी पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें ‘वाशिंग मशीन’ में धो दिया जाता है। ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर सुरेश ने कहा कि केंद्र को यह स्पष्ट करना होगा कि ऐसी व्यवस्था में शासन और न्याय व्यवस्था कैसे काम करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक साथ चुनाव कराना ‘बार-बार राजनीतिक अभियान चलाने के बजाय एक ही झटके में सब कुछ खत्म करने’ का प्रयास है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 17:41:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ग्रेट निकोबार परियोजना पर कांग्रेस ने जताई चिंता: जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री को लिखा पत्र, आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर ग्रेट निकोबार परियोजना के मौजूदा स्वरूप पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर व्यावसायिक बदलावों से पर्यावरण और आदिवासियों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए वैकल्पिक सैन्य परिसंपत्तियों के विस्तार का सुझाव दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-expressed-concern-over-the-great-nicobar-project-jairam-ramesh/article-154130"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/jairam-ramesh2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने ग्रेट निकोबार परियोजना के मौजूदा स्वरूप पर राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुनर्विचार की आवश्यकता जताते हुए कहा है कि इससे पर्यावरणीय नुकसान तथा आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन की आशंका है। पार्टी का कहना है कि वह लगातार इस संबंध में सरकार को अवगत करा रही है, लेकिन उसकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने रविवार को बताया कि उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम को पत्र लिखने के बाद अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि सरकार एक व्यावसायिक परियोजना को सुरक्षा जरूरतों के आधार पर उचित ठहराने की कोशिश कर रही है, जबकि इसके पर्यावरणीय प्रभावों तथा आदिवासी हितों पर पड़ने वाले असर को लेकर लगातार आलोचना हो रही है।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि देश की रक्षा क्षमता मजबूत करने पर कोई मतभेद नहीं है, लेकिन ग्रेट निकोबार के कैंपबेल बे स्थित आईएनएस बाज के रनवे विस्तार और नौसैनिक जेट्टी जैसी योजनाएं कम पर्यावरणीय नुकसान के साथ बेहतर विकल्प हो सकती हैं। उन्होंने आईएनएस कार्दीप, आईएनएस कोहासा, आईएनएस उत्क्रोश, आईएनएस जरावा और कार निकोबार वायुसेना स्टेशन जैसी मौजूदा सैन्य परिसंपत्तियों के विस्तार का भी सुझाव दिया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि परियोजना में प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट और टाउनशिप से सैन्य क्षमता नहीं बढ़ती, फिर भी इन्हें सुरक्षा कारणों से उचित ठहराया जा रहा है। उन्होंने रक्षा मंत्री से परियोजना के मौजूदा स्वरूप पर पुनर्विचार करने और नौसेना अधिकारियों द्वारा सुझाए गए विकल्पों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 13:08:29 +0530</pubDate>
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                <title>'अवास्तविक मांगों' पर अड़े इजरायल की सोच से प्रभावित अमेरिका: बघाई ने कहा- क्या पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करना गैर-जिम्मेदाराना  </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अपने शांति प्रस्ताव को "तार्किक" बताते हुए अमेरिकी रुख की आलोचना की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे केवल संपत्ति की मुक्ति और समुद्री सुरक्षा जैसे वैध अधिकार मांग रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रस्ताव को "अस्वीकार्य" बताने के बाद ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका अब भी इजरायली दबाव में काम कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-is-adamant-on-unrealistic-demands-impressed-by-israels-thinking/article-153426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के लिए  ईरान ने कहा है कि उसका प्रस्ताव "उदार और तार्किक" था, जबकि अमेरिका अब भी इजरायल की सोच से प्रभावित "अवास्तविक मांगों" पर अड़ा हुआ है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को अपने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ईरान की ओर से अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में जो योजना भेजी गयी, वह "हद से ज्यादा" नहीं थी और उसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता स्थापित करना था।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमने किसी प्रकार की रियायत की मांग नहीं की। हमने केवल ईरान के वैध अधिकारों की बात की है।" बघाई ने सवाल किया कि क्या क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने, ईरानी जहाजों के खिलाफ "समुद्री डकैती" रोकने तथा वर्षों से अवरुद्ध ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने की मांग अनुचित कही जा सकती है। उन्होंने कहा, "क्या होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का हमारा प्रस्ताव अवास्तविक है? क्या पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करना गैर-जिम्मेदाराना है?"</p>
<p>इससे पूर्व, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा और उसे "पूरी तरह अस्वीकार्य" पाया। राष्ट्रपति ट्रंप ने समाचार पोर्टल एक्सियोस को दिए साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने ईरान के जवाब पर बेंजमिन नेतन्याहू से भी चर्चा की है। ईरान ने रविवार को अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में अपना औपचारिक प्रस्ताव भेजा था। ईरान पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि मौजूदा चरण में वार्ता का केंद्र केवल क्षेत्रीय युद्ध समाप्त करना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 15:48:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खड़गे का केंद्र पर तीखा हमला: मजदूर विरोधी लेबर कोड लागू कर सरकार ने श्रमिकों के अधिकारों का किया खनन, बोले-सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 केवल कागजी औपचारिकता</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार द्वारा 'चुपके से' लागू किए गए चार लेबर कोड की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे 'हायर एंड फायर' वाली उद्योगपति-हितैषी नीति बताते हुए कहा कि इससे करोड़ों मजदूरों के हड़ताल और यूनियन अधिकारों का हनन होगा। कांग्रेस ने न्यूनतम मजदूरी ₹400 करने और श्रमिक न्याय का संकल्प दोहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kharges-sharp-attack-on-the-center-said-that-the-government/article-153374"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/kharge.png-2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को लागू करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने “कायरतापूर्ण तरीके” से 8 और 9 मई 2026 को गजट अधिसूचनाओं के जरिए इन श्रमिक विरोधी कानूनों को लागू किया। खड़गे ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि ये कानून करोड़ों मजदूरों के लिए “हायर एंड फायर”, रोजगार और यूनियन अधिकारों में कटौती का रास्ता खोलते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बिना किसी व्यापक चर्चा और श्रमिक संगठनों से सलाह-मशविरा किए इन कानूनों को लागू किया। उन्होंने कहा कि 2015 के बाद से भारतीय श्रम सम्मेलन तक नहीं बुलाया गया और ये श्रम संहिताएं केवल केंद्र सरकार के “उद्योगपति मित्रों” को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वेतन संहिता, 2019 के तहत न्यूनतम मजदूरी तय करने के पुराने मानकों को खत्म कर दिया गया है, जिससे मजदूरों की मजदूरी मनमाने तरीके से तय हो सकेगी। साथ ही नई व्यवस्था में कर्मचारियों की वेतन घटने का खतरा पैदा हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि “व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता, 2020” कार्यस्थल सुरक्षा को कमजोर करता है और गंभीर दुर्घटनाओं में भी कंपनियों को सिर्फ जुर्माना देकर बच निकलने का रास्ता देता है। वहीं महिलाओं की सुरक्षा और श्रमिकों के अधिकारों को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि “सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020” असंगठित क्षेत्र के 90 प्रतिशत श्रमिकों के लिए केवल “कागजी औपचारिकता” बनकर रह गया है, जबकि गिग वर्कर्स के लिए भी ठोस सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं दी गई। खड़गे ने आरोप लगाया कि “औद्योगिक संबंध संहिता, 2020” के जरिए 300 कर्मचारियों तक वाली कंपनियों को बिना सरकारी अनुमति कर्मचारियों की छंटनी की छूट दे दी गई है और हड़ताल के अधिकार को भी लगभग खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी “श्रमिक न्याय” एजेंडा के तहत मनरेगा का विस्तार, 400 रुपये प्रतिदिन राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा, असंगठित मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सरकारी कार्यों में ठेका प्रथा समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 11:47:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पंजाब औरंगज़ेब के जुल्मों के आगे नहीं झूका, केंद्र सरकार के आगे भी नहीं झूकेगा : भगवंत मान</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का तीखा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब गुरुओं और शहीदों की धरती है, जो किसी दबाव में नहीं आएगी। मान ने चंडीगढ़ विवाद, लंबित फंड और संजीव अरोड़ा पर ईडी रेड को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए संघीय ढांचे की रक्षा का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/punjab-did-not-bow-down-before-the-atrocities-of-aurangzeb/article-153271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cm-maan.png" alt=""></a><br /><p>संगरूर। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शनिवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब कभी भी डराने, धमकाने और बदले की राजनीति के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि पंजाब गुरुओं, संतों और शहीदों की धरती है, जो औरंगज़ेब के अत्याचारों के सामने नहीं झुकी थी और केद्र सरकार के सामने भी नहीं झुकेगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सीबीआई, आयकर विभाग और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल गैर-भाजपा शासित राज्यों, खासकर पंजाब, के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घर एक साल में तीन बार और एक महीने में दो बार छापेमारी की गयी, लेकिन कुछ बरामद नहीं हुआ। इसके बावजूद बार-बार कार्रवाई केवल दबाव बनाने और विरोधियों को डराने के लिए की जा रही है। </p>
<p>मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का संदेश साफ है, या तो पार्टी में शामिल हो जाओ या एजेंसियों की कार्रवाई झेलो। उन्होंने दावा किया कि कई नेताओं पर छापे पड़ने के बाद जब वे पार्टी में शामिल हुए तो कार्रवाई रुक गयी। सीएम मान ने कहा कि पंजाब ने पहले भी अन्याय का मुकाबला किया है और अब भी करेगा। उन्होंने कहा कि किसानों ने तीन काले कृषि कानून वापस करवाकर केंद्र सरकार को झुकने पर मजबूर किया था, इसलिए अब पंजाब से बदला लेने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर पंजाब के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चंडीगढ़, भाखड़ा, नदी जल विवाद, पंजाब यूनिवर्सिटी और हजारों करोड़ रुपये के लंबित फंडों के मुद्दे पर पंजाब के साथ अन्याय किया जा रहा है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा में सबसे बड़ा योगदान देता है और पंजाबी नौजवान सीमाओं की रक्षा करते हैं, फिर भी राज्य को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब की मिट्टी में हर बीज उग सकता है, लेकिन नफरत का बीज कभी नहीं उग सकता। हिंदू-सिख भाईचारे को तोड़ने की कोशिशें यहां कभी सफल नहीं होंगी। सीएम मान ने गुरु ग्रंथ साहिब के सम्मान के लिए बनाये गये एंटी-बेअदबी कानून का बचाव करते हुए कहा कि यह कानून धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों को कड़ी सजा देने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस कानून को दुनिया भर की संगत का समर्थन मिला है और इसे वापस लेने का कोई सवाल नहीं है। भगवंत मान ने कहा कि राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून लागू हो चुका है और पंजाब सरकार इस पर किसी दबाव में पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने ‘शुकराना यात्रा’ को जनता का समर्थन मिलने का दावा करते हुए कहा कि इस यात्रा से ध्यान हटाने के लिए ईडी छापे, नोटिस और विवाद खड़े किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी कहा कि केंद्र सरकार देश के संवैधानिक ढांचे को कमजोर कर रही है और संस्थाओं का दुरुपयोग अपने राजनीतिक हितों के लिए कर रही है। उन्होंने दोहराया कि पंजाब न झुकेगा और न रुकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:55:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>डी.के. शिवकुमार का राज्यपाल पर निशाना, बोले- वाजपेयी को मौका मिल सकता है, तो टीवीके को क्यों नहीं ? </title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने तमिलनाडु में TVK को सरकार बनाने का मौका न देने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि बहुमत का फैसला केवल सदन में होना चाहिए। उन्होंने राज्यपाल से लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी को अवसर देने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-reports-of-not-being-given-a-chance-to-form/article-153139"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tvk1.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को तमिलनाडु में टीवीके को सरकार बनाने का अवसर न दिए जाने की रिपोर्टाें पर सवाल उठाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि बहुमत की परीक्षा केवल सदन में ही होनी चाहिए। शिवकुमार ने तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा बहुमत साबित करने के प्रयास के बावजूद टीवीके को दावा पेश करने के लिए आमंत्रित करने से कथित रूप से मना करने की आलोचना करते हुए पूछा,"क्या वाजपेयी को मौका नहीं मिला था?"</p>
<p>विधानसभा में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रथा और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने एवं विश्वास मत प्राप्त करने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "राज्यपाल को सरकार बनाने की अनुमति देनी चाहिए। कर्नाटक में भी बी एस येदियुरप्पा को सरकार बनाने की अनुमति दी गई थी। अधिक संख्या वाली पार्टियों को हमेशा अपना बहुमत साबित करने का मौका दिया जाता रहा है।"</p>
<p>डी.के. शिवकुमार ने अतीत के उदाहरणों से तुलना करते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भी इसी तरह लोकतांत्रिक परंपरा का पालन करते हुए पहले सरकारों के गठन की अनुमति दी और बाद में संसद में उनका परीक्षण किया। उन्होंने कहा, "बहुमत एक वोट से भी प्राप्त किया जा सकता है या गंवाया जा सकता है। क्या वाजपेयी के मामले में ऐसा नहीं हुआ? सबसे पहले, बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए। अगर संख्या पर्याप्त नहीं होती है तो अगले विकल्प पर विचार किया जा सकता है।"</p>
<p>राज्यपाल की कथित कार्रवाई को गलत बताते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, "यह लोकतंत्र है। सदन में ही यह तय होना चाहिए कि किसके पास बहुमत है।" एक अन्य मुद्दे पर, डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार प्रस्तावित बेंगलुरु नॉर्थ कॉर्पोरेशन कार्यालय के लिए तीन से चार स्थानों पर विचार कर रही है और स्थलों के निरीक्षण के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गांधी कृषि विज्ञान केंद्र फिलहाल इस परियोजना के लिए विचाराधीन नहीं है। कांग्रेस नेताओं सतीश जार की होली और लक्ष्मी हेब्बलकर के साथ अपनी हालिया मुलाकात की बात करते हुए उन्होंने कहा कि चर्चा बेलगावी जिले में सिंचाई परियोजनाओं से संबंधित थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:55:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नवीन पटनायक का केंद्र पर हमला : सरकार सशक्तिकरण के लिए कोई ठोस कदम उठाने में रही नाकाम, महिलाओं के मुद्दों पर ‘मगरमच्छ के आंसू’ बहाने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ओडिशा विधानसभा में भाजपा सरकार पर महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने को राजनीतिक चाल बताया। पटनायक ने बीजद की 50% आरक्षण की विरासत को दोहराते हुए भाजपा को महिलाओं के कल्याण के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता दिखाने की चुनौती दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/naveen-patnaik-attacks-the-center-and-accuses-the-government-of/article-152204"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/naveen-pat.png" alt=""></a><br /><p>भुवनेश्वर। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने गुरुवार को राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया और आरोप लगाया कि वह महिलाओं के अधिकारों के बारे में सिर्फ़ ज़ुबानी बातें करती है, उनके सशक्तिकरण के लिए कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम रही है। ओडिशा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी पर हुई बहस में हिस्सा लेते हुए पटनायक ने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर झूठे आख्यान गढ़कर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि लोगों को हमेशा के लिए धोखा नहीं दिया जा सकता। ओडिशा में महिलाओं के कल्याण की असलियत भाजपा के दावों से बिल्कुल अलग है। विधायिका में महिला आरक्षण और परिसीमन ने जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का ज़िक्र करते हुए, पटनायक ने कहा कि दो अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा हो रही है। पहला नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 जिसे संसद में सर्वसम्मति से पारित किया गया था और दूसरा परिसीमन की प्रक्रिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से ही पारित हो चुके महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ना एक ‘गुपचुप चाल’ है, जिसका मकसद इसके प्रभावों पर पर्याप्त चर्चा किए बिना परिसीमन को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि बीजू जनता दल (बीजद) ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक का पूरी तरह समर्थन किया था और अब भी इसको तत्काल लागू करने की मांग कर रही है।</p>
<p>महिलाओं के सशक्तिकरण में ओडिशा की विरासत पर प्रकाश डालते हुए पटनायक ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के नेतृत्व में यह राज्य देश के उन पहले राज्यों में से एक था, जिसने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया था। उन्होंने कहा कि 2011 में उनकी सरकार ने इस आरक्षण बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया, जिससे जमीनी स्तर पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी बढ़ गया।</p>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजद ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में महिला उम्मीदवारों को अपने 33 प्रतिशत टिकट दिये थे। उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि वह भी इसी तरह की प्रतिबद्धता दिखाये। उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे अपने हालिया पत्र और ओडिशा के 21 सांसदों से की गयी अपनी अपील का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें महिलाओं के अधिकारों और ओडिशा के राजनीतिक हितों पर बीजद का रुख स्पष्ट रूप से बताया गया है।</p>
<p>भाजपा के कथित ‘गलत सूचना अभियान’ पर चिंता व्यक्त करते हुए पटनायक ने कहा कि यह मुद्दा ओडिशा की विशिष्ट पहचान और राजनीतिक आवाज से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया से ओडिशा के लोगों, विशेष रूप से आने वाली पीढ़ियों के राजनीतिक अधिकार कम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास उन नेताओं को कभी माफ नहीं करेगा जिन्होंने राज्य के हितों की रक्षा किये बिना ऐसे कदम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जब तक वह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगे, तब तक किसी को भी ओडिशा को उसके हक से वंचित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने भाजपा विधायकों पर महिलाओं के मुद्दों पर ‘मगरमच्छ के आंसू’ बहाने का आरोप लगाया और कहा कि उनके कल्याण के प्रति उनमें कोई प्रतिबद्धता दिखाई नहीं देती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:55:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>लद्दाख का विकास स्थानीय हितों के अनुरूप हो : राहुल गांधी का आरोप, बोले-लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का हो रहा प्रयास </title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लद्दाख में लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र को 'पुलिस राज' में बदल दिया गया है और उद्योगपतियों के लाभ के लिए नाजुक पर्यावरण से समझौता हो रहा है। उन्होंने गृह मंत्री से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और भूमि संरक्षण सुनिश्चित करने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/development-of-ladakh-should-be-in-accordance-with-local-interests/article-152228"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-gandhii.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि लद्दाख में लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का प्रयास हो रहा है और वहां के लोगों की आवाज़ को दबाया जा रहा है। राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि लद्दाख के युवाओं ने उन्हें बताया है कि किस तरह से उनके क्षेत्र को एक तरह के 'पुलिस राज' में बदल दिया गया है। वहां लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है और स्थानीय लोगों की आवाज़ को दबाया जा रहा है। उन्होंने यह भी लिखा कि लद्दाख की ज़मीन और नाज़ुक पर्यावरण को कथित रूप से बड़े उद्योगपतियों के हितों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ी है।</p>
<p>राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि लद्दाख के लोग विकास के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे ऐसा विकास चाहते हैं जो स्थानीय समुदाय को रोज़गार और आर्थिक लाभ पहुंचाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि गृह मंत्री अमित शाह अपने प्रस्तावित दौरे में क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को समझेंगे और वहां के लोगों की चिंताओं पर ध्यान देंगे। गौरतलब है कि लद्दाख में हाल के वर्षों में राजनीतिक अधिकारों, ज़मीन और विकास मॉडल को लेकर असंतोष बढ़ा है। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के बाद केंद्र शासित प्रदेश बनने से वहां विधानसभा नहीं है, जिससे स्थानीय लोग अपने अधिकार सीमित होने की बात कहते हैं। इसके साथ ही वहां के लोग बाहरी निवेश और बड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर ज़मीन, रोज़गार और नाज़ुक पर्यावरण पर इसके असर की आशंका भी जता रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:32:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>20 हफ्ते प्रेग्नेंट नाबालिग को अबॉर्शन की इजाजत : सुप्रीम कोर्ट बोला-बलात्कार पीड़िताओं के लिए पुनर्विचार की जरूरत, डिलीवरी के लिए नहीं कर सकते मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार पीड़िताओं के गर्भपात कानून में बदलाव की वकालत की है। अदालत ने कहा कि नाबालिगों के लिए 20 सप्ताह की सीमा न्याय में बाधा नहीं बननी चाहिए। पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनचाहा गर्भ किसी पर थोपा नहीं जा सकता और अंतिम निर्णय पीड़िता का होना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/abortion-allowed-to-20-weeks-pregnant-minor-supreme-court-said/article-152185"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/supreme_court__1_1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें एक 15 वर्षीय नाबालिग के 30 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति देने वाले दो न्यायाधीशों की पीठ के एक आदेश को चुनौती दी गयी थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने गर्भपात की अनुमति देते हुए एम्स को प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि एम्स अपना निर्णय (कि गर्भपात नहीं किया जाना चाहिए) मां पर नहीं थोप सकता और महिला के पास निर्णय लेने का विकल्प होना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की, "अवांछित गर्भ का बोझ महिला पर नहीं डाला जा सकता।"</p>
<p>न्यायालय ने एम्स के डॉक्टरों को नाबालिग और उसके परिवार की काउंसलिंग करने तथा उन्हें प्रासंगिक मेडिकल रिपोर्ट और जानकारी साझा करने की स्वतंत्रता दी है, ताकि वे यह तय कर सकें कि गर्भावस्था को जारी रखना है या गर्भपात का विकल्प चुनना है।</p>
<p>इससे पहले 24 अप्रैल को न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने गर्भपात की अनुमति दी थी। कल बुधवार को इसी पीठ ने एम्स की समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए कहा था, "यह अजीब है कि याचिकाकर्ता एम्स उच्चतम न्यायालय के आदेश को मानने को तैयार नहीं है और इसके बजाय नाबालिग के संवैधानिक अधिकारों को विफल करने के लिए अदालत के आदेश को ही चुनौती दे रहा है।"</p>
<p>उच्चतम न्यायालय की डांट खाने के बावजूद एम्स ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे और मामले में उपचारात्मक याचिका दायर कर दी। इसे मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष तत्काल रखा गया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि डॉक्टर अजन्मे बच्चे पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जबकि उस मां पर ध्यान नहीं दे रहे जो एक दर्द से गुजर रही है। उन्होंने कहा, "बच्चे पर बहुत अधिक ध्यान दिया जा रहा है और उस मां पर नहीं जिसने इतना कष्ट झेला है।"</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:08:05 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस ने चार दशकों से महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित रखा, जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी : अरूण साव  </title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दलों ने दशकों तक महिलाओं को अधिकारों से वंचित रखा। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के खिलाफ कांग्रेस के रुख को विश्वासघात बताया। साव ने विधानसभा के विशेष सत्र के माध्यम से महिलाओं की आवाज बुलंद करने और प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प को पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-deprived-women-of-their-rights-for-four-decades-public/article-151227"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/arun-saw.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस ने चार दशकों से महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा है और इस गलती के लिए जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने आज रायपुर के न्यूज सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने पिछले चार दशकों से महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित रखा है। वास्तव में यह देश की आधी आबादी के साथ अन्याय और धोखा है। उन्होंने कहा कि जब नगरीय निकायों एवं पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण मिला हुआ है तो उन्हें विधानसभा और लोकसभा में आरक्षण क्यों नहीं मिलना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने प्रयत्न किया कि आधी आबादी को उनका अधिकार मिले। लेकिन कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने षड्यंत्र करके नारी शक्ति को फिर से उनके अधिकार से वंचित किया है। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से उनकी आवाज को और बुलंद करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने महिलाओं को अधिकार संकल्प लिया है। इसे पूरा करने हम लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ेंगे। साव ने कहा कि ये कितनी हास्यास्पद बात है कि छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ लोगों की उपेक्षा करके जिस रंजीता रंजन को राज्यसभा में भेजा गया, वही रंजीता रंजन जी आज छत्तीसगढ़ आ रही हैं। जिसने संसद में बिल के खिलाफ समर्थन कर छत्तीसगढ़ के माताएं और बहनों को अधिकार से वंचित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 17:28:52 +0530</pubDate>
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