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                <title>अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांत खोस्त में पाकिस्तान की ओर से हवाई हमला, पांच बच्चे और एक महिला सहित 44 की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[ अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने हवाई हमलों पर विरोध दर्ज कराने के लिए काबुल में पाकिस्तान के राजदूत को तलब किया है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/airstrike-by-pakistan-in-afghanistan-s-eastern-province-of-khost--44-killed-including-five-children-and-a-woman/article-8089"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/pp.jpg" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांत खोस्त में पाकिस्तान की ओर से किये गये हवाई हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 44 हो गई है।अफगानिस्तान के प्रांतीय स्वास्थ्य विभाग के एक सूत्र ने यह जानकारी दी है। अफगानिस्तान समाचार एजेंसी खामा प्रेस ने शनिवार को बताया था कि अफगानिस्तान के खोस्त और कुनार प्रांतों में हवाई हमले में कई लोगों की मौत हुयी है। इन हमलों में कुल 39 लोगों की जान गई है,  जिनमें पांच बच्चे और एक महिला शामिल है। <br /><br />वहीं अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने हवाई हमलों पर विरोध दर्ज कराने के लिए काबुल में पाकिस्तान के राजदूत को तलब किया है।  सूत्र ने रविवार को बताया कि हवाई हमले में मारे गए कुछ लोगों का अभी पता नहीं चल पाया है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 18:07:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>भारत-चीन के बीच 12 घंटे तक (एजेंसी) के पीछे क्या रहे कारण</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्वी लद्दाख में जारी टकराव को समाप्त करने के मुद्दे पर दोनों देशों के अधिकारियों ने शुक्रवार को 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/officials-of-both-the-countries-discussed-for-more-than-12-hours-on--the-issue-of-ending-the-ongoing-confrontation-in-eastern-ladakh/article-6035"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/india-china.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में जारी टकराव को समाप्त करने के मुद्दे पर भारत और चीन के अधिकारियों ने 12 घंटे से अधिक समय तक (एजेंसी) की है। रक्षा मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने शनिवार को यूनी(एजेंसी) को बताया कि पूर्वी लद्दाख में जारी टकराव को समाप्त करने के मुद्दे पर दोनों देशों के अधिकारियों ने शुक्रवार को 12 घंटे से अधिक समय तक चर्चा की। <br /><br />आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कोर कमांडर स्तर की बातचीत 15वें दौर की यह (एजेंसी) भारतीय सीमा में स्थित चुशुल मोल्दो हुयी। यह (एजेंसी) शुक्रवार को सुबह 10.30 बजे शुरू हुयी और लगभग रात 11.00 बजे तक संपन्न हुई।  इस दौरान भारत ने गोगरा हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में पैट्रोलिंग पॉइंट 15 पर टकराव को कम करने के लिए दबाव डाला और इसके बाद पूर्वी लद्दाख में तनाव कम करने का मुद्दा उठाया। <br /><br />उल्लेखनीय है कि स्थापित मानदंडों के अनुसार, मीडिया को औपचारिक बयान जारी करने से पहले रक्षा, सुरक्षा और विदेशी मामलों के अधिकारियों के बीच (एजेंसी) के परिणाम पर चर्चा की जाती है।<br /><br />इससे पहले दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर 14 दौर की बातचीत हो चुकी है। दोनों देशों के बीच 14 दौर की (एजेंसी) के बाद, पूर्वी लद्दाख में जिन क्षेत्रों का समाधान होना बाकी था, वे पीपी15, डेमचोक और देपसांग है, जहां चीनी सैनिक अभी भी अड़े हुए हैं। रक्षा विभाग के सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों द्वारा पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान खोजने के लिए हालिया बयान उत्साहजनक और सकारात्मक रहे हैं। भारत-चीन के बीच 15वें दौर की (एजेंसी) थोड़ी बदली हुई वैश्विक परिस्थितियों में हुई है।<br /><br />चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि भारत और चीन को क्षेत्रीय विवादों को द्विपक्षीय सहयोग के समग्र हितों को प्रभावित करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। मौजूदा समय में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलओसी) के दोनों ओर 50,000 से अधिक सैनिकों की तैनाती हैं।<br />मई 2020 की स्थिति को बदलते हुए, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने ऊंचाई वाले क्षेत्र में सैनिकों के लंबे समय तक रहने के लिए एलएसी के पास बुनियादी ढांचे का निर्माण भी किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Mar 2022 17:39:09 +0530</pubDate>
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                <title>पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध को दूर करने के लिए भारत और चीन के बीच 15 वें दौर की अहम वार्ता शुक्रवार  को</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्वी लद्दाख में पिछले करीब दो वर्ष से चले आ रहे सैन्य गतिरोध को दूर करने के लिए भारत और चीन के कोर कमांडरों के बीच 11 मार्च को 15 वें दौर की बातचीत होगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/15th-round-of-important-talks-between-india-and-china-to-resolve-the-military-standoff-in-eastern-ladakh/article-5730"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/23.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में पिछले करीब दो वर्ष से चले आ रहे सैन्य गतिरोध को दूर करने के लिए भारत और चीन के कोर कमांडरों के बीच 11 मार्च को 15 वें दौर की बातचीत होगी। उच्च पदस्थ रक्षा सूत्रों ने मंगलवार को यहां बताया कि 15 वें दौर की यह बातचीत भारतीय सीमा में स्थित चुशूल मोल्दो में होगी। दोनों सेनाओं के कोर कमांडरों के बीच अब तक 14 दौर की बातचीत हो चुकी है। इनके परिणामस्वरूप पेंगाग झील के उत्तर तथा दक्षिण किनारों , गलवान घाटी और गोगरा हॉट स्पिरंग क्षेत्रों में गतिरोध से संबंधित मुद्दों का समाधान किया जा चुका है। </p>
<p>दोनों पक्षों के बीच अब टकराव के बाकी बचे मुद्दों के समाधान को लेकर बातचीत होगी। सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्षों की ओर से इन मुद्दों का परस्पर स्वीकार्य समाधान निकालने के बारे में दिये गये वक्तव्य उत्साहजनक और सकारात्मक हैं। उल्लेखनीय है कि मई 2020 में चीन द्वारा पूर्वी लद्दाख में नियंत्रण रेखा पर एकतरफा बदलाव की कोशिशों के कारण यह गतिरोध उत्पन्न हुआ था। भारत ने चीन की इस कोशिश का कड़ा विरोध किया था। इस गतिरोध के चलते 15 जून को गलवाल घाटी में दोनों सेनाओं के सैनिकों के बीच ङ्क्षहसक झड़प हुई जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हो गये जबकि चीन के करीब 40 से भी अधिक सैनिक मारे गये। इसके बाद से गतिरोध के समाधान के लिए दोनों देशों के बीच सरकार , राजनयिक और सैन्य स्तर पर समय समय पर बातचीत होती रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Mar 2022 17:30:49 +0530</pubDate>
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                <title>नए मोर्चों पर चीन</title>
                                    <description><![CDATA[चीन की नई मोर्चाबंधी पूर्वी लद्दाख की सीमा पर तनाव पैदा करने के बाद अब चीन ने भारत के खिलाफ विवाद व तनाव बढ़ाने के लिए नए मोर्चों पर काम करना शुरू कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/6173c0bd2aa0f/article-1848"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-10/china.jpg" alt=""></a><br /><p>चीन की नई मोर्चाबंधी पूर्वी लद्दाख की सीमा पर तनाव पैदा करने के बाद अब चीन ने भारत के खिलाफ विवाद व तनाव बढ़ाने के लिए नए मोर्चों पर काम करना शुरू कर दिया है। अरुणाचल प्रदेश को तिब्बत का हिस्सा बताते हुए चीन काफी दिनों से अरुणाचल प्रदेश को अपना बताने की बयानबाजी करता चला आया है और अब तो उसने नियंत्रण रेखा पर अपनी सेना की तैनाती को बढ़ाने के लिए वहां पक्के निर्माणों की शुरुआत कर दी है। भारत के पास खबर पहले से ही है, लेकिन अब उसने सिक्किम की सीमा पर भी अपनी सेना की तैनाती बढ़ाना शुरू कर गश्त को ज्यादा बढ़ाना शुरू कर दिया है। चीन की इस तरह की हरकतों का अर्थ यही निकलता है कि चीन भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है, लेकिन इसे हल्के में भी नहीं लिया जा सकता क्योंकि लद्दाख की गलवान घाटी में भी चीन ने ऐसी ही हरकतों से शुरुआत की थी और गलवान घाटी में आखिर दोनों देशों के जवानों के बीच हिंसक झड़प भी हुई थी जिसमें हमारे बीस जवान शहीद हो गए थे और तनाव का सिलसिला शुरू हो गया और आज दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने खड़ी हैं। अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके में भी चीन ने पिछले दिनों गलवान जैसी घटना को दोहराने की हरकत की थी लेकिन  बातचीत के बाद चीन के घुसपैठिए अपनी सीमा में लौट गए। चीन ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया अच्छी तरह जानती है कि अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम दोनों राज्य भारत के अभिन्न अंग हैं और भारत के कड़े एतराज के बावजूद अरुणाचल प्रदेश पर अपनी सीनाजोरी दिखा रहा है। हालांकि चीन को जवाब देने के लिए भारत ने भी अपनी सैन्य मोर्चाबंदी को मजबूत करना शुरू कर दिया है। यह सही है कि हर देश को अपनी सीमाओं की रक्षा -सुरक्षा और चौकसी का अधिकार है और सेनाओं की तैनाती का भी, लेकिन एक लंबे समय बाद बेवजह चीन की ऐसी हरकत चिंता बढ़ाने वाली है। दोनों देशों के बीच दशकों से पुराना सीमा विवाद चल रहा है, जिसे चीन सुलझाने की बाचए सीमा विवादों को बढ़ाने की हरकतों पर तुला है। दरअसल, चीन भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही सामरिक रणनीति और गठबंधन से चीन बौखलाया हुआ है। लेकिन चीन को सोचना चाहिए कि पड़ोसी देशों के साथ ऐसे विवादों को जन्म देना उचित नहीं रहता जबकि चीन और भारत के बीच व्यापारिक रिश्ते भी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Oct 2021 14:09:04 +0530</pubDate>
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