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                <title>Residency - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>फ्रांस-भारत ने 'विला स्वागतम' रेजीडेंसी कार्यक्रम के चौथे संस्करण के शुरू होने की घोषणा, सांस्कृतिक और रचनात्मक आदान-प्रदान को मिलेगा बढ़ावा </title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांसीसी दूतावास ने भारत और फ्रांस के बीच कलात्मक आदान-प्रदान के लिए 'विला स्वागतम' 2026-27 की घोषणा की है। इस कार्यक्रम के तहत कलाकार, लेखक और शोधकर्ता एक-दूसरे के देशों में रहकर नवाचार करेंगे। 31 मई 2026 तक आवेदन खुले हैं, जो द्विपक्षीय संबंधों और रचनात्मकता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/france-india-announce-the-start-of-the-fourth-edition-of-villa/article-152997"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/india-and-france.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। भारत में फ्रांसीसी संस्थान और फ्रांसीसी दूतावास ने 'विला स्वागतम' क्रॉस-रेजीडेंसी कार्यक्रम के चौथे संस्करण की शुरुआत की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य फ्रांस और दक्षिण एशिया के बीच सांस्कृतिक और रचनात्मक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। वर्ष 2026-2027 की रेजीडेंसी के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 मई 2026 निर्धारित की गई है। यह कार्यक्रम भारतीय और फ्रांसीसी कलाकारों, लेखकों, अनुवादकों, डिजाइनरों, विद्वानों और रचनात्मक पेशेवरों को फ्रांस और दक्षिण एशिया के विभिन्न संस्थानों में रहने और सीखने के अवसर प्रदान करता है।</p>
<p>साल 2023 में अपनी शुरुआत के बाद से, विला स्वागतम एक प्रमुख भारत-फ्रांसीसी सांस्कृतिक पहल के रूप में विकसित हुआ है, जो साहित्य, दृश्य कला, शिल्प, डिजाइन और अनुसंधान के क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देता है। यह कार्यक्रम एक से तीन महीने की रेजीडेंसी प्रदान करता है और पारस्परिकता के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके तहत दोनों देशों के प्रतिभागियों को एक साझा ढांचे के भीतर एक-दूसरे के देशों में मेजबानी प्रदान की जाती है।</p>
<p>भारत में फ्रांस के राजदूत थियरी माथु ने इस पहल को एक ऐसे मंच के रूप में वर्णित किया जो रचनाकारों को संस्कृतियों, प्रथाओं और विचारों के बीच सेतु बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। उन्होंने कहा कि नया संस्करण ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026’ (इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026) के हिस्से के रूप में विशेष महत्व रखता है। पिछले तीन संस्करणों में, विला स्वागतम ने लगभग 100 प्रतिभागियों का समर्थन किया है और विभिन्न कलात्मक और साहित्यिक क्षेत्रों में सहयोग की सुविधा प्रदान की है। कई प्रतिभागियों ने इंडिया आर्ट फेयर, <br />कोच्चि-मुज़िरिस बिनाले और केरल साहित्य महोत्सव जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने काम का प्रदर्शन किया है।</p>
<p>चौथे संस्करण में कई नयी साझेदारियां और रेजीडेंसी प्रारूप पेश किये गये हैं। फ्रांस में, सिरेमिक रेजीडेंसी के लिए 'मुसी डी'आर्ट कंटेम्पोरेन डी लियोन' और बायो-डिज़ाइन एवं टिकाऊ रचनात्मक प्रथाओं से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 'फोंडेशन थैली' के साथ नये सहयोग शामिल हैं। ला रीयूनियन में एक साहित्यिक रेजीडेंसी भी शुरू की गई है, जबकि 'इंस्टीट्यूट डी'एट्यूड्स एवांसी डी नान्तेस' मानविकी और समकालीन वैश्विक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक नई शोध रेजीडेंसी की मेजबानी करेगा।</p>
<p>दक्षिण एशिया में, यह कार्यक्रम पत्थर और संगमरमर आधारित कलात्मक प्रथाओं के लिए 'स्टोनएक्स ग्लोबल', साहित्य के लिए नयी दिल्ली में 'रेड हाउस' और कला एवं शिल्प के लिए बांग्लादेश में 'कॉसमॉस फाउंडेशन' के साथ साझेदारी के माध्यम से विस्तार कर रहा है। विला स्वागतम पहली बार भूटान तक भी पहुंचेगा, जहां 'वास्ट भूटान' एक ग्राफिक उपन्यासकार रेजीडेंसी की मेजबानी करेगा। भारत के कई शहरों में एक अभिनव और भ्रमणशील साहित्यिक रेजीडेंसी भी शुरू की गई है, जिससे एक प्रतिभागी विभिन्न क्षेत्रों की यात्रा कर सकेगा और विविध समुदायों तथा सांस्कृतिक संदर्भों के साथ जुड़ सकेगा।वर्तमान में इस कार्यक्रम में भारत, श्रीलंका, बंगलादेश, भूटान और फ्रांस में 30 से अधिक भागीदार रेजीडेंसी शामिल हैं, जो साहित्य, कविता, अनुवाद, ग्राफिक उपन्यास, नृत्य, कपड़ा, सिरेमिक, कांच कला और क्यूरेटोरियल अभ्यास जैसे विषयों को कवर करते हैं। विला स्वागतम को 'इंस्टीट्यूट फ्रैंकैस' का समर्थन प्राप्त है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 13:02:18 +0530</pubDate>
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                <title>पीजी बॉन्ड की नई शर्तों से भविष्य के सुपरस्पेशलिस्ट संकट में, जार्ड ने जताया कड़ा विरोध, जानें क्या है पूरा मामला ?</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर में राजस्थान के PG डॉक्टरों के सामने संकट, नए आदेश के अनुसार सुपरस्पेशलिटी प्रवेश के लिए 25 लाख से 1.5 करोड़ की बैंक गारंटी अनिवार्य। JARD ने विरोध जताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jard-expressed-strong-opposition-to-the-future-superspecialist-crisis-due/article-141780"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(6)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) कर चुके उन मेधावी डॉक्टरों के सामने करियर का सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है, जिन्होंने अपनी मेहनत से नीट एसएस (सुपरस्पेशलिटी) की कठिन परीक्षा पास की है। 28 जनवरी 2025 को सचिवालय से संयुक्त शासन सचिव द्वारा जारी नए आदेशों ने प्रदेश के रेजिडेंट्स की चिंता बढ़ा दी है। नए नियमों के अनुसार, अब सुपरस्पेशलिटी कोर्स में प्रवेश पाने के लिए रिलीव होने से पहले रेजिडेंट्स को बॉन्ड राशि के बराबर की बैंक गारंटी सरकार के पास जमा करानी होगी।</p>
<p><strong>क्या है विवाद की मुख्य जड़?</strong></p>
<p>पूर्व में नियम यह था कि यदि किसी रेजिडेंट का चयन पीजी के दौरान या बाद में सुपरस्पेशलिटी के लिए होता था, तो सरकार उनसे 25 लाख रुपये का एफिडेविट (शपथ पत्र) लेकर उन्हें रिलीव कर देती थी। छात्र अपना कोर्स पूरा करने के बाद वापस राज्य में आकर बॉन्ड की सेवा शर्तें पूरी करते थे।<br />लेकिन नए आदेशों ने इस प्रक्रिया को अत्यंत जटिल बना दिया है:</p>
<p>बैंक गारंटी की अनिवार्यता: अब एफिडेविट के स्थान पर बैंक गारंटी मांगी जा रही है।</p>
<p>भारी भरकम राशि: पीजी बैच 2023 और 2024 के लिए यह राशि 25 लाख रुपये है, जबकि बैच 2025 के लिए बॉन्ड राशि को बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये कर दिया गया है।</p>
<p>वित्तीय बोझ: किसी भी मध्यमवर्गीय या मेधावी छात्र के लिए 25 लाख से लेकर 1.5 करोड़ रुपये तक की बैंक गारंटी देना व्यावहारिक रूप से असंभव है।<br />जार्ड का विरोध और डॉक्टरों की मांग</p>
<p>जयपुर एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (JARD) ने इस आदेश को प्रतिभा विरोधी करार दिया है। जार्ड अध्यक्ष डॉ. राजपाल सिंह मीना का कहना है कि सरकार का यह कदम प्रदेश के सबसे होनहार डॉक्टरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। पीजी के बाद बॉन्ड की अनिवार्यता और इतनी बड़ी राशि की बैंक गारंटी के कारण मेधावी डॉक्टर सुपरस्पेशलिटी कोर्स करने से वंचित रह जाएंगे। हम सेवा करने से मना नहीं कर रहे, लेकिन बैंक गारंटी की शर्त हटाकर पुरानी एफिडेविट व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Feb 2026 18:37:39 +0530</pubDate>
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