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                <title>dissolution - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कर्नाटक में नई सरकार की कवायद: सोनिया-राहुल से मिले सिद्दारमैया और शिवकुमार, कैबिनेट फेरबदल पर मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इस्तीफे के बाद दिल्ली में राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मुलाकात की। डीके शिवकुमार के नेतृत्व में नई सरकार के गठन और चार उप-मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति पर गहन चर्चा हुई। राज्यपाल ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, और नए बदलावों के तहत कई मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/siddaramaiah-meets-gandhi-family-amid-change-of-power-in-karnataka/article-155343"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(2)86.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कर्नाटक के निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। उनके इस्तीफे के बाद राज्य में अगली सरकार के गठन को लेकर गहन चर्चा हुई। सिद्दारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कर्नाटक कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला के साथ, राजधानी में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले। सूत्रों के अनुसार, बैठक में नई सरकार के गठन पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल, राज्यसभा नामांकन और विधान परिषद में नियुक्तियां शामिल थीं।</p>
<p>दोनों नेताओं के शुक्रवार अपराह्न बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से भी मुलाकात करने की उम्मीद है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, निवर्तमान सिद्दारमैया मंत्रिमंडल के कई मंत्रियों को शिवकुमार के नेतृत्व वाली प्रस्तावित सरकार में जगह नहीं मिल सकती है। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए चार उप मुख्यमंत्रियों की नियुक्ति की संभावना पर भी चर्चा हुई। इस बीच कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने आज सिद्दारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया और मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया।</p>
<p>लोकभवन से जारी एक आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक सिद्धारमैया कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे। पद छोड़ने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सिद्दारमैया ने कांग्रेस नेतृत्व और कर्नाटक की जनता को दो बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्दलीय विधायकों के समर्थन से कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है और उन्होंने विश्वास जताया कि अगले मुख्यमंत्री की नियुक्ति में संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:12:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कर्नाटक राज्यपाल ने स्वीकार किया सिद्दारमैया का इस्तीफा: मंत्रिपरिषद भंग, जानें कब शपथ लेंगे डीके शिवकुमार ?</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। राजभवन के आदेशानुसार वर्तमान मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। नई वैकल्पिक व्यवस्था होने तक सिद्दारमैया ही राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/karnataka-governor-accepts-siddaramaiahs-resignation-council-of-ministers-dissolved-know/article-155347"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(6)27.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। सिद्दारमैया के अपना इस्तीफा सौंपे जाने के एक दिन बाद राज्यपाल ने यह कदम उठाया। यहां लोक भवन से जारी एक आधिकारिक पुष्टि के अनुसार, राज्यपाल ने सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद को भी तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक सिद्दारमैया मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते रहेंगे।</p>
<p>सिद्दारमैया ने गुरूवार को कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उनकी जगह किसे मुख्यमंत्री पद सौंपा जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 12:24:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> राजस्व मण्डल विखण्डन के विरोध में वकीलों ने तानी मुठ्ठियां</title>
                                    <description><![CDATA[एक साल के ठण्डे छीेंटे के बाद सरकार ने फिर शुरू की तैयारियां, आज होने थी बैठक, ऐनवक्त पर टली]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/lawyers-clasped-fists-in-protest-against-the-dissolution-of-the-revenue-board/article-13180"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/advocate.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। राज्य सरकार द्वारा राजस्व मण्डल के विखण्डन की तैयारियां एक बार फिर शुरू कर देने से मण्डल के वकीलों में रोष व्याप्त है। उन्होंने सरकार के इस फैसले के खिलाफ लामबंद होकर इसे जन आन्दोलन बनाकर आर-पार की लड़ाई लड़ने की चेतावनी दी है। वकीलों ने सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए दो दिन 29 और 30 जून को न्यायिक कार्य स्थगित कर दिया है। </p>
<p>राजस्व विभाग के ग्रुप-1 के विशिष्ट शासन सचिव विश्राम मीणा द्वारा राजस्व आयुक्तालय के गठन के संबंध में राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में 29 जून को बैठक कराने की मिली सूचना से मंगलवार को मण्डल में हड़कम्प मच गया। आक्रोशित वकीलों ने सूचना के साथ ही तुरन्त एक घंटे में न्यायिक कार्य स्थगित कर राजस्थान राजस्व अभिभाषक संघ के अध्यक्ष पुष्पेन्द्र सिंह नरूका और सचिव मनीष पाण्डिया की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर मण्डल के विखण्डन को बचाने के लिए आर-पार की लड़ाने लड़ने का निर्णय लिया। नरूका ने बताया कि दो दिन विरोधस्वरूप मण्डल और अधिनस्थ न्यायालयों में न्यायिक कार्य नहीं किया जाएगा। हालांकि राजस्व विभाग ने मंगलवार दोपहर बाद 29 को होने वाली बैठक स्थगित कर दी है। </p>
<p><strong>इन अधिकारियों को बुलाया गया था बैठक में </strong></p>
<p>विशिष्ट शासन सचिव मीणा द्वारा राजस्व मंत्री रामलाल जाट की अध्यक्षता में रखी गई प्रस्तावित बैठक में राजस्व मण्डल के अध्यक्ष, राजस्व विभाग   के प्रमुख शासन सचिव, वित्त विभाग के प्रमुख शासन सचिव, जिला कलक्टर जयपुर और मण्डल के निबन्धक को बुलाया गया था। </p>
<p><strong>गत वर्ष लिया था प्रशासनिक कार्य अलग करने का निर्णय</strong></p>
<p>राज्य सरकार ने सालों से चल रही इस मशक्कत पर गत वर्ष 7 जून को मोहर लगाते हुए  प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों को अलग-अलग करने की मोहर लगाई थी। इसके तहत प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग से आयुक्तालय के गठन का प्रस्ताव लिया गया। तब सरकार का तर्क था कि मौजूदा स्थिति में राजस्व प्रशासन एवं राजस्व न्यायालय प्रकरणों के पर्यवेक्षण का कार्य राजस्व मण्डल द्वारा ही किया जा रहा है। मण्डल में प्रशासनिक कार्यों का अत्यधिक दबाव होने के कारण राजस्व न्यायालयों के पर्यवेक्षण का कार्य अपेक्षित रूप से सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। ऐसी स्थिति में प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों को अलग-अलग करने की आवश्यकता हो गई है। उल्लेखनीय है कि मण्डल मुख्यालय पर ही अकेले करीब 65 हजार प्रकरणों के फैसले लम्बित चल रहे हैं। इसके अलावा राज्यभर के संभागीय आयुक्त, राजस्व अपील प्राधिकारी, जिला कलक्टर, सहायक कलक्टर, उपखण्ड अधिकारी और तहसील न्यायालय भी मण्डल के अधीन हैं। यहां भी राजस्व से संबंधित विभिन्न लम्बित मामलों की बड़ी संख्या है।</p>
<p><strong>तहसीलदार, गिरदावर और पटवारी के तबादले संबंधी कार्य होंगे हस्तान्तरित</strong></p>
<p>राजस्व प्रशासन के नियन्त्रण व पर्यवेक्षण के लिए पृथक से प्रस्तावित राजस्व आयुक्तालय के गठन के बाद राज्य का समस्त राजस्व प्रशासन आयुक्तालय के अधीन रहेगा। जिसका मुख्य रूप से राजस्थान तहसीलदार सेवा, भू-अभिलेख निरीक्षक, पटवारी एवं तहसील राजस्व सेवा के अधिकारियों की सेवा संबंधी कार्यों की देखरेख व भू अभिलेख तैयारी व अन्य राजस्व प्रशासनिक कार्यों का पर्यवेक्षण रहेगा। इसके बाद तहसीलदारों से लेकर नायब तहसीलदार, गिरदावर, पटवारी, डीआईएलआरएमपी और टीआरए, डीआरए के तबादले, नियुक्तियां, विभागीय जांच संबंधी अधिकार भी राजस्व मण्डल से हटा लिए जाएंगे। </p>
<p><strong>मौजूदा कार्यप्रणाली का ढांचा</strong></p>
<p>मण्डल में न्यायिक प्रकरणों की सुनवाई एवं उनकी मॉनिटरिंग के लिए न्याय शाखा के अलावा प्रशासनिक कामकाज के तहत वर्तमान तहसील संवर्ग के लिए आरटीएस, गिरदावर व पटवारी व डीआईएलआरएमपी के लिए एलआर, सांख्यिकी विंग, विभागीय जांच, राजस्व लेखा शाखा संचालित हैं। यहां मुख्य सचिव के समकक्ष वरिष्ठतम आईएएस स्तर के अधिकारी के रूप में चेयरमैन, वरिष्ठ आईएएस स्तर का रजिस्ट्रार, वरिष्ठ आरएएस स्तर का अतिरिक्त रजिस्ट्रार एवं तीन आरएएस स्तर के उप रजिस्ट्रार के पद संचालित हैं। जो इन शाखाओं की मॉनिटरिंग करते हैं। </p>
<p>राव कमीशन गठन से की थी स्थापना</p>
<p>वकीलों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आयुक्तालय गठन पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राजस्व मण्डल के विखण्डन की तैयारिेयों के बीच अजमेर रियासत के 1956 में राजस्थान में हुए विलय के साथ विशेष समझौते का भी उल्लंघन होगा। राव कमेटी की सिफारिश पर ही अजमेर को राजस्व मण्डल सहित राजस्थान लोक सेवा आयोग, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड एवं आयुर्वेदिक निदेशालय मिले थे। </p>
<p><strong>सत्ता का संतुलन भी होगा प्रभावित</strong></p>
<p>अब तक राजस्व मण्डल में मुख्य सचिव स्तर के चेयरमैन के कारण यहां प्रशासनिक कार्यों के तहत राजस्व मंत्री भी उनको विश्वास में लेकर ही प्रशासनिक कार्यों पर निर्णय करते रहे हैं, ताकि सत्ता और प्रशासन का संतुलन बना रहे। लेकिन इस प्रस्ताव के बाद सत्ता का संतुलन भी विखण्डित होने की प्रबल संभावना हो जाएगी। यहां कार्यरत करीब 400 कार्मिकों में से न्याय शाखा और न्यायालयों में कार्य करने वाले कार्मिकों को छोड़कर करीब 300 कार्मिक भी प्रभावित हो जाएंगे। </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jun 2022 15:37:01 +0530</pubDate>
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                <title>कॉन्ट्रैक्ट है मुस्लिम निकाह, हिंदू विवाह की तरह कोई संस्कार नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम निकाह एक अनुबंध या कॉन्ट्रैक्ट है, जिसके कई अर्थ हैं, यह हिंदू विवाह की तरह कोई संस्कार नहीं और इसके टूट जाने से बने कुछ अधिकारों एवं दायित्वों से पीछे नहीं हटा जा सकता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A5%89%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B9--%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%82-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/article-1803"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/justice.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बेंगलुरु।</strong> कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम निकाह एक अनुबंध या कॉन्ट्रैक्ट है, जिसके कई अर्थ हैं, यह हिंदू विवाह की तरह कोई संस्कार नहीं और इसके टूट जाने से बने कुछ अधिकारों एवं दायित्वों से पीछे नहीं हटा जा सकता। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी बेंगलुरु के भुवनेश्वरी नगर में 52 साल के एजाजुर रहमान की एक याचिका पर की है, जिसमें 12 अगस्त, 2011 को बेंगलुरु में एक पारिवारिक अदालत के प्रथम अतिरिक्त प्रिंसिपल न्यायाधीश का आदेश रद्द करने का अनुरोध किया गया था।<br /> <br /> <br /> उल्लेखनिय है कि रहमान ने अपनी पत्नी सायरा बानो को पांच हजार रुपये के ‘मेहर’ के साथ विवाह करने के कुछ महीने बाद ही ‘तलाक’ शब्द कहकर 25 नवंबर, 1991 को तलाक दे दिया था, इस तलाक के बाद रहमान ने दूसरी शादी की। जिससे वह एक बच्चे का पिता बन गया। बानो ने इसके बाद गुजारा भत्ता लेने के लिए 24 अगस्त, 2002 में एक दीवानी मुकदमा दाखिल किया था, पारिवारिक अदालत ने आदेश दिया था कि वादी वाद की तारीख से अपनी मृत्यु तक या अपना पुनर्विवाह होने तक या प्रतिवादी की मृत्यु तक 3,000 रुपये की दर से मासिक गुजारा भत्ते की हकदार है।<br /> <br /> <br /> न्यायमूर्ति कृष्णा एस दीक्षित ने याचिका खारिज करते हुए 25,000 रुपये के जुर्माने के साथ 7 अक्टूबर को अपने आदेश में कहा कि निकाह एक अनुबंध है जिसके कई अर्थ हैं, यह हिंदू विवाह की तरह एक संस्कार नहीं है, यह बात सत्य है। न्यायमूर्ति दीक्षित ने विस्तार से कहा कि मुस्लिम निकाह कोई संस्कार नहीं है और यह इसके समाप्त होने के बाद पैदा हुए कुछ दायित्वों एवं अधिकारों से भाग नहीं सकता।<br /> <br /> पीठ ने कहा कि तलाक के जरिए विवाह बंधन टूट जाने के बाद भी दरअसल पक्षकारों के सभी दायित्वों एवं कर्तव्य पूरी तरह समाप्त नहीं होते हैं’’ उसने कहा कि मुसलमानों में एक अनुबंध के साथ निकाह होता है और यह अंतत: वह स्थिति प्राप्त कर लेता है, जो आमतौर पर अन्य समुदायों में होती है। अदालत ने कहा कि यही स्थिति कुछ न्यायोचित दायित्वों को जन्म देती है, वे अनुबंध से पैदा हुए दायित्व हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 21 Oct 2021 10:45:30 +0530</pubDate>
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