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                <title>'अवास्तविक मांगों' पर अड़े इजरायल की सोच से प्रभावित अमेरिका: बघाई ने कहा- क्या पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करना गैर-जिम्मेदाराना  </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अपने शांति प्रस्ताव को "तार्किक" बताते हुए अमेरिकी रुख की आलोचना की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे केवल संपत्ति की मुक्ति और समुद्री सुरक्षा जैसे वैध अधिकार मांग रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रस्ताव को "अस्वीकार्य" बताने के बाद ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका अब भी इजरायली दबाव में काम कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-is-adamant-on-unrealistic-demands-impressed-by-israels-thinking/article-153426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के लिए  ईरान ने कहा है कि उसका प्रस्ताव "उदार और तार्किक" था, जबकि अमेरिका अब भी इजरायल की सोच से प्रभावित "अवास्तविक मांगों" पर अड़ा हुआ है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को अपने साप्ताहिक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ईरान की ओर से अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में जो योजना भेजी गयी, वह "हद से ज्यादा" नहीं थी और उसका उद्देश्य पूरे क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता स्थापित करना था।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमने किसी प्रकार की रियायत की मांग नहीं की। हमने केवल ईरान के वैध अधिकारों की बात की है।" बघाई ने सवाल किया कि क्या क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने, ईरानी जहाजों के खिलाफ "समुद्री डकैती" रोकने तथा वर्षों से अवरुद्ध ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने की मांग अनुचित कही जा सकती है। उन्होंने कहा, "क्या होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का हमारा प्रस्ताव अवास्तविक है? क्या पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा स्थापित करना गैर-जिम्मेदाराना है?"</p>
<p>इससे पूर्व, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा और उसे "पूरी तरह अस्वीकार्य" पाया। राष्ट्रपति ट्रंप ने समाचार पोर्टल एक्सियोस को दिए साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने ईरान के जवाब पर बेंजमिन नेतन्याहू से भी चर्चा की है। ईरान ने रविवार को अमेरिकी प्रस्ताव के जवाब में अपना औपचारिक प्रस्ताव भेजा था। ईरान पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि मौजूदा चरण में वार्ता का केंद्र केवल क्षेत्रीय युद्ध समाप्त करना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 15:48:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खड़गे का केंद्र पर तीखा हमला: मजदूर विरोधी लेबर कोड लागू कर सरकार ने श्रमिकों के अधिकारों का किया खनन, बोले-सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 केवल कागजी औपचारिकता</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार द्वारा 'चुपके से' लागू किए गए चार लेबर कोड की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे 'हायर एंड फायर' वाली उद्योगपति-हितैषी नीति बताते हुए कहा कि इससे करोड़ों मजदूरों के हड़ताल और यूनियन अधिकारों का हनन होगा। कांग्रेस ने न्यूनतम मजदूरी ₹400 करने और श्रमिक न्याय का संकल्प दोहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kharges-sharp-attack-on-the-center-said-that-the-government/article-153374"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/kharge.png-2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को लागू करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने “कायरतापूर्ण तरीके” से 8 और 9 मई 2026 को गजट अधिसूचनाओं के जरिए इन श्रमिक विरोधी कानूनों को लागू किया। खड़गे ने सोमवार को बयान जारी कर कहा कि ये कानून करोड़ों मजदूरों के लिए “हायर एंड फायर”, रोजगार और यूनियन अधिकारों में कटौती का रास्ता खोलते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बिना किसी व्यापक चर्चा और श्रमिक संगठनों से सलाह-मशविरा किए इन कानूनों को लागू किया। उन्होंने कहा कि 2015 के बाद से भारतीय श्रम सम्मेलन तक नहीं बुलाया गया और ये श्रम संहिताएं केवल केंद्र सरकार के “उद्योगपति मित्रों” को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि वेतन संहिता, 2019 के तहत न्यूनतम मजदूरी तय करने के पुराने मानकों को खत्म कर दिया गया है, जिससे मजदूरों की मजदूरी मनमाने तरीके से तय हो सकेगी। साथ ही नई व्यवस्था में कर्मचारियों की वेतन घटने का खतरा पैदा हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि “व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता, 2020” कार्यस्थल सुरक्षा को कमजोर करता है और गंभीर दुर्घटनाओं में भी कंपनियों को सिर्फ जुर्माना देकर बच निकलने का रास्ता देता है। वहीं महिलाओं की सुरक्षा और श्रमिकों के अधिकारों को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि “सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020” असंगठित क्षेत्र के 90 प्रतिशत श्रमिकों के लिए केवल “कागजी औपचारिकता” बनकर रह गया है, जबकि गिग वर्कर्स के लिए भी ठोस सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था नहीं दी गई। खड़गे ने आरोप लगाया कि “औद्योगिक संबंध संहिता, 2020” के जरिए 300 कर्मचारियों तक वाली कंपनियों को बिना सरकारी अनुमति कर्मचारियों की छंटनी की छूट दे दी गई है और हड़ताल के अधिकार को भी लगभग खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी “श्रमिक न्याय” एजेंडा के तहत मनरेगा का विस्तार, 400 रुपये प्रतिदिन राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा, असंगठित मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सरकारी कार्यों में ठेका प्रथा समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 11:47:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पंजाब औरंगज़ेब के जुल्मों के आगे नहीं झूका, केंद्र सरकार के आगे भी नहीं झूकेगा : भगवंत मान</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का तीखा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब गुरुओं और शहीदों की धरती है, जो किसी दबाव में नहीं आएगी। मान ने चंडीगढ़ विवाद, लंबित फंड और संजीव अरोड़ा पर ईडी रेड को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए संघीय ढांचे की रक्षा का संकल्प लिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/punjab-did-not-bow-down-before-the-atrocities-of-aurangzeb/article-153271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cm-maan.png" alt=""></a><br /><p>संगरूर। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शनिवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब कभी भी डराने, धमकाने और बदले की राजनीति के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि पंजाब गुरुओं, संतों और शहीदों की धरती है, जो औरंगज़ेब के अत्याचारों के सामने नहीं झुकी थी और केद्र सरकार के सामने भी नहीं झुकेगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), सीबीआई, आयकर विभाग और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल गैर-भाजपा शासित राज्यों, खासकर पंजाब, के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घर एक साल में तीन बार और एक महीने में दो बार छापेमारी की गयी, लेकिन कुछ बरामद नहीं हुआ। इसके बावजूद बार-बार कार्रवाई केवल दबाव बनाने और विरोधियों को डराने के लिए की जा रही है। </p>
<p>मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का संदेश साफ है, या तो पार्टी में शामिल हो जाओ या एजेंसियों की कार्रवाई झेलो। उन्होंने दावा किया कि कई नेताओं पर छापे पड़ने के बाद जब वे पार्टी में शामिल हुए तो कार्रवाई रुक गयी। सीएम मान ने कहा कि पंजाब ने पहले भी अन्याय का मुकाबला किया है और अब भी करेगा। उन्होंने कहा कि किसानों ने तीन काले कृषि कानून वापस करवाकर केंद्र सरकार को झुकने पर मजबूर किया था, इसलिए अब पंजाब से बदला लेने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर पंजाब के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चंडीगढ़, भाखड़ा, नदी जल विवाद, पंजाब यूनिवर्सिटी और हजारों करोड़ रुपये के लंबित फंडों के मुद्दे पर पंजाब के साथ अन्याय किया जा रहा है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब देश की खाद्य सुरक्षा में सबसे बड़ा योगदान देता है और पंजाबी नौजवान सीमाओं की रक्षा करते हैं, फिर भी राज्य को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब की मिट्टी में हर बीज उग सकता है, लेकिन नफरत का बीज कभी नहीं उग सकता। हिंदू-सिख भाईचारे को तोड़ने की कोशिशें यहां कभी सफल नहीं होंगी। सीएम मान ने गुरु ग्रंथ साहिब के सम्मान के लिए बनाये गये एंटी-बेअदबी कानून का बचाव करते हुए कहा कि यह कानून धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों को कड़ी सजा देने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस कानून को दुनिया भर की संगत का समर्थन मिला है और इसे वापस लेने का कोई सवाल नहीं है। भगवंत मान ने कहा कि राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून लागू हो चुका है और पंजाब सरकार इस पर किसी दबाव में पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने ‘शुकराना यात्रा’ को जनता का समर्थन मिलने का दावा करते हुए कहा कि इस यात्रा से ध्यान हटाने के लिए ईडी छापे, नोटिस और विवाद खड़े किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी कहा कि केंद्र सरकार देश के संवैधानिक ढांचे को कमजोर कर रही है और संस्थाओं का दुरुपयोग अपने राजनीतिक हितों के लिए कर रही है। उन्होंने दोहराया कि पंजाब न झुकेगा और न रुकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:55:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डी.के. शिवकुमार का राज्यपाल पर निशाना, बोले- वाजपेयी को मौका मिल सकता है, तो टीवीके को क्यों नहीं ? </title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने तमिलनाडु में TVK को सरकार बनाने का मौका न देने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि बहुमत का फैसला केवल सदन में होना चाहिए। उन्होंने राज्यपाल से लोकतांत्रिक सिद्धांतों का पालन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी को अवसर देने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-reports-of-not-being-given-a-chance-to-form/article-153139"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/tvk1.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुक्रवार को तमिलनाडु में टीवीके को सरकार बनाने का अवसर न दिए जाने की रिपोर्टाें पर सवाल उठाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए कहा कि बहुमत की परीक्षा केवल सदन में ही होनी चाहिए। शिवकुमार ने तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा बहुमत साबित करने के प्रयास के बावजूद टीवीके को दावा पेश करने के लिए आमंत्रित करने से कथित रूप से मना करने की आलोचना करते हुए पूछा,"क्या वाजपेयी को मौका नहीं मिला था?"</p>
<p>विधानसभा में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रथा और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन को सरकार बनाने एवं विश्वास मत प्राप्त करने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "राज्यपाल को सरकार बनाने की अनुमति देनी चाहिए। कर्नाटक में भी बी एस येदियुरप्पा को सरकार बनाने की अनुमति दी गई थी। अधिक संख्या वाली पार्टियों को हमेशा अपना बहुमत साबित करने का मौका दिया जाता रहा है।"</p>
<p>डी.के. शिवकुमार ने अतीत के उदाहरणों से तुलना करते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति के.आर. नारायणन और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने भी इसी तरह लोकतांत्रिक परंपरा का पालन करते हुए पहले सरकारों के गठन की अनुमति दी और बाद में संसद में उनका परीक्षण किया। उन्होंने कहा, "बहुमत एक वोट से भी प्राप्त किया जा सकता है या गंवाया जा सकता है। क्या वाजपेयी के मामले में ऐसा नहीं हुआ? सबसे पहले, बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए। अगर संख्या पर्याप्त नहीं होती है तो अगले विकल्प पर विचार किया जा सकता है।"</p>
<p>राज्यपाल की कथित कार्रवाई को गलत बताते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की जनता की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, "यह लोकतंत्र है। सदन में ही यह तय होना चाहिए कि किसके पास बहुमत है।" एक अन्य मुद्दे पर, डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार प्रस्तावित बेंगलुरु नॉर्थ कॉर्पोरेशन कार्यालय के लिए तीन से चार स्थानों पर विचार कर रही है और स्थलों के निरीक्षण के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गांधी कृषि विज्ञान केंद्र फिलहाल इस परियोजना के लिए विचाराधीन नहीं है। कांग्रेस नेताओं सतीश जार की होली और लक्ष्मी हेब्बलकर के साथ अपनी हालिया मुलाकात की बात करते हुए उन्होंने कहा कि चर्चा बेलगावी जिले में सिंचाई परियोजनाओं से संबंधित थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:55:00 +0530</pubDate>
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                <title>नवीन पटनायक का केंद्र पर हमला : सरकार सशक्तिकरण के लिए कोई ठोस कदम उठाने में रही नाकाम, महिलाओं के मुद्दों पर ‘मगरमच्छ के आंसू’ बहाने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ओडिशा विधानसभा में भाजपा सरकार पर महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने को राजनीतिक चाल बताया। पटनायक ने बीजद की 50% आरक्षण की विरासत को दोहराते हुए भाजपा को महिलाओं के कल्याण के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता दिखाने की चुनौती दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/naveen-patnaik-attacks-the-center-and-accuses-the-government-of/article-152204"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/naveen-pat.png" alt=""></a><br /><p>भुवनेश्वर। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने गुरुवार को राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया और आरोप लगाया कि वह महिलाओं के अधिकारों के बारे में सिर्फ़ ज़ुबानी बातें करती है, उनके सशक्तिकरण के लिए कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम रही है। ओडिशा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी पर हुई बहस में हिस्सा लेते हुए पटनायक ने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर झूठे आख्यान गढ़कर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि लोगों को हमेशा के लिए धोखा नहीं दिया जा सकता। ओडिशा में महिलाओं के कल्याण की असलियत भाजपा के दावों से बिल्कुल अलग है। विधायिका में महिला आरक्षण और परिसीमन ने जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का ज़िक्र करते हुए, पटनायक ने कहा कि दो अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा हो रही है। पहला नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 जिसे संसद में सर्वसम्मति से पारित किया गया था और दूसरा परिसीमन की प्रक्रिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से ही पारित हो चुके महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ना एक ‘गुपचुप चाल’ है, जिसका मकसद इसके प्रभावों पर पर्याप्त चर्चा किए बिना परिसीमन को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि बीजू जनता दल (बीजद) ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक का पूरी तरह समर्थन किया था और अब भी इसको तत्काल लागू करने की मांग कर रही है।</p>
<p>महिलाओं के सशक्तिकरण में ओडिशा की विरासत पर प्रकाश डालते हुए पटनायक ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के नेतृत्व में यह राज्य देश के उन पहले राज्यों में से एक था, जिसने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया था। उन्होंने कहा कि 2011 में उनकी सरकार ने इस आरक्षण बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया, जिससे जमीनी स्तर पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी बढ़ गया।</p>
<p>पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजद ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में महिला उम्मीदवारों को अपने 33 प्रतिशत टिकट दिये थे। उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि वह भी इसी तरह की प्रतिबद्धता दिखाये। उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे अपने हालिया पत्र और ओडिशा के 21 सांसदों से की गयी अपनी अपील का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें महिलाओं के अधिकारों और ओडिशा के राजनीतिक हितों पर बीजद का रुख स्पष्ट रूप से बताया गया है।</p>
<p>भाजपा के कथित ‘गलत सूचना अभियान’ पर चिंता व्यक्त करते हुए पटनायक ने कहा कि यह मुद्दा ओडिशा की विशिष्ट पहचान और राजनीतिक आवाज से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया से ओडिशा के लोगों, विशेष रूप से आने वाली पीढ़ियों के राजनीतिक अधिकार कम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास उन नेताओं को कभी माफ नहीं करेगा जिन्होंने राज्य के हितों की रक्षा किये बिना ऐसे कदम का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जब तक वह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगे, तब तक किसी को भी ओडिशा को उसके हक से वंचित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने भाजपा विधायकों पर महिलाओं के मुद्दों पर ‘मगरमच्छ के आंसू’ बहाने का आरोप लगाया और कहा कि उनके कल्याण के प्रति उनमें कोई प्रतिबद्धता दिखाई नहीं देती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:55:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>लद्दाख का विकास स्थानीय हितों के अनुरूप हो : राहुल गांधी का आरोप, बोले-लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का हो रहा प्रयास </title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लद्दाख में लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र को 'पुलिस राज' में बदल दिया गया है और उद्योगपतियों के लाभ के लिए नाजुक पर्यावरण से समझौता हो रहा है। उन्होंने गृह मंत्री से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और भूमि संरक्षण सुनिश्चित करने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/development-of-ladakh-should-be-in-accordance-with-local-interests/article-152228"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-gandhii.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि लद्दाख में लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का प्रयास हो रहा है और वहां के लोगों की आवाज़ को दबाया जा रहा है। राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि लद्दाख के युवाओं ने उन्हें बताया है कि किस तरह से उनके क्षेत्र को एक तरह के 'पुलिस राज' में बदल दिया गया है। वहां लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है और स्थानीय लोगों की आवाज़ को दबाया जा रहा है। उन्होंने यह भी लिखा कि लद्दाख की ज़मीन और नाज़ुक पर्यावरण को कथित रूप से बड़े उद्योगपतियों के हितों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ी है।</p>
<p>राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि लद्दाख के लोग विकास के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे ऐसा विकास चाहते हैं जो स्थानीय समुदाय को रोज़गार और आर्थिक लाभ पहुंचाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि गृह मंत्री अमित शाह अपने प्रस्तावित दौरे में क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को समझेंगे और वहां के लोगों की चिंताओं पर ध्यान देंगे। गौरतलब है कि लद्दाख में हाल के वर्षों में राजनीतिक अधिकारों, ज़मीन और विकास मॉडल को लेकर असंतोष बढ़ा है। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के बाद केंद्र शासित प्रदेश बनने से वहां विधानसभा नहीं है, जिससे स्थानीय लोग अपने अधिकार सीमित होने की बात कहते हैं। इसके साथ ही वहां के लोग बाहरी निवेश और बड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर ज़मीन, रोज़गार और नाज़ुक पर्यावरण पर इसके असर की आशंका भी जता रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:32:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>20 हफ्ते प्रेग्नेंट नाबालिग को अबॉर्शन की इजाजत : सुप्रीम कोर्ट बोला-बलात्कार पीड़िताओं के लिए पुनर्विचार की जरूरत, डिलीवरी के लिए नहीं कर सकते मजबूर</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार पीड़िताओं के गर्भपात कानून में बदलाव की वकालत की है। अदालत ने कहा कि नाबालिगों के लिए 20 सप्ताह की सीमा न्याय में बाधा नहीं बननी चाहिए। पीड़िता के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनचाहा गर्भ किसी पर थोपा नहीं जा सकता और अंतिम निर्णय पीड़िता का होना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/abortion-allowed-to-20-weeks-pregnant-minor-supreme-court-said/article-152185"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/supreme_court__1_1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें एक 15 वर्षीय नाबालिग के 30 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति देने वाले दो न्यायाधीशों की पीठ के एक आदेश को चुनौती दी गयी थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ ने गर्भपात की अनुमति देते हुए एम्स को प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि एम्स अपना निर्णय (कि गर्भपात नहीं किया जाना चाहिए) मां पर नहीं थोप सकता और महिला के पास निर्णय लेने का विकल्प होना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की, "अवांछित गर्भ का बोझ महिला पर नहीं डाला जा सकता।"</p>
<p>न्यायालय ने एम्स के डॉक्टरों को नाबालिग और उसके परिवार की काउंसलिंग करने तथा उन्हें प्रासंगिक मेडिकल रिपोर्ट और जानकारी साझा करने की स्वतंत्रता दी है, ताकि वे यह तय कर सकें कि गर्भावस्था को जारी रखना है या गर्भपात का विकल्प चुनना है।</p>
<p>इससे पहले 24 अप्रैल को न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने गर्भपात की अनुमति दी थी। कल बुधवार को इसी पीठ ने एम्स की समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए कहा था, "यह अजीब है कि याचिकाकर्ता एम्स उच्चतम न्यायालय के आदेश को मानने को तैयार नहीं है और इसके बजाय नाबालिग के संवैधानिक अधिकारों को विफल करने के लिए अदालत के आदेश को ही चुनौती दे रहा है।"</p>
<p>उच्चतम न्यायालय की डांट खाने के बावजूद एम्स ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे और मामले में उपचारात्मक याचिका दायर कर दी। इसे मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष तत्काल रखा गया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि डॉक्टर अजन्मे बच्चे पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जबकि उस मां पर ध्यान नहीं दे रहे जो एक दर्द से गुजर रही है। उन्होंने कहा, "बच्चे पर बहुत अधिक ध्यान दिया जा रहा है और उस मां पर नहीं जिसने इतना कष्ट झेला है।"</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:08:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कांग्रेस ने चार दशकों से महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित रखा, जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी : अरूण साव  </title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दलों ने दशकों तक महिलाओं को अधिकारों से वंचित रखा। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के खिलाफ कांग्रेस के रुख को विश्वासघात बताया। साव ने विधानसभा के विशेष सत्र के माध्यम से महिलाओं की आवाज बुलंद करने और प्रधानमंत्री मोदी के संकल्प को पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-deprived-women-of-their-rights-for-four-decades-public/article-151227"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/arun-saw.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस ने चार दशकों से महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा है और इस गलती के लिए जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने आज रायपुर के न्यूज सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने पिछले चार दशकों से महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित रखा है। वास्तव में यह देश की आधी आबादी के साथ अन्याय और धोखा है। उन्होंने कहा कि जब नगरीय निकायों एवं पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण मिला हुआ है तो उन्हें विधानसभा और लोकसभा में आरक्षण क्यों नहीं मिलना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने प्रयत्न किया कि आधी आबादी को उनका अधिकार मिले। लेकिन कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने षड्यंत्र करके नारी शक्ति को फिर से उनके अधिकार से वंचित किया है। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से उनकी आवाज को और बुलंद करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने महिलाओं को अधिकार संकल्प लिया है। इसे पूरा करने हम लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ेंगे। साव ने कहा कि ये कितनी हास्यास्पद बात है कि छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ लोगों की उपेक्षा करके जिस रंजीता रंजन को राज्यसभा में भेजा गया, वही रंजीता रंजन जी आज छत्तीसगढ़ आ रही हैं। जिसने संसद में बिल के खिलाफ समर्थन कर छत्तीसगढ़ के माताएं और बहनों को अधिकार से वंचित किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 17:28:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कांग्रेस का केंद्र पर हमला: महिला आरक्षण के नाम पर बहा रहे हैं घड़ियाली आंसू, सुप्रिया श्रीनेत ने कहा-सरकार महिलाओं को आरक्षण देना ही नहीं चाहती</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्र पर महिला आरक्षण रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन का 'षड्यंत्र' विफल होने पर सरकार घड़ियाली आंसू बहा रही है। कांग्रेस ने मांग की कि मौजूदा 543 सीटों पर ही 33% आरक्षण तुरंत लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को उनका वास्तविक संवैधानिक अधिकार मिल सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-attacks-the-centre-crocodile-tears-are-being-shed-in/article-151002"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/supriya.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि केंद्र सरकार हमेशा महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ रही है और यही वजह है कि इस बार उसने महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन लाने का षड्यंत्र किया, जिसके कारण संसद में पेश संविधान संशोधन विधेयक गिर गया और केंद्र को मुंह की खानी पड़ी। पार्टी ने कहा कि केंद्र शुरू से ही महिलाओं को आरक्षण नहीं देना चाहती है। यह हमेशा महिला आरक्षण के विरुद्ध रही है और यही कारण था कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1990 में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लेकर आए थे, तो केंद्र ने इसका विरोध किया था, जिसके कारण वह विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका था।</p>
<p>कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने रविवार को यहां पार्टी मुख्यालय पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार डरी हुई हैं, इसलिए उन्होंने राष्ट्र के नाम शनिवार को 29 मिनट के संबोधन में 58 बार, यानी लगभग हर 30 सेकंड में कांग्रेस का नाम लिया। इससे साफ है कि महिला आरक्षण की आड़ में केंद्र परिसीमन के अपने कथित षड्यंत्र के विफल होने के कारण देश के नाम संबोधन के दौरान घड़ियाली आंसू बहा रहे थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक गिरने पर दुखी होने की बजाय 543 लोकसभा सीटों के आधार पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए और कांग्रेस इस व्यवस्था का पूरी तरह समर्थन करेगी। उनका कहना था कि मौजूदा 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं को दे दीजिए और इसमें रोड़ा मत बनिए। कांग्रेस प्रवक्ता ने केंद्र पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि देश में जहां भी महिलाओं के साथ अत्याचार होता है, वहां केंद्र सरकार कुछ नहीं बोलती। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी के लिए 'कांग्रेस की विधवा' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर महिलाओं का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की बात करने वाली केंद्र सरकार को यह याद रखना चाहिए कि जब राजीव गांधी के शासनकाल में महिला आरक्षण विधेयक लाया गया था, तब उन्होंने ने इसके खिलाफ मतदान किया था।</p>
<p>कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के शासन में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। पार्टी के अनुसार, ऐसे मामलों की संख्या 4 लाख से अधिक हो गई है और दुष्कर्म के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। कांग्रेस ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के 1600 से अधिक विधायकों में केवल 167 महिलाएं हैं। देश के कई राज्यों में केंद्र की सरकार होने के बावजूद केवल एक राज्य में ही महिला मुख्यमंत्री है। पार्टी का कहना है कि इससे स्पष्ट है कि केंद्र सरकार महिलाओं के प्रति संवेदनशील नहीं है और यही कारण है कि उसे संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने में संसद में असफलता का सामना करना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 18:10:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महिला आरक्षण बिल गिरने पर विपक्ष ने जश्न मनाकर महिलाओं का अपमान किया: सावित्री ठाकुर </title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने महिला आरक्षण बिल न पचने पर विपक्ष के जश्न को स्वर्ण अवसर खोना और महिलाओं का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने राजनीतिक स्वार्थ के कारण ऐतिहासिक विधेयक को रोका। मंत्री ने स्पष्ट किया कि परिसीमन महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए आवश्यक है और देश की नारी शक्ति इसका करारा जवाब देगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/savitri-thakur-opposition-insulted-women-by-celebrating-when-womens-reservation/article-151018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)23.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि महिला आरक्षण से जुड़ा यह विधेयक पारित हो जाता, तो यह वर्ष इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाता। उन्होंने कहा कि 2023 में विपक्ष ने चुनावी मजबूरी के कारण इसका समर्थन किया, लेकिन बाद में अपने राजनीतिक हितों के चलते इसका विरोध किया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को हर योजना के केंद्र में रखा है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं। इस बिल से महिलाओं में एक नई उम्मीद जगी थी कि उन्हें राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। सावित्री ठाकुर ने कहा कि विपक्षी दलों को यह डर था कि इससे उनके राजनीतिक समीकरण प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने स्पष्ट किया था कि किसी भी राज्य के हितों को नुकसान नहीं होगा, इसके बावजूद भ्रम फैलाया गया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि जब यह बिल पारित नहीं हो सका, तो देशभर की महिलाओं में निराशा फैल गई, जबकि विपक्ष ने जश्न मनाया, जो महिलाओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि देश की महिला शक्ति इसका जवाब अवश्य देगी। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर परिसीमन आवश्यक है, जिससे महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:50:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राष्ट्रीय लोक मोर्चा का बड़ा ऐलान : महागठबंधन में शामिल पार्टियों के खिलाफ 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में निकालेगी धिक्कार मार्च</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिलों में धिक्कार मार्च निकालेगा। प्रदेश प्रवक्ता राम पुकार सिन्हा ने कांग्रेस और महागठबंधन पर महिला आरक्षण विधेयक रोकने का आरोप लगाया। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का दावा है कि विपक्ष ने परिसीमन सुधार का विरोध कर महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-announcement-of-rashtriya-lok-morcha-that-it-will-take/article-151003"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/bihr.png" alt=""></a><br /><p>पटना। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो)संसद में महिला आरक्षण विधेयक एवं संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार के विरोधी महागठबंधन में शामिल पार्टियों के खिलाफ 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में धिक्कार मार्च निकालेगी। रालोमो के प्रदेश प्रवक्ता राम पुकार सिन्हा ने रविवार को बताया कि लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक एवं संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार के विरोध में वोट देकर कांग्रेस एवं महागठबंधन की पार्टियों ने देश की आधी आबादी को लोकसभा एवं विधानसभाओ में जाने से रोका है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को मिल रहे अधिकारों से उनको वंचित किया है।</p>
<p>सिन्हा ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद उपेंद्र कुशवाहा पार्टी की ओर से संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार के तहत बिहार में आवाज बुलंद करते रहे है, लेकिन इस अभियान को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही विपक्षी दलों ने संसद में इसका विरोध कर रोक दिया। उन्होंने कहा कि यदि यह बिल कानून का रूप लेता तो बिहार में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की संख्या डेढ़ गुना बढ़ जाती। यदि संसद में यदि विपक्ष का सहयोग मिलता तो 33 प्रतिशत सीटों पर महिलाएं सासंद और विधायक बनती, लेकिन महागठबंधन के सांसदों ने ऐसा नहीं होने दिया।संसद में विपक्ष की इस रवैया के खिलाफ राष्ट्रीय लोक मोर्चा 22 अप्रैल को बिहार के सभी जिला मुख्यालयों में धिक्कार मार्च निकालेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:08:02 +0530</pubDate>
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                <title>महिला आरक्षण मुद्दे पर सियासत तेज: कांग्रेस ने भाजपा मुख्यालय के समीप किया विरोध प्रदर्शन, महिलाओं के मुद्दे पर गंभीर नहीं होने का लगाया आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा मुख्यालय के समीप जोरदार प्रदर्शन किया। जयराम रमेश और दीपेंद्र हुड्डा जैसे नेताओं ने केंद्र पर महिलाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि सरकार आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर देरी कर रही है, जो महिलाओं के साथ सरासर धोखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/politics-intensifies-on-womens-reservation-issue-congress-protests-near-bjp/article-150999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/congress2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय के समीप जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए और केंद्र सरकार पर महिलाओं के मुद्दे पर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया। प्रदर्शन में जयराम रमेश, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, देवेंद्र यादव, अलका लांबा समेत कई सांसद और नेता मौजूद रहे।</p>
<p>कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, "बीजेपी ने जिस तरह महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश की है, उससे उनकी महिला विरोधी मानसिकता साफ झलकती है। उनका असली उद्देश्य महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन लागू करना था। कांग्रेस पार्टी तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक देश में महिला आरक्षण लागू नहीं हो जाता।"</p>
<p>वहीं कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "2014 से नरेंद्र मोदी देश का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन 2026 तक महिलाओं के साथ केवल धोखा हुआ है। सरकार महिला आरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है। बीजेपी और प्रधानमंत्री केवल यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे महिलाओं के पक्ष में हैं, जबकि हकीकत इसके उलट है।" ग़ौरतलब है कि महिला आरक्षण मुद्दे को लेकर राजनीति तेज है सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 14:32:11 +0530</pubDate>
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