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                <title>हाड़ौती की उपज से मुनाफा कमा रहा गुजरात, धनिया प्रोसेसिंग यूनिट नहीं होने से किसानों को नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[ हाड़ौती की भूमि में उत्पादित होने वाला धनिया देश ही नहीं विदेशियों की भी पहली पसंद बना हुआ है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/gujarat-is-earning-profit-from-hadoti-s-produce/article-111758"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(2)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती की भूमि में उत्पादित होने वाला धनिया देश ही नहीं विदेशियों की भी पहली पसंद बना हुआ है। खाड़ी देशों सहित अन्य देशों में यहां के धनिये की काफी डिमांड है, लेकिन विडंबना यह है कि हाड़ौती की उपज का जो मुनाफा हमारे किसानों को मिलना चाहिए वो कमाई गुजरात के व्यापारी कर रहे हैं। कोटा व बारां जिले में धनिया की सबसे उच्च क्वालिटी वाली पैदावार होती है। इसके बावजूद यहां के किसानों को क्वालिटी के हिसाब से दाम नहीं मिल पाता है। इसका कारण यह है कि हाड़ौती में धनिया की प्रोसेसिंग यूनिट नहीं हैं। जिससे यहां के किसानों से खरीदा गया धनिया गुजरात जाता है। वहां प्रोसेसिंग यूनिट में गुणवतापूर्ण करने के बाद विदेशों में भेजा जाता है। इससे गुजरात के व्यापारियों को ज्यादा मुनाफा होता है। </p>
<p><strong>यहां प्रोसेसिंग यूनिट व एफपीओ की दरकार</strong><br />स्थानीय किसानों को पर्याप्त प्रोत्साहन व आवश्यक संसाधनों की कमी के कारण वे अपनी उपज पर ज्यादा कमाई नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें उचित भाव नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।  किसानों का कहना है कि जिले में दो-तीन प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने के साथ फार्मर प्रोड्यूसर ऑगेर्नाइजेशन (एफपीओ) बना दिए जाएं तो हमारा जिला धनिया का हब बन सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर धनिया का निर्यात संभव होगा व रोजगार के अवसर पैदा होंगे। वर्तमान में इस फसल से जुड़े किसानों के लिए फार्मर प्रोड्यूसर आॅर्गेनाइजेशन बनाने की दरकार है। 40-50 किसानों का एक एफपीओ बनाकर उसका पंजीकरण करवाना होता है, जिस पर केंद्र सरकार की निगरानी रहती है। इससे हाड़ौती धनिया का हब बन सकता है।</p>
<p><strong>यहां का धनिया इसलिए है खास</strong><br />धनिया के व्यापारी मोहित जैन ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में पैदा होने वाले धनिया की अलग-अलग क्वालिटी है। जिसमें सबसे ज्यादा ग्रेवी हाड़ौती संभाग की जमीन से पैदा होने वाले धनिया में निकलती है। यहां का धनिया बड़े आकार का होने के बावजूद उसका वजन कम होता है और उसमें खुशबू भी अच्छी होती है। खुशबू मालवा के खेतों से आने वाले धनिया में भी देखने को मिलती है, लेकिन उसके दाने के आकार में अंतर आता है। गुजरात में पैदा होने वाले धनिया में खुशबू नहीं होती है। इस कारण उसकी बाजार दर कम होने से हाड़ौती के धनिये को मिक्स करके बेचा जाता है। इससे वहां कें व्यापारियों को ज्यादा कमाई होती है।</p>
<p><strong>विदेशों में लग चुकी प्रोसेसिंग इकाइयां</strong><br />धनिया निर्यातक मुकेश गुप्ता के अनुसार विदेशों में मांसाहारी सब्जियों का सेवन ज्यादा होता है। जिसकी दुर्गंध को समाप्त करके खुशबू देने के लिहाज से उसमें सबसे ज्यादा धनिया डाला जाता है। धनिया सुगंध के साथ पाचन क्रिया में फायदेमंद होता है। जिसके कारण उसकी मांग निरंतर बढ़ रही है। विदेशों में धनिया पाउडर का प्रचलन है। कुछ मसाला कंपनियों ने तो विदेशों में अपनी प्रोसेसिंग इकाइयां तक लगाई हुई है। इसके माध्यम से वह हाड़ौती के धनिये का पाउडर बनाती है और इसके बाद बाद महंगे दामों में उसकी बिक्री करते हैं। यहां का धनिया विदेशी कंपनियों को अच्छा मुनाफा कमा कर दे रहा है।</p>
<p><strong>मंडी में धनिया के भाव (रुपए प्रति क्विं)</strong><br />- धनिया बादामी 5800 से 6600<br />- धनिया ईगल  6700 से 7100<br />- धनिया रंगदार 7100 से 10500</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />सरकार को हाड़ौती में प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करनी चाहिए। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होगी व उसका उचित भाव मिलेगा। जिले में  प्रोसेसिंग की सुविधा हो तो ज्यादा मुनाफा हो सकता है। वहीं ज्यादा किसान यह फसल उगाने के लिए प्रोत्साहित होंगे<br /><strong>- मथुराप्रसाद, किसान</strong></p>
<p>हाड़ौती के धनिये की विदेशों में काफी डिमांड रहती है। इस फसल में पानी की ज्यादा जरूरत नहीं होती है। इस कारण असिंचित भूमि वाले किसान भी इसकी खेती के प्रति रुझान दिखा रहे हैं। प्रोसेसिंग यूनिट का मामला राज्य सरकार के स्तर का है। <br /><strong>- नंदबिहारी मालव, उपनिदेशक, उद्यान विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Apr 2025 14:59:39 +0530</pubDate>
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                <title>AU Small Finance Bank: मुनाफा 42 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 571 करोड़ रुपए तक पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के एमडी और सीईओ संजय अग्रवाल ने कहा कि वित्तीय वर्ष के पहले छह महीनों में लगातार महंगाई दर और अगस्त में असामान्य रूप से भारी बारिश के कारण व्यापारिक गति में कुछ अस्थिरता रही।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/au-small-finance-bank-profit-reaches-rs-571-crore-with/article-93798"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/au-bank.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने अपनी बैठक में 30 सितंबर 2024 को समाप्त तिमाही और छमाही के वित्तीय परिणामों को मंजूरी दी।</p>
<p><strong>कार्यकारी सारांश:<br /></strong> पिछले 6 महीनों में संचालन चुनौतीपूर्ण रहा है, जिसमें लंबी चुनावी प्रक्रिया, Q1 में गर्मी की लहर और Q2 में भारी बारिश ने नीतिगत प्रक्रियाओं और व्यवसायिक गतिविधियों को प्रभावित किया। हाल के सप्ताहों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी के संकेत दिखे हैं और बैंक को अगली छमाही (H2) में बेहतर परिचालन माहौल की उम्मीद है।</p>
<p>Q2'FY25 में बैंक ने अपने जमा आधार को 1,09,693 करोड़ रुपये तक बढ़ाया, जिसमें QoQ 12.7 प्रतिशत  और YTD 12.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि फंड की लागत को अनुकूलित करने पर जोर दिया गया। बैंक की CoF में तिमाही दर तिमाही  1 bps की वृद्धि हुई और यह Q2'FY25 में 7.04 प्रतिशत रही। बैंक का NIM Q1'FY 25 के 6.0 प्रतिशत से बढ़कर Q2'FY25 में 6.1 प्रतिशत हो गया। यील्ड 14.4 प्रतिशत पर स्थिर रही, और लोन पोर्टफोलियो में तिमाही दर तिमाही 5.3 प्रतिशत और YTD 8.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।</p>
<p>एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के एमडी और सीईओ संजय अग्रवाल ने कहा कि वित्तीय वर्ष के पहले छह महीनों में लगातार महंगाई दर, आम चुनाव, विभिन्न राज्यों के चुनाव, गर्मी की लहर और अगस्त में असामान्य रूप से भारी बारिश के कारण व्यापारिक गति में कुछ अस्थिरता रही। हालांकि, पिछले 3-4 हफ्तों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी के शुरुआती संकेत दिखे हैं और हमें विश्वास है कि अगली छमाही में परिचालन का माहौल बेहतर होगा, क्योंकि उपभोक्ता विश्वास, ग्रामीण मांग और निजी निवेश में बढ़ोतरी हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Oct 2024 18:26:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रिवर फ्रंट की दुकानों को लीज पर देने की तैयारी </title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा अध्यक्ष के निर्देश के बाद अधिकारियों ने इस संबंध में कार्यवाही शुरु कर दी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/preparation-to-lease-the-shops-of-river-front/article-90868"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(9)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चम्बल नदी के किनारे बनाए गए विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल पर अब आय बढ़ाने के लिए कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा यहां की दुकानों को लीज पर देने की तैयारी की जा रही है। जिससे केडीए को हर महीने करीब  करोड़ रुपए से अधिक की आय हो सकेगी। कांग्रेस सरकार के समय में रिवर फ्रंट का निर्माण कराया गया था। जिसका उद्घाटन विधानसभा चुनाव की आचार संहिता से पहले 12 सितम्बर 2023 को किया गया था। उस समय जल्दबाजी में शुरु करने के कारण यहां प्रवेश टिकट की सुविधा तो शुरु कर दी गई थी। लेकिन दुकानों को पूरी तरह से शुरू नहीं किया जा सका था। इसका कारण दुकानों के आवंटन प्रक्रिया में देरी होना व दुकानदारों द्वारा दुकानें आवंटन करवाने के बाद भी शुरू नहीं करना रहा था। हालांकि एक कारण उस समय इसका मामला एनजीटी में विचाराधीन होना भी बताया जा रहा था। लेकिन अब एनजीटी से इसे क्लीन चिट मिल गई है। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद अब इससे संबंधित विवाद भी समाप्त हो गए हैं। लेकिन हालत यह है कि उद्घाटन के एक साल बाद भी यहां अभी तक पूरी तरह से दुकानों का आवंटन व शुरुआत नहीं हो सकी है। जिससे यहां पर्यटन तो आ रहे हैं लेकिन उन्हें खाने-पीने व खरीदारी की सुविधा नहीं मिल पा रही है। </p>
<p><strong>185 दुकानें हैं रिवर फ्रंट पर</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट के दोनों छोर पर कुल 185 दुकानें बनाई गई है। उन दुकानों को रेस्टोरेंट समेत अन्य उपयोग के लिए बनाया गया है। करीब 1 लाख 75 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में इन दुकानों का निर्माण किया गया है। लेकिन वर्तमान में उनमें से मात्र आधा दर्जन से अधिक ही दुकानें संचालित हो रही है। जबकि अधिकतर बंद हैं। आवंटन के बाद भी दुकानदार उन्हें शुरू नहीं कर रहे हैं। ऐसे में केडीए की ओर से उनका आवंटन निरस्त कर उनका नए सिरे से आवंटन किया जाना है। सूत्रों के अनुसार केडीए का प्रयास है कि इन दुकानों को अलग-अलग आवंटित करने के  स्थान पर एक ही कम्पनी को लीज पर दे दिया जाए तो वही अपने हिसाब से उन दुकानों का सचालन करेगी। जिससे दुकानों के लिए निर्धारित की गई प्रति वर्ग फीट 59 रुपए के हिसाब से 185 दुकानों को लीज पर देने से केडीए को हर महीने करीब 1 करोड़ 3 लाख 25 हजार रुपए की आय होगी। </p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था प्रकाशित</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट पर केडीए को आय से अधिक करीब दो गुना खर्चा करना पड़ रहा है। इस संबंध में दैनिक नवज्योति ने समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें इस स्थिति को बयां किया था। दैनिक नवज्योति में 6 सितम्बर पेज दो पर आमदनी अठन्नी, खर्चा रूपय्या’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। उसके बाद से अधिकारी यहां आय बढ़ाने के प्रयास में जुटे। गत दिनों लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रिवर फ्रंट का निरीक्षण किया था। उस दौरान केडीए अधिकारियों को यहां आय बढ़ाने के निर्देश दिए थे। लोकसभा अध्यक्ष के निर्देश के बाद अधिकारियों ने इस संबंध में कार्यवाही शुरु कर दी है। </p>
<p><strong>प्रवेश टिकट से भी हर महीने 1 करोड़ की आय</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट पर उद्घाटन के बाद से ही यहां प्रवेश शुरु कर दिया था। प्रवेश के लिए दो सौ रूपए प्रति टिकट की दर निर्धारित की गई है। साथ ही विद्यार्थियों की यह दर आधी रखी गई है। रिवर फ्रंट पर होने वाली आय केडीए के खाते में जाती है लेकिन रिवर फ्रंट का संचालन करने के लिए मेन पावर गुरुग्राम की निजी फर्म द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही है।  सूत्रों के अनुसार रिवर फ्रंट पर रोजाना जितने लोग आ रहे हैं उनसे केडीए को करीब 1 करोड़ रुपए महीना आय हो रही है। </p>
<p><strong>नो प्रोफिट, नो लोस पर हो सकेगा संचालन</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट पर मेन पावर सप्लाई करने की एवज में केडीए द्वारा निजी फर्म को हर महीने करीब दो करोड़ रुपए का भुगतान किया जा रहा है। जबकि वर्तमान में केडीए को मात्र प्रवेश टिकट से 1 करोड़ रुपए की ही आय हो रही है। वहीं दुकानों को लीज पर देने से केडीए को हर महीने 1 करोड़ रुपए से अधिक की आय और हो सकेगी। हालांकि यहां शूटिंग, वाटर पार्क व अन्य व्यवस्थाओं से भी आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे है। लेकिन वर्तमान में आय से दो गुना खर्चा करना पड़ रहा है। जबकि दुकानों को लीज पर देने से केडीए द्वारा यहां हर महीने एक करोड़ रुपए और आय होने से कम से कम नो प्रोफिट नो लोस पर संचालन हो सकेगा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रिवर फ्रंट की दुकानों को शीघ्र शुरु करने का प्रयास किया जा रहा है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। पूर्व में दुकानें अलग-अलग आवंटित करने की योजना थी। लेकिन अब सभी दुकानों को एक साथ निजी कम्पनी को लीज पर देनी की योजना है। जिससे केडीए को एक मुश्त करीब 1 करोड़ 3 लाख रुपए महीना की आय दुकानों से हो सकेगी। जो अधिक राशि देगा उसे ही दिया जाएगा। <br /><strong>- कुशल कोठारी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Sep 2024 17:15:43 +0530</pubDate>
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                <title>गणेश उत्सव: बरसा धन, कारोबार 80 करोड़ के पार</title>
                                    <description><![CDATA[इस बार लाखों रुपए की गणेश प्रतिमाओं की बिक्री हुई है और मूर्तिकारों को मुनाफा भी हुआ है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ganesh-utsav--rain-of-money--business-crosses-80-crores/article-90032"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(3)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गणेश चतुर्थी पर्व शहर में शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। यह फेस्टिव सीजन कारोबारियों के लिए बहुत शानदार रहा। लोगों की तरह ही व्यापारियों में भी गणेश चतुर्थी के मौके पर जोश भरा नजर आया। शहर में दो दिन तक जमकर खरीदारी हुई। एक अनुमान के मुताबिक गणेश चतुर्थी पर शहर में  लगभग 80 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ। शहर में दो दिन में करीब 20 हजार से अधिक गणेश प्रतिमाओं की बिक्री हुई। पिछले साल की तुलना में प्रतिमाओं की बिक्री का कारोबार अच्छा रहा। इसके अलावा ऑटोमोबाइल सेक्टर, सर्राफा बाजार, इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार भी ग्राहकी से गुलजार रहा। पिछले साल की तुलना में इन सेक्टरों में कारोबार को पंख लग गए। वहीं मिठाई, फूल मालाओं सहित अन्य पूजन सामग्री की भी अच्छी बिक्री होने से कारोबारियों के चेहरे खिल उठे। दो दिन में बिकी 20 हजार गणेश प्रतिमाएं: गणेश उत्सव पर्व की धूम शुक्रवार से ही शुरू हो गई थी। शहर में विभिन्न स्थानों पर अस्थाई दुकानें लगाकर प्रतिमाओं की बिक्री की गई थी। दो दिन में शहर में करीब 20 हजार प्रतिमाओं की बिक्री हो गई। यहां पर राजस्थान से बाहर से कई मूर्तिकार यहां प्रतिमाएं बेचने आए थे। इस बार सबसे ज्यादा  मिट्टी की मूर्तियों की डिमांड रही। इसके लिए लोगों को अधिक दाम चुकाने पड़े। कलकत्ता के मूर्तिकार सुनील विश्वास ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस साल गणेश प्रतिमाओं की ज्यादा बिक्री हुई है। मिट्टी की मूर्तियों के दाम थोड़े अधिक होते हैं। इसके बावजूद इनकी खरीदारी ज्यादा हुई। इस बार लाखों रुपए की गणेश प्रतिमाओं की बिक्री हुई है और मूर्तिकारों को मुनाफा भी हुआ है। </p>
<p><strong>ऑटोमोबाइल सेक्टर भी खूब दौड़ा</strong><br />गणेश उत्सव पर्व पर शनिवार को वाहनों की भी जमकर खरीदारी हुई। शहर के वाहनों के शोरूम पर दिनभर ग्राहकों की रेलमपेल बनी रही। ऑटोमोबाइल व्यापारियों के अनुसार गणेश चतुर्थी पर्व पर नई गाड़ी खरीदना शुभ माना जाता है। ऐसे में अधिकांश ग्राहकों ने पहले से वाहनों की बुकिंग करा ली थी। शनिवार को शुभ मुहूर्त में ग्राहकों को वाहनों की डिलीवरी दी गई। सबसे ज्यादा दुपहिया वाहनों की बिक्री हुई। ऑटामोबाइल सेक्टर में एक ही दिन में करीब 20 से 25 करोड़ का कारोबार हुआ। इलेक्ट्रॉनिक बाजार भी ग्राहकों से गुलजार रहा। शहर में इस साल अधिकांश स्थानों पर पांडाल बनाए गए थे। इन पर सजावट के लिए इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की बिक्री हुई। करीब 10 से 15 लाख के सजावटी सामानों की खरीदारी की गई। </p>
<p><strong>मिठाई व पूजन सामग्री का भी चला कारोबार</strong><br />भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाया जाता है। इस कारण गणेश चतुर्थी पर्व पर मोदक की खूब बिक्री हुई। इसके लिए मिठाई विक्रेताओं ने पहले से ही तैयारी कर ली थी। हालांकि बेसन के दाम में तेजी होने के कारण मोदक के लिए लोगों को अधिक रकम खर्च करनी पड़ी। मिठाई विक्रेता रमेश कुमार ने बताया कि दो दिन तक मिष्ठानों का अच्छा कारोबार हुआ है। इस पर्व पर करीब डेढ़ करोड़ से अधिक की मिठाई की बिक्री होने का अनुमान है। वहीं इस साल फूलमाला और पूजन विक्रेताओं के चेहरे भी अच्छी कमाई के कारण खिले नजर आए। फूल विक्रेता राजेश सुमन ने बताया कि फूलों की थोक मंडी में शनिवार को बीस टन फूल और मालाओं की बिक्री हुई है। इससे विक्रेताओं को काफी फायदा हुआ है।  </p>
<p><strong>दिनभर चमकता रहा सर्राफा बाजार</strong><br />गणेश चतुर्थी पर्व पर सर्राफा बाजार भी दिनभर ग्राहकी से चमकता रहा। इस दिन शुभ मुहूर्त में ज्वैलरी की खरीदारी की गई। सर्राफा व्यापारी विभोर कुमार के अनुसार इस साल गणेश चतुर्थी कारोबार के लिहाज से लाभकारी रही। शहर के ज्वैलरी शोरूम और दुकानों पर सुबह से लेकर शाम तक खरीदारी चली। ग्राहकों में लाइट वेट ज्वैलरी की खरीदारी अधिक की। इस साल सोने-चांदी के भावों में तेजी बनी हुई है। इस कारण सर्राफा व्यापारियों ने लाइट वेट वाली ज्वैलरी अलग-अलग डिजाइन में तैयार करवा रखी थी। ऐसे में अधिकांश ग्राहकों ने कम वजन वाले जेवरातों को खरीदने में रुचि दिखाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Sep 2024 15:50:18 +0530</pubDate>
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                <title>राम जी की कृपा से बाजार में बरसे सवा तीन सौ करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[फूल, तोरण-पताकाएं, भगवा वस्त्र, पटाखे, मिठाइयां समेत श्रीरामभक्ति और आस्था से जुड़ी हर सामग्री से बाजार सज गए थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/by-the-grace-of-ram-ji--rs--325-crores-rained-in-the-market/article-68139"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/untitled-design-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती संभाग में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव दीपावली से दो गुना कारोबार लेकर आया जिससे व्यापारियों के साथ इस बार किसानों भी झोली भगवान राम ने धन की वर्षा कर  दी। शहर में 21 व 22 जनवरी दो दिन में करीब सवा तीन सौ करोड़ रुपए का कारोबार हुआ। जिसमें फूलमाला, मिठाई, टेंट, डेकोरेशन, झंडे, बेनर और डीजे, डेकोरेशन और किराना शामिल है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अयोध्या धाम प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव ने जहां देश के प्राण की प्रतिष्ठा की है, वहीं कुछ लोगों को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए हैं। फूल, तोरण-पताकाएं, भगवा वस्त्र, पटाखे, मिठाइयां समेत श्रीरामभक्ति और आस्था से जुड़ी हर सामग्री से बाजार सज गए थे। कुछ ऐसी सामग्रियां भी शामिल थीं, जो किसानों से जुड़ी थी। आमतौर पर रोज ही फूल उत्पादक किसानों को मनचाहा दाम न मिलने पर मायूस लौटना पड़ता था, लेकिन पिछले पांच दिनों में हुई फूलों को बिक्री ने उनके चेहरे बाग-बाग कर दिए।</p>
<p><strong>20 जनवरी से रोज बढ़ते रहे दाम</strong><br />फूल विक्रेता संवारिया राठौर ने बताया कि हर रोज 5000 किलो फूल यहां बिकने के लिए आते हैं।  पांच से छह टन फूल बिकने आते है। आम दिनों में इन फूलों का दाम उत्पादन, गुणवत्ता व जाति के हिसाब से 20 रुपए से 40 रुपए किलो होता है, लेकिन 20 जनवरी से फूलों के दाम इस कदर उछलने लगे कि 21 तारीख की रात तक दाम बढ़ते ही रहे। 20 जनवरी को फूल औसत 50 रुपए किलो और 21 जनवरी को 300 रुपए किलो तक बिके 22 तारीख को तो लोगों को मुंह मांगे दाम देने पर भी फूल नहीं मिल पाए थे। करीब दो दिन में करीब 30 लाख रुपए का फूलों का कारोबार हुआ। </p>
<p><strong>एक दिन पहले ही खत्म हुआ मिठाई का स्टॉक</strong><br />मिठाई व्यवसायी राजू हलवाई ने बताया कि 21 जनवरी को दिन की शुरूआत से देर रात तक मिठाई की मांग बनी रही। सबसे ज्यादा बूंदी, बूंदी के लड्डू की मांग रही। वहीं बूंदी व नमकीन 20 जनवरी से आडॅर बुक हो गए थे।  22 जनवरी को  बेचने के लिए मिठाई नहीं बची थी। प्राण-प्रतिष्ठा के दिन वैसे भी मिठाई की खपत इसलिए नहीं हुई कि इस दिन एक तो बेचने के लिए मिठाई नहीं थी, दूसरा सुबह से लोग प्रसाद व भोजन वितरीत करने में लगे थे। एक अनुमान के अनुसार, पूरे शहर में 5 से 7  हजार किलो से अधिक मिठाई बिकने की संभावना है। यह आंकड़ा ज्यादा भी हो सकता है। नामी प्रतिष्ठानों में अधिकाधिक मिठाई बेची गई है। इसका कहीं रिकॉर्ड नहीं होता है। करीब 70 से 80 लाख के कारोबार अनुमान है। </p>
<p><strong>पटाखों का जमकर हुआ कारोबार, जिसे जो मिला, वही ले गया</strong><br />प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को चार चांद लगाने के लिए लोगों ने जमकर पटाखे खरीदे। उपलब्धता कम होने लगी, तो जिसे जो मिला, वही लेकर गया। कोटा में  50 से  अधिक पटाखा व्यवसायी हैं। आर के अग्रवाल ने बताया कि दिवाली के मुकाबले प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर पटाखे दुगने बिके हैं। 70 से 80 लाख रुपए का पटाखे बिके।</p>
<p><strong>सीधे गांवों तक पहुंचे थे ग्राहक</strong><br />फूल उत्पादन किसान व व्यापारी धर्मराज  ने बताया कि हर रोज की खपत 5 से 7 हजार किलो होती थी। इन फूलों के दाम किसानों की मर्जी से नहीं, बल्कि बाजार में दलाल या व्यापारियों की मर्जी से तय होते थे, लेकिन 20 जनवरी से किसानों ने फूलों की बढ़ती मांग को देखकर खुद दाम तय किए और उसी दाम से व्यापारियों को फूल बेचे। यहां तक कि ग्राहक सीधे गांवों में किसानों तक पहुंचे। फिर भी मांग के हिसाब से 25 फीसदी भी आपूर्ति नहीं हो पाई। कोटा में प्रतिदिन 70 से 50 क्विंटल गुलाब, 60 से 70 क्विंटल गेदा, 70 से 80 क्विंटल सफेदा, 70 से 80 क्विंटल अन्य फूल आते है।  फूलों के लिए ग्राहक  कोटा,बूंदी, बारां के गांवों तक पहुंच गए। आम दिनों में फूलों के औसत दाम 15 से 30 रुपए प्रति किलो होते हैं, जबकि बीते चार दिनों में अधिकतम दाम इस तरह रहे।</p>
<p><strong>20 साल में पहली बार चार गुना हुई भगवा सामग्री की बिक्री</strong><br /><strong>तोरण, पताका, झंडों की सवा सौ करोड़ की हुई बिक्री</strong><br />कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने बताया कि  पिछले 20 सालों में भगवा रंग की जितनी सामग्री बेचीहोगी, वह पूरी मिलाकर इस एक  महीने में बेची । सवा सौ करोड़ कारोबार हुआ। वहीं हाड़ौती में करीब सवा तीन सौ करोड का कारोबार हुआ। । पिछले एक महीने में  भगवा झंडे, तोरण, पताका, टोपियां,दुपट्टे, बैज बिल्ले, कटआउट्स, प्रकाशदीप, फ्लैक्स लड़िया,आॅरेंज हार आदि खूब बिके। लोगों ने 10 गुना अधिक व्यापार किया है। उन्होंने बताया कि पूरे जीवन में भगवा सामग्री की इतनी मांग नहीं देखी। रामनवमी, हनुमान जयंती व अन्य पर्व पर सामग्री बिकती है, लेकिन इस बार की मांग अद्भूत रही है। </p>
<p><strong>फूल                             अधिकतम दाम</strong><br />डेजी              <strong>             </strong> 150-200 प्रति किलो<br />नवरंग           <strong>             </strong> 80-100 प्रति किलो<br />कलकत्ता कली              150-200 प्रति किलो <br />अरिंज कली                 150-200 प्रति किलो <br />गुलाब             <strong>           </strong> 200-300 प्रति किलो<br /> गेंदा             <strong>             </strong>100-150 प्रति किलो <br />शेवंती           <strong>            </strong>  200-250 प्रति किलो<br />निशिगंधा         <strong>           </strong>200-250 प्रति किलो<br />लीली            <strong>             </strong> 200-250 प्रति किलो</p>
<p><strong>भंडारे-महाप्रसाद का आयोजन</strong><br />सेवाधारी धनश्याम सोरल ने बताया कि  शहर में 21 व 22 जनवरी को शहर में करीब 40 से 50 स्थानों पर शोभायात्रा, कलशयात्रा और पदयात्रां निकाली गई। अनुमान है कि रैली के आयोजकों की ओर से महाप्रसाद का भी आयोजन किया गया। वैसे आकलन है कि प्रत्येक वार्ड में कम से कम 5 से 7 भंडारे-महाप्रसाद का आयोजन हुआ। धार्मिक आयोजन वाले स्थानों पर भी महाप्रसाद की व्यवस्था की गई थी। इस तरह शहर में 22 जनवरी को कुल 100 -150 स्थानों पर प्रसाद वितरण व भंडारे आयोजित हुए। </p>
<p><strong>किराणा बाजार में जमकर हुई बिक्री</strong><br />किराणा व्यापार संघ के अध्यक्ष पवन दुआ ने बताया कि राम लला के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत आयोजित प्रसाद वितरण, भंडारे और पूजा पाठ के लिए किराणा सामग्री की जमकर बिक्री हुई। सूखा मेवा, बेसन, शक्कर, घी, तेल, आटा, और मसालों की जमकर बिक्री हुई। करीब सौ करोड के आसपास का कारोबार होने का अनुमान है। </p>
<p><strong>टेंट व डीजे और तोरण द्वार की रही डिमांड</strong><br />टेट व डेकोरेशन व्यवसायी शनि सिंह ने बताया कि राम लला की आगमन पर शहर के चौराहे, सरकारी भवन और मंदिरों में सजावट की गई। इसके अलावा जगह शहर में तोरण और स्वागत लिए स्टेड लगाए और डीजे लगाए। करीब 150 से अधिक टेंट व्यवसायी व्यस्त रहे। करीब 70 से 80 करोड़ का कारोबार हुआ। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jan 2024 17:00:09 +0530</pubDate>
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                <title>एचडीएफसी बैंक का शुद्ध लाभ 9,196 करोड़ रुपए </title>
                                    <description><![CDATA[बैंक ने बयान में बताया कि बैंक को 19.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 27,181.4 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2021-22 की 22,696.5 करोड़ रुपये था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/hdfc-bank-net-profit-of-9196-carore/article-14874"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/elon-musk-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक का वित्त वर्ष में शुद्ध लाभ 19 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 9,196 करोड़ रुपये रहा। बैंक का इससे पहले शुद्ध लाभ 7,729.64 करोड़ रुपये था। एचडीएफसी बैंक ने बयान में बताया कि बैंक को 19.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 27,181.4 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2021-22 की 22,696.5 करोड़ रुपये था। इसमें प्रतिभूतियों के कारोबार में लाभ-हानि को नहीं जोड़ा गया है।</p>
<p>बैंक का शुद्ध राजस्व ( शुद्ध ब्याज आय तथा अन्य आय समेत) 30 जून 2022 को 25,869.6 करोड़ रुपये रहा। एचडीएफसी बैंक की शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) 14.5 प्रतिशत बढ़कर 19,481.4 करोड़ रुपये हो गयी, जो 30 जून, 2021 को 17,009 करोड़ रुपये थी। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Jul 2022 17:31:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फिर आम आदमी नाचेगा बिचौलियों की अंगुलियों पर</title>
                                    <description><![CDATA[गेहूं के दाम में आए उछाल ने इस साल सरकारी खरीद का पूरा गणित गड़बड़ा दिया। इसी का फायदा उठाकर व्यापारियों ने भारी मुनाफा कमाया।  स्थिति यह हो गई कि केन्द्र सरकार को इस साल अपना खरीद का लक्ष्य तक घटाना पड़ गया। वहीं गेहूं के दामों में बढ़ोतरी का खामियाजा आमजन को उठाना पड़ा। 

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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/then-the-common-man-will-dance-on-the-fingers-of-middlemen/article-11461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/aam-aadmi-ko-milega-expensive-wheat.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गेहूं के दाम में आए उछाल ने इस साल सरकारी खरीद का पूरा गणित गड़बड़ा दिया। इसी का फायदा उठाकर व्यापारियों ने भारी मुनाफा कमाया। स्थिति यह हो गई कि केन्द्र सरकार को इस साल अपना खरीद का लक्ष्य तक घटाना पड़ गया। वहीं गेहूं के दामों में बढ़ोतरी का खामियाजा आमजन को उठाना पड़ा। वर्तमान में कम दाम में खरीदे गेहूं को अधिक दाम में बेचकर व्यापारी भारी मुनाफा कमा रहे हैं।  हाड़ौती में हर साल गेहूं की बम्पर पैदावार होती है। हालांकि इस साल तेज गर्मी के कारण उत्पादन क्षमता में कुछ प्रभाव पड़ा था। इसके बावजूद बाजार में बिक्री के लिए गेहूं की आवक शुरू होते ही दामों में तेजी आ गई थी। अमूमन 1800 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल बिकने वाले गेहूं के दाम इस बार 2100 से 2200 के बीच बोले गए, जबकि समर्थन मूल्य पर गेहूं के दाम 2015 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किए गए थे। व्यापारी वर्ग ने इसका भरपूर फायदा उठाया और थोड़े दाम बढ़ाकर किसानों का सारा गेहूं खरीद लिया। इसका नतीजा यह रहा कि हाड़ौती क्षेत्र में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई।<br /><br /><strong>और घटाना पड़ गया कोटा</strong><br />हर साल अधिकांश किसान अपनी उपज का उचित दाम प्राप्त करने के लिए सरकारी खरीद केन्द्र पर गेहूं बेचने की कोशिश करता था। इसकी प्रक्रिया काफी जटिल होने के बावजूद किसान का यही प्रयास रहता था कि उसका गेहूं सरकारी खरीद केन्द्र पर ही बिके, लेकिन इस बार गेहूं खरीद की गणित पूरी तरह से बिगड़ गई है। व्यापारी वर्ग ने पहले से ही अधिक दाम लगाकर किसानों का सारा माल खरीद लिया। ऐसे में सरकारी खरीद ठप हो गई। इसके चलते केन्द्र सरकार ने देश में गेहूं खरीद का कोटा घटाकर 195 लाख टन कर दिया, जो पिछले साल की तुलना में 55 फीसदी कम था। इससे व्यापारियों को भी फायदा हुआ। <br /><br /><strong>ऐसे हुई व्यापारियों की मौज</strong><br />गेहूं का उत्पादन और गुणवत्ता कमजोर होने का सीधा फायदा व्यापारियों को मिला। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की दर 2015 रुपए प्रति क्विंटल थी। इसी का फायदा व्यापारियों ने उठाया और किसानों से अच्छी गुणवत्ता वाला गेहूं भी 2100 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल के बीच खरीद लिया। उसके बाद अपने पास स्टॉक कर लिया। उस समय काफी मात्रा में गेहूं देश से बाहर निर्यात किया जा रहा था। ऐसे में व्यापारियों ने किसानों से खरीदा अधिकांश माल विदेशों में भेज दिया। इसका फायदा भी व्यापारियों को मिला। वहीं निर्यात के चलते स्थानीय स्तर पर गेहूं के दामों में और इजाफा हो गया, जिससे आमजन में हाहाकार मच गया। गेहूं के दामों पर लगाम के लिए केन्द्र सरकार को निर्यात पर प्रतिबंध तक लगाना पड़ा। इसके बावजूद दामों में ज्यादा कमी नहीं आई।<br /><br /><strong>मुनाफाखोरी का खेल</strong><br />कृषि उपजमंडी में किसानों का गेहूं 2100 से 2200 रुपए प्रति क्विंटल के बीच खरीदा गया था। व्यापारियों ने सारा गेहूं खरीदकर अपने यहां स्टॉक कर लिया। उसके बाद मुनाफाखोरी का खेल शुरू कर दिया। व्यापारियों ने अपने स्तर पर गेहूं के दाम बढ़ा दिए और आमजन को 2500 से 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बेचा। व्यापारी को एक क्विंटल पर ही करीब 400 रुपए का भारी मुनाफा हो गया। कृषिमंडी से निकला गेहूं आमजन तक पहुंचने तक 400 रुपए प्रति क्विंटल महंगा हो गया। <br /><br /><strong>सफाई के नाम पर धोखा</strong><br />लोगों का कहना है कि बाजार में इस समय गेहूं 2600 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मिल रहा है। इतने अधिक दाम होने के बारे में व्यापारी बताता है कि किसानों से खरीदे गए गेहूं की क्वालिटी काफी खराब होती है, इसलिए उस गेहूं की सफाई करवाई जाती है। इसलिए अधिक दाम लगाने पड़ते है। लोगों का कहना है कि मशीन क्लीन गेहूं के नाम से लूटमार की जा रही है। गेहूं को क्लीन करने में इतना खर्चा नहीं आता है इसके बावजूद सफाई के नाम पर दाम अधिक लगाए जाते है।  <br /><br /><strong>इतना महंगा गेहूं कभी नहीं खाया</strong><br />परिवार के लिए हर साल आठ बोरी गेहूं लेते हैं। इस बार गेहूं के दामों ने सकते में ला दिया है। आठ बोरी गेहूं ही बीस हजार रुपए से अधिक के आ गए। इससे पूरे घर का बजट ही गड़गड़ा गया है। व्यापारी मशीन क्लीन के नाम पर लोगों से धोखा करते हैं। ज्यादा रुपए लेने के बाद भी गेहूं में कंकर व अन्य गंदगी मिली हुई थी।<br /><strong>- दुर्गाप्रसाद शर्मा, जयश्रीविहार</strong><br /><br />परिवार में दस सदस्य हैं, इसलिए सालभर का गेहूं एक साथ खरीद लेते हैं। इस साल तो  गेहूं काफी महंगा पड़ गया। कोरोना महामारी के चलते व्यवसाय पहले से ही ठप था। अब महंगे गेहूं की और स्थिति बिगाड़ दी। मजबूरी में गेहूं खरीदने की मात्रा कम करनी पड़ी। अगर आगे दाम कम होंगे तो और गेहूं खरीद लेंगे।<br /><strong>- रामभरोस सुमन, ग्रीन होम सोसायटी</strong><br /><br />भामाशाहमंडी में किसानों को इस बार गेहूं के दाम अधिक मिले थे। इससे किसानों को फायदा हुआ था। अधिकांश किसानों ने व्यापारियों को ही माल बेचा था। इसके बाद माल की दर व्यापारी अपने हिसाब से ही तय करता है।<br /><strong>- जवाहरलाल नागर, भामाशाहमंडी सचिव</strong><br /><br />गेहूं के दामों में इजाफा होने से इस बार सरकारी केन्द्रों पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई है।  कोटा संभाग में गेहूं खरीद के लक्ष्य तय किए गए थे, लेकिन बाजार में समर्थन मूल्य से अधिक दाम होने से केन्द्रों पर खरीद नहीं हो पाई। <br /><strong>- सतीश कुमार, मण्डल प्रबंधक, एफसीआई कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jun 2022 15:42:59 +0530</pubDate>
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                <title>मुनाफावूसली से शेयर बाजार चौथे दिन गिरावट लेकर बंद</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A5%82%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%AF%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%9A%E0%A5%8C%E0%A4%A5%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%97%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%9F-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%A6/article-1838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/sensex4.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। वैश्विक स्तर से मिले मजबूत संकेतों के बावजूद घरेलू स्तर पर धातु, आईटी , टेक, एफएमसीजी और बेसिक मटेरियल्स जैसे समूहों में हुयी मुनाफावसूली से शेयर बाजार शुक्रवार को लगातार चौथे दिन गिरावट लेकर बंद हुये।<br /> <br /> बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 101.88 अंक टूटकर 60821.62 अंक पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 76.25 अंक गिरकर 18101.85 अंक पर आ गया। इस दौरान बीएसई का मिडकैप 0.97 प्रतिशत उतरकर 25566.64 अंक पर और स्मॉलकैप 1.02 प्रतिशत लुढ़ककर 28336.31 अंक पर रहा।<br /> <br /> बीएसई में शामिल अधिकांश समूहों में बिकवाली हुयी जिसमें धातु 2.93 प्रतिशत, आईटी 1.55 प्रतिशत, टेक 1.33 प्रतिशत, बेसिक मटेरियल्स 1.78 प्रतिशत और एफएमसीजी 1.26 प्रतिशत प्रमुखता से शामिल है। बढ़त में रहने वालों में रियलटी 2.45 प्रतिशत, बैंङ्क्षकग 0.74 प्रतिशत और वित्त 0.47 प्रतिशत शामिल है। बीएसई में कुल 3448 कंपनियों में कारोबार हुआ जिसमें से 1983 गिरावट में और 1315 बढ़त में रहे जबकि 150 में कोई बदलाव नहीं हुआ।<br /> <br /> वैश्विक स्तर से लगभग तेजी के संकेत मिले। अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ खुले। यूरोपीय बाजारों में लगभग तेजी रही। चीन के शंघाई कंपोजिट की 0.34 प्रतिशत की गिरावट को छोड़कर शेष प्रमुख एशियाई बाजार भी बढ़त में रहा। ब्रिटेन का एफटीएसई 0.44 प्रतिशत, जर्मनी का डैक्स 0.53 प्रतिशत, जापान का निक्केई 0.34 प्रतिशत और हांगकांग का हैंगसेंग 0.42 प्रतिशत शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Oct 2021 17:57:17 +0530</pubDate>
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