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                <title>language - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर बवाल, छात्रों-अभिभावकों ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा</title>
                                    <description><![CDATA[सीबीएसई की नई भाषा नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस याचिका में कक्षा 9 और 10 में दूसरी भारतीय भाषा को अनिवार्य करने के फैसले को चुनौती दी गई है। अभिभावकों और छात्रों का तर्क है कि इस अचानक बदलाव के बजाय उन्हें विदेशी भाषाएं चुनने की आजादी मिलनी चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/uproar-over-cbses-three-language-policy-students-parents-knocked-at-the/article-154638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/cbse.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सीबीएसई की नई भाषा नीति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां छात्रों और अभिभावकों की ओर से याचिका दाखिल की गई है। याचिका में कक्षा 9 और 10 में दूसरी भारतीय भाषा को अनिवार्य बनाने के फैसले को चुनौती दी गई है।</p>
<p>सीबीएसई ने नई शिक्षा नीति के तहत थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके अनुसार छात्रों को दो भारतीय भाषाओं के साथ एक अन्य भाषा पढ़नी होगी। हालांकि अभिभावकों का कहना है कि शुरुआत में यह व्यवस्था कक्षा 6 से लागू होने की बात कही गई थी, लेकिन अब अचानक बड़े छात्रों पर इसे लागू करना उचित नहीं है।</p>
<p>कई छात्रों ने तर्क दिया है कि वे तीसरी भाषा के रूप में जर्मन, फ्रेंच या चाइनीज जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ना चाहते हैं। मामले पर अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने की संभावना है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 13:15:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वामी बालमुकुंदाचार्य ने कहा-संस्कृत केवल भाषा ही नहीं बल्कि भारत की जीवन दृष्टि भी है, जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को किया संबोधित</title>
                                    <description><![CDATA[हवामहल विधायक स्वामी बालमुकुंदाचार्य ने कहा कि संस्कृत भारतीय जीवन-दृष्टि और सांस्कृतिक चेतना का आधार है, जिसे संरक्षित कर शोध, तकनीक और आधुनिक शिक्षा से जोड़ना आवश्यक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/swami-balmukundacharya-said-sanskrit-is-not-only-a-language/article-142317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(10)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हवामहल विधानसभा क्षेत्र के विधायक स्वामी बालमुकुंदाचार्य ने कहा है कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की जीवन-दृष्टि, ज्ञान-परंपरा और सांस्कृतिक चेतना का मूल स्रोत है। सनातन संस्कृति की आधारशिला संस्कृत भाषा है बालमुकुंदाचार्य शनिवार को  जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। </p>
<p>उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा को संरक्षित करना और भावी पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने त्रिवेणी महाराज के संकल्प के अनुरूप वैदिक परंपरा को आगे बढ़ाना, प्राचीन नक्षत्र व्यवस्था, अश्वमेघ यज्ञ परंपरा तथा प्राचीन ग्रंथों और लेखों के संरक्षण एवं प्रचार का कार्य आज के समय में अत्यंत आवश्यक है। </p>
<p>मुख्य अतिथि के रूप में हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय ने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा के संवाहक हैं। आवश्यकता है कि संस्कृत को शोध, तकनीक और आधुनिक विषयों से जोड़ते हुए वैश्विक मंच पर स्थापित किया जाए, ताकि इसकी सार्वकालिक उपयोगिता सिद्ध हो सके। कुलपति प्रो.मदनमोहन झा ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शास्त्रों का अध्ययन नहीं, बल्कि संस्कृत ज्ञान को समकालीन संदर्भों से जोड़कर समाजोपयोगी बनाना है। संस्कृत शिक्षा के माध्यम से नैतिकता, अनुशासन और समन्वय की भावना विकसित होती है, जो राष्टÑ निर्माण में सहायक है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 12:30:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भजनलाल शर्मा की पहल : प्रदेश में स्थापित होगी लैंग्वेज लैब, युवाओं के लिए विदेशों में नौकरी की राह होगी आसान</title>
                                    <description><![CDATA[लैंग्वेज लैब में युवाओं को अंग्रेजी, फ्रेंच, स्पैनिश, जापानीज जैसी विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे इन भाषाओं में पारंगत बन सकें और उनके लिए विदेशों में रोजगार की राह प्रशस्त हो सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bhajanlal-sharmas-initiative-will-be-set-up-in-the-state/article-124326"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/bhajan-lal-sharma.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा प्रदेश के युवाओं की प्रतिभा को अंतर्राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराने की दिशा में प्राथमिकता से कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि युवाओं को सही दिशा देकर उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सकता है। साथ ही, युवाओं को सशक्त बनाकर ही विकसित राजस्थान की परिकल्पना को साकार किया जा सकेगा। इसी दिशा में राज्य सरकार की पहल पर प्रदेश में इंग्लिश एण्ड फॉरेन लैंग्वेज यूनिवर्सिटी और केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा ‘लैंग्वेज लैब’ स्थापित की जाएगी। लैंग्वेज लैब में युवाओं को अंग्रेजी, फ्रेंच, स्पैनिश, जापानीज जैसी विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे इन भाषाओं में पारंगत बन सकें और उनके लिए विदेशों में रोजगार की राह प्रशस्त हो सके।</p>
<p><strong>विदेशों में मिलेंगे रोजगार के अवसर</strong><br />लैंग्वेज लैब में युवाओं को मिलने वाले विदेशी भाषाओं के प्रशिक्षण से उनके कौशल में बढ़ौतरी होगी। यह पहल युवाओं को विदेशों के साथ ही देश में भी पर्यटन, व्यापार, आईटी, शिक्षा और सेवा क्षेत्र में रोजगार प्राप्त करने में कारगर साबित होगी। राज्य में औद्योगिक परिदृश्य को नए आयाम देने के लिए राज्य सरकार द्वारा गत वर्ष राइजिंग राजस्थान ग्लोबल निवेश समिट का आयोजन किया गया था। इस समिट के दौरान राज्य सरकार एवं विभिन्न उद्यमियों के बीच लगभग 35 लाख करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। समिट के दौरान विभिन्न बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने प्रदेश के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में रूचि दिखाई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में लैंग्वेज लैब स्थापित की जा रही है। विदेशों में युवाओं को नौकरी प्रदान करने की दिशा में यह एक सशक्त कदम साबित होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Aug 2025 16:43:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्थानीय भाषा को आधिकारिक भाषा की मान्यता देने पर विचार करें भजनलाल सरकार, अशोक गहलोत ने की 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग </title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर राजस्थान के विभिन्न जिलों में बोली जाने वाली बोलियों सहित राजस्थानी भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को दोहराते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/consider-the-recognition-of-the-local-language-of-official-language/article-105070"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/ashok-gehlot1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार से मांग की है कि उत्तर प्रदेश की तर्ज पर राजस्थान सरकार भी स्थानीय भाषा को आधिकारिक भाषा के तौर पर मान्यता देने पर विचार करें। गहलोत ने कहा कि राजस्थान सरकार भी उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर संविधान के अनुच्छेद 345 के तहत स्थानीय भाषा को अधिकारिक भाषा की मान्यता देने पर विचार करें। </p>
<p>अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर राजस्थान के विभिन्न जिलों में बोली जाने वाली बोलियों सहित राजस्थानी भाषा को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को दोहराते हैं। 2003 में हमारी सरकार ने राजस्थान विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भेजा था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Feb 2025 16:50:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंग्रेजी भाषा के बढ़ते चलन से हिंदी की हो रही है उपेक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई भी अंग्रेजी के साथ ही हिन्दी में भी शुरू हो गई है। कई राज्यों ने हिंदी में काम शुरू कर दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/hindi-is-being-neglected-due-to-increasing-trend-of-english/article-90440"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देश के बड़े-बड़े शहरों में अब भी अंग्रेजी भाषा का चलन बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते हिंदी की उपेक्षा हो रही है, जबकि वर्तमान समय में भी व्यावसायिक पाठ्यक्रम की पढ़ाई इंग्लिश पर ही केंद्रित है। केन्द्र सरकार ने शिक्षा नीति -2020 के तहत स्थानीय और हिन्दी भाषा को ही आधार बनाया है। इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई भी अंग्रेजी के साथ ही हिन्दी में भी शुरू हो गई है। कई राज्यों ने हिंदी में काम शुरू कर दिया है। </p>
<p><strong>हिंदी का नाम हिंदी कैसे पड़ा</strong><br />आप सभी हिंदी दिवस के इतिहास के बारे में तो जान चुके हैं, लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि आखिर हिंदी भाषा का नाम हिंदी कैसे पड़ा। अगर नहीं तो चलिए आपको इसके बारे में भी बताते हैं। शायद भी आप जानते होंगे कि असल में हिंदी नाम खुद किसी दूसरी भाषा से लिया गया है। फारसी शब्द हिंद से लिए गए हिंदी नाम का मतलब सिंधु नदी की भूमि होता है। 11वीं शताब्दी की शुरुआत में फारसी बोलने वाले लोगों ने सिंधु नदी के किनारे बोली जाने वाली भाषा को हिंदी का नाम दिया था।</p>
<p>हिं दी हमारी गौरवपूर्ण पहचान की भाषा है। यह हमारे व्यक्तित्व को परिभाषित करने वाली भाषा भी है। हिंदी को लेकर जीवन में हीनता बोध से ग्रसित होने वाले यह भूल जाते हैं कि हिंदी ने ही उन्हें महानता की कोटि में पहुंचाया है। इसलिए अपनी भाषा पर हमें अभिमान होना चाहिए।<br /><strong>- डॉ. अजय अनुरागी, शिक्षक</strong></p>
<p>हिन्दी मूलत: तद्भव स्वभाव की भाषा है। इसका आधार बोलियों का प्रयोग करने वाली जनता से निर्मित होता है। जितनी बोलियां उतने तरह की हिन्दी। इसीलिए हिन्दी के अस्तित्व को बहुवचन में समझना चाहिए। हिन्दी के बजाय हिंदियां कहना चाहिए।<br /><strong>- डॉ. विशाल विक्रम सिंह, हिन्दी विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय </strong></p>
<p>हमें गर्व है कि हिंदी हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। अब के युग में, आधुनिक तकनीक और वैश्विक मंचों पर हिंदी का उपयोग बढ़ रहा है, जो इसे न केवल जीवित रख रहा है, बल्कि उसे और भी समृद्ध बना रहा है।<br /><strong>- रेनू शब्दमुखर, टीचर</strong></p>
<p> हिंदी दिवस हमें याद दिलाता है कि अपनी भाषा का सम्मान और प्रचार-प्रसार करना हमारी जिम्मेदारी है। हिंदी की मिठास, सरलता और व्यापकता उसे विश्व की प्रमुख भाषाओं में स्थान दिलाती है।<br /><strong>- डॉ. प्रमिला दुबे, एसएसजी पारीक पीजी कॉलेज ऑफ एजुकेशन</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Sep 2024 11:54:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>भाषाओं में संपन्न है राजस्थान, प्रदेश में बोली जाती हैं 340 भाषाएं</title>
                                    <description><![CDATA[ 9 मातृभाषा ऐसी है जिन्हें केवल महिलाएं बोलती हैं। 11 मातृभाषाएं पुरुष और महिला दोनों बराबर की संख्या में बोलते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-is-rich-in-languages--340-languages-%E2%80%8B%E2%80%8Bare-spoken-in-the-state/article-28113"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/215.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर, नवज्योति। क्या आप जानते हैं कि राजस्थान में ऐसी ऐसी मातृभाषाएं बोली जाती है जिनका आपने नाम तक नहीं सुना होगा और इनकी संख्या 10- 15 या 60- 70 नहीं बल्कि 340 है। साल 2011 के जनगणना आंकड़ों का जब मातृभाषा के आधार पर अध्यनन किया गया तो कई रोचक तथ्य सामने आए। भारतीय सेंसस के अनुसार भारत में कुल 19500 से अधिक मातृभाषाएं बोली जाती हैं। 2011 के सेंसस के अनुसार राजस्थान में 340 मातृभाषाएं बोली जाती हैं। दिलचस्प यह है कि इनमें से 34 मातृभाषाएं ऐसी है जिन्हें महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा बोलती हैं। वहीं 9 मातृभाषा ऐसी है जिन्हें केवल महिलाएं बोलती हैं। 11 मातृभाषाएं पुरुष और महिला दोनों बराबर की संख्या में बोलते हैं। जयपुर स्थित जनगणना भवन में कार्यरत सांख्यिकी अन्वेषक कल्पेश गुप्ता के मुताबिक एक हैरान करने वाली बात ये है कि कुछ मातृभाषाएं तो ऐसी है जिनकी पहचान नहीं की जा सकी लेकिन वे राजस्थान में बोली जाती है। ये सभी आंकड़े लोगों के दिए गए जवाब के आधार पर है। चूंकि डाटा 2011 का है इसलिए संभव है कि इनमें से कुछ मातृभाषाएं अब राजस्थान में न बोली जाती हो।<br /><br /><strong>राजस्थान में बोली जाने वाली वह मातृभाषाएं जो केवल महिलाएं बोलती हैं-</strong><br />चुराही, ताडवी, दिमासा, डोरली, कलारी, काबुई, अहिराणी, खेयमनगन, संगतम<br /><br /><strong>मातृभाषाएं जिन्हें बोलने वाले पुरुषों और महिलाओं की संख्या बराबर है-<br /></strong>करमाली, माहिडी, चेंग, हमार, मोघ, निस्सी/ डाफला, शीना, जोऊ, जाटपू, टेंगखुल<br /><br /><strong>राजस्थान में बोली जाने वाली वह मातृभाषाएं जो केवल पुरूष बोलते हैं</strong><br />पूरन, हजोंग, कुलवी, चखेसंग, देवरी, सिराजी, खोंड, कोच, लीम्बू, मोनपा,  पाइते, परजी, तंगसा, वांचो, यिमचुंगरू, नावैत, अनल, कुवी, लेपचा, रेयांग, वैफेई, मीच<br /><br /><strong>राजस्थान में बोली जाने वाली वे मातृभाषाएं जिन्हें महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा बोलती हैं</strong><br />निमाड़ी, चंबेली, हरियाणवी, गुजराती, गवारी, हंडूरी, बड़ागा, मालवानी, भरमौरी, अफगानी/ काबुली/ पश्तों, गम्ती / गवित, गरासिया, कुकना, मावछी, भाटिया, छाकरू / छोकरी, कोंकणी, हलानी, लोहारा, खेजहा, कोम, लखेर, मारम, मिश्मी, अपतानी, नोक्टे, राई, तिब्बतन, त्रिपुरी, कैकड़ी, भंसारी, आदि गैलोंग, गुजराव, कच्छी।<br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />मैं समझता हूं कि बोलियों की संख्या हजारों में भी हो सकती है। मेरे अपने गांव में भी एक बोली को लगभग दस तरह से बोला जाता है। अलग- अलग समुदाय की बोली अलग- अलग है।<br />-ओम थानवी, भाषा जानकार<br /><br />जैसे-जैसे लोग शिक्षित होते जाते हैं, उनका अपनी मूल भाषा से संपर्क टूट जाता है। अगर उस भाषा को बोलने वाले बहुसंख्यक नहीं हैं तो धीरे-धीरे वह भाषा लुप्त होने के कगार पर पहुंच जाती है।<br />-सीपी देवल, पद्मश्री साहित्यकार</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Oct 2022 11:17:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अशोक गहलोत को धमकाने की भाषा नहीं की जाएगी बर्दाश्त : खाचरियावास</title>
                                    <description><![CDATA[देश को हिंदू मुस्लिम में बांटने वालों को यह पता होना चाहिए कि राजस्थान में कानून व्यवस्था भाजपा शासित राज्यों यूपी और एमपी से 100 गुना बेहतर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/language-of-threatening-ashok-gehlot-will-not-be-tolerated--says-khachariyawas/article-22566"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/6546554654.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। खाद्य मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि जोधपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राजस्थान के लागों को धमकाने की भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। देश को हिंदू मुस्लिम में बांटने वालों को यह पता होना चाहिए कि राजस्थान में कानून व्यवस्था भाजपा शासित राज्यों यूपी और एमपी से 100 गुना बेहतर है। पीसीसी में खाचरियावास ने कहा कि अमित जोधपुर आकर कहते है कि हम आ गए। कुर्सी खाली करो। राजस्थान के लोगों और मुखिया को धमकी देते है। यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अमित ने जो भाषा इस्तेमाल की है। वह गृहमंत्री की भाषा नहीं है।</p>
<p><strong>लोग काम देखकर वोट करते है</strong><br />खाचरियावास ने कहा कि भाजपा में अंतर्कलह और खींचतान है। वहां 10 मुख्यमंत्री पद के दावेदार है। इनका बिखराव ही इन्हें ले डूबेगा। भाजपा नेता मोदी पर वोट लेने की बात कर रहे हैं। मोदी पर यह लोग चुनाव हारेंगे,क्योंकि लोग काम देखकर वोट करते हैं। मोदी जब चलेंगे,जब वह अपने कामों का हिसाब दें। हमसे हमारे काम का हिसाब किसी भी जगह ले लो। राजस्थान में हमने एक करोड़ लोगों को चिरंजीवी योजना से लाभान्वित किया है। भाजपा नेता मंहगाई और बेरोजगारी पर एक शब्द नहीं बोल रहे। केंद्र के कामों पर प्रदेश भाजपा को जबाव देना चाहिए। अंग्रेजों के बाद इन्होंने ही आटे, दाल और नमक पर जीएसटी लगाया है। <br />गायों की रक्षा के लिए केंद्र आगे आए<br />लंपी रोग पर भाजपा आरएसएस के बयानों पर कहा कि केंद्र सरकार को गायों के लिए पॉलिसी जारी करनी चाहिए। धर्म के नाम पर राजनीतिक एजेंडा चलाने वालों के पास अब गायों की सेवा करने का मौका आया है। भाजपा और आरएसएस के लोगों को इस बीमारी के लिए केन्द्र से आग्रह कर राष्ट्रीय आपदा घोषित करानी चाहिए। राज्य सरकार अपने स्तर पर जी जान से लगी हुई है। केन्द्र और राज्य सरकार के स्तर पर मिलकर इस बीमारी से निपटना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Sep 2022 15:37:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री के बयान पर नेता प्रतिपक्ष का पलटवार, आपकी तीन पीढ़ियां संघ को लेकर इसी भाषा का प्रयोग करती आई है</title>
                                    <description><![CDATA[CM के RSS को लेकर दिए बयान पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया का पलटवार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--leader-of-opposition-counterattacked-on-chief-minister-s-statement--kataria-said--your-three-generations-have-been-using-this-language-regarding-the-sangh/article-8001"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/kat.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री के आरएसएस को लेकर दिए बयान पर पलटवार करते हुए नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि  हमारी पैदाइश से पहले संघ बना है और आपकी तीन पीढ़ियां संघ को लेकर इसी भाषा का प्रयोग करती आई है, लेकिन हर बार संघ मजबूती के साथ आगे बढ़ा है।<br /><br />कटारिया ने मुख्यमंत्री के बयान को शर्मनाक बताते हुए कहा कि  संघ की स्थापना सत्ता के लिए नहीं राष्ट्र और व्यक्तित्व निर्माण के लिए हुई थी। संघ लगातार इसी काम को आगे बढ़ाने में जुटा हुआ है। कभी देश की सबसे बड़ी पार्टी आज एक कोने में दब गई। अब जब कांग्रेस पार्टी का धरातल सिमटने लगा है तो उसके नेता हल्की भाषा का उपयोग करने लगे हैं। अगर सरदार वल्लभ भाई पटेल की सोच के आधार पर देश बनाया जाता तो आज हम दुनिया मे ओर भी आगे होते। कटारिया ने संघ के कार्य को लेकर सीएम गहलोत को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे मीडिया के सामने एक मंच पर आ जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Apr 2022 14:09:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>समृद्ध राजस्थानी भाषा की उपेक्षा कब तक</title>
                                    <description><![CDATA[अन्य भाषाओं की तरह राजस्थानी भाषा की अपनी विशिष्ट परम्पराएं एवं परिवेश रहा है। राजस्थानी बोलने वालों की संख्या आज विश्व में 16 करोड़ तक पहुंच गई है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/how-long-has-the-rich-rajasthani-language-been-neglected/article-4663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/rajasthan_new.jpg" alt=""></a><br /><p>भाषा व्यक्ति के भावों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम होती है। पशु-पक्षी,कीट-पतंगे आदि सब जीवों की अपनी-अपनी भाषाएं हैं। ईश्वर की सर्वोतम कृति होने के नाते मानव ने अपनी भाषा का इतना विकास कर लिया कि वो छोटी से छोटी एवं बड़ी से बड़ी बात को अपने शब्दों से प्रकट कर देता है। अन्य भाषाओं की तरह राजस्थानी भाषा की अपनी विशिष्ट परम्पराएं एवं परिवेश रहा है। राजस्थानी बोलने वालों की संख्या आज विश्व में 16 करोड़ तक पहुंच गई है।  हिन्दी, बंगला,तेलगू,तमिल और मराठी के बाद इस दृष्टि से राजस्थानी का ही नाम आता है। मध्यकाल में मेवाड़,ढूंढाड़,हाड़ोती,गोड़वाड़, मेरवाड़ा, शेखावाटी,जंगळधर,मेवात व सवाळख अदि नाम शुरू हुए। कर्नल जेम्स टॉड की पुस्तक एनाल्स एण्ड एंटीक्रिटीज ऑफ  राजस्थान में सर्वप्रथम राजस्थान का नाम आया, उससे पहले यह प्रदेश राजपूताना के नाम से पुकारा जाता था। आजादी मिलने के बाद इस प्रदेश का नाम राजपूताना की जगह राजस्थान रखा गया। राजस्थान के स्थानवासी नाम से यहां की भाषा का नाम राजस्थानी रखा गया। इससे स्पष्ट है कि राजस्थानी अति प्राचीन भाषा है। इसका राजस्थानी नाम जरूर नया है, पहले यह मरूभाषा के नाम से जानी जाती थी। मध्यकाल में यह मरू गुर्जर कहलाई और स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात इसका नाम राजस्थानी पड़ा।</p>
<p><br />सर जॉर्ज ग्रियर्सन नें जब लिग्विस्टिक सर्वे ऑफ  इण्डिया नामक महान ग्रन्थ लिखा तो उन्होंने राजस्थान में बोली जाने वाली इकसार व्याकरण के ढांचे के सभी बोलियों का एक कुटुम्ब एक परिवार माना और जैसे गुजरात की गुजराती है वैसे ही राजस्थानी भाषा को राजस्थानी नाम दिया। ग्रियर्यन के सामने भी सम्भवत: कर्नल टॉड की पुस्तक का आधार था। भाषा-भूगोल की दृष्टि से राजस्थान के पूर्व में (उत्तर-दक्षिण तक) ब्रज भाषा, दक्षिण में (पूर्व से पश्चिम तक) बुन्देली,मराठी, भीली, खानदेसी और गुजराती, पश्चिम  में (दक्षिण से उत्तर तक) सिंधी, लहंदा और उत्तर में (पश्चिम से पूर्व तक)   लहंदा,पंजाबी और बांगरू है। विंध्याचल और आबू पर्वत के बीच के पर्वतों में भीली बोली जाती है। अंग्रेजों ने अपनी राजनैतिक सुविधा के लिए मालवा को राजस्थान से अलग कर दिया, परन्तु लोक के संस्कारों, रहन-सहन, बोलचाल, वेशभूषा आदि की दृष्टि से वह राजस्थान का स्वाभाविक अंश है।  मध्यप्रदेश के सात  जिले मन्दसौर, रतलाम, राजगढ़ , उज्जैन, देवास , इन्दौर व धार को मध्यप्रदेश सरकार आज भी मालवी भाषी मानती है। हरियाणा के रोहतक, सोनीपत, हिसार, सिरसा, गुड़गांव, जीन्द ,महेन्द्रगढ़ आदि की भाषा बांगड़ू बोली राजस्थानी भाषा का ही एक रूप है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजस्थानी भाषा का  विस्तार कई दूसरे प्रदेशों तक है। राजनैतिक व्यवस्था और व्यवस्था के स्वरूप ने इस भाषा के विस्तार क्षेत्र को कुंठित कर दिया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद राजनैतिक तौर पर मनचाहे ढंग से राजस्थानी को हिन्दी की उप भाषा मानकर इसके विकास को बहुत बड़ी क्षति पहुंचाई गई, जो आज भी पूरी नहीं हो पा रही है।</p>
<p><br />राजस्थानी समस्त राजस्थान की अपनी भाषा है। राष्ट्रभाषा हिन्दी की इस बहन का कहीं किसी तरह का विरोध नहीं है। अंतर इतना ही है कि राजस्थानी राजस्थान की धरती के वासियों की मातृभाषा है। मातृभाषा से राष्ट्रभाषा का हमेशा मान बढ़ा हैै। लेकिन राजस्थान में बाहर से आए शिक्षित लोगों ने जो कि इस धरती की प्रकृति और भाषा से अंजान थे, हिन्दी को मातृभाषा बतलाना और पढ़ाना शुरू कर दिया। बिना इस अंतर को जाने या जानते हुए भी सरकारी सर्वेक्षणों में मातृभाषा के हाशिए में हिन्दी को लिख शुरू से ही राजस्थान वासियों को भ्रमित करना शुरू कर दिया। बाल मानस पर धरी यह छाप राजस्थानी भाषा की महत्ता को राजस्थान की नई पीढ़ी को निरन्तर न समझने के लिए तैयार कर दिया। इसके दुष्परिणाम स्वरूप राजस्थानी भाषा की गति और विकास को भारी धक्का लगा। बाद में इस गति को सुधारने के लिए राजस्थान वासियों को आंदोलन का सहारा लेना पड़ा। सन् 2000 में एक राष्ट्र स्तरीय संगठन खड़ा कर राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए पूरे प्रदेश में जागृति लाई गई। जगह-जगह धरने, प्रदर्शन सम्मेलन हुए। आम जन की आवाज जयपुर तक पहुंची, सुपरिणाम स्वरूप 25 अगस्त 2003 को राजस्थान विधानसभा नें सर्वसम्मति से राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता का संकल्प (प्रस्ताव) पारित कर केन्द्र सरकार को भेज दिया। </p>
<p><br />राजनैतिक उदासीनता के कारण राजस्थान सरकार की ओर से  भेजा गया वह संकल्प केन्द्र सरकार के ठंडे बस्ते में है। यदि राजस्थान सरकार चाहे तो सर्वसम्मति से पारित संकल्प को आधार मानते हुए राजस्थानी भाषा को प्रदेश में द्वितीय राजभाषा का दर्जा दे सकती है, इसमें कोई कानूनी अड़चन नहीं है। पूर्व में छत्तीसगढ़ प्रदेश में ऐसा ही हो चुका है। विश्व मातृ भाषा दिवस पर राजस्थान प्रदेश के समस्त प्रदेशवासियों का नैतिक दायित्व बनता है कि वो अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, विधायकों ,सांसदों एवं राजनेताओं से अपनी मातृभाषा को मान्यता का सम्मान शीघ्र दिलवाने हित दबाव बनाएं।  शांतिप्रिय आंदोलन को सरकारें हमेशा नजरअंदाज करती आई हंै,इसलिए अब आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए बाल, युवा, प्रौढ़ ,वृद्ध एवं महिलाओं को अपनी ताकत दिखााने का समय आ गया है।  </p>
<p><strong>      -पवन पहाड़िया<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br />    <br /><br /><span style="color:#ff0000;">राजस्थानी समस्त राजस्थान की अपनी भाषा है।</span> राष्ट्रभाषा हिन्दी की इस बहन का कहीं किसी तरह का विरोध नहीं है। अंतर इतना ही है कि राजस्थानी राजस्थान की धरती के वासियों की मातृभाषा है। मातृभाषा से राष्ट्रभाषा का हमेशा मान बढ़ा हैै। लेकिन राजस्थान में बाहर से आए शिक्षित लोगों ने जो कि इस धरती की प्रकृति और भाषा से अंजान थे। हिन्दी को मातृभाषा बतलाना और पढ़ाना शुरू कर दिया।</p>
<p><br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Feb 2022 15:38:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हिंदी को लेकर शाह का बड़ा बयान : कहा, मूल भाषा में शिक्षा दी जाती तो देश पिछड़ता नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[''हमारा देश पिछड़ गया, उसका मूल कारण है कि हमने अपनी पढ़ाई अपनी मूल भाषा नहीं की।''-अमित शाह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%B6%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8---%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%B2-%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%9B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/article-2349"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-11/amit-shah-sambodhan.jpg" alt=""></a><br /><p>वाराणसी। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आजादी के बाद देश पर पिछड़े होने का धब्बा लगने के पीछे अपनी मूल भाषा में शिक्षा दीक्षा नहीं होने को मुख्य वजह बताते हुये कहा है कि ''हमारा देश पिछड़ गया, उसका मूल कारण है कि हमने अपनी पढ़ाई अपनी मूल भाषा नहीं की।'' शाह ने शनिवार को यहां राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश को स्वराज तो मिल गया अब इसे 'सुराज' में बदलना है, मगर, स्वदेशी और स्वभाषा, पीछे छूट गये हैं। उन्होंने आह्वान किया कि आजादी के अमृत महोत्सव में हम पीछे छूटे इन लक्ष्यों को पूरा करें। <br />  </p>
<p> शाह ने देश को आजादी मिलने के बाद भी मातृ भाषा सहित अन्य स्थानीय भाषाओं के साथ सौतेला व्यवहार किये जाने को ऐतिहासिक भूल बताते हुये कहा कि अब वह समय चला गया है जब अपनी मूल भाषा जानने वालों को शर्म का अहसास करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि जो देश अपनी भाषाओं को भुला देता है वह देश अपना मौलिक ङ्क्षचतन भी खो देता है। इसीलिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक मंचों पर अपनी बात अपनी राजभाषा में ही रखी। <br />  </p>
<p>दो दिन के वाराणसी प्रवास पर आये शाह ने यहां स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में आयोजित अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुये यह बात कही। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार बनने के बाद राजभाषा सम्मेलन को दिल्ली से बाहर ले जाने का जब फैसला किया तो यह सौभाग्य की बात है कि यह सम्मेलन अपने पहले पड़ाव के रूप में भाषाओं के गोमुख कहे जाने वाले शहर वाराणसी में पहुंचा।  <br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Nov 2021 16:06:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केंद्रीय मंत्री बघेल के बयाल पर पायलट का पलटवार : भाजपा नेता अपने अनर्गल बयानों के लिए जनता से माफी मांगें</title>
                                    <description><![CDATA[अमर्यादित भाषा का राजनीति में कोई स्थान नहीं: पायलट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%98%E0%A5%87%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%B2%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A4%B2%E0%A4%9F%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0---%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%97%E0%A4%B2-%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%82/article-1814"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/sachin-on-baghel.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं पूर्व पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट ने भाजपा नेताओं द्वारा कांग्रेस नेताओं के खिलाफ ओछी एवं स्तरहीन भाषा का प्रयोग किये जाने को निन्दनीय व अशोभनीय बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में भर्त्सना की है।</p>
<p>पायलट ने गुरुवार को अपने आवास पर जनसुनवाई के समय कहा कि केन्द्रीय राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल द्वारा कांग्रेस नेताओं के खिलाफ जो बयानबाजी की गई है, वह अमर्यादित है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ द्वारा कांग्रेस नेता रफीक मण्डेलिया के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया गया है, वह अशोभनीय है।</p>
<p>राजनीति में वैचारिक विरोध स्वीकार्य होता है, परन्तु इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करने से ना सिर्फ स्वयं की साख को ठेस पहुंचती है बल्कि जनता में भी नकारात्मक संदेश जाता है। पायलट ने कहा कि भाजपा के नेता उपचुनाव में हार के डर के कारण इस तरह की स्तरहीन भाषा का प्रयोग कर रहे हैं जिसका स्वच्छ राजनीति में कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग इस तरह की अशोभनीय शब्दावली का इस्तेमाल करके जनता को क्या संदेश देना चाहते है। उन्होंने कहा कि भाजपा के उक्त दोनों नेताओं को अपने स्तरहीन शब्दों के प्रयोग के लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Oct 2021 16:20:05 +0530</pubDate>
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