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                <title>Government Initiative - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Government Initiative RSS Feed</description>
                
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                <title>छात्रों के लिए राहत : हॉस्टल न मिलने पर अब किराया देगी सरकार, जून से नई योजना लागू होने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[उच्च शिक्षा ले रहे छात्रों के लिए छत्तीसगढ़ सरकार किराया सहायता योजना शुरू कर रही है। छात्रावास न मिलने पर रायपुर में ₹3000 और अन्य संभागों में ₹2500 प्रति माह दिए जाएंगे। यह सुविधा SC, ST और OBC वर्ग के विद्यार्थियों के लिए जून से लागू होगी, जिससे पढ़ाई का आर्थिक बोझ कम होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/if-relief-hostel-is-not-available-for-students-now-government/article-149823"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/vishnu-dev-sai.png" alt=""></a><br /><p>रायपुर। छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों के लिए राज्य सरकार एक महत्वपूर्ण सुविधा शुरू करने जा रही है। नई प्रस्तावित योजना के तहत ऐसे छात्रों को आर्थिक सहायता दी जाएगी, जिन्हें कॉलेज या विश्वविद्यालय के छात्रावास में स्थान नहीं मिल पाता है। सरकार द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, विद्यार्थी अब अपने शिक्षण संस्थान के नजदीक किराये के मकान में रह सकेंगे और इसके लिए उन्हें प्रतिमाह निर्धारित राशि प्रदान की जाएगी। राजधानी रायपुर में रहने वाले पात्र छात्रों को 3 हजार रुपए प्रति माह, जबकि अन्य संभागीय मुख्यालयों में अध्ययनरत छात्रों को 2500 रुपए मासिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है।</p>
<p>यह योजना विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के स्नातक एवं स्नातकोत्तर छात्रों के लिए लागू की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि इसे आगामी शैक्षणिक सत्र, जो जून से प्रारंभ होगा, से ही लागू कर दिया जाए। दरअसल, राज्य में पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में सीमित सीटों के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रवेश से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में उन्हें या तो दूरस्थ छात्रावासों में रहना पड़ता है या निजी स्तर पर महंगे किराये के मकानों का सहारा लेना पड़ता है।</p>
<p>इसी समस्या के समाधान के रूप में राज्य सरकार ने पुरानी छात्रावास व्यवस्था में बदलाव करते हुए यह नई पहल शुरू करने का निर्णय लिया है, जिससे छात्र अपने कॉलेज के पास ही रहकर बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकें और आर्थिक बोझ भी कम हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 15:39:52 +0530</pubDate>
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                <title>भारत जेन एआई के तहत सभी 22 भाषाओं के टेक्सट के मॉडल इस माह कर लिये जाएंगे तैयार: सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[भारत जेन एआई के तहत 15 भारतीय भाषाओं के टेक्स्ट मॉडल पूरे, शेष भाषाओं का काम माह के अंत तक पूरा होगा, सरकार ने राज्यसभा में बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/under-bharat-gen-ai-text-models-of-all-22-languages/article-142088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(13)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को राज्य सभा में बताया कि भारत जेन एआई माडल के तहत अब तक 15 भारतीय भाषाओं के लिए सृजनशील कृत्रिम मेधा के मॉडल में भाषाओं के टेक्स (भाषा-पाठ) संबंधी काम पूरे कर लिये गये हैं और बाकी भाषाओं के टेक्सट का काम इस माह के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।</p>
<p>विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह ने सदन में भारत जेन और एआई के क्षेत्र में सरकार की पहलों से संबंधित भाजपा के भुवनेश्वर कलिता, आम आदमी पार्टी (आप) के राघव चड्ढा और बीजद के डॉ सस्मित पात्रा आदि के अनुपूरक प्रश्नों के उत्तर में कहा कि भारत जेन सरकार के स्वामित्व में विकसित की जा रही पहल है जो अपने आप में संप्रभु भी है। इसके लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बांबे और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास को हब बनाया गया है।</p>
<p>डॉ सिंह ने कहा, भारत जेन प्रधानमंत्री द्वारा मार्च 2024 में शुरू की गयी इंडिया एआई मिशन की ही एक उत्पत्ति है यह सरकार के स्वामित्व में एक सावरेन (संप्रभु) संस्थान है। उन्होंने एक सवाल पर स्पष्ट किया कि यह सरकारी पहल जरूर है लेकिन यह अपने मामलों में स्वायत्त होने के कारण संप्रभु है। इसका डाटा इंडिया नियम और शर्तों के साथ दूसरों के साथ भी साझा किया जा सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत जेन के अंतर्गत भारतीय भाषाओं और भारतीय समाज के संदर्भों के आधार पर मल्टी लार्ज लैंग्वेज मॉडलों का विकास किया जा रहा है। इसमें आठवीं अनुसूची के अंतर्गत आनेवाली सभी भाषाओं के टेक्सट, स्पीच और विजन ( लिखित पाठ, वाणी और छवियां) पर केंद्रित जनरेटिव (सृजनशील) एमएलएल एआई मॉडल के विकास पर काम चल रहा है जिसके आधार पर उपयोग आगे आयुर्वेद, कृषि और अन्य क्षेत्रों में भारतीय भाषाओं में एआई के लोगों के उपयोग के लिए तरह तरह के एआई मॉडल विकसित किये जाएंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आगे इसमें अन्य क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों को भी शामिल करने की बात है। डॉ सिंह ने कहा,' इसमें टेक्सट, स्पीच और विजन शामिल हैं। हमने 15 भाषाओं के टेक्सट के मॉडल पर काम कर लिया है। बाकी के टेक्स का काम इस माह  कर लिया जाएगा । इस माह में 15 का स्पीज और विजन के मॉडल भी तैयार हो जएंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत जेन का मॉडल विश्व में अनूठा है। एशिया में चीन, जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया सहित छह देशों में भी मल्टी लार्ज लैंग्वेज आधारित एआई मॉडल है पर भारत जितनी भाषायी विविधता वहां नहीं है। इस मामले में भारत का मॉडल अनूठा है। उन्होंने कहा कि भारत जेन सभी हितधारकों के लिए पासा पलटने वाली प्रगति होगी।  </p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत जेन के लिए मद्रास और बांबे आईआईटी को प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र की भूमिका दी गयी है। इसके अलावा इसमें कानपुर, इंदौर, धनबाद के आईआईटी और भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलूरू सहित सात संस्थानों को अलग अलग क्षेत्रों के प्रौद्योगिकी समाधान के लिए जोड़ा गया है। इसमें आईआईटी गुवाहाटी समेत अन्य संस्थानों को भी जोड़ा जा सकता है।  </p>
<p>डॉ सिंह ने कहा ,'हम पूरी सरकार, पूरे देश को जोड़ कर चलने की सोच के साथ काम कर रहे हैं, अभी आईआईटी मद्रास और बांबे तथा सात संस्थानों को इसमें जोड़ा गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि हमने दूसरों को छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र बनाने का प्रस्ताव किया है। इसमें से चार को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सर्च पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है जिसमें उद्योगों को भी शामिल किया जा रहा है।</p>
<p>डॉ सिंह ने कहा कि एआई के विकास में उच्च क्षमता के प्रोसेसिंग यूनिटों की पर्याप्त आपूर्ति और उनकी मुनासिब दर पर उपलब्धता की जरूरत सरकार समझती है। इसीलिए इंडिया एआई मिशन में सात स्तम्भों में गणना सुविधा का एक एक अलग स्तम्भ शामिल किया गया है। उन्होंने माना कि 30 अरब, 65 अरब के मानकों  के लिए हजारों जीपीयू की जरूरत होगी। उन्होंने कहा,'हम अभी इस दिशा में काम कर रहे  हैं पर सभी चुनौतियां हमारे ध्यान में है।हमने इसे निजी क्षेत्र के लिए खोला है।'</p>
<p>उन्होंने इसी संदर्भ में अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के अनुसंधान, विकास एवं  नवाचार (आरडीआई) फंड के तहत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड की कल की बैठक में लिये गये फैसलों का जिक्र किया । इसका उद्देश्य संरचित, दीर्घकालिक वित्तपोषण के माध्यम से स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण का समर्थन कर भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। आरडीआई कोष एक लाख करोड़ रुपये का है। उन्होंने बताया कि इस कोष के अंतर्गत कल टीडीबी ने टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (टीआरएल) 4 और उससे ऊपर की परियोजनाओं की मदद करने का फैसला किया है ताकि डेवलपर अपनी प्रौद्योगिकी को व्यावहारिक स्तर पर पहुंचा सकें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 18:35:50 +0530</pubDate>
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