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                <title>Economic Policy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Economic Policy RSS Feed</description>
                
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                <title>एलपीजी की कमी की आशंका पर कर्नाटक कांग्रेस ने केंद्र की विदेश नीति को ठहराया जिम्मेदार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण स्थिति हो सकती है और भी गंभीर</title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कमर्शियल एलपीजी की किल्लत के लिए केंद्र की विदेश नीति को दोषी बताया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार संसद में चर्चा से भाग रही है। मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने चेतावनी दी कि युद्ध के कारण गैस और ईंधन की कमी गहरा सकती है, जिससे छोटे व्यवसायी प्रभावित हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/on-the-fear-of-lpg-shortage-karnataka-congress-blamed-the/article-146006"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/dk-shivkumar.png" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेताओं ने वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की संभावित कमी को लेकर उभरती चिंताओं के बीच मंगलवार को केंद्र सरकार की विदेश और आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। नेताओं ने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण स्थिति और गंभीर हो सकती है।</p>
<p>कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की अनुमति नहीं दे रही है, जिसके विरोध में विपक्षी गठबंधन इंडिया गठबंधन के सांसद प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, सरकार को इस मुद्दे पर संसद में चर्चा करनी चाहिए। जब चर्चा के लिए समय नहीं दिया जा रहा है तो सभी सांसद विरोध कर रहे हैं। आखिर सरकार किस बात से डर रही है? </p>
<p>शिवकुमार ने हाल ही में एलपीजी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की भी आलोचना की और कहा कि यह वृद्धि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर की गई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भाजपा के किसी सांसद ने आवाज नहीं उठाई। कर्नाटक की मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने कहा कि कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी की खबरों के बाद राज्य सरकार स्थिति पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होते ही यह आशंका हो गई थी कि भारत को डीजल, पेट्रोल और गैस की कमी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<p>कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने भी केंद्र की विदेश और आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह समस्या घरेलू उपभोक्ताओं को भी प्रभावित कर सकती है। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें संसद में कहा गया था कि देश के पास ऊर्जा का पर्याप्त भंडार है।</p>
<p>कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री एमसी सुधाकर ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम का असर तेल और ईंधन आपूर्ति पर पड़ रहा है। वहीं कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय को ईंधन और गैस आपूर्ति में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए। वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में कमी की खबरों से रेस्तरां, छोटे खाद्य व्यवसायों और उन परिवारों में ङ्क्षचता बढ़ गई है जो इस ईंधन पर काफी हद तक निर्भर हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 17:08:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत-US ट्रेड डील कब होगी लागू: पीयूष गोयल ने दिए संकेत, UK और ओमान FTA भी शुरू होने की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मार्च में हस्ताक्षर हो सकते हैं। साथ ही, ब्रिटेन और ओमान के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) अप्रैल 2026 में लागू होने की संभावना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/when-will-india-us-trade-deal-be-implemented-piyush-goyal-hints/article-143929"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/piyush-goyal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संभावना जताई है कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर मार्च में हस्ताक्षर और अप्रैल में लागू हो सकता है। इसके आगे पीयूष गोयल ने मीडिया को बताया कि भारत के ब्रिटेन और ओमान के साथ मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए भी अप्रैल में लागू हो सकता है। इसके साथ ही पीयूष गोयल ने बताया कि सितंबर में न्यूजीलैंड के साथ समझौता भी हो सकता है।</p>
<p>भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए 23 फरवरी को तीन दिवसीय बैठक का आयोजन अमेरिका में होगा। इसी महीने की शुरूआत में भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापा समझौते को रूपरेखा तय कर ली थी ।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 14:44:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अखिलेश यादव का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला, बोलें-अमेरिका डील पर चुप्पी तोड़े सरकार और सच्चाई बताए</title>
                                    <description><![CDATA[सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर केंद्र को घेरते हुए इसे 'डील नहीं, ढील' करार दिया। उन्होंने पारदर्शिता की मांग करते हुए पूछा कि क्या शर्तें भारतीय किसानों और उद्योगों के हितों के खिलाफ हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/akhilesh-yadavs-big-attack-on-the-central-government-government/article-143887"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/akhilesh-yadav1.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अमेरिका के साथ हुई डील को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस समझौते को लेकर सरकार की चुप्पी कई संदेह पैदा कर रही है और स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।</p>
<p>अखिलेश यादव ने शुक्रवार को एक्स पर लिखा, क्या डील ने मुंह पर सील लगा दी है। या तो सरकार बताए कि इस डील में क्या शर्तें तय हुई हैं या फिर बाहरी हस्तक्षेप के दावों को स्पष्ट रूप से खारिज करे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार देश की संप्रभुता और आर्थिक हितों से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता नहीं बरत रही है।</p>
<p>उन्होंने कहा, इस डील से किसानों, कारोबारियों, मजदूरों और छोटे-बड़े उद्योगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यदि खेती और उद्योग प्रभावित होंगे तो रोजगार के अवसर कम होंगे और युवाओं का भविष्य असुरक्षित हो जाएगा।</p>
<p>सपा प्रमुख ने इसे देश के सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि इस डील से भारत के आर्थिक हितों और आत्मनिर्भरता पर क्या असर पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 13:19:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पीयूष गोयल का संसद को आश्वासन, कहा भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता में खाद्य, कृषि क्षेत्र की संवेदनशीलता का रखा ध्यान </title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने संसद को आश्वस्त किया कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि और दुग्ध जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हित सुरक्षित रखे गए हैं, जिससे निर्यात और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/piyush-goyals-assurance-to-the-parliament-said-that-india-took/article-141934"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(9)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की जानकारी संसद के बाहर दिये जाने पर विपक्ष के कड़े विरोध के बाद बुधवार को सरकार ने संसद को आश्वस्त किया कि इस समझौते में देश के खाद्य एवं कृषि क्षेत्र की प्रमुख संवेदनशीलताओं का पूरा ध्यान रखा है।     वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संसद के दोनों सदनों में दिये गये वक्तव्यों में कहा कि भारत समझौते में अपने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि इसी तरह अमेरिका के भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो उनके दृष्टिकोण से संवेदनशील हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता लघु एवं मध्यम उद्यमों, उद्यमियों, कुशल श्रमिकों और उद्योग के लिए नये अवसर खोलेगा, उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुंच को सुगम बनाएगा और भारत के मेक इन इंडिया फॉर द विश्व, डिजाइन इन इंडिया फॉर द वल्र्ड और इन्नोवेट इन इंडिया फॉर द वल्र्ड के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायक होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछले वर्ष फरवरी की अमेरिका यात्रा के बाद से भारत और अमेरिका संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को संपन्न करने के उद्देश्य से नियमित रूप से चर्चा करते रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों के कारों ने पिछले एक वर्ष में विभिन्न स्तरों पर गहन बातचीत की है। दोनों पक्षों के महत्वपूर्ण और विविध हितों को देखते हुए यह स्वाभाविक है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए सर्वोत्तम संभव परिणाम सुनिश्चित करना चाहेंगे।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा कि इन के दौरान लगभग एक वर्ष तक चले कई दौर के विचार-विमर्श के बाद, दोनों कार दल द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कई क्षेत्रों को अंतिम रूप देने में सफल रहे हैं। पीएम मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो फरवरी को द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर फोन पर चर्चा की। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका को किए जाने वाले भारतीय निर्यात पर टैरिफ की दर घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की।</p>
<p>वाणिज्य मंत्री ने कहा, मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाये गये आयात कर से कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी। यह समझौता भारतीय निर्यातकों को, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों और विनिर्माण में, महत्वपूर्ण तुलनात्मक लाभ भी प्रदान करता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक ढांचागत समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 की दिशा में हमारी यात्रा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा यह दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच मजबूत जुड़ाव को भी दर्शाता है, जो स्वाभाविक साझेदार हैं और साझा समृद्धि के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।</p>
<p>वाणिज्य मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष व्यापार समझौते से संबंधित आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करने और कागजी कार्यवाही को अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करेंगे, ताकि इसकी पूरी क्षमता का शीघ्रता से लाभ उठाया जा सके। समझौते की विस्तृत रूपरेखा इन प्रक्रियाओं के समापन के पश्चात तुरंत घोषित की जायेगी।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा, सदस्यों को भारत के ऊर्जा स्रोतों से संबंधित उन मुद्दों की जानकारी होगी, जो इस समझौते पर हुई चर्चाओं के दौरान उठाये गये हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं, जैसा कि सरकार ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है, कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा आवश्यकताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वस्तुनिष्ठ बाजार स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्यों के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी कार्यनीति का मूल आधार है। भारत की सभी कार्रवाइयां इसी बात को ध्यान में रखकर की जाती हैं। अत: मैं माननीय सदस्यों से इन मुद्दों को समुचित दृष्टिकोण से देखने का आग्रह करता हूं।</p>
<p>उन्होंने कहा, दोनों देशों के बीच भावी व्यापार अवसरों के संदर्भ में सदस्य इस बात को समझेंगे कि भारत और अमेरिका काफी हद तक एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं। जैसे-जैसे भारत विकसित भारत के पथ पर अग्रसर हो रहा है, हमें ऊर्जा, उड्डयन, डेटा केंद्र, परमाणु ऊर्जा आदि सहित कई क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता होगी। अमेरिका इन क्षेत्रों में दुनिया का अग्रणी देश है, इसलिए हमारे लिए इन क्षेत्रों में व्यापार की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करना स्वाभाविक है, जिससे न केवल हमारी खरीद में बल्कि हमारे अपने निर्यात में भी विस्तार होगा। अत: हमारा अनुमान है कि तुलनात्मक लाभ के परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में भारत का निर्यात अमेरिका में भी काफी बढ़ेगा।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ यह ढांचागत समझौता, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास और नवाचार को गति प्रदान करेगा, भारत की जनता एवं राष्ट्र के व्यापक हित में है। यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत दोनों को सशक्त बनाता है। सरकार देश के लिए प्रधानमंत्री के इस ²ष्टिकोण को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य करती रहेगी। </p>
<p>गौरतलब है कि, विपक्ष इस बात को लेकर हमलावर है कि संसद सत्र के दौरान इस समझौते के बारे में जानकारी संसद से बाहर सार्वजनिक की गयी। गोयल ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में इस समझौते के बारे में जानकारी दी थी। इससे पहले विपक्ष के सदस्यों ने संसद के दोनों सदनों में सरकार से समझौते के बारे में वक्तव्य देने की मांग की थी।  </p>
<p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को फिर कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता (एजेंसी) के दौरान भारत ने देश के खाद्य एवं कृषि क्षेत्र की प्रमुख संवेदनशीलताओं का पूरा ध्यान रखा है। पीयूष गोयल ने लोक सभा में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के संबंध में दोनों देशों की ओर से की गयी घोषणाओं पर अपने एक वक्तव्य में कहा कि भारतीय पक्ष अपने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। अमेरिकी पक्ष के भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जो उनके दृष्टिकोण से संवेदनशील हैं।  </p>
<p>गौरतलब है कि, पीयूष गोयल ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में भी कहा था कि अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते में भारत कृषि क्षेत्र की संवदेनशीलता का ध्यान रखेगा। इस बारे में की गयी में यह स्पष्ट भी किया गया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता लघु एवं मध्यम उद्यमों, उद्यमियों, कुशल श्रमिकों और उद्योग के लिए नये अवसर खोलेगा, उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुंच को सुगम बनाएगा और भारत के'मेक इन इंडिया फॉर द वल्र्ड, डिजाइन इन इंडिया फॉर द वल्र्ड और इन्नोवेट इन इंडिया फॉर द वल्र्ड के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायक होगा।     </p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फरवरी 2025 में अमेरिका यात्रा के बाद से भारत और अमेरिका एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को संपन्न करने के उद्देश्य से नियमित रूप से चर्चा करते रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों के कारों ने पिछले एक वर्ष में विभिन्न स्तरों पर गहन बातचीत की है। दोनों पक्षों के महत्वपूर्ण और विविध हितों को देखते हुए यह स्वाभाविक है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए सर्वोत्तम संभव परिणाम सुनिश्चित करना चाहेंगे।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा कि इन (एजेंसी)ओं के दौरान लगभग एक वर्ष तक चले कई दौर के विचार-विमर्श के बाद, दोनों (एजेंसी)कार दल द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कई क्षेत्रों को अंतिम रूप देने में सफल रहे हैं। दो फरवरी 2026 को पीएम मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर फोन पर चर्चा की। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका को किए जाने वाले भारतीय निर्यात पर टैरिफ की दर घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की।</p>
<p>उन्होंने कहा, मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाये गये आयात कर से कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी। यह समझौता भारतीय निर्यातकों को, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों और विनिर्माण में, महत्वपूर्ण तुलनात्मक लाभ भी प्रदान करता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक ढांचागत समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 की दिशा में हमारी यात्रा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा यह दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच मजबूत जुड़ाव को भी दर्शाता है, जो स्वाभाविक साझेदार हैं और साझा समृद्धि के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।</p>
<p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष व्यापार समझौते से संबंधित आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करने और कागजी कार्यवाही को अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करेंगे, ताकि इसकी पूरी क्षमता का शीघ्रता से लाभ उठाया जा सके। समझौते की विस्तृत रूपरेखा इन प्रक्रियाओं के समापन के पश्चात तुरंत घोषित की जायेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, सदस्यों को भारत के ऊर्जा स्रोतों से संबंधित उन मुद्दों की जानकारी होगी, जो इस समझौते पर हुई चर्चाओं के दौरान उठाये गये हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं, जैसा कि सरकार ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है, कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा आवश्यकताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वस्तुनिष्ठ बाजार स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्यों के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी कार्यनीति का मूल आधार है। भारत की सभी कार्रवाइयां इसी बात को ध्यान में रखकर की जाती हैं। अत: मैं माननीय सदस्यों से इन मुद्दों को समुचित दृष्टिकोण से देखने का आग्रह करता हूं।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा, दोनों देशों के बीच भावी व्यापार अवसरों के संदर्भ में सदस्य इस बात को समझेंगे कि भारत और अमेरिका काफी हद तक एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं। जैसे-जैसे भारत विकसित भारत के पथ पर अग्रसर हो रहा है, हमें ऊर्जा, उड्डयन, डेटा केंद्र, परमाणु ऊर्जा आदि सहित कई क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता होगी। अमेरिका इन क्षेत्रों में दुनिया का अग्रणी देश है, इसलिए हमारे लिए इन क्षेत्रों में व्यापार की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करना स्वाभाविक है, जिससे न केवल हमारी खरीद में बल्कि हमारे अपने निर्यात में भी विस्तार होगा। अत: हमारा अनुमान है कि तुलनात्मक लाभ के परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में भारत का निर्यात अमेरिका में भी काफी बढ़ेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ यह ढांचागत समझौता, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास और नवाचार को गति प्रदान करेगा, भारत की जनता एवं राष्ट्र के व्यापक हित में है। यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत दोनों को सशक्त बनाता है। हम अपने देश के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी के इस दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य करते रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 16:47:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बजट 2026:  युवा शक्ति से प्रेरित बजट, विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई बड़ी  योजनाओं की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[वित्त मंत्री ने बजट 2026-27 को युवा शक्ति केंद्रित बताते हुए विनिर्माण, बायोफार्मा और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में निवेश, उत्पादकता बढ़ाने और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के लिए नई योजनाओं की घोषणा की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/budget-2026-emphasizes-on-self-reliant-india-finance-minister-made-many/article-141531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/chatgpt-image-feb-1,-2026,-12_23_05-pm.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करते हुए इसे युवा शक्ति से प्रेरित बताया और उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से विनिर्माण क्षेत्र के लिए कई योजनाओं को घोषणा की।</p>
<p><img alt="Z"></img></p>
<p>वित्त मंत्री सीतारमण ने लोकसभा में अपने बजट भाषण में बताया कि कर्तव्य भवन में तैयार पहला बजट तीन कर्तव्यों से प्रेरित है। पहला कर्तव्य उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर आर्थिक विकास को तेज और अनवरत बनाये रखना होगा ताकि वैश्विक उथल-पुथल का मजबूती से समाना किया जा सके। दूसरा कर्तव्य लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और उनके क्षमता निर्माण की है ताकि देश को समृद्धि के मार्ग पर ले जाया जा सके। सबका साथ सबका विकास के अनुरूप तीसरा कर्तव्य संसाधन, सुविधा और अवसर तक हर परिवार, समाज, इलाके और सेक्टर की पहुंच सुनिश्चित करना है। सरकार इन कर्तव्यों को पूरा करने के लिए समर्थन का वातावरण तैयार करेगी। </p>
<p>उन्होंने सात रणनीतिक सेक्टरों में विनिर्माण को बढ़ावा देने का प्रस्ताव किया। देश के बायो फार्मा विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए अगले पांच साल 10 हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ बायो फार्मा शक्ति का प्रस्ताव किया। इसके तहत देश में बायोलॉजिक्स और बायो सिमिलर बनाने के लिए पारितंत्र तैयार किये जायेंगे। फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान के लिए तीन राष्ट्रीय संस्थान बनाये जायेंगे और मौजूदा सात संस्थानों को अपग्रेड किया जायेगा। केंद्रीय औषधि नियंत्रण संस्थान को मजबूत कर वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जायेगा। </p>
<p>इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की गयी है जिसके तहत उपकरण आदि तैयार किये जायेंगे, फुल स्टैक स्वदेशी आईपी तैयार किया जायेगा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जायेगा। उद्योग के नतृत्व में अनुसंधान को बढ़ावा दिया जायेगा और प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा। अप्रैल 2025 में शुरू की गयी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट विनिर्माण योजना के लिए आवंटन 22,919 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 12:32:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2026- 27 के बजट को दी मंजूरी, वित्त मंत्री सीतारमण लगातार नौवीं बार करेगी बजट पेश</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बजट 2026-27 को मंजूरी दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लोकसभा में लगातार नौवीं बार आम बजट पेश करेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-union-cabinet-approved-the-budget-for-the-year-2026-27/article-141524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/500-px)-(1).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2026- 27 के केंद्रीय बजट को रविवार सुबह मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संसद भवन में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में बजट को मंजूरी दी गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज सुबह लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही  वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेंगी। बता दें कि सीतारमण लगातार नौंवीं बार बजट पेश करेंगी।</p>
<p>इससे पहले वित्त मंत्री बजट की प्रति के साथ वित्त मंत्रालय के कार्यालय कर्तव्य भवन से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने के लिए राष्ट्रपति भवन गई। राष्ट्रपति मुर्मु ने दही और चीनी खिलाकर उनका पारंपरिक स्वागत किया। </p>
<p>वित्त मंत्री ने राष्ट्रपति के साथ बजट के संबंध में कुछ चर्चा भी की। इस अवसर पर उनके साथ वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। राष्ट्रपति ने सीतारमण और उनकी टीम को बजट पेश करने के लिए शुभकामनाएं दी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 12:02:56 +0530</pubDate>
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