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                <title>श्रीनाथपुरम स्टेडियम बना खिलाड़ियों की पहली पसंद, आधुनिक सुविधाओं से संवर रहा खेल भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[आमजन के लिए अलग वॉकिंग ट्रैक, केडीए लागू करेगा एसओपी,  मैदान और सिंथेटिक ट्रैक पर केवल खिलाड़ियों को मिलेगी एंट्री।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/shrinathpuram-stadium-emerges-as-the-top-choice-for-athletes--modern-facilities-are-shaping-a-bright-future-for-sports/article-161422"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(5)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कभी सीमित सुविधाओं के कारण संघर्ष करने वाले खिलाड़ियों के लिए आज श्रीनाथपुरम स्टेडियम उम्मीदों का नया केंद्र बन चुका है। आधुनिक खेल सुविधाओं, सुव्यवस्थित मैदान, सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक और बेहतर रखरखाव के कारण यह स्टेडियम शहर के खिलाड़ियों की पहली पसंद बनता जा रहा है। फुटबॉल, एथलेटिक्स, ताइक्वांडो सहित कई खेलों के खिलाड़ी यहां नियमित अभ्यास कर रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी भी इसी मैदान पर कर रहे हैं।</p>
<p><strong>कुछ खेल गतिविधियां शुल्क आधारित भी</strong><br />स्टेडियम परिसर में संचालित कुछ विशेष खेल गतिविधियां निर्धारित शुल्क पर उपलब्ध हैं। इनका संचालन कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) द्वारा लीज पर दिए गए संस्थानों के माध्यम से किया जा रहा है। इसके बावजूद खिलाड़ियों का मानना है कि स्टेडियम की मूलभूत सुविधाएं और व्यवस्थाएं उत्कृष्ट हैं तथा नियमित रखरखाव के कारण यहां अभ्यास करना सुविधाजनक और सुरक्षित महसूस होता है।</p>
<p><strong>खिलाड़ियों के लिए बना प्रोफेशनल अभ्यास केंद्र</strong><br />स्टेडियम का सबसे बड़ा आकर्षण अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया फुटबॉल मैदान और उसके साथ विकसित सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक है। यह ट्रैक विशेष रूप से खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए बनाया गया है, जहां धावक और अन्य एथलेटिक्स खिलाड़ी बिना किसी व्यवधान के नियमित ट्रेनिंग कर रहे हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि इस तरह की सुविधा पहले शहर में सीमित थी, लेकिन अब बेहतर माहौल मिलने से प्रदर्शन में भी सकारात्मक बदलाव आ रहा है।</p>
<p>स्टेडियम की योजना इस तरह तैयार की गई है कि खिलाड़ियों के अभ्यास में किसी प्रकार की बाधा न आए। मैदान के भीतर बना सिंथेटिक ट्रैक केवल खिलाड़ियों के उपयोग के लिए है, जबकि सुबह-शाम घूमने और फिटनेस के लिए आने वाले लोगों के लिए स्टेडियम के बाहरी हिस्से में अलग वॉकिंग ट्रैक विकसित किया गया है। इससे एक ओर खिलाड़ियों को निर्बाध अभ्यास का अवसर मिल रहा है तो दूसरी ओर आमजन भी सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण में मॉर्निंग एवं ईवनिंग वॉक का आनंद ले रहे हैं।</p>
<p>सिंथेटिक ट्रैक और बेहतर मैदान के कारण खिलाड़ी नियमित और गुणवत्तापूर्ण अभ्यास कर पा रहे हैं। यदि इसी प्रकार रखरखाव जारी रहा तो यहां से राष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी तैयार होंगे।<br /><strong>-तीरथ सांगा, फुटबॉल कोच</strong></p>
<p>मैदान के अंदर बना सिंथेटिक ट्रैक खिलाड़ियों के लिए बेहद उपयोगी है। यदि इसका उपयोग केवल खिलाड़ी ही करें तो इसकी गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहेगी ।अभ्यास का अवसर मिलता रहेगा।<br /><strong>-विशाल मीणा, एथलेटिक्स कोच</strong></p>
<p>ताइक्वांडो अभ्यास के लिए भी यहां अच्छी व्यवस्था है, लेकिन बारिश के मौसम में परेशानी से बचाने के लिए इंडोर सुविधा विकसित की जानी चाहिए, ताकि खिलाड़ी पूरे साल निर्बाध अभ्यास कर सकें।<br /><strong>-कमलेश बैरवा, ताइक्वांडो कोच</strong></p>
<p><strong>खिलाड़ियों का कहना</strong><br />पहले अभ्यास के दौरान कई परेशानियां आती थीं, लेकिन अब मैदान, पेयजल और अन्य सुविधाएं बेहतर होने से नियमित ट्रेनिंग आसान हो गई है। यहां का माहौल प्रतियोगी खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।<br /><strong>-रियांश, खिलाड़ी</strong></p>
<p>सिंथेटिक ट्रैक पर अभ्यास करने से प्रतियोगिताओं की बेहतर तैयारी होती है। बाहर अलग वॉकिंग ट्रैक होने से भीड़ नहीं रहती और हम बिना किसी व्यवधान के ट्रेनिंग कर पाते हैं।<br /><strong>-तन्नू बैरवा, इंटरनेशनल खिलाड़ी</strong></p>
<p><strong>एसओपी से सुरक्षित रहेगा सिंथेटिक ट्रैक</strong><br />मैदान के अंदर बनाया गया सिंथेटिक ट्रैक केवल खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए तैयार किया गया है। इसके संरक्षण और बेहतर उपयोग के लिए जल्द ही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की जाएगी। स्टेडियम परिसर में जिम के ऊपर एक हॉल का निर्माण पूरा हो चुका है। आवश्यक तैयारियों के बाद इसे खेल प्रशिक्षण शिविर और विभिन्न खेल गतिविधियों के लिए शुरू किया जाएगा।<br /><strong>- मुकेश चौधरी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>
<p><strong>हाड़ौती का प्रमुख स्पोर्ट्स हब बनने की ओर</strong><br />लगातार विकसित हो रही सुविधाएं, सुव्यवस्थित रखरखाव और खिलाड़ियों के अनुकूल वातावरण श्रीनाथपुरम स्टेडियम को हाड़ौती क्षेत्र के सबसे आधुनिक खेल परिसरों में शामिल कर रहे हैं। प्रस्तावित एसओपी प्रभावी ढंग से लागू होगी, और नई सुविधाएं ज्लद शुरू होगी, आने वाले वर्षों में यह स्टेडियम न केवल कोटा बल्कि पूरे हाड़ौती के खिलाड़ियों के लिए एक प्रमुख स्पोर्ट्स हब के रूप में स्थापित हो सकता है।<br /><strong>-वाई बी सिंह, जिला खेल अधिकारी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 15:08:19 +0530</pubDate>
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                <title>शिक्षा विभाग : स्पोर्ट्स कैलेंडर जारी फिर भी खिलाड़ियों के हाथ खाली</title>
                                    <description><![CDATA[दो साल से नहीं मिला खेल मद का बजट और सामग्री।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/education-department--sports-calendar-released--yet-players--hands-remain-empty/article-161095"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । राजस्थान माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से सत्र 2026-27 के राज्य स्तरीय विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिता का वार्षिक पंचांग जारी कर दिया है। लेकिन, स्कूलों को पिछले दो साल से स्पोर्ट्स एक्यूपमेंट खरीदने के लिए बजट तक नहीं मिला। बिना बजट व खेल सामग्री के प्रतिभाओं को राज्य स्तरीय टूर्नामेंट के लिए तैयार करना शारीरिक शिक्षकों के लिए मुश्किल हो रहा है। हालांकि, शिक्षकों को भामाशाहों के सहयोग से खेल सामग्री का जुगाड़ करना पड़ता है। इधर, शिक्षाविदें का कहना है, अभी तक स्कूलों को खेल मद की राशि और आवश्यक खेल सामग्री तक उपलब्ध नहीं हुई, जिसके अभाव में विद्यार्थियों को अभ्यास करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>जिला व राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का शेड्यूल</strong><br />स्कूल स्तर के 17 व 19 वर्ष के छात्र-छात्रा वर्ग के 33 प्रकार के गेम्स निर्धारित किए गए हैं। जिन्हें आयोजित कराने के लिए चार समूहों में विभाजित किया गया है। इस बार स्कूल स्तर की खेल प्रतियोगिताएं 25 अगस्त से पहले सम्पन्न करवानी होंगी। इसके बाद जिला स्तर की सभी प्रतियोगिताएं 29 अगस्त से 17 अक्टूबर तक होंगी। राज्य स्तर की प्रतियोगिताएं 9 सितंबर से 29 अक्टूबर तक करवाई जाएंगी।</p>
<p><strong>भामाशाहों के भरोसे स्कूलों में अभ्यास</strong><br />सरकारी विद्यालयों में फुटबॉल, वॉलीबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स सहित विभिन्न खेलों की आवश्यक सामग्री का अभाव बना है। कई जगह खिलाड़ी सीमित संसाधनों के साथ अभ्यास कर रहे हैं, जबकि कई विद्यालयों में शारीरिक शिक्षकों को ग्रामीणों, भामाशाहों और स्थानीय सहयोग से खेल सामग्री जुटाकर खिलाड़ियों तैयार करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>गत वर्ष प्रतियोगिताएं खत्म होने के बाद मिला था किट</strong><br />शिक्षाविद् मोहर सिंह का कहना है कि वर्ष 2025 में विद्यालयों को खेल सामग्री की किट मार्च माह के आसपास उपलब्ध कराई गई थी, जबकि तब तक राष्ट्रीय स्तर तक की अधिकांश प्रतियोगिताएं समाप्त हो चुकी थीं। सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे थे। इसके बाद विभाग ने विद्यालयों से सामग्री को संतोषजनक बताते हुए रिपोर्ट तो मंगवा ली, लेकिन उसके बाद से न तो नई खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई और न ही खेल मद की राशि जारी हुई।</p>
<p><strong>दो वर्षों से नहीं मिला रहा नियमित बजट</strong><br />शरीरिक शिक्षकों के अनुसार, पिछले दो वर्षों से सरकारी विद्यालयों को न तो नियमित खेल मद की राशि मिल रही है और न ही आवश्यकता के अनुरूप खेल सामग्री उपलब्ध हो रही है। इससे पहले उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 25 हजार रुपए, उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 10 हजार रुपए तथा प्राथमिक विद्यालयों को 5 हजार रुपए खेल गतिविधियों के लिए दिए जाते थे। वर्तमान में विद्यालयों के पास अन्य मद से भी खेल सामग्री खरीदने के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है।</p>
<p><strong>इस बार भामाशाहों से भी सहयोग मांगना मुश्किल</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर कुछ स्कूलों के पीटीआई ने बताया कि हॉकी जैसे खेलों की सामग्री काफी महंगी होती है। बजट नहीं मिलने से टीम तैयार करना कठिन हो रहा है। गत वर्ष भी बजट नहीं मिला। अब तक भामाशाहों और व्यक्तिगत परिचितों के सहयोग से काम चलाया जाता था, लेकिन इस बार कमजोर मानसून के कारण उनसे भी सहयोग की उम्मीद कम है। ऐसे में सरकार को जल्द खेल मद का बजट जारी करना चाहिए।</p>
<p><strong>समय पर बजट उपलब्ध कराना शिक्षा परिषद की जिम्मेदारी फोटो है दोनों में</strong><br />राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को शारीरिक शिक्षक उनकी रुचि के खेलो में तैयार करते है लेकिन दूसरी और इन खिलाड़ियों के खेलों की सामग्री के लिए राज्य स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से पिछले दो सत्रों से बजट ही नहीं मिल रहा। ऐसे में खिलाड़ी कैसे तैयार होंगे। शिक्षा मंत्री मामले को संज्ञान में लेते हुए दो सत्रों की बजट राशि इस माह जारी करवाई जाएं ताकि, खेल सामग्री समय पर खरीदी जा सके, जिसका आगामी विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगताओं में उपयोग हो सकें।<br /><strong>-मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसट</strong></p>
<p>राजकीय विद्यालयों को पिछले दो साल से स्पोट्स मद में बजट नहीं दिया जा रहा। जबकि, खेल बजट की आवश्यकता अब पहले से कहीं अधिक है। क्योंकि, नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर देती है, लेकिन कई स्कूलों में खेल सामग्री, मैदान और आवश्यक संसाधनों का अभाव है। प्रत्येक विद्यालय को पर्याप्त और नियमित स्पोर्ट्स बजट उपलब्ध कराया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों की छिपी हुई खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। सरकार को पिछले व वर्तमान सत्र का बजट जल्द जारी करना चाहिए।<br /><strong>-राजेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष शिक्षक संघ रेसटा</strong></p>
<p>पिछले सत्र में बजट दिया है, जिससे खेलकूद उपलब्ध कराई गई है। स्पोर्ट्स एक्यूपमेंट यानी खेल सामग्री की कमी नहीं है। रही बात नए सत्र के बजट की तो वह जल्द ही स्कूलों को मिलेगा।<br /><strong>-सतीश कुमार गुप्ता, विशेषाधिकारी शिक्षा मंत्री</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 14:26:14 +0530</pubDate>
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                <title>जंगली घास से खिलाड़ियों में जहरीले जीव जंतुओं का खौफ, स्टेडियम में अन्य सुविधाएं भी बदहाल</title>
                                    <description><![CDATA[कई बार शिकायत के बावजूद जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fear-of-venomous-creatures-among-players-due-to-wild-overgrowth/article-158042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px)20.png" alt=""></a><br /><p>सांगोद। क्षेत्र के एकमात्र बड़े खेल मैदान भीमराव सिंह स्टेडियम की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। स्टेडियम में उगी जंगली घास, खरपतवार और कंटीली झाड़ियों से खिलाड़ियों और बच्चों में सांप व अन्य जहरीले जीवों का भय बना हुआ है। खेल प्रेमियों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जोलपा रोड स्थित भीमराव सिंह स्टेडियम में इन दिनों जंगली घास और खरपतवार का कब्जा बढ़ता जा रहा है। प्रतिदिन सैकड़ों बच्चे यहां क्रिकेट, फुटबॉल सहित विभिन्न खेलों का अभ्यास करने पहुंचते हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि मैदान में फैली झाड़ियों के कारण दुर्घटना और जहरीले जीवों के निकलने का खतरा बना हुआ है। क्रिकेट कोच वसीम ने बताया कि मंगलवार को अभ्यास के दौरान उन्होंने झाड़ियों में सांप देखा, जिसके बाद बच्चों को उस क्षेत्र में जाने से रोकना पड़ा। उनका कहना है कि यदि समय रहते सफाई नहीं करवाई गई तो खिलाड़ियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। खेल प्रेमियों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।</p>
<p><strong>स्टेडियम में अन्य सुविधाएं भी बदहाल</strong><br />स्थानीय खिलाड़ियों और आसपास के निवासियों के अनुसार स्टेडियम में लगा वाटर कूलर लंबे समय से खराब पड़ा है। पेयजल के लिए बनी प्याऊ के सभी नल टूटे हुए हैं। स्टेडियम की एक दीवार क्षतिग्रस्त हो रही है, जबकि शौचालयों के गेट भी टूटे हुए हैं। इससे विशेष रूप से महिला खिलाड़ियों और भ्रमण के लिए आने वाली महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p>दशकों से इस मैदान को देखा है। इसी मैदान से कई खिलाड़ी जिला और राज्य स्तर तक पहुंचे हैं। लेकिन आज भी खेल मैदान का विकास मानकों के अनुरूप नहीं हो पाया है। उचित सुविधाओं के अभाव में खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए पार्कों और गलियों का सहारा लेना पड़ रहा है।<br /><strong>-सुरेंद्र सिंह, सेवानिवृत्त सैनिक एवं फुटबॉल कोच, सांगोद</strong></p>
<p>नगर में खेल गतिविधियों के लिए यह एकमात्र बड़ा स्टेडियम है। इसकी दुर्दशा चिंता का विषय है। संबंधित अधिकारियों को कम से कम स्टेडियम की सफाई कर जंगली घास और खरपतवार हटाने की दिशा में तत्काल कदम उठाने चाहिए।<br /><strong>-सोनम सोनी, निवर्तमान नगर उपाध्यक्ष, भाजपा महिला मोर्चा</strong></p>
<p>मामला उनके संज्ञान में आ गया है। कर्मचारियों को भेजकर स्टेडियम परिसर में उगी जंगली घास और कांटेदार खरपतवार को जल्द हटाने की कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>-हंसराज नरवाल, सफाई निरीक्षक, नगर पालिका, सांगोद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 14:07:58 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट से WFI को बड़ा झटका: विनेश फोगाट को एशियन गेम्स के ट्रायल में हिस्सा लेने की दी इजाजत, अगले हफ्ते होगी सुनवाई </title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने पहलवान विनेश फोगाट को एशियन गेम्स 2026 के सिलेक्शन ट्रायल्स (30-31 मई) में शामिल होने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने उनके खेल योगदान की सराहना की, हालांकि खेल प्रशासन में अदालती दखल पर चिंता भी जताई। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ डब्लूएफआई की याचिका पर अब अगली सुनवाई होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/big-blow-to-wfi-from-supreme-court-vinesh-phogat-allowed/article-155393"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/vinesh-phogat.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पहलवान विनेश फोगाट को 30 और 31 मई को होने वाले एशियन गेम्स 2026 के सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाज़त दे दी। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब वे भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें फोगाट को सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाजत दी गई थी।</p>
<p>बेंच ने डब्ल्यूएफआई की तरफ से पेश वकील से कहा, "आज इस मोड़ पर, जब हाई कोर्ट ने आदेश दे दिया है, तो उम्मीदें और अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। उन्हें घर वापस जाने के लिए कहना और यह कहना कि हम कुछ नहीं कर सकते, सही नहीं होगा। हम आपको यह बात बहुत बेबाकी से कह रहे हैं।" सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर अगली सुनवाई अगले हफ़्ते के लिए तय की। सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फोगाट का मामला भारतीय खेलों में उनके योगदान की वजह से एक अलग ही दर्जे का है। कोर्ट ने कहा, "अगर कोई और होता, तो मामला अलग होता। उन्होंने देश को गर्व महसूस कराया है।"</p>
<p>इसके साथ ही, बेंच ने खेलों से जुड़े मामलों में न्यायिक दखल पर चिंता जताई और दिल्ली हाई कोर्ट के इस मामले को संभालने के तरीके की आलोचना की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने जिस "तरीके और ढंग" से इस मामले की जांच की, उससे उसे परेशानी हुई है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि खेल प्रशासन में बार-बार और जल्दबाज़ी में किया गया अदालती दखल कार्यक्रमों को बिगाड़ सकता है और पूरे खेल जगत पर बुरा असर डाल सकता है। सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, "ये मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के मामले नहीं हैं, ये राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों से जुड़े मामले हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि कोर्ट इस तरह से दखल दे और पूरे कार्यक्रम को ही बिगाड़ दे।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:17:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>हाड़ौती के 52 में से 51 सरकारी कॉलेजों में पीटीआई नहीं, खेल सप्ताह के नाम पर चम्मच दौड़ व कुर्सी दौड़ </title>
                                    <description><![CDATA[कहीं मैदान नहीं तो कहीं शारीरिक शिक्षक नहीं होने से खेल प्रतिभाएं संघर्ष से जूझ रही हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-ptis-in-51-out-of-52-government-colleges-in-hadoti---sports-week--reduced-to-spoon-races-and-musical-chairs/article-152625"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(5)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के राजकीय महाविद्यालयों में खेल व शारीरिक शिक्षा बुरे हालातों से गुजर रही है। सरकार की उपेक्षा से प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। हालात यह है कि कोटा संभाग में कुल 52 सरकारी कॉलेज हैं। जिसमें से 51 कॉलेजों में पीटीआई ही नहीं है। वहीं, कई महाविद्यालय तो ऐसे हैं जहां खेल मैदान तो दूर खुद का भवन तक नहीं है। गत वर्ष खुले नए राजसेस कॉलेज स्कूलों के कुछेक कमरों में चल रहे हैं। ऐसे हालातों में खेल प्रतिभाएं संघर्ष से जूझ रही हैं। जबकि स्पोर्ट्स, विद्यार्थियों का कॅरियर बना सकता है। इसके बावजूद हालात सुधारने की दिशा में कोई प्रयास हो रहे।</p>
<p><strong>संभाग में एक ही पीटीआई, अगले साल होंगे रिटायर्ड</strong><br />हाल ही में सेवानिवृत हुए कॉलेज शिक्षा कोटा के क्षेत्रिय सहायक निदेशक विजय पंचौली के अनुसार, संभाग के बारां, बूंदी, कोटा व झालावाड़ जिले में कुल 52 राजकीय महाविद्यालय है। जिनमें से 31 नियमित तथा 21 राजसेस हैं। इनमें केवल एक ही राजकीय महाविद्यालय बारां में ही सरकारी पीटीआई हैं, जिनका रिटायरमेंट वर्ष 2027 में है। सरकारी कॉलेजों में वर्ष 1992 के बाद से ही पीटीआई की भर्ती नहीं हुई। हर साल भर्ती की आस में बड़ी संख्या में युवा बीपीएड की डिग्री ले रहे हैं।</p>
<p>कोटा विश्वविद्यालय द्वारा हर साल स्पोर्ट्स कैलंडर जारी किया जाता है। जिसके तहत 4 माह तक अंतर महाविद्यालय गेम्स कॉम्पिटीशन होता है। छात्र पीटीआई के अभाव में वंचित हो जाते हैं। न तो पे्रक्टिस करवाने वाला कोई है और न ही खेल मैदान है। वर्तमान में राजकीय कला महाविद्यालय अब नवीन भवन में संचालित है, जहां खेल मैदान नहीं है।<br /><strong>-रिद्धम शर्मा, छात्रनेता एनएसयूआई</strong></p>
<p>विद्यार्थी गेम्स की बारीकियां नहीं सीख पाते। कई छात्र स्पोट्स में कॅरियर बनाना चाहते हैं लेकिन स्पोट्स टीचर के अभाव में पिछड़ जाते हैं। यदि स्थाई पीटीआई मिले तो विद्यार्थी अंतर महाविद्यालय, अंतर राज्य विवि तथा नेशनल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर कॉलेज का नाम रोशन कर सकते हैं।<br /><strong>-आशीष मीणा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष,गवर्नमेंट साइंस कॉलेज</strong></p>
<p>हमारे पास न तो पीटीआई है और न ही खेल मैदान, जबकि, कैम्पस में पर्याप्त जगह है, जहां ग्राउंड बन सकता है। हम स्पोर्ट्स में कॅरियर बनाना चाहते हैं, मौका ही नहीं मिलता। खेल सप्ताह के नाम पर चम्मच दौड़ व कुर्सी दौड़ करवाकर इतिश्री कर ली जाती है।<br /><strong>-दिव्यांशी मुराड़िया, महानगर सह मंत्री, एबीवीपी रामपुरा कॉलेज</strong></p>
<p>खिलाड़ी होने के नाते हमारे लिए बिना पीटीआई कॉलेज में अभ्यास करना बहुत मुश्किल हो गया है। बिना कोच के हमें न तो सही गाइडेंस मिल पा रही और न ही गेम्स की बारीकियां व टेक्निक सीख पा रहें। सरकार को जल्द स्पोट्स टीचर नियुक्त करना चाहिए।<br /><strong>- चित्रांश कंवर, छात्रा राजकीय महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p>इंटर स्टेट प्रतियोगिताओं में प्रोफेशली तरीके से गेम्स खेले जाते हैं, जहां हम पिछड़ जाते हैं। स्पोट्स में कॅरियर बनाना चाहता हूं, लेकिन विड़म्बना है कि स्थाई पीटीआई नहीं है। स्पोट्स के स्तर को सुधारने के लिए सरकार कदम उठाए।<br /><strong>-विनीत नागर, छात्र राजकीय महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />लंबे समय से सरकारी कॉलेजों में पीटीआई नहीं हैं। बारां गवर्नमेंट कॉलेज में ही एकमात्र शारीरिक शिक्षक है। बिना स्पोट्स टीचर के बच्चों व कॉलेज प्रशासन को दिक्कत आती है। हालांकि, सरकार आरपीएससी के माध्यम से भर्ती निकाली थी, जिनके इंटरव्यू चल रहे हैं, जल्द ही कॉलेजों को नियमित शारीरिक शिक्षक मिलेंगे।<br /><strong>-डॉ. विजय पंचौली, पूर्व क्षेत्रिय सहायक निदेशक कोटा आयुक्तालय</strong></p>
<p>सरकार, स्पोट्स को लगातार बढ़ावा दे रही है। साधन-संसाधन, उपकरण व खेल मैदान विकसित करने के लिए बजट भी दे रही है। वहीं, आरपीएससी के माध्यम से शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा के इंटरव्यू चल रहे हैं, इसके पूरे होने पर कॉलेजों को नियमित पीटीआई मिलेंगे।<br /><strong>-प्रो. प्रतिमा श्रीवास्तव, क्षेत्रिय सहायक निदेशक कोटा आयुक्तालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 15:13:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पीएम मोदी ने सिक्किम में बच्चों के संग खेला फुटबॉल : शेयर की खूबसूरत तस्वीरें, लिखा-इन खिलाड़ियों के साथ फुटबॉल खेलना ऊर्जा भरने वाला रहा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिक्किम के 50वें स्थापना दिवस पर गंगटोक में युवा खिलाड़ियों के साथ फुटबॉल खेलकर सबका दिल जीत लिया। बच्चों के साथ गोल पोस्ट पर शॉट लगाते हुए पीएम ने इस पल को ऊर्जावान बताया। उन्होंने राज्य के पद्म पुरस्कार विजेताओं से भी संवाद कर उनके योगदान की सराहना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-shared-beautiful-pictures-of-playing-football-with-children/article-151916"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/modi17.png" alt=""></a><br /><p>गंगटोक। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिक्किम के अपने दौरे के दूसरे दिन मंगलवार सुबह यहां एक मैदान में बच्चों के साथ कुछ समय फुटबॉल खेला। पीएम मोदी ने मैदान पर अपने हाथ में फुटबॉल लेकर बच्चों के साथ अपनी तस्वीर साझा कीं। फुटबॉल की पोशक पहने बच्चों की टोली में किशोर वय बालक और बालिकाएं शामिल थे। प्रधानमंत्री एक चित्र में गोल पोस्ट के सामने से गोल कर रहे हैं और गोल्ड कीपर उसे पकड़ने में सफल हो गया है। अन्य युवा खिलाड़ी ताली बजाकर प्रधानमंत्री के प्रदर्शन का स्वागत कर रहे हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने इन तस्वीरों के साथ लिखा, "साफ दिखता है, इन किशोर खिलाड़ियों के साथ फुटबॉल खेलना ऊर्जा भरने वाला रहा।" पीएम मोदी सिक्किम राज्य के 50 वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर सोमवार शाम यहां पहुंचे थे और एक रोड शो में भाग लिया था। पीएम मोदी ने कल शाम को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित और अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले राज्य के कुछ लोगों से मुलाकात की। उन्होंने उनके साथ विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 13:00:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बाहर बोर्ड लगाया स्टेडियम में भोजन वितरण सख्त मना,अंदर सजाई भोज की प्लेटें</title>
                                    <description><![CDATA[गंदगी और भोजन वितरण पर चेतावनी बोर्ड लगे, पर अमल नदारद।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-sign-outside-the-stadium-read-%22food-distribution-strictly-prohibited-%22-but-inside--food-plates-were-being-served/article-139303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)28.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। "स्टेडियम में झूठन और गंदगी के बीच मॉर्निंग वॉक, खेल के नाम पर हो रही पार्टियां "शीर्षक से समाचार प्रकाशित होने के बाद हरकत में आए अधिकारी अब फिर से सुस्त नजर आ रहे हैं। स्टेडियम परिसर में जगह-जगह चेतावनी बोर्ड तो लगवा दिए गए, लेकिन इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए। परिणामस्वरूप एक समाज ने शुक्रवार से रविवार तक जेके पवेलियन स्टेडियम को किराए पर लिया और परिसर के भीतर ही चाय, नाश्ता व भोजन का आयोजन कर दिया। इससे न केवल खेल गतिविधियां प्रभावित हुईं, बल्कि स्वच्छता के दावे भी हवा-हवाई साबित हुए।शुक्रवार को मॉर्निंग वॉकर अचल शर्मा, मोइनुद्दीन, रितुराज सुमन, चेतन मीणा तथा गोलाफेंक कोच श्याम बिहारी नाहर ने आयोजन का विरोध किया। इस पर आयोजकों ने खेल अधिकारी वाई.बी. सिंह और केडीए अधिकारी सुमित चित्तौड़ा की सहमति का हवाला दिया।</p>
<p>शनिवार सुबह जब नवज्योति ने इस संबंध में खेल अधिकारी वाई.बी. सिंह से पूछा तो उन्होंने कहा कि आयोजक भोजन की टेबले हटाने के लिए मानने को तैयार नहीं हैं और दावा कर रहे हैं कि उन्हें केडीए से अनुमति मिली है।आप बीच में क्यों बोल रहे हो जैसी बातें कही जा रही हैं। वहीं केडीए अधिकारी सुमित चित्तौड़ा ने भोजन आयोजन की अनुमति देने से साफ इनकार किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने केवल खेल अधिकारी से बात करने को कहा था। इसके बाद उन्होने मामले को स्वयं दिखवाकर स्टेडियम परिसर से खाने की टेबलें हटवाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 15:40:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दो साल पूरे: अमर जवान ज्योति से ‘रन फॉर विकसित राजस्थान’, सीएम भी दौड़े युवाओं संग</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार के दो वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अमर जवान ज्योति से ‘रन फॉर विकसित राजस्थान’ को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने युवाओं के साथ दौड़ में भाग लिया और खेलो इंडिया पदक विजेताओं को सम्मानित किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/run-for-developed-rajasthan-cm-also-ran-with-the-youth/article-136678"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/run-for-devlopment-rajsthan.png" alt=""></a><br /><p>राज्य सरकार के दो वर्ष पूरे होने के मौके पर रविवार सुबह राजधानी में खास नज़ारा दिखा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अमर जवान ज्योति से ‘रन फॉर विकसित राजस्थान’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं, खिलाड़ियों और आम लोगों ने भाग लिया।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने केवल झंडी दिखाकर औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि खुद प्रतिभागियों के साथ दौड़ में शामिल होकर उनका उत्साह बढ़ाया। दौड़ के दौरान मुख्यमंत्री का खिलाड़ियों और युवाओं के साथ संवाद भी हुआ, जिससे माहौल पूरी तरह उत्सवमय नजर आया।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रदेश का गौरव बताते हुए कहा कि खेलों के माध्यम से राजस्थान नई पहचान बना रहा है और सरकार युवाओं को हर स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित राजस्थान’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि सरकार का संकल्प है, जिसमें युवाओं, खिलाड़ियों और आमजन की भागीदारी सबसे अहम है। दौड़ के माध्यम से फिटनेस, अनुशासन और सकारात्मक सोच का संदेश भी दिया गया।</p>
<p>‘रन फॉर विकसित राजस्थान’ में उत्साह, ऊर्जा और संकल्प की झलक साफ दिखाई दी, जिसने राजधानी की सड़कों को कुछ देर के लिए जश्न में बदल दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Dec 2025 12:24:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नयापुरा उम्मेद सिंह स्टेडियम में 14 करोड़ की लागत से बना खेल हॉस्टल कर रहा लोकार्पण का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[स्टेडियम परिसर में बने इस आधुनिक हॉस्टल में 52 कमरे व 256 खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-the-sports-hostel-built-at-a-cost-of-rs-14-crore-at-nayapura-ummed-singh-stadium-is-awaiting-inauguration/article-135318"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(6)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा के खेल बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ने जा रही है। नयापुरा स्थित उम्मेद सिंह स्टेडियम परिसर में लगभग 14 करोड़ रुपए की लागत से बनकर खेल हॉस्टल का कार्य पूरा हो चुका है और अब इसका औपचारिक लोकार्पण शेष है। राज्य सरकार की घोषणा के बाद तैयार हुआ यह हॉस्टल शहर के उभरते खिलाड़ियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं प्रदान करेगा। बता दें कि कोटा लंबे समय से शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहा है। यहां अलग-अलग खेलों में प्रतिभाएं उभरकर सामने आती रही हैं, लेकिन आवासीय सुविधाओं की कमी अक्सर खिलाड़ियों के विकास में बाधा बनती थी। ऐसे में यह हॉस्टल कोटा के खेल इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है। वर्ष 2023 में इसका टेंडर हुआ था। जानकारी के अनुसार 25 नवंबर 2025 को इसका उद्घाटन होना था, लेकिन किसी कारणों की वजह से इसका उद्घाटन नहीं हो सका। बता दे कि कोटा में हाल ही में कई बड़ी प्रतियोगिताएं हुई हैं। हर प्रतियोगिता में नेशनल-इंटरनेशनल खिलाड़ियों ने भाग लिया था।</p>
<p><strong>ये है हॉस्टल की क्षमता</strong><br />स्टेडियम परिसर में बने इस आधुनिक हॉस्टल में 52 कमरे व 256 खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। कमरों के साथ-साथ खिलाड़ियों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं, स्वच्छता, भोजन व्यवस्था और सुरक्षा के प्रावधानों को भी प्राथमिकता दी गई है। हॉस्टल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां रहने वाले खिलाड़ी बेफिक्र होकर अपने खेल प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर सकें। इसमें जी+3 (चार मंजिला) इमारत में लिफ्ट, खाने के लिए अलग से मैस, 4 गेस्ट रूम, एक मीटिंग हॉल, हर मंजिल पर 11 सुविधाघर, चारों तरफ कैमरे तथा अलग-अलग कैटेगरी वाले कमरे जिसमें 4, 6 व 10 खिलाड़ी एक साथ ठहर सकते है। यहां आने वाले खिलाड़ियों को एक दूसरे की संस्कृति से जुड़ने का मौका मिलेगा।</p>
<p><strong>खिलाड़ियों के लिए जल्द खुलेगा हॉस्टल</strong><br />हॉस्टल का पूरा निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है और यह अब पूरी तरह उपयोग के लिए तैयार है। अधिकारियों के अनुसार इसका लोकार्पण जल्द ही किया जाएगा, जिसके बाद यह आधिकारिक रूप से खिलाड़ियों के लिए खोल दिया जाएगा। खेल विभाग और जिला प्रशासन का मानना है कि इस हॉस्टल के शुरू होने से कोटा में प्रशिक्षण लेने वाले खिलाड़ियों को बहुत राहत मिलेगी। दूर-दराज से आने वाले युवा खेल प्रतिभाओं को अब आवास की चिंता नहीं करनी होगी और वे स्टेडियम के ही निकट रहकर अपनी प्रैक्टिस बढ़ा सकेंगे।</p>
<p><strong>खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद</strong><br />हॉस्टल के शुरू होते ही एथलेटिक्स, हॉकी, फुटबॉल, खो-खो, कबड्डी समेत विभिन्न खेलों से जुड़े युवा खिलाड़ियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। यह सुविधा उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, अनुशासित दिनचर्या और उन्नत खेल वातावरण उपलब्ध कराएगी। उम्मीद की जा रही है कि यह हॉस्टल आगामी वर्षों में कोटा को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नई खेल प्रतिभाएं देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस हॉस्टल से स्थानीय खिलाड़ियों को न केवल रहने की सुविधा मिलेगी, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और अनुकूल माहौल भी प्राप्त होगा। इससे जिले में खेल संस्कृति के और मजबूत होने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />छात्रावास का लोकार्पण शीघ्र ही प्रस्तावित है। भवन निर्माण का कार्य पूर्ण हो चुका है, केवल फर्नीचर की स्थापना का अंतिम चरण शेष है, जो जल्द ही पूरा करवा दिया जाएगा। हमारा प्रयास रहेगा कि छात्रावास का भव्य लोकार्पण इसी वर्ष सम्पन्न किया जाए।<br /><strong>- वाई बी सिंह, खेल अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 15:14:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डब्ल्यूपीएल : मुम्बई इंडियंस और दिल्ली कैपिटल्स ने 5-5 खिलाड़ियों को किया रिटेन, गुजरात ने वोल्वार्ट और यूपी ने दीप्ति शर्मा को किया रिलीज </title>
                                    <description><![CDATA[गुजरात जायंट्स ने डब्ल्यूपीएल नीलामी से पहले दक्षिण अफ्रीका की स्टार लॉरा वुलवार्ट को रिटेन नहीं किया, जबकि केवल दो विदेशी खिलाड़ियों को रखने की अनुमति है। टीम ने बेथ मूनी और एश्ले गार्डनर को चुना। भारत की ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा भी रिटेन सूची से बाहर रहीं। हरमनप्रीत, मंधाना, शेफाली और जेमिमा को उनकी टीमों ने बरकरार रखा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/wpl-mumbai-indians-and-delhi-capitals-retained-5-players-each/article-131663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/111-(5).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। गुजरात जायंट्स ने लॉरा वुलवार्ट को रिटेन न करने का बड़ा फैसला लिया है क्योंकि सभी पांच टीमों ने डब्ल्यूपीएल नीलामी से पहले अपने खिलाड़ियों को रिटेन करने की पुष्टि कर दी है। वुलवार्ट हाल ही में संपन्न हुए एकदिवसीय विश्व कप में शीर्ष स्कोरर रहीं और दक्षिण अफ्रीका को फाइनल तक पहुंचाया, लेकिन नियमों के अनुसार केवल दो विदेशी खिलाड़ियों को ही रिटेन किया जा सकता है। जायंट्स ने बेथ मूनी और एश्ले गार्डनर की ऑस्ट्रेलियाई जोड़ी को चुना।</p>
<p><strong>दीप्ति रहीं वर्ल्ड कप की प्लेयर ऑफ द सीरीज :</strong></p>
<p>वुलवार्ट के अलावा एक और बड़ा नाम जिसे रिटेन नहीं किया गया है, वह हैं भारत की शीर्ष ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा। विश्व कप विजेता भारत की दीप्ति ने फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया और उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी चुना गया।  दीप्ति ने 2024 में डब्ल्यूपीएल में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार भी जीता था।</p>
<p><strong>हरमन, मंधाना, शेफाली और ऋचा को किया रिटेन :</strong></p>
<p>उम्मीद के मुताबिक हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, ऋचा घोष और जेमिमा रोड्रिग्स जैसी अन्य बड़ी भारतीय स्टार खिलाड़ियों को उनकी संबंधित टीमों ने रिटेन किया है। यूपी वॉरियर्स ने सिर्फ एक खिलाड़ी श्वेता सहरावत को ही रिटेन किया है।</p>
<p><strong>रिटेन खिलाड़ियों की सूची :</strong></p>
<p><strong>मुंबई इंडियंस :</strong> हरमनप्रीत कौर, अमनजोत कौर, हेली मैथ्यूज, नैट-स्किवर ब्रंट, जी. कमलिनी।</p>
<p><strong>रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु :</strong> स्मृति मंधाना, ऋचा घोष, एलिस पेरी, श्रेयंका पाटिल।</p>
<p><strong>गुजरात जायंट्स : </strong>एश्ले गार्डनर, बेथ मूनी।</p>
<p><strong>यूपी वारियर्स :</strong> श्वेता सहरावत।</p>
<p><strong>दिल्ली कैपिटल्स : </strong>एनाबेल सदरलैंड, मारिजान काप, शेफाली वर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स, निकी प्रसाद।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/khel/wpl-mumbai-indians-and-delhi-capitals-retained-5-players-each/article-131663</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Nov 2025 12:12:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जाते-जाते बोर्ड कर गया पार्षदों के लिए एक-एक लाख का खेल, कोटा उत्तर में अधिकतर पार्षदों को मिली खेल सामग्री</title>
                                    <description><![CDATA[दोनों निगम के 150 पार्षदों को किया उपकृत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/before-dissolving--the-board-approved-a-one-lakh-rupee-sports-equipment-allocation-for-each-councilor--most-councilors-in-kota-north-have-already-received-the-equipment/article-131164"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/y-of-news-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम का वर्तमान बोर्ड भंग होने से पहले कोटा उत्तर व दक्षिण के सभी 150 पार्षदों को एक-एक लाख रुपए की खेल सामग्री मिलेगी।  इसके लिए पार्षदों से डिमांड ली गई है। कोटा उत्तर में तो शुक्रवार को अधिकतर पार्षदों को यह मिल भी गई जबकि दक्षिण निगम में इसकी पत्रावली अंतिम दौर में है। नगर निगम की ओर से हर साल पार्षदों को एक-एक लाख रुपए की खेल सामग्री देने का प्रावधान किया हुआ है। यह सामग्री पार्षदों द्वारा उनके वार्डों में बच्चों व खिलाड़ियों को खेलने के लिए उपलब्ध करवाई जाती है। पूर्व में भी यह सामग्री कोटा उत्तर व दक्षिण निगम में बांटी जा चुकी है। नगर निगम बोर्ड का वर्तमान कार्यकाल 2 नवम्बर को समाप्त होने वाला है। इससे पहले सभी पार्षदों को अंतिम बार खेल सामग्री दी जानी है।  इस बार भी खेल सामग्री दी जानी है। जिसके लिए कोटा दक्षिण निगम प्रशासन द्वारा सभी 80 पार्षदों से उनके वार्ड व जरूरत के हिसाब से खेल सामग्री की डिमांड ली गई है। अधिकतर पार्षदों ने तो डिमांड दे दी है। वहीं निगम प्रशासन की ओर से खेल सामग्री उपलब्ध करवाने की पत्रावली भी आगे बढ़ा दी गई है। </p>
<p>सूत्रों के अनुसार पिछली बार आवंटित की गई खेल सामग्री की दर से इस बार दर में दो से तीन गुना का अंतर आ रहा है। हर खेल सामग्री की दर काफी अधिक बढ़ाकर दी गई है। जिसके कारण इसे फाइनल करने  में देरी हो रही है। इस फाइल पर लेखा शाखा द्वारा आपत्ती करने से अभी तक खेल सामग्री नहीं बांटी गई है। कांग्रेस पार्षदों का आरोप है कि बोर्ड का कार्यकाल ही समाप्त होने वाला है। ऐसे में जल्दबाजी में खेल सामग्री आवंटित करने के लिए सभी पार्षदों से डिमांड तो ले ली है। लेकिन सामग्री की राशि को लेकर आपत्ती होने से इसके आवंटन में देरी हो रही है। पार्षदों का आरोप है कि बोर्ड भंग होने के बाद भाजपा पार्षद गुप-चुप तरीके से खेल सामग्री ले सकते है। जबकि कांग्रेस पार्षदों को बोर्ड भंग होने का बहाना बनाकर टाला जा सकता है। </p>
<p> इधर भाजपा पार्षदों का कहना है कि निगम की ओर से पारित बजट में खेल सामग्री का प्रावधान किया हुआ है। खेल सामग्री की डिमांड ली जा चुकी है। उसके टेंडर भी हो गए है। संभावना है कि बोर्ड भंग होने से पहले कार्यादेश जारी हो  जाएंगे तो सामग्री तो बाद में भी दी जा सकती है।  इधर कोटा दक्षिण महापौर राजीव अग्रवाल का कहना है कि खेल सामग्री आवंटित करने की पत्रावली प्रक्रियाधीन है। बोर्ड भंग होने से पहले खेल सामग्री के कार्यादेश जारी होने की संभावना है। जिससे जाते-जाते पार्षदों को खेल सामग्री अपने वार्डों में खिलाड़ियों व बच्चों के  लिए मिल सकेगी।   इधर नगर निगम कोटा उत्तर में खेल सामग्री के कार्यादेश कई दिन पहले ही हो गए थे। उसका वितरण भी शुक्रवार को शुरु हो गया। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को बोर्ड का अंतिम दिन होने से अधिकतर पार्षद तो खेल सामग्री लेकर भी चले गए। गिनती के ही पार्षद शेष हैं वे भी शीघ्र ही खेल सामग्री प्राप्त कर लेंगे। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Nov 2025 15:32:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेडल जीते, फिर भी नौकरी का गोल हो रहा फेल, खेल का सर्टिफिकेट लेने के बाद खिलाड़ी सरकारी नौकरी की तरफ करते  हैं रूख</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशिक्षित कोचों की संख्या बेहद सीमित, नहीं  मिल रहा खिलाड़ियों को सही दिशा में मार्गदर्शन ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-winning-medals--the-goal-of-securing-a-job-remains-elusive--after-obtaining-sports-certificates--players-turn-their-attention-to-government-jobs/article-130521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(3)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती अंचल खेलों की प्रतिभाओं से भरा पड़ा है। यहां के युवा और बालिकाएं जिला और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। लेकिन बड़ी सच्चाई यह है कि कोचों की कमी, मानक अनुरूप ग्राउंड का अभाव और लंबे समय से रुकी भर्ती की वजह से इन खिलाड़ियों का सफर आगे बढ़ ही नहीं पाता। सरकार खेलों को बढ़ावा देने के तमाम प्रयास कर रही है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी खिलाड़ियों की मेहनत पर भारी पड़ रही है। खेलों से सरकारी नौकरी पाने का रास्ता खुला है। यही वजह है कि खिलाड़ी राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय सर्टिफिकेट लेकर नौकरी की तैयारी में लग जाते हैं। उनके भीतर की खेल प्रतिभा वहीं ठहर जाती है। सरकार अगर सही समय पर प्रशिक्षित कोच और मानक स्तर के मैदान उपलब्ध कराए, तो यही खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चमक सकते हैं।</p>
<p><strong>फुटबॉल और क्रिकेट के लिए नहीं है राष्ट्रीय स्तर का मैदान</strong><br />खेल शिक्षा अधिकारियों और कोचों के मुताबिक, हाड़ौती में फुटबॉल और क्रिकेट जैसे बड़े खेलों के लिए न तो राष्ट्रीय स्तर के मैदान हैं और न ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं। नतीजा यह है कि खिलाड़ी अपने दम पर मेहनत तो कर रहे हैं, लेकिन आगे बढ़ने के रास्ते उनके लिए बहुत जल्दी बंद हो जाते हैं।</p>
<p><strong>कोटा की गर्ल्स फुटबॉल एकेडमी में सुविधाएं मौजूद</strong><br />राजस्थान में फिलहाल दो सरकारी फुटबॉल एकेडमी संचालित हैं। एक लड़कियों के लिए कोटा में और दूसरी लड़कों के लिए जोधपुर में। कोटा की गर्ल्स एकेडमी में 30 सीटें हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से एक ही छात्रा कोटा शहर की है। इसका नाम निहारिका मेहरा, जो कुन्हाड़ी कोटा की है। बाकी सभी खिलाड़ी बाहर के जिलों से हैं। यहां हॉस्टल की व्यवस्था है, प्रशिक्षण सुबह-शाम होता है, और सरकार इसकी पूरी लागत उठाती है। बावजूद इसके मैदान का स्तर राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है। </p>
<p><strong>निजी कोच अपने स्तर पर कर रहे प्रयास</strong><br />सरकारी कोचों की कमी के बीच निजी क्षेत्र के कोच अपने स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार कर रहे हैं। राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में ये खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन भी कर लेते हैं। लेकिन संसाधनों और मार्गदर्शन की कमी के चलते वे आगे चलकर बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में टिक नहीं पाते। नतीजा यह होता है कि कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल राज्य या राष्ट्रीय स्तर का प्रमाणपत्र हासिल करके सरकारी नौकरी की तैयारी में लग जाते हैं। उनका हुनर, जो देश का नाम रोशन कर सकता था, वहीं रुक जाता है।</p>
<p><strong>कोचों की भारी कमी, खिलाड़ी भटक रहे</strong><br />हर खेल में प्रशिक्षित कोचों की संख्या बेहद सीमित है। यही कारण है कि खिलाड़ी सही दिशा में मार्गदर्शन नहीं पा रहे। फुटबॉल और क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में भी यही हाल है। खासकर लड़कियों के लिए प्रशिक्षित कोच उपलब्ध नहीं हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने के लिए यह सबसे बड़ी बाधा है।</p>
<p><strong>कागजी खानापूर्ति से नहीं बनेगा खिलाड़ी</strong><br />अधिकांश स्कूल-कॉलेजों में खेल गतिविधियां केवल खानापूर्ति तक सीमित हैं। प्रतियोगिताएं होती हैं, लेकिन इनमें खिलाड़ियों को न तो बेहतर ट्रेनिंग मिलती है और न ही आवश्यक सुविधाएं। इस वजह से प्रतिभाशाली खिलाड़ी शुरूआत में दम तो दिखाते हैं, लेकिन आगे चलकर उनका करियर अधर में रह जाता है।</p>
<p><strong>सरकार के प्रयास अधूरे ही साबित</strong><br />सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं बना रही है। स्कूल-कॉलेजों में प्रतियोगिताएं हो रही हैं। लेकिन कोचों की भर्ती न होना और संसाधनों की कमी इन प्रयासों को अधूरा बना रही है। राजस्थान में दो सरकारी एकेडमियां जरूर चल रही हैं, लेकिन उनमें भी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। जब तक प्रशिक्षित कोच और मानक मैदान नहीं मिलेंगे, तब तक हाड़ौती की खेल प्रतिभाएं केवल शुरूआती स्तर तक ही सिमटकर रह जाएंगी।</p>
<p><strong>2012 के बाद से नहीं हुई कोचों की भर्ती</strong><br />राजस्थान सरकार की नीतियां भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। 1991 के बाद करीब 21 साल तक कोई कोच भर्ती नहीं निकली। 2012 में बड़ी मुश्किल से एक भर्ती निकली, लेकिन उसके बाद से अब तक 13 साल बीत गए। आज भी खेल विभाग में प्रशिक्षित कोचों की भारी कमी है। स्कूलों और कॉलेजों में खेलों को बढ़ावा देने के नाम पर शिक्षकों पर ही खेलों की जिम्मेदारी डाल दी जाती है। ऐसे में खेल आयोजन तो हो जाते हैं, लेकिन खिलाड़ी वास्तविक प्रशिक्षण से वंचित रह जाते हैं। खेलो इंडिया खेलो के बाद भी खिलाडियों को नौकरी नहीं मिल रही है।<br /><strong>- एमपी सिंह, पूर्व अध्यक्ष जिला  फुटबॉल संघ कोटा</strong></p>
<p><strong>हाड़ौती में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं</strong><br />कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां हाड़ौती क्षेत्र का हर जिला खेल प्रतिभाओं से लबालब है। फुटबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स, कबड्डी, ताइक्वांडो और बास्केटबॉल जैसे खेलों में यहां के खिलाड़ी राज्य स्तर पर लगातार अपनी पहचान बना रहे हैं। खासकर बालिकाओं ने हाल के वर्षों में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए गोल्ड और सिल्वर मेडल अपने नाम किए हैं। लेकिन यह तस्वीर अधूरी है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के लिए जिन सुविधाओं की दरकार होती है, वे यहां मौजूद ही नहीं हैं।<br /><strong>- मधू बिश्नोई, कोच</strong></p>
<p><strong>बालिकाओं का भविष्य अधर में</strong><br />बालिकाओं के खेल को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कोटा में एकेडमी जरूर खोली है, लेकिन यह केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। कोचों की कमी, मैदान का स्तर खराब होना और स्थानीय प्रतिभाओं का एकेडमी से दूर रहना इस योजना को अधूरा बना रहा है। आज की बालिकाएं हर खेल में आगे बढ़ रही हैं। ओलंपिक से लेकर एशियन गेम्स तक, भारतीय बालिकाएं देश का नाम ऊंचा कर रही हैं। लेकिन कोटा जैसी जगहों पर, जहां बालिकाएं मेहनत करने को तैयार हैं, उन्हें सही मार्गदर्शन और मंच नहीं मिल पा रहा।<br /><strong>- मीनू सोलंकी, कोच</strong></p>
<p><strong>यह बोलीं एकेडमी की बालिकाएं</strong><br />मैं दो साल से एकेडमी में हू, अभी हॉस्टल में रह रही हूं। सुबह और शाम रोजाना दो घंटे स्टेडियम में मैच की प्रेक्टिस करते हैं। प्रैक्टिस के दौरान रनिंग, फास्ट रनिंग, स्टेचिंग, शूटिंग, कोन तथा व्यायाम करते है। राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में अलवर में हमारी एकेडमी टीम गोल्ड मेडल जीता है। आगे भी राष्टÑीय स्तर खेलने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे है। चार साल से लगातार गोल्ड मेडल ला रहे है।<br /><strong>-अंजलि मेहरा, कुन्हाड़ी कोटा</strong></p>
<p>मैंने इस साल ही एकेडमी ज्वाइनिंग की है। मैं इसके माध्यम आगे बढ़ना चाहती हूं तथा राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के साथ नेशनल व इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में पार्टिसिपेट करना चाहती हूं। इसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं। हमारे कोच भी अच्छे है, जो हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है।<br /><strong>-निहारिका मेहरा, हनुमानगढ़</strong></p>
<p>मैंने चार साल रहकर एकेडमी में पढ़ाई की तथा कोटा के रामपुरा की रहने वाली हूं। मैंने 13 बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया तथा 6 बार गोल्ड, 2 बार सिल्वर व एक बार कांस्य पदक हासिल किया। अभी हाल ही में नेशनल प्रतियोगिता में भाग भी लिया है हम प्रतियोगिता पंजाब के अमृतसर में हुई थी जिसमें सभी स्टेट की टीमों ने पार्टिसिपेट किया था। अब हमारे सामने यह दुविधा है कि आगे की प्रतियोगिताओं के लिए कैसे तैयारी करें, अच्छे कोचों का गाइडेंस के साथ राष्टÑीय-अंतरराष्टÑीय मैचों में भाग लेने के लिए प्रशासन से हमें कोई सपोर्ट नहीं मिल पा रहा है। <br /><strong>-  मेधनी सैन, रामपुरा, कोटा</strong></p>
<p><strong>खेलों से नौकरी तक खुल रही राह</strong><br />हाड़ौती के खिलाड़ी अब खेलों के जरिए न सिर्फ अपना हुनर दिखा रहे हैं बल्कि सरकारी नौकरियों तक पहुंच भी बना रहे हैं। राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में कोटा के युवा लगातार हिस्सा ले रहे हैं और अपनी मेहनत व लगन से गोल्ड मेडल जीतकर शहर का नाम रोशन कर रहे हैं। सरकार की ओर से खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं ताकि वे खेल के हर स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें। खेल विभाग की ओर से खिलाड़ियों को और अधिक सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए प्रस्ताव भी सरकार को भेजा गया है। सुविधाओं का दायरा और बढ़ा रहे है ताकि खिलाड़ी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक बिखेर सकें।<br /><strong>-वाईबी सिंह, खेल विकास अधिकारी, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 25 Oct 2025 15:30:53 +0530</pubDate>
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