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                            <item>
                <title>सांप के जहर मामले में यूट्यूबर एल्विश यादव को बड़ी राहत : सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की प्राथमिकी, सांप के जहर का इस्तेमाल और रेव पार्टियों में शामिल होने का लगा था आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[यूट्यूबर एल्विश यादव के खिलाफ सांप के जहर के इस्तेमाल का आपराधिक मामला सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब्त पदार्थ वैधानिक अनुसूची में नहीं था और एल्विश से कोई सीधी बरामदगी नहीं हुई। हालांकि, अधिकारियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत नई कानूनी कार्यवाही शुरू करने की छूट दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-relief-to-youtuber-elvish-yadav-in-snake-poison-case/article-147067"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/elvish-yadav.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को यूट्यूबर एल्विश यादव के खिलाफ दर्ज उस आपराधिक मामले को खारिज कर दिया, जिसमें उन पर वीडियो शूट में सांप के जहर का इस्तेमाल करने और रेव पार्टियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह फैसला सुनाया।</p>
<p>न्यायालय ने कहा कि जिस पदार्थ (जहर) की बात की जा रही है, वह वैधानिक अनुसूची में शामिल नहीं है। पीठ ने इस दलील पर भी गौर किया कि एल्विश यादव के पास से व्यक्तिगत रूप से कोई बरामदगी नहीं हुई। आरोप पत्र में केवल यह दावा किया गया कि उन्होंने अपने एक सहयोगी के जरिए ऑर्डर दिया था। पीठ ने कहा कि इन कानूनी आधारों पर प्राथमिकी का आधार नहीं बनता, लेकिन उसने आरोपों के गुण-दोष पर विचार नहीं किया है। न्यायालय ने सक्षम अधिकारियों को यह छूट दी है कि वे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 55 के तहत उचित शिकायत दर्ज करने सहित कानून के अनुसार नयी कार्यवाही शुरू कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 18:04:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बांग्लादेश : पूर्व पीएम शेख हसीना को कोर्ट से बड़ा झटका, भ्रष्टाचार से जुड़े 2 मामलों में 10 साल की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[ढाका की विशेष अदालत ने राजुक भूखंड घोटाले में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना समेत परिजनों को दोषी ठहराते हुए विभिन्न अवधि की कारावास सजा और जुर्माना सुनाया। आज फैसला सुनाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-former-bangladesh-pm-sheikh-hasina-from-the/article-141719"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(15).png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश की एक विशेष अदालत ने राजधानी ढाका की राजुक न्यू टाउन परियोजना में भूखंड आवंटन से जुड़ी कथित अनियमितताओं के दो अलग-अलग भ्रष्टाचार मामलों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, उनके भतीजे रादवान मुजीब सिद्दीक तथा भतीजियों ट्यूलिप रिजवाना सिद्दीक और अजमीना सिद्दीक सहित अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई  है। रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ढाका के विशेष न्यायाधीश की अदालत-4 के न्यायाधीश रबिउल आलम ने फैसला सुनाते हुए शेख हसीना को कुल 10 वर्ष की कारावास की सजा दी। उन्हें दोनों मामलों में पांच-पांच वर्ष की सजा सुनाई गयी है। ट्यूलिप सिद्दीक को चार वर्ष की कैद (प्रत्येक मामले में दो-दो वर्ष) की सजा दी गयी, जबकि रादवान मुजीब सिद्दीक और अजमीना सिद्दीक को दोनों मामलों में सात-सात वर्ष की कारावास की सजा सुनायी गयी है। </p>
<p>अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले राजुक के सदस्य मोहम्मद खुर्शीद आलम को प्रत्येक मामले में एक-एक वर्ष की सजा दी गयी। अदालत ने सभी दोषियों पर एक-एक लाख टका का जुर्माना भी लगाया और जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त छह महीने की कैद का आदेश दिया। भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (एसीसी) के लोक अभियोजक तारिकुल इस्लाम खान मोहम्मद मैनुल हसन लिपोन ने फैसले की पुष्टि की। </p>
<p>एसीसी के अनुसार, ये मामले दो-दो 10 कठ्ठा भूखंडों के आवंटन में सत्ता के दुरुपयोग और नियमों के उल्लंघन से जुड़े हैं। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि आरोपियों ने राजधानी उन्नयन कारत्रीपक्ष (राजुक) के नियमों की अनदेखी करते हुए आवंटन प्रक्रिया में हेरफेर किया।</p>
<p>दोनों मामलों में कुल 36 आरोपियों के खिलाफ फैसला सुनाया गया, जिनमें पूर्व प्रधानमंत्री, उनके परिजन, राजुक के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य सरकारी अफसर शामिल हैं। एक मामले में 31 गवाहों और दूसरे में 28 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। सभी सुनवाइयों के बाद अदालत ने 2 फरवरी को फैसला सुरक्षित रखकर आज निर्णय सुनाया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 17:09:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री केजरीवाल की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[ उच्चतम न्यायालय दिल्ली आबकारी नीति कथित घोटाले से संबंधित सीबीआई के मुकदमे में तिहाड़ जेल में बंद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत की मांग और इसी मामले में गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिकाओं पर शुक्रवार को अपना फैसला सुनाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-will-give-its-verdict-on-chief-minister-kejriwals/article-90338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court--3.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय दिल्ली आबकारी नीति कथित घोटाले से संबंधित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मुकदमे में तिहाड़ जेल में बंद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत की मांग और इसी मामले में गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिकाओं पर शुक्रवार 13 सितंबर को अपना फैसला सुनाएगा।</p>
<p>शीर्ष अदालत की बेवसाइट के मुताबिक न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ अपना फैसला सुनाएगी। याचिकाकर्ता केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और सीबीआई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू की घंटों दलीलें के बाद पीठ ने पांच सितंबर को सुनवाई पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। </p>
<p>आम आदमी पार्टी के प्रमुख केजरीवाल ने सीबीआई मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर से 05 अगस्त को अपनी याचिकाएं ठुकरा दिए जाने के बाद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।</p>
<p>दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 (जो विवाद के बाद रद्द कर दी गई) के कथित और अनियमितताओं के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 21 मार्च और सीबीआई में 26 जून 2024 को आरोपी मुख्यमंत्री केजरीवाल को गिरफ्तार किया था। सीबीआई की गिरफ्तारी के समय वह ईडी के मुकदमे में न्यायिक हिरासत में थे।</p>
<p>सीबीआई ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुकदमे में मार्च से न्यायिक हिरासत में बंद आरोपी मुख्यमंत्री केजरीवाल को विशेष अदालत की अनुमति के बाद 25 जून को पूछताछ और फिर 26 जून को गिरफ्तार किया था।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने आबकारी नीति कथित घोटाले से संबंधित धन शोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दर्ज मुकदमे में केजरीवाल को 12 जुलाई को अंतरिम जमानत दे दी थी। यदि सीबीआई की ओर से जून में मुकदमा दर्ज नहीं किया गया होता तो वह जेल से रिहा कर दिए गए होते।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने इससे पहले लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें अंतरिम जमानत दी थी। </p>
<p>आबकारी नीति बनाने और उसके कार्यान्वयन में की गई कथित अनियमितताओं के आरोप के आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 17 अगस्त 2022 को एक आपराधिक मुकदमा दर्ज किया था। इसी आधार पर ईडी ने 22 अगस्त 2022 को धनशोधन का मामला दर्ज किया था। शुरू में मुख्यमंत्री केजरीवाल का नाम आरोपियों में नहीं था।</p>
<p>सीबीआई मामले में शीर्ष अदालत के समक्ष सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने मुख्यमंत्री केजरीवाल को जमानत दिए जाने की दलीलों का पुरजोर विरोध करते हुए कहा था कि अधिनस्थ अदालत को दरकिनार करने की अनुमति केवल असाधारण परिस्थितियों में ही दी जा सकती है। </p>
<p>इस पर केजरीवाल पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी ने दलील दी थी कि सीआरपीसी की धारा 41ए के तहत आरोपी को नोटिस जारी करने के संबंध में वर्तमान याचिका में उठाए गए आधारों पर हिरासत के दौरान बहस की गई थी। इसके बाद विशेष अदालत ने उसे खारिज कर दिया था। इसलिए याचिकाकर्ता को फिर से उसी मुद्दे पर वहां बहस करने के लिए वापस भेजना न्यायोचित नहीं होगा।</p>
<p>पीठ के समक्ष गुरुवार पांच सितंबर 2024 को सिंघवी ने कहा कि शायद यह एकमात्र ऐसा मामला है, जिसमें मुझे (केजरीवाल) इस अदालत से सख्त धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत दो रिहाई आदेश मिले।उच्च न्यायालय से एक और विस्तृत आदेश मिला। फिर सीबीआई द्वारा पहले से तय गिरफ्तारी हुई।</p>
<p>शीर्ष अदालत को सिंघवी ने यह भी बताया कि केजरीवाल का नाम 2022 में दर्ज मुकदमे में नहीं था और उन्हें इस साल 2024 जून में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा, तीन अदालती आदेश मेरे पक्ष में हैं। यह एक पहले से तय की गई गिरफ्तारी है, ताकि उन्हें (मुख्यमंत्री) जेल में रखा जा सके।</p>
<p>वरिष्ठ अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री केजरीवाल का पक्ष रखते हुए आगे कहा कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ का कोई सवाल ही नहीं है, क्योंकि लाखों दस्तावेज हैं, जिनमें से कई तो डिजिटल हैं। उनके मुवक्किल न्यायिक हिरासत में रहते हुए गवाहों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं और इस मामले में पांच आरोप पत्र भी दाखिल किए गए हैं।</p>
<p>उन्होंने दिल्ली आबकारी नीति मामले से संबंधित अन्य आरोपियों - दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, सांसद संजय ङ्क्षसह और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की विधान पार्षद के कविता के जमानत आदेशों का हवाला दिया। शीर्ष अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया था। ये नेता जेल से रिहा कर दिए गए हैं।</p>
<p>सिंघवी ने आगे कहा कि सीआरपीसी की धारा 41ए को 2010 में गिरफ्तारियों को विनियमित करने के लिए पेश किया गया था और इसका उद्देश्य मनमानी गिरफ्तारियों को रोकना और यह सुनिश्चित करना था कि कानून प्रवर्तन अधिकारी बिना किसी वैध आधार के किसी को गिरफ्तार न कर सकें।</p>
<p>दूसरी ओर, राजू ने केजरीवाल की याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि उन्होंने पहले सत्र न्यायालय में गुहार लगाने की बजाय सीधे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।</p>
<p> उन्होंने कहा कि यह मेरी प्रारंभिक आपत्ति है। गुण-दोष के आधार पर अधीनस्थ अदालत को पहले इस पर विचार करना चाहिए था। उच्च न्यायालय को गुण-दोष देखने के लिए बनाया गया था और यह केवल असाधारण मामलों में ही हो सकता है। सामान्य मामलों में पहले सत्र न्यायालय का रुख करना पड़ता है। वे (केजरीवाला) यहां आए और फिर उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया और फिर वे फिर से शीर्ष अदालत आए।</p>
<p>एडिशनल सॉलिसिटर जनरल राजू ने यह भी दावा किया कि केजरीवाल ने अपनी पार्टी के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के माध्यम से पंजाब के एक आबकारी लाइसेंस धारक को परेशान करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी केजरीवाल को कोई भी राहत उच्च न्यायालय पर मनोबल गिराने वाला प्रभाव डालेगी।</p>
<p>हालांकि, पीठ ने कहा कि उन्हें (राजू को) यह दलील नहीं देनी चाहिए थी। हालांकि, राजू ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ सीबीआई की चार्जशीट उच्च न्यायालय के समक्ष उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने कहा कि किसी विशेष व्यक्ति के लिए जमानत के संबंध में विशेष व्यवहार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कानून में कोई विशेष व्यक्ति नहीं है और अन्य सभी आम आदमी को सत्र न्यायालय जाना होगा।</p>
<p>गवाहों के बयान पढ़ते हुए राजू ने दावा किया था कि इससे संकेत मिलता है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली आबकारी नीति मामले में मुख्य साजिशकर्ता हैं। चुनाव में रिश्वत के पैसे के इस्तेमाल का दावा करते हुए राजू ने कहा था कि गोवा में कई अन्य लोग भी इस मामले में फंसे हुए हैं और अगर केजरीवाल जमानत पर बाहर आते हैं तो वे गवाह मुकर सकते हैं। </p>
<p>उच्चतम न्यायालय के समक्ष एक हलफनामे में सीबीआई ने केजरीवाल को गिरफ्तार करने के अपने निर्णय को उचित ठहराते हुए दावा किया कि नई आबकारी नीति तैयार करने में सभी महत्वपूर्ण निर्णय दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के इशारे पर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया के साथ मिलीभगत करके लिए गए थे। ये फैसले 100 करोड़ रुपये की अवैध रिश्वत के लिए किए गए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Sep 2024 15:31:59 +0530</pubDate>
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                <title>भीलवाड़ा भट्टी कांड में पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया फैसला, दोनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई</title>
                                    <description><![CDATA[चर्चित भीलवाड़ा भट्टी कांड में कोर्ट ने आज फैसला सुना दिया है। कोर्ट द्वारा दोनों आरोपियों कान्हा और कालू को फांसी की सजा सुनाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bhilwara/court-will-give-verdict-in-bhilwara-bhatti-incident-in-some/article-78639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/bhilwara-bhatti-kand.png" alt=""></a><br /><p>भीलवाड़ा। चर्चित भीलवाड़ा भट्टी कांड में पॉक्सो कोर्ट ने आज फैसला सुना दिया है। कोर्ट द्वारा दोनों आरोपियों कान्हा और कालू को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट में जस्टिस अनिल कुमार गुप्ता ने यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शनिवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट के फैसले में 2 आरोपियों को दोषी पाया गया है। इसके अलावा 7 आरोपियों को बरी कर दिया गया।  भट्टी कांड में कालू और कान्हा दो आरोपियों पर दोष सिद्द हुआ है।  </p>
<p><strong>ये था मामला</strong><br />चर्चित भीलवाड़ा भट्टी कांड 2 अगस्त 2023 की घटना थी। घटना में भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी थाना क्षेत्र के गांव में बकरियां चराने गई लापता हुई किशोरी का शव धधकती कोयला भट्टी में मिला था। दुर्गंध आने के बाद जब राख खंगाली गई थी तो उसमें चांदी का कड़ा और चप्पल मिली थी। संभावना जताई गई थी कि दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई और शव को टुकड़ों में काटकर भट्टी में झोंक दिया गया था।</p>
<p>घटना के बाद भीलवाड़ा के तत्कालीन एसपी आदर्श सिद्धू ने बताया था कि "कोटड़ी थाना इलाक़े के नरसिंहपुरा ग्राम की बालिका बकरी चराने गई थी उसके खेत के पास ही कोयला बनाने की भट्टी में बालिका का जले हुए शव का अवशेष मिले हैं। संभावना है कि उसके साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई और लाश भट्टी में जला दी गई।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>भीलवाड़ा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 May 2024 11:57:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Narendra Dabholkar Murder Case : पुणे कोर्ट ने सुनाया फैसला, 2 आरोपियों को आजीवन कारावास</title>
                                    <description><![CDATA[नरेन्द्र दाभोलकर हत्या मामले में आज पुणे कोर्ट ने फैसला सुनाया है। इस हत्याकाण्ड में आरोपी बनाए 5 आरोपियों में से 2 को आजीवन कारावास की सजा दी गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/narendra-dabholkar-murder-case-pune-court-gave-life-imprisonment-to/article-77432"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/t21rer-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>पुणे। नरेन्द्र दाभोलकर हत्या मामले में आज पुणे कोर्ट ने फैसला सुनाया है। इस हत्याकाण्ड में आरोपी बनाए 5 आरोपियों में से 2 को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। इसके अलावा 3 आरोपियों को निर्दोष पाया गया है। आजीवन कारावास सुनाए गए आरोपी सचिन अंदुरे और शरद कालस्कर है। वर्ष 2013 में हत्या होने के बाद 2014 में यह केस सीबीआई को सौंपा गया था। जिसके बाद 2016 में सीबीआई द्वारा चार्जसीट दाखिल की गई थी। और 2019 में पूरक चार्जसीट दाखिल की गई थी। </p>
<p>गौरतलब है कि नरेन्द्र दाभोलकर की हत्या 20 अगस्त 2013 में की गई थी। नरेन्द्र दाभोलकर सामाजिक कार्यकर्ता थे जो अंधविश्वास के खिलाफ लोगों की जागरूकता के लिए अभियान चलाते थे।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 May 2024 12:14:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दरिंदों को फांसी: बून्दी जिले के विशिष्ट न्यायालय ने नाबालिग बालिका के साथ सामुहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में सुनाया फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[अपराधी सुलतान एंव छोटुलाल को फांसी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/bundi-news--hanging-of-the-poor--special-court-of-bundi-district-pronounced-the-verdict-in-the-case-of-gang-rape-and-murder-of-a-minor-girl/article-8838"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/rapists.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर/बूंदी।  बून्दी जिले के विशिष्ट न्यायालय (पोक्सो कोर्ट नम्बर 2) ने नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के मामले में दो आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है। दरअसल बसोली थाना क्षेत्र के अन्तर्गत 23 दिसम्बर  2021 को हुऐ नाबालिग  बालिका के साथ सामुहिक बलात्कार और निर्ममता पूर्वक हत्या के दोषसिद्ध अपराधी सुलतान एंव छोटुलाल निवासी काला कुंआ थाना बसोली को फांसी की सजा सुनाई है। <br /><br />महानिदेशक पुलिस एम एल लाठर ने बताया कि बालिकाओं व महिलाओं पर होने वाले अपराधों को लेकर राजस्थान पुलिस अत्यधिक संवेदनशील है, एवं इन मामलों को अत्यधिक  गम्भीरता से लिया जाकर अपराधियों की पहचान व गिरफ्तारी एवं साक्ष्य एकत्रित कर केस ऑफिसर स्कीम में लेकर अपराधियों को सजा दिलाने की पुख्ता कार्यवाहियां की जा रही है। उन्होंने बताया कि पुलिस का सटीक श्रृंखलाबध्द अनुसंधान वैज्ञानिक तकनीकी साधनों को उपयोग के साथ ही किया गया। विशेष लोक अभियोजक के द्वारा तथ्यों के प्रभावी प्रस्तुतिकरण के बल पर अपराधी फांसी के फन्दे तक पहुंचे है।<br /><br />बून्दी पुलिस अधीक्षक जय यादव ने बताया कि 23 दिसम्बर 2021 को बसोली थाना क्षेत्र के अन्तर्गत घने जंगलो में एक नग्न नाबालिक बालिका की लाश मिली थी। इस घटना की गम्भीरता को देखते हुऐ स्वयं पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे। घटना के वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्रित करने के लिए कोटा से विधि विज्ञान प्रयोगशाला के विशेषज्ञो एवं डॉग स्कॉड को घटना स्थल पर बुलाया गया। इस पर समस्त पुलिस जाप्ते के द्वारा आस पास के घने जंगलो में अज्ञात अपराधियों को पकडने एवं अपराधियों के द्वारा छोडे गये साक्ष्यो को एकत्रित करने के लिए सघन तलाशी ली गई। पूरे जंगल को सील कर 10 थानाधिकारी एवं करीब 200 पुलिस जवानो के एंव डॉग स्कॉड के साथ मिलकर पूरे जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। पुलिस के कठिन परिश्रम के फलस्वरूप मात्र 12 घण्टे मे अपराधियो को दबोचा जा सका। तीनों अपराधियों ने पूछताछ में अपना जुर्म स्वीकार किया।<br />अनुसंधान में लगी पुलिस टीम द्वारा एवं स्वयं पुलिस अधीक्षक द्वारा कडी से कडी जोडते हुऐ साक्ष्यो को एकत्रित किया व अपराधियों को न्यायालय के समक्ष उनके अंजाम तक पहुंचाने हेतु 3 कार्य दिवस में न्यायालय पोक्सो नम्बर 2 बून्दी में चालान प्रस्तुत किया। राज्य सरकार सरकार ने संवेदन शीलता दिखाते हुऐ एक लम्बी चौडी प्रक्रिया को मात्र 24 घण्टे में पूरी कर प्रकरण में प्रभावी पैरवी के लिए महावीर सिंह किशनावत एडवोकेट राजस्थान हाईकोर्ट को स्पेशल पीपी नियुक्त किया गया। बून्दी पुलिस ने जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिये प्रकरण को केस ऑफिसर स्कीम में चयनित कर वृत्ताधिकारी वृत बून्दी हेमन्त कुमार को नियुक्त किया गया।</p>
<p><br />पोक्सो कोर्ट में स्पेशल पीपी ने बहस मे बताया कि जब नाबालिग पिडिता मृतका मुल्जिम सुल्तान 27 से छुडा कर अपने रिश्ते में लगने वाले नाना छोटुलाल 62 ( अभियुक्त ) की तरफ मदद के लिऐ दौडी तो अभियुक्त छोटुलाल ने भी पीडिता के साथ बलात्कार किया। मृतका के शरीर पर 19 चोटे मारपीट , नाखुनों से नोचने एवं दांतो से काटने के निशान इस बात की कहानी कहते है, कि हैवानों ने अपनी हैवानियत किस कदर बरपाई होगी। तीनो मुल्जिमानो ने पीडिता मृतका के साथ हत्या से पूर्व व हत्या के बाद भी मृतका की डेड बॉडी से रेप किया जो कि दुर्लभतम से दुर्लभतम की श्रेणी मे आता है। दोनो अभियुक्तगण सुल्तान व  छोटुलाल के लिऐ समाज हित मे मृत्यु दण्ड की मांग की गई। न्यायालय ने मात्र 11 कार्य दिवस में ही दोनों अभियुक्तगणों को मृत्युदण्ड की सजा सुनाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Apr 2022 16:14:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दरिंदे को फांसी की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर : कोर्ट ने कहा-मुल्जिम राक्षस प्रवृति का : दुष्कर्म के बाद सात साल की मासूम की कर दी थी हत्या : दो लाख एक हजार का लगाया अर्थदंड]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/nagaur/%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%9C%E0%A4%BE/article-1841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/nagaur-rape-justice.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> मेड़तासिटी</strong>। पादूकलां थाना क्षेत्र के एक गांव में मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या के मामले में विशिष्ट न्यायालय (पोक्सो) मेड़ता न्यायाधीश रेखा राठौड़ ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर का मानते हुए आरोपी दिनेश पुत्र रामचन्द्र निवासी केरिया माकड़ा को 5 (ठ) (ड) (झ)/  6 पोक्सो एक्ट 2012 एवं भादस की धारा 302 में फांसी की सजा सुनाते हुए आदेश दिया कि जब तक आरोपी की मृत्यु नहीं हो जाए तब तक उसको लटकाकर रखा जाए। साथ ही दो लाख एक हजार का अर्थदंड भी लगाया।  न्यायाधीश राठौड़ ने गुरुवार को  आरोपी दिनेश को दोषी करार दिया था। विशिष्ट लोक अभियोजक (पोक्सो) सुमेरसिंह बेड़ा ने बताया कि न्यायाधीश राठौड़ ने सजा के अपने फैसले में आरोपी दिनेश को भादस की धारा 363 में 7 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपए अर्थदंड से दंडित किया। भादस की धारा 342 में एक वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपए अर्थ दंड, भादस की धारा 201 में 7 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपए अर्थदंड से दंडित किया।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br /> पीड़ित प्रतिकर स्कीम की अनुशंषा की </strong></span></span><br /> न्यायालय ने मृतका के माता-पिता पीड़ित प्रतिकर स्कीम 2011 के तहत समुचित प्रतिकर दिलाई जाने की अनुशंषा की है।</p>
<p> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>20 सितम्बर को दुष्कर्म, 27 को आरोप पत्र पेश</strong></span></span><br /> पादूकलां थाना क्षेत्र के एक गांव में सात वर्षीय मासूम बालिका के साथ गत 20 सितम्बर को दुष्कर्म कर उसकी हत्या के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के छह दिन में पुलिस ने अनुसंधान कर 27 सितम्बर को विशिष्ट न्यायालय (पोक्सो) मेड़ता में आरोपी दिनेश के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया। आरोप पत्र पेश करने के बाद न्यायाधीश रेखा राठौड़ ने मामले में  डे-टू-डे सुनवाई की।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>फैसले में कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी : विश्वास के रिश्तों को तोड़कर पिशाच बन गया मुल्जिम </strong></span></span></span><br /> न्यायाधीश ने अपने दण्डादेश में लिखा कि प्रकरण में मृतका की आयु करीब 8 वर्ष थी। अभियुक्त ने उसके साथ बलात्कार कर गला घोटकर उसकी हत्या कर दी। मुल्जिम दिनेश का यह कृत्य पाशविक है तथा उसकी राक्षसवृति को दर्शाता है। मुल्जिम दिनेश मृतका की मां का धर्म भाई बना हुआ था। मुंह बोले मामा के नाते वह अक्सर उनके घर आता। विडंबना तो यह है कि मृतका कुत्तों से बचाने के लिए मुल्जिम दिनेश के साथ गई और वह इतना पिशाच बन गया कि सहायता करने वाली को ही अपनी हवस का शिकार बनाकर मार डाला। उसने विश्वास के रिश्तों को भी तोड़ा है। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>खूब लड़ी, दुष्कर्मी के बाल तक नोंच डाले</strong></span></span><br /> न्यायाधीश ने लिखा कि मृतका असहाय छोटी बच्ची थी, लेकिन वह बहादुर और साहसी थी। उसने मुल्जिम से बचने के लिए भरपूर कोशिश की, उसके मासूम हाथों की मुल्जिम दिनेश के बालों पर इतनी मजबूत पकड़ थी कि मुल्जिम दिनेश के बाल उसके सिर से फट कर मृतका के हाथों की नन्हीं मुठ्ठियों में आ गए थे।  <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>सजा सुनाने के बाद शांत रहा आरोपी </strong></span></span><br /> विशिष्ट न्यायाधीश ने आरोपी दिनेश को जब फांसी की सजा सुनाई उस दौरान दिनेश शांत रहा और जब पुलिस उसको जेल ले जाने लगी तब भी शांत और चुपचाप ही दिखाई दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>नागौर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Oct 2021 11:44:13 +0530</pubDate>
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