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                <title>CEPA - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दिल्ली दौरे से पहले आया बड़ा बयान: नहीं उठाएंगे ट्रूडो-हार्पर जैसा कदम, पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात</title>
                                    <description><![CDATA[कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा पर मुंबई पहुँच रहे हैं। पीएम मोदी के साथ उनकी मुलाकात में एआई, रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा होगी। इस यात्रा का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $70 अरब तक पहुँचाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक साझेदारी को नया आयाम देना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-statement-made-before-prime-minister-mark-carneys-visit-to/article-144645"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/canada-pm.png" alt=""></a><br /><p>ओटावा। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी गुरुवार को भारत की आधिकारिक यात्रा पर मुंबई के लिए रवाना होंगे। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और रक्षा के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना है। </p>
<p>मुंबई उनकी भारत यात्रा का पहला पड़ाव होगा, जिसके बाद वह नयी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच आर्थिक सहभागिता के विस्तार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में सहयोग, प्रतिभा एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान और रक्षा तथा रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने पर चर्चा होने की उम्मीद है। </p>
<p>मार्क कार्नी की भारत यात्रा 26 फरवरी से सात मार्च तक के व्यापक हिन्द-प्रशांत दौरे का हिस्सा है, जिसमें वह ऑस्ट्रेलिया और जापान भी जाएंगे। कनाडा सरकार का उद्देश्य व्यापार में विविधता लाना, कनाडाई श्रमिकों के लिए नए अवसर सृजित करना और ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, एआई तथा रक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करना है।</p>
<p>भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और 2024 में कनाडा का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 30.8 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। दोनों देश व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर (एजेंसी) कर रहे हैं, जिसके तहत 2030 तक व्यापार को दोगुना कर 70 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है।</p>
<p>पीएम मार्क कार्नी ने कहा, एक अधिक विभाजित और अनिश्चित विश्व में, कनाडा की नयी सरकार उन बातों पर ध्यान केन्द्रित कर रही है जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं। हम एक मजबूत, अधिक स्वतंत्र और लचीली अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रहे हैं, अपने व्यापार को विविध बना रहे हैं और बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित कर रहे हैं।</p>
<p>भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ भी कनाडा के मजबूत व्यापारिक संबंध हैं। 2024 में कनाडा-ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार 6.1 अरब डॉलर रहा, जबकि जापान के साथ वार्षिक व्यापार 36.4 अरब डॉलर है। सिडनी और कैनबरा में पीएम कार्नी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज से मुलाकात करेंगे और रक्षा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, व्यापार और उन्नत प्रौद्योगिकी पर चर्चा करेंगे। वह ऑस्ट्रेलियाई संसद के दोनों सदनों को संबोधित भी करेंगे। </p>
<p>टोक्यो में वह जापान की प्रधानमंत्री तकाइची सानाए से स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, महत्वपूर्ण खनिज और खाद्य सुरक्षा पर साझेदारी बढ़ाने को लेकर बातचीत करेंगे। साथ ही मुक्त और खुला हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त सुरक्षा और रक्षा प्रयासों पर भी चर्चा होगी। यह दौरा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करते हुए घरेलू स्तर पर लचीली अर्थव्यवस्था निर्माण की कनाडा की रणनीति को रेखांकित करता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 12:45:37 +0530</pubDate>
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                <title>ओमान ने दिया भारतीय निवेशकों को नये एल्युमिनियम जोन में निवेश का न्योता, द्विपक्षीय व्यापार में आएगी तेजी</title>
                                    <description><![CDATA[ओमान ने नए एल्युमिनियम प्रोसेसिंग जोन में भारतीय निवेशकों को आमंत्रित किया। यह पहल सीईपीए के तहत मूल्य-वर्धित विनिर्माण और बढ़ते द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/oman-invites-indian-investors-to-invest-in-new-aluminum-zone/article-142766"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(8)9.png" alt=""></a><br /><p>ओमान। ओमान अपने प्लास्टिक क्लस्टर की सफलता को दोहराने की कोशिश के तहत भारतीय निवेशकों को नयी योजना वाले एल्युमीनियम प्रोसेसिंग जोन में हिस्सा लेने के लिये आमंत्रित कर रहा है। इससे यह पहल तेजी से बढ़ रही भारत-ओमान आर्थिक साझेदारी के तहत आयेगी।</p>
<p>लादायन कार्यक्रम के प्रमुख मुंधर अल-रवाहि ने यूनी(एजेंसी) से बातचीत में कहा कि ओमान एल्युमिनियम क्षेत्र के इर्द-गिर्द एक संपूर्ण इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है। उनका कहना है कि यह नया औद्योगिक क्लस्टर कच्चे माल के निर्यात के बजाय मूल्य वर्धित प्रसंस्करण और विनिर्माण पर केंद्रित होगा।</p>
<p>तीन वर्ष पहले ओमान ने प्लास्टिक विकास जोन की शुरुआत की थी, जिसमें अब तक 28 परियोजनाओं पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इनमें से करीब 10 परियोजनाओं में उत्पादन शुरू कर चुका है या शुरू होने के करीब हैं, जबकि शेष विभिन्न चरणों में हैं। अल-रवाहि ने कहा, इसी मॉडल को अब एल्युमिनियम क्षेत्र में लागू करने की योजना है, जिसमें देश के स्मेल्टर्स को निचली श्रेणी के उद्योगों के लिए मुख्य आपूर्तिकर्ता बनाया जाएगा। </p>
<p>भारत-ओमान के बीच 2020 से अब तक निवेश प्रवाह तीन गुना बढ़कर पांच अरब डॉलर तक पहुंच गया है। धातु विनिर्माण, हरित इस्पात और अमोनिया जैसे क्षेत्र सहयोग के प्रमुख स्तंभ बनकर उभरे हैं। रक्षा सहयोग के अलावा, दोनों देश अंतरिक्ष, रेयर अर्थ मिनरल्स और साइबर सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी सहयोग पर चर्चा कर रहे हैं।</p>
<p>लादायन कार्यक्रम के तहत प्रस्तावित एल्युमिनियम जोन इसी व्यापक औद्योगिक सहयोग का हिस्सा है। ओमान का मानना है कि भारतीय कंपनियां उसकी स्थापित एल्युमिनियम अवसंरचना और हरित उत्पादन की संभावनाओं का लाभ उठा सकती हैं। अल-रवाहि के अनुसार, ओमान की राजनीतिक स्थिरता, प्रतिस्पर्धी दरों पर औद्योगिक भूमि, कम बिजली लागत और यूरोप-एशिया के बीच रणनीतिक भौगोलिक स्थिति निवेशकों के लिए बड़े आकर्षण हैं। अरब सागर-खाड़ी क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स हब के रूप में ओमान भारतीय निर्माताओं को खाड़ी, यूरोप और अफ्रीका के बाजारों तक पहुंच प्रदान करता है।</p>
<p>वर्ष 2024-25 में भारत-ओमान द्विपक्षीय व्यापार 10.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें एल्युमिनियम वैल्यू चेन की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। हाल ही में हस्ताक्षरित भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के तहत ओमान ने लगभग सभी उत्पादों पर शून्य-शुल्क पहुंच प्रदान की है, जिससे पहले लागू 0-5 प्रतिशत के एमएफएन शुल्क समाप्त हो गए हैं। यह समझौता संयुक्त उपक्रमों और औद्योगिक सहयोग को और मजबूती देगा।</p>
<p>अल-रवाहि ने बताया कि नए एल्युमिनियम जोन में एक भारतीय साझेदार पहले ही जुड़ चुका है-मल्टी-बॉन्ड मेटल  समझौते पर आज हस्ताक्षर होंगे। जिंदल, इफको और कृभको जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां पहले से ही ओमान में विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं। ओमान की यह रणनीति संसाधन-आधारित उद्योगों-प्लास्टिक, एल्युमिनियम, इस्पात और अन्य क्षेत्रों में मूल्य वर्धन को बढ़ावा देने की व्यापक नीति का हिस्सा है, जिससे वह केवल कच्चे माल या हाइड्रोकार्बन निर्यात तक सीमित न रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 15:36:12 +0530</pubDate>
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