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                <title>Political Conflict - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Political Conflict RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल का असली चुनावी युद्ध : मतदाता सूची से करीब 91 लाख लोगों के नाम, सड़कों पर बख्तरबंद दौड़ रही गाड़ियाँ </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में 'विशेष गहन पुनरीक्षण' के तहत 91 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे राजनीतिक पारा चढ़ गया है। AI फिल्टर और तकनीकी विसंगतियों के कारण अल्पसंख्यकों, महिलाओं और SC समुदायों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। ममता बनर्जी ने इसे जनता पर हमला बताया है, जबकि भाजपा ने इसे शुद्धिकरण की प्रक्रिया करार दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-real-electoral-war-of-west-bengal-focused-on-the/article-151319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(2)28.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में इस बार 'विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)' के नाम पर मतदाता सूची से लगभग 91 लाख लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। इनमें से करीब 27 लाख लोगों के नाम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जनित फिल्टर द्वारा "तार्किक विसंगतियों" के आधार पर हटाए गए। यह विसंगतियां उपनामों की वर्तनी में मामूली अंतर राय या रे जैसी छोटी बातों पर आधारित थीं। राज्य में चुनाव से पहले ग्रामीण सड़कों पर बख्तरबंद गाड़ियाँ दौड़ रही हैं और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल बाज़ारों में गश्त कर रहे हैं। राजमार्गों पर चेकपॉइंट्स बने हैं जहाँ नकदी और शराब की तलाशी ली जा रही है। चुनाव आयोग की यह अभूतपूर्व तैनाती राजनीतिक झड़पों और "वोट खरीदने" की कोशिशों को रोकने के लिए है।</p>
<p>लेकिन इस "युद्ध क्षेत्र" जैसे माहौल के बीच बंगाल की असली चुनावी लड़ाई सड़कों पर नहीं, बल्कि उन न्यायाधिकरणों में लड़ी जा रही है जो यह तय कर रहे हैं कि किसे वोट देने का अधिकार है और कौन भारतीय नागरिक है। बंगाली मुसलमानों के लिए, जिनमें से कई के पास कोई निश्चित उपनाम नहीं होता, इसका मतलब यह हुआ कि पूरे के पूरे गांव मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इन कटौतियों ने अल्पसंख्यकों, महिलाओं और गरीबों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। मुस्लिम और दलित बहुल सीमावर्ती जिलों जैसे मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर और दक्षिण 24 परगना में यह मार सबसे अधिक पड़ी है, जहाँ हटाए गए नामों की संख्या 2.2 लाख (दक्षिण 24 परगना) से लेकर 4.6 लाख (मुर्शिदाबाद) तक है।</p>
<p>यह शुद्धिकरण अभियान केवल गरीबों तक सीमित नहीं रहा है। इसने "विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग" को भी अपनी चपेट में लिया है। कोलकाता के प्रसिद्ध आईआईएम की प्रोफेसर नंदिता रॉय ने पाया कि उनका नाम सूची से गायब है। उन्होंने कहा, "मेरे पिता सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी हैं और मैं एक शिक्षाविद हूँ, जब मुझे इस संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है, तो कल्पना कीजिए उन गरीब और अर्ध-शिक्षित लोगों की क्या स्थिति होगी जिन्हें अपने मताधिकार के लिए नौकरशाही से लड़ना पड़ रहा है।" इसी तरह, मुर्शिदाबाद के अंतिम नवाब के वंशज सैयद रजा अली मिर्जा, जिन्हें 'छोटा नवाब' भी कहा जाता है, ने भी अपना नाम मतदाता सूची से हटाए जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया है।</p>
<p>राजनीतिक रूप से, टीएमसी को मालदा और मुर्शिदाबाद में मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण से लाभ मिलता दिख रहा है, क्योंकि मतदाता "परिचित बुराई" के पक्ष में एकजुट हो रहे हैं। दूसरी ओर, हिंदुओं के बीच वोटों का जवाबी ध्रुवीकरण मुश्किल लग रहा है क्योंकि <br />'एसआईआर' अभियान ने अनुसूचित जातियों को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। बंगाल के 25 से 30 लाख की आबादी वाले मतुआ समुदाय के बड़ी संख्या में नाम काटे गए हैं, जिससे वे काफी आक्रोशित हैं। मतुआ समाज के सचिव दिलीप मतुआ ने बताया कि उनके अकेले गांव से 200 नाम हटाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, बिहार जैसे अन्य राज्यों से आकर बंगाल में बसे लोगों को भी पर्याप्त दस्तावेजों के बावजूद सूची से बाहर रखा गया है।</p>
<p>चुनाव आयोग के इस कदम पर पूर्व आईएएस अधिकारी जवाहर सरकार ने सवाल उठाते हुए कहा है कि आयोग के पास नागरिकता के सवाल तय करने का अधिकार नहीं है। वहीं, भाजपा के विचारक और उम्मीदवार स्वपन दासगुप्ता ने इस अभियान का बचाव करते हुए इसे मतदाता सूची से "फर्जी और मृत" वोटरों को निकालने की प्रक्रिया बताया है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे राज्य के लोगों पर हमला बताते हुए उच्चतम न्यायालय में गुहार लगाई है।</p>
<p>आंकड़ों का विश्लेषण यह भी बताता है कि इस अभियान ने महिलाओं को असमान रूप से प्रभावित किया है। पहले चरण के चुनावों वाले 152 विधानसभा क्षेत्रों में पुरुष-महिला अनुपात 952:1000 से गिरकर 950:1000 हो गया है। साबर संस्थान के विश्लेषण के अनुसार, विशेष रूप से एससी आरक्षित सीटों पर महिलाओं के नाम काटे जाने के मामले 52.4 प्रतिशत हैं, जो औसत से अधिक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 'एसआईआर' ने इस चुनाव के परिणामों की भविष्यवाणी करना अत्यंत कठिन बना दिया है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका अंतिम लाभ किस राजनीतिक दल को मिलता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Apr 2026 15:36:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस का केंद्र पर हमला: महिला आरक्षण के नाम पर बहा रहे हैं घड़ियाली आंसू, सुप्रिया श्रीनेत ने कहा-सरकार महिलाओं को आरक्षण देना ही नहीं चाहती</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्र पर महिला आरक्षण रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन का 'षड्यंत्र' विफल होने पर सरकार घड़ियाली आंसू बहा रही है। कांग्रेस ने मांग की कि मौजूदा 543 सीटों पर ही 33% आरक्षण तुरंत लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को उनका वास्तविक संवैधानिक अधिकार मिल सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-attacks-the-centre-crocodile-tears-are-being-shed-in/article-151002"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/supriya.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि केंद्र सरकार हमेशा महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ रही है और यही वजह है कि इस बार उसने महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन लाने का षड्यंत्र किया, जिसके कारण संसद में पेश संविधान संशोधन विधेयक गिर गया और केंद्र को मुंह की खानी पड़ी। पार्टी ने कहा कि केंद्र शुरू से ही महिलाओं को आरक्षण नहीं देना चाहती है। यह हमेशा महिला आरक्षण के विरुद्ध रही है और यही कारण था कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1990 में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लेकर आए थे, तो केंद्र ने इसका विरोध किया था, जिसके कारण वह विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका था।</p>
<p>कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने रविवार को यहां पार्टी मुख्यालय पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार डरी हुई हैं, इसलिए उन्होंने राष्ट्र के नाम शनिवार को 29 मिनट के संबोधन में 58 बार, यानी लगभग हर 30 सेकंड में कांग्रेस का नाम लिया। इससे साफ है कि महिला आरक्षण की आड़ में केंद्र परिसीमन के अपने कथित षड्यंत्र के विफल होने के कारण देश के नाम संबोधन के दौरान घड़ियाली आंसू बहा रहे थे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक गिरने पर दुखी होने की बजाय 543 लोकसभा सीटों के आधार पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए और कांग्रेस इस व्यवस्था का पूरी तरह समर्थन करेगी। उनका कहना था कि मौजूदा 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं को दे दीजिए और इसमें रोड़ा मत बनिए। कांग्रेस प्रवक्ता ने केंद्र पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि देश में जहां भी महिलाओं के साथ अत्याचार होता है, वहां केंद्र सरकार कुछ नहीं बोलती। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी के लिए 'कांग्रेस की विधवा' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर महिलाओं का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण की बात करने वाली केंद्र सरकार को यह याद रखना चाहिए कि जब राजीव गांधी के शासनकाल में महिला आरक्षण विधेयक लाया गया था, तब उन्होंने ने इसके खिलाफ मतदान किया था।</p>
<p>कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के शासन में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। पार्टी के अनुसार, ऐसे मामलों की संख्या 4 लाख से अधिक हो गई है और दुष्कर्म के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। कांग्रेस ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के 1600 से अधिक विधायकों में केवल 167 महिलाएं हैं। देश के कई राज्यों में केंद्र की सरकार होने के बावजूद केवल एक राज्य में ही महिला मुख्यमंत्री है। पार्टी का कहना है कि इससे स्पष्ट है कि केंद्र सरकार महिलाओं के प्रति संवेदनशील नहीं है और यही कारण है कि उसे संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने में संसद में असफलता का सामना करना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 18:10:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सम्राट चौधरी का कांग्रेस पर हमला : संसद में महिला आरक्षण पर विपक्ष का रवैया देश की आधी आबादी का अपमान, विपक्ष को सुनाई खरी खोटी</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने महिला आरक्षण बिल गिरने पर विपक्ष के जश्न को 'शर्मनाक' बताया। उन्होंने कांग्रेस और सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि ये दल केवल अपने घर की महिलाओं को सत्ता में देखना चाहते हैं। चौधरी ने इसे देश की आधी आबादी के साथ धोखा और लोकतंत्र का काला दिन करार दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/samrat-chaudharys-attack-on-congress-oppositions-attitude-on-womens-reservation/article-151005"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/samrat-choudhary.png" alt=""></a><br /><p>पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के लोकसभा में पारित नहीं होने के बाद विपक्ष खुशियाँ मना रहा है, जो सही मायने में देश की आधी आबादी का अपमान है। मुख्यमंत्री चौधरी ने आज भाजपा प्रदेश कार्यालय में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की महिला नेताओं के साथ आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति के साथ धोखा हुआ। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के इतिहास में यह शर्मनाक घटना थी, जब महिलाओं के अपमान पर कांग्रेस, द्रविण मुनेत्र कड़गम (डीएमके), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) तथा समाजवादी पार्टी(सपा) जैसे दल खुशियाँ मना रहे है। उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, काफी समय पहले लालू प्रसाद भी बिल फाड़ते नजर आये थे।</p>
<p>सम्राट चौधरी ने कहा कि महिला आरक्षण का विरोध वह पार्टियाँ कर रही हैं, जो चाहती हैं कि उनके घर की महिलाएं और बेटियां सांसद तथा विधायक बनें, लेकिन किसी गरीब की बेटी को यह उपलब्धि हासिल नहीं हों। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी को अपनी बहन की चिंता है, लेकिन देश की दूसरी बेटियों के बारे में वह नहीं सोचते हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को अपनी पत्नी की चिंता है, लेकिन उत्तरप्रदेश से 40 महिला सांसद चुन कर लोकसभा में जाएँ, यह बात उन्हें मंजूर नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 16:32:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>महिला आरक्षण मुद्दे पर सियासत तेज: कांग्रेस ने भाजपा मुख्यालय के समीप किया विरोध प्रदर्शन, महिलाओं के मुद्दे पर गंभीर नहीं होने का लगाया आरोप </title>
                                    <description><![CDATA[महिला आरक्षण विधेयक के मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा मुख्यालय के समीप जोरदार प्रदर्शन किया। जयराम रमेश और दीपेंद्र हुड्डा जैसे नेताओं ने केंद्र पर महिलाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया। विपक्ष का कहना है कि सरकार आरक्षण को परिसीमन से जोड़कर देरी कर रही है, जो महिलाओं के साथ सरासर धोखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/politics-intensifies-on-womens-reservation-issue-congress-protests-near-bjp/article-150999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/congress2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय के समीप जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए और केंद्र सरकार पर महिलाओं के मुद्दे पर गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया। प्रदर्शन में जयराम रमेश, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, देवेंद्र यादव, अलका लांबा समेत कई सांसद और नेता मौजूद रहे।</p>
<p>कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, "बीजेपी ने जिस तरह महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश की है, उससे उनकी महिला विरोधी मानसिकता साफ झलकती है। उनका असली उद्देश्य महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन लागू करना था। कांग्रेस पार्टी तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक देश में महिला आरक्षण लागू नहीं हो जाता।"</p>
<p>वहीं कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, "2014 से नरेंद्र मोदी देश का नेतृत्व कर रहे हैं, लेकिन 2026 तक महिलाओं के साथ केवल धोखा हुआ है। सरकार महिला आरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है। बीजेपी और प्रधानमंत्री केवल यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे महिलाओं के पक्ष में हैं, जबकि हकीकत इसके उलट है।" ग़ौरतलब है कि महिला आरक्षण मुद्दे को लेकर राजनीति तेज है सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2026 14:32:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से झटका : अदालत ने ठुकराई ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी, असम सीएम की पत्नी पर की थी आपत्तिजनक टिप्पणी</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी ठुकरा दी है। असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर विवादास्पद टिप्पणी और पासपोर्ट संबंधी आरोपों के मामले में खेड़ा को अब असम की अदालत में पेश होना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह स्थानीय अदालत की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/shock-to-pawan-kheda-from-the-supreme-court-the-court/article-150802"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/01.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ा झटका देते हुए उनकी ट्रांजिट अग्रिम जमानत बढ़ाने की अर्जी ठुकरा दी है। यह मामला असम पुलिस द्वारा असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी की शिकायत पर दर्ज की गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है। पवन खेड़ा का आरोप था कि सीएम सरमा की पत्नी के पास अलग-अलग देशों के कई पासपोर्ट हैं।</p>
<p>पवन खेड़ा की उस अर्जी को भी अदालत ने ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने ट्रांजिट जमानत को अगले मंगलवार तक बढ़ाने की मांग की थी ताकि वह सोमवार को असम की अदालत में पेश हो सकें। यह घटनाक्रम शीर्ष अदालत द्वारा उनकी अग्रिम जमानत पर रोक लगाने के दो दिन बाद सामने आया है। यह अग्रिम जमानत उन्हें तेलंगाना उच्च न्यायालय ने दी थी। न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और अतुल एस चांदुरकर की पीठ ने टिप्पणी की कि यदि संबंधित अदालत काम नहीं कर रही है, तो मामले की सुनवाई के लिए अनुरोध किया जा सकता है, जिस पर मौजूदा चलन के अनुसार विचार किया जा सकता है।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न तो वह और न ही तेलंगाना उच्च न्यायालय असम की उस अदालत के काम में कोई दखल देगा जो पवन खेड़ा के खिलाफ मामले की सुनवाई करेगी। गौरतलब है कि 5 अप्रैल को एक संवाददाता सम्मेलन में पवन खेड़ा ने आरोप लगाया था कि सीएम सरमा के पास कई पासपोर्ट हैं और कई देशों में उनकी संपत्तियां हैं, जिनका जिक्र असम के मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया था। मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को खारिज कर दिया, जिसके बाद पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 15:01:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के 9 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी : घर के बाहर पुलिस बल तैनात, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के उल्लंघनों से जुड़ा है मामला</title>
                                    <description><![CDATA[जालंधर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के घर और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) समेत 9 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित फेमा (FEMA) उल्लंघन मामले में हुई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे भाजपा की चुनावी साजिश बताते हुए 'टिपिकल मोदी स्टाइल' करार दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ed-raids-nine-locations-of-rajya-sabha-mp-ashok-mittal/article-150458"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ashok.png" alt=""></a><br /><p>जालंधर। पंजाब से आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के करीब नौ ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापे मारे हैं। ईडी के टीमों जालंधर में बुधवार सुबह नौ बजे राज्यसभा सांसद मित्तल के घर, यूनिवर्सिटी समेत अन्य ठिकानों पर पहुंचीं। जांच चल रही है। उनके घर के बाहर पुलिस बल तैनात की गई है। श्री मित्तल इस वक्त अपने जालंधर स्थित घर में मौजूद हैं। उल्लेखनीय है कि लगभग 12 दिन पहले आप ने सांसद राघव चड्डा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटा दिया था। इसके बाद श्री मित्तल को उपनेता बनाया गया। श्री मित्तल पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फाउंडर और चांसलर हैं। वह 2022 में राज्यसभा सांसद बने थे।</p>
<p>जानकारी के मुताबिक ईडी की दिल्ली टीम ने जालंधर और फगवाड़ा में लवली ग्रुप के कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के कथित उल्लंघनों से जुड़े मामले में की जा रही है। छापेमारी लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, लवली ऑटोज, लवली स्वीट्स और लवली डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर समेत कई स्थानों पर चल रही है। इसके अलावा, मित्तल के परिवार से जुड़े आवासीय और व्यावसायिक परिसरों पर भी जांच की जा रही है, जिनमें उनके भाई रमेश मित्तल और नरेश मित्तल के ठिकाने शामिल हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "भारतीय जनता पार्टी द्वारा पंजाब चुनाव की तैयारी शुरू... आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के घर और यूनिवर्सिटी में ईडी की रेड.. टिपिकल मोदी स्टाइल..। हम वो पत्ते नहीं, जो शाख से टूट कर गिर जाएँगे, आंधियो को कह दो अपनी औक़ात में रहें।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:39:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान में अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना : डोनाल्ट ट्रंप ने पोप लियो पर साधा निशाना, बोले-ऐसे धर्मगुरु की आवश्यकता नहीं जो उनकी नीतियों का करते हों विरोध </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप लियो XIV की तीखी आलोचना करते हुए उन्हें "राजनीति छोड़ धर्मगुरु बनने" की सलाह दी है। ईरान और वेनेजुएला नीतियों पर पोप के विरोध को ट्रंप ने अस्वीकार्य बताया। उन्होंने 'ट्रुथ सोशल' पर स्पष्ट किया कि वे केवल वही कर रहे हैं जिसके लिए उन्हें जनादेश मिला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/criticizing-american-action-in-iran-donald-trump-targeted-pope-leo/article-150160"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump3.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोप लियो चौदहवें पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे धर्मगुरु की आवश्यकता नहीं है जो उनकी नीतियों का विरोध करते हों। पोप ने ईरान में अमेरिका के कदमों की आलोचना की है। विशेष रूप से, उन्होंने ईरानी लोगों के विरुद्ध अमेरिकी धमकियों को अस्वीकार्य बताया। अप्रैल की शुरुआत में अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने सैन्य कर्मियों के लिए प्रार्थना के आह्वान किया था, जिसके बाद पोप ने एक प्रवचन में कहा था कि प्रभुत्व जमाने की इच्छा ईसा मसीह के मार्ग के अनुरूप नहीं है।</p>
<p>अमेरिकी नेता ने 'ट्रुथ सोशल' पर कहा, "मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिये जिसे लगता हो कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना ठीक है। मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिये जिसे अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला करना भयानक लगता हो, जबकि वेनेजुएला संयुक्त राज्य अमेरिका में भारी मात्रा में नशीले पदार्थ भेज रहा था। इससे भी बुरा यह कि वेनेजुएला अपनी जेलों से हत्यारों और मादक पदार्थों के तस्करों को हमारे देश में भेज रहा था।</p>
<p>मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिये जो संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति की आलोचना करे, जबकि मैं तो केवल वही कर रहा हूं, जिसके लिये मुझे भारी बहुमत से चुना गया है।" राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यदि वह व्हाइट हाउस में न होते, तो "लियो वेटिकन में नहीं होते।" डोनाल्ट ट्रंप ने पोप से "कट्टरपंथी वामपंथियों" को बढ़ावा देना बंद करने और "एक राजनेता के बजाय एक महान धर्मगुरु बनने पर ध्यान केंद्रित करने" का भी आह्वान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 15:09:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जौनपुर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन : सीएम सरमा का पुतला फूंका, मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने का लगाया आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[जौनपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा का पुतला फूंका। जिलाध्यक्ष डॉ. प्रमोद सिंह ने सरमा द्वारा मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ की गई अमर्यादित टिप्पणी की कड़ी निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए उनके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-protest-in-jaunpur-burnt-effigy-of-cm-hemant-biswa/article-149851"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/assam-cm.png" alt=""></a><br /><p>जौनपुर। असम में चल रहे विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा द्वारा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, उनके परिवार तथा कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के खिलाफ कथित अमर्यादित टिप्पणी के विरोध में जौनपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका पुतला फूंका। जिलाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री के चुनाव को निरस्त करने और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने की मांग की। पुतला दहन के बाद सभा को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने आरोप लगाया कि असम में उनके कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार बढ़ा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विवाद सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने संतुलन खो दिया और कांग्रेस नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान पुलिस का दुरुपयोग किया जा रहा है, जो आचार संहिता का उल्लंघन है, और इस पर चुनाव आयोग को कार्रवाई करनी चाहिए। शहर कांग्रेस अध्यक्ष आरिफ खान ने भी सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना अनुचित है। उन्होंने मुख्यमंत्री और उनके परिवार के खिलाफ जांच की मांग की।</p>
<p>इस अवसर पर शेर बहादुर सिंह, निलेश सिंह, लाल प्रकाश पाल, अरुण शुक्ला, बाड़ूराम, मनीष सिंह, तौफीक अहमद, वैस खान, सैफ खान, राजकुमार गुप्ता, ताहिर, राजा, रिजवान अली, अशरफ अली, अरविन्द यादव, संतोष निषाद, इकबाल, शशि यादव सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 17:41:21 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान नीति की आलोचना : चार पत्रकारों पर डोनाल्ड ट्रंप ने किए तीखे हमले, 'पागल' और 'मूर्ख' दिया करार</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान नीति की आलोचना करने वाले टकर कार्लसन और मेगिन केली जैसे पत्रकारों को 'कम आईक्यू' वाला और 'पागल' करार दिया है। उन्होंने 'मागा' (MAGA) का अर्थ मजबूती और ईरान को परमाणु मुक्त रखना बताया। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ये पत्रकार सस्ती लोकप्रियता के लिए देश के हितों के खिलाफ बोल रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/donald-trump-launches-sharp-attacks-on-four-journalists-who-criticized/article-149813"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ईरान नीति की आलोचना करने वाले चार दिग्गज पत्रकारों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'पागल' और 'मूर्ख' करार दिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर साझा किए गए एक पोस्ट में इन पत्रकारों को 'मुसीबत पैदा करने वाला' बताया और कहा कि वे सस्ती लोकप्रियता के लिए कुछ भी कह सकते हैं। उन्होंने मुख्य रूप से पत्रकार टकर कार्लसन, मेगिन केली, कैंडिस ओवेन्स और एलेक्स जोन्स पर निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग वर्षों से उनके खिलाफ लिख रहे हैं तथा उन्हें (पत्रकारों) लगता है कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना बहुत अच्छी बात है।</p>
<p>ईरान को 'आतंकवाद का नंबर एक प्रायोजक देश' बताते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इन तथाकथित जानकारों में एक बात समान है और वह है इनका 'कम आईक्यू'। उन्होंने कहा, "ये मूर्ख लोग हैं, वे खुद यह जानते हैं, उनके परिवार वाले जानते हैं और बाकी दुनिया भी यह जानती है।" ट्रंप ने जोर देकर कहा कि 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (मागा) का मतलब जीत, मजबूती और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने दावा किया कि 'मागा' समर्थक उनके साथ हैं और उन्होंने टकर कार्लसन या मेगिन केली जैसे 'मूर्खों' के बजाय ट्रंप को शत-प्रतिशत 'अप्रूवल रेटिंग' दी है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने व्यक्तिगत हमला करते हुए मेगिन केली के पुराने सवालों, कैंडिस ओवेन्स द्वारा फ्रांस की प्रथम महिला पर की गई टिप्पणियों और एलेक्स जोन्स की बातों को मूर्खतापूर्ण बताया। उन्होंने केबल न्यूज नेटवर्क (सीएनएन) और न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों की भी आलोचना की और कहा कि ये संस्थान पहली बार इन लोगों को कवरेज दे रहे हैं क्योंकि वे ट्रंप के खिलाफ बोल रहे हैं। गौरतलब है कि यह विवाद तब शुरू हुआ जब इन पत्रकारों ने ईरान पर सैन्य हमलों के ट्रंप प्रशासन के फैसले की सार्वजनिक आलोचना की। टकर कार्लसन ने ईरान ऑपरेशन को 'घृणित' बताया था, जबकि कैंडिस ओवेन्स ने राष्ट्रपति ट्रंप को हटाने तक की मांग कर दी थी। एलेक्स जोन्स, जो लंबे समय तक श्री ट्रंप के समर्थक रहे, उन्होंने भी इस संघर्ष को लेकर अपना रुख बदल लिया है। यह टकराव 'मागा' आंदोलन के भीतर एक बड़ी दरार को दर्शाता है। अमेरिका फर्स्ट की विदेश नीति, विशेष रूप से ईरान युद्ध और इजरायल के साथ संबंधों को लेकर उपजे मतभेदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को अपने पुराने सहयोगियों से अलग कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:04:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आम आदमी पार्टी का बड़ा फैसला: राघव चड्ढा को राज्यसभा के उपनेता पद से हटाया, जानें कौन लेगा उनकी जगह ?</title>
                                    <description><![CDATA[आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाकर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी। अरविंद केजरीवाल के इस फैसले के बाद पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से चड्ढा का बोलने का समय भी रोकने को कहा। यह कदम संसद सत्र से पहले पार्टी के अंदरूनी कलह और नेतृत्व परिवर्तन के बड़े संकेतों को दर्शाता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-decision-of-aam-aadmi-party-raghav-chadha-removed-from/article-148839"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/raghav-chadda.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने बड़े संगठनात्मक बदलाव के रूप में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाने का फैसला लिया है। पार्टी के संस्थापक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने उनकी जगह भारतीय बिजनेसमैन से पॉलिटिशियन बने और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फाउंडर और चांसलर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी ने राज्यसभा सेक्रेटेरिएट को बताया कि सांसद राघव चड्ढा को अब पार्लियामेंट में बोलने का भी समय नहीं दिया जाना चाहिए।</p>
<p>आम आदमी पार्टी का ये बयान पार्लियामेंट सेशन से पहले राज्यसभा में पार्टी के अंदरूनी कलह को उजागर करता है। उन्होंने इस बात पर पूरा जोर दिया कि कानूनों को मॉडर्न पेरेंटिंग की असलियत को दिखाना चाहिए और शुरुआती चाइल्डकेयर में दोनों माता-पिता की बराबर हिस्सेदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 14:43:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>असम विधानसभा चुनाव : प्रियंका गांधी का राज्य सरकार पर निशाना, बिस्वा सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर उठाए सवाल, संस्कृति और जनता की ताकत को बचाना कांग्रेस की लड़ाई</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने नजीरा से असम चुनाव अभियान का आगाज किया। उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर महिलाओं को डराने और सरकारी योजनाओं के नाम पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। प्रियंका ने जोर दिया कि सरकारी धन जनता की संपत्ति है, जिसे डरा-धमकाकर वोट हासिल करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/assam-assembly-elections-priyanka-gandhi-targets-hemant-biswa-government-raises/article-148742"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/prinaka-gandhi.png" alt=""></a><br /><p>गुवाहाटी। कांग्रेस महासचिव और लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को असम विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार अभियान की शुरुआत करते हुए राज्य की सत्तारूढ सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठाये। नजीरा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी वाड्रा ने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई असम की संस्कृति, अभिव्यक्ति और जनता की ताकत को बचाने की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ देने के नाम पर लोगों, खासकर महिलाओं, को डराया और दबाव में रखा जा रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की बात की जाती है लेकिन साथ ही यह भी कहा जाता है कि अगर वे राज्य सरकार की रैलियों में नहीं जाएंगी तो उन्हें पैसे नहीं मिलेंगे। उन्होंने सवाल किया, "महिलाएं अपना काम करें या सरकार की रैली में बैठें?" कांग्रेस महासचिव ने जोर देते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का पैसा जनता का है, न कि किसी पार्टी का। उन्होंने कहा कि सरकार का काम लोगों के हित और उनके बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए होना चाहिए, न कि डर और दबाव के जरिए शासन चलाना। गौरतलब है कि, असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी अपनी खोई हुई पुरानी जमीन तलाशने में जुटी है। प्रियंका गांधी वाड्रा की आज राज्य में नजीरा, तिन खोंग और खोवांग विधानसभा में चुनावी सभाएं आयोजित की गयी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:28:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>लोकसभा में विपक्ष का केंद्र पर हमला: आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक पर जताया रोष, अमरावती को राजधानी बनाने के लिए प्रदेश को मिले आर्थिक मदद</title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में अमरावती को आंध्र प्रदेश की स्थाई राजधानी बनाने हेतु ऐतिहासिक विधेयक पेश हुआ। टीडीपी और भाजपा ने इसे विकास का आधार बताया, जबकि विपक्ष ने किसानों के पुनर्वास और आर्थिक सहायता की मांग की। वाईएसआरसीपी ने भूमि विवादों का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया, लेकिन विधेयक से राजधानी परिवर्तन पर पूर्ण विराम लगना तय है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/opposition-in-lok-sabha-attacks-the-center-and-expresses-anger/article-148718"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/congress.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। लोक सभा में बुधवार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा में शामिल होते हुए विपक्षी सदस्यों ने कहा कि अमरावती को राज्य की राजधानी बनाने काे कानूनी रूप से अनिवार्य किये जाने का तो वे स्वागत करते हैं, लेकिन राज्य को करों से छूट देने और इसके लिए जमीन देने वाले किसानों के पुनर्वास के समुचित उपाय न किये जाने पर रोष जताया। चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के मणिक्कम टैगाेर ने कहा कि वह इस विधेयक के पक्ष में हैं, लेकिन आंध्रप्रदेश को आर्थिक सहायता की जरूरत है। उसे करों में छूट दी जानी चाहिए। अमरावती को राजधानी बनाने के लिए पर्याप्त राशि दी जानी चाहिए। वह चाहते हैं कि अमरावती विश्व स्तरीय राजधानी बने, लेकिन उसे विशेष क्षेत्र के अधिकार प्राप्त हों। इसके लिए केन्द्र सरकार को आर्थिक मदद भी देनी चाहिए।</p>
<p>संचार राज्य मंत्री एवं तेलुगूदेशम पार्टी के डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासामी ने कहा कि इस विधेयक के संसद से पारित हो जाने के बाद अमरावती आंध्रप्रदेश की राजधानी बनेगी और भविष्य में कोई भी सरकार राज्य में आये, राजधानी नहीं बदल पायेगी। उन्होंने कहा कि वह बहुत खुश हैं कि आज यह विधेयक सदन में लाया गया है, जिससे अमरावती को आंध्रप्रदेश की राजधानी बनाया जा सकेगा। अमरावती कृष्णा के तट पर स्थित है। हजारों किसानों ने इसके लिए जमीन दी है, वे अमरावती को राजधानी बनाने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और इसके लिए धरने पर भी बैठे हैं।</p>
<p>भारतीय जनता पार्टी के सी एम रमेश ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी शहर को राजधानी बनाने के लिए विधेयक लाया गया हो। इस विधेयक के माध्यम से अमरावती को आंध्रप्रदेश की राजधानी बनाने को अनिवार्य किया गया है। इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद यह सुनिश्चित होगा कि अमरावती ही राजधानी हो। उन्होंने कहा कि राज्य की पूर्ववर्ती वाईएसआरसीपी सरकार ने प्रदेश में तीन राजधानियां बनायी थीं, विश्व में कहीं ऐसा है कि किसी देश या प्रदेश की तीन-तीन राजधानियां हों। अमरावती के राजधानी बन जाने से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और राज्य में उद्योग स्थापित होंगे। राजस्व में बढ़ोतरी होगी और राज्य विकसित होगा।</p>
<p>वाईएसआरसीपी के पीवी मिधुन रेड्डी ने कहा कि अमरावती में 34 हजार एकड़ भूमि किसानों से ली जा चुकी है, इसके अलावा और भूमि भी लेने के प्रयास किये जा रहे हैं। राज्य की राजधानी बनाने के लिए आखिर कितनी भूमि की आवश्यकता है। जिन किसानों की भूमि ली गयी है, उनके पुनर्वास के कोई उपाय नहीं किये गये है। वादे के अनुसार उन्हें घर नहीं दिये गये, उनके बच्चों को मुफ्त शिक्षा नहीं दी जा रही है। किसानों को भूखंड कब दिये जायेंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राज्य कर्ज में डूब रहा है, सरकार के पास राजस्व नहीं है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अमरावती के पास पांच से 10 लाख रुपये प्रति एकड़ भूमि खरीद ली गयी जो अब करोड़ों रुपये प्रति एकड़ हो गयी है। गलत तरीकों से धन कमाने के वहां खेल चल रहे हैं। उन्होंने आंध्रप्रदेश को आर्थिक सहायता दिये जाने की मांग की। रेड्डी ने कहा कि पूरे राज्य को विकसित करने के लिए समान रूप से निधि की आवश्यकता होती है। राज्य सरकार का पूरा जोर अमरावती पर केन्द्रित है, जो उचित नहीं है। उन्होंने मांग की कि अमरावती को राजधानी बनाने की समय सीमा निर्धारित की जाये। यह विधेयक अर्थहीन है। वह इस रूप में इसका विरोध करते हैं। इसके बाद वाईएसआरसीपी के सांसद सदन से बहिर्गमन कर गये।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 14:55:50 +0530</pubDate>
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