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                <title>Consensus - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Consensus RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पीएम मोदी का बड़ा बयान : अमेरिका-ईरान सहमति से क्षेत्र में स्थिरता और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा, युद्धविराम का भारत ने किया स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 107 दिनों से जारी इस संघर्ष की समाप्ति से वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से क्षेत्र में स्थिरता आएगी और मुक्त व्यापार सुनिश्चित होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modis-big-statement-america-iran-agreement-will-boost-stability-and/article-157032"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम होगी। पीएम मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के संबंध में अमेरिका और ईरान के बीच हुई समझ का स्वागत करता हूँ, जिसने विश्व भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान उत्पन्न किया है और अनेक देशों में जनहानि का कारण बना है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति से क्षेत्र में शांति स्थापित होगी और नौवहन तथा व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।<br /> <br />प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत को आशा है कि इस समझ के कार्यान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता की पुनर्स्थापना में सहायता मिलेगी तथा नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। हम आशा करते हैं कि शेष मुद्दों पर विचार-विमर्श एक टिकाऊ अंतिम समझौते तक पहुँचेगा।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि अमेरिका और ईरान ने पश्चिम एशिया में पिछले 107 दिनों से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक समझौते पर सहमति व्यक्त की है। अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की बात कही है। दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तत्काल और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:27:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जयराम रमेश का बड़ा बयान: हॉर्मुज खुलने से भारत को फायदा, लेकिन अर्थव्यवस्था की चुनौतियां बरकरार</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते का स्वागत करते हुए इसे सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से भारत को ऊर्जा और व्यापार में बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इससे भारत की सुस्त निजी निवेश और रिकॉर्ड व्यापार घाटे जैसी ढांचागत समस्याएं हल नहीं होंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-statement-of-jairam-ramesh-india-benefits-from-opening-of/article-157004"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jairam-ramesh.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अमेरिका और ईरान के बीच 19 जून को जिनेवा में प्रस्तावित समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि पश्चिम एशिया में शत्रुता समाप्त करने की दिशा में यह एक सकारात्मक और आवश्यक कदम है। रमेश ने आशा व्यक्त की, कि अमेरिका, ईरान और इजराइल इस समझौते का पालन करेंगे तथा यह पहल क्षेत्र में स्थायी शांति और सामान्य संबंधों की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगी। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरुमध्य के बिना किसी प्रतिबंध के पुनः खुलने से भारत को निश्चित रूप से राहत मिलेगी, विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों के संदर्भ में। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचनात्मक समस्याओं का समाधान नहीं होगा।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट से पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही थी। उनके अनुसार रुपया लंबे समय से दबाव में है, डॉलर की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर लगातार बढ़ रहा है तथा निजी निवेश की दरें कई वर्षों से सुस्त बनी हुई हैं, जबकि यही निवेश आर्थिक विकास का प्रमुख आधार है। कांग्रेस नेता ने मांग में कमजोरी के लिए तीन प्रमुख कारण बताए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में वास्तविक मजदूरी में ठहराव रहा है, चीन से आयात की डंपिंग पर रोक लगाने में केंद्र सरकार विफल रही है जिससे रिकॉर्ड व्यापार घाटा पैदा हुआ है और रोजगार सृजित करने वाले एमएसएमई क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरोप लगाया कि कर अधिकारियों और जांच एजेंसियों को दी गई अत्यधिक शक्तियों के कारण निवेश का समग्र वातावरण प्रभावित हुआ है।</p>
<p>विदेश नीति के मुद्दे पर रमेश ने कहा कि 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद जिस पाकिस्तान को भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में सफलता प्राप्त की थी, वह अब क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नया प्रभाव हासिल करता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के रणनीतिक ढांचे में चीन की बढ़ती भूमिका भारत के लिए एक गंभीर भू-राजनीतिक चुनौती बन चुकी है। उन्होंने केंद्र सरकार की पश्चिम एशिया नीति की आलोचना करते हुए कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण की मांग करते हैं। रमेश के अनुसार, मानवीय सरोकारों और भारत की पारंपरिक विदेश नीति प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार को अधिक संतुलित रुख अपनाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:50:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद: अमेरिका-ईरान जंग खत्म करने पर राजी, 19 जून को होंगे ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता पूरा हो गया है। सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत रोक दी गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए खोल दिया गया है, जिससे कच्चे तेल का प्रवाह दोबारा शुरू हो सकेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hope-for-peace-in-west-asia-america-iran-agree-to-end/article-156990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/tru-p.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के मुद्दे पर राजी हो गये हैं। दोनों देशों के बीच रविवार को जंग खत्म करने के लिए शांति समझौते पर सहमति बन गयी और अब आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह शुक्रवार 19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा। इस बात की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया दी है। ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो गया है। सभी को बधाई! मैं इसके ज़रिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोलने और साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मंज़ूरी देता हूँ। दुनिया भर के जहाज़ अपने इंजन चालू करें। तेल का प्रवाह शुरू होने दो!।"</p>
<p>वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। दोनों पक्षों ने लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और हमेशा के लिए रोकने का ऐलान किया है। इस समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह शुक्रवार 19 जून को स्विट्जरलैंड में होगा।" उन्होंने कहा, "हम इस विवाद का कूटनीतिक समाधान खोजने की अपनी प्रतिबद्धता के लिए अमेरिका और ईरान का धन्यवाद करना चाहते हैं। हम इस समझौते तक पहुँचने में मदद के लिए मध्यस्थता की कोशिश में शामिल अपने भाइयों कतर के महान नेतृत्व का भी दिल से आभार व्यक्त करते हैं। मैं सऊदी अरब और तुर्की के दूरदर्शी नेतृत्व का भी विशेष रूप से धन्यवाद करना चाहता हूं, जिन्होंने इस दिशा में बहुत बड़ा योगदान दिया है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि अब जब समझौता हो गया है, तो मध्यस्थ इस हफ़्ते कई बैठकों का आयोजन करेंगे। समझौते को लागू करने से पहले की ये चर्चाएं तकनीकी और आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह के लिए आधार तैयार करेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:33:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रुपये में शानदार मजबूती, 94.68 प्रति डॉलर पर खुला</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल में आई नरमी और अमेरिका-ईरान शांति समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी मिलने से भारतीय रुपया सोमवार को 55 पैसे मजबूत हुआ। डॉलर सूचकांक में गिरावट और घरेलू शेयर बाजार में आई बंपर तेजी के सपोर्ट से रुपया 94.68 प्रति डॉलर पर खुला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rupee-opened-strong-at-9468-per-dollar-due-to-softening/article-156994"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/dollar1.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। कच्चे तेल में नरमी और ईरान—अमेरिका के बीच अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव से मंज़ूरी मिलने के बाद रूपया सोमवार को 55 पैसे मजबूत होकर 94.68 पर खुला। इससे पहले शुक्रवार को रुपया 67 पैसे मजबूत हुआ और कारोबार की समाप्ति पर एक डॉलर 95.18 रुपये पर बंद हुआ। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीद से कच्चे तेल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट है और शेयर बाजार बढ़त में हैं जबकि बॉन्ड यील्ड घट गया है। </p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि ईरान के साथ शांति वार्ता काफी आगे पहुंच गयी है और इस सप्ताहांत पर समझौता संभव है। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में भारतीय मुद्रा 55 पैसे की बढ़त के साथ 94.68 रुपये प्रति डॉलर पर खुली। रुपये की तेजी में डॉलर की गिरावट और घरेलू शेयर बाजारों की तेजी का भी योगदान रहा। दुनिया की दूसरी प्रमुख मुद्राओं के बास्केट में डॉलर सूचकांक आज 0.05 प्रतिशत गिर गया। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:36:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विकसित भारत का विज़न: नीति आयोग की बैठक में पीएम मोदी का आह्वान, राज्यों के सहयोग और महिला सशक्तिकरण पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग की 11वीं संचालन परिषद बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत आगे बढ़ रहा है। पीएम ने 'विकसित भारत' के विज़न के लिए राज्यों से सहयोग, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स का लाभ उठाने और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देने की अपील की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/niti-aayog-an-important-platform-to-work-together-towards-developed/article-156678"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/modi3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि नीति आयोग केन्द्र और राज्यों के बीच सहयोग के मंच के तौर पर अहम भूमिका निभाते हुए राज्यों को 'विकसित भारत' के विज़न के लिए मिलकर काम करने के लिए सशक्त बना सकता है। पीएम मोदी ने गुरुवार को यहां नीति आयोग की संचालन परिषद की 11 वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि दुनिया अभी अनिश्चितता के दौर से गुज़र रही है लेकिन भारत विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "दुनिया अनिश्चितता और अस्थिरता के दौर से गुज़र रही है, फिर भी भारत आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। जैसे-जैसे भारत 'विकसित राष्ट्र' के विज़न को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।" राज्यों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यों के बीच बातचीत का आधार सहयोग, संवाद और विचारों का आदान-प्रदान होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि विभिन्न देशों के साथ हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौतों से भी विकास और निर्यात के अवसर बढेंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा, "भारत ने विकास और निर्यात के नए अवसर पैदा करने के लिए कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं। ये समझौते हमारे एमएसएमई के लिए भी एक बड़ा अवसर साथ लाते हैं, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करके और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर वैश्विक बाज़ारों के लिए तैयार हो सकते हैं।" प्रधानमंत्री ने 'विकसित भारत' के मुख्य स्तंभ के तौर पर महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि खेती, स्टार्टअप, विज्ञान और नवाचार जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाएं बहुत योगदान दे रही हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने में महिलाओं की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए राज्यों को उनकी शिक्षा, कौशल विकास, सुरक्षा और सशक्तिकरण पर ध्यान देना चाहिए। बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उप-राज्यपाल/प्रशासक, केंद्रीय मंत्री और नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 19:00:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-बांग्लादेश संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत: ढाका में दिनेश त्रिवेदी की तैनाती, जल बंटवारे से सुरक्षा तक कई मुद्दे अहम</title>
                                    <description><![CDATA[भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी शुक्रवार को ढाका के लिए उड़ान भरेंगे। उनकी यह रवानगी गंगा जल संधि के नवीनीकरण, तीस्ता नदी परियोजना में चीन की दखल और बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच हो रही है। त्रिवेदी का मुख्य फोकस दोनों देशों के बीच व्यापारिक और भू-राजनीतिक मतभेदों को संभालना होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/beginning-of-a-new-chapter-in-india-bangladesh-relations-dinesh-trivedi/article-156663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/dinesh-trivedi.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी शुक्रवार को यहां से बांग्लादेश के लिए उड़ान भरेंगे और उनकी यह रवानगी एक ऐसे संवेदनशील मोड़ पर हो रही है, जब दोनों पक्ष राजनीतिक बदलावों, उभरते रणनीतिक तनाव तथा आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों को आकार देने वाली कई महत्वपूर्ण वार्ताओं के बीच अपने रिश्तों को नए सिरे से स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। त्रिवेदी ने ढाका रवाना होने से पहले मीडिया से कहा कि दोनों देशों पर लगभग 160 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी है। उन्होंने भारत एवं बांग्लादेश के रिश्ते को 'विशेष' बताया और कहा कि इसने राजनीतिक बदलावों तथा समय-समय पर पैदा होने वाले तनावों को झेला है। यह मजबूत एवं सुरक्षित नींव पर टिका है।</p>
<p>केंद्र सरकार में रेल मंत्री रह चुके त्रिवेदी ऐसे समय में ढाका पहुंचेंगे जब द्विपक्षीय संबंधों के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों (जल बंटवारे और व्यापार) पर नए सिरे से बातचीत शुरू होने वाली है। गंगा के जल बंटवारे की 1996 संधि का नवीनीकरण होना है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में व्यापक स्तर पर फिर से बातचीत करना मुश्किल साबित हो सकता है, जिससे अल्पावधि के लिए इस संधि को कुछ समय के लिए आगे बढ़ा देना ही सबसे संभावित परिणाम दिखाई देता है। विदेश मंत्रालय में पूर्व सचिव पिनाक आर चक्रवर्ती और अन्य रणनीतिक पर्यवेक्षकों ने तर्क दिया है कि पानी को व्यापक संबंधों से अलग करके नहीं देखा जा सकता।</p>
<p>भारतीय नीति निर्माता अब बदलती परिस्थितियों को देखते हुए इस संधि पर दोबारा विचार करना जरूरी समझ रहे हैं। हिमालय में ग्लेशियरों के कम पिघलने से नदियों के प्रवाह पर असर पड़ा है, जबकि जनसंख्या वृद्धि और कृषि मांग ने सीमा के दोनों ओर पानी की आवश्यकताओं को नाटकीय रूप से बढ़ा दिया है। जल बंटवारे पर वार्ता व्यापक आर्थिक चर्चाओं से भी जुड़ी हुई है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था, जो अब 510 अरब अमेरिकी डॉलर को पार कर चुकी है, लगातार मध्यम आय वाले देश के दर्जे की ओर बढ़ रही है।</p>
<p>चूंकि बांग्लादेश सबसे कम विकसित देशों की श्रेणी से बाहर निकल रहा है, इसलिए भारत द्वारा पिछले कुछ वर्षों में एकतरफा रूप से दी गई कई व्यापारिक रियायतों और तरजीही व्यवस्थाओं में अनिवार्य रूप से संशोधन की आवश्यकता होगी। इसलिए, दोनों देशों के अधिकारी एक अधिक संतुलित रिश्ते के लिए डिज़ाइन किए गए एक नए व्यापार ढांचे की तलाश कर रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में दोनों पक्षों को राजनीतिक रूप से परेशान करने वाले मुद्दों को संभालने की आवश्यकता होगी। जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटीजंस पार्टी के कुछ धड़ों की भारत-विरोधी बयानबाजी ने भारत में चिंता पैदा की है। इसके बावजूद भारतीय अधिकारी इस बात को स्वीकार करते हैं कि समय-समय पर आने वाले राजनीतिक बयानों को भूगोल, अर्थशास्त्र और लोगों के आपसी रिश्तों पर बने इस रिश्ते को पटरी से उतारने की अनुमति नहीं दी जा सकती। त्रिवेदी के लिए यह चुनौती होगी कि वह दोनों देशों के रिश्तों को राजनीतिक उतार-चढ़ाव से बचाकर रखें।</p>
<p>भारत बांग्लादेश के चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ते रिश्तों को लेकर भी लगातार सावधान है। यह चिंता सबसे ज्यादा नदी से जुड़े मुद्दों में दिख रही है। गंगा नदी के जल बंटवारे पर बातचीत चल रही है, लेकिन बांग्लादेश ने तीस्ता नदी के प्रबंधन और परियोजनाओं में चीन की मदद मांगी है। इस प्रस्ताव से भारत चिंतित है, क्योंकि यह परियोजना सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बहुत पास है। सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं सिर्फ चीन तक ही सीमित नहीं हैं। हाल ही में बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य संपर्क—जैसे पायलट प्रशिक्षण पर बातचीत और पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों में बांग्लादेश की रुचि—ने भारत को सतर्क कर दिया है। साथ ही, खुफिया एजेंसियां बांग्लादेश में पाकिस्तान की आईएसआई की बढ़ती गतिविधियों पर भी नजर रख रही हैं।</p>
<p>ये चिंताएं पुराने अनुभवों से भी जुड़ी हैं। भारतीय एजेंसियां लंबे समय से मानती हैं कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों ने पहले पूर्वोत्तर भारत के उग्रवादी समूहों की मदद की थी। 2002 में कोलकाता के अमेरिकन सेंटर पर हुए हमले जैसी घटनाओं की जांच में भी पाकिस्तान और बांग्लादेश के कुछ चरमपंथी संगठनों के संबंध सामने आए थे। फिर भी, इन चिंताओं के बावजूद दोनों देश लंबे समय तक खराब रिश्ते नहीं रख सकते। बांग्लादेश, दक्षिण एशिया में भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार है और बंगाल की खाड़ी तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण रास्ता भी है। वहीं, भारत भी बांग्लादेश के लिए संपर्क, ऊर्जा और क्षेत्रीय बाजारों तक पहुंच के लिहाज से बहुत जरूरी है। इसलिए त्रिवेदी के लिए असली काम मतभेद खत्म करना नहीं, बल्कि उन्हें संभालकर रिश्तों को आगे बढ़ाना होगा।</p>
<p>आखिर में, इस बातचीत की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि क्या भारत और बांग्लादेश राजनीतिक तनाव से ऊपर उठकर बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपने रिश्तों को नया रूप दे पाते हैं। दोनों देशों के करोड़ों लोगों की तरक्की एक-दूसरे से जुड़ी हुई है, इसलिए सहयोग बनाए रखना बहुत जरूरी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 15:58:56 +0530</pubDate>
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                <title>सुस्मिता देव के राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफे से तृणमूल संकट गहराया, सामूहिक दलबदल की अटकलों से बढ़ा गतिरोध</title>
                                    <description><![CDATA[तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक संकट गहरा गया है। सुखेंदु शेखर रॉय के बाद सांसद सुस्मिता देव ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से उनकी मुलाकात के बाद सियासी अटकलें तेज हैं। चर्चा है कि टीएमसी के करीब 20 सांसद पाला बदलने की तैयारी में हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/trinamool-crisis-deepens-due-to-susmita-devs-resignation-from-rajya/article-156583"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/susmita.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा संकट बुधवार को उस समय और गहरा गया, जब पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद सुस्मिता देव ने उच्च सदन से इस्तीफा दे दिया। वह दिग्गज नेता सुखेंदु शेखर रॉय के बाद एक हफ्ते के भीतर इस्तीफा देने वाली तृणमूल की दूसरी सांसद बन गयी हैं। इस घटनाक्रम ने हाल ही में मिले चुनावी झटके के बाद सुश्री बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के भीतर बढ़ते विद्रोह की अटकलों को तेज कर दिया है, जिससे संसद में बड़े राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना बढ़ गयी है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार देव ने उप राष्ट्रपति एवं राज्य सभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन से मुलाकात की और सदन की सदस्यता से अपना औपचारिक इस्तीफा सौंप दिया। उनका यह इस्तीफा सुखेंदु शेखर रॉय की पार्टी और राज्य सभा दोनों से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने तृणमूल के भीतर 'बेलगाम भ्रष्टाचार' और 'अराजक शासन' का हवाला दिया था। पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में काम कर रहीं देव के इस्तीफे को तृणमूल नेतृत्व के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, जो पहले से ही आंतरिक असंतोषों से जूझ रहा है।</p>
<p>महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष रहीं देव साल 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं। उन्होंने सिलचर से 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा उम्मीदवार राजदीप रॉय से हार गयी थीं। तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्हें राज्य सभा के लिए नामित किया गया और वह राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक बनकर उभरीं। उनके इस्तीफे से जुड़े राजनीतिक संशय को बढ़ाते हुए बुधवार को कुछ तस्वीरें सामने आयीं, जिनमें देव नयी दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात करती दिख रही हैं। इसने उनके भविष्य की राजनीतिक योजनाओं को लेकर अटकलों को हवा दे दी है।</p>
<p>इस मुलाकात के राजनीतिक मायनों पर न तो देव और न ही भाजपा की ओर से तुरंत कोई टिप्पणी की गयी है। ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आये हैं, जब तृणमूल के संसदीय दल के भीतर बड़ा विद्रोह पनपने की सूचनाएं आ रही हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल के करीब 20 सांसद संसद में भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल होने की इच्छा जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखने पर विचार कर रहे हैं। अभी तक ऐसा कोई औपचारिक पत्र सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन इन रिपोर्टों ने दिल्ली-कोलकाता दोनों जगह राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दी हैं।</p>
<p>इस सामूहिक दलबदल की संभावना ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी की एकजुटता पर नये सवाल खड़े कर दिये हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि एक के बाद एक दो वरिष्ठ सांसदों का इस्तीफा और सांसदों के एक धड़े में असंतोष की सूचनाएं, पार्टी के भीतर गहरे संगठनात्मक संकट की ओर इशारा करती हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे से तृणमूल को पहले ही बड़ा झटका लग चुका है। अपने इस्तीफे में और उसके बाद दिये सार्वजनिक बयानों में इस दिग्गज सांसद ने पार्टी नेतृत्व की तीखी आलोचना की थी और आरोप लगाया था कि संगठन के भीतर भ्रष्टाचार और मनमाना कामकाज पूरी तरह हावी हो चुका है। हालिया चुनावी झटकों के बाद उनके जाने को व्यापक स्तर पर होने वाले विद्रोह के पहले प्रत्यक्ष संकेत के रूप में देखा गया था।</p>
<p>तृणमूल ने अब तक इन इस्तीफों के महत्व को कम कर आंकने की कोशिश की है और उसका दावा है कि बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी पूरी तरह एकजुट है। लगातार हुए इन इस्तीफों ने हालांकि भाजपा को एक नया हथियार दे दिया है, जो पश्चिम बंगाल में अपना प्रभाव बढ़ाने और अपनी पार्टियों से असंतुष्ट विपक्षी नेताओं को अपने पाले में लाने की कोशिशों में जुटी है। इस बदलते घटनाक्रम ने संसद में विपक्षी खेमे के भविष्य के स्वरूप पर भी सवाल खड़े कर दिये हैं। यदि तृणमूल सांसदों के एक धड़े के दलबदल की ये सूचनाएं अगर हकीकत में बदलती हैं, तो इससे विपक्ष के संख्या बल पर बड़ा असर पड़ सकता है और संसद के दोनों सदनों में राजग की स्थिति और मजबूत हो सकती है।</p>
<p>राष्ट्रीय स्तर पर खुद को भाजपा के मुख्य चुनौती देने वालों में से एक के रूप में पेश करने वाली तृणमूल कांग्रेस के लिए ये इस्तीफे हाल के वर्षों में सबसे गंभीर आंतरिक चुनौतियों में से एक हैं। आगे और दलबदल होने की अटकलों के बीच, अब पूरा ध्यान इस बात पर है कि क्या तृणमूल नेतृत्व इस संकट को थामने में सफल रहता है या फिर यह मौजूदा गतिरोध आने वाले हफ्तों में एक बड़े राजनीतिक उलटफेर का सबब बनेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 18:32:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'इंडिया'  गठबंधन की बैठक में बोले खरगे, परिसीमन विधेयकों के खिलाफ विपक्षी दलों की एकजुटता जरूरी, गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ हो रहा भेदभाव </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी एकजुटता को और मजबूत करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह गठबंधन ने परिसीमन विधेयकों को मात दी, उसी भावना से अब बेरोजगारी, महंगाई और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ सामूहिक संघर्ष तेज किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/kharge-said-in-the-meeting-of-india-alliance-unity-of/article-156336"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/02.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन ने लोकसभा में परिसीमन से जुड़े विधेयकों के खिलाफ जिस एकजुटता का परिचय दिया था, अब उसी भावना के साथ केंद्र सरकार के कुशासन के खिलाफ भी सामूहिक संघर्ष को आगे बढ़ाया जाएगा। खरगे ने सोमवार को यहां कांस्टीट्यूशन क्लब में विपक्षी गठबंधन की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यह गठबंधन लगभग तीन वर्ष पहले अस्तित्व में आया था और गत 17 अप्रैल को लोकसभा में सभी विपक्षी दलों ने एकजुट होकर परिसीमन के मुद्दे पर केंद्र सरकार के ‘दुर्भावनापूर्ण’ विधेयकों को पराजित किया था।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अब इस एकता को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि देश के सामने मौजूद राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक तथा विदेश नीति से जुड़ी चुनौतियों का डटकर सामना किया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण करोड़ों लोगों का मताधिकार छीना जा रहा है और संविधान पर लगातार हमला हो रहा है। खरगे ने कहा कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने, डराने-धमकाने के लिए किया जा रहा है और गैर-भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, आर्थिक माहौल नकारात्मक है और नयी नौकरियां पैदा करने के लिए जिस गति से निवेश आना चाहिए, वह नहीं आ रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में निजी एकाधिकार बढ़ रहा है और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का भविष्य संकट में है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली के कुप्रबंधन के कारण लाखों युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं के साथ विश्वासघात हो रहा है तथा समाज के कमजोर वर्गों पर अत्याचार जारी हैं। उन्होंने कहा कि विदेश नीति में पारंपरिक मूल्यों से समझौता किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 15:34:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विपक्षी एकता का महामंथन : इंडिया गठबंधन की बैठक शुरू, सोनिया-खरगे-ममता समेत कई शीर्ष नेता शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[संसद के मानसून सत्र से पहले नई दिल्ली में 'इंडिया' गठबंधन के शीर्ष नेताओं की बैठक शुरू हो गई है। सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और ममता बनर्जी सहित 23 दलों के नेता इसमें शामिल हैं। बैठक में आगामी सत्र के लिए साझा रणनीति, राष्ट्रीय मुद्दों और गठबंधन समन्वय पर गंभीर मंथन जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/india-alliance-meeting-begins-many-top-leaders-including-sonia-kharge-mamata-attended/article-156326"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/india-allience.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र और विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर साझा रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार दोपहर यहां कांस्टीट्यूशन क्लब में शुरू हो गयी। बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद पी. संतोश कुमार, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एन. के. प्रेमचंद्रन, भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले सहित कई प्रमुख नेता बैठक में मौजूद हैं।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार, बैठक में संसद के आगामी सत्र में विपक्ष की संयुक्त रणनीति, विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों, चुनावी तैयारियों तथा गठबंधन के घटक दलों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और केंद्र सरकार से जुड़े कई मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 13:19:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>'इंडिया' गठबंधन की बड़ी बैठक: दिल्ली में जुटे 23 विपक्षी दल, संसद सत्र और चुनावी रणनीति पर मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 'इंडिया' गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो रही है। इसमें ममता बनर्जी सहित 23 दलों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। बैठक में लोकतंत्र, संविधान, महंगाई, बेरोजगारी और आगामी संसद सत्र में केंद्र सरकार को घेरने की साझा रणनीति पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/important-meeting-of-india-alliance-today-representatives-of-23-parties/article-156300"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को यहां कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित हो रही है, जिसमें गठबंधन के 23 दलों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार बैठक में लोकतंत्र, संविधान, चुनावी प्रक्रिया, महंगाई, बेरोजगारी, निवेश के माहौल तथा अन्य समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा संसद के आगामी सत्र में विपक्ष की रणनीति पर भी इसमें विचार-विमर्श होने भी हो सकता है। बैठक के दोपहर 12 बजे से शुरू होने की संभावना है।</p>
<p>सूत्रों ने बताया कि बैठक में शामिल होने के लिए तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी पिछले दो दिनों से दिल्ली में मौजूद हैं। उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता एवं सांसद अभिषेक बनर्जी भी राजधानी में हैं। माना जा रहा है कि बैठक में विभिन्न विपक्षी दल केंद्र सरकार के खिलाफ साझा मुद्दों और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा करेंगे। कांग्रेस के अनुसार कुछ सहयोगी दल विभिन्न कारणों से बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे, लेकिन वे गठबंधन के प्रति समर्थन व्यक्त किये जाने की जानकारी दे चुके हैं। विपक्षी दलों की एकता के लिहाज से इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 11:16:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>यूक्रेन के यूरोपीय संघ प्रवेश को हरी झंडी: हंगरी ने पहले वार्ता क्लस्टर को दी मंजूरी, कीव के साथ हुआ ऐतिहासिक समझौता</title>
                                    <description><![CDATA[हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने यूक्रेन को पहला यूरोपीय संघ (EU) वार्ता क्लस्टर खोलने की मंजूरी दे दी है। ट्रांसकारपाथिया में हंगेरियन अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर कीव के साथ समझौता होने के बाद यह कदम उठाया गया। आयरिश समकक्ष माइकल मार्टिन ने इस सुधार प्रक्रिया का स्वागत करते हुए यूक्रेन के ब्लॉक में शामिल होने का समर्थन किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/hungary-gives-green-signal-to-ukraines-eu-accession-talks/article-156128"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/europ1.png" alt=""></a><br /><p>बुडापेस्ट। हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने कहा है कि हंगरी ने यूक्रेन को अपना पहला यूरोपीय संघ वार्ता क्लस्टर खोलने की मंजूरी प्रदान की है। मग्यार ने गुरुवार को यहां अपने आयरिश समकक्ष माइकल मार्टिन के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हम राजदूत स्तर पर यूरोपीय संघ में यूक्रेन के शामिल होने की वार्ता में पहले क्लस्टर के उद्घाटन को मंजूरी देने में सक्षम हैं।" उन्होंने कहा कि हंगरी ने यूक्रेन के ट्रांसकारपाथिया क्षेत्र में हंगेरियन अल्पसंख्यकों की भाषा, सांस्कृतिक, शैक्षिक एवं राजनीतिक अधिकारों के संबंध में कीव के साथ एक समझौता किया है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि यूक्रेन आवश्यक विधायी परिवर्तनों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और हंगरी वार्ता क्लस्टर खोलने का समर्थन करता है।<br />मार्टिन हंगरी में नई सरकार के गठन के बाद बुडापेस्ट का दौरा करने वाले पहले विदेशी प्रमुख हैं और एक जुलाई को आयरलैंड द्वारा यूरोपीय संघ परिषद का अध्यक्ष पद संभालने से पहले वहां पहुंचे हैं। मगयार ने कहा कि हंगरी यूरोपीय मामलों में आयरलैंड के व्यावहारिक दृष्टिकोण को महत्व देता है और मौलिक यूरोपीय संघ मूल्यों का सम्मान करते हुए ब्लॉक को मजबूत करने के प्रयासों का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि प्रवासन जैसे मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद हंगरी का लक्ष्य यूरोपीय संघ के निर्णय लेने में एक रचनात्मक भागीदार बनना है।</p>
<p>मार्टिन ने कानून का शासन बनाए रखने एवं लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए मग्यार की प्रतिबद्धता का स्वागत किया और कहा कि ये कदम हंगरी को यूरोपीय संघ के मूल अवस्था में वापस लाएंगे। उन्होंने पुष्टि की कि आयरलैंड आगामी यूरोपीय संघ की अध्यक्षता के दौरान हंगरी की सुधार प्रक्रिया का समर्थन करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 18:37:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>आरबीआई का बड़ा फैसला : रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, वैश्विक संकट के बीच जीडीपी अनुमान घटा</title>
                                    <description><![CDATA[आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की है कि रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा गया है। पश्चिम एशिया संकट और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान घटाकर 6.6% किया गया है, जबकि खुदरा महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/rbis-big-decision-repo-rate-stable-gdp-growth-estimate-reduced/article-156054"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/तइप.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच शुक्रवार को रेपो रेट तथा अन्य नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की शुक्रवार को समाप्त तीन दिवसीय बैठक में पश्चिम एशिया संकट जारी रहने, मुद्रास्फीति में वृद्धि - विशेषकर ईंधन की कीमतों में, और कमजोर मानसून की भविष्यवाणी के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी विकास के अनुमान में कमी की गयी है जबकि महंगाई का अनुमान बढ़ा दिया गया है।</p>
<p>आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एमपीसी के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है। समिति के सभी छह सदस्यों ने इसके पक्ष में राय रखी। समिति ने स्टैंडिग डिपॉजिट फेसिलिटी रेट को भी पांच प्रतिशत पर बनाये रखने का निर्णय लिया। अन्य दरें भी अपरिवर्तित रखी गयी हैं। समिति ने अपना रुख तटस्थ बनाये रखा है यानी भविष्य में दरें बढ़ाने और घटाने दोनों के विकल्प खुले रखे गये हैं।</p>
<p>एमपीसी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि का अनुमान घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है। अप्रैल के बयान में इसके 6.9 प्रतिशत रहने की बात कही गयी थी। मल्होत्रा ने कहा कि पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.3 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि कुछ सेक्टरों में सुस्ती के संकेत दिखने लगे हैं और खाद्य उत्पादन को लेकर परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है। दरों पर कोई निर्णय लेने से पहले अभी और आंकड़ों का इंतजार करना होगा।</p>
<p>महंगाई के मोर्चे पर उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण इसमें तेजी से वृद्धि हुई है, खास करके ईंधन की कीमतों में। मौजूदा वित्त वर्ष के खुदरा मुद्रास्फीति 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है जो अप्रैल के 4.6 प्रतिशत के अनुमान से अधिक है। पहली तिमाही में महंगाई दर 4.2 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 5.1 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.9 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.4 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। मल्होत्रा ने कहा कि महंगाई बढ़ने से लोगों की क्रय शक्ति कम हो सकती है जिसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। हालांकि अभी घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और अर्थव्यवस्था को गति दे रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 13:13:48 +0530</pubDate>
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