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                <title>fertilizers - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>नकली व मिलावटी माल की जांच में रोड़ा, लक्ष्य के अनुरूप नहीं ले पाए सैंपल</title>
                                    <description><![CDATA[कृषि निरीक्षकों का टोटा, मंद पड़ी सैंपल लेने की गति।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/obstacle-in-investigation-of-fake-and-adulterated-goods/article-117275"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news32.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही जिले में किसानों ने खाद-बीज की खरीदारी तेज कर दी है। आगामी दिनों में खेतों में बुवाई का दौर चलेगा, ऐसे में अधिकांश किसान अभी से खाद-बीज की व्यवस्था करने में जुट गए हैं। इस दौरान नकली खाद-बीज की बिक्री होने की संभावना अधिक रहती है। इसलिए कृषि विभाग की ओर से जिले में खाद-बीज और कीटनाशकों की जांच के लिए गुण नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन कृषि विभाग में कृषि निरीक्षकों के पद रिक्त होने के कारण लक्ष्य के अनुरूप कृषि उर्वरकों के सैंपल नहीं ले पा रहे हैं। जिलेभर में करीब 995 से अधिक कृषि आदान विक्रेताओं की दुकानें है, लेकिन इनके मुकाबले वर्तमान में केवल 10 कृषि निरीक्षक ही कार्यरत हैं, इस कारण ना तो सघन निरीक्षण हो पा रहा है और ना ही नकली व मिलावटी माल की समय पर जांच हो पा रही है।</p>
<p><strong>लक्ष्य के अनुरूप नहीं ले पाए सैंपल</strong><br />खरीफ सीजन में नकली उर्वरकों की बिक्री रोकने के लिए कृषि आयुक्तालय ने प्रत्येक जिले को कृषि उर्वरकों को सैंपल लेने के लक्ष्य दिए हैं। कोटा जिले ूमें अलग-अलग उर्वरकों के सैंपल लेने के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत जिले में उर्वरक के 230 सैंपल लेने है, लेकिन अभी तक विभाग के निरीक्षक 69 सैंपल ही ले पाए हैं। वहीं बीज के भी 230 सैंपल लेने का लक्ष्य दिया गया है। जिसमें से अभी तक केवल 28 सैंपल दुकानों से लिए जा सके हैं। इसी तरह की स्थिति पेस्टीसाइड के नमूने को लेकर है। इनके भी लक्ष्य के अनुरूप सैंपल नहीं ले पाए हैं। समय पर सैंपल नहीं लेने का खामियाजा किसान को भुगतना पड़ता है। किसान खेतों में उर्वरक और बीज डाल देता है, उसके बाद जांच रिपोर्ट आती है, ऐसे में नकली का पता नहीं चलने पर किसानों को काफी नुकसान होता है। ऐसे में समय रहते जांच होना जरूरी है।</p>
<p><strong>धरतीपुत्रों को थमा रहे कच्चे बिल </strong><br />किसान फूलचंद व धूलीलाल के अनुसार कई कृषि आदान विक्रेता किसानों को हाथ से बने कच्चे बिल थमा रहे हैं या फिर बिल दे ही नहीं रहे है। इससे नकली कृषि उर्वरकों की बिक्री होने की संभावना बनी रहती है। कच्चे बिल के आधार पर सामग्री खरीदने का नुकसान किसानों को ही उठाना पड़ता है। इससे नकली माल के खिलाफ सबूत नहीं मिलता है और किसान शिकायत नहीं कर पाते हैं। हालांकि कृषि विभाग की ओर से किसानों को पक्का बिल लेने की समझाइश की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी निगरानी बेहद कमजोर नजर आ रही हैं। कृषि निरीक्षकों के सघन निरीक्षण के अभाव का फायदा कई विक्रेता उठा लेते हैं। कच्चे बिल के आधार पर माल बेच देते हैं। </p>
<p><strong>अब तक पांच सैंपल हो चुके फेल</strong><br />खरीफ सीजन को लेकर जिले में चलाए जा रहे गुण नियंत्रण अभियान के तहत कृषि उर्वरकों के सैंपल लिए जा रहे है और इनकों जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भी भेजा रहा है। अब तक खाद और बीज के पांच सैंपल जांच में फेल हो चुके हैं। ऐसे में इनकी बिक्री करने वाले कृषि विक्रेताओं के खिलाफ  कृषि अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। जिले में कृषि क्षेत्र को देखते हुए यहां 25 से 30 निरीक्षकों की जरूरत है, लेकिन निरीक्षकों के कुल 14 पद ही स्वीकृत कर रखे हैं। इनमें भी 10 पद ही भरे हुए है और चार पद खाली चल रहे है। ऐसे में यह पद भी कृषि प्रधान क्षेत्र सांगोद और सुल्तानपुर में रिक्त हैं। इससे यहां पर दुकानों का निरीक्षण प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />402 जिले में बीज की दुकान <br />386 जिले में खाद की दुकान <br />208 जिले में कीटनाशक की दुकान </p>
<p>मिलावटी खाद-बीज के कारण किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। कई दुकानदार अपने फायदे के लिए नकली बीज और कीटनाशी की बिक्री करने लग जाते हैं। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। कृषि विभाग की ओर से इस सम्बंध में लगातार जांच अभियान चलाना चाहिए।<br /><strong>- रामलाल लोधा, किसान</strong></p>
<p>कृषि निरीक्षक नियमित रूप से फील्ड में जाकर सैंपलिंग कार्य कर रहे हैं, ताकि नकली और मिलावटी उत्पादों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। अभी जिले में निरीक्षकों के कई पद रिक्त हैं। यदि किसी दुकान पर बिना लाइसेंस, नकली या बिना बिल का माल बेचा जा रहा है तो इसकी शिकायत कर सकते हैं। <br /><strong>- आतिश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Jun 2025 15:02:23 +0530</pubDate>
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                <title>जांच में मिला मिलावटी खाद व कीटनाशी</title>
                                    <description><![CDATA[अभियान के दौरान खाद, बीज और कीटनाशी के 500 नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/inspection-found-adulterated-fertilizers-and-pesticides/article-96302"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6633-copy190.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  खेती-किसानी के बढ़ रहे रुझान को देखते हुए खाद-बीज और कीटनाशकों के कारोबार में भी इजाफा हो रहा है। ऐसे में कृषि आदान भी मिलावट के दंश से अछूते नहीं है। इसके तहत जिले में कृषि विभाग की ओर से गुण नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। गत एक माह से चल रहे अभियान के तहत विभाग की ओर से खाद-बीज और कीटनाशकों के नमूने लिए गए हैं। इनमें से कई नमूने जांच में अमानक पाए गए हैं। इनके खिलाफ विभाग की ओर से कार्रवाई की गई है। जिले में नमूने अमानक पाए जाने के बाद अब विभाग ने अभियान की अवधि 15 दिन और बढ़ा दी है। इससे कृषि आदान दुकानदारों में हड़कम्प मचा हुआ है। जिले में एक माह में करीब पांच सौ नमूने लिए गए थे। इनमें अभी तक जांच में 40 नमूने अमानक मिले हैं।</p>
<p><strong>कीटनाशक और खाद में मिली गड़बड़ी</strong><br />जिले में गत कुछ वर्षों से कृषि आदानों में मिलावट की शिकायतों को देखते हुए कृषि विभाग की ओर से नमूने लेने और जांच कराने का अभियान एक माह पूर्व शुरू किया गया था। इसके तहत कृषि विभाग की ओर से कृषि आदान की दुकानों पर निरीक्षण किया गया। अभियान के दौरान खाद, बीज और कीटनाशी के 500 नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए थे। अभी तक मिली जांच रिपोर्ट में करीब 40 नमूने अमानक पाए गए हैं। ऐसे में इनके खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया गया है। वहां से जुर्माना राशि तय की  जाएगी। कृषि आदानों में सबसे ज्यादा मिलावट खाद और कीटनाशी में मिली है। इनमें नमूने सबसे ज्यादा फेल हुए हैं। वहीं बीज का कोई नमूना फेल नहीं  हुआ है।   </p>
<p><strong>अब लगातार होगी मॉनिटरिंग</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार वैसे तो हर माह कृषि आदान दुकानों का निरीक्षण किया जाता है। अब नमूनों में मिलावट मिलने के बाद विभाग ने लगातार इन दुकानों की मॉनिटरिंग करने का निर्णय किया गया है। इसके तहत अब कृषि आदान दुकानों की आकस्मिक जांच की जाएगी। जिले के सभी डीलरों के यहां निरीक्षक पंजिका का संधारण किया जाना आवश्यक है। इसके साथ ही चैक लिस्ट भी साथ लगानी होती है। यदि जांच में इनकी पूर्ति नहीं मिली तो सम्बंधित आदान विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आगामी दिनों में समय-समय पर निरीक्षण कर लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />कृषि आदानों में मिलावट मिलने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। विभाग की ओर से इस तरह का अभियान लगातार चलाया जाना चाहिए ताकि मिलावटी आदानों की बिक्री नहीं हो सके। कई बार देरी से जांच रिपोर्ट मिलने से किसानों को नुकसान हो जाता है। इसलिए जांच रिपोर्ट जल्द-जल्द मिलने की व्यवस्था भी हो।<br /><strong>-जोगेन्द्र सिंह, किसान</strong></p>
<p>कृषि विभाग किसानों के प्रति संवेदनशील है। विभाग की ओर से रबी नियंत्रण अभियान के तहत कृषि आदानों के नमूने लिए जा रहे हैं। इनको जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भिजवाया जा रहा है। अभी तक कुछ नमूने जांच में अमानक मिले हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। वहीं अभियान की अवधि भी बढ़ा दी गई है। <br /><strong>-आर. के. जैन, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Nov 2024 14:58:20 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>विनिर्माता एवं आपूर्तिकर्ता कम्पनियां उर्वरकों की सप्लाई शत प्रतिशत करें: कृषि आयुक्त</title>
                                    <description><![CDATA[आयुक्त चिन्मयी गोपाल ने कहा की नैनो यूरिया व नैनो डीएपी को कृषकों द्वारा ज्यादा प्रयोग में लेने के लिए आपूर्तिकर्ता कम्पनियां विभागीय अधिकारियों से समन्वय कर इसका प्रचार प्रसार करें। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/agriculture-commissioner-should-supply-100-fertilizers-to-manufacturers-and-supplier/article-91241"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(10)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कृषि आयुक्त चिन्मयी गोपाल ने कहा कि किसानों को समय पर फसल के लिए उर्वरकों की आपूर्ति होनी चाहिए इसके लिए उर्वरक निर्माता एवं आपूर्तिकर्ता फर्में इसकी शत प्रतिशत सप्लाई करें।</p>
<p>डीएपी, यूरिया, एसएसपी और एनपीके उर्वरक आपूर्ति करने वाली फर्मों के प्रतिनिधियों के साथ ही शनिवार को आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए आयुक्त कृषि चिन्मयी ने कहा कि रबी सीजन की बुआई की शुरुआत अक्टूबर माह के प्रथम सप्ताह से शुरू हो जाएगी। इसलिए सभी उर्वरक निर्माता कम्पनियां अक्टूबर माह के लिए केन्द्र सरकार ने जो आवंटन किया है उसका पूरा प्लान तैयार करके विभाग को सूचित करे। सभी उर्वरक आपूर्तिकर्ता कम्पनियां जिलों में विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर उर्वरकों की सप्लाई करें जिससे जिलो में आवश्यकता अनुसार समान रूप से उर्वरको की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।</p>
<p>आयुक्त चिन्मयी गोपाल ने कहा की नैनो यूरिया व नैनो डीएपी को कृषकों द्वारा ज्यादा प्रयोग में लेने के लिए आपूर्तिकर्ता कम्पनियां विभागीय अधिकारियों से समन्वय कर इसका प्रचार प्रसार करें। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Sep 2024 15:54:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Quality Control Campaign : मिलावटी खाद, बीज और कीटनाशकों की बिक्री करने वालों पर कसेगा शिकंजा</title>
                                    <description><![CDATA[गुण नियंत्रण अभियान के तहत उर्वरक, बीज एवं कीटनाशी के नमूने लेने की प्रक्रिया राज किसान पोर्टल के ऐप के माध्यम से ऑनलाइन सम्पादित की जा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/quality-control-campaign-will-tighten-the-noose-on-those-selling/article-78330"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(12)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में जल्द ही खरीब फसल की बुबाई का काम शुरू होगा, ऐसे में किसानों के साथ किसी प्रकार का धोखा नहीं हो इसके लिए मिलावटी खाद, बीज एवं कीटनाशकों का बेचान करने वालों पर लगाम कसने के लिए कृषि विभाग 30 जून तक गुण नियंत्रण अभियान चलाएगा। कृषि आदानों में अनियमितताओं मिलने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। <br />आयुक्त कृषि कन्हैया लाल स्वामी ने बताया कि खरीफ  सीजन शुरू होने वाला है। अत: किसानों को उच्च गुणवत्ता युक्त कृषि आदान उपलब्ध कराने के लिए समस्त कृषि अधिकारियों को अपने क्षेत्राधिकार में उर्वरकों की उच्च गुणवत्ता एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए है। कृषि अधिकारियों को दुकानों पर बिना प्राधिकार पत्र या विनिर्माण प्रमाण पत्र के उर्वरकों की कालाबाजारी, बिल बुक एवं स्टॉक रजिस्टर निर्धारित प्रारूप में संधारित नही करना, अप्रमाणित स्टॉक रजिस्टर उपयोग में लेना व अन्य कई प्रकार की अनियमितताओं के खिलाफ  कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए है। राज्य में खरीफ मौसम पूर्व डेढ़ माह का सघन गुण नियंत्रण अभियान 30 जून तक चलाया जाएगा। कृषि आयुक्त स्वामी ने बताया कि राज्य के सभी जिलों में प्रतिवर्ष खरीफ  व रबी मौसम से पूर्व किसानों को गुणवत्तायुक्त कृषि आदानों की उपलब्धता के लिए माह मई जून एवं सितम्बर -अक्टूबर में विशेष गुण नियंत्रण अभियान संचालित किए जाते है। गुण नियंत्रण अभियान के तहत उर्वरक, बीज एवं कीटनाशी के नमूने लेने की प्रक्रिया राज किसान पोर्टल के ऐप के माध्यम से ऑनलाइन सम्पादित की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 May 2024 12:36:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अब भी जारी तरकारी में जहर की सेंधमारी</title>
                                    <description><![CDATA[ बरसाती नालों का पानी जो नदियों को दूषित करता है ही साथ ही फसलों की सिंचाई के दौरान फसलों में भी हानिकारक तत्व छोड़ जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/poisoning-in-vegetables-still-going-on/article-68970"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/photo-(7).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सब्जी मंडी में आप जब सब्जी लेने जाते हैं तो वहां सब्जीवाले के पास हरी भरी व चमकदार सब्जियां देखकर उन्हें खरीद लाते हैं। लेकिन आपने कभी गौर किया कि इन सब्जियों को उगाया कैसे जाता है, कैसे उनकी खेती की जाती है। उनकी फसल करने के दौरान किसान किन किन उवर्रकों का उपयोग करते हैं। अगर नहीं तो ये खबर आपके लिए है क्योंकि कोटा में कई किसान ऐसे हैं जो अप्राकृतिक रुप से सब्जियों की खेती कर रहे हैं। जहां सब्जियों और फसलों में सिंचाई के लिए ये किसान फैक्ट्रियों व घरों से निकले नालों के पानी का उपयोग कर रहे हैं। जो एक हाथ फसल की उत्पादकता तो बढ़ा देता है वहीं दूसरे हाथ हमारी सेहत को बिगाड़ रहा है। क्योंकि नालों के पानी में कई ऐसे हानिकारक तत्व होते हैं जो मानव शरीर में धीरे धीरे एक बड़ी बीमारी को जन्म देते हैं। वहीं इसे लेकर नवज्योति ने प्रशासन को करीब 5 माह पहले भी चेताया था, लेकिन बावजूद इन सब बातों के ऐसी खेती करने वालों पर कारवाई करने वाला कोई नहीं है इस मामले पर कृषि से लेकर प्रदूषण विभाग सब एक दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं।</p>
<p><strong>कौन कौनसे हानिकारक तत्व होते हैं नाले के पानी में</strong><br />शहर में मौजूद इन बरसाती नालों में शहर के बीच से निकलने के दौरान घरों और फैक्ट्रियों से निकला दूषित पानी मिलता है जहां से बड़े नालों के जरीये ये पानी नदी में गिरता है। जो नदियों को दूषित करता है ही साथ ही फसलों की सिंचाई के दौरान फसलों में भी हानिकारक तत्व छोड़ जाता है। प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक अधिकारी मनोज मीणा ने बताया कि सीवरेज और फैक्ट्रियों के पानी में लेड, एसलाइट, मर्करी जैसे कई तरह के हानिकारक तत्व होते हैं। जो कई तरह की हानिकारक बीमारियों का कारण हो सकते हैं।</p>
<p><strong>यहां हो रही है नालों से सिंचाई</strong><br />शहर में किन इलाकों में इस तरीके से सिंचाई की जा रही है इसे लेकर नवज्योति ने पड़ताल की जिसमें सामने आया कि किसानों ने नलों के पानी से सिंचाई करने के लिए कई सारे जुगाड़ किए हुए हैं। शहर के थेकड़ा, देवली अरब, धाकड़खेड़ी व राजनगर सहित कई ऐसे इलाके हैं जहां शहर से निकले नाले के पानी से सब्जियों की फसल की सिंचाई की जा रही है। किसानों ने नाले के पानी से सिंचाई करने के अलग अलग हथकंडे अपना रखे हैं। शहर से सटे राजनगर गांव में किसानों ने नाले में मोटर का पाइप डालकर उसे सड़क के नीचे गांव के दूसरी ओर सिंचाई के लिए लगाया हुआ है। वहीं देवली अरब व थेकड़ा में किसानों ने खुल्ले में ही नालों के पानी से सिंचाई कर रहे हैं। इसी तरह धाकड़खेड़ी के नजदीक सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के पास ही सीवरेज लाइन का ढक्कन खोलकर उसके पानी सक सिंचाई कर रहे हैं। इसके अलावा भी शहर के कई ईलाके ऐसे हैं जहां नालों के पानी से सिंचाई की जा रही है।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />सब्जी को बाजार में लेते समय पता नहीं चलता कि ये किस पानी से उगाई गई हैं । पता तो है ऐसा होता है पर कौनसी सब्जी नाले के पानी से पकाई गई हैं कौनसी नहीं इसका कोई पता नहीं लग पाता है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे इलाकों का पता लगाए और इसे बंद करवाए। थोड़े से रुपयों के लिए यह आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। <br /><strong>- रोहन राठौर, विज्ञान नगर निवासी </strong></p>
<p>अभी सब्जियों में पहले जैसा स्वाद नहीं आता है, और स्िब्जयां पकने में भी समय लेती हैं। हो सकता है इन नालों के पानी से पकाने के कारण ऐसा हो रहा हो। अगर ऐसा है तो प्रशासन और किसानों दोंनो की जिम्मेदारी है कि वो इसे रोकें। क्योंकि पहली नजर में देखने से इन सब्जियों का पता नहीं लगता। यह सच है कि अब बीमारियां ज्यादा हो रही हैं। सब्जियां भी इसका कारक हो सकती हैं। चंद रुपयों के लिए ऐसा किया जाना पाप है। इसे रोका जाना चाहिए।<br /><strong>- मनोज सुमन, छावनी निवासी </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कृषि विभाग किसानों को फसल से जुड़ी तकनीकों व साधनों के बारे में बता सकता है। किसानों को ऐसे तरीकों से फसल नहीं उगाने के लिए विभाग की ओर से समझाया जाता है। किसानों पर कारवाई या उन्हें पाबंद करने का अधिकार विभाग के पास नहीं है। जिला प्रशासन ही कारवाई कर सकता है।<br /><strong>- खेमराज शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विस्तार विभाग कोटा</strong></p>
<p>प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड केवल फैक्ट्रियों व घरों से निकलने वाले पानी से होने वाले प्रदूषण पर कारवाई करने के लिए अधिकृत है। नालों के पानी से सिंचाई होना गलत है लेकिन कारवाई करने का अधिकार जिला प्रशासन को ही है।<br /><strong>- मनोज मीणा, वैज्ञानिक अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Feb 2024 15:10:10 +0530</pubDate>
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                <title>अब सहकारी समितियों में मिलेंगी दवाएं</title>
                                    <description><![CDATA[खाद-बीज व उर्वरक के साथ अन्य कारोबार करने से समिति को कमीशन मिल सकेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-medicines-will-be-available-in-cooperatives/article-55089"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/ab-sahkari-samitiyo-me-milegi-dawaiya...kota-news-21-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले के ग्रामीण इलाके के लोगों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार की ओर से सहकारिता को बढ़ावा देते हुए प्रमुख इकाइयों में ग्राम सेवा सहकारी समिति को सुदृढ़ करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत पर जन औषधि केंद्र खोलने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। इसके तहत ग्राम सेवा सहकारी समितियों में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे। इसके लिए आयुष विभाग की ओर आवेदन करने वाली ग्राम सेवा सहकारी समिति को लाइसेंस दिए जाएंगे। केन्द्र खुलने से आस-पास के लोगों को कम दामों में बेहतर गुणवत्ता वाली दवाएं मिल सकेगी। खाद-बीज व उर्वरक के साथ अन्य कारोबार करने से समिति को कमीशन मिल सकेगा।</p>
<p><strong>इन समितियों का किया चयन</strong><br />जन औषधि केंद्र खोलने के लिए सहकारी समितियों की ओर से लाइसेंस का आवेदन किया जाएगा। इसमें कोटा जिले में प्रथम चरण में पांच ग्राम सेवा सहकारी समितियों का चयन किया गया है। इनमें कनवास, बूढ़ादीत, कमोलर, सीमल्या व पीपल्दाकलां ग्राम सेवा सहकारी समिति शामिल है। केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक जनऔषधि केंद्रों पर 1800 प्रकार की दवाएं उपलब्ध करवाई जाएगी।</p>
<p><strong>गुणवत्ता वाली दवाइयां मिलेंगी</strong><br />जानकारी के मुताबिक आयुष विभाग की ओर से आवेदन करने वाली ग्राम सेवक समिति को लाइसेंस दिए जाएंगे। वहीं ग्राम पंचायत में केंद्र खुलने से आसपास के लोगों को कम दामों में बेहतर गुणवत्ता वाली दवाइयां मिल सकेंगी। सहकारिता समिति को खाद बीज अल्पकालीन के साथ-साथ अन्य कारोबार करने के लिए अधिक कमीशन मिल सकेगा,जिसे समितियां भी सुदृढ़ होंगी। केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक जन औषधि केंद्र पर 1800 प्रकार की दवाइयां उपलब्ध करवाई जाएंगी। जिस क्षेत्र में अस्पताल व घनी आबादी है, उसे पहली प्राथमिकता देते हुए जन औषधि केंद्र खोलने के लिए लाइसेंस जारी किए जाएंगे।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ग्राम पंचायत में केंद्र खुलने से आसपास के लोगों को कम दामों में बेहतर गुणवत्ता वाली दवाइयां मिल सकेंगी। सरकार की इस योजना से किसानों को काफी राहत मिलेगी। एक ही स्थान पर खाद-बीज और दवाइयां उपलब्ध होने से किसानों को भटकना नहीं पड़ेगा।<br /><strong>- लोकेश धाकड़, किसान नेता</strong></p>
<p>जिले की पांच ग्राम सेवा सहकारी समितियों में जन औषिध केंद्र खोलने की योजना है। इससे सहकारी समितियां आत्म निर्भर हो सकेगी। लोगों को बेहतर सुविधा मिल पाएगी। अन्य स्थानों पर जो भी समिति केंद्र लेने के लिए इच्छुक होगी, उसे उसी के अनुसार सरकार के मांगने पर प्रस्ताव भेजे जाएंगे। <br /><strong>- बलविंदर सिंह गिल, प्रबंध निदेशक, केन्द्रीय सहकारी बैंक कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Aug 2023 18:53:42 +0530</pubDate>
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                <title>रासायनिक उर्वरकों को कम करें, धरती के घाव भरें</title>
                                    <description><![CDATA[उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग भूमिगत जल को नाइट्रेट से प्रदूषित कर सकता है और यह मनुष्यों या पशुओं के लिए बहुत खतरनाक है। नाइट्रेट केंद्रित पानी रक्त में कुछ हीमोग्लोबिन को स्थिर कर सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/reduce-chemical-fertilizers-heal-soil-wounds/article-25308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/e1.jpg" alt=""></a><br /><p>कीटनाशकों को सब्जी पर लगाया जाता है, जो सीधे मानव या पशुओं के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग भूमिगत जल को नाइट्रेट से प्रदूषित कर सकता है और यह मनुष्यों या पशुओं के लिए बहुत खतरनाक है। नाइट्रेट केंद्रित पानी रक्त में कुछ हीमोग्लोबिन को स्थिर कर सकता है। संतुलित उपयोग पानी की कम खपत को भी प्रतिबिंबित करेगा, साथ ही साथ जल निकायों को अपवाह प्रदूषण से बचाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि विज्ञान केंद्रों के नेटवर्क के अलावा कृषि सहयोग और किसान कल्याण और उर्वरक विभागों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से संतुलित उर्वरक के बारे में किसान जागरूकता को बढ़ाया जाना चाहिए। सिक्किम राज्य द्वारा दिखाए गए अनुसार प्राथमिकताओं और सब्सिडी को रासायनिक से जैविक खेती में बदलना समय की मांग है।</p>
<p>कीटों और रोगों ने मौजूदा कीटनाशक अनुप्रयोगों के लिए प्रतिरोध विकसित कर लिया हैं, जिसके लिए हर गुजरते साल मजबूत, अधिक विषाक्त प्रतिक्रियाओं की आवश्यकता होती है। मानव शरीर पर आनुवंशिक परिवर्तनकारी प्रभाव और जैव विविधता के नुकसान को ध्यान में रखते हुए कीटनाशकों के उपयोग में कमी राष्टÑीय प्राथमिकता होनी चाहिए। 1970 के दशक में हरित क्रांति ने तेजी से कृषि उत्पादन, विशेष रूप से खाद्यान्न के युग की शुरुआत की। क्रांति के उत्प्रेरक एजेंटों में से एक रासायनिक उर्वरक थे। भारत में खाद्यान्न की भारी कमी थी और यह कृषि बदलाव काम आया। रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और पानी के बड़े पैमाने पर इनपुट के साथ उच्च फसल पैदावार हासिल की गई। हरित क्रांति ने भले ही दिन बचा लिया हो, लेकिन यह भविष्य की रक्षा करने से बहुत दूर थी।</p>
<p>देश में रासायनिक उर्वरकों की खपत कृषि उत्पादन के स्तर के साथ-साथ बढ़ रही है। वर्तमान में देश के 525 जिलों में से 292 (56 प्रति.) उर्वरकों के उपयोग का 85 प्रतिशत हिस्सा हैं। कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से इंसानों और जानवरों दोनों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। विकासशील देशों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए एग्रो केमिकल्स को एक शक्तिशाली हथियार या जादू की गोलियों के रूप में माना जाता है। हालांकि, यह देखा गया है कि कृषि रसायन गंभीर खतरे पैदा कर रहे हैं और कुछ कीटनाशक मानव अंत:स्रावी और प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं और कैंसर के विकास को बढ़ावा दे सकते हैं। किसान कीटनाशकों के छिड़काव के दौरान सुरक्षा मास्क, दस्ताने और अन्य सुरक्षात्मक गियर का उपयोग नहीं करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप इनहेलेशन और त्वचीय जोखिम के माध्यम से रक्त प्रवाह में कीटनाशकों की पहुंच होती है, जो उनकी आंखों, त्वचा और श्वसन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। चूंकि कीटनाशकों को सब्जी पर लगाया जाता है, जो सीधे मानव या पशुओं के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग भूमिगत जल को नाइट्रेट से प्रदूषित कर सकता है और यह मनुष्यों या पशुओं के लिए बहुत खतरनाक है। नाइट्रेट केंद्रित पानी रक्त में कुछ हीमोग्लोबिन को स्थिर कर सकता है।</p>
<p>ऑर्गैनोफॉस्फेट कीटनाशकों के अनुप्रयोग में वृद्धि हुई है, क्योंकि वे ऑर्गैनोफॉस्फेट कीटनाशकों की तुलना में पर्यावरण के लिए कम स्थायी और हानिकारक दोनों हैं। लेकिन वे पेट दर्द, चक्कर आना, सिरदर्द, मतली, उल्टी, साथ ही त्वचा और आंखों की समस्याओं जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हैं। सब्जियों में इस्तेमाल होने वाले ऑर्गैनोफॉस्फेट कीटनाशी धीरे-धीरे मानव शरीर में जमा हो जाते हैं और कैंसर से इसका संबंध होता है। जहरीले कृषि रसायनों (जैसे भारी धातुओं, कीटनाशकों और जड़ी-बूटियों आदि से दूषित फॉस्फेट उर्वरक) के साथ मिट्टी और पानी का प्रदूषण एक विशेष चिंता का विषय है। पानी में ये प्रदूषक आमतौर पर कम मात्रा में होते हैं और इस प्रकार इसे देखा या चखा नहीं जा सकता है। इसलिए उनके हानिकारक प्रभाव मनुष्यों में कई वर्षों तक प्रकट नहीं होते हैं, लेकिन क्रोनिक किडनी रोग जैसी घातक बीमारी को बढ़ा देते हैं। मानव स्वास्थ्य के संदर्भ में डीडीटी कई प्रकार के कैंसर, तंत्रिका तंत्र की तीव्र और लगातार चोट, फेफड़ों की क्षति, प्रजनन अंगों को चोट, प्रतिरक्षा और अंत:स्रावी तंत्र की शिथिलता, जन्म दोष का कारण है।</p>
<p>मिट्टी की उर्वरता और सामान्य स्वास्थ्य पर रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रभाव को मापने के लिए एक व्यापक अध्ययन किया जाना चाहिए। मौजूदा उर्वरक सब्सिडी नीति को संशोधित किया जाना चाहिए और एक नई नीति तैयार की जानी चाहिए। जो भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल हो। जैविक खाद को बढ़ावा देने के लिए जैव उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक नीति बनाई जानी चाहिए। किसानों को बड़े पैमाने पर जैविक खेती को अपनाने में सक्षम बनाने के लिए उन्हें वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जानी चाहिए। कृषि के लिए डीडीटी जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के उपयोग के लिए कानूनी कार्रवाई। प्रमाणन, गुणवत्ता जांच, नवाचारों और उर्वरकों की कीमतों को तय करने की प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए एक उर्वरक विकास और नियामक प्राधिकरण की स्थापना की जानी चाहिए। देश में कीटनाशकों के निर्माण, आयात और बिक्री को विनियमित करने के लिए एक कीटनाशक विकास और विनियमन प्राधिकरण भी बनाया जाना चाहिए।                </p>
<p><strong>-डॉ सत्यवान सौरभ</strong><br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Oct 2022 12:17:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>JOB Alert : नेशनल फ र्टिलाइजर्स लिमिटेड के पदों पर भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन लिंक 10 नवंबर 2021 तक उपलब्ध रहेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/job-alert---%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A4%A8%E0%A4%B2-%E0%A4%AB-%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%A1-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AD%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80/article-1819"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/job-alert-21.jpg" alt=""></a><br /><p>नेशनल फ र्टिलाइजर्स लिमिटेड ने जूनियर इंजीनियरिंग असिस्टेंट, लोको अटेंडेंट 2, लोको अटेंडेंट 3 जीआर, अटेंडेंट  और मार्केटिंग रिप्रेजेंटेटिव के पद के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया है। उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन लिंक 10 नवंबर 2021 तक उपलब्ध रहेंगे।<br /> <br /> <strong>पद: </strong>जूनियर इंजीनियरिंग असिस्टेंट ग्रेड 2 प्रोडक्शन- 87<br /> जूनियर इंजीनियरिंग असिस्टेंट ग्रेड 2 इंस्ट्रूमेंटेशन- 87<br /> जूनियर इंजीनियरिंग असिस्टेंट ग्रेड 2 इलेक्ट्रिकल- 87<br /> लोको अटेंडेंट ग्रेड 2- 04<br /> लोको अटेंडेंट ग्रेड 3- 19<br /> अटेंडेंट ग्रेड 1- 36<br /> मार्केटिंग रिप्रेजेंटेटिव- 15</p>
<p><br /> <strong>वेतन:</strong> जूनियर इंजीनियरिंग असिस्टेंट-  23000-56500 रुपये<br /> लोको अटेंडेंट ग्रेड 2- 21500-52000 रुपये<br /> लोको अटेंडेंट ग्रेड 3- 21500-52000 रुपये<br /> अटेंडेंट ग्रेड 1- 21500-52000 रुपये<br /> मार्केटिंग रिप्रेजेंटेटिव- 24000.67000 रुपये</p>
<p><br /> <strong>योग्यता: </strong>जूनियर इंजीनियरिंग असिस्टेंट ग्रेड 2 प्रोडक्शन- किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से फि जिक्स्ए,केमिस्ट्री और मैथेमेटिक्स में बीएससी की डिग्री ली हो।<br /> जूनियर इंजीनियरिंग असिस्टेंट ग्रेड 2 इंस्ट्रूमेंटेशन- इंस्ट्रूमेंटेशन या इंस्ट्रूमेंटेशन एंड कंट्रोल या इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन या इलेक्ट्रॉनिक्स इंस्ट्रूमेंटेशन एंड कंट्रोल या इंडस्ट्रियल इंस्ट्रूमेंटेशन  या प्रोसेस कंट्रोल इंस्ट्रूमेंटेशन में डिप्लोमा  किया हो। <br /> जूनियर इंजीनियरिंग असिस्टेंट ग्रेड 2 इलेक्ट्रिकल- न्यूनतम 50% अंकों के साथ इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया हो।<br /> लोको अटेंडेंट ग्रेड 3- मैट्रिक/मैकेनिक डीजल ट्रेड में 50% के साथ आईटीआई किया हो।<br /> लोको अटेंडेंट ग्रेड 2- जनरल/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 50% अंकों के साथ मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 3 साल का डिप्लोमा किया हो।<br /> अटेंडेंट ग्रेड 1- 50% अंकों के साथ मैट्रिक रेगुलर आईटीआई इलेक्ट्रीशियन / फि टर का डिप्लोमा किया हो।<br /> मार्केटिंग रिप्रेजेंटेटिव- जनरल/ओबीसी / उम्मीदवारों  ने कुल 50 अंकों के साथ रेगुलर बीएससी एग्रीकल्चर में पढ़ाई की हो।</p>
<p><br /> <strong>उम्र सीमा: </strong>इन पदों पर आवेदन करने की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 30 साल होनी चाहिए।</p>
<p><br /> <strong>आवेदन फीस:</strong> इस पद पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारो को  200 रुपये देने होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Oct 2021 10:45:15 +0530</pubDate>
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