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                <title>तेल का खेल भूल अब तीर्थयात्रा से नगदी कमाने में जुटा सऊदी</title>
                                    <description><![CDATA[रियाद। सऊदी अरब तेल ने तेल के जरिए अपने खजाने में खरबों डॉलर जोड़े हैं। इसके बावजूद सऊदी सरकार को यह आशंका है कि यह एक ऐसा संसाधन है जो किसी दिन समाप्त हो जाएगा। यही कारण है कि यह अमीर देश अब कमाई के वैकल्पिक साधनों की तरफ ध्यान केंद्रित कर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/forgetting-the-game-of-oil--now-saudi-is-busy-earning-cash-from-pilgrimage/article-13889"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/d-12.jpg" alt=""></a><br /><p>रियाद। सऊदी अरब तेल ने तेल के जरिए अपने खजाने में खरबों डॉलर जोड़े हैं। इसके बावजूद सऊदी सरकार को यह आशंका है कि यह एक ऐसा संसाधन है जो किसी दिन समाप्त हो जाएगा। यही कारण है कि यह अमीर देश अब कमाई के वैकल्पिक साधनों की तरफ ध्यान केंद्रित कर रहा है। मौजूदा समय में तेल की उच्च कीमतों के बावजूद सऊदी अरब यह जानता है कि दुनिया वैकल्पिक ऊर्जा की ओर तेजी से मुड़ रही है। ऐसे में सऊदी प्रशासन ने भविष्य के लिए राजस्व के अपने स्रोतों में विविधता लाने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की है। उन स्रोतों में से एक तीर्थयात्रा है, जिस पर पूरी तरह से सऊदी अरब का एकाधिकार है। इस्लाम के दो सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थल मक्का और मदीना सऊदी अरब में हैं और दुनियाभर के करी दो अरब मुसलमान अपनी पूरी जिंदगी में एक न एक बार इन दोनों जगहों की यात्रा जरूर करना चाहते हैं।<br /><br /><strong>2015 में सऊदी ने लॉन्च किया मिशन तीर्थयात्रा</strong><br />2015 में किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज के सत्ता में आने के तुरंत बाद सऊदी अरब ने मक्का में ग्रैंड मस्जिद का विस्तार करने के लिए 21 बिलियन डॉलर की परियोजना शुरू की थी। इसके जरिए मस्जिद में 300000 अतिरिक्त श्रद्धालुओं को समायोजित किया जाना था। इसके एक साल बाद तत्कालीन डिप्टी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने तीर्थयात्रा को 2030 तक सऊदी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की योजना के एक प्रमुख घटक के रूप में पहचान दी। बहरीन के डेरासैट थिंक टैंक के डॉयरेक्टर आॅफ रिसर्च उमर अल-उबैदली ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र के विपरीत हज और उमराह के क्षेत्र में सऊदी अरब को एकाधिकार प्राप्त है।<br /><br /><strong>10 लाख मुसलमानों की अगवानी करेगा सऊदी</strong><br />कोविड -19 प्रतिबंधों के कारण दो साल के अंतराल के बाद वार्षिक हज यात्रा करने के लिए दुनिया भर के मुसलमान इस सऊदी अरब पहुंचना शुरू हो गए हैं। यह मुसलमानों के लिए जीवन भर के धार्मिक दायित्व को पूरा करने का अवसर है, लेकिन साथ ही सऊदी अरब के पवित्र शहरों की अर्थव्यवस्था को हैवी बूस्ट मिलने का मौका भी है। कोरोना महामारी के कारण 2020 में सिर्फ सऊदी अरब के 1000 तीर्थ यात्रियों ने ही हज किया था, लेकिन 2021 में यह बढ़कर लगभग 60,000 हो गई थी। लेकिन, इस साल सऊदी ने हज के लिए अपने दरवाजे पूरी तरह से खोल दिए हैं। ऐसा अनुमान है कि इस साल 10 लाख मुसलमान अलग-अलग देशों से सऊदी अरब पहुंचेंगे।<br /><br /><strong>सऊदी के खजाने की चाबी बनेंगे मक्का-मदीना</strong><br />विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं। सऊदी अरब हर दिन अरबों डॉलर का तेल बेचता है। वहीं, तीर्थयात्रा से होने वाला आर्थिक लाभ तेल की तुलना में बहुत कम है। लेकिन, यह ऐसा क्षेत्र है, जो आने वाले दिनों में सऊदी अरब के खजाने को भरने की चाबी बन सकता है। वॉशिंगटन में अरब गल्फ स्टेट्स इंस्टीट्यूट के सीनियर स्कॉलर रॉबर्ट मोगिएलनिकी ने कहा कि सऊदी अरब में धार्मिक पर्यटन आने वाले कई दशकों तक तेल और गैस से होने वाली कमाई का मुकाबला नहीं कर सकता है। लेकिन, मक्का और मदीना का धार्मिक महत्व कभी भी खत्म नहीं होगा। ऐसे में ये दोनों शहर सऊदी पर्यटन क्षेत्र के निर्माण और स्थानीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं को खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।<br /><br /><br /><strong>तीर्थयात्रा से हर साल अरबों डॉलर कमा रहा सऊदी</strong><br />लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में एसोसिएट प्रोफेसर स्टीफन हर्टोग ने बताया कि हज के जरिए सऊदी अरब के पर्यटन के क्षेत्र में विकास की अनगिनत संभावनाएं हैं। तीर्थयात्रियों को अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा करने या मनोरंजन के लिए आकर्षित किया जा सकता है। उमराह के दौरान भी तीर्थयात्रियों को आकर्षित कर पर्यटन के बाजार को और मजबूत और साल भर प्रॉफिट देने वाला बनाया जा सकता है।  2018 में मक्का ने पर्यटकों के जरिए 20 बिलियन डॉलर का ट्रांजेक्शन किया था। यहां आंकड़ा दुबई के बाद दूसरे नंबर पर है। सऊदी अरब का तीर्थयात्रा राजस्व औसतन लगभग 30 बिलियन डॉलर प्रति वर्ष था। तब 2022 तक सउदी के लिए 100,000 रोजगार पैदा करने का अनुमान लगाया गया था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महामारी से पहले हर साल 10-दिवसीय हज और उमराह तीर्थयात्रा के दौरान सऊदी अरब में 2 करोड़ 10 लाख तीर्थयात्री हर साल पहुंचते थे। महामारी के दौरान तीर्थयात्रियों की संख्या में काफी कमी आई है, लेकिन सरकार 2030 तक हर साल 3 करोड़ तीर्थयात्रियों को आकर्षित करने की प्लानिंग कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Jul 2022 13:29:11 +0530</pubDate>
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                <title>पढ़ाई में मशगूल हुए बालक, छूटी रही मोबाइल की लत</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा समेत प्रदेशभर में सरकारी और निजी स्कूल खुुल जाने से बालक पढ़ाई में मशगूल हो गए हैं। ऐसे में उनकी मोबाइल की लत छूट रही है। बालकों को तो राहत मिली है। साथ में अभिभावकों की भी चिंता कम हो गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/children-engaged-in-studies--left-mobile-addiction/article-6765"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/image01.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा समेत प्रदेशभर में सरकारी और निजी स्कूल खुुल जाने से बालक पढ़ाई में मशगूल हो गए हैं। ऐसे में उनकी मोबाइल की लत छूट रही है। बालकों को तो राहत मिली है। साथ में अभिभावकों की भी चिंता कम हो गई है। पूर्व में कोविड के चलते स्कूल बंद हो गए थे। ऐसे में ऑनलाइन कक्षाएं संचालित हो रही थी। बालक घंटों तक मोबाइल में व्यस्त रहते थे। इसमें कमी हो गई है। हालांकि, कुछ बालक अभी व्यस्त रह रहे हैं। लेकिन, इनकी संख्या कम है। एक्सपर्ट का कहना है कि पहले पूरे समय बालक घर पर फ्री रहते थे। ऑनलाइन पढ़ाई का कारण बताकर मोबाइल और कंप्यूटर लेकर बैठ जाते थे। इसमें अब कमी हो गई है। क्योंकि, बालक को प्रतिदिन पांच से छह घंटे जाकर पढ़ाई करनी होती है। यहां ऑफलाइन कक्षाओं में टाइम व्यतीत करना होता है, जिसके चलते समय नहीं मिलता है। यहां तक घर पर जाने के बाद भी होम वर्क करना होता है। इसमें भी काफी समय देना होता है। इस तरह से ऑफलाइन कक्षाओं से बालकों को काफी लाभ हुआ है।<br /><br /><strong>बालकों को ये हुए फायदे</strong><br />1. ज्ञान की अभिवृद्धि: ऑनलाइन कक्षाओं से कुछ बालकों में मोबाइल की लत लग गई थी। पढ़ाई का समय नहीं दे पा रहे थे। ऑफलाइन कक्षाओं से ज्ञान की अभिवृद्धि हो गई है।<br />2. मनोस्थिति में सुधार: अधिकांश बालक घंटों तक मोबाइल पर व्यस्त रहते थे। इससे उनकी मानसिक स्थिति पर असर पड़ रहा था। स्वभाव चिड़चिड़ा हो गया था। लोगों से अलग हो गए थे। लड़ाई झगड़ा करते थे। ऐसे में अभिभावक परेशान थे।<br />3. आंखों को फायदा: मोबाइल और कंप्यूटर की लत से आंखों पर विपरित असर पड़ रहा था। इसमें राहत मिली है। क्योंकि, इसका समय पहले से कम हो गया है। <br /><br /><strong>95 फीसदी तक उपस्थिति</strong><br />स्कूलों में हाजिरी 95 फीसदी से अधिक पहुंच गई है लेकिन कुछ बच्चों में अभी भी असुरक्षा की भावना, कुछ मानसिक तनाव से ग्रसित हैं। बच्चों के भावनात्मक व्यवहार और सोच में भी कोरोना के चलते बदलाव आया है।  कोरोना के कारण दो सालों तक घर बैठकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी अब धीरे-धीरे स्कूल के माहौल में ढलने लगे हैं। अक्सर मोबाइल से चिपके रहने की आदत भी बच्चों से छूटने लगी है। हालांकि, विद्यार्थियों को स्कूल के नियमों और अनुशासन में ढलने में मुश्किल हो रही है लेकिन शिक्षक इसमें उनकी मदद कर रहे हैं। गौरतलब है कि फरवरी में कक्षा एक से 12वीं तक के स्कूलों में ऑफलाइन कक्षाएं प्रारंभ हो गई थी।<br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />अभी पूरी तरह लत तो नहीं छूट रही है, लेकिन ये कम हो गई है। क्योंकि, बालक स्कूलों में अधिकांश समय व्यतीत कर रहे हैं। अभिभावक और शिक्षक और भी प्रयास करें।<br /><strong>- डॉ. ज्योति सिडाना, सहायक आचार्य, समाजशास्त्र, राजकीय कला कन्या महाविद्यालय</strong><br /><br />स्कूल खुलने से बालकों को तनाव से राहत मिली है। उनकी मनोस्थिति में और भी सुधार होगा। उनकी मोबाइल और अन्य लत भी कम हो जाएगी।<br /><strong>- डॉ. मिथलेश खींची, असिस्टेंट प्रोफेसर, मनोचिकित्सा, मेडिकल कॉलेज</strong><br /><br />सभी कक्षाओं में ऑफलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है। बोर्ड कक्षाओं की तो परीक्षाएं भी हो रही है। ऑफलाइन से काफी लाभ तो मिलता ही है।<br /><strong>- प्रदीप चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी</strong><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Mar 2022 15:29:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title> मंहगाई को लेकर सरकार पर राहुल की दो पंक्ति कविता </title>
                                    <description><![CDATA[राहुल गांधी ने ट्वीट किया राजा करे महल की तैयारी, प्रजा बेचारी महंगाई की मारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/former-congress-president-rahul-gandhi--in-a-two-line-poem-on-inflation---took-a-jibe-at-the-government--saying-that-it-is-busy-building-a-palace-of-prosperity-for-itself-and-the-public-is-suffering-from-inflation/article-6762"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/rahul-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल से लेकर खाद्य पदार्थों तक में महंगाई साफ नजर आ रही है। बढ़ती कीमतों और महंगाई से देश में कोई चीज पहुंच से बाहर नही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने महंगाई को लेकर दो पंक्ति की कविता में सरकार पर शनिवार को  तीखा तंज करते हुए कहा कि वह अपने लिए खुशहाली का महल बनाने में जुटी है  और जनता महंगाई की मार से त्रस्त है।</p>
<p><br />गांधी ने ट्वीट किया राजा करे महल की तैयारी, प्रजा बेचारी महंगाई की मारी। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया के कुछ ट्वीट को उद्धृत किया है जिनमें कहा गया है कि पेट्रोल डीजल की कीमतें आउट ऑफ कंट्रोल हो गई हैं और पांच दिन में इनकी दर 3.20 रुपये प्रति लीटर बढ़ी है जबकि घरेलू सिलेंडर गैस की कीमत 50 रुपये तक महँगी हो गई है।</p>
<p>इसके साथ ही उन्होंने मीडिया के कुछ ट्वीट को उद्धृत किया है जिनमें कहा गया है कि पेट्रोल डीजल की कीमतें आउट ऑफ कंट्रोल हो गई है और पांच दिन में इनकी दर 3.20 रुपये प्रति लीटर बढ़ी है जबकि घरेलू सिलेंडर गैस की कीमत 50 रुपये तक महंगी हो गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Mar 2022 13:33:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>हरीश चौधरी को पंजाब-चडीगढ़ कांग्रेस प्रभारी की बड़ी जिम्मेदारी मिली, राह नहीं आसान</title>
                                    <description><![CDATA[तत्काल प्रभाव से उनका कार्यकाल शुरू हो गया है।  उत्तराखंड में आगामी चुनाव को लेकर व्यस्त हरीश रावत को पंजाब की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%B6-%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AC-%E0%A4%9A%E0%A4%A1%E0%A5%80%E0%A4%97%E0%A4%A2%E0%A4%BC-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%80--%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%86%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8/article-1834"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/1111.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली।गहलोत सरकार में राजस्व मंत्री हरीश चौधरी को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। आलाकमान ने हरीश चौधरी पर विश्वास जताते हुए उन्हें पंजाब और चंडीगढ़ का कांग्रेस प्रभारी नियुक्त किया है। तत्काल प्रभाव से उनका कार्यकाल शुरू हो गया है।  उत्तराखंड में आगामी चुनाव को लेकर व्यस्त हरीश रावत को पंजाब की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है।   पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने इस पर हरीश चौधरी को बधाई और शुभकामनाएं भी दी है।<br /> <br /> <br /> हालांकि राहुल गांधी के करीबी राजस्थान के मंत्री हरीश चौधरी के लिए राह आसान नहीं होने वाली है। राहुल गांधी के करीबी बताए जाने वाले हरीश चौधरी को यह जिम्मेदारी ऐसे समय पर दी गई है जब पंजाब में कांग्रेस पार्टी आंतरिक कलह से जूझ रही है। कैप्टन अमरिंदर सिंह से टकराव के बाद प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए नवजोत सिंह सिद्धू नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से भी नाराज बताए जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Oct 2021 15:50:59 +0530</pubDate>
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