<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/documentation/tag-70593" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>Documentation - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/70593/rss</link>
                <description>Documentation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>संयुक्त राष्ट्र की खौफनाक रिपोर्ट: 2025 में युद्ध क्षेत्रों में यौन हिंसा के मामले दोगुने से अधिक बढ़े, 10,000 मामले दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनिया के संघर्षग्रस्त देशों में यौन हिंसा के 9,788 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल से दोगुने से भी अधिक हैं। विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पट्टन ने बताया कि अफ्रीका, यूरोप और मध्य पूर्व में दुष्कर्म और यौन दासता को युद्ध के हथियार की तरह इस्तेमाल किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/conflict-related-sexual-violence-cases-to-more-than-double-by/article-155503"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/un.png" alt=""></a><br /><p>संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि 2025 में दुनिया में संघर्ष से संबंधित यौन हिंसा के लगभग 10,000 मामले दर्ज किए गए जो 2024 के आंकड़े से दोगुने से भी अधिक हैं जिसमें दुष्कर्म, यौन दासता और अपहरण को अफ्रीका, मध्य पूर्व, यूरोप और कैरेबियाई देशों में युद्ध हथियारों के रूप में इस्तेमाल किया गया। संयुक्त राष्ट्र की वार्षिक रिपोर्ट शुक्रवार को जारी करते हुए, विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पट्टन ने कहा कि ये आंकड़े एक गंभीर वैश्विक प्रवृत्ति को दर्शाते हैं जिसमें बढ़ती असुरक्षा, विस्थापन एवं पीड़ितों के लिए घटते संसाधन सभी इस संकट को बढ़ावा दे रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पत्रकारों से कहा, "2025 में युद्ध, यातना, आतंकवाद और राजनीतिक दमन की रणनीति के रूप में यौन हिंसा के मामलों में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई जिसमें मुख्य रूप से महिलाओं एवं लड़कियों को निशाना बनाया गया।" रिपोर्ट में 2025 के दौरान संघर्ष से संबंधित यौन हिंसा के 9,788 मामलों की पुष्टि की गई हालांकि प्रमिला ने इस बात पर बल दिया कि यह आंकड़ा क्रूर वास्तविकता को नहीं दर्शाता है।</p>
<p>इस रिपोर्ट में 21 संघर्षग्रस्त देशों में राज्य और गैर-राज्य दोनों ही पक्षों द्वारा किए गए बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, यौन दासता, जबरन विवाह, तस्करी एवं अपहरण के मामलों का दस्तावेजीकरण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं एवं लड़कियों को ही मुख्य रूप से निशाना बनाया गया, हालांकि पुरुषों एवं लड़कों को भी यौन हिंसा का शिकार होना पड़ा, अक्सर हिरासत में एवं यातना के रूप में। तीसरे जैंडर को भी लक्षित उत्पीड़न एवं दुर्व्यवहार का जोखिम झेलना पड़ा। पीड़ितों की उम्र एक से 70 वर्ष के बीच थी जिसमें दिव्यांगजनों से जुड़े मामले भी शामिल हैं।</p>
<p>प्रमिला ने कहा कि हिंसा के साथ अत्यधिक शारीरिक दुर्व्यवहार भी होता था, जिसमें बलात्कार के बाद हत्याएं और पीड़ितों द्वारा की गई आत्महत्याएं शामिल हैं। उन्होंने कहा, "यह रिपोर्ट मूल रूप से युद्ध की छाया में रहने वाले इन सभी बचे हुए लोगों एवं समुदायों की मानवीय पीड़ा से संबंधित है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/conflict-related-sexual-violence-cases-to-more-than-double-by/article-155503</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/world/conflict-related-sexual-violence-cases-to-more-than-double-by/article-155503</guid>
                <pubDate>Sat, 30 May 2026 18:16:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-05/un.png"                         length="1463871"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बॉर्डर से बुकशेल्फ़ तक: कश्मीर के आदिवासी इतिहास की खिड़की है डॉ. सुहील रसूल मीर की किताबें</title>
                                    <description><![CDATA[समाजशास्त्री डॉ. सुहील रसूल मीर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की जनजातियों की लुप्तप्राय संस्कृति को किताबों के माध्यम से सहेज रहे हैं। उनका शोध क्षेत्र के बदलते सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य को उजागर करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/dr-suhail-rasool-mirs-books-are-the-window-to-the/article-143415"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(21).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आदिवासी समुदाय के समृद्ध रीति-रिवाजों, संस्कृति और उनके जीवन के विभिन्न आयामों को नजदीकी से जानने वाले तथा कश्मीर में सीमा के पास पले-बढ़े लेखक और समाजशास्त्री डॉ. सुहील रसूल मीर का कहना है कि ऐसे समय में जब यह इलाका बदलाव के दौर से गुजर रहा है तो ऐसे में इस तरह का दस्तावेजीकरण बहुत जरूरी है।</p>
<p>डॉ. मीर का कहना है मैं सीमा के पास एक शहर में रहता हूं, लेकिन आदिवासी समुदायों की खास संस्कृति, जीवनशैली और उनके जीवन के हालात ने मेरे लिखने के तरीके और दुनिया को देखने के नजरिए को बनाया है। उन्होंने बताया कि कैसे भूगोल और जिन्दगी के अनुभवों ने उनकी पढ़ाई की दिशा को प्रभावित किया। डॉ. मीर ने पिछले 12 सालों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के आदिवासी इलाकों में एथनोग्राफिक फील्डवर्क में खुद को पूरी तरह से झोंक दिया है। उनके अध्ययन ने जनजातियों, सीमा के इलाकों और जातीयता के समाजशास्त्र के बीच एक खास जगह बनायी है। </p>
<p>उनके काम में वॉयसेज अक्रॉस द पीर पंजाल, द हैंडबुक ऑफ दर्द आर्यन्स, और कल्चरल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ दर्द-ट्राइब जैसे महत्वपूर्ण एथनोग्राफिक योगदान शामिल हैं। ये किताबें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में आदिवासी जनजातियों के इतिहास, संस्कृति और जीवित परंपराओं को कागज पर उतारने का काम करती हैं। </p>
<p>उन्होंने यूनी के साथ खास बातचीत में कहा, मेरे शोध ने मुझे आदिवासी समुदायों से जोड़ा, जिसने मुझे आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।  मेरे शोध के दौरान अनोखी आदिवासी संस्कृति के साथ लगातार जुड़ाव और अनुभव ने मेरी कहानी कहने की कला पर असर डाला। खासकर संवेदनशील या टकराव वाले विषयों पर काम करते समय समाजशास्त्रीय समझ मुझे भावनाओं और यथार्थवाद के बीच तालमेल बिठाने के लिए संतुलन देती है। </p>
<p>कश्मीर से एक लेखक के तौर पर अपनी जगह बनाने में मुश्किलें आईं, लेकिन डॉ. मीर ने हिम्मत नहीं हारी। वह बताते हैं, मुझे जरूर मुश्किलें आती हैं। अनुसंधान के प्रति मेरा जोश और लगन मुझे आगे बढऩे में मदद करता है। उन्होंने अपने विषय के प्रति झुकाव के बारे में कहा, इन आदिवासियों के लोक और अनदेखे सामाजिक-सांस्कृतिक अनुभवों से मेरा जुड़ाव मुझे इन विषयों की पड़ताल करने के लिए प्रेरित करता है। उनका मानना है कि ऐसे समय में जब यह इलाका बदलाव के दौर से गुजर रहा है, इस तरह का दस्तावेजीकरण बहुत जरूरी है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि उनके शोध का मकसद, सभी पढऩे वालों को जम्मू और लद्दाख की शानदार अलग-अलग तरह की चीजों को अपनाने का मौका देना है। उम्मीद है कि मेरी किताबें आने वाली पीढिय़ों के लिए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की देसी संस्कृतियों को दस्तावेजों में उतारने में मदद करेंगी, जिसका मकसद पुरानी सांस्कृतिक विरासत को बचाकर रखना और उसकी झलक दिखाना है।किसी लड़ाई-झगड़े वाले इलाके से लिखने के साथ अपनी जिम्मेदारियां जुड़ी होती है। एक शोधकर्ता के तौर पर, मैं अपने लोगों की असली हालत को समझने के लिए मजबूर महसूस करता हूं और अपनी लिखाई के जरिए, मैं सिर्फ उसे दिखाने की कोशिश कर रहा हूं। मेरे सारे शोध अनुभव और अध्ययन पर आधारित है। मैं सिर्फ वही बताता हूं जो अभी आदिवासी समाज में हो रहा है। इसके साथ ही अनुभव से जुड़ी कहानियां और तथ्य भी पेश करता हूं। </p>
<p>उन्होंने कहा, समाजशास्त्र विषय का शोधकर्ता होने के नाते मेरा पहला काम पूर्वाग्रहों को खत्म करना है। इतिहास इस बात का गवाह है कि साहित्य ने देशों और सभ्यता पर असर डाला है और यह सिर्फ लेखकों की ईमानदार कोशिशों की वजह से है कि सच को बचाने की विरासत अभी भी बनी हुई है। डॉ मीर अभी कश्मीर थ्रू विलेजेस : फ्रॉम पास्ट टू प्रेजेंट किताब पर काम कर रहे हैं, जो कश्मीरी गांवों की एक मानव जाति विज्ञान से संबंधित यात्रा है। उन्होंने बताया कि इस काम का मकसद कश्मीरी परंपराओं और अलग-अलग तरह के लोगों के माहौल और इतिहास की वृहदता और विविधता को दिखाना है।</p>
<p>उनके मुताबिक, कश्मीर के गांवों में, कश्मीर की असली झलक मिल सकती है और यह परियोजना सामाजिक-सांस्कृतिक और मानव विज्ञान नजरिए से सदियों पुरानी कश्मीरी विरासत को फिर से देखने की कोशिश करती है। डॉ. मीर नये प्रयोगों के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, मैं अपने शोध में नए तरीके आजमाने की कोशिश करूंगा। अकादमिक क्षेत्र में नयापन अपेक्षित और सराहनीय है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/dr-suhail-rasool-mirs-books-are-the-window-to-the/article-143415</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/dr-suhail-rasool-mirs-books-are-the-window-to-the/article-143415</guid>
                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 17:55:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/1200-x-600-px%29-%2821%29.png"                         length="488089"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डीएनटी पहचान प्रमाण पत्र सहायता शिविरों की तिथि 15 फरवरी तक बढ़ी, 10,764 आवेदन प्राप्त हुए, 5000 से ज्यादा प्रमाण पत्र जारी, 1300 से ज्यादा आवेदन लौटाए गए</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में डीएनटी समुदाय के पहचान प्रमाण पत्र सहायता शिविरों की अवधि 15 फरवरी तक बढ़ी। अधिक लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने हेतु प्रदेशभर में शिविर जारी रहेंगे, सरकार कहती।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/date-of-dnt-identity-certificate-help-camps-extended-till-15th/article-141774"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्धघुमन्तु (डीएनटी) समुदाय के लिए प्रदेश भर में संचालित पहचान प्रमाण पत्र सहायता शिविरों की अवधि बढ़ा दी गई है। अब ये शिविर 15 फरवरी तक आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक पात्र व्यक्तियों को लाभ मिल सके।</p>
<p>सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर 12 से 31 जनवरी तक डीएनटी समुदाय के लोगों को पहचान प्रमाण पत्र जारी करने के लिए शिविर लगाए गए थे। समुदाय के प्रतिनिधियों की मांग और पात्र व्यक्तियों को अधिकाधिक लाभान्वित करने के उद्देश्य से शिविरों की तिथि बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>मंत्री गहलोत ने बताया कि शिविरों के आरंभ से अब तक ई-मित्र पोर्टल पर डीएनटी पहचान प्रमाण पत्र के लिए कुल 10,764 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 5,378 प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि 1,301 आवेदन कमी पूर्ति या अन्य आक्षेपों के कारण लौटाए गए हैं। शेष आवेदन प्रक्रियाधीन हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के सुशासन में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि घुमन्तु समुदाय के सभी व्यक्तियों को ऑनलाइन पहचान प्रमाण पत्र जारी कर राज्य की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाए। इसके लिए सभी जिलों के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों की पंचायत समितियों, नगरपालिकाओं, नगर परिषदों एवं नगर निगमों में 15 फरवरी तक सहायता शिविर आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p>शिविरों में मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र और मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाने की भी व्यवस्था की गई है। मंत्री ने अपील की कि समुदाय के अधिक से अधिक पात्र लोग शिविरों का लाभ उठाएं, ताकि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/date-of-dnt-identity-certificate-help-camps-extended-till-15th/article-141774</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/date-of-dnt-identity-certificate-help-camps-extended-till-15th/article-141774</guid>
                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 16:22:01 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/11-%28700-x-400-px%29-%28630-x-400-px%29-%283%292.png"                         length="795086"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        