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                <title>US Iran Relations - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>US Iran Relations RSS Feed</description>
                
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                <title>अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन का समझौता बेनतीजा: परमाणु मुद्दे पर गतिरोध कायम, होर्मुज जलडमरूमध्य भी नहीं खुला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को वर्साय में हुए 60-दिन के अस्थायी समझौते की समय सीमा समाप्त हो गई है। दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने, अमेरिकी नाकाबंदी हटाने और परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक सहमति बनाने में विफल रहे हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/60-day-agreement-between-america-and-iran-remains-deadlocked-on/article-163178"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/us1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए 60-दिन के समझौते की समय सीमा सोमवार को समाप्त हो गयी, लेकिन दोनों देश युद्ध समाप्त करने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर सहमति नहीं बना सके। इससे आगे की बातचीत और क्षेत्र में शांति की संभावनाएं अनिश्चित हो गयी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच फ्रांस के वर्साय में हुए समझौते का उद्देश्य अस्थायी संघर्ष विराम को स्थायी समझौते में बदलना था। इसके तहत 60 दिनों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, संघर्ष की समाप्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर व्यापक समझौता किया जाना था।</p>
<p>इन तीनों प्रमुख उद्देश्यों में से कोई भी पूरा नहीं हो सका। कुछ ही सप्ताह में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया। प्रत्यक्ष बातचीत भी रुक गयी और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी रही। होर्मुज जलडमरूमध्य में भी सामान्य आवाजाही बहाल नहीं हो सकी। वर्तमान में केवल पांच मालवाहक जहाजों को इसके रास्ते गुजरने की अनुमति है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में प्रतिदिन करीब 130 से 140 जहाज इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से गुजरते हैं।</p>
<p>समझौते के तहत ईरान को जलडमरूमध्य खोलने में मदद करनी थी और अमेरिका को तेहरान पर दबाव कम करना था। लेकिन दोनों पक्ष इस बात पर सहमत नहीं हो सके कि जलमार्ग पर यातायात किसके नियंत्रण में और किन शर्तों के तहत संचालित होगा। ईरान ने जलडमरूमध्य खोलने के लिए अमेरिकी नाकाबंदी हटाने की शर्त रखी है, जबकि अमेरिका ने इसे स्वीकार नहीं किया है। तेहरान ने होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर नियंत्रण और संभावित शुल्क वसूलने में भूमिका की भी मांग की है।</p>
<p>तनाव आठ जुलाई को और बढ़ गया, जब श्री ट्रंप ने नाटो सम्मेलन के दौरान समझौते को समाप्त घोषित कर दिया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य और तटीय ठिकानों पर हमले किए। इनमें मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्र, रसद केंद्र, वायु रक्षा एवं निगरानी प्रणालियां तथा नौसैनिक और तटीय ढांचे शामिल थे। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अन्य सैन्य एवं संचार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इसके बाद 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते की उम्मीदें लगभग समाप्त हो गयीं।</p>
<p>इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए उन प्रतिबंधों में मिली छूट वापस ले ली, जिनके तहत संघर्ष विराम के दौरान ईरान सीमित रूप से तेल बेच सकता था। अमेरिका ने ईरान पर रियायतों के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी भी फिर शुरू कर दी। ईरान ने दूसरी ओर होर्मुज को अपने दबाव के प्रमुख साधन के रूप में इस्तेमाल किया है। उसने जलमार्ग को पूरी तरह खोलने के लिए अमेरिकी नाकाबंदी हटाने, ईरान के आसपास से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और युद्ध क्षतिपूर्ति की मांग की है।</p>
<p>अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका का पहला उद्देश्य देश में तेल और गैस की कीमतों को कम रखना और दूसरा ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु हथियार विकसित करने का कोई इरादा नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि फिलहाल तेहरान और वाशिंगटन के बीच कोई प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ के तौर पर ईरान के साथ संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे हैं, लेकिन इसे बातचीत नहीं माना जा सकता।</p>
<p>पाकिस्तान ने जून के समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभायी थी और दोनों पक्षों को फिर बातचीत की मेज पर लाने के प्रयास जारी रखने की बात कही है। 60 दिन की समयसीमा समाप्त होने के साथ समझौता युद्धविराम को स्थायी बनाने, होर्मुज को पूरी तरह खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक समझौता कराने में विफल रहा है। प्रत्यक्ष बातचीत बंद होने, अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहने और सैन्य तनाव बरकरार रहने के बीच अब यह स्पष्ट नहीं है कि इस विफल समझौते की जगह आगे कौन-सा ढांचा सामने आएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 18:05:16 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-ईरान बातचीत: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का दावा, अमेरिका के साथ बातचीत प्रगति पर, इन मुद्दों पर हो रही चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान ने ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता को प्रगति पर बताया। विदेश मंत्री अराघची ने शांतिपूर्ण संवाद पर जोर देते हुए दबाव की भाषा खारिज की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-iran-talks-iranian-president-masoud-pezeshkian-claims-talks-with-us/article-142420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(6)7.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने रविवार को अपने देश और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई परमाणु (एजेंसी) को प्रगति पर कहा। उन्होंने ये टिप्पणियां एक्स पर एक पोस्ट में कीं जिसमें उन्होंने शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई अप्रत्यक्ष (एजेंसी) पर प्रकाश डाला।</p>
<p>पेजेशकियान ने कहा कि ये चर्चाएं पश्चिम एशिया क्षेत्र में मित्रवत सरकारों द्वारा किए गए अनुवर्ती प्रयासों के परिणामस्वरूप हुईं, और इस बात पर बल दिया कि ईरान की हमेशा से ही संवाद द्वारा मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की चुनी हुई रणनीति रही है। इसी बीच, तेहरान में एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची, जिन्होंने शुक्रवार की (एजेंसी) में देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, ने कहा, कोई हमें यह नहीं बता सकता कि हमारे पास क्या होना चाहिए और क्या नहीं होना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने आश्वासन दिया कि ईरान का परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है, साथ ही उन्होंने किसी भी प्रकार की दादागिरी को दृढ़ता से खारिज कर दिया। अराघची ने कहा, अगर वे ईरानी लोगों से बल प्रयोग की भाषा में बात करेंगे तो हम भी उन्हें उसी भाषा में जवाब देंगे। हालांकि, अगर वे हमसे सम्मान की भाषा में बात करेंगे तो उन्हें भी उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा।</p>
<p>शुक्रवार को हुई अमेरिका और ईरान के बीच क्षेत्रीय तनाव बढऩे के बीच हुई, जिसमें मध्य पूर्व में हाल ही में अमेरिका द्वारा सैन्य जमावड़ा और ईरान द्वारा तैयारियों में तेजी शामिल हैं। समाप्त होने के बाद, अराघची ने कहा, कुल मिलाकर, मैं कह सकता हूं कि यह एक अच्छी शुरुआत थी। हालांकि, प्रक्रिया की निरंतरता दोनों पक्षों की अपनी-अपनी राजधानियों में होने वाली बातचीत और इसे आगे बढ़ाने के बारे में उनके निर्णयों पर निर्भर करती है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 13:03:31 +0530</pubDate>
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