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                <title> User Charge - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>यूजर चार्ज ने उजाड़ीं राजस्थान की मंडियां : जटिल नियमों के विरोध में व्यापारियों ने खोला मोर्चा, व्यापार बचाने के लिए एमनेस्टी योजना की उठी मांग</title>
                                    <description><![CDATA[यूजर चार्ज और जटिल नियमों के विरोध में व्यापारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के चेयरमैन बाबूलाल गुप्ता ने कहा कि शुल्क से मंडियां खाली हो रही हैं। संघ ने एमनेस्टी योजना, मंडी सेस विरोध, जीएसटी नियमों में राहत और कृषि व्यापार को बचाने के लिए सरकार से त्वरित निर्णय की मांग की।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/user-charge-ravages-rajasthans-mandis-demand-for-amnesty-scheme-raised/article-142283"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)21.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान की कृषि मंडियों में लागू ‘यूजर चार्ज’ और जटिल नियमों के विरोध में व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के चेयरमैन बाबूलाल गुप्ता ने चेतावनी दी है कि यूजर चार्ज लागू होने के बाद गैर-अधिसूचित कृषि जिंसों के व्यापारियों ने मंडियों से पलायन शुरू कर दिया है, जिससे मंडियां वीरान होने के कगार पर हैं।</p>
<p><strong>बाहर पलायन कर रहा मंडी का व्यापार :</strong></p>
<p>चेयरमैन बाबूलाल गुप्ता के अनुसार, यूजर चार्ज के कारण व्यापारी मंडी परिसर छोड़कर बाहर व्यापार करने को मजबूर हैं। इसका सीधा असर आम जनता और किसानों पर पड़ रहा है। मंडियों में पशु आहार, दाल, चावल, तेल और मसालों की उपलब्धता कम हो गई है। किसान जो अपनी फसल बेचकर वहीं से जरूरत का सामान खरीदते थे, अब उन्हें परेशानी हो रही है। साथ ही, शहरों में आम जनता को भी रियायती दरों पर सामान मिलना बंद हो गया है क्योंकि व्यापार अब मंडियों से बाहर शिफ्ट हो रहा है।</p>
<p><strong>एमनेस्टी योजना और ब्याज माफी की मांग :</strong></p>
<p>वैट (VAT): बकाया वैट पर ब्याज और पेनल्टी माफ करने के लिए एमनेस्टी योजना लाई जाए।<br />भूखंड आवंटन: कृषि मंडियों में भूखंडों की बकाया राशि पर भी ब्याज-पेनल्टी माफी योजना शुरू हो।<br />स्टाम्प ड्यूटी: स्टाम्प ड्यूटी पर ब्याज माफी की राहत दी जाए।</p>
<p><strong>रॉ मटेरियल पर मंडी सेस का विरोध :</strong></p>
<p>राजस्थान की दाल, तेल और आटा मिलों को अपनी क्षमता के अनुसार चलाने के लिए 60-70% कच्चा माल दूसरे राज्यों से मंगाना पड़ता है। व्यापारियों का कहना है कि जो माल दूसरे प्रांत में टैक्स चुका चुका है, उस पर राजस्थान में दोबारा मंडी सेस मांगना गलत है। रिप्स (RIPS) के तहत मिलने वाली छूट सभी तरह की खरीद पर प्रभावी होनी चाहिए, न कि केवल स्थानीय मंडी से खरीद की शर्त पर।</p>
<p><strong>GST नियमों के सरलीकरण का सुझाव :</strong></p>
<p>संघ ने जीएसटी (GST) और ई-इनवॉइसिंग के नियमों में बदलाव की वकालत की है:<br />ब्याज दर: जीएसटी में देरी पर ब्याज दर 18% से घटाकर 6% की जाए।<br />ई-वे बिल: ई-वे बिल की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये की जाए।<br />ई-इनवॉइस: गलती सुधारने या कैंसिल करने की समय सीमा बढ़ाकर 30 दिन की जाए।<br />छूट: पुराने वर्षों की 1 लाख रुपये तक की सालाना डिमांड को राइट-ऑफ (माफ) किया जाए।</p>
<p><strong>व्यापारियों की अन्य प्रमुख मांगें :</strong></p>
<p>सभी कृषि जिंसों पर मंडी सेस की दर एक समान (1%) की जाए।<br />नाम परिवर्तन शुल्क को 2.5-5% से घटाकर मात्र 50 पैसे प्रति सैकड़ा किया जाए।<br />किराये की दुकानों को 25% डीएलसी (DLC) दर पर मालिकाना हक दिया जाए।<br />व्यापार मंडलों को कार्यालय के लिए 20% डीएलसी दर पर भूमि आवंटित हो।<br />धनिया पर मंडी टैक्स घटाकर 50 पैसे प्रति सैकड़ा किया जाए।<br />सरसों और सोयाबीन की पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को बीज और बिजली पर 50% सब्सिडी दी जाए।<br />व्यापार संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि यदि समय रहते ये कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश का राजस्व और मंडी व्यवस्था दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 17:24:25 +0530</pubDate>
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