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                <title>Testimony - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राहुल गांधी मानहानि मामला : सत्यकी सावरकर की जिरह में कई अहम स्वीकारोक्तियां, 15 जून को होगी अगली सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[पुणे की विशेष अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान सत्यकी सावरकर ने स्वीकार किया कि 'स्वातंत्र्यवीर' कोई सरकारी उपाधि नहीं बल्कि एक सम्मानसूचक संबोधन है। उन्होंने यह भी माना कि उनके द्वारा संचालित 'हर घर सावरकर' अभियान का कोई आधिकारिक वित्तीय रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-defamation-case-many-important-confessions-in-the-cross-examination/article-155702"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/rahul.png" alt=""></a><br /><p>पुणे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर कथित मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को विशेष सांसद-विधायक अदालत में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आये। न्यायाधीश अमोल श्रीराम शिंदे की अदालत में शिकायतकर्ता एवं वीर सावरकर के प्रपौत्र सत्यकी सावरकर से राहुल गांधी के वकील मिलिंद पवार ने जिरह की। जिरह के दौरान सत्यकी सावरकर ने स्वीकार किया कि 'स्वातंत्र्यवीर' कोई सरकारी या कानूनी मान्यता प्राप्त उपाधि नहीं है, बल्कि एक कवि और नाटककार द्वारा इस्तेमाल किया गया सम्मानसूचक संबोधन है। उन्होंने यह भी माना कि इस प्रकार की उपाधियों के उपयोग पर कोई कानूनी रोक नहीं है।</p>
<p>सत्यकी ने कहा कि ऐसी उपाधियों का उपयोग व्यक्ति अपनी सार्वजनिक पहचान मजबूत करने के लिए कर सकता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि किसी सम्मानसूचक उपाधि की उपयुक्तता तय करने के लिए कोई सरकारी या वैधानिक संस्था मौजूद नहीं है। उन्होंने इस दावे को खारिज किया कि विनायक दामोदर सावरकर ने स्वयं 'स्वातंत्र्यवीर' की उपाधि अपनायी थी। मामले के खर्च पर उन्होंने बताया कि मुकदमेबाजी का पूरा खर्च वह स्वयं वहन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 'हर घर सावरकर' अभियान के तहत पुस्तकें, टी-शर्ट और अन्य सामग्री बेची जाती है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह समिति पंजीकृत संस्था नहीं है और इसके खातों या बैलेंस शीट का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।</p>
<p>सत्यकी सावरकर की जिरह पूरी नहीं हो सकी और मामले की अगली सुनवाई 15 जून 2026 को होगी। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2023 में सत्यकी सावरकर ने राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया था। उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने मार्च 2023 में लंदन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए वीर सावरकर के बारे में अपमानजनक और तथ्यहीन टिप्पणियां की थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:08:32 +0530</pubDate>
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                <title>आखिर क्यों जेफरी एपस्टीन की सहयोगी मैक्सवेल ने संसद की समिति के सवालों का जवाब देने से किया इनकार? जानें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[एपस्टीन की सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल ने अमेरिकी हाउस कमेटी के सवालों पर पांचवें संशोधन का हवाला देकर जवाब देने से इनकार किया, पीड़ितों ने न्याय की मांग दोहराई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/why-did-jeffrey-epsteins-associate-maxwell-refuse-to-answer-the/article-142652"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(8)8.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन की सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल ने सोमवार को हाउस कमेटी ऑन ओवरसाइट एंड अकाउंटेबिलिटी के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, मैक्सवेल टेक्सास की जेल में बंद है, जहाँ वह यौन तस्करी के लिए 20 साल की सजा काट रही है। जेल के ही बंद कमरे से वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समिति के सामने पेश हुई थी।</p>
<p>समिति के अध्यक्ष जेम्स कोमर ने कहा कि जैसा कि उम्मीद थी, मैक्सवेल ने पांचवें संशोधन(कानून) का सहारा लेते हुए चुप रहने के अपने अधिकार का उपयोग किया। जेम्स कोमर ने कहा, यह स्पष्ट रूप से बहुत निराशाजनक है। हमारे पास उन अपराधों के बारे में पूछने के लिए कई सवाल थे जो उसने और एपस्टीन ने किए थे, साथ ही संभावित सह-साजिशकर्ताओं के बारे में भी सवाल थे। उन्होंने कहा कि जीवित बचे लोगों के लिए न्याय ही इस जांच का मकसद है।</p>
<p>अमेरिकी संविधान का पांचवां संशोधन अमेरिकियों को सवालों का जवाब देने से इनकार करके खुद के खिलाफ सबूत देने से बचने का अधिकार देता है। सुनवाई के बाद डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रतिनिधि मेलानी स्टैंसबरी ने पत्रकारों को बताया कि मैक्सवेल ने इस अवसर का उपयोग क्षमादान के लिये अभियान चलाने के तौर पर किया। </p>
<p>जेम्स कोमर ने कहा कि एपस्टीन के पीड़ितो से बात करने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मैक्सवेल एक बहुत ही बुरी महिला है जो किसी भी प्रकार की छूट की हकदार नहीं है। इससे पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट में मैक्सवेल के वकील डेविड ऑस्कर मार्कस ने कहा था कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा क्षमादान दिया जाता है तो मैक्सवेल पूरी तरह और ईमानदारी से बोलने के लिए तैयार है। उन्होंने पोस्ट किया, केवल वही पूरा विवरण दे सकती है। कुछ लोगों को शायद वह पसंद न आए जो वे सुनेंगे, लेकिन सच्चाई मायने रखती है।</p>
<p>मैक्सवेल की पेशी से पहले हाउस ओवरसाइट कमेटी को भेजे गए एक पत्र में एपस्टीन पीड़तिों के एक समूह ने सांसदों से मैक्सवेल द्वारा दी गई किसी भी जानकारी पर संदेह करने का आग्रह किया। उन्होंने एपस्टीन के तस्करी अभियान में शामिल कई शक्तिशाली लोगों की पहचान करने से इनकार करने और कानून प्रवर्तन के साथ सार्थक सहयोग न करने के लिए उसकी आलोचना की। व्हाइट हाउस ने पहले कहा था कि मैक्सवेल के संबंध में किसी भी उदारता पर चर्चा नहीं की जा रही है।</p>
<p>मैक्सवेल को 2021 में अपने पूर्व प्रेमी एपस्टीन के लिये नाबालिग लड़कियों को शोषण के लिए फंसाने में उसकी भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया था। एपस्टीन की 2019 में जेल में मृत्यु हो गई थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 16:36:39 +0530</pubDate>
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