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                <title>Labour Codes - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Labour Codes RSS Feed</description>
                
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                <title>संसद में लेबर रिफॉर्म पर बड़ा बयान: गिग वर्कर्स की सुरक्षा मजबूत होगी, न्यूनतम मजदूरी के नियम भी बदलेंगे अब</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने संसद में कहा कि नई श्रम संहिताओं के जरिए गिग वर्कर्स को कानूनी पहचान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधान उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही न्यूनतम मजदूरी तय करने की नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी है, जिससे राज्यों को निर्धारित सीमा से कम वेतन तय करने की अनुमति नहीं होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-statement-on-labor-reform-in-parliament-security-of-gig/article-161421"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(3)15.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को संसद में कहा कि गिग वर्कर्स के हितों की रक्षा के लिए नयी श्रम संहिताओं में पर्याप्त प्रावधान किये गये हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख लाल मांडविया ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि नयी श्रम संहिताओं में गिग वर्कर्स के हितों की रक्षा के लिए सभी प्रावधान किये गये हैं।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के गिग वर्कर्स समझौते से खुद के अलग रखने के केन्द्र सरकार के निर्णय का बचाव करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत पहला देश है जिसने गिग वर्कर्स को मान्यता दी है। यूरोप का अलग मॉडल है, भारत का अलग मॉडल है। भारत को इस संबंध में लचीलापन चाहिये था। श्रमिकों की समाजिक सुरक्षा के बारे में मांडविया ने कहा कि साल 2014 से पहले केवल 19 प्रतिशत लोग सामाजिक सुरक्षा के दायरे में थे। आज यह संख्या बढ़कर 68 प्रतिशत पर पहुंच गयी है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि काम छूट जाने के बावजूद कर्मचारी भविष्य निधि का लाभ जारी रहे।</p>
<p>न्यूनतम मजदूरी से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने कहा कि आज तक केंद्र सरकार मशविरा के रूप में राज्यों से न्यूनतम मजदूरी की सिफारिश करती थी जिसे मानना या न मानना राज्यों के ऊपर था। नयी श्रम संहिताओं के तहत केंद्र सरकार न्यूनतम मजदूरी की कम से कम सीमा तय करेगी। राज्य उस सीमा से कम न्यूनतम मजदूरी तय नहीं कर सकेंगे। यह 'ए', 'बी' और 'सी' श्रेणियों में होगा। बड़े शहर 'ए' श्रेणी में, छोटे और मझौले शहर 'बी' तथा ग्रामीण इलाके 'सी' श्रेणी में आयेंगे। इलाके में जीवनयापन के जरूरी खर्च के आधार पर न्यूनतम मजदूरी की सीमा तय की जायेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 15:30:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>गुरूवार आधी रात से शुरू होगी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल: सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की संभावना, अस्पतालों, दवाखानों, एम्बुलेंस सेवाओं, अग्निशमन और बचाव कार्यों, दूध की आपूर्ति को छूट</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की 24 घंटे हड़ताल 12 फरवरी आधी रात से शुरू। बैंकिंग, परिवहन प्रभावित रह सकते हैं। अस्पताल, एम्बुलेंस, दूध आपूर्ति व तीर्थ वाहन छूट में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/nationwide-strike-of-central-trade-unions-will-start-from-thursday/article-142722"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(2)9.png" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की ओर से बुलायी गयी 24 घंटे की राष्ट्रव्यापी हड़ताल 12 फरवरी  आधी रात से शुरू होगी, जिससे कई क्षेत्रों में व्यापक व्यवधान होने की संभावना है। अस्पतालों, दवाखानों, एम्बुलेंस सेवाओं, अग्निशमन और बचाव कार्यों, दूध की आपूर्ति और समाचार पत्र वितरण जैसी आवश्यक सेवाओं को  छूट दी गई है, ताकि आम जनता को कठिनाई न हो। केरल में सबरीमाला तीर्थयात्रियों और मारामोन सम्मेलन के प्रतिभागियों को ले जाने वाले वाहनों को भी हड़ताल के प्रतिबंधों से मुक्त रखा गया है।</p>
<p>यह हड़ताल केंद्र सरकार की श्रम नीतियों, विशेष रूप से चार नयी श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के कार्यान्वयन के विरोध में आयोजित की जा रही है। ट्रेड यूनियनों का तर्क है कि ये नीतियां श्रमिकों की सुरक्षा और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकारों को कमजोर करती हैं। यूनियन नेताओं ने दावा किया है कि इस हड़ताल में संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के करोड़ों श्रमिक भाग लेंगे। हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, सरकारी विभागों, बैंङ्क्षकग, बीमा, परिवहन, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और विभिन्न सेवा क्षेत्रों के कर्मचारियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिससे यह हाल के वर्षों में सबसे बड़ी समन्वित श्रमिक कार्रवाइयों में से एक बन गयी है।</p>
<p>कई राज्यों में सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है। प्रत्येक क्षेत्र में भागीदारी के स्तर के आधार पर सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, बैंकों और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में आंशिक या पूर्ण व्यवधान देखा जा सकता है। औद्योगिक उत्पादन और व्यावसायिक गतिविधियों के भी इससे प्रभावित होन की उम्मीद है, क्योंकि ट्रेड यूनियनों ने श्रमिकों से उस दिन काम से दूर रहने का आह्वान किया है।</p>
<p>यूनियनों ने कहा है कि इस विरोध प्रदर्शन का उद्देश्य मजबूत सामाजिक सुरक्षा उपायों, श्रम अधिकारों की सुरक्षा और उन नीतिगत बदलावों के लिए दबाव बनाना है जो श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आगे की कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और हड़ताल की अवधि के दौरान आवश्यक सेवाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 12:37:08 +0530</pubDate>
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