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                <title>सफाई के लिए लगाए कचरा पात्र हुए कचरा, प्लास्टिक के डस्टबीन  भी हुए गायब</title>
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                        <![CDATA[चम्बल रिवर फ्रंट के मुख्य द्वार से बोट चौराहे के बीच यहीं स्थिति है।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/garbage-bins-installed-for-cleaning-have-become-garbage--plastic-dustbins-have-also-disappeared/article-142738"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/854.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कचरा पात्र(डस्टबीन) कचरा डालने के लिए होता है। लेकिन हालत यह है कि शहर में कचरा पात्र खुद ही कचरा हो रहे हैं। इसका उदाहरण हैं नदी पार क्षेत्र में लगे नगर निगम के डस्टबीन।नगर निगम की ओर से शहर में मुख्य मार्गों पर पहले जहां कई तरह के कचरा पात्र लगाए थे। लेकिन लोहे व स्टील के होने से उनमें से अधिकतर चोरी हो गए थे। जिससे डस्टबीन होने के बाद भी उनका कोई फायदा नहीं हो रहा था। शहर में ऐसा किसी एक जगह नहीं पूरे कोटा दक्षिण क्षेत्र में देखने को मिला था।</p>
<p><strong>कोटा उत्तर क्षेत्र में प्लास्टिक के लगाए थे डस्टबीन</strong><br />पूर्व में चोरी हुए लोहे व स्टील के डस्टबीन से सबक लेते हुए नगर निगम कोटा उत्तर की ओर से उस समय प्लास्टिक के डस्टबीन बनवाए। लोहे के ऐंगल वाले फ्रेम में गीला व सूखा कचरा डालने के लिए दो अलग-अलग डिब्बे लगाकर उन डस्टबीन को तैयार कराया गया। जिन्हें पूरे क्षेत्र में सड़क किनारे मुख्य मार्गों पर लगाया गया था। जिससे राह चलते लोग सड़क पर कचरा नहीं डालकर उन डस्टबीन में डाले। लेकिन हालत यह है कि प्लास्टिक के डस्टबीन में कचरा डालना तो दूर वे डस्टबीन ही कचरा हो गए।</p>
<p><strong>यह हो गई हालत</strong><br />कोटा उत्तर क्षेत्र में लगाए गए अधिकतर डस्टबीन में से कहीं तो केवल लोहे के ऐंगल वाले फ्रेम ही बचे हैं। उनमें से दोनों डिब्बे गायब हो गए। कहीं एक ही डिब्बा बचा है दूसरा गायब हो गया। कहीं एक डिब्बा है तो वह भी टूटा हुआ है। जिससे उसमें कचरा डाला नहीं जा सकता। ऐसी जगह पर दिखाने के लिए डस्टबीन हैं जबकि कचरा तो सड़क पर ही फैला हुआ है। किसी में दोनों डिब्बे हैं तो उनके ऊपर के ढक्कन गायब हैं।ऐसा नदी पार सकतपुरा क्षेत्र में चम्बल रिवर फ्रंट के मुख्य द्वार से बोट चौराहे के बीच की स्थिति है। वहीं राजकीय महाविद्यालय के सामने व गीता भवन के सामने तालाब किनारे भी यही स्थिति है।</p>
<p><strong>नगर निगम कोटा महोत्सव में आएंगे हजारों लोग</strong><br />हालत यह है कि आने वाले दिनों में 21 व 22 फरवरी को रिवर फ्रंट के शौर्य घाट पर कोटा महोत्सव का आयोजन किया जाना है। जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और बाहर से भी लोग आएंगे। उस समय वे लोग इस तरह के डस्टबीन व सड़क पर कचरे के ढेर देखकर शहर व निगम की धूमिल छवि साथ लेकर जाएंगे।</p>
<p><strong>500 में से 400 लगा दिए थे</strong><br />जानकारी के अनुसार नगर निगम की ओर से प्लास्टिक के करीब 500 डस्टबीन बनवाए थे। जिनमें से एक साथ 400 लगा दिए थे। लेकिन उसके बाद वर्तमान जिला कलक्टर द्वारा शहर में निरीक्षण के दौरान जहां टूटे डस्टबीन दिखे थे उन्हें बदल दिया था। लेकिन अब फिर से अधिकतर जगह पर डस्टबीन टूट चुके हैं व गायब हो रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />प्लास्टिक के डस्टबीन को न तो कोई चोरी कर रहा है और न ही ये गायब हो रहे हैं। इनमें कचरा डालने पर गाय व बंदर इनमें मुंह मारते हैं। खाने की चीजें लेने के प्रयास में वे जब डस्टबीन को हिलाते हैं तो कई टूट जाते हैं। टूटने के बाद उन्हें हटा दिया जाता है। जिससे ऐसा लगता है जैसे ये चोरी हो रहे हैं। वैसे पहले भी जहां टूटे व गायब हुए थे वहां बदल दिए थे। अब भी यदि कहीं ऐसे डस्टबीन हैं तो वहां भी बदल दिया जाएगा। हालांकि निगम की ओर से शीघ्र ही इस तरह के एक हजार और डस्टबीन क्रय किए जा रहे हैं। जिनका उपयोग होने से सड़क पर कचरा नहीं डलेगा।<br /><strong>- मोतीलाल चौधरी, स्वास्थ्य अधिकारी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 14:56:12 +0530</pubDate>
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