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                <title>Global Energy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Global Energy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>होर्मुज़ जलड़मरूमध्य को खोलना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सर्वसम्मत मांग : चीनी विदेश मंत्री ने दिया ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और अधिकारों पर ज़ोर</title>
                                    <description><![CDATA[चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने का आग्रह किया है। अमेरिकी नाकेबंदी और ऊर्जा संकट के बीच चीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय मांग बताया। तेहरान इस जलमार्ग को 'विशेष संपत्ति' मान रहा है, जबकि तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/opening-of-the-strait-of-hormuz-is-unanimous-demand-of/article-150713"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/china.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सर्वसम्मत मांग है। वांग ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात करते हुए इस बात पर जोर दिया कि एक ओर जहां ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और एक तटीय राज्य के रूप में उसके वैध अधिकारों के सम्मान की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर इस जलडमरूमध्य से नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री सुरक्षा की गारंटी भी दी जानी चाहिए वांग ने कहा, "इस जलडमरूमध्य से सामान्य आवागमन फिर से बहाल करने के प्रयास अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से एक सर्वसम्मत आह्वान का प्रतिनिधित्व करते हैं।"</p>
<p>वांग ने कहा कि वर्तमान स्थिति युद्ध और शांति के बीच एक नाजुक मोड़ पर खड़ी है लेकिन इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि कूटनीतिक समाधान के लिए अवसर का एक दरवाजा भी खुल रहा है। ईरानी सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए एक 'विशेष व्यवस्था' परिभाषित करने का आह्वान करते हुए यह तर्क दिया कि यह जलमार्ग तेहरान के लिए एक 'विशेष संपत्ति' है। गौरतलब है कि यह जानकारी राज्य समाचार एजेंसी आईआरएनए ने दी।</p>
<p>सरकारी प्रवक्ता फातिमा मोहजेरानी ने रूस की आरआईए नोवोस्ती को बताया, "उन सभी संपत्तियों की तरह जो अन्य देशों के साथ बातचीत के प्रकार और उसके नियमन के लिए एक साधन के रूप में काम करती हैं, उसी तरह से इस जलमार्ग के लिए भी एक विशेष व्यवस्था परिभाषित की जानी चाहिए।" गौरतलब है कि इस सप्ताह के अंत में पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता विफल होने के बाद वाशिंगटन द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लगाए जाने के कारण होर्मुज के रास्ते होने वाला नौवहन बाधित है।</p>
<p>होर्मुज जलडमरूमध्य सामान्यतः वैश्विक समुद्री तेल प्रवाह का एक बड़ा हिस्सा संभालता है लेकिन 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध से उत्पन्न नवीनतम ऊर्जा संकट के केंद्र में वह बना हुआ है। तेहरान ने इसके जवाबी कार्रवाई में इजरायल और उन अन्य क्षेत्रीय देशों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने या संपत्तियां मौजूद हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने जैसा कि कहा कि अमेरिकी सेनाओं ने ईरान से और ईरान को होने वाले समुद्री व्यापार को पूरी तरह से रोक दिया है। नाकेबंदी के पहले 48 घंटों के दौरान इस क्षेत्र से कोई भी जहाज नहीं गुजरा है।</p>
<p>कमांड ने बताया कि 10 जहाजों ने ईरानी बंदरगाहों या तटीय जलक्षेत्रों की ओर वापस लौटने के आदेशों का पालन किया है। यह नाकेबंदी ईरान के तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करने या वहां से बाहर निकलने वाले सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से लागू होती है, जबकि ईरानी बंदरगाहों से दूर रहने वाले जहाजों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है। यह उम्मीद की जा रही है कि इस नाकेबंदी से ईरान की अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव पड़ेगा। इस बीच इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर तेहरान द्वारा पहले से लगाई गई पाबंदियों के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 18:39:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में भी व्यापार की इजाजत नहीं, अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही तो हम लाल सागर में रास्ते रोक देंगे: ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उसके बंदरगाहों की नाकाबंदी नहीं हटी, तो वह बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य को बंद कर देगा। इससे दुनिया का 30% तेल पारगमन रुक सकता है। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप कूटनीतिक सफलता का दावा कर रहे हैं, वहीं ईरान ने झुकने से साफ इनकार कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trade-is-not-allowed-even-in-the-gulf-of-oman/article-150598"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trujp.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के केंद्रीय सैन्य कमान ‘खतम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय’ के प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही अलीआबादी ने बुधवार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका फारस की खाड़ी में ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखता है और ईरान के वाणिज्यिक जहाजों एवं तेल टैंकरों के लिए असुरक्षा पैदा करता है, तो ईरान लाल सागर के महत्वपूर्ण ‘बाब-अल-मंडेब’ जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर देगा। ईरानी सरकारी मीडिया में जारी संदेश में अलीआबादी ने स्पष्ट किया कि ईरान की शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और लाल सागर में किसी भी प्रकार के आयात या निर्यात को जारी रखने की अनुमति नहीं देंगी। </p>
<p><strong>ईरान का बाब-अल-मंडेब पर काफी प्रभाव </strong></p>
<p>ईरान का बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर काफी प्रभाव है, जो लाल सागर का दक्षिणी प्रवेश द्वार और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु है। ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों का लाल सागर की सीमा से लगे एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण है। यह जलडमरूमध्य पश्चिमी एशिया से निर्यात होने वाले प्राकृतिक गैस और तेल उत्पादों के लिए एक अनिवार्य मार्ग है, जो कुल वैश्विक ऊर्जा पारगमन का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालता है। </p>
<p><strong>...तो दुनिया में और बिगड़ सकते हैं हालात </strong></p>
<p>सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य के साथ-साथ बाब-अल-मंडेब को भी बाधित करने में सफल होता है, तो इससे दुनिया के कुल तेल पारगमन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा रुक जाएगा। यह कदम पहले से ही अस्थिर वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक विनाशकारी झटका साबित हो सकता है। </p>
<p><strong>ईरान को झुकाने की कोशिश नाकाम होगी : पेजेशकियान</strong></p>
<p>इस बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने घोषणा की है कि ईरान को ‘आत्मसमर्पण’ के लिए मजबूर करने की अमेरिका या इजरायल की किसी भी कोशिश का ‘विफल होना तय’ है। उन्होंने कहा कि ईरान के लोग किसी हाल में इसे स्वीकार नहीं करेंगे। ईरान ने कभी युद्ध या अस्थिरता नहीं चाही है। वह अन्य देशों के साथ निरंतर संवाद और रचनात्मक जुड़ाव का पक्षधर रहा है। अमेरिका का नाम लिये बिना राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय व्यवहार में ‘दोहरे मानदंडों’ की आलोचना की और संप्रभु राष्ट्रों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की निंदा की। </p>
<p><strong>ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के करीब: ट्रंप </strong></p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की कि ईरान के साथ संघर्ष ‘समाप्त होने के करीब’ है। उन्होंने एक संभावित कूटनीतिक सफलता का संकेत भी दिया है। ट्रंप ने संकेत दिया कि रुकी हुई बातचीत पाकिस्तान में कुछ ही दिनों में फिर से शुरू हो सकती है, जिससे युद्धविराम समाप्त होने से पहले किसी समझौते की उम्मीद जगी है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ काफी सख्त कर दी है। सेना ने पुष्टि की है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से घेराबंदी लागू करते हुए ईरानी समुद्री व्यापार को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख ब्रैड कूपर ने कहा कि इस अभियान ने 36 घंटों से भी कम समय में ईरान की व्यापारिक जीवन रेखा को पंगु बना दिया है। ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी पूरी तरह से लागू कर दी गई है। ईरान की लगभग 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर है, जो अब प्रभावी रूप से प हो गई है। इज़रायल-लेबनान वार्ता के बाद हिज्बुल्लाह पर सहमति के संकेत</p>
<p>इजरायल और लेबनान के बीच हुई प्रत्यक्ष वार्ता के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने हिज्बुल्लाह के मुद्दे पर समान सोच उभरने के संकेत दिए हैं और दक्षिणी लेबनान में जारी संघर्ष के समाधान की इच्छा जताई है। अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचियल लेइटर ने कहा कि वार्ता में हिज्बुल्लाह के प्रभाव को समाप्त करने को लेकर रुख में समानता देखने को मिली। लेबनान सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह हिज्बुल्लाह के प्रभुत्व से बाहर निकलना चाहती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:08:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रिपोर्ट्स : होर्मुज़ पर लगे संभावित शुल्क से नाराज़ तेल कंपनियां, ईरान द्वारा संभावित शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं पर जताई चिंता </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों पर $1 प्रति बैरल शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है। वैश्विक तेल कंपनियों ने व्हाइट हाउस से संपर्क कर इस 'टैक्स' का विरोध किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आने वाले हफ्तों में इस पर चर्चा करेंगे, क्योंकि यह रणनीतिक जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/reports-oil-companies-angry-over-possible-duty-on-hormuz-expressed/article-149738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने व्हाइट हाउस से संपर्क कर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान द्वारा संभावित शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं पर चिंता जतायी है। यह जानकारी अखबार ने मामले से परिचित एक स्रोत के हवाले से दी है। रिपोर्टाें के अनुसार, तेल कंपनियों के अधिकारियों ने व्हाइट हाउस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से अपील की है कि वे शांति वार्ता की शर्त के रूप में ईरान को इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए शुल्क लेने की अनुमति देने का विरोध करें।</p>
<p>स्रोत के मुताबिक, तेल उद्योग के प्रतिनिधियों ने बुधवार सुबह अमेरिकी विदेश विभाग में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें अपनी चिंताओं से अवगत कराया। इस बीच, बुधवार को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर आने वाले हफ्तों में चर्चा करेंगे।। इस बीच, फाइनेंशियल टाइम्स ने ईरान के तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पाद निर्यातकों के संघ के आधिकारिक प्रवक्ता हामिद होसैनी के हवाले से बताया कि ईरान तेल टैंकरों को प्रति बैरल एक डॉलर के शुल्क पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने के लिए तैयार है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 17:57:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संघर्ष: डोनाल्ड ट्रंप ने खर्ग द्वीप समेत तेल भंडारों पर कब्जा करने की ईरान को दी धमकी, सऊदी अरब में अमेरिकी हवाई अड्डे पर हमला</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच खर्ग द्वीप और ईरानी तेल संसाधनों पर नियंत्रण करने की धमकी दी है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी रक्षा प्रणाली ध्वस्त हो चुकी है और समझौता न होने पर सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। इस तनाव से ब्रेंट क्रूड की कीमतें $116 के पार पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-israel-conflict-donald-trump-threatens-iran-to-capture-oil/article-148439"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष में तनाव बढ़ने के साथ ही अमेरिका ईरान के तेल भंडारों पर कब्जा कर सकता है, जिसमें प्रमुख निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि समझौते और युद्ध का उनका इरादा ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण हासिल करना होगा, जिसकी तुलना उन्होंने इस साल की शुरुआत में वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई से की।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, "सच कहूँ तो, मेरी सबसे पसंदीदा योजना ईरान से तेल छीनना है, लेकिन अमेरिका में कुछ बेवकूफ लोग कहते हैं: 'आप ऐसा क्यों कर रहे हैं?' लेकिन वे बेवकूफ ही हैं।" उन्होंने सुझाव दिया कि वाशिंगटन खर्ग द्वीप पर नियंत्रण कर सकता है, जिससे होकर ईरान के कच्चे तेल का अधिकांश निर्यात होता है और कहा कि यह विकल्प अभी भी विचाराधीन है। उन्होंने कहा, "हो सकता है हम खर्ग द्वीप पर कब्जा कर लें हो सकता है न करें। हमारे पास कई विकल्प हैं... इसका मतलब यह भी होगा कि हमें कुछ समय के लिए खर्ग द्वीप पर रहना होगा।"</p>
<p>जब ट्रंप से द्वीप पर ईरानी रक्षा व्यवस्था के बारे में पूछा गया तो उन्होंने दावा किया कि उन्होंने ईरान की सेना और नौसेना को पूरी तरह नष्ट कर दिया है और कहा, "मुझे नहीं लगता कि उनके पास कोई रक्षा व्यवस्था है। हम इसे बहुत आसानी से अपने कब्जे में ले सकते हैं।" लेकिन ट्रंप ने हालिया टिप्पणी कि वह "तेल पर कब्जा करना चाहते हैं" से बाजारों में कोई हलचल नहीं मची है और ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिर से बढ़ गई हैं।</p>
<p>ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब पेंटागन इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है। मरीन और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन की इकाइयों सहित हजारों अमेरिकी सैनिकों को इस क्षेत्र में तैनात किया गया है। बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक तेल की कीमतों को भी तेजी से बढ़ा दिया है और आगे तनाव बढ़ने की आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 116 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। सऊदी अरब में अमेरिकी हवाई अड्डे पर हुए हमले सहित सैन्य तनाव बढ़ गया है, जिसमें अमेरिकी सैनिक घायल हुए और सैन्य उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए। इस बीच, यमन में हाउथी विद्रोहियों ने युद्ध में प्रवेश कर लिया है, जिससे मौजूदा संघर्ष में एक नया चरण शुरू हो गया है और उन्होंने इज़राइल की ओर मिसाइलें दागी हैं, जिससे एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की आशंका बढ़ गई है।</p>
<p>आक्रामक बयानबाजी के बावजूद ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान सहित मध्यस्थों के माध्यम से अप्रत्यक्ष वार्ता जारी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों के गुजरने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "उन्होंने हमें 10 की अनुमति दी थी। अब वे 20 की अनुमति दे रहे हैं और 20 टैंकर पहले ही अपना काम शुरू कर चुके हैं और जलडमरूमध्य के ठीक बीच से गुजर रहे हैं।" ट्रंप ने यह भी दावा किया कि कई वरिष्ठ नेताओं की मृत्यु के बाद ईरान में प्रभावी रूप से "सत्ता परिवर्तन" हो गया है, हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि ईरान की राजनीतिक संरचना अभी भी बरकरार और मजबूत है।</p>
<p>उन्होंने ईरान के नेतृत्व के साथ संभावित समझौते को लेकर भी विश्वास जताया: "मुझे लगता है कि हम उनके साथ समझौता कर लेंगे, मुझे पूरा यकीन है... लेकिन सत्ता परिवर्तन हो चुका है।" ट्रंप ने आगे कहा कि सैन्य अभियान जारी हैं, "हमारे पास लगभग 3,000 लक्ष्य बचे हैं, हमने 13,000 लक्ष्यों पर बमबारी की है, और कुछ हजार लक्ष्य अभी बाकी हैं... समझौता काफी जल्दी हो सकता है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 15:23:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ युद्धविराम की संभावना को नकारा, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से गहराया ईंधन संकट</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि ईरान किसी अस्थायी समझौते के बजाय "युद्ध की पूर्ण और स्थायी समाप्ति" चाहता है। होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से वैश्विक ईंधन कीमतों में भारी उछाल आया है। इस कड़े रुख ने तनाव कम करने और तेल बाजार को स्थिर करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को बड़ा झटका दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-rejects-possibility-of-ceasefire-with-america-and-israel-fuel/article-147324"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/maztab.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि उनका देश अमेरिका और इजरायल के साथ किसी अस्थायी युद्धविराम के लिए सहमत नहीं होगा। जापान की समाचार एजेंसी 'क्योडो' को दिए एक साक्षात्कार में श्री अराघची ने कहा कि ईरान केवल युद्धविराम नहीं, बल्कि "युद्ध की पूर्ण, व्यापक और स्थायी समाप्ति" चाहता है।</p>
<p>विदेश मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला चरमरा गई है। ईरानी नाकाबंदी के कारण फारस की खाड़ी से वैश्विक बाजारों तक तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करने वाला सबसे महत्वपूर्ण मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य, प्रभावी रूप से बंद हो गया है। इस मार्ग से शिपिंग रुकने के सीधे परिणाम के रूप में दुनिया भर के अधिकांश देशों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है।</p>
<p>अब्बास अराघची के कड़े रुख ने उन कूटनीतिक प्रयासों को झटका दिया है जो तनाव कम करने और वैश्विक तेल बाजार को स्थिर करने की कोशिश कर रहे थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:03:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग, 88 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसली, जानें क्या है कारण ?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त अस्थिरता है। सोमवार को $119 तक पहुँचने के बाद, ब्रेंट क्रूड अब गिरकर $87.57 पर आ गया है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संकट ने आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/crude-oil-prices-fell-below-88-per-barrel-know-the/article-146132"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/crude-oil.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ईरान इजरायल युद्व का असर अब कच्चे तेल पर साफ दिखाई दे रहा है। तेल की कीमतों में लगातार उतार चढ़ाव दिखाई दे रहा है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई थी, जिसके बाद लगातार दो दिनों से तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 87.57 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। बुधवार को डब्ल्यूटीआई 83.08 डॉलर पर आ गया। इससे पहले मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही और यह 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे पहुंच गया था। इससे पहले सोमवार को कच्चा तेल बीच कारोबार में 119 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था।</p>
<p>अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को एक संयुक्त सैन्य अभियान में ईरान पर किये गये हमले के बाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। ईरान पर हमले और उसकी जवाबी प्रतिक्रिया के कारण पश्चिम एशिया में इन दोनों गंभीर भू-राजनीतिक संकट पैदा हो गया है। इससे कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति और उत्पादन दोनों बाधित हुए हैं। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 18:00:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्या सच में जल्द खत्म होने वाला युद्व? पश्चिम एशिया तनाव के बीच ट्रंप-पुतिन ने की टेलीफ़ोन पर बात, युद्ध सहित कई वैश्विक मुद्दों पर हुई चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट पर 'रचनात्मक' बातचीत हुई। पुतिन ने चेतावनी दी कि अस्थिरता से वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र ठप हो सकता है और तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। रूस ने यूरोप को स्थिर आपूर्ति का भरोसा दिया है, बशर्ते क्षेत्र में शांति और सुरक्षा की गारंटी हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/is-the-war-really-going-to-end-soon-amidst-west/article-145930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-war.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी पश्चिम एशिया में तनाव एवं रुस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध सहित कई वैश्विक मुद्दों पर बहुत अच्छी बातचीत हुई। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को कहा कि बातचीत में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समेत कई वैश्विक मुद्दों पर बात हुई।</p>
<p>उन्होंने कहा, राष्ट्रपति पुतिन के साथ मेरी बहुत अच्छी बातचीत हुई, हम यूक्रेन के बारे में बात कर रहे थे, जो एक कभी न खत्म होने वाली लड़ाई है। हमने जाहिर तौर पर पश्चिम एशिया के बारे में बात की और वह मदद करना चाहते हैं। मैंने कहा, आप यूक्रेन-रूस युद्ध खत्म करके ज्यादा मदद कर सकते हैं। यह ज्यादा मददगार होगा, लेकिन हमारी बहुत अच्छी बातचीत हुई और वह बहुत रचनात्मक होना चाहते हैं।</p>
<p>यह बातचीत व्हाइट हाउस के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर साझा की गई। इससे पहले दिन में पुतिन ने मॉस्को में वैश्विक तेल और गैस पर एक बैठक की अध्यक्षता की, जहाँ उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया को अस्थिर करने की कोशिशों से वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र पर बुरा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन ने कहा कि ऐसे हालात से तेल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं और वैश्विक आपूर्ति में रुकावट आ सकती है। </p>
<p>रूसी नेता ने कहा, पश्चिम एशिया में हालात को अस्थिर करने की कोशिशों से वैश्विक तेल और ऊर्जा क्षेत्र जरूर खतरे में पड़ जाएगा, तेल और गैस की कीमतें बढ़ेंगी, दुनिया भर में इन संसाधनों की आपूर्ति पर रोक लगेगी, और बेशक लंबे समय के निवेश योजना में रुकावट आएगी। </p>
<p>उन्होंने बताया कि 2025 में दुनिया का लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरेगा, जिससे यह इलाका वैश्विक ऊर्जा प्रवाह के लिए बहुत जरूरी हो जाएगा। पुतिन ने यह भी चेतावनी दी कि अगर अस्थिरता और बिगड़ी तो फारस की खाड़ी में तेल का उत्पादन एक महीने के अंदर पूरी तरह रुक सकता है, और कहा कि उत्पादन में पहले ही गिरावट शुरू हो गई है।      </p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते वैश्विक तेल की कीमतों में 30 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, पहले कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, फिर घटकर लगभग 107 डॉलर पर आ गईं, हालांकि उतार-चढ़ाव ज्यादा बना रहा। इसके आगे पुतिन ने कहा, अगर यूरोप के देश स्थिर हालात की गारंटी देने को तैयार हैं तो रूस तेल और गैस आपूर्ति पर उनके साथ सहयोग करेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Mar 2026 18:29:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्या रद्द हो सकता है भारत अमेरिका व्यापार समझौता? व्हाहट हाउस ने दी चेतावनी, कहा-रूस से तेल नहीं खरीदेगा भारत</title>
                                    <description><![CDATA[व्हाइट हाउस ने कहा, भारत ने नए समझौते में रूस से कच्चा तेल न लेने, अमेरिका से अधिक तेल खरीदने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़े निवेश की प्रतिबद्धता जताई बताई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/can-india-us-trade-agreement-be-cancelled-white-house-warns-says/article-141924"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(8)3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस ने बुधवार को दावा किया कि भारत ने अमेरिका के साथ हुए नये समझौते के तहत रूस से कच्चा तेल न लेने और अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदने का निर्णय लिया है। </p>
<p>व्हाइट हाउस की मीडिया सचिव कैरोलाइन लेविट ने संवाददाताओं से कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच सीधी बातचीत के बाद भारत ने यह प्रतिबद्धता जाहिर की। उन्होंने कहा, जैसा कि आप सब ने देखा, राष्ट्रपति (ट्रंप) ने भारत के साथ एक और बेहतरीन सौदा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सीधे बात की। उन दोनों का रिश्ता बहुत मजबूत है। लेविट ने कहा, भारत ने रूसी तेल नहीं खरीदने का वादा किया है, बल्कि अमेरिका से भी तेल खरीदने का वादा किया है, और शायद वेनेजुएला से भी। इसका सीधा फ़ायदा अमेरिका और अमेरिकी लोगों को होगा।</p>
<p>उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़े निवेश का वादा किया है। लेविट ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का वादा किया है, जिसमें परिवहन, ऊर्जा और कृषि उत्पादों जैसे सेक्टर शामिल हैं। उन्होंने कहा, यह राष्ट्रपति की वजह से एक और शानदार व्यापारिक समझौता है।</p>
<p>उन्होंने अमेरिकी विनिर्माण को मजबूत करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीति और व्यापार रणनीति को श्रेय दिया। प्रशासन की आयात नीति का बचाव करते हुए, लेविट ने कहा कि इससे पहले ही ठोस आर्थिक फ़ायदे मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति की आयात शुल्क नीति काम कर रही है और उनका आर्थिक एजेंडा काम कर रहा है। पूरे अमेरिका में नयी फ़ैक्ट्री परियोजनाओं की वजह से निर्माण से जुड़ी नौकरियों में बढ़ोतरी हुई है। वे फ़ैक्ट्रियां यहीं अमेरिका में बन रही हैं, और हम अमेरिकियों को काम दे रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 15:59:52 +0530</pubDate>
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