<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/india-tech/tag-71007" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>India Tech - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/71007/rss</link>
                <description>India Tech RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>भारत के टेक फ्यूचर की झलक ‘2NM चिप’: भारत पहली बार टेक्नोलॉजी के डिजाइन मैप पर मजबूती से उभरा, अश्विनी वैष्णव की उंगलियों के बीच दिखी 2ल्ले चिप  </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2एनएम चिप दिखाई। क्वालकॉम द्वारा भारत में डिजाइन यह उपलब्धि देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में आगे बढ़ाती है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/glimpse-of-indias-tech-future-2nm-chip-india-emerged-strongly/article-142394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)7.png" alt=""></a><br /><div>नई दिल्ली। हाल ही में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की एक तस्वीर ने भारत के तकनीकी क्षेत्र में एक नई दिशा को चिह्नित किया है, जिसमें उनकी दो उंगलियों के बीच एक छोटी सी 2 नैनोमीटर चिप को देखा जा सकता है। यह चिप भारत के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी मील का पत्थर साबित हो सकती है, खासकर तब जब इसे दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर निमार्ता कंपनियों में से एक, क्वालकॉम द्वारा बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद स्थित अपने इंजीनियरिंग केंद्रों में डिजाइन किया गया है। इस चिप के डिजाइन का सफल टेप-आउट (अंतिम डिजाइन चरण) हाल ही में घोषित किया गया है, जो भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है।</div>
<div> </div>
<div><strong>2एनएम चिप क्या है और क्यों है खास?</strong></div>
<div> </div>
<div>2एनएम चिप को नेक्स्ट-जेनरेशन सेमीकंडक्टर तकनीकी के रूप में जाना जा रहा है। यह चिप ट्रांजिस्टर डेंसिटी (ट्रांजिस्टर की संख्या) के मामले में अत्यधिक प्रभावी हैं, जिससे अधिक डेटा प्रोसेसिंग और कम ऊर्जा खपत संभव होती है। विशेष रूप से, यह चिप्स मौजूदा 5एनएम और 3एनएम चिप की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करती हैं। आधिकारिक तौर पर दावा किया जा रहा है कि 2एनएम चिप का उपयोग होने के बाद ऊर्जा खपत में 45% तक की कमी आएगी। यह चिप न केवल स्मार्टफोन्स, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (अक), इंटरनेट ऑफ थिंग्स और अन्य स्मार्ट गैजेट्स में भी इस्तेमाल हो सकती हैं। </div>
<div> </div>
<div><strong>भारत के लिए यह सफलता क्यों महत्वपूर्ण है?</strong></div>
<div> </div>
<div>क्वालकॉम द्वारा 2एनएम चिप का विकास भारत में करना एक बहुत बड़ा कदम है। भारत, जो पहले से ही वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर अग्रसर है, अब सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग में भी खुद को स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है। क्वालकॉम के अनुसार, भारत में स्थित बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई उनके लिए अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा इंजीनियरिंग टैलेंट पूल है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का मानना है कि यह भारत के डिजाइन इकोसिस्टम की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है।</div>
<div> </div>
<div><strong>इस चिप का प्रभाव</strong></div>
<div> </div>
<div>आने वाले समय में 2एनएम चिप का प्रभाव सिर्फ स्मार्टफोन्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इनका उपयोग कई अन्य क्षेत्रों में भी होगा:</div>
<div>स्मार्टफोन्स: आगामी प्रीमियम स्मार्टफोन्स में इन चिप का उपयोग किया जाएगा।</div>
<div>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (अक): एआई ऐप्लिकेशंस के लिए यह चिप बहुत कारगर साबित हो सकती हैं, क्योंकि वे बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग में मदद करती हैं।</div>
<div>इंटरनेट ऑफ थिंग्स : स्मार्ट होम डिवाइस, स्मार्ट वियरेबल्स और अन्य उपकरणों में भी इन चिप का प्रभावी उपयोग होगा।</div>
<div>ऑटोमोटिव इंडस्ट्री: स्वचालित वाहन और कनेक्टेड कारों में भी इन चिप का इस्तेमाल हो सकता है, जो इन तकनीकों को और अधिक सक्षम बनाएगा।</div>
<div>डेटा सेंटर: 2एनएम चिप की ऊर्जा दक्षता और प्रोसेसिंग स्पीड डेटा सेंटर   ऑपरेशंस को अधिक प्रभावी बनाएगी।</div>
<div> </div>
<div><strong>भारत की तकनीकी क्रांति</strong></div>
<div> </div>
<div>भारत का सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग क्षेत्र एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। क्वालकॉम जैसी कंपनियों के बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में स्थापित इंजीनियरिंग केंद्रों में इस तकनीक का विकास भारत के बढ़ते तकनीकी सामर्थ्य का प्रतीक है। भारत के पास अब विश्व स्तरीय डिजाइनिंग टैलेंट, उच्च गुणवत्ता वाली इंजीनियरिंग टीम और विशाल मैन्युफैक्चरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जो उसे वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में प्रमुख खिलाड़ी बना सकता है। अगर भारत इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करता है, तो वह न केवल अमेरिका और चीन के समकक्ष खड़ा हो सकता है, बल्कि सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में उभर सकता है।</div>
<div> </div>
<div><strong>2एनएम चिप अब तक कहाँ बन रही हैं?</strong></div>
<div> </div>
<div>2 नैनोमीटर चिप एक नई तकनीक हैं, जो सेमीकंडक्टर उद्योग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। अभी तक इस तकनीक पर काम कर रही कुछ प्रमुख कंपनियां और उनकी फैक्ट्रियां हैं, जहां यह चिप्स विकसित या निर्माण की प्रक्रिया में हैं।</div>
<div> </div>
<div>दुनिया की नंबर-1 चिप मैन्युफैक्चरर</div>
<div>लोकेशन: ताइवान</div>
<div>स्टेटस: सबसे आगे</div>
<div>उत्पादन: 2025 से</div>
<div>क्लाइंट्स लाइन में माना जा रहा है कि 18 के प्रोसेसर यहीं बनेंगे</div>
<div> </div>
<div><strong>दक्षिण कोरिया</strong></div>
<div> </div>
<div>टेक्नोलॉजी पर फोकस</div>
<div>लोकेशन: साउथ कोरिया</div>
<div>उत्पादन लक्ष्य: 2025</div>
<div> </div>
<div><strong>अमेरिका और यूरोप</strong></div>
<div> </div>
<div>अपनी 2एनएम तकनीक को 20ए / 18ए नाम से पेश कर रहा है</div>
<div> </div>
<div>लोकेशन: अमेरिका, जर्मनी, आयरलैंड</div>
<div>फोकस: हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, सर्वर और अक</div>
<div>स्टेटस: एडवांस टेस्टिंग स्टेज</div>
<div> </div>
<div><strong>अमेरिका - रिसर्च लेवल</strong></div>
<div> </div>
<div>कइट ने सबसे पहले 2ल्ले चिप का प्रोटोटाइप दिखाया</div>
<div>लोकेशन: न्यूयॉर्क रिसर्च लैब</div>
<div>उत्पादन नहीं, सिर्फ टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट</div>
<div>कइट की रिसर्च का फायदा ळरटउ और रें२४ल्लॅ को भी मिलता है</div>
<div>भारत में 2एनएम चिप कहां बन रही है?</div>
<div> </div>
<div>भारत में मैन्युफैक्चरिंग नहीं, लेकिन डिजाइन हो रहा है</div>
<div> </div>
<div>लोकेशन: बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई</div>
<div>काम: 2एनएम चिप का डिजाइन और टेप-आउट</div>
<div>मैन्युफैक्चरिंग: ताइवान या साउथ कोरिया में होगी</div>
<div>यह भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है</div>
<div>2एनएम चिप बनाना इतना मुश्किल क्यों है?</div>
<div> </div>
<div><strong>टेक्नोलॉजी चैलेंज</strong></div>
<div> </div>
<div>एक मशीन की कीमत: 1.5 लाख करोड़ से ज्यादा</div>
<div>एक फैब प्लांट की लागत: 20-25 लाख करोड़।</div>
<div> </div>
<div><strong>2एनएम चिप के निर्माण की चुनौतियां</strong></div>
<div> </div>
<div>2एनएम चिप्स का निर्माण अत्यधिक जटिल प्रक्रिया है, क्योंकि इस तकनीक में बहुत छोटे ट्रांजिस्टर होते हैं जो मौजूदा तकनीकी प्रक्रियाओं की तुलना में बहुत अधिक सटीकता और अत्याधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है। इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, जैसे कि हाई-प्रीसीजन मटेरियल और उन्नत पैटर्निंग तकनीक, चिप्स की निर्माण प्रक्रिया को और भी जटिल बनाती हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>भारत में 2एनएम चिप कब बनेगी?</strong></div>
<div> </div>
<div>भारत में अभी 2एनएम चिप नहीं बन रही, फिलहाल यह डिजाइन, टेस्टिंग में मजबूत हो रहा है</div>
<div>मैन्युफैक्चरिंग में आने में 5-7 साल लग सकते हैं।</div>
<div>अभी यह चिप केवल ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका में बन रही है।</div>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/glimpse-of-indias-tech-future-2nm-chip-india-emerged-strongly/article-142394</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/glimpse-of-indias-tech-future-2nm-chip-india-emerged-strongly/article-142394</guid>
                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:32:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/11-%28700-x-400-px%29-%28630-x-400-px%297.png"                         length="1266245"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत जेन एआई के तहत सभी 22 भाषाओं के टेक्सट के मॉडल इस माह कर लिये जाएंगे तैयार: सरकार</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[भारत जेन एआई के तहत 15 भारतीय भाषाओं के टेक्स्ट मॉडल पूरे, शेष भाषाओं का काम माह के अंत तक पूरा होगा, सरकार ने राज्यसभा में बताया।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/under-bharat-gen-ai-text-models-of-all-22-languages/article-142088"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(13)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को राज्य सभा में बताया कि भारत जेन एआई माडल के तहत अब तक 15 भारतीय भाषाओं के लिए सृजनशील कृत्रिम मेधा के मॉडल में भाषाओं के टेक्स (भाषा-पाठ) संबंधी काम पूरे कर लिये गये हैं और बाकी भाषाओं के टेक्सट का काम इस माह के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।</p>
<p>विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह ने सदन में भारत जेन और एआई के क्षेत्र में सरकार की पहलों से संबंधित भाजपा के भुवनेश्वर कलिता, आम आदमी पार्टी (आप) के राघव चड्ढा और बीजद के डॉ सस्मित पात्रा आदि के अनुपूरक प्रश्नों के उत्तर में कहा कि भारत जेन सरकार के स्वामित्व में विकसित की जा रही पहल है जो अपने आप में संप्रभु भी है। इसके लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बांबे और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास को हब बनाया गया है।</p>
<p>डॉ सिंह ने कहा, भारत जेन प्रधानमंत्री द्वारा मार्च 2024 में शुरू की गयी इंडिया एआई मिशन की ही एक उत्पत्ति है यह सरकार के स्वामित्व में एक सावरेन (संप्रभु) संस्थान है। उन्होंने एक सवाल पर स्पष्ट किया कि यह सरकारी पहल जरूर है लेकिन यह अपने मामलों में स्वायत्त होने के कारण संप्रभु है। इसका डाटा इंडिया नियम और शर्तों के साथ दूसरों के साथ भी साझा किया जा सकता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत जेन के अंतर्गत भारतीय भाषाओं और भारतीय समाज के संदर्भों के आधार पर मल्टी लार्ज लैंग्वेज मॉडलों का विकास किया जा रहा है। इसमें आठवीं अनुसूची के अंतर्गत आनेवाली सभी भाषाओं के टेक्सट, स्पीच और विजन ( लिखित पाठ, वाणी और छवियां) पर केंद्रित जनरेटिव (सृजनशील) एमएलएल एआई मॉडल के विकास पर काम चल रहा है जिसके आधार पर उपयोग आगे आयुर्वेद, कृषि और अन्य क्षेत्रों में भारतीय भाषाओं में एआई के लोगों के उपयोग के लिए तरह तरह के एआई मॉडल विकसित किये जाएंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आगे इसमें अन्य क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों को भी शामिल करने की बात है। डॉ सिंह ने कहा,' इसमें टेक्सट, स्पीच और विजन शामिल हैं। हमने 15 भाषाओं के टेक्सट के मॉडल पर काम कर लिया है। बाकी के टेक्स का काम इस माह  कर लिया जाएगा । इस माह में 15 का स्पीज और विजन के मॉडल भी तैयार हो जएंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत जेन का मॉडल विश्व में अनूठा है। एशिया में चीन, जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया सहित छह देशों में भी मल्टी लार्ज लैंग्वेज आधारित एआई मॉडल है पर भारत जितनी भाषायी विविधता वहां नहीं है। इस मामले में भारत का मॉडल अनूठा है। उन्होंने कहा कि भारत जेन सभी हितधारकों के लिए पासा पलटने वाली प्रगति होगी।  </p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत जेन के लिए मद्रास और बांबे आईआईटी को प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र की भूमिका दी गयी है। इसके अलावा इसमें कानपुर, इंदौर, धनबाद के आईआईटी और भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलूरू सहित सात संस्थानों को अलग अलग क्षेत्रों के प्रौद्योगिकी समाधान के लिए जोड़ा गया है। इसमें आईआईटी गुवाहाटी समेत अन्य संस्थानों को भी जोड़ा जा सकता है।  </p>
<p>डॉ सिंह ने कहा ,'हम पूरी सरकार, पूरे देश को जोड़ कर चलने की सोच के साथ काम कर रहे हैं, अभी आईआईटी मद्रास और बांबे तथा सात संस्थानों को इसमें जोड़ा गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि हमने दूसरों को छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र बनाने का प्रस्ताव किया है। इसमें से चार को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सर्च पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है जिसमें उद्योगों को भी शामिल किया जा रहा है।</p>
<p>डॉ सिंह ने कहा कि एआई के विकास में उच्च क्षमता के प्रोसेसिंग यूनिटों की पर्याप्त आपूर्ति और उनकी मुनासिब दर पर उपलब्धता की जरूरत सरकार समझती है। इसीलिए इंडिया एआई मिशन में सात स्तम्भों में गणना सुविधा का एक एक अलग स्तम्भ शामिल किया गया है। उन्होंने माना कि 30 अरब, 65 अरब के मानकों  के लिए हजारों जीपीयू की जरूरत होगी। उन्होंने कहा,'हम अभी इस दिशा में काम कर रहे  हैं पर सभी चुनौतियां हमारे ध्यान में है।हमने इसे निजी क्षेत्र के लिए खोला है।'</p>
<p>उन्होंने इसी संदर्भ में अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के अनुसंधान, विकास एवं  नवाचार (आरडीआई) फंड के तहत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड की कल की बैठक में लिये गये फैसलों का जिक्र किया । इसका उद्देश्य संरचित, दीर्घकालिक वित्तपोषण के माध्यम से स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण का समर्थन कर भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। आरडीआई कोष एक लाख करोड़ रुपये का है। उन्होंने बताया कि इस कोष के अंतर्गत कल टीडीबी ने टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (टीआरएल) 4 और उससे ऊपर की परियोजनाओं की मदद करने का फैसला किया है ताकि डेवलपर अपनी प्रौद्योगिकी को व्यावहारिक स्तर पर पहुंचा सकें।</p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/under-bharat-gen-ai-text-models-of-all-22-languages/article-142088</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/under-bharat-gen-ai-text-models-of-all-22-languages/article-142088</guid>
                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 18:35:50 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/11-%28700-x-400-px%29-%28630-x-400-px%29-%2813%294.png"                         length="1067186"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        