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                <title>चीन की आर्थिक हालत खराब</title>
                                    <description><![CDATA[जानकारों की राय में चीन पर न सिर्फ कोरोना महामारी का प्रतिकूल असर पड़ा है बल्कि रूस और यूक्रेन युद्ध से भी वो काफी प्रभावित हुआ है। अन्य देशों की तुलना में चीन पर इनका असर ज्यादा हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chinas-economic-condition-worsens/article-19903"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/21_08_2022-xi-jingping-china_22997788.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चीन भले ही सस्ते कर्ज के झांसे में फंसाकर विभिन्न छोटे देशों को काबू करने की नीति पर काम कर रहा है लेकिन, एक हकीकत ये भी है कि उसका अपना घर काफी खराब हालत में है। चीन की अर्थव्यवस्था कोरोना महामारी के बाद से उबर नहीं पाई है। इतना ही नहीं चीन में प्रापर्टी की कीमतों में आई जबरदस्त गिरावट वहां की खराब आर्थिक हालत का संकेत दे रही है। चीन में बीते कुछ समय में महंगाई के अलावा बेरोजगारी भी बढ़ी है और प्रतिव्यक्ति आय कम हुई है। इसको देखते हुए चीन ने ब्याज दरों में कटौती की है। चीन की जीरो कोविड पालिसी जानकारों की राय में चीन पर न सिर्फ कोरोना महामारी का प्रतिकूल असर पड़ा है बल्कि रूस और यूक्रेन युद्ध से भी वो काफी प्रभावित हुआ है। अन्य देशों की तुलना में चीन पर इनका असर ज्यादा हुआ है। जानकारों की राय में चीन कोरोना महामारी को लेकर बनाई चीन की नीति अब उस पर उलटी साबित हो रही है। दरअसल चीन ने कोरोना से बचाव को जीरो कोविड पालिसी शुरू की हुई है। इस पालिसी की बदौलत देश में कारोबार के अलावा उपभोक्ता गतिविधियां काफी हद तक प्रभावित हुई हैं। काम धंधे हुए ठप जीरो कोविड नीति की वजह से कई जगहों का काम ठप होने की वजह से काफी पिछड़ गया है। इसकी बदौलत न सिर्फ काम धंधे ठप हुए हैं बल्कि कई छोटी इकाइयां बंद भी हो गई हैं। चीन की इस नीति से देश के लोग भी ऊब चुके हैं और इसकी आलोचना कर रहे हैं। इस नीति में कोरोना का कोई भी मामला सामने आने परर लाकडाउन लगाने का प्रावधान है। इस नीति की वजह से कई छोटी फैक्टरियां काफी समय तक बंद रही हैं। इसका असर लोगों की आमदनी और रोजगार पर भी पड़ा है और इसकी वजह से देश की सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित हुई है। इन सभी के बावजूद चीन के अर्थशास्त्री मान रहे हैं कि चीन अपने को इससे उबार लेगा। वहीं इन जानकारों का ये भी कहना है कि यदि चीन मंदी से घिरा तो इसका असर पूरी दुनिया में दिखाई देगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Aug 2022 12:12:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>चीन के सस्ते कर्ज-जाल में फंस खुद को बर्बाद न करें अन्य देश, श्रीलंका, मालदीव और पाकिस्तान हैं इसके उदाहरण</title>
                                    <description><![CDATA[आर्थिक विकास के लिए चीन पर निर्भर रहना किसी भी देश के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/do-not-waste-yourself-trapped-in-china-s-cheap-debt-trap--other-countries-are-sri-lanka--maldives-and-pakistan--examples-of-this/article-7849"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/china-flag.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका ने विश्व के देशों को चीन के सस्ते कर्ज के जाल में न फंसने की चेतावनी दी है। अमेरिका ने कहा है कि मौजूदा समय में श्रीलंका और पाकिस्तान का संकट समूची दुनिया के सामने है। ये दोनों ही चीन के कर्ज के जाल में फंसे हैं। मालदीव भी चीन के कर्ज जाल में है। इसके अलावा ये दोनों ही पूरे विश्व के लिए एक साफ संकेत है कि इसका असर किस कदर बुरा हो सकता है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक विकास के लिए चीन पर निर्भर रहना किसी भी देश के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। इसका ताजा उदाहरण पाकिस्तान और श्रीलंका है। दोनों ही देश आर्थिक तौर पर बदहाली का सामना कर रहे हैं।<br /><br /><strong>केवल संयोग नहीं</strong><br />ग्लोबल स्ट्रेट की रिपोर्ट में कहा गया है कि ये केवल एक संयोग मात्र नहीं है कि इन दोनों ने ही आर्थिक विकास के नाम पर चीन से बड़ा कर्ज लिया था। इस दौरान ये पूरी तरह से खामोश रहे। इनकी नींद तब खुली जब पूरी दुनिया में आर्थिक संकट देखा जाने लगा। इसकी एक बड़ी वजह विश्व में फैली कोरोना महामारी थी, जिसकी शुरूआत चीन की लैब से हुई थी। चीन के कर्ज के जाल की यही नीति का ग्लोबल पैटर्न देखा जा सकता है।<br /><br /><strong>पाक को कर्ज का मकसद</strong><br />पाकिस्तान ने चीन से बड़ा कर्ज ले रखा है। चीन पाकिस्तान इकनामिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट का एकमात्र मकसद पाकिस्तान के बलूचिस्तान स्थित ग्वादर पोर्ट से शिंजियांग को जोड़ना था। इस रिपोर्ट में चीन के कर्ज के जाल पर कई जानकारों ने अपनी राय भी दी है कहा है कि इसका मकसद पाकिस्तान के रणनीति सस्थानों पर कब्जा जमाना भी था। चीन के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को चाइनीज बैंक से फाइनेंस किया गया था।<br /><br /><strong>श्रीलंका का बुरा हाल</strong><br />हांगकांग पोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बीच श्रीलंका की यदि बात की जाए तो कोरोना महामारी ने यहां के पर्यटन उद्योग की कमर तोड़ने का काम किया, जिसका यहां की अर्थव्यवस्था में एक अहम योगदान रहा है। पर्यटन यहां पर विदेशी मुद्रा कमाने का अहम जरिया रहा है। चीन के कर्ज के जाल में फंसकर श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार खाली होता चला गया। पाकिस्तान चीन का पुराना साझेदार है और साथ ही वो इस कर्ज के जाल में फंसे देश का एक उदाहरण भी है। रिपोर्ट में वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान दुनिया के बड़े कर्जदारों में दसवें नंबर पर है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Apr 2022 15:05:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>चीन की हरकतें</title>
                                    <description><![CDATA[चीन एक सोची समझी रणनीति के तहत बार-बार कुछ ऐसी हरकतों को अंजाम दे रहा है, जिससे भारत उकसावे में आकर कोई कदम उठाए और फिर उसे भारत के खिलाफ एक और मोर्चा खोलने का मौका मिले। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%82/article-4116"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/india-china.jpg" alt=""></a><br /><p>चीन एक सोची समझी रणनीति के तहत बार-बार कुछ ऐसी हरकतों को अंजाम दे रहा है, जिससे भारत उकसावे में आकर कोई कदम उठाए और फिर उसे भारत के खिलाफ एक और मोर्चा खोलने का मौका मिले। इससे पहले वह पूर्वी लद्दाख में मोर्चा खोलने में कामयाब हो चुका है और दोनों देशों के बीच आज तक गतिरोध बना हुआ है। गतिरोध का हल निकालने के लिए हाल ही में दोनों देशों के बीच हुई 14वें दौर की सैन्य स्तर की वार्ता में भी कोई हल नहीं निकला है। इस बैठक के तुरंत बाद चीन ने अरूणाचल प्रदेश से एक लड़के का अपहरण कर अब नया विवाद खड़ाकर दिया है। यह घटना मंगलवार की है, जिसकी जानकारी अरूणाचल प्रदेश के भाजपा सांसद तापिर गाव ने बुधवार को दी। सोशल मीडिया पर सांसद गाव ने दावा किया है कि चीनी सैनिक 18 जनवरी को सियांग जिले में भारतीय क्षेत्र में घुस आए थे और लुंगताजोर इलाके से 17 साल के एक लड़के मिराम तैरोन को उठाकर ले गए। भारतीय सेना ने चीनी सेना से प्रोटोकॉल के तहत अपहृत बालक को वापस करने की मांग की है। चीनी सेना को बताया गया कि यह लड़का जड़ी-बूटी इकट्ठा करने जंगल की ओर निकल गया था और  भटक गया। भारत ने लड़के की तलाश में सहयोग मांगा है। भारतीय सेना ने चीन पर अपहरण का कोई आरोप नहीं लगाया है। चीन की यह कोई पहली हरकत नहीं है, बल्कि इससे पहले भी उसने कई बार भारतीयों को अपहृत किया है और फिर लौटाया है। मिराम तैरान को अपहृत करने की घटना से जाहिर होता है कि भारतीय क्षेत्र में चीनी सेना घुसपैठ करती रहती है। दरअसल मिराम अपने एक दोस्त के साथ त्सांगपो नदी इलाके में अपने दोस्त के साथ शिकार करने गया था अपने भारतीय क्षेत्र में ही था। उसका दोस्त चीनी सेना के हाथ से भाग निकला, लेकिन मिराम सैनिकों की पकड़ में आ गया था। मिराम के दोस्त ने ही बताया कि चीन के सैनिक ही मिराम को पकड़ कर ले गए। अब बड़ा सवाल यह है कि सीमा पर भारतीय सेना की कड़ी चौकसी के बाद भी चीनी सैनिक भारतीय सीमा में कैसे घुस आए और बार-बार कैसे घुसपैठ में कामयाब हो जाते हैं। यह लड़का तो चीन की सीमा में घुसा नहीं था फिर इसके अपहरण की क्या वजह हो सकती है? जाहिर तौर पर उकसावे के लिए भारत को प्रेरित करना। पिछले साल अक्टूबर में भी दो सौ चीनी सैनिक अरूणाचल प्रदेश की सीमा में घुस आए थे और टकराव की स्थिति बनी थी। दरअसल, पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी विवाद के बाद से सीमाई इलाके में चीनी सैनिकों ने अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं और वे नए विवाद व टकराव को जन्म देना चाहते हैं ताकि भारत पर दबाव की स्थिति बनी रहे। आखिर यह कब तक चलता रहेगा, इस पर भारत की सरकार को ही सोचना है?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Jan 2022 17:31:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>चीन की हरकतें</title>
                                    <description><![CDATA[बीते साल के अंतिम सप्ताह के शुक्रवार को चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ भागों के नाम बदलकर एक बार फिर भारत के खिलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ देने जैसी हरकतें शुरू कर दी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A5%87%E0%A4%82/article-3824"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/china.jpg" alt=""></a><br /><p>बीते साल के अंतिम सप्ताह के शुक्रवार को चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कुछ भागों के नाम बदलकर एक बार फिर भारत के खिलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ देने जैसी हरकतें शुरू कर दी हैं। इस बार अरुणाचल प्रदेश में स्थित पन्द्रह और स्थानों के नाम चीनी और तिब्बती भाषा में रख दिया है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार चीन जिन पन्द्रह ठिकानों का चीनी भाषा में नामकरण किया है, उन्हें वैधता प्रदान करने के लिए अपने सरकारी दस्तावेजों में उनकी सटीक भौगोलिक स्थिति भी दर्ज कर दी है। जिन पन्द्रह स्थानों के नामों को बदला गया उनमें आठ रिहायशी इलाके चार पहाड़, दो नदियां और पहाड़ी दर्रा शामिल है। चीन ने ऐसी हरकत कोई पहली बार नहीं की है, बल्कि इससे पहले 2017 में भी चीन ने छह स्थानों के नाम बदल डाले थे। चीन का मानना है कि जिन इलाकों के नाम बदले गए हैं, वे दक्षिणी तिब्बत में आते हैं और अरुणाचल भी दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के नाम बदलने मात्र से भारत का हिस्सा चीन का नहीं हो जाता। यह एक प्रकार की मनोवैज्ञानिक दबाव की हरकत ही प्रतीत है। उसे लग रहा है कि अरुणाचल प्रदेश पर उसका दावा मजबूत हो जाएगा और भारत दबाव में आएगा। चीन की इस हरकत पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि अरूणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा। ऐसे में अगर चीन किसी इलाके का नाम बदलकर उस पर अपना दावा जताता है तो यह भारत अरूणाचल प्रदेश पर चीन के जबरन दावे को हमेशा खारिज करता आया है। अरूणाचल प्रदेश को लेकर भारत का रुख एकदम स्पष्ट है कि यह इलाका भारत का अभिन्न हिस्सा है और इसमें किसी प्रकार की दखल का जवाब उसी भाषा में दिया जाएगा। दरअसल पिछले कुछ दिनों से चीन ने सीमाई इलाकों, विशेषकर अरूणाचल प्रदेश के आसपास अपनी गतिविधियां बढ़ा रखी हैं और तनाव के हालात पैदा करने में जुटा है। तिब्बत के इलाके में नया गांव बसा लिया है, रेल नेटवर्क भी खड़ा कर लिया है। चीन का रवैया ठीक नहीं है और उसके इरादे भी टकराव को जन्म देने वाले हैं। अभी पूर्वी लद्दाख का विवाद सुलझा भी नहीं है कि चीन अरूणाचल में नया मोर्चा खोलने में जुटा है। भारत ने भी सीमाई इलाकों में मोर्चाबंदी शुरू कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Jan 2022 15:54:22 +0530</pubDate>
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                <title>नए मोर्चों पर चीन</title>
                                    <description><![CDATA[चीन की नई मोर्चाबंधी पूर्वी लद्दाख की सीमा पर तनाव पैदा करने के बाद अब चीन ने भारत के खिलाफ विवाद व तनाव बढ़ाने के लिए नए मोर्चों पर काम करना शुरू कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/6173c0bd2aa0f/article-1848"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/china.jpg" alt=""></a><br /><p>चीन की नई मोर्चाबंधी पूर्वी लद्दाख की सीमा पर तनाव पैदा करने के बाद अब चीन ने भारत के खिलाफ विवाद व तनाव बढ़ाने के लिए नए मोर्चों पर काम करना शुरू कर दिया है। अरुणाचल प्रदेश को तिब्बत का हिस्सा बताते हुए चीन काफी दिनों से अरुणाचल प्रदेश को अपना बताने की बयानबाजी करता चला आया है और अब तो उसने नियंत्रण रेखा पर अपनी सेना की तैनाती को बढ़ाने के लिए वहां पक्के निर्माणों की शुरुआत कर दी है। भारत के पास खबर पहले से ही है, लेकिन अब उसने सिक्किम की सीमा पर भी अपनी सेना की तैनाती बढ़ाना शुरू कर गश्त को ज्यादा बढ़ाना शुरू कर दिया है। चीन की इस तरह की हरकतों का अर्थ यही निकलता है कि चीन भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है, लेकिन इसे हल्के में भी नहीं लिया जा सकता क्योंकि लद्दाख की गलवान घाटी में भी चीन ने ऐसी ही हरकतों से शुरुआत की थी और गलवान घाटी में आखिर दोनों देशों के जवानों के बीच हिंसक झड़प भी हुई थी जिसमें हमारे बीस जवान शहीद हो गए थे और तनाव का सिलसिला शुरू हो गया और आज दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने खड़ी हैं। अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके में भी चीन ने पिछले दिनों गलवान जैसी घटना को दोहराने की हरकत की थी लेकिन  बातचीत के बाद चीन के घुसपैठिए अपनी सीमा में लौट गए। चीन ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया अच्छी तरह जानती है कि अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम दोनों राज्य भारत के अभिन्न अंग हैं और भारत के कड़े एतराज के बावजूद अरुणाचल प्रदेश पर अपनी सीनाजोरी दिखा रहा है। हालांकि चीन को जवाब देने के लिए भारत ने भी अपनी सैन्य मोर्चाबंदी को मजबूत करना शुरू कर दिया है। यह सही है कि हर देश को अपनी सीमाओं की रक्षा -सुरक्षा और चौकसी का अधिकार है और सेनाओं की तैनाती का भी, लेकिन एक लंबे समय बाद बेवजह चीन की ऐसी हरकत चिंता बढ़ाने वाली है। दोनों देशों के बीच दशकों से पुराना सीमा विवाद चल रहा है, जिसे चीन सुलझाने की बाचए सीमा विवादों को बढ़ाने की हरकतों पर तुला है। दरअसल, चीन भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही सामरिक रणनीति और गठबंधन से चीन बौखलाया हुआ है। लेकिन चीन को सोचना चाहिए कि पड़ोसी देशों के साथ ऐसे विवादों को जन्म देना उचित नहीं रहता जबकि चीन और भारत के बीच व्यापारिक रिश्ते भी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/6173c0bd2aa0f/article-1848</link>
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                <pubDate>Sat, 23 Oct 2021 14:09:04 +0530</pubDate>
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