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                <title>Disarmament - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Disarmament RSS Feed</description>
                
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                <title>अमेरिका-ईरान समझौता पत्र पर सहमत: दोनों ओर से मंजूरी अभी बाकी, मौजूदा युद्धविराम 60 दिन बढ़ेगा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के लिए युद्धविराम बढ़ाने के समझौता पत्र (MoU) पर सहमति बन गई है। इस अवधि में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने के लिए आगे बातचीत होगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता की अंतिम आधिकारिक मंजूरी और हस्ताक्षर होना अभी बाकी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-iran-mou-agreed-upon-approval-from-both-sides-still-pending/article-155457"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/america-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका-ईरान के वार्ताकारों के बीच एक समझौता पत्र (एमओयू) पर सहमति बन गई है। रिपोर्टों के अनुसार, लेकिन दोनों ओर से अभी अंतिम सहमति मिलनी बाकी है। ट्रम्प प्रशासन ने इस बात की पुष्टि की है कि इस समझौते से मौजूदा युद्धविराम 60 दिन के लिए और बढ़ जाएगा। इस दौरान दोनों पक्ष ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने को लेकर बातचीत करेंगे। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अभी एमओयू पर हस्ताक्षर करने बाकी है। रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि  ट्रंप एमओयू को मंजूरी देने से पहले इस पर विचार करने के लिए कुछ दिनों का समय चाहते है। </p>
<p><strong>मसौदे को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा: ईरान</strong></p>
<p>ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने तेहरान की वार्ताकार टीम के करीबी सूत्र के हवाले से इस बात से इनकार किया है कि ईरान की तरफ इसे अंतिम मंजूरी मिली है। सूत्र ने दावा किया है कि समझौते के मसौदे को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है और मंजूरी मिलने की स्थिति में ईरान इसकी सार्वजनिक रूप से घोषणा करेगा। </p>
<p><strong>इजरायल ने साधी चुप्पी</strong></p>
<p>इजरायल ने गुरुवार के इन घटनाक्रमों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की, लेकिन चैनल 12 ने वरिष् इजरायली सूत्रों के हवाले से कहा कि उसे ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने इन शर्तों को मंजूरी दे दी है। इसलिए अभी ट्रंप के पास मंजूरी देने के लिए कुछ नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 13:21:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ट्रंप का दावा : अमेरिका हटाएगा होर्मुज जलडमरूमध्य से नाकेबंदी, ईरान के साथ कई मुद्दों पर बनी सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते के बाद नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी। समझौते के तहत ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा। वैश्विक कच्चे तेल की 20% आपूर्ति वाले इस मार्ग से समुद्री बारूदी सुरंगें भी नष्ट की जाएंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trump-claims-america-will-remove-the-blockade-from-the-strait/article-155448"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/donald-trump.jpg" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ एक प्रस्तावित समझौते पर सहमति बनने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जायेगी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में कहा कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान को अमेरिका की शर्तें स्वीकार करनी होंगी, जिनमें होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी समुद्री जहाजों की निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने कहा, “ईरान को इस बात पर सहमत होना होगा कि वह कभी भी परमाणु हथियार या परमाणु बम हासिल नहीं करेगा।”</p>
<p>ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण जलडमरूमध्य में फंसे जहाज अब अपने गंतव्य की ओर लौटने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “हमारी अभूतपूर्व नौसैनिक नाकेबंदी, जिसे अब हटाया जाएगा, के कारण जो जहाज जलडमरूमध्य में फंसे हुए थे, वे अब घर लौटने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।” उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि जलडमरूमध्य में कोई समुद्री बारूदी सुरंगें मौजूद हैं तो उन्हें तत्काल हटाया या नष्ट किया जाएगा। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी नौसेना पहले ही कई सुरंगों को अपने विशेष माइन-स्वीपर जहाजों की मदद से नष्ट कर चुकी है और शेष सुरंगों को हटाने या विस्फोट से नष्ट करने का काम ईरान करेगा।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि भूमिगत दबे संवर्धित परमाणु पदार्थ को अमेरिका, ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के समन्वय से बाहर निकाला जायेगा और नष्ट कर दिया जायेगा। उन्होंने दावा किया कि यह सामग्री 11 महीने पहले अमेरिकी बी-2 बमवर्षक विमानों द्वारा किए गए हमलों के बाद पहाड़ों के नीचे दब गयी थी। ट्रंप ने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई धनराशि का आदान-प्रदान नहीं किया जाएगा और अन्य कम महत्व के मुद्दों पर भी सहमति बन गयी है। उन्होंने बताया कि वह अंतिम निर्णय लेने के लिए व्हाइट हाउस के 'सिचुएशन रूम' में बैठक करने जा रहे हैं।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि फरवरी के अंत में शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्रीय तनाव का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। वैश्विक कच्चे तेल की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति इसी सामरिक समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है। इसके अलावा प्राकृतिक गैस, उर्वरक और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति के लिए भी यह जलमार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 11:39:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एनपीटी समीक्षा बैठक में पश्चिमी एशिया को परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र बनाने के पुराने वादे को प्राथमिकता मिलेः ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[वियना में ईरानी मिशन ने मांग की है कि आगामी एनपीटी समीक्षा सम्मेलन में पश्चिमी एशिया को परमाणु मुक्त बनाने के वादों को प्राथमिकता दी जाए। ईरान ने चेतावनी दी कि इजरायल को संधि के दायरे में लाने में 30 साल की देरी ने एनपीटी की विश्वसनीयता को कम किया है। कार्रवाई न होने पर सम्मेलन विफल हो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-old-promise-of-making-western-asia-a-nuclear-weapon/article-151230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran5.png" alt=""></a><br /><p>वियना। संयुक्त राष्ट्र के लिए ईरानी मिशन ने मंगलवार को वियना में कहा कि 2026 में होने वाले परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) समीक्षा सम्मेलन में पश्चिमी एशिया को परमाणु हथियारों से मुक्त बनाने के पुराने वादों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। एनपीटी के 191 हस्ताक्षरकर्ता देशों में से अधिकांश के प्रतिनिधि 27 अप्रैल से 22 मई तक अमेरिका के न्यूयॉर्क में बैठक के लिए एकत्र होंगे। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य परमाणु हथियारों के फैलाव को रोकना और परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।</p>
<p>ईरानी मिशन ने सोशल मीडिया पर कहा कि 1995 में पश्चिमी एशिया को लेकर जो प्रस्ताव पास हुआ था, उसे अब पूरी तरह लागू करने का समय आ गया है। इस प्रस्ताव का मकसद इस पूरे क्षेत्र को परमाणु और सामूहिक विनाश के हथियारों से मुक्त करना था। ईरान का कहना है कि इसी वादे पर इस संधि को आगे बढ़ाया गया था, इसलिए जब तक यह लक्ष्य पूरा नहीं होता, यह प्रस्ताव प्रभावी रहना चाहिए। बयान में 2000 के एनपीटी समीक्षा सम्मेलन के परिणामों का भी उल्लेख किया गया, जिसमें इजरायल से संधि में शामिल होने और अपने सभी परमाणु केंद्रों को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सुरक्षा घेरे में रखने का आग्रह किया गया था।</p>
<p>ईरान ने कहा कि पश्चिमी एशिया पर एनपीटी प्रतिबद्धताओं को लागू करने में '30 से अधिक वर्षों की अनुचित देरी' ने संधि की विश्वसनीयता को कम किया है और इसकी समीक्षा प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। मिशन ने चेतावनी देते हुए कहा, "यह अनुचित देरी रुकनी चाहिए।" मिशन ने यह भी कहा कि कार्रवाई करने में विफलता आगामी समीक्षा सम्मेलन को एक 'विफल सम्मेलन' बना देगी।<br />उल्लेखनीय है कि इजरायल परमाणु अस्पष्टता की नीति बनाए रखता है, न तो वह परमाणु हथियार होने की पुष्टि करता है और न ही इससे इनकार करता है। वह एनपीटी का सदस्य भी नहीं है।</p>
<p>हर पांच साल में आयोजित होने वाला एनपीटी समीक्षा सम्मेलन, परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के साथ-साथ परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग और निशस्त्रीकरण को बढ़ावा देने वाली संधि के कार्यान्वयन का आकलन करने के लिए सदस्य देशों को एक साथ लाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 18:25:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका और रूस के बीच न्यू स्टार्ट ट्रीटी खत्म, एंटोनियो गुटेरेस ने इस चूक को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर मुद्दा बताया</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-रूस न्यू स्टार्ट संधि समाप्त होने से वैश्विक सुरक्षा पर संकट गहराया, संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई, दोनों देशों से नए परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते संवाद करने का आग्रह किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/new-start-treaty-between-america-and-russia-ended-antonio-guterres/article-142307"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिका और रूस के बीच न्यू स्टार्ट ट्रीटी खत्म हो चुकी है, जो कि स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन को लेकर थी। इस ट्रीटी के खत्म होने से ग्लोबल सिक्योरिटी को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अमेरिका और रूस के बीच यह समझौता 2010 में साइन किया गया था और जिसे 2026 तक बढ़ाया गया था, लेकिन अब 5 फरवरी 2026 को दोनों देशों के बीच यह समझौता खत्म हो चुका है। अमेरिका और रूस के बीच न्यू स्टार्ट ट्रीटी 5 फरवरी, 2011 को लागू की गई थी। इसकी वैलिडिटी 10 साल की थी, जिससे यह समझौता 5 फरवरी 2021 को समाप्त होना था। बाद में दोनों देशों की सहमति से इसे पांच साल के लिए और बढ़ा दिया गया, जिससे अब 5 फरवरी 2026 को यह न्यू स्टार्ट ट्रीटी खत्म हो गई।</p>
<p>रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा, दोनों पक्ष अब संधि के प्रावधानों से बंधे नहीं हैं और अपने अगले कदम तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। मंत्रालय ने कहा कि रूस स्ट्रैटेजिक स्थिति को स्थिर करने के लिए राजनीतिक और राजनयिक प्रयासों के लिए खुला है। मंत्रालय ने आगे कहा, रूस को 5 फरवरी को संधि की समाप्ति के बाद न्यूक्लियर हथियारों की सीमा पर स्वैच्छिक रोक बढ़ाने के रूसी पहल पर संयुक्त राज्य अमेरिका से कोई औपचारिक आधिकारिक जवाब नहीं मिला है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने जनवरी 2026 में कहा था कि वह इस ट्रीटी के खत्म होने को लेकर टेंशन में नहीं है। ट्रंप ने उम्मीद भी जताई थी कि दोनों पक्ष एक नए समझौते पर पहुंचेंगे।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस चूक को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि यह इतने लंबे समय में पहली बार है कि दोनों देशों के स्ट्रैटेजिक न्यूक्लियर हथियारों पर कोई रोक नहीं है, जिनके पास मिलकर दुनिया के अधिकांश न्यूक्लियर हथियार हैं।</p>
<p>गुटेरेस ने दोनों देशों से बातचीत की मेज पर लौटने और जोखिमों को कम करने और सत्यापन योग्य सीमाओं को बहाल करने के लिए एक उत्तराधिकारी ढांचा बनाने का आग्रह किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 09:52:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>इजरायल की मांग के बावजूद अपने हथियार नहीं डालेंगे फिलिस्तीन के विरोधी गुट, इजरायली पीएम ने दोहराई हमास के निरस्त्रीकरण की बात</title>
                                    <description><![CDATA[इजरायल की चेतावनी के बावजूद फिलिस्तीनी विरोधी गुटों ने हथियार न छोड़ने का फैसला किया। पीआईजे ने कहा, सभी गुट इस पर एकमत हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/despite-israels-demand-palestines-opposition-groups-will-not-lay-down/article-142089"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(14)4.png" alt=""></a><br /><p>गाजा। फिलिस्तीन के विरोधी गुटों ने इजरायल की मांग के बावजूद अपने हथियार अपने पास रखने का फैसला किया है। फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (पीआईजे) ने बुधवार को यह जानकारी देते कहा सभी विरोधी गुटों के बीच सहमति है कि वे फिलिस्तीनी लोगों के हथियार अपने पास ही रखेंगे। </p>
<p>पीआईजे के उप-महासचिव मोहम्मद अल-हिन्दी ने एक बयान में कहा, विरोधी गुटों के बीच आम सहमति है कि हम फिलिस्तीनी लोगों के हथियार अपने पास रखेंगे। हमने इन हथियारों के इस्तेमाल के संबंध में मध्यस्थों के साथ अपना लचीलापन साझा किया है।</p>
<p>पीआईजी के इस बयान से पहले इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने गाजा में एक बार फिर सैन्य कार्रवाई करने का अंदेशा देते हुए कहा था कि अगर हमास अपने हथियार नहीं छोड़ता, तो वे उसे खत्म करेंगे। </p>
<p>इससे पूर्व, इजरायल के प्रधानमंत्री बेन्जमिन नेतन्याहू ने अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात के दौरान हमास के निरस्त्रीकरण की बात दोहराई थी और कहा था कि गाजा के पुनर्निर्माण से पहले युद्ध के उद्देश्यों को पूरा किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि पीआईजे गाजा का दूसरा सबसे बड़ा सैन्य समूह है। इससे पहले हमास भी कह चुका है कि अगर इजरायल अपना कब्जा खत्म कर देता है तो वह भी अपने हथियार डाल देगा। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 18:35:48 +0530</pubDate>
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