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                <title>Digital Sovereignty - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राज्यसभा में उठा पैक्स सिलिका में शामिल होने से भारत के डेटा की निजता प्रभावित होने का मामला, दिग्विजय सिंह ने जताई नागरिकों की निजता के उल्लंघन की आशंका</title>
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                        <![CDATA[राज्यसभा में दिग्विजय सिंह ने 'पैक्स सिलिका' गठबंधन से डेटा निजता और 'डिजिटल उपनिवेशवाद' का खतरा उठाया। जया बच्चन ने वीआईपी कल्चर से जनता और सांसदों को होने वाली असुविधा पर नाराजगी जताई, जबकि राघव चड्ढा ने मोबाइल डेटा कैरी-फॉरवर्ड के उपभोक्ता अधिकार की मांग की। सदन में महिला सुरक्षा और नकली ऑर्गेनिक उत्पादों पर भी चर्चा हुई।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/issue-of-indias-data-privacy-being-affected-due-to-pax/article-147527"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/digvijay-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। अमेरिका के नेतृत्व में बनाये गये रणनीतिक गठबंधन पैक्स सिलिका में भारत के शामिल होने से भारत और उसके नागरिकों डेटा की निजता की सुरक्षा का मुद्दा सोमवार को राज्यसभा में उठाया गया। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने शून्यकाल में यह विषय उठाते हुए कहा कि भारत हाल ही में पैक्स सिलिका का सदस्य बना है। उन्होंने कहा कि इस गठबंधन का सदस्य बनने से भारत के डेटा के लीक होने तथा नागरिकों की निजता के उल्लंघन की आशंका है।</p>
<p>कांग्रेस सदस्य ने कहा कि इससे भारत की क़त्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे क्षेत्रों में स्वायत्तता और संभावनाओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को उन सेवा शर्तों का सदन में खुलासा करना चाहिए जिनके आधार पर भारत इसका सदस्य बना है। उन्होंने आरोप लगाया कि पैक्स सिलिका डिजिटल उपनिवेशवाद है और इससे भारत के हर नागरिक की निजता की सुरक्षा का सवाल पैदा हो गया है।</p>
<p>उन्होंने इससे अलग एक विषय उठाते हुए देश में अब तक की महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक उपलब्धियों के पड़ावों पर सदन में अल्पकालिक चर्चा कराये जाने की मांग की। भाजपा के डॉ. अजीत माधवराव गोपचड़े ने ऑर्गेनिक के नाम पर देश में बेचे जा रहे नकली खाद्य पदार्थ की ब्रिक्री पर रोक लगाये जाने का मुद्दा उठाया। उन्होने पूरे देश में ऑर्गेनिक खाद्य पदार्थों के लिए एक ही नियम और मानक स्थापित किये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि रसायन युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है और साथ ही भारतीय उत्पादों का नाम भी खराब हो रहा है। उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए सख्त कानून बनाये जाने की मांग की । उन्होंने कहा कि इससे देश की प्रतिष्ठा को भी नुकसान हो रहा है।</p>
<p>भाजपा के नबाम रेबिया ने पूर्वोत्तर के छात्रों के साथ राजधानी दिल्ली में नस्लीय भेदभाव और उत्पीड़न का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई किये जाने की मांग की। सभापति ने कहा कि इस विषय पर सारा सदन सहानुभूतिपूर्ण विचार रखता है। कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद सिंह ने बिहार के औद्योगिकरण के मामले में पिछड़े होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार देश के सकल घरेलू उत्पाद में केवल तीन प्रतिशत का योगदान देता है क्योंकि वहां पर उद्योग और फैक्ट्री नहीं है। इससे लोगों को पलायन करना पड़ता है। उन्होंने राज्य में औद्योगिक टाउनशिप विकसित किये जाने की मांग की।</p>
<p>समाजवादी पार्टी की जया बच्चन ने देश विशेष रूप से राजधानी दिल्ली में वीआईपी संस्कृति के कारण नागरिकों को होने वाली असुविधा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह अफसोस की बात है कि इस संस्कृति के कारण कर देने वाले आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ी है।<br />उन्होंने अपने साथ हुए मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वह और अन्य सांसद पिछले सप्ताह शार्दुल गेट से बाहर निकल रहे थे तो वीआईपी मूवमेंट के चलते को बंद कर दिया गया। </p>
<p>उन्होंने कहा कि यह संसद के इतिहास में पहली बार हुआ कि सांसद के लिए गेट बंद कर दिया गया। इससे सांसदों का अपमान हुआ है। दूसरे मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वीआईपी मूवमेंट के कारण उन्हें राज्यसभा से सेवानिवृत सांसदों की विदायी पार्टी में पहुंचने में एक घंटे से अधिक समय लगा। उन्होंने इस संस्कृति पर रोक लगाये जाने की मांग की। </p>
<p>कांग्रेस की रजनी पाटिल ने निजी स्कूलों में बढ़ती फीस का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा नागरिकों का मौलिक अधिकार है लेकिन भारी भरकम फीस के कारण वह इससे वंचित हैं। आम आदमी पार्टी के राघव चड्डा ने मोबाइल उपभोक्ताओं के फोन रिचार्ज पैकेज में बिना इस्तेमाल के बचे डेटा के समाप्त हो जाने का का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कंपनियों ने डेटा की सीमा हर रोज के हिसाब से तय की है जबकि यह मासिक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह उपभोक्ता का अधिकार है और उसका बचा हुआ डेटा उपभोक्ता के खाते में जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने बचे हुए डेटा को किसी और को स्थानांतरित किये जाने की व्यवस्था शुरू किये जाने की भी मांग की।</p>
<p>आप पार्टी की स्वाति मालीवाल ने देश में महिला आयोगों को वास्तविक अधिकार दिये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अनेक राज्यों में अभी भी महिला आयोग में पदाधिकारियों की नियुक्ति नहीं की गयी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में भी महिला आयोग में अध्यक्ष का पद खाली है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 16:27:51 +0530</pubDate>
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                <title>फ्रांस-जर्मनी और ऑस्ट्रिया अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर अपनाएंगे ओपन-सोर्स </title>
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                        <![CDATA[फ्रांस, जर्मनी समेत कई यूरोपीय देश डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के चलते अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर स्वदेशी व ओपन-सोर्स तकनीक अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/france-germany-and-austria-will-abandon-american-software-and-adopt/article-141999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(10).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। यूरोप के कई देश अब अमेरिकी टेक कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे देश ने अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर अपने या ओपन-सोर्स विकल्प अपनाने का फैसला किया है। इसका मकसद है डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और डिजिटल आजादी। फ्रांस में सरकारी कर्मचारियों को अब जूम और माइक्रोसॉफ्ट टीम्स जैसे अमेरिकी वीडियो कॉलिंग टूल्स छोड़ने होंगे। साल 2027 तक करीब 25 लाख सरकारी कर्मचारी फ्रांस के अपने वीडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम वीआईएसआई का इस्तेमाल करेंगे।</p>
<p>फ्रांसीसी सरकार का कहना है कि गैर-यूरोपीय सॉफ्टवेयर पर निर्भर रहना डेटा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। सरकार चाहती है कि संवेदनशील बातचीत और सरकारी जानकारी यूरोप के अंदर ही सुरक्षित रहे। फ्रांस के सिविल सर्विस मंत्री डेविड अमिएल ने कहा कि वैज्ञानिक जानकारी, संवेदनशील डेटा और रणनीतिक नवाचारों को गैर-यूरोपीय कंपनियों के हाथ में नहीं छोड़ा जा सकता।</p>
<p><strong>अमेरिका-यूरोप तनाव से बढ़ी चिंता</strong></p>
<p>यूरोप में यह चिंता तब और बढ़ी जब अमेरिका की ट्रंप सरकार ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के एक अधिकारी पर प्रतिबंध लगाए। इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने उस अधिकारी की ईमेल सेवा बंद कर दी। इससे यह डर पैदा हुआ कि अमेरिकी कंपनियां कभी भी सेवाएं रोक सकती हैं। हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि उसने आईसीसी की सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं की और वह यूरोपीय सरकारों के साथ मिलकर डेटा सुरक्षा पर काम कर रहा है। कंपनी का दावा है कि उसका डेटा यूरोप में ही रहता है और यूरोपीय कानूनों के तहत सुरक्षित है। फिर भी यूरोप में यह भावना मजबूत हुई कि अगर किसी देश या कंपनी पर बहुत ज्यादा निर्भरता होगी तो उसे हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।</p>
<p><strong>जर्मनी-ऑस्ट्रिया और डेनमार्क के भी बदले रास्ते</strong></p>
<p>जर्मनी के श्लेसविग-होल्सटीन राज्य ने पिछले साल 44 हजार कर्मचारियों की ईमेल सेवाएं माइक्रोसॉफ्ट से हटाकर ओपन-सोर्स सिस्टम पर ले गईं। ऑस्ट्रिया की सेना ने रिपोर्ट लिखने और दस्तावेज बनाने के लिए अपनाया है। इसकी एक वजह यह भी है कि माइक्रोसॉफ्ट अब ज्यादा डेटा क्लाउड पर ले जा रहा है, जबकि लिबर ऑफिस आमतौर पर ऑफलाइन चलता है।</p>
<p><strong>पहले आजादी-बाद में बचत</strong></p>
<p>डेनमार्क की सरकार और कोपेनहेगन व आरहूस जैसे शहर भी ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर आजमा रहे हैं। उनका कहना है कि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता भविष्य में जोखिम बन सकती है। यूरोपीय नेताओं का मानना है कि तकनीक के मामले में किसी एक देश या कंपनी पर निर्भर रहना खतरनाक है। यही वजह है कि अब यूरोप में पहले आजादी, बद में बचत की सोच बढ़ रही है।</p>]]>
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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 11:39:38 +0530</pubDate>
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