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                <title>आठ दिन में 11 लाख बांट दिए मुख्यमंत्री महंगाई गारंटी कार्ड  </title>
                                    <description><![CDATA[जिला कलेक्टर ने हरमाड़ा, विद्याधर नगर और मुरलीपुरा में लगे राहत कैंपों का औचक निरीक्षण किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-dearness-guarantee-card-distributed-to-11-lakhs/article-44427"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/x-17.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। महंगाई राहत कैंप में सुबह से ही लंबी कतारें देखी जा रही हैं। जिला कलक्टर प्रकाश राजपुरोहित ने बताया कि आमजन को महंगाई से राहत देने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर लगाए जा रहे हैं। ये कैंप 24 अप्रैल को शुरू हुए थे। जिले में अब तक कुल 11 लाख 60 हजार 409 महंगाई राहत कार्ड जारी किए जा चुके हैं, जिसमें  मुख्यमंत्री नि:शुल्क अन्नपूर्णा फूड पैकेट योजना में एक लाख 84 हजार 738, मुख्यमंत्री चिरंजीवी दुर्घटना बीमा योजना में 2 लाख 37 हजार 389, मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में 2 लाख 37 हजार 389, मुख्यमंत्री नि:शुल्क कृषि बिजली योजना में 16 हजार 408, मुख्यमंत्री नि:शुल्क घरेलू बिजली योजना में एक लाख 97 हजार 882, इंदिरा गांधी गैस सिलेंडर सब्सिडी योजना में 67,694, मुख्यमंत्री कामधेनु बीमा योजना में 80,692, सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में 93,686, महात्मा गांधी राष्टÑीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में 32032, इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना में 12,499 लाभार्थियों ने पंजीकरण करवाया है। सोमवार को एक लाख 66 हजार 344 राहत कार्ड जारी किए गए हैं। </p>
<p><strong>कैंपों का औचक निरीक्षण </strong></p>
<p>जिला कलेक्टर ने हरमाड़ा, विद्याधर नगर और मुरलीपुरा में लगे राहत कैंपों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने लाभार्थियों से बातचीत की और कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ लेने के लिए परिवार का कोई भी सदस्य बिजली का बिल और जन आधार ले जाकर किसी भी स्थान पर लगे कैंप में रजिस्ट्रेशन कराकर गारंटी कार्ड प्राप्त कर सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 May 2023 10:41:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिचौलिए मालामाल, किसान बेहाल</title>
                                    <description><![CDATA[शहर सहित जिले की सब्जी मंडियों में किसानों की ओर से खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत से तैयार की गई सब्जियों के भाव बारिश की वजह से धडाम गिर रहे हैं, लेकिन बाजार में सब्जियों के भाव कम नहीं हुए है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/middlemen-are-rich--farmers-are-in-upset/article-16136"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/bichauliye-malamal,-kissan-behal-kota-news-25.7.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर सहित जिले की सब्जी मंडियों में किसानों की ओर से खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत से तैयार की गई सब्जियों के भाव बारिश की वजह से धडाम गिर रहे हैं, लेकिन बाजार में सब्जियों के भाव कम नहीं हुए है। इसमें सीधे तौर पर बिचौलिए माल कमा रहे हैं, जो किसानों से औने-पौने दामों में सब्जी खरीद रहे हैं। इससे किसान और आमजन को आर्थिक नुकसान हो रहा है।<br /><br /><strong>किसानों को नहीं मिल रहा ज्यादा फायदा</strong><br />जानकारी के अनुसार किसान बड़े पैमाने पर नकदी फसल के तौर पर सब्जी की खेती करते हैं। कुछ किसान तो परम्परागत खेती सिर्फ परिवार का खर्च चलाने के लिए ही कर रहे हैं, जबकि अधिकतर किसान खेतों में सब्जियों की खेती करने लगे हैं, लेकिन किसानों को सब्जी की खेती में जो मुनाफा मिलना चाहिए, वह बिचौलिए ले रहे हैं। सब्जी के व्यापार में घुसे बिचौलिए मालामाल हो रहे हैं और किसान कड़ी मेहनत के बावजूद बेहाल हो रहे हैं। किसान मेहनत करने के बाद भी वहीं खड़ा है, जहां इसके पहले था। सब्जी की खेती करने वाले किसान हाड़-तोड़ मेहनत करने के बाद भी उस उपज का सीधा और ज्यादा लाभ नहीं ले पा रहा है। सबसे ज्यादा चोट सब्जी खरीदने वाले ग्राहकों पर पड़ रही है। ग्राहकों तक पहुंचते ही सब्जियां कई गुना महंगी हो जाती है।<br /><br />सब्जी की खेती करने वाले अरंडखेड़ा निवासी किसान भरोस शर्मा ने बताया कि उसने छह बीघा से ज्यादा खेत में टमाटर की खेती की थी, लेकिन भाव नहीं मिलने से खेत में ट्रैक्टर चला दिया है। मंडी और बाजार में सब्जियों के भाव में डेढ़ से दोगुना का अंतर है। किसान तो बर्बाद हो रहा है।<br /><br />सब्जी      थोक     फुटकर<br />टमाटर     7-10     30-35<br />मिर्च     15-20     40-45<br />लौकी     20-22     40-42<br />भिंडी     27-30     40-45<br />प्याज     7-10     20-22<br />ग्वारफली     25-30     60-80<br /><br /><strong>ऐसे बढ़ते हैं सब्जियों के दाम</strong><br />किसान कड़ी मेहनत से सब्जियां तैयार कर नजदीकी मंडी में बेचने ले जाते हैं। सब्जी की आवक एवं डिमांड के अनुसार आढ़तियां रेट निर्धारित करता है। थोक मंडी से सब्जी की खरीद कर बिचौलिए सब्जी का भाव बढ़ाकर छोटे व्यापारियों को बेचते हैं। ऐसे में फुटकर दुकानदार खरीद किए भाव को बढ़ा कर आमजन को बेचते हैं। किसानों के खेत से सस्ते में बिकने वाली सब्जी बाजार में पहुंचते-पहुंचते दो से ढाई गुना महंगी हो जाती है।<br /><br />थोक फल सब्जी मंडी में किसानों का माल उचित दाम पर ही खरीदा जाता है। इसके बाद मंडी का व्यापारी अपना मुनाफा निकाल कर फुटकर व्यापारी को बेचता है। इस कारण सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं। <strong>-संतोष कुमार, सब्जी व्यापारी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Jul 2022 15:56:52 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>लोगों की आय सीमित </title>
                                    <description><![CDATA[नौकरी की मजबूरी के चलते कार्मिकों को भी सब कुछ सहन करना पड़ा। महंगाई की मार के साथ ही आम उपभोक्ताओं की मानसिकता में भी अब तेजी से बदलाव देखने को मिलने लगा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/rate-hike-see-in-the-market/article-14618"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/46546546585.jpg" alt=""></a><br /><p>महंगाई के चलते लोगों की आय सीमित हो गई है। कोरोना का असर यह रहा है कि लोगों की नौकरी छुटी, तो नौकरी को बचाने के लिए कई समझौते करने पड़े। संस्थानों ने नियोक्ताओं ने कार्मिकों के वेतन भत्तों में कटौती की। नौकरी की मजबूरी के चलते कार्मिकों को भी सब कुछ सहन करना पड़ा। महंगाई की मार के साथ ही आम उपभोक्ताओं की मानसिकता में भी अब तेजी से बदलाव देखने को मिलने लगा है। बाजार के बदलते हालातों ने अब आम लोगों को ब्रांडेड के स्थान पर आम उत्पादों यानी कि लोकल उत्पादों की और प्रेरित किया है, तो अनावश्यक खर्चो में कटौती करने को भी मजबूर किया है। एक्सिस माई इंडिया द्वारा हाल ही कराए गए कंज्यूमर सेंटीमेंट इंडेक्स सर्वे की नवीनतम रिपोर्ट में यह तथ्य उभर कर आए हैं। सभी तरह की उपभोक्ता वस्तुओं के कीमतों की बढ़ोतरी का असर सीधे रूप से बाजार में दिखाई देने लगा है। अब कोई भी वस्तु खरीदने से पहले आम आदमी दस बार सोचने लगा है और ब्रांड के साथ ही उसकी कीमत भी देखने लगा है। हालात यहां तक आने लगे हैं कि लक्जरियस वस्तुओं की खरीद को तो आम नागरिक कुछ समय के लिए डेपर करने में ही भलाई समझने लगे हैं। बाजार जानकारों की माने तो देश में तेज गर्मी के बावजूद एसी सहित अन्य इलेक्ट्रृोनिक उत्पादों की खरीद में 25 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। संपन्न लोग भी मोबाइल हैंडसेट बदलने को डेफर कर रहे हैं तो नामी गिरामी नाम के स्थान पर लोग स्थानीय उत्पादों को तरजीह देने लगे हैं।</p>
<p>यह सभी बाजार में बढ़ती कीमतों के कारण हो रहा है। दरअसल कोरोना दौर का असर अभी तक जारी हैं। पूरी तरह से मार्केट संभल भी नहीं पाया है तो सोवियत रुस यूक्रेन युद्ध ने कोढ़ में खाज का काम कर दिया है। पर्यावरण असंतुलन के चलते तेज गर्मी व प्राकृतिक आपदाओं से दुनिया के देश जूझ रहे है तोे आतंकवादी या हिंसक घटनाओं से कई देशों को दो चार होना पड़ रहा हैं। दुनिया के देशों में राजनीतिक अस्थितरता के कारण भी हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। दुनिया के देशों के सामने खाद्यान्न संकट मुंह बाये खड़ा है तो कच्चे तेल के बढ़ते भावोें के कारण महंगाई दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। लाख प्रयासों के बावजूद महंगाई कंट्रोल में आने का नाम ही नहीं ले रही है। रुस यूक्रेन युद्ध से अलग हटकर भी देखे तो इंग्लैण्ड, इजरायल और कुछ हद तक अमेरिका के राजनीतिक हालात अच्छे नहीं कहे जा सकते तो श्रीलंका के हालात सामने आ चुके हैं। पाकिस्तान के हालात किसी से छिपे नहीं हैं तो अफगानिस्तान के हालातों से भी सभी को जानकारी है। ऐसे में आर्थिक हालात पटरी पर आने की बात करना ही बेमानी होगा। यदि पेट्रोल-डीजल के भावों को लेकर ही विश्लेषण किया जाए तो हम पाएंगे कि इनके बढ़ते दाम का असर पूरे बाजार पर तत्काल पड़ता है। क्योंकि वस्तुओं का परिवहन महंगा हो जाता है तो मूल्य में बढ़ोतरी स्वाभाविक ही हो जाती है। यह कोई अकेला कारक नहीं है, पर इसका अपना और महत्वपूर्ण असर देखा जा सकता है। लोगों की आय सीमित हो गई है। कोरोना का असर यह रहा है कि लोगों की नौकरी छुटी तो नौकरी को बचाने के लिए कई समझौते करने पड़े। संस्थानों  नियोक्ताओं ने कार्मिकों के वेतन भत्तों में तेजी से कटौती की।</p>
<p>नौकरी की मजबूरी के चलते कार्मिकों को भी सब कुछ सहन करना पड़ा। कोरोना के बाद भी कई क्षेत्र तो ऐसे हैं जिनके पटरी पर आने में लंबा समय लगना तय माना जा रहा है। पर्यटन उद्योग, होटल उद्योग अभी पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ पाया है तो दूसरी और कृषि लागत में बढ़ोतरी और न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी से खाद्यान्न महंगें होते जा रहे हैं। चीन के कारण भी दुनिया के देशों की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। कोरोना के बाद से दुनिया के अधिकांश देशों की नजर में चीन विलेन के रुप में उभरा है वहीं चीन अभी भी कोरोना संकट से गुजर रहा है। लोग चीन से बेतहासा नाराज हैं। समय के साथ उसके मिजाज में बदलाव भी आता है। बाजार के हालिया हालातों से यह साफ  हो जाता है। भारतीय बाजार की ही चर्चा करें तो भारतीय उपभोक्ता की मानसिकता को इसी से समझा जा सकता है कि 16 माह में स्मार्ट फोन बदलने वाले उपभोक्ता अब इसे आठ से बारह महीने व इससे भी अधिक के लिए डेफर करने लगे हैं तो बेतहासा गर्मी के बावजूद एसी मार्केट उतना नहीं उठ पाया जितनी संभावना मानी जा रही थी। सरकारों की लाख योजनाओं के बावजूद लोगों की स्वास्थ्य खर्च की चिंता अधिक बढ़ी है। कोरोना के बाद लोग स्वास्थ्य के प्रति अधिक सावचेत हुए हैं। इसके साथ ही मेडिकल इंश्योरेंस के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है, जिस तरह से लोगों ने पेट्रोल -डीजल के भावों से समझौता कर ही लिया है तो फिर उसकी खानापूर्ति अपने अन्य खर्चों यहां तक कि घरेलू दिन प्रतिदिन के खर्चों में भी कमी करके की जाने लगी है।                </p>
<p><strong>- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार है)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 Jul 2022 10:45:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>फिर रेपो दर में की वृद्धि</title>
                                    <description><![CDATA[रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति  समिति ने  रेपो दर में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि कर ग्राहकों पर महंगाई का बोझ तो बढ़ाया ही है। गवर्नर शशिकांत दास की यह टिप्पणी भी समान रूप से चिंतित करने वाली है कि आगामी दिसंबर तक महंगाई से राहत की उम्मीद नहीं है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/rbi-committee-increased-in-repo-rate/article-11775"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/04-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने  रेपो दर में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि कर ग्राहकों पर महंगाई का बोझ तो बढ़ाया ही है। गवर्नर शशिकांत दास की यह टिप्पणी भी समान रूप से चिंतित करने वाली है कि आगामी दिसंबर तक महंगाई से राहत की उम्मीद नहीं है। रिजर्व बैंक ने पिछले महीने ही चार साल बाद रेपो दर में अचानक 0.40 प्रतिशत और नकद आरक्षित अनुपात में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि की थी अब दूसरी बार की वृद्धि से रेपो दर 0.90 प्रतिशत तक बढ़ गई है। यानी बढ़ती महंगाई को देखते हुए केन्द्रीय बैंक ने सस्ते कर्ज के दौर से अर्थव्यवस्था को बाहर निकालने का फैसला किया है। पिछले महीने रेपो दर बढ़ाने के साथ ही लोगों पर किस्तों का बोझ बढ़ गया था। अब रेपो दर में फिर वृद्धि से होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन आदि की ब्याज दर बढ़ जाएगी। हालांकि पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क कम करने तथा गेहूं निर्यात रोकने फैसलों से महंगाई पर कुछ अंकुश लगा है, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था की अनिश्चितता तथा कच्चे तेल के दामों में तेजी के कारण महंगाई की चुनौती अभी बनी रहेगी। शीर्ष बैंक ने महंगाई दर का अनुमान 5.7 से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है, बशर्तें मानसून की स्थिति ठीक रहे और कच्चे तेल के दामों में अधिक इजाफा न हो। यानी मानसून ठीक नहीं रहा और कच्चे तेल के भाव स्थिर नहीं रहे, तो महंगाई की दर बढ़ सकती है।</p>
<p>महंगाई दर के अलावा इस वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की ग्रोथ के अनुमान को 7.2 प्रतिशत पर कायम रखा गया है। गवर्नर दास के मुताबिक रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और महंगाई बढ़ी है। इसे काबू करने के लिए ही सख्त कदम उठाने पड़े हैं। मौद्रिक नीति समिति का तो अनुमान है कि मुद्रास्फीति की दर वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में तय दायरे से अधिक रहेगी। ऐसा होने से केन्द्रीय बैंक पर दबाव बढ़ेगा और नीतिगत दरों में तेज से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। कई अर्थशास्त्रियों ने भी अनुमान जताया है कि मुद्रास्फीति की दर रिजर्व बैंक के संशोधित अनुमान से ऊपर रहेगी।  ऐसे में ब्याज दर और बढ़ सकती है। अब जब तक मुद्रास्फीति को लक्ष्य के करीब नहीं लाया जाता है। अनिश्चित ऐसी ही बनी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jun 2022 10:28:53 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>महंगाई पर अंकुश </title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्र सरकार ने बढ़ती रिकार्ड महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए पेट्रोल पर प्रति लीटर 8 रुपए और डीजल पर 6 रुपए उत्पाद शुल्क कम करने की घोषणा की है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/government-announce-reduction-of-excise-duty/article-10250"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/4-copy3.jpg" alt=""></a><br /><p>केन्द्र सरकार ने बढ़ती रिकार्ड महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए पेट्रोल पर प्रति लीटर 8 रुपए और डीजल पर 6 रुपए उत्पाद शुल्क कम करने की घोषणा की है। इससे पेट्रोल 9.50 रुपए प्रति लीटर और डीजल 7 रुपए प्रति लीटर सस्ता हो गया है। केन्द्र की इस पहल के बाद कुछ राज्यों ने भी वैट में कटौती कर जनता को राहत देने का कदम उठाया है और कुछ जल्दी ही वैट कम करने की घोषणा करेंगे। केन्द्र पर उत्पाद शुल्क में कटौती का दबाव बन गया था। मई में खुदरा महंगाई 7.79 प्रतिशत दर्ज हुई, जो भी पिछले महीनों की रिकार्ड बढ़ोतरी है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ महंगाई की दर में बढ़ोतरी शुरू हो गई और यह रिकार्ड तोड़ रूप से दर्ज होने लगी। महंगाई से पूरे देश में हाहाकार की स्थिति थी। आम लोगों के धैर्य की भी आखिर कोई सीमा होती है, तो केन्द्र भी बढ़ती महंगाई से चिंतित था। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती करने के साथ ही सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत साल में 12 गैस सिलेंडरों पर दो सौ रुपए की सब्सिटी देने की भी घोषणा की है। इससे सिलेंडर की कीमत आठ सौ रुपए तक हो जाएगी और नौ करोड़ महिलाएं लाभान्वित होंगी।</p>
<p>इसके अलावा सरकार ने विनाइल क्लोराइड (पीवीसी) के पॉलिमर पर आयात शुल्क 10 फीसद से कम कर 7.5 फीसद कर दिया है, इससे कुछ प्लास्टिक के उत्पाद सस्ते होने की उम्मीद है। सरकार ने स्टील के कुछ कच्चे माल पर भी आयात शुल्क कम करने की भी घोषणा की है। सीमेंट की उपलब्धता बढ़ाने व लागत को कम करने के प्रयास भी किए जाने का भरोसा दिलाया है। महंगाई पर काबू पाने के लिए सरकार ने पिछले दिनों गेहूं की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार के इन फैसलों से महंगाई दर में कुछ कमी आने की उम्मीद की जा सकती है। इसका सकारात्मक असर अगले महीनों में देखने को मिल सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इस कटौती के बाद भी यदि माल की ढुलाई की दरें कम नहीं होती है, तो महंगाई में कमी की उम्मीद नहीं की जा सकती। सरकारों को इस पर भी नजर रखनी होगी। देश के बड़े इलाके में भीषण गर्मी व पानी की कमी से फसलों पर भी विपरीत असर पड़ा है इससे खाद्य महंगाई बढ़ सकती है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 11:24:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोना के बाद अब महंगाई बेलगाम </title>
                                    <description><![CDATA[कोरोना के साये में जहां एक ओर सभी को घरों में रहना पड़ा। इसके बाद घरों का बजट बिगड़ा। सरसों, मूंगफली और सोयाबीन के तेलों में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-increased-in-dearness-after-corona/article-8855"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ma-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कोरोना के साये में जहां एक ओर सभी को घरों में रहना पड़ा। इसके बाद घरों का बजट बिगड़ा। सरसों, मूंगफली और सोयाबीन के तेलों में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई। दालों की कीमतों में बीस से तीस फीसदी का इजाफा हुआ। दामों की बढ़ोतरी का मुख्य कारण कोरोना की पाबंदिया रही। लॉकडाउन, सीमित संख्या में आयोजन, होटल, रेस्टोरेंट पर पाबंदी, सामाजिक, धार्मिक कार्यक्रम बंद। इससे मांग में लगातार गिरावट रही। इसके बाद पेट्रोल-डीजल के दाम फिर आग उगलने लगे। 2019 के बाद आए कोरोना ने 2020 और 2021 में उत्पादन और उपभोग के चक्र को चरमरा दिया। वैश्विक संकट के दौरान केन्द्र और राज्य सरकार के सभी उपाय नाकाफी दिख रहे है।</p>
<p><strong>वैश्विक हालात और पेट्रोल-डीजल की मार</strong><br />कोरोना के बाद हालात सुधरने लगे है, मांग में भी लगातार बढ़ोतरी होने लगी। रूस-यूक्रेन के युद्ध के दौरान वैश्विक बाजार में असमंजस के हालात बन गए है। इससे हमारा आयात और महंगा हो गया है। खाद्य तेलों के केन्द्र के सभी प्रयास असफल हो गए। खाद्य तेल निर्यातक देश लगातार दाम बढ़ा रहे है। इसके साथ ही पेट्रोल-डीजल के बेलगाम दाम महंगाई को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहे है।<br /><strong>- गुप्ता, चेयरमैन राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ</strong></p>
<p><strong>लॉकडाउन से बिगड़े मिजाज नहीं बदले</strong><br />उत्पादन चक्र में आई रुकावट के बाद अब भी अड़चने जारी है। चीन से कलर, केमिकल आयात में बाधा बनी हुई है। कई उत्पादन मिल लॉकडाउन में बंद हो गई। दो साल मांग ठप होने के कारण उद्यमी अब उद्योग चलाने में असफल हो रहे है। बाजार में मांग में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन उत्पादन लागत बढ़ने से दामों में बढ़ोतरी चल रही है।<br /><strong>- पवन पारीक, अध्यक्ष खजाने वालों का रास्ता व्यापार मण्डल</strong></p>
<p><strong>घरेलू मांग में रिकॉर्ड तेजी</strong><br />कोरोना की सभी पाबदियां हटने के बाद अब शादी समारोह, धार्मिक, सामाजिक आयोजन हो रहे है। स्कूल-कॉलेज खुल गए है। ऐसे में सभी प्रकार के क्षेत्रों के उत्पादों की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है। दो साल की कोरोना बंदिशों में बिगड़े औद्योगिक हालात सुधरने में समय लगेगा।<br /><strong>- सुरेश अग्रवाल, चेयरमैन, फैडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज (फोर्टी)</strong><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Apr 2022 11:03:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश से भाजपा का सूपड़ा करना है साफ : गहलोत </title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोगों को संदेश दिया है कि अच्छे दिन आएंगे के बजाय, अच्छे दिन कहां गए की स्थिति बन गई है। गहलोत ने ट्वीट कर प्रदेश की लोगों को संदेश दिया है कि आप तैयारी कर लें, राजस्थान में लोकसभा चुनाव में भाजपा को करारा जवाब देकर राजस्थान से भाजपा का सूपड़ा साफ करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/answer-give-of-bjp-in-loksabha-election--says-gehlot/article-7587"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ashok02-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोगों को संदेश दिया है कि अच्छे दिन आएंगे के बजाय, अच्छे दिन कहां गए की स्थिति बन गई है। गहलोत ने ट्वीट कर प्रदेश की लोगों को संदेश दिया है कि आप तैयारी कर लें, राजस्थान में लोकसभा चुनाव में भाजपा को करारा जवाब देकर राजस्थान से भाजपा का सूपड़ा साफ करना है। भाजपा 2014 से पहले कहती थी कि बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार, लेकिन अब बीजेपी के राज में पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस, सब्जी, तेल, कपड़े, दवा, मोबाइल तथा हाईवे का टोल टैक्स सब महंगा हो गया। गहलोत ने कहा कि 2013 में नरेंद्र मोदी का एक भाषण था कि आप मुझे बताइए अगर इसी प्रकार से महंगाई बढ़ती गई, तो गरीब क्या खाएगा। (प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह) यहां आए थे, लेकिन प्रधानमंत्री महंगाई का ‘म’ बोलने के लिए तैयार नहीं है। इनका अहंकार इतना है कि महंगाई के लिए एक शब्द बोलने के लिए तैयार नहीं है।अरे गरीब के घर में चूल्हा नहीं जलता है। बच्चा रात-रात रोता है, मां आंसू पीकर सोती है और देश के नेताओं को गरीब की परवाह तक नहीं है। ये गरीब का हाल कर दिया है। 4 तारीख को वोट करने जाएं, तो घर में जो गैस सिलेंडर हैं ना उसको जरा नमस्कार करके जाइये। गैस सिलेंडर छीन लिए इन लोगों ने और गैस जिस प्रकार से महंगा कर दिया है याद करके जाइए।</p>
<p><strong>मोदी महंगाई का ‘म’ बोलने को तैयार नहीं</strong><br />गहलोत ने कहा कि मोदी ने जिस दिन यह भाषण दिया था, तब गैस का सिलेंडर 450 का हुआ करता था, जो आज 900 रुपए का हो गया है, पर मोदी महंगाई का ‘म’ बोलने को तैयार नहीं हैं। देश का कर्ज बढ़ता जा रहा है, मोदी के सात साल में ढाई गुना कर्ज बढ़ गया। 2014 में लगभग 57 लाख करोड़ का कर्ज था जो 2022 में बढ़कर 136 लाख करोड़ हो गया। बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, युवाओं के पास रोजगार नहीं है, इसलिए समाज में अपराध बढ़ रहे हैं। एक साल में पेट्रोल 27 रुपए, डीजल 25 रुपए महंगा हुआ। दिवाली पर पेट्रोल 5 रुपए और डीजल 10 रुपए सस्ता किया, अब 14 रुपए महंगा कर दिया। बेसिक एक्साइज ड्यूटी, स्पेशल एक्साइज ड्यूटी, एडिशनल एक्साइज ड्यूटी से लोगों की जेब लूट रहे हैं। उस वक्त बाबा रामदेव कहते थे कि पेट्रोल 40 रुपए प्रति लीटर और गैस सिलेंडर 300 रुपए का होना चाहिए, अब वो कहीं दिखाई नहीं देते हैं।</p>
<p><strong>हमने दवाइयां, इलाज सब फ्री कर दिया</strong><br />राजस्थान में तो हमने दवाइयां, इलाज सब फ्री कर दिया तो आप लोगों को चिन्ता नहीं है, बाकी राज्यों में लोग दवाएं तक नहीं खरीद पा रहे हैं। श्रीलंका में आज लोगों के पास खाना नहीं क्योंकि वहां भी राष्ट्रवाद और अल्पसंख्यक विरोध के नाम पर ध्यान भटकाया गया। ऐसी ही दिशा में भारत को ले जाने की मोदी सरकार कोशिश कर रही है। घरेलू सिलेंडर महंगा यानी घर में खाना महंगा, पेट्रोल-डीजल महंगा यानी घर से कहीं भी बाहर जाना महंगा, कमर्शियल सिलेंडर महंगा यानी घर से बाहर खाना महंगा। बीजेपी को भरोसा हो गया है कि कितनी भी महंगाई बढ़ जाए पर धार्मिक ध्रुवीकरण से चुनाव जीत लेंगे। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Apr 2022 10:56:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केन्द्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की बढोतरी का निर्णय लिया है, जिससे महंगाई भत्ते की दर बढकर 31 प्रतिशत हो गयी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/delhi-3-percent-increeased-in-dearness-allowance-of-central-employees/article-7018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/modi-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत की बढोतरी का निर्णय लिया है, जिससे महंगाई भत्ते की दर बढकर 31 प्रतिशत हो गयी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। प्रस्ताव में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (डीए) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (डीआर) की अतिरिक्त किस्त जारी करने की मंजूरी दी गयी है। इसमें मूल वेतन/पेंशन के 31 प्रतिशत की मौजूदा दर में 3 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है, ताकि मूल्य वृद्धि की भरपाई की जा सके।</p>
<p>सरकार का कहना है कि यह वृद्धि स्वीकृत नियम के अनुसार है, जो सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित है। महंगाई भत्ते और महंगाई राहत के कारण राजकोष पर संयुक्त रूप से 9,544.50 करोड़ रूपये का असर पड़ेगा। इससे केंद्र सरकार के लगभग 47.68 लाख कर्मचारियों और 68.62 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा।  <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Mar 2022 15:55:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>युद्ध भारी पड़ेगा</title>
                                    <description><![CDATA[रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ा युद्ध चाहे जिस नतीजे पर पहुंचे, दुनिया की अर्थव्यवस्था पर काफी भारी पड़ेगा। दुनिया भर में महंगाई बढ़ना तय है। यह युद्ध कोविड महामारी से जैसे-तैसे उबर रही वैश्विक अर्थव्यवस्था व नागरिकों के लिए नया संकट करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/war-will-be-heavy/article-5750"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/ukrainian02-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ा युद्ध चाहे जिस नतीजे पर पहुंचे, दुनिया की अर्थव्यवस्था पर काफी भारी पड़ेगा। दुनिया भर में महंगाई बढ़ना तय है। यह युद्ध कोविड महामारी से जैसे-तैसे उबर रही वैश्विक अर्थव्यवस्था व नागरिकों के लिए नया संकट करेगा। यूक्रेन पर हमले के बाद से कच्चे तेल के मूल्यों में वृद्धि का जो सिलसिला जारी हुआ था अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल से 120 डॉलर प्रति बैरल होने के बाद अब 139 डॉलर प्रति बैरल पार करता दिख रहा है। यदि यूक्रेन संकट का हल शीघ्र नहीं निकला तो कच्चे तेल के दामों में और भारी बढ़ोतरी हो सकती है। भारत की मुश्किल यह है कि वह पेट्रोलियम पदार्थों का बड़ा आयातक है, इसलिए उसके लिए चुनौती बड़ी होगी। पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में वृद्धि का नाता सीधे तौर पर महंगाई पर पड़ता है। इससे अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है। इसका संकेत भी मिल रहा है। सोमवार को मुंबई शेयर बाजार का सूचकांक एक हजार 451 अंक गिर गया। पिछले सप्ताह भी शेयर बाजार के ऐसे ही हाल देखे गए थे।</p>
<p>ऐसी ही हालत सिंगापुर जापान से लेकर फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन के शेयर बाजारों की है। दरअसल, युद्ध की वजह से अनिश्चितता का जो माहौल बन गया है, उसमें किसी के भी कुछ समझ नहीं आ रहा है। कोई नहीं जानता कि आगे आने वालों दिनों में क्या-क्या घटित हो सकता है। युद्ध लड़ रहे दोनों देश कच्चे तेल, गैस और गेहूं के बड़े निर्यातक हैं। भारत सहित यूरोपनीय व कई अन्य देश इन देशों से गैस और तेल खरीदते हैं। कच्चे तेल के अलावा गेहूं और निकल, इल्युमीनियम, इस्पात जैसी धातुओं के दाम भी पिछले पांच दशक के रिकार्ड तोड़ रहे हैं। अमेरिका सहित कई देशों के प्रतिबंधों का भी विपरीत असर पड़ेगा। ऐसे में महंगाई कहां जाएगी, कोई नहीं जानता। युद्ध और महामारी जैसी विपत्तियां मानव जीवन को कैसे तबाह कर देती हैं, यह अब किसी से छिपा नहीं रह गया है। महंगाई व बेरोजगारी ने हर आम आदमी की कमर तोड़ दी है। अब कच्चा तेल सबसे बड़ा संकट पैदा करेगा। कच्चा तेल महंगा होते ही सरकारें पेट्रोल-डीजलय के दाम बढ़ाने का कदम उठाती हैं और इसका सीधा असर हर तरह के कारोबार से लेकर आम जीवन पर पड़ता है। भारत की सरकार आने वाले संकट को बखूबी समझती है। सरकार को अभी से बचाव के उपाय तय करने होंगे। इस मामले में जितनी सजगता केन्द्र सरकार को दिखानी होगी, उतनी ही राज्य सरकारों को भी दिखानी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/war-will-be-heavy/article-5750</link>
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                <pubDate>Wed, 09 Mar 2022 10:36:35 +0530</pubDate>
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                <title>CM गहलोत की दिवाली पर राज्य कर्मियों को दोहरी सौगात</title>
                                    <description><![CDATA[केन्द्र के अनुरूप बढ़ाया तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/cm-%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%8C%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A4/article-1820"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/gehlot-modi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर। </strong>मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य कार्मिकों को दिवाली के अवसर पर महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत बढ़ोतरी और तदर्थ बोनस के रूप में दोहरी सौगात दी है। राज्य सरकार महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी पर सालाना करीब 1230 करोड़ का वित्तीय भार वहन करेगी। मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार के कर्मचारियों के अनुरूप ही राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते तथा पेंशनर्स को देय महंगाई राहत की दर में तीन प्रतिशत बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। अब राज्य कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को एक जुलाई 2021 से 31 प्रतिशत महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत दर देय होगी। पूर्व में राज्य कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को 28 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिया जा रहा था। गहलोत के इस निर्णय का लाभ राजस्थान सिविल सेवा (पुनरीक्षित वेतन) नियम-2017 के  आधार पर वेतन प्राप्त कर रहे करीब 8 लाख अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ ही 4 लाख 40 हजार पेंशनर्स को भी मिलेगा। यह लाभ राज्य कर्मचारियों के अतिरिक्त कार्य प्रभारित, पंचायत समिति तथा जिला परिषद के कर्मचारियों को भी देय होगा। कर्मचारियों की 1 जुलाई, 2021 से 30 सितंबर, 2021 तक बढ़े हुए महंगाई भत्ते की राशि उनके सामान्य प्रावधायी निधि, सामान्य प्रावधायी निधि-2004 या सामान्य प्रावधायी निधि-एसएबी खाते में जमा की जाएगी। माह अक्टूबर, 2021 के वेतन से इसका नकद भुगतान किया जाएगा।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>6 लाख कर्मचारियों को बोनस का लाभ</strong></span></span><br /> गहलोत ने प्रदेश के करीब 6 लाख कर्मचारियों को दिवाली पर तदर्थ बोनस देने की भी मंजूरी दी है। यह लाभ राज्य सेवा के अधिकारियों (राजपत्रित) को छोड़कर पे-मैट्रिक्स लेवल-12 अथवा ग्रेड पे-4800 और इससे नीचे के लेवल का वेतन ले रहे राज्य कर्मचारियों को मिलेगा। यह बोनस पंचायत समिति, जिला परिषद के कर्मचारियों तथा कार्य प्रभारित कर्मचारियों को भी देय होगा।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> अधिकतम 6 हजार 774 रुपए तदर्थ बोनस मिलेगा</strong></span></span></p>
<p>तदर्थ बोनस की गणना वर्ष 2020-21 के लिए अधिकतम परिलब्धियों 7 हजार रुपए तथा 31 दिन के माह के आधार पर की जाएगी। यह बोनस 30 दिन की अवधि के लिए देय होगा। इस प्रकार प्रत्येक कार्मिक को अधिकतम 6 हजार 774 रुपए तदर्थ बोनस मिलेगा। विगत वर्ष तदर्थ बोनस की 25 प्रतिशत राशि नकद तथा 75 प्रतिशत राशि सामान्य प्रावधायी निधि खाते में जमा की गई थी, जबकि इस बार बोनस की 50 प्रतिशत राशि नकद एवं शेष 50 प्रतिशत सामान्य प्रावधायी निधि खाते में जमा की जाएगी। राज्य सरकार इस पर 500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार वहन करेगी।<br /> <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>केन्द्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 3% बढ़ा</strong></span></span><br /> ब्यूरो/नवज्योति/नई दिल्ली। दीपावली से पहले मोदी सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों को तोहफा दिया है। कैबिनेट ने केन्द्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ते (डीए) में तीन फीसदी बढ़ोत्तरी करने के फैसले पर मुहर लगा दी,  इस बढ़ोतरी के साथ डीए 31 फीसदी हो गया है। मोदी सरकार के इस फैसले से लगभग 47.14 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों और 68.62 लाख पेंशनभोगियों को फायदा होगा। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इसके अलावा   कुछ दिन पहले लॉन्च किए गए गति शक्ति प्रोजेक्ट को भी कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि आॅल इंडिया कंज्यूमर प्राइज इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्क के आधार पर डीए तय किया जाता है। उन्होंने बताया कि पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान की मॉनिटरिंग थ्री टियर सिस्टम में की जाएगी जिसकी कैबिनेट सचिव अध्यक्षता करेंगे। इनकी अध्यक्षता में एक सचिवों का एम्पावर ग्रुप आॅफ सेक्रेटरीज बनेगा। इस एमपावर ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज में 18 मंत्रालयों के सचिव और हेड ऑफ लॉजिस्टिक डिवीजन के मेंबर कन्वेयर के रूप में काम करेंगे। <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Oct 2021 11:19:36 +0530</pubDate>
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                <title>दिवाली से पहले केंद्रीय कर्मियों को PM मोदी की सौगात : केन्द्रीय कर्मियों के महंगाई भत्ते में 3 फीसदी की वृद्धि</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल में लिए गये इस निर्णय से केन्द्र सरकार के 47.14 लाख कर्मचारियाें और 68.62 लाख पेंशन भोगियों को फायदा होगा और इससे खजाने पर 9488.70 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-pm-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%8C%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%A4---%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%AD%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-3-%E0%A4%AB%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%BF/article-1816"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/pm-modi.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने केन्द्रीय कर्मचारियों एवं पेंशन भोगियों को दीपावली की सौगात देते हुए महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में तीन फीसद की वृद्धि करने का गुरुवार को फैसला किया।<br /> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल में लिए गये इस निर्णय से केन्द्र सरकार के 47.14 लाख कर्मचारियाें और 68.62 लाख पेंशन भोगियों को फायदा होगा और इससे खजाने पर 9488.70 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।<br /> महंगाई/राहत भत्ते की वर्तमान दर मूल वेतन/पेंशन के 28 प्रतिशत है। कर्मचारियों को आज के निर्णय के बाद तीन प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता मिलेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Oct 2021 17:38:08 +0530</pubDate>
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