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                <title>doctor - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>असर खबर का - ऑक्सीजन समय पर नहीं मिलने से सीएचसी में महिला रोगी की मौत का मामला, एक डॉक्टर सहित चार कर्मचारियों को किया गया एपीओ</title>
                                    <description><![CDATA[इब्राहिम सामुदायिक चिकित्सालय में महिला मरीज की ऑक्सीजन सिलेंडर समय पर न लगने से मौत के बाद सीएमएचओ डॉ. साजिद खान ने निरीक्षण किया। चार कर्मचारियों को एपीओ किया गया और तीन सदस्यीय जांच समिति गठित हुई। अस्पताल में सुधार के निर्देश दिए गए, हर दो बेड के बीच ऑक्सीजन सिलेंडर लगाने का निर्णय लिया गया। पीड़ित परिवार ने FIR दर्ज कराई।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of--news---four-employees--including-a-doctor--were-suspended--a-committee-was-formed-to-investigate-the-incident/article-129731"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>सुनेल। सुनेल के राजकीय इब्राहिम सामुदायिक चिकित्सालय में एक महिला रोगी की ऑक्सीजन सिलेंडर समय पर न लग पाने के कारण हुई मौत की खबर दैनिक नवज्योति में प्रकाशित होने के बाद सोमवार को सीएमएचओ झालावाड़ डॉ. साजिद खान ने मामले को गंभीरता से लिया और अस्पताल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान डॉक्टर शुभम स्वामी, नर्सिंग ऑफिसर महिपाल सिंह, संविदा जीएनएम अभिषेक राठौर और गौरव नकुम को एपीओ किया गया। साथ ही मामले में हुई लापरवाही की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई। अस्पताल में पहले से मौजूद अव्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए डॉ. साजिद खान और अन्य वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों ने नागरिकों के साथ करीब दो घंटे तक मंथन किया। निर्णय लिया गया कि अस्पताल प्रभारी के रूप में डॉ. राहुल आचोलिया नियुक्त होंगे। इसके साथ ही सभी डॉक्टर और कर्मचारी ड्रेस कोड के साथ समय पर ड्यूटी पर उपस्थित रहेंगे। अस्पताल के अधिकारी और कर्मचारी मरीजों और परिजनों के साथ उचित व्यवहार करेंगे, अन्यथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हर दो बेड के बीच लगेगा एक ऑक्सीजन सिलेंडर : इसके अलावा अस्पताल में पाई गई अव्यवस्थाओं जैसे इलेक्ट्रिक प्लग, ऑक्सीजन सिलेंडर और रेगुलेटर, बेड, दवाइयां, जांच और सोनोग्राफी सहित सभी संसाधनों का सुचारू उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। डॉ. साजिद खान ने बताया कि जिले में हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच नागरिकों के साथ बैठक लेकर अस्पताल की व्यवस्थाओं में कमी तुरंत दूर की जाएगी। भविष्य में ऐसी घटना न हो, इसके लिए अस्पताल में हर दो बेड के बीच एक आॅक्सीजन सिलेंडर लगाया जाएगा।</p>
<p><strong>पीड़ित परिवार की मांग </strong><br />पीड़ित परिवार ने अस्पताल की लापरवाही के कारण हुई मौत के संबंध में सुनेल थाने में प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज करवाई और सीएमएचओ को ज्ञापन देकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई एवं उचित मुआवजा देने की मांग की।</p>
<p><strong>निरीक्षण के दौरान ये रहे मौजूद </strong><br />निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ नागरिक रमेश चंद पालीवाल, गोविंद धाकड़, सुरेन्द्र सोनी, नरेश गुप्ता, कमलेश पाटीदार, प्रदीप बाफना, सुरेश बैरागी, हेमंत जोशी, ईश्वर सिंह सोनगरा, ललित वाल्मीकि, ब्लॉक सीएमएचओ राहुल आचोलिया, डॉ. राम भरत मीणा सहित कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Oct 2025 15:16:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>फिजियोथेरेपिस्ट मेडिकल डॉक्टर नहीं, इसलिए अपने नाम से पहले 'डॉक्टर' लगाना उचित नहीं : डीजीएचएस</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे 'डॉ.' (Doctor) शब्द का प्रयोग न करें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/physiotherapist-is-not-a-medical-doctor-so-it-is-not/article-126509"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/physiotherapy.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे 'डॉ.' (Doctor) शब्द का प्रयोग न करें, क्योंकि वे मेडिकल डॉक्टर के रूप में प्रशिक्षित नहीं होते। यह कदम मरीजों और आम जनता को गुमराह होने से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है। 9 सितंबर को भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिलीप भानुशाली को भेजे गए पत्र में डीजी हेल्थ सर्विसेज डॉ. सुनीता शर्मा ने कहा कि अगर कोई फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम से पहले 'डॉ.' लगाता है, तो यह भारतीय चिकित्सा उपाधि अधिनियम, 1916 का उल्लंघन माना जाएगा।</p>
<p>पत्र में यह भी कहा गया है कि फिजियोथेरेपिस्टों को केवल रेफर किए गए मरीजों का ही इलाज करना चाहिए, क्योंकि वे न तो रोग की चिकित्सीय पहचान (डायग्नोसिस) के लिए प्रशिक्षित होते हैं और न ही उन्हें प्राथमिक चिकित्सा पद्धति में कार्य करने की अनुमति दी जानी चाहिए। डॉ. शर्मा ने चेतावनी दी कि फिजियोथेरेपिस्टों द्वारा दी गई अनुचित सलाह न केवल मरीज के लिए हानिकारक हो सकती है, बल्कि इससे मामलों की गंभीरता भी बढ़ सकती है। यह निर्देश स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में पेशेवर पारदर्शिता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Sep 2025 10:59:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>30 दिन मौत को चकमा देकर मुस्कुराई जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[स्क्रब टायफस के साथ मल्टीपल बीमारियों के शिकंजे में फंसी थी जान
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/life-smiled-after-dodging-death-for-30-days/article-126443"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चिकित्सकों को धरती पर यूं ही भगवान का दर्जा नहीं दिया जाता। इसका जीवंत उदारहण कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में देखने को मिला।  दरअसल, बारां निवासी 25 वर्षीय विवाहिता स्क्रब टायफस से मरणासन स्थिति में पहुंच गई थी, जिसके बचने की उम्मीद भी न के बराबर थी। लेकिन, चिकित्सकों की मेहनत से जिंदगी और मौत के बीच 30 दिन चले संघर्ष में आखिरकार  सुनीता को नया जीवन मिल गया। </p>
<p><strong>बुखार से वेंटिलेटर तक पहुंची महिला</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मेडिसीन यूनिट-बी की एचओडी  डॉ. मीनाक्षी शारदा ने बताया कि बारां जिले के मांगरोल निवासी सुनीता को गत 30 जुलाई से ही तेज बुखार आ रहा था। परिजन स्थानीय स्तर पर ही इलाज करवा रहे थे। लेकिन बुखार नहीं टूटा, उल्टियां होने और सांस लेने में तकलीफ बढ़ गई। बीच-बीच में दौरे भी पड़ने लगे। गंभीर अवस्था में परिजन 5 अगस्त को उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे। उसका ब्लड प्रेशर भी 50 चल रहा था, शुगर भी बहुत कम था।</p>
<p><strong>ब्लड इंफेक्शन के 20 हजार काउंट बढ़ गए</strong><br />महिला के ब्लड सेल्स इफेक्टेड हो गए थे। प्लेटरेट्स भी डाउन हो गए। लीवर, किडनी और लंग्स  भी डेमेज हो गए। प्रोटोकॉल के तहत महिला का इलाज शुरू किया। लेकिन, स्थिति गंभीर बनी रही। बचने की स्थिति न के बराबर थी। लेकिन, जान बचाने की उम्मीद से न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मेडिसीन विभाग-बी के चिकित्सकों की टीम रात-दिन इलाज में जुटी रही। </p>
<p><strong>आॅक्सीजन लेवल घटा, फेफड़ों में निमोनिया बढ़ा</strong><br />उन्होंने बताया कि मरीज के शरीर का आॅक्सीजन लेवल घटकर 80% रह गया था। दोनों फेफड़ों में निमोनिया होने से सांस लेने में मुश्किल हो रही थी। इस पर तुरंत आईसीयू में वेंटिलेशन पर लिया और इमरजेंसी केयर शुरू किया। इसके बाद जांचें करवाई, जिसमें वह स्क्रब टायफस पॉजीटिव मिली। वायरस ने शरीर के अंगों को तेजी से प्रभावित किया।  वह कोमा जैसी अचेतावस्था में थी। </p>
<p><strong>अनंत चतुर्दशी पर मिली मौत पर जिंदगी को फतह</strong><br />लगातार 28 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद मरीज सुनीता को टी-पीस सपोर्ट पर लाया गया। फिर आॅक्सीजन हटाकर 48 घंटे चिकित्सकों की निगरानी में रखा,जब पूरी तरह आश्वस्त हो गए कि उसे सांस लेने में किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं हुई तो फिर ट्रेकियोस्टॉमी बंद की गई। सुनीता पूरी तरह होश में थी और स्वस्थ थी। आखिरकार, 7 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर वह मुस्कुराती हुई परिजनों के साथ अपने घर लौट गई। उसे डिस्चार्ज किया गया। </p>
<p><strong>जान बचाने में इन चिकित्सकों की रही भूमिका  </strong><br />मरीज सुनीता की जान बचाने में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिसिन विभाग-बी के चिकित्सकोें की टीम की अहम भूमिका रही। जिसमें मेडिसिन यूनिट बी-की एचओडी डॉ. मीनाक्षी शारदा, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौरभ चित्तौड़ा, डॉ. असिस्टेंट प्रोफेसर हेमंत विमलानी, रेजिÞडेंट टीम से डॉ. शेर सिंह, डॉ. धीरेज कृष्ण, डॉ. गोकुल बीजी, डॉ. शुभम कुमार, डॉ. आदिश जैन, डॉ. विकास गालव, डॉ. श्याम सुंदर, डॉ. मोनिका तिवारी शामिल रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Sep 2025 17:04:57 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - दुगारी पीएचसी को लंबे समय बाद मिला चिकित्सक</title>
                                    <description><![CDATA[रोगियों और तीमारदारों की इस समस्या को देखते हुए दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत कराया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-news---dugari-phc-got-a-doctor-after-a-long-time/article-124250"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/iuuii.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा।  भण्डेड़ा क्षेत्र के दुगारी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर लंबे समय से चिकित्सक का पद रिक्त था। इस कारण आगंतुक रोगियों को उचित उपचार न मिलने के चलते उन्हें मजबूरन बांसी, देई, नैनवां और बूंदी तक जाकर उपचार कराना पड़ता था। रोगियों और तीमारदारों की इस समस्या को देखते हुए दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित कर जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत कराया। जानकारी अनुसार जनवरी 2024 में चिकित्सक कन्हैयालाल मीणा का स्थानांतरण होने के बाद यह पद रिक्त रहा। नवज्योति ने 26 जून और 30 जुलाई को दुगारी केंद्र की स्थिति और उपचार में आ रही समस्याओं को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद संबंधित विभाग ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए 19 अगस्त को केन्द्र पर चिकित्सक सोहन लाल को पदभार ग्रहण कराया।</p>
<p>मौके पर भंवरलाल गुर्जर, नंदलाल सैनी, राजेंद्र गुर्जर, महावीर सैनी, कमल साहू, रमेश सैनी, मुकुट बिहारी दाधीच सहित ग्रामीणों और कर्मचारियों ने चिकित्सक का माल्यार्पण कर स्वागत किया। चिकित्सक सोहनलाल ने बताया कि वे रोगियों और तीमारदारों से बातचीत करेंगे और समय पर उचित उपचार देकर राहत सुनिश्चित करेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Aug 2025 13:16:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>जयपुर के चिकित्सक ने बचाई फ्लाइट में एयर होस्टेस की जान, अचानक तबियत हुई खराब, यात्री चिकित्सक ने दी तुरंत राहत</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. पुनीत रिझवानी ने ऑस्ट्रिया से भारत की ओर उड़ रही अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट में एक एयर होस्टेस की जान बचाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-doctor-saved-air-hostess-in-flight-suddenly-a-bad/article-119992"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। महात्मा गांधी अस्पताल के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. पुनीत रिझवानी ने ऑस्ट्रिया से भारत की ओर उड़ रही अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट में एक एयर होस्टेस की जान बचाई है। साथ ही इमरजेंसी लैंडिंग जैसी स्थिति से भी बचाया। हुआ यूं कि जब यात्रा के दौरान विमान वियना से सुबह साढ़े ग्यारह बजे उड़ा और मध्य एशिया की तरफ  बढ़ रहा था अचानक कैबिन में घोषणा हुई कि क्या विमान में कोई डॉक्टर मौजूद है। यह सुनते ही डॉ. रिझवानी तुरंत अपनी सीट से उठे और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। क्रू मेंबर्स के जरिए पता चला कि एक युवा एयर होस्टेस को अचानक सीने में तेज दर्द हो रहा है और इसके दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज हो गई है। उसे घुटन हो रही थी और वो लड़खड़ा रही थी। डॉ. रिझवानी ने नब्ज और धड़कन गति देखकर यह अनुमान लगाया कि यह सुप्रा वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया हो सकता है।</p>
<p><strong>यूं बचाई जान :</strong></p>
<p>विमान में कोई दवा या चिकित्सकीय उपकरण उपलब्ध नहीं था। इस पर उन्होंने  कैरोटिड साइनस मसाज तकनीक अपनाई जो विशेष परिस्थितियों में हृदय गति सामान्य करने में सहायक होती है। इस प्रक्रिया में जबड़े के नीचे स्थित करॉटिड आर्टरी को 10 सेकेंड तक दबाया जाता है। इससे रक्त संचार व्यवस्थित होता है और धड़कन सामान्य होती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Jul 2025 11:11:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बांसी सीएचसी पर डॉक्टर नदारद, कैसे मिलेगा मरीजों को उपचार?</title>
                                    <description><![CDATA[ संबंधित विभागीय उच्चाधिकारी भी अनजान होकर बैठे है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/--doctor-absent-at-bansi-chc---how-will-the-patients-get-treatment/article-90685"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(13).png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र में बांसी कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर शनिवार को एक भी चिकित्सक केन्द्र पर नहीं आए तो रोगी व तीमारदार मेल नर्स से उपचार के लिए कतारबद्ध नजर आए है। इस दरमियान परेशानियों का सामना कर रहे रोगियों का कहना था कि चिकित्सक नही होने से मेल नर्स के पास काफी भीड़ थी। गंभीर रोगियों को कतार में परेशान होना पड़ा तो जी घबराने पर एक तरफ बैठकर अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर होना पड़ा। ओपीडी डेढ़ सौ से दो सौ पार फिर भी जिम्मेदारों की बेपरवाही से रोगियों व तीमारदारों की परेशानी बढ़ा रही है। संबंधित विभागीय उच्चाधिकारी भी अनजान होकर बैठे है। </p>
<p>जानकारी के अनुसार बांसी में देई रोड पर स्थित सीएचसी पर शनिवार को एक भी चिकित्सक नही होने से यहां पर आए रोगियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। रोगियों के साथ आए तीमारदारों ने बताया कि उचित उपचार के लिए यहां पर आए है। मगर यहां पर एक भी चिकित्सक नही मिलने पर रोगी व तीमारदारों को उपचार लेने के लिए मेल नर्स को दिखाने के लिए लंबी कतार में लगना पडा है। गंभीर रोगियों को लाइन में जी घबराहट की स्थिति में कतार से एक तरफ बैठना पड़ा है। संबंधित विभाग ने क्षेत्र के रोगियों को समय पर उचित उपचार के लिए तीन चिकित्सक लगा रखे है। जिनमें से एक को दुगारी लगा रखा है। दो चिकित्सक यहां पर कार्यरत है। शनिवार को दोनों में से एक भी नही होने से यहां पर धीरे-धीरे काफी संख्या में रोगी व तीमारदार पहुंच गए थे। जो चिकित्सक के नही मिलने पर उचित उपचार के लिए कुछ तो अन्यत्र जाते हुए देखे गए हैं। फिर भी केन्द्र पर मेल नर्स को दिखाने के लिए कतार में काफी भीड़ नजर आई है। भीड़ को देख कुछ रोगी व तीमारदार अपनी खडे रहने की हालत नही होने पर इधर-उधर बैठे हुए कतार में भीड़ कम होने का इंतजार करते हुए नजर आए है। गौरतलब है कि मौसमी बीमारियां फैलने से घर-घर में लोग वायरल, बुखार, सर्दी,खांसी का शिकार हो रहे है। लेकिन बांसी सीएचसी में ऐसी स्थिति में मरीजों की भीड़ बढ़ने पर डॉक्टर का उपलब्ध न होना ग्रामीणों को काफी अखर रहा है। </p>
<p><strong>लगभग 24 गांवों के लोग पहुंचते है इलाज कराने</strong><br />बांसी सीएचसी पर डोड़ी, उंरासी, मानपुरा, बीजन्ता, फतेहपुरा, भामर, मरां, मुण्डली, कल्याणपुरा, सादेड़ा, कालानला, माधोराजपुरा, फलास्थुनी, गुजरियाखेड़ा, निमोद, खोड़ी, भजनेरी, डोकून, रामगंज, भण्डेड़ा, बांसी सहित 24 गांवों से भी रोगी उचित उपचार की मंशा लिए पहुंचते है, पर रोगियों के भर्ती वार्ड में बेड भी कम पड़ते नजर आते है।</p>
<p><strong>उपचार के लिए आए रोगियों का कहना </strong><br />उचित उपचार के लिए यहां पर आए है, पर यहां पर आए तो चिकित्सालय में एक भी चिकित्सक नही मिला। मजबूरन मेल नर्स से उपचार के लिए पहुंचे, तो काफी भीड़ थी। कतार में लगना पडा बहुत समय बाद रजिस्ट्रेशन की नंबर की बारी आई। फिर जाकर मेल नर्स से उपचार मिला है। <br /><strong>- लक्ष्मण गुर्जर, निवासी गुजरियाखेड़ा</strong></p>
<p>उपचार के लिए आई हूँ। कतार में खडेÞ नही रहा जा रहा है जी घबराता है। लंबे समय से परेशान हो रही हूं फिर भी उपचार के लिए दीवार का सहारा लेकर बैठना पड़ रहा है।<br /><strong>- देव बाई, निवासी भामर का झोपडा </strong></p>
<p>मुझे आठ रोज हो गया केंद्र पर आते हुए। मगर चिकित्सक नही मिलते है। उचित उपचार के लिए आते है पर उपचार कंपाउंडर से ही लेना पड़ता है। संबंधित विभागीय जिम्मेदारों का ध्यान नही है। यहां पर इस समय काफी संख्या में रोगी पहुंच रहे है। पर उचित उपचार नही मिल रहा है वह भी लंबे समय तक अपनी बारी आने के लिए या तो कतार में लगो या फिर इधर उधर बैठकर समय गुजारना पड़ता है। तब भी उचित उपचार नही मिल रहा है। <br /><strong>- उच्छबलाल, निवासी बांसी </strong></p>
<p>उचित उपचार के लिए नाले की राह को खतरे से निकल कर आए है। यहां आए तो पता चला की देखने वाले ही नही है। फिर इधर-उधर भटकते हुए कंपाउंडर के पास लगी भीड में लगना पड़ा है। जो उनसे उपचार लिया है। <br /><strong>- भैरवलाल गुर्जर, निवासी रामगंज </strong></p>
<p>केन्द्र पर उचित उपचार की आस लगाकर आई थी। यहां पर चिकित्सक नही है। जो दवाइयां कंपाउंडर से लिखवानी पडी है। <br /><strong>- मुमताज बैगम, निवासी मंरा स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है </strong></p>
<p>इस समय बांसी केंद्र पर दो हैं, क्यों नहीं आए हैं। ब्लॉक सीएमएचओ से इसकी जानकारी करते हैं। <br /><strong>- डॉ. आॅपी सामर, सीएमएचओ, बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Sep 2024 17:30:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>जम्मू की  महिला डॉक्टर की कोटा में संदिग्ध मौत </title>
                                    <description><![CDATA[ पति के साथ 6 मई को कोटा रहने आई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/suspicious-death-of-female-doctor-from-jammu-in-kota/article-78265"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer44.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अनंतपुरा थाना क्षेत्र में जम्मू-कश्मीर की एक महिला डॉक्टर की संदिग्ध में मौत होने का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने संदिग्ध मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। महिला अपने घर में अचेत हालत में मिली थी। जिसे इलाज के लिए निजी हॉस्पिटल ले जाया गया। महिला की इलाज के दौरान 14 मई को मौत हो गई। दो दिन बाद गुरुवार को मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया। फिलहाल मौत का कारण सामने नहीं आया है। मामले की जांच एडीएम सिटी की सौंपी है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार मृतक महिला प्रतिका (27) लखीमपुरम चिनॉट की रहने वाली थी। पेशे से डेंटिस्ट थी अपने पति डॉ. वसीम सजाद के साथ 6 मई को कोटा  रहने आई थी। स्पाई  पार्क के पास किराए से रहने लगे थे। पति डॉ.वसीम सजाद ने बताया कि उन्होंने राजीव गांधी नगर स्थित एक कोचिंग संस्थान में सीनियर फैकल्टी के रूप में जॉइन किया था। वह अपने माता-पिता और पत्नी के साथ 4 मई को जम्मू से 6 मई को कोटा आए थे।  सुभाष नगर इलाके में स्पाईपार्क के पास एक फ्लैट किराए पर लिया। 15 मई को उनका जन्मदिन था। जन्मदिन मनाने के बाद 16 मई को पेरेंट्स को वापस जम्मू जाना था। 14 मई खाना खाने के बाद काम पर जाने निकला पत्नी लिफ्ट तक छोड़ने आई। उस दिन लेट होने के कारण पत्नी ने दोपहर में घर आने को मना कर दिया और कहा सीधे शाम को आना। काम पर जाने के बाद दोपहर में पिताजी का कॉल आया। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी लंबे वक्त से नहीं उठी, सो रही है। उसके बाद घर आकर देखा तो प्रतिका बेहोश मिली। उसे तुरंत निजी हॉस्पिटल लेकर गए, वहां से न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में रैफर किया। ड्यूटी डॉक्टर ने चैक कर उसे मृत घोषित किया। वह बीमार नहीं थी,उसे कोई प्रॉब्लम भी नहीं थी। दो साल का छोटा बच्चा है।</p>
<p>अनंतपुरा थाना एसआई लोकेश मीणा ने बताया जी घटना 14 मई की है। शाम 5 बजे करीब महिला के अचेत होने की सूचना मिली थी। परिजन महिला को इलाज के लिए न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल लेकर गए थे। जहां उसकी मौत हो गई। आज मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया है। इस मामले में मृग दर्ज की है। मामले की जांच एडीएम सिटी कर रहे है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 May 2024 16:44:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शादी के 6 माह बाद घर छोड़ा, 9 साल बाद मजदूरी करता मिला डॉक्टर</title>
                                    <description><![CDATA[9 साल पहले अचानक घर छोड़कर गया एक वेटेरनरी चिकित्सक बुरे हालात में मजदूरी करता परिवार वालों को मिला है। जब उसके भाइयों ने उसे गले लगाया तो माहौल पूरी तरह भावुक हो गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/doctor-left-home-after-6-months-of-marriage-found-working/article-71912"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(13).png" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। 9 साल पहले अचानक घर छोड़कर गया एक वेटेरनरी चिकित्सक बुरे हालात में मजदूरी करता परिवार वालों को मिला है। जब उसके भाइयों ने उसे गले लगाया तो माहौल पूरी तरह भावुक हो गया। </p>
<p>4 मार्च को जोधपुर से 212 किमी दूर शिव (बाड़मेर) में वेटरनरी डॉक्टर ओम प्रकाश सोनी के मोबाइल फोन पर कॉल आया कि हम अपना घर आश्रम से बोल रहे हैं। आपका भाई जसराज जोधपुर के बारहवीं रोड पर मजदूरी करता हुआ मिला है। पहले तो ओम प्रकाश को विश्वास नहीं हुआ। फिर अपना घर आश्रम संचालकों ने वीडियो कॉल के जरिए जसराज से बात कराई। उनके लिए 9 साल पहले घर छोड़कर गए वेटरनरी डॉक्टर जसराज को पहचानना मुश्किल था। बाल बढ़े हुए थे और हालत बहुत बुरी थी। इसके बाद ओम प्रकाश अपने भाई डॉक्टर रविशंकर को लेकर जोधपुर की ओर निकल पड़े।</p>
<p>मंगलवार को जब वे वहां पहुंचे तो अपने सबसे छोटे भाई जसराज को देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे दौड़कर जसराज से लिपट गए और उनकी आंखों से खुशी छलक पड़ी।  अपना घर आश्रम के सेवादार देवीलाल ने बताया कि जसराज जोधपुर के बारहवीं रोड पर बड़ी दयनीय स्थिति में थे। वह मजदूरी कर रहे थे। एक मार्च को हम जसराज को आश्रम लाए। तब उन्होंने अपना पता मेड़ता (नागौर) बताया था। लेकिन, जब फोन नंबर पूछा तो वह एकदम सही निकला। </p>
<p><strong>तीनों भाई हैं डॉक्टर</strong><br />बड़े भाई ओम प्रकाश ने बताया कि हम तीनों भाई वेटरनरी डॉक्टर हैं। मैं बाड़मेर में ही पशु चिकित्सक हूं। रविशंकर सिरोही में वेटरनरी डॉक्टर है। जसराज की 2014 में सरकारी नौकरी लग गई थी। वह बाड़मेर के शिव में बतौर वेटरनरी डॉक्टर पोस्टेड था। 2015 में जसराज की शादी कर दी थी। शादी के 6 महीने बाद जसराज घर छोड़ कर निकल गया था।</p>
<p><strong>इंतजार करते-करते पत्नी भी पीहर चली गई</strong><br />मझले भाई रविशंकर ने बताया कि 2017-18 तक हमने खूब तलाश की, लेकिन जसराज नहीं मिला। इसी दौरान दो साल तक इंतजार करने के बाद जसराज की पत्नी भी घर छोड़कर पीहर चली गई। पिता भूरचंद सोनी और माता निर्मला देवी पिछले नौ साल से खाने से पहले हमेशा जसराज के मिलने की उम्मीद में भगवान से प्रार्थना करते थे और तब ही खाना शुरू करते थे।</p>
<p><strong>6 साल जयपुर में रहे</strong><br />जसराज ने बताया- मैं 6 साल जयपुर में रहा। कुछ समय दिल्ली में भी रहा। इसके बाद जोधपुर आ गया। यहां जीवनयापन के लिए मजदूरी करता था। जहां जगह मिलती, वहां सो जाता था। जसराज इससे ज्यादा बताने की स्थिति में नहीं थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Mar 2024 09:42:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला चिकित्सक की संदिग्ध मौत</title>
                                    <description><![CDATA[डोली की साल 2018 में शादी हुई थी और नवंबर 2022 में तलाक हो गया था। उन्होंने बताया कि मामले में उसके कमरे में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/suspicious-death-of-female-doctor/article-46280"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/552.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बोरखेड़ा थाना क्षेत्र में रविवार देर रात एक महिला आयुर्वेद चिकित्सक की संदिग्ध अवस्था में मौत होने का मामला सामने आया । महिला चिकित्सक कमरे में फंदे पर लटकी मिली। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया। पुलिस मामले में  मृग दर्ज कर जांच में जुट गई है। चिकित्सक करीब डेढ़ साल से पति से अलग होने के बाद से एकाकी जीवन व्यतीत कर रही थी। एएसआई उदय सिंह ने बताया कि उज्ज्वला विहार बोरखेड़ा में रहने वाली आयुर्वेद चिकित्सक  डोली सुमन (35)पत्नी अरुण रविवार रात  को फंदे पर लटकी मिली। पड़ोसी व परिजनों ने उसे फंदे से उतारा और निजी अस्पताल लेकर गए जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शव का सोमवार को पोस्टमार्टम किया गया। महिला चिकित्सक पति से अलग होने के बाद से  अकेली रह रही थी। परिवार के सदस्यों के पास नहीें जाती थी। वह बरुंधन जिला बूंदी के आयुर्वेद चिकित्सालय में चिकित्सक थी। उन्होंने बताया कि डोली का पति अरुण सोफ्टवेयर इंजीनियर था उसे अपने साथ रखना चाहता था और नौकरी छोड़ने का उस पर दबाव बनाता था। डोली ने नौकरी छोड़ने के बजाए पति  से तलाक ले लिया था। डोली के पड़ोस में रहने वाली महिला उसके घर अक्सर आती रहती थी जब वह रविवार रात को उसके घर आई तो घर का दरवाजा खुला हुआ था।  उसने अंदर आने के बाद जोर-जोर से आवाज भी दी, लेकिन कोई प्रति उत्तर नहीं मिला। इसके बाद वह उसके कमरे में गई तो दंग रह गई। डोली फंदे पर लटकी थी तथा दावाजा खुला था। महिला ने पड़ोसियों को बताया। परिजनों के पहुंचने पर डोली को फंदे से उतारा और तुरंत निजी अस्पताल लेकर गए। जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। डोली की साल 2018 में शादी हुई थी और नवंबर 2022 में तलाक हो गया था। उन्होंने बताया कि मामले में उसके कमरे में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 May 2023 15:16:53 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ऑस्ट्रेलिया के डॉक्टर सात साल बाद आतंकवादी कैद से हुए रिहा</title>
                                    <description><![CDATA[वोंग ने ट्वीट किया, मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि डॉ. केनेथ इलियट पश्चिम अफ्रीका में सात साल से अधिक समय तक कैद में रहने के बाद रिहा हो गए हैं। डॉ. इलियट सुरक्षित और स्वस्थ हैं। वह पत्नी जॉक्लिन तथा बच्चों के साथ हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/australian-doctor-freed-from-terrorist-captivity-after-seven-years/article-46011"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/photo-size-630-400-(9).png" alt=""></a><br /><p>सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के डॉक्टर केनेथ इलियट (88) सात साल से अधिक समय तक आतंकवादियों के कैद में रहने के बाद रिहा कर दिये गये हैं। </p>
<p>ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री पेनी वोंग ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। जनवरी 2016 में पश्चिम अफ्रीका में एक आतंकवादी इकाई से जुड़े एक समूह ने डॉ. इलियट का अपहरण कर लिया गया था।</p>
<p>वोंग ने ट्वीट किया, मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि डॉ. केनेथ इलियट पश्चिम अफ्रीका में सात साल से अधिक समय तक कैद में रहने के बाद रिहा हो गए हैं। डॉ. इलियट सुरक्षित और स्वस्थ हैं। वह पत्नी जॉक्लिन तथा बच्चों के साथ हैं।</p>
<p>डॉ. इलियट और उनकी पत्नी का जनवरी 2016 को उत्तरी बुर्किना फासो में अपहरण कर लिया गया था। जिसके बाद, इस्लामिक मघरेब आतंकवादी समूह (रूस में प्रतिबंधित) अल-कायदा ने अपहरण की जिम्मेदारी ली। उनकी पत्नी को अपहरण के करीब एक महीने बाद ही रिहा कर दिया गया था, लेकिन डॉ.इलियट को सात साल के बाद रिहा किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 May 2023 17:45:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>मरीज-डॉक्टर के बीच अहम कड़ी नर्सेज</title>
                                    <description><![CDATA[कई चिकित्सा संस्थानों में तो नर्सेज ही सारी व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं। अस्पतालों में व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/nurses-are-an-important-link-between-patient-and-doctor/article-45351"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/s-81.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान आज चिकित्सा क्षेत्र में काफी तरक्की कर चुका है। लगभग हर जिले में मेडिकल कॉलेज बन चुके हैं। पीएचसी-सीएचसी का विस्तार हो रहा है। इसके बावजूद इन चिकित्सा संस्थानों में मैन पावर की कमी एक बड़ी समस्या है। इनमें सबसे बड़ी कमी नर्सेज की है। वर्तमान में प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में करीब 50 हजार नर्सिंगकर्मी कार्यरत हैं, जबकि 10 हजार संविदा पर काम कर रहे हैं, लेकिन जिस तेजी से नए मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। इन्हें देखते हुए आज भी 20 हजार से ज्यादा नर्सिंगकर्मियों की इन अस्पतालों में जरूरत है। मरीजों को नर्सिंग केयर नहीं मिल पा रही है। वहीं कई चिकित्सा संस्थानों में तो नर्सेज ही सारी व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं। अस्पतालों में व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं।</p>
<p><strong>पूरा वार्ड एक नर्सिंगकर्मी के भरोसे </strong><br />इंडियन मेडिकल काउंसिल के हिसाब से अस्पतालों में मरीजों के अनुपात में नर्सेज की कमी है। इसी कारण  प्रदेश के सबसे बड़े सवाईमानसिंह अस्पताल सहित अन्य मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में एक वार्ड में 50-50 मरीज सिर्फ एक या दो नर्सिंगकर्मियों के भरोसे हैं।   डॉक्टर जहां मरीजों का इलाज करते हैं। वहीं नर्सिंगकर्मी मरीजों की सेवा करते हैं। डॉक्टर और मरीज के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी नर्सिंग स्टाफ  है। इसके बावजूद सरकार अस्पतालों में इनकी कमी को नजरअंदाज किया जा रहा है।  </p>
<p><strong>कितना होना चाहिए मरीज-नर्सेज अनुपात </strong><br />इंडियन नर्सिंग काउंसिल के तय मापदंडों के अनुसार आईसीयू में भर्ती तीन मरीजों पर एक नर्स का होना जरूरी है। अगर मरीज ज्यादा गंभीर है तो एक बैड पर एक नर्स होना चाहिए। जनरल वार्ड में छह मरीजों पर एक नर्स होनी चाहिए, लेकिन प्रदेश में वर्तमान स्थिति में ये मापदंड सिर्फ  कागजी ही हैं।</p>
<p>प्रदेश में सरकारी चिकित्सा संस्थानों की संख्या रोज बढ़ रही है, लेकिन नर्सेज की भारी कमी है। हम राज्य सरकार से मांग करते हैं कि कि मरीजों के भार को देखते हुए नर्सेज कैडर का पुनर्गठन किया जाए। कम से कम 20 हजार नए नर्सेज की भर्ती की जाए। <br /> <strong>- प्यारेलाल चौधरी, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन </strong></p>
<p>प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में नर्सेज की कमी के कारण नर्सिंग काउंसिल के मापदंड पूरे नहीं हो रहे हैं। इसलिए नर्सेज की भर्ती की जाए और नर्सेज कैडर का पुनर्गठन किया जाए, जिससे मरीजों को बेहतर नर्सिंग केयर मिल सके। <br /><strong>- नरेंद्र सिंह शेखावत, कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 May 2023 10:58:10 +0530</pubDate>
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                <title>चिकित्सक के साथ की मारपीट, चिकित्साकर्मी बैठे धरने पर</title>
                                    <description><![CDATA[हंसराज मीणा ने गाली-गलौज एवं मारपीट कर चिकित्सक का स्टैथोस्कोप तोड़ दिया। घटना के बाद आक्रोशित चिकित्साकर्मी आरोपी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/karauli/fighting-with-the-doctor-the-medical-worker-is-sitting-on/article-30294"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/75.jpg" alt=""></a><br /><p>टोडाभीम। कस्बे के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत चिकित्सक वीरबहादुर सिंह के साथ पदमपुरा निवासी हंसराज मीणा ने गाली-गलौज एवं मारपीट कर चिकित्सक का स्टैथोस्कोप तोड़ दिया। घटना के बाद आक्रोशित चिकित्साकर्मी आरोपी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। मौके पर पहुंचे पुलिस उपाधीक्षक फूलचंद मीणा ने चिकित्साकर्मियों को समझाया। पीड़ित चिकित्सक द्वारा आरोपी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करवाई गई।</p>
<p>रिपोर्ट के माध्यम से पीड़ित चिकित्सक वीरबहादुर सिंह ने बताया कि 2 से शाम 8 बजे तक की शिफ्ट में अपनी ड्यूटी कर रहा था। तभी शाम 6 बजे के लगभग पदमपुरा निवासी हंसराज मीणा एवं भूरी मीणा तथा वाल का पुरा निवासी सुमेर मीणा मेरे ड्यूटी रूम में आए और आते ही हंसराज मीणा मेरे साथ गाली गलौज करते हुए मारपीट करने लगा। आरोपी हंसराज मीणा ने मेरा स्टैथस्कोप भी तोड़ दिया और मेरे ऊपर स्टूल की फेंक कर मारी। शोर सुनकर ड्यूटी पर कार्यरत अन्य कर्मचारी मुझे बचाने के लिए आए तो उसने उनके साथ भी गाली गलौज की और मारपीट पर उतारू हो गया।</p>
<p>घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने आरोपी हंसराज मीणा को हिरासत में ले लिया। पुलिस के सामने भी आरोपी हमारे साथ गाली गलौज करता रहा। घटना से आक्रोशित चिकित्साकर्मी चिकित्सालय में स्थाई पुलिस चौकी स्थापित करने सहित लगभग आधा दर्जन मांगों को लेकर चिकित्सालय परिसर में धरने पर बैठ गए। और अपनी मांगे पूरी नहीं होने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी। </p>
<p>हालांकि इस दौरान उन्होंने आपातकालीन सेवाएं सुचारू रखने का निर्णय लिया गया। गौरतलब है कि चिकित्सक के साथ मारपीट की एक सप्ताह में यह दूसरी घटना है। रविवार की सुबह सभी चिकित्साकर्मी अपनी प्रमुख मांगों को लेकर विधायक पृथ्वीराज मीणा के निवास पर पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर विधायक मीणा को ज्ञापन सौंपा। जिस पर विधायक मीणा ने चिकित्साकर्मियों की प्रमुख मांग चिकित्सालय परिसर में पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग को पूरा करते हुए चिकित्सालय परिसर में पुलिस के 5 जवान तैनात करवा दिए और अन्य मांगों को शीघ्र ही पूरा किए जाने का आश्वासन दिया। जिस पर चिकित्साकर्मियों ने अपनी हड़ताल को समाप्त कर दिया और चिकित्सा सेवाओं को सुचारू कर दिया।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>करौली</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Nov 2022 11:41:17 +0530</pubDate>
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