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                <title>PMGSY - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>होर्मुज संकट के बीच भारत का बड़ा सुरक्षा कवच : 12,980 करोड़ का मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल मंजूर; पीएमजीएसवाई-111 को मार्च, 2028 तक बढ़ाया  </title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक तनाव के बीच समुद्री व्यापार सुरक्षित करने हेतु केंद्र सरकार ने मैरीटाइम इंश्योरेंस पुल शुरू किया है। ₹12,980 करोड़ की इस पहल से विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी और भारतीय जहाजों को किफायती बीमा मिलेगा। साथ ही, पीएम ग्राम सड़क योजना-III को 2028 तक विस्तार देकर ग्रामीण कनेक्टिविटी के लिए ₹83,977 करोड़ आवंटित किए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/indias-big-security-cover-amid-hormuz-crisis-maritime-insurance-pool/article-150981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/harmuz.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव भले ही कुछ कम हुआ हो, लेकिन तेल आपूर्ति के सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। जहाजों की आवाजाही पर खतरे के बीच भारत सरकार ने समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पुल को मंजूरी दी है। प्रस्ताव में 12980 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं जिसका मकसद भारतीय झंडे वाले या भारत से जुड़े जहाजों को लगातार और किफायती बीमा सुविधा देना है, चाहे वे किसी भी अंतरराष्ट्रीय मार्ग से माल ला रहे हों या भेज रहे हों। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी बीमा कंपनियों पर निर्भरता कम होगी और समुद्री व्यापार सुरक्षित रहेगा। </p>
<p>फिलहाल, भारतीय जहाज पीएंडआई बीमा के लिए काफी हद तक आईजीपीएंडआई क्लब पर निर्भर हैं, जो तेल प्रदूषण, जहाज दुर्घटना, माल के नुकसान और कू्र से जुड़े जोखिमों को कवर करता है।  केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रतिबंध या भू-राजनीतिक तनावों के कारण बीमा कवरेज वापस लेने की स्थिति में संप्रभुता और व्यापार की निरंतरता बनाए रखने के लिए एक घरेलू समुद्री जोखिम बीमा पूल की आवश्यकता थी।  इस बीमा पूल के जरिए बीमा कंपनियां मिलकर पॉलिसी जारी करेंगी और इसकी कुल अंडरराइटिंग क्षमता लगभग 950 करोड़ रुपए होगी, इससे देश के भीतर ही बीमा और जोखिम प्रबंधन की क्षमता मजबूत होगी।</p>
<p>यह पहल भारत को अपने समुद्री बीमा सिस्टम को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी, साथ ही, देश में मरीन बीमा, क्लेम मैनेजमेंट और कानूनी विशेषज्ञता भी विकसित होगी, जो भारतीय शिपिंग सेक्टर की जरूरतों के अनुसार होगी। मोदी कैबिनेट ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-111 (पीएमजीएसवाई-111), को मार्च 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है। इस योजना के लिए 83,977 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना के तहत गांवों को कृषि बाजारों, स्कूलों और अस्पतालों से जोड़ने वाली सड़कों को मजबूत किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी। समय सीमा बढ़ने से उन इलाकों में सड़कों का काम पूरा हो सकेगा जहां कनेक्टिविटी अभी भी एक चुनौती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 11:52:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बजट में ‘धुरंधर’ खेत खलिहान: औषधीय खेती करने वाले किसान, हर वर्ग के लिए लक्षित योजनाएं तैयार की, किसानों को एआई से मिलेगी नई ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[बजट में कृषि एआई, पीएम-किसान यथावत, आयुष्मान भारत, ग्रामीण सड़कों, आवास और खाद्य सुरक्षा योजनाओं को मजबूत किया गया, विशेष फसलों को वैश्विक ब्रांड बनाने का लक्ष्य रखा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/in-the-budget-dhurandhar-targeted-schemes-prepared-for-every-section/article-141645"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार ने इस बार बजट में धुरंधर खेत खलिहान की सोच पर बड़ा दांव लगाया है। बहु भाषीय एआई टूल किसानों की उत्पादकता को बढ़ाएगा और विशिष्ट सलाह प्रदान करके किसानों को बेहतर निर्णय लेने और जोखिम को कम करने में मदद करेगा। सीतारमण ने साफ संकेत दिया कि चाहे तटवर्ती काजू नारियल किसान हों, पहाड़ी इलाकों के खुमानी अखरोट बादाम उत्पादक हों या औषधीय खेती करने वाले किसान, हर वर्ग के लिए लक्षित योजनाएं तैयार की गई हैं। बजट के अनुसार, भारत अब अपनी विशेष फसलों को वैश्विक बाजर में प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित करने पर काम करेगा। </p>
<p>किसानों के लिए चल रही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का बजट 63,500 करोड़ रुपए रखा गया है, जो पिछले साल के बराबर है। इस योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को सीधे खाते में किस्त मिलती है। जिससे बीज, खाद और खेती के खर्च में मदद होती है। </p>
<p>स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए 9,500 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। पिछले साल यह 9,401 करोड़ थाए जो रिवाइज्ड अनुमान में घटकर 8,995 करोड़ रह गया था। इस स्कीम से गरीब और कमजोर परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है, खासकर बड़े अस्पतालों में महंगे इलाज के दौरान।</p>
<p><strong>पीएमजीएसवाई के लिए 19,000 करोड़ रुपए का आवंटन</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के लिए बजट में  वर्ष 2026-27 का आवंटन 19,000 करोड़ रुपए रखा गया है, जो 2025-26 के बराबर ही है। हालांकि, संशोधित अनुमान के अनुसार पिछले वित्त वर्ष में इस पर खर्च 11,000 करोड़ रुपए हुआ था। वहीं दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्टÑीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लिए 2026-27 का आवंटन बढ़ाकर 19,200 करोड़ रुपये कर दिया गया है, पिछले साल यह राशि 19,005 करोड़ रुपये थी, जबकि संशोधित अनुमान के मुताबिक 16,000 करोड़ रुपए खर्च हुए। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के लिए इस साल 54,916.70 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं, पिछले बजट में यह राशि 54,832.00 करोड़ रुपए थी और संशोधित अनुमान में खर्च 32,500.01 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।</p>
<p><strong>पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना को 2,27,429 करोड़ रुपए</strong></p>
<p>खाद्य सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना पर 2,27,429 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, पिछले साल 2,03,000 करोड़ का बजट था, जो संशोधित अनुमान में बढ़कर 2,27,753.65 करोड़ हो गया था। इस योजना से करोड़ों गरीब परिवारों को मुफ्त या सस्ता राशन मिलता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 11:38:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आर्थिक सर्वेक्षण: वित्त मंत्री ने कहा, सड़कों तथा पेयजल सहित ग्रामीण आधारभूत ढांचे में जबर्दस्त प्रगति</title>
                                    <description><![CDATA[आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार ग्रामीण सड़कों, आवास, पेयजल और डिजिटल कनेक्टिविटी में बड़ी प्रगति हुई, जिससे गांवों में जीवन स्तर और सुविधाएं बेहतर हुईं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/economic-survey-finance-minister-said-tremendous-progress-in-rural-infrastructure/article-141244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)-(18).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वर्ष 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश में सड़कें, आवास, स्वच्छ पेयजल कनेक्शन और डिजिटल संपर्क सहित कई अन्य क्षेत्रों में ग्रामीण आधारभूत ढांचे में जबर्दस्त प्रगति हुई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गुरुवार को संसद में पेश इस सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) प्रथम में 99.6 प्रतिशत से अधिक पात्र घरों को संपर्क सुविधा प्रदान कर योजना के द्वितीय चरण में 6,664 सड़कों पर 49,791 किलोमीटर का निर्माण और 759 पुलों का कार्य पूरा हुआ है और अब तीसरे चरण की योजना अपने पूर्ण होने के अग्रिम चरण पर है। सभी के लिए आवास योजना के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण क्रियान्वित की जा रही है और गत 11 वर्षों में 3.70 करोड़ आवासों के निर्माण का काम पूरा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में 'हर घर जल' की महत्वकांक्षी योजना में जल जीवन मिशन के तहत 15.74 करोड़ यानी 81.31 प्रतिशत घरों को इसके दायरे में लाया गया है। स्वामित्व योजना के तहत लक्षित लगभग 3.44 लाख गांवों के मुकाबले 3.28 लाख गांवों का ड्रोन सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है।</p>
<p>सर्वेक्षण में कहा गया है कि 25 दिसम्बर 2000 को पीएमजीएसवाई-प्रथम की शुरुआत हुई थी जिसका प्राथमिक उद्देश्य 2001 की जनगणना के अनुसार मैदानी क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में 500 व्यक्ति या उससे अधिक और पूर्वोत्तर तथा पवर्तीय क्षेत्रों में 250 व्यक्ति या उससे अधिक की बिना संपर्क पात्र आबादी को सभी मौसम के अनुकूल सड़क सुविधा से जोडऩा है और योजना के तहत इस साल 15 जनवरी तक 99.6 प्रतिशत पात्र आवासों तक यह संपर्क सुविधा प्रदान करा दी गई है। इसके अलावा 1,64,581 सड़कों और 7,453 पुलों की मंजूरी दी गई है तथा 63,665 सड़कों (6,25,117 किमी) और 7,210 पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। योजना का दूसरा चरण 2013 में शुरू हुआ जिसमें 6,664 सड़कों (49,791 किमी) और 759 पुलों को मंजूरी दी गई और गत 15 जनवरी तक 6,612 सड़कों (49,087 किमी) और 749 पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।</p>
<p>वित्त मंत्री द्वारा पेश सर्वेक्षण के अनुसार बड़े ग्रामीण क्षेत्रों के पर्यावासों, ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्चतर माध्यमिक स्कूलों तक संपर्क सुविधा प्रदान करने के लिए 1,25,000 किलोमीटर लंबे मार्गों के निर्माण के लिए जुलाई 2019 में पीएमजीएसवाई के तीसरे चरण को मंजूरी दी थी और इस योजना के तहत 15,965 सड़कों (1,22,363 किलोमीटर) और 3,211 पुलों को मंजूरी दी गई थी और 15 जनवरी 2026 तक 12,699 सड़कों (1,02,926 किलोमीटर) तथा 734 पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया।</p>
<p>ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ जल आपूर्ति को लेकर कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 'हर घर जल' के महत्वकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार राज्यों के सहयोग से अगस्त 2019 से जल जीवन मिशन योजना लागू कर रही है। योजना की शुरुआत में केवल 3.23 करोड़ (17 प्रतिशत) ग्रामीण आवासों के पास स्वच्छ पेयजल की सुविधा थी और 20 नवम्बर 2025 तक इसके दायरे में 12.50 करोड़ से अधिक आवासों को लाया गया। योजना के दायरे में शामिल आवासों की संख्या बढ़कर 15.74 करोड़ (81.30 प्रतिशत) हो गई, जो ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर रहा है।</p>
<p>सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण तकनीक समावेशी विकास के लिए अत्याधुनिक मोबाईल फोन, सैटेलाइट इंटरनेट और कृषि के क्षेत्र में डिजिटल उपकरणों जैसे नवाचार 'डिजिटल क्षेत्र' के अंतराल को कम कर कर रहे हैं और दूरस्थ क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है। दिसंबर 2025 तक, स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन समीक्षा लगभग 3.44 लाख अधिसूचित गांवों के लक्ष्य के मुकाबले 3.28 लाख गांवों में पूर्ण किया जा चुका है। लगभग 1.82 लाख गांवों के लिए 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं। वर्ष 2023-24 के दौरान, अग्रणी उर्वरक कंपनियों ने अपने स्वयं के संसाधनों से स्वयं सहायता समूहों की ड्रोन दीदियों को 1,094 ड्रोन वितरित किए, जिनमें से नमो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत 500 ड्रोन प्रदान किए गए। इसके साथ ही डिजिटल भारत भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसके तहत वित्त वर्ष 2008 से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के रिकॉर्ड के कम्प्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण को क्रियान्वित कर रही है। राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में कुल उपलब्ध भूमि रिकॉर्डों का 99.8 प्रतिशत मालिकाना रिकॉर्ड डिजिटलीकरण का कार्य पूरा किया जा चुका है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 18:15:55 +0530</pubDate>
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