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                <title>Voting Day - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>तमिलनाडु चुनाव: रिकॉर्ड 4,618 उम्मीदवार मैदान में, टीवीके 234 सीटों पर आजमा रही किस्मत, 23 अप्रैल को होंगे चुनाव</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु की 234 सीटों पर 4,618 उम्मीदवार किस्मत आजमाएंगे। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और विपक्षी नेता पलानीस्वामी के बीच कड़ा मुकाबला है। अभिनेता विजय की नई पार्टी और सीमन की एनटीके ने इस बार चुनाव को पांच कोणीय और रोमांचक बना दिया है, जिससे राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/tamil-nadu-election-record-4618-candidates-in-the-fray-tvk/article-149864"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/tvk.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल को होने वाले चुनावों में अब कुल 4,618 उम्मीदवार मैदान में हैं। गुरूवार को नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद यह आंकड़ा सामने आया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को नामांकन वापस लेने की समय सीमा समाप्त होने तक रिकॉर्ड 7,599 नामांकन (6,216 पुरुष और 1,380 महिलाएं) दाखिल किए गए थे। इनमें से 4,618 नामांकन स्वीकार किए गए, 2,640 खारिज कर दिए गए और 521 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए हैं। वर्तमान में आयोग द्वारा 911 नामांकनों को 'प्रतिस्पर्धी' के रूप में वर्गीकृत किया गया है और आंकड़ों को अपडेट करने की प्रक्रिया जारी है।</p>
<p>वर्ष 2006 के बाद के पिछले पांच विधानसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि नाम वापसी के बाद मैदान में रहने वाले उम्मीदवारों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। 2006 में 2,586 उम्मीदवार, 2011 में 2,748 उम्मीदवार, 2016 में 3,776 उम्मीदवार और 2021 में 3,998 उम्मीदवार मैदान में थे। इसी प्रवृत्ति के अनुरूप इस बार यह संख्या बढ़कर 4,618 हो गई है, जिनमें अधिकांश निर्दलीय हैं। सीटों के बंटवारे, निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान, उम्मीदवारों के नाम तय करने, नामांकन दाखिल करने, जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अब मंच चार मुख्य मोर्चों के बीच मुकाबले के लिए तैयार है। चारों प्रमुख मोर्चों के नेताओं ने मतदाताओं को लुभाने के लिए राज्य के हर जिले और कोने-कोने में अपना सघन प्रचार अभियान शुरू कर दिया है।</p>
<p>सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के नेतृत्व वाला 'सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस' सत्ता बरकरार रखने और अपनी 'द्रविड़ियन मॉडल 2.0' सरकार बनाने के लिए उत्सुक है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद इस गठबंधन की मजबूती के आधार पर फिर से जीत का दावा कर रहे हैं। दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के लिए यह उनके 53 साल के राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी परीक्षा है। पार्टी एम.जी.आर. और जयललिता जैसे करिश्माई नेताओं की कमी महसूस कर रही है, लेकिन एक मजबूत गठबंधन के जरिए वह पिछले चुनावी नुकसान को पीछे छोड़ने की कोशिश में है।</p>
<p>चुनावी मैदान में दो अन्य खिलाड़ी भी हैं। अभिनेता विजय की नवगठित पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके), जो पहली बार सभी 234 सीटों पर किस्मत आजमा रही है तथा सीमन के नेतृत्व वाली नाम तमिलर काच्ची (एनटीके), जो हमेशा की तरह अकेले चुनाव लड़ रही है। इसके अलावा, निष्कासित अन्नाद्रमुक नेता वी.के. शशिकला और पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके) संस्थापक डॉ. रामदास के नए मोर्चे की मौजूदगी से यह मुकाबला पांच कोणीय हो गया है।</p>
<p>मैदान में मौजूद प्रमुख चेहरों में एम.के. स्टालिन (कोलाथुर), उनके बेटे और उप-मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन (चेपॉक-तिरुवल्लिकेनी), अन्नाद्रमुक से बाहर किए गए और अब द्रमुक में शामिल हो चुके पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम (बोडिनायक्कनूर), देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कषगम (डीएमडीके) महासचिव प्रेमलता विजयकांत (वृद्धाचलम) और पलानीस्वामी (इडप्पडी) शामिल हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन (सातुर), केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन (अविनाशी आरक्षित), पूर्व राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन (मायलापुर) और वनथी श्रीनिवासन (कोयंबटूर उत्तर) चुनाव लड़ रहे हैं। द्रमुक के दिग्गज नेता दुरईमुरुगन काटपाडी सीट से रिकॉर्ड 13वीं बार मैदान में हैं। अभिनेता विजय दो सीटों चेन्नई की पेरम्बूर और तिरुचि पूर्व से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि सीमन शिवगंगा जिले की कराईकुडी सीट से मैदान में हैं।</p>
<p>द्रमुक इस बार खुद 164 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि गठबंधन सहयोगियों के 12 उम्मीदवार उसके 'उगते सूरज' के निशान पर चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे कुल संख्या 176 हो गई है। बाकी 58 सीटों पर सहयोगी दल अपने प्रतीकों पर लड़ रहे हैं। अन्नाद्रमुक गठबंधन में मुख्य पार्टी 167 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि भाजपा, पीएमके और एएमएमके सहित अन्य सहयोगियों को 67 सीटें दी गई हैं। एम.के. स्टालिन अपने गढ़ कोलाथुर से लगातार चौथी बार जीत की उम्मीद कर रहे हैं। वह 1984 से लगातार 10वीं बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। चुनावी तस्वीर साफ होने के साथ ही राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कई जिलों में बढ़ती गर्मी के बावजूद नेताओं ने अपना प्रचार अभियान और तेज कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 18:05:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पुड्डुचेरी विधानसभा चुनाव : द्रमुक नेता आर.शिवा का दावा-जनता सरकार बदलने के लिए कर रही मतदान, राज्य को बदलाव की जरूरत</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता आर. शिवा ने मतदान के बाद दावा किया कि पुडुचेरी की जनता बदलाव के लिए वोट कर रही है। उन्होंने शत-प्रतिशत मतदान की अपील करते हुए कहा कि एम.के. स्टालिन के प्रचार से राज्य में लहर बदली है। द्रमुक ने पूर्ण राज्य के दर्जे और धर्मनिरपेक्ष गठबंधन की भारी जीत का विश्वास जताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/puducherry-assembly-elections-dmk-leader-arshiva-claims-people-are/article-149767"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/dmk-r-shiva.png" alt=""></a><br /><p>पुड्डुचेरी। पुड्डुचेरी विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के प्रदेश संयोजक आर. शिवा ने गुरुवार को कहा कि यहां की जनता सरकार बदलने के लिए मतदान कर रही है। आर.शिवा ने अपना वोट डालने के बाद पत्रकारों से कहा कि लोगों को अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभाते हुए शत-प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करना चाहिए। द्रमुक नेता ने कहा कि पुड्डुचेरी को बदलाव की जरूरत है और उसी बदलाव के लिए लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए बड़ी संख्या में बाहर निकल रहे हैं। </p>
<p>उन्होंने भरोसा जताया कि धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गठबंधन (एसडीएफ), जिसमें द्रमुक एक भागीदार है, निश्चित रूप से यहां सत्ता में आएगा। शिवा ने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन द्वारा किये गये चुनाव प्रचार ने लोगों की मानसिकता में एक बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने कहा कि संसद में द्रमुक सांसद पुड्डुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए आवाज उठा रहे हैं और स्टालिन भी लगातार इसकी मांग कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 17:38:24 +0530</pubDate>
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                <title>केरल विधानसभा चुनाव : सीएम पिनाराई विजयन ने की मतदाताओं से वोट डालने की अपील, एलडीएफ की जीत का किया दावा</title>
                                    <description><![CDATA[केरल की 140 सीटों पर मतदान शुरू होते ही मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने कन्नूर में अपना वोट डाला। उन्होंने एलडीएफ की वापसी का विश्वास जताते हुए मतदाताओं को भ्रामक प्रचार से बचने की सलाह दी। राज्य में कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान जारी है, जहां एलडीएफ और यूडीएफ के बीच कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/in-kerala-cm-pinarayi-vijayan-appealed-to-the-voters-to/article-149698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/vijayan.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। केरल में 140 विधानसभा सीटों के लिए मतदान शुरू होने के साथ ही मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और सत्ताधारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के अन्य नेता सुबह-सुबह जल्दी मतदान केंद्रों पर पहुंचे और वोट डाला। सीएम विजयन ने मतदाताओं को गलत प्रचार के प्रति सावधान करते हुए विश्वास जताया कि एलडीएफ को शासन का एक और कार्यकाल मिलेगा। सत्ताधारी माकपा के कई वरिष्ठ नेता केरल भर के मतदान केंद्रों पर जल्दी पहुंचे, जिससे मतदान के लिए माहौल तैयार हुआ। माकपा नेताओं ने मतदाताओं से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की।</p>
<p>सुबह 7 बजे मतदान शुरू होने के तुरंत बाद कन्नूर जिले के धर्मदम निर्वाचन क्षेत्र में वोट डालने वाले पहले लोगों में श्री विजयन भी शामिल थे। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए मतदाताओं को 'गलत जानकारी' के प्रति सावधान किया और विश्वास जताया कि 'सत्ताधारी एलडीएफ को शासन का एक और कार्यकाल मिलेगा।" वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने कन्नूर में जल्दी ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जबकि माकपा के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने भी उसी जिले में अपना वोट डाला, जो पार्टी का एक प्रमुख गढ़ बना हुआ है।</p>
<p>पूरे राज्य में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ और शुरुआती घंटों में मतदाताओं की अच्छी-खासी भागीदारी देखने को मिली। दिन की शुरुआत में ही माकपा के शीर्ष नेताओं की सक्रिय भागीदारी को एक रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जिसका मकसद मतदाताओं को लामबंद करना है। यह चुनाव सत्ताधारी एलडीएफ और विपक्षी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के बीच एक कड़े मुकाबले के तौर पर देखा जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 14:33:56 +0530</pubDate>
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                <title>राहुल-प्रियंका का पुड्डुचेरी दौरा आज : तीन चुनावी रैलियों को करेंगे संबोधित, केंद्र के बयान पर कांग्रेस का हमला</title>
                                    <description><![CDATA[पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के आखिरी दौर में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अमित शाह ने पूरी ताकत झोंक दी है। 'इंडिया' गठबंधन के पक्ष में कांग्रेस दिग्गजों ने हुंकार भरी, तो दूसरी ओर शाह NDA की सत्ता बरकरार रखने के लिए चेन्नई पहुंचे। 9 अप्रैल के मतदान से पहले चुनावी सरगर्मी और सुरक्षा व्यवस्था चरम पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rahul-priyanka-visits-puducherry-today-will-address-three-election-rallies/article-149240"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/rahul-priyanka.png" alt=""></a><br /><p>चेन्नई। केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी में चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी सोमवार को यहां पहुंचे। इसके बाद दोनों नेता नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों के प्रचार के लिए पुड्डुचेरी रवाना हो गये। हवाई अड्डे पर तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस समिति (टीएनसीसी) के वरिष्ठ नेताओं ने उनका स्वागत किया। इसके बाद दोनों नेता कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'इंडिया' गठबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करने के लिए विमान से पुड्डुचेरी के लिए रवाना हुए।</p>
<p>इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी केरल से चेन्नई पहुंचने की संभावना है। यहां से वह सत्तारूढ़ अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (अन्ना द्रमुक) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवारों के लिए वोट मांगने पुड्डुचेरी जायेंगे। गौरतलब है कि राजग पुड्डुचेरी में सत्ता बरकरार रखते हुए लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने की कोशिश में है। शीर्ष नेताओं के पुड्डुचेरी दौरे को देखते हुए चुनावी सरगर्मी तेज हो गयी है, क्योंकि केंद्र शासित प्रदेश में प्रचार समाप्त होने में केवल एक दिन बचा है। चुनावी राज्य तमिलनाडु और पुड्डुचेरी में राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेताओं के आगमन के मद्देनजर हवाई अड्डे पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी है।</p>
<p>प्राप्त जानकारी के अनुसार अमित शाह के अपराह्न करीब 3:00 बजे कोच्चि से यहां पहुंचने की उम्मीद है। यहां से हेलीकॉप्टर से वे पुड्डुचेरी के लिए उड़ान भरेंगे। शाह पुड्डुचेरी से वापस चेन्नई लौटेंगे। उनके दिल्ली लौटने से पहले तमिलनाडु के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं के साथ चुनावी रणनीतियों पर चर्चा करने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 14:06:58 +0530</pubDate>
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                <title>केरल चुनावों पर संकट के बादल : 9 अप्रैल गरज के साथ तूफान की चेतावनी; मतदान प्रतिशत को लेकर राजनीतिक दलों में बढ़ी चिंता, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट  </title>
                                    <description><![CDATA[केरल में 9 अप्रैल को होने वाले मतदान पर खराब मौसम का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग ने भारी बारिश, बिजली कड़कने और तेज हवाओं का 'येलो अलर्ट' जारी किया है। राजनीतिक दलों को चिंता है कि प्रतिकूल मौसम के कारण मतदान प्रतिशत गिर सकता है। प्रशासन ने मतदाताओं को सतर्क रहने और चुनावी प्रक्रिया में बाधा कम करने के निर्देश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/clouds-of-crisis-over-kerala-elections-april-9-warning-of/article-149255"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/kerala-weather.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। केरल में आगामी नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से कुछ ही दिन पहले प्रतिकूल मौसम के पूर्वानुमान ने मतदान की संभावनाओं पर असर डाला है। राजनीतिक दलों ने चिंता जताई है कि गरज के साथ और छिटपुट बारिश पूरे राज्य में मतदाता प्रतिशत प्रभावित कर सकता है। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने एक विस्तृत चेतावनी जारी की है जिसमें बताया गया है कि पांच और छह अप्रैल को केरल में अलग-अलग स्थानों पर बिजली कड़कने और 40-50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं चलने की प्रबल अनुमान है। मौसम का यह अनिश्चित स्वरूप सात और आठ अप्रैल को भी जारी रहने की उम्मीद है, जिसमें 30-40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।</p>
<p>महत्वपूर्ण बात यह है कि मतदान के दिन नौ अप्रैल को भी मौसम विभाग ने एक या दो स्थानों पर बिजली कड़कने के साथ गरज के साथ बारिश का पूर्वानुमान जताया है। इससे संकेत मिलता है कि भले ही व्यापक रूप से भारी बारिश न हो लेकिन स्थानीय स्तर पर मौसम का व्यवधान कुछ क्षेत्रों में मतदाताओं की आवाजाही और मतदान प्रतिशत में बाधा डाल सकता है। मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की है, जिसमें पांच और छह अप्रैल को अलग-अलग स्थानों पर 24 घंटों के भीतर सात सेंटीमीटर से 11 सेंटीमीटर तक बारिश होने की पूर्वानुमान है। इन दोनों दिनों के लिए पतनमतिट्टा, इडुक्की, पलक्कड़ और मलप्पुरम जिलों में 'येलो अलर्ट' घोषित किया गया है, जो भारी बारिश के अनुमान के कारण सामान्य जीवन और चुनाव पूर्व की व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं।</p>
<p>मौजूदा अनुमान के मुताबिक हालोकि नौ अप्रैल तक बारिश की तीव्रता कम हो सकती है, फिर भी राजनीतिक दल सतर्क हैं। मतदान के दिन हल्की-फुल्की बारिश, गरज-चमक या बिजली गिरने की चेतावनी भी मतदाताओं के उत्साह में खलल डाल सकती हे, खासकर ग्रामीण, तटीय और पहाड़ी इलाकों में, जहां पहले से ही पहुंच एक चुनौती है। विभिन्न दलों के चुनावी रणनीतिकार मौसम के ताजा विवरणों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि केरल के इस कड़े मुकाबले वाले चुनाव में मतदान का प्रतिशत एक निर्णायक कारक माना जाता है। पिछले अनुभवों ने दिखाया है कि प्रतिकूल मौसम की स्थिति—भले ही वह स्थानीय स्तर पर हो-मतदाताओं की भागीदारी के रुझानों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है।</p>
<p>इस बीच अधिकारियों ने जनता से गरज के साथ बारिश या तूफान आने के दौरान सावधानी बरतने का आग्रह किया है, विशेष रूप से बिजली गिरने और तेज हवाओं से बचने और आधिकारिक सूचनाओं के साथ अपडेट रहने को कहा है। चुनाव अधिकारियों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे मौसम संबंधी किसी भी व्यवधान के बावजूद सुचारू मतदान सुनिश्चित करने के लिए तत्पर रहें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Apr 2026 13:27:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस ने असम के लिए सात उम्मीदवारों की अंतिम सूची की जारी, 9 अप्रैल को मतदान</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनाव के लिए अपने 7 उम्मीदवारों की पांचवीं और अंतिम सूची जारी कर दी है। पार्टी अब तक 101 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है, जबकि 15 सीटें सहयोगियों के लिए छोड़ी गई हैं। 9 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए गोसाईगांव और बिजनी जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर कड़ा मुकाबला तय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-releases-final-list-of-seven-candidates-for-assam-voting/article-147627"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(6)10.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनावों के लिए अपनी पांचवीं और अंतिम सूची में सात उम्मीदवारों की घोषणा की। पार्टी ने असम विधानसभा की 126 सीटों में से 101 के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा रविवार को जारी बयान में कहा गया, कांग्रेस के केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) की ओर से असम विधानसभा चुनावों के लिए अंतिम सूची में घोषित उम्मीदवारों में गोसाईगांव सीट से जोसेफ हस्दा, डाटमा-एसटी से बिरखांग बोरो, बिजनी से रजत कांती साहा और भेरगांव सीट से अंचुला ग्वारा डाइमरी शामिल हैं।</p>
<p><strong>असम में 9 अप्रैल को चुनाव</strong></p>
<p>पार्टी ने माजबट से नारायण अधिकारी, हाफलोंग-एसटी से निर्मल लांगथासा और कटिगोरा विधानसभा क्षेत्र से अमरचंद जैन को उम्मीदवार घोषित किया है। कांग्रेस ने शुक्रवार को अपनी चौथी सूची में सात उम्मीदवारों की घोषणा की थी। छह-पार्टी गठबंधन का हिस्सा कांग्रेस ने पहले ही घोषणा की थी कि वह अपने सहयोगियों के लिए 15 सीटें छोड़ेगी। कांग्रेस 2016 से पूर्वोत्तर राज्य में सत्ता से बाहर है, जबकि भाजपा-नेतृत्व वाली सरकार तीसरे कार्यकाल की ओर देख रही है। 126 सदस्यीय असम विधानसभा के चुनाव 9 अप्रैल को होंगे। मतों की गिनती 4 मई को की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 10:57:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केरल विधानसभा चुनाव : 140 सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदान; बदल सकते हैं सियासी समीकरण, चंद्रशेखर-विजयन और सतीशन में होगा मुकाबला</title>
                                    <description><![CDATA[केरल की 140 सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होगा। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन जहां जीत की हैट्रिक लगाकर इतिहास रचना चाहते हैं, वहीं वी.डी. सतीशन के नेतृत्व में कांग्रेस और राजीव चंद्रशेखर के साथ भाजपा ने घेराबंदी तेज कर दी है। क्या एलडीएफ अपना किला बचा पाएगी या सत्ता का समीकरण फिर बदलेगा?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/kerala-assembly-elections-voting-for-140-seats-can-change-on/article-147004"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/kerala-election-2026.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केरल में हर बार सत्ता का समीकरण बदलता है, लेकिन पिछले चुनाव में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) ने पारंपरिक प्रवृत्ति को तोड़ दिया और पिनाराई विजयन ने लगातार दूसरी बार केरल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। भारत निर्वाचन आयोग ने बीते दिन रविवार को केरल विधानसभा चुनाव 2026 की तारीख का ऐलान कर दिया है। केरल में 140 सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदान होगा।</p>
<p><strong>केरल में किसकी बनेगी सत्ता?</strong></p>
<p>केरल में इस बार के विधानसभा चुनाव पर हर किसी की निगाहें टिकी हैं। इस बार के चुनाव में सीएम पिनाराई विजयन जीत की हैट्रिक लगा सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी केरल विधानसभा चुनाव में कमल खिलाना चाहेगी। वहीं वी डी सतीशन की अगुवाई में कांग्रेस मजबूती के साथ चुनाव लड़ने वाली है।</p>
<p><strong>पिनाराई विजयन लगाएंगे जीत की हैट्रिक?</strong></p>
<p>केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन 81 वर्ष की उम्र में भी केरल में सबसे ताकतवर व्यक्ति बने हुए हैं। पिनाराई विजयन की छवि राजनीतिक लड़ाइयों में एक लड़ाके के तौर पर रही है। सीएम विजयन ने लंबे समय से एक ऐसे फैसले लेने वाले एडमिनिस्ट्रेटर की छवि बनाई है जो राजनीतिक लड़ाई में कामयाब साबित होता रहा है। विजयन की लीडरशिप में, एलडीएफ ने 2021 में सरकार बनाकर इतिहास रच दिया था। यह एक ऐसी कामयाबी थी, जिसने केरल में बारी-बारी से सरकार बदलने के लंबे समय से चले आ रहे पैटर्न को तोड़ दिया। कन्नूर से आने वाले विजयन 1980 के दशक में सीपीएम में तेजी से आगे बढ़े। </p>
<p>शुरूआत में उनकी मदद कम्युनिस्ट वी एस अच्युतानंदन ने की, हालांकि बाद में दोनों एक लंबे आइडियोलॉजिकल और पॉलिटिकल टकराव में कट्टर दुश्मन बन गए। सीएम विजयन को डेवलपमेंट और प्रैक्टिकल काम करने वाले के तौर पर देखा जाता है। विजयन को कई बार विवादों का भी सामना करना पड़ा है, जिसमें लंबे समय से चल रहा एसएनसी लवलिन केस भी शामिल है। यह एक ऐसा मामला है जो उनके शानदार पॉलिटिकल करियर पर छाया बना हुआ है।</p>
<p><strong>वी डी सतीशन खोलेंगे कांग्रेस की किस्मत?</strong></p>
<p>कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की नजरें केरल विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं। वी डी सतीशन विपक्ष के नेता हैं और सत्ताधारी एलडीएफ के खिलाफ पार्टी की सबसे मजबूत आवाज भी हैं। सतीशन ने 2001 में असेंबली में आने से पहले कांग्रेस के युवा और ऑगेर्नाइजेशनल रैंक से अपनी पॉलिटिकल यात्रा शुरू की। वी डी सतीशन दो दशकों में राज्य के सबसे साफ बोलने वाले विधायकों में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। उनके भाषणों में पब्लिक फाइनेंस और गवर्नेंस से लेकर एनवायरनमेंटल पॉलिसी और इंस्टीट्यूशनल अकाउंटेबिलिटी जैसे मुद्दों पर बात होती है। सतीशन ने कांग्रेस के जमीनी नेटवर्क को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया है।</p>
<p>साथ ही पार्टी के अंदर लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी को संभालने की कोशिश भी की है। विपक्ष के नेता का पद संभालने के बाद से, सतीशन ने खुद को एलडीएफ सरकार का सबसे लगातार आलोचक बना लिया है। अब उनके सामने सबसे बड़ा टेस्ट है, विपक्ष की लड़ाकू राजनीति को जमी हुई लेफ्ट सरकार के खिलाफ एक मजबूत चुनावी चुनौती में बदलना।</p>
<p><strong>राजीव चंद्रशेखर ने बढ़ाई बीजेपी की उम्मीदें</strong></p>
<p>केरल में बीजेपी का चेहरा होने के नाते राजीव चंद्रशेखर ने राज्य में एलडीएफ और यूडीएफ के बीच मजबूत बाइपोलर मुकाबले के लिए पार्टी को एक भरोसेमंद विकल्प के तौर पर खड़ा करने का मुश्किल काम किया है। चंद्रशेखर की चुनौती अपने चुनाव क्षेत्र में चुनावी लड़ाई जीतने से कहीं ज्यादा है। पिछले लोकसभा चुनावों में एनडीए ने बेहतर प्रदर्शन किया था। बीजेपी लीडरशिप को उम्मीद है कि इस बार के विधानसभा चुनावों में भी पार्टी मजबूत प्रदर्शन करेगी। चंद्रशेखर का शुरूआती पॉलिटिकल करियर ज्यादातर राज्य के बाहर ही रहा। बीजेपी में उन्होंने राष्ट्रीय प्रवक्ता और केरल के जाने-माने स्ट्रेटजिस्ट के तौर पर काम किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 11:32:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जेन-Z के विद्रोह से बैलेट तक, नेपाल में आज आम चुनाव: युवा लहर जीतेगी या दिग्गज नेता, नेपाल चुनाव से पहले पूर्व पीएम केपी ओली का बड़ा बयान </title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल में आज 5 मार्च को ऐतिहासिक मतदान हो रहा है, जहां 1.9 करोड़ मतदाता नई सरकार चुनेंगे। इस बार 40% युवा उम्मीदवार पुरानी राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली और युवा नेता बालेन शाह के बीच झापा-5 में दिलचस्प टक्कर है। मिश्रित चुनावी प्रणाली के कारण परिणाम आने में एक माह का समय लग सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/from-the-rebellion-of-gen-z-to-the-ballot-whether-the/article-145307"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/nepal.png" alt=""></a><br /><p>नेपाल। नेपाल के इतिहास में पहली बार डिजिटल पीढ़ी सीधे तौर पर सत्ता की चाबी अपने हाथ में लेने को तैयार है। 5 मार्च को होने वाले मतदान में देश के 1.9 करोड़ मतदाता अपने भविष्य का फैसला करेंगे, इनमें करीब 10 लाख नए युवा वोटर शामिल हैं। भ्रष्टाचार, कुप्रशासन और संरक्षण-प्रधान अर्थव्यवस्था के खिलाफ पिछले साल सितंबर में युवाओं के दो दिवसीय प्रदर्शनों ने 77 लोगों की जान ले ली, जिसमें पहले ही दिन पुलिस फायरिंग में 19 युवाओं की मौत हो गई। यह चुनाव निर्धारित समय से दो साल पहले हो रहा है और इसे नेपाल की पुरानी राजनीतिक व्यवस्था को तोड़ने का सुनहरा मौका माना जा रहा है। नेपाल की 3 करोड़ आबादी के बीच बदलाव की हवा भरने को तैयार हैं। युवा आंदोलन की मांगें अब पूरे समाज में गूंज रही हैं। </p>
<p><strong>यह चुनाव अलग क्यों है?</strong></p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, यह चुनाव पिछले सितंबर में जेन-जेड आंदोलन का सीधा नतीजा है, जब युवाओं ने 8 सितंबर को सड़कों पर उतरकर पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ बगावत की। आज वही युवा प्रदर्शनकारी सड़कों को छोड़कर चुनावी मैदान में हैं। 77 मौतों के बाद सरकार ने समय से पहले चुनाव का ऐलान किया, ताकि युवाओं की मांगों को लागू करने का रास्ता बने। इस बार 40% से अधिक उम्मीदवार 35 वर्ष से कम आयु के हैं, जो नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। दिलचस्प मुकाबला झापा-5 सीट पर देखने को मिल रहा है, जहां 74 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के सामने 35 वर्षीय रैपर और काठमांडू के पूर्व मेयर बालेंद्र शाह (बालेन) खड़े हैं। बालेन शाह आज नेपाल के युवाओं के लिए बदलाव का प्रतीक बन चुके हैं।</p>
<p><strong>नेपाल में कैसे डाले जाते हैं चुनाव</strong></p>
<p>मतदाता दो बैलट पेपर डालेंगे: एक फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट सिस्टम के तहत व्यक्तिगत उम्मीदवार के लिए, और दूसरा प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन (ढफ) के तहत पार्टी के लिए। कुल 275 सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में 165 सीटें से और 110 ढफ से भरी जाएंगी।</p>
<p><strong>क्या होगा परिणाम?</strong></p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है। जहां नेपाली कांग्रेस और यूएमएल जैसे पुराने दल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (फरढ) जैसी नई ताकतें तेजी से उभर रही हैं। 138 सीटें हासिल करने वाली पार्टी अकेले सरकार बना सकती है। यदि कोई भी दल 138 सीटों का जादुई आंकड़ा नहीं छू पाता तो नेपाल एक बार फिर गठबंधन सरकार के दौर में जा सकता है। इस बार 67 पार्टियां और 3,405 उम्मीदवार मैदान में हैं, जो गिनती को जटिल बनाएगा। इस बार जेन जेड की वजह से युवा टर्नआउट निर्णायक होगा। आरएसपी को वोटर फटीग से फायदा हो सकता है। लोग पुरानी पार्टियों को सबक सिखाने के लिए नई पार्टी चुन सकते हैं।</p>
<p><strong>मतगणना में एक महीना लग सकता है</strong></p>
<p>जटिल बैलट और सैकड़ों उम्मीदवारों के कारण वोट गिनती धीमी होगी। रिजल्ट्स क्षेत्रवार आना शुरू होंगे, लेकिन ढफ के लिए राष्ट्रव्यापी टैली जरूरी। पूर्ण परिणाम घोषित होने में एक महीना लग सकता है।</p>
<p><strong>मतदाता और चुनाव प्रक्रिया</strong></p>
<p>इस चुनाव में मतदान के पात्र लोगों की संख्या लगभग 19 मिलियन है। ये मतदाता संसद के 275 सदस्यों का चुनाव करेंगे। नेपाल में मिश्रित चुनावी प्रणाली लागू है। यह प्रणाली देश के 2015 के संविधान में शामिल की गई थी। इस प्रणाली में, संसद के कुल 275 सदस्यों में से 165 का चुनाव फर्स्ट पास्ट द पोस्ट (ऋढळढ) प्रणाली के माध्यम से होता है, जिसमें सबसे अधिक वोट पाने वाला उम्मीदवार जीतता है। शेष 110 सदस्यों के लिए, आनुपातिक प्रतिनिधित्व (ढफ) प्रणाली के माध्यम से विजेता का चुनाव होता है।  </p>
<p><strong>कितने उम्मीदवार</strong></p>
<p>इस चुनाव में 3,400 से अधिक उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें से 1,000 से अधिक उम्मीदवार 40 वर्ष से कम आयु के हैं। मतदान स्थानीय समयानुसार सुबह 7:00 बजे शुरू होगा और 5 मार्च को शाम 5:00 बजे तक चलेगा, हालांकि दूरदराज के क्षेत्रों में मतदान केंद्र आवश्यकता पड़ने पर बाद तक खुले रह सकते हैं। मिश्रित प्रणाली के कारण किसी एक पार्टी के लिए स्पष्ट बहुमत हासिल करना मुश्किल हो जाता है, और गठबंधन सरकारें बनने की संभावना रहती है।</p>
<p><strong>भारत और चीन को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा नहीं करेंगे</strong></p>
<p>नेपाल में चुनाव से पहले पूर्व प्रधानमंत्री और सीपीएन (यूएमएल) चेयरपर्सन केपी शर्मा ओली ने भारत को लेकर बड़ा बयान दिया है। चार बार के प्रधानमंत्री रहे ओली ने कहा कि वह भारत और चीन दोनों से अच्छे रिश्ते चाहते हैं। पिछले साल हुए जेन-जेड आंदोलन को उन्होंने नेपाल को अस्थिर करने की कोशिश बताया, जिसमें विदेशी शक्तियां शामिल थीं। उन्होंने यह भी कहा कि जेन-जेड के विरोध प्रदर्शन को आपराधिक तत्वों ने हाईजैक कर लिया था।</p>
<p>एक इंटरव्यू में केपी शर्मा ओली ने कहा कि जेन-जेड आंदोलन एक विध्वंस था जिसने राष्ट्रीय सम्मति को नष्ट किया। ओली ने कहा कि इसमें छात्रों को ड्रेस में शामिल किया गया था, जो कि अवैध था। हमने नियम बनाया था कि स्कूली बच्चों को आंदोलन में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद वहां स्कूल यूनिफॉर्म में बच्चों को बुलाया गया था। ओली ने आगे कहा कि छात्र अपनी मांगें रखकर चले गए थे लेकिन उसके बाद प्रदर्शन को हाईजैक कर लिया गया। आंदोलन क्रिमिनल एलीमेंट के हाथ में चला गया।</p>
<p><strong>नेपाल चुनाव में विदेशी फंडिंग पर दिया जवाब</strong></p>
<p>जब उनसे पूछा गया कि क्या विदेशी ताकतें चुनाव में फंड कर रही हैं और बाहर से प्रेशर बनाया जा रहा है, तो उन्होंने कहा कि ऐसी अफवाहें हैं लेकिन मेरे पास ठोस प्रमाण नहीं है। ओली ने कहा कि जब तक ठोस प्रमाण नहीं होता, तब तक मैं कुछ नहीं कह सकता। लेकिन कहा जाता है कि बिना आग के धुआं नहीं होता। भारत और चीन के साथ रिश्तों पर ओली ने कहा कि हम दोनों के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं। एक ताकत को दूसरी के खिलाफ नहीं खड़ा करेंगे। उन्होंने कहा कि हम आपके पड़ोसियों भारत और चीन के साथ ईमानदार रिश्ते चाहते हैं। हम अपने देश का इस्तेमाल किसी पड़ोसी के खिलाफ नहीं होने देंगे। पूर्व नेपाली प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें पीढ़ी दर पीढ़ी यही रहना है। पड़ोसी भी यहीं रहेंगे और हम भी यहीं रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 10:56:39 +0530</pubDate>
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                <title>ढाका: 8 फरवरी को में तारिक रहमान बीएनपी की अंतिम चुनावी रैली को करेंगे संबोधित, वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रुहुल कबीर रिजवी ने दी जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[बांग्लादेश में चुनाव प्रचार अंतिम चरण में है। बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान 8 फरवरी को ढाका में पार्टी की अंतिम चुनावी रैली को संबोधित करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/tariq-rahman-will-address-the-last-election-rally-of-bnp/article-142138"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है, ऐसे में बंगलादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान आठ फरवरी को ढाका के नयापल्टन इलाके में पार्टी की अंतिम चुनावी रैली को संबोधित करेंगे। यह रैली दोपहर दो बजे शुरू होने वाली है, जिसमें रहमान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। बीएनपी के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रुहुल कबीर रिजवी ने गुरुवार को पार्टी के नयापल्टन केंद्रीय कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों को यह जानकारी दी।</p>
<p>रिजवी ने कहा कि कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और ढाका और आसपास के निर्वाचन क्षेत्रों से बीएनपी के उम्मीदवार रैली में शामिल होंगे। उन्होंने आगे कहा कि बीएनपी ऐतिहासिक रूप से जनता के समर्थन से सत्ता में आई है और दावा किया कि पार्टी गंभीर दमन के बावजूद लचीली बनी रही है।</p>
<p>रिजवी ने कहा कि बीएनपी हमेशा जनता के जनादेश से सत्ता में आई है और पार्टी ने वर्षों के दमन को सहा है, फिर भी वह दृढ़ता से खड़ी रही है। शांतिपूर्ण चुनावी माहौल के प्रति आशावाद व्यक्त करते हुए रिजवी ने कहा कि मतदाताओं को स्वतंत्र रूप से और बिना किसी भय के अपने मताधिकार का प्रयोग करने की उम्मीद है।</p>
<p>पार्टी के चुनाव चिन्ह का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, देश की जनता धान की बाली को महज एक प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि एक भावना के रूप में देखती है। इसी भावना से प्रेरित होकर लोग 12 फरवरी को अपना वोट डालेंगे। इस रैली में भारी भीड़ एकत्रित होने की उम्मीद है और यह चुनाव से पहले राजधानी में बीएनपी का अंतिम बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 12:29:44 +0530</pubDate>
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