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                <title>Rajasthan Education - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Rajasthan Education RSS Feed</description>
                
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                <title>राजस्थान के सरकारी स्कूलों में हिन्दी में पढ़ाए जा रहे 123 साहित्यकार : महिला लेखक महज 13, एससी-एसटी और अल्पसंख्यक बमुश्किल एक-एक दो-दो </title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति की पड़ताल में सामने आया कि राजस्थान के सरकारी स्कूलों की कक्षा 6 से 12 तक की हिंदी पुस्तकों में 123 साहित्यकार शामिल, लेकिन इनमें केवल 13 महिलाएं हैं। दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक साहित्यकारों का प्रतिनिधित्व भी बेहद सीमित है। कई लेखकों की रचनाएं बार-बार शामिल हैं, जबकि अनेक समकालीन रचनाकार पाठ्यक्रम से बाहर हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/of-the-123-literary-women-writers-being-taught-in-hindi/article-161045"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान के सरकारी स्कूलों में कक्षा छह से 12वीं तक हिन्दी में 123 साहित्यकारों की कविताएं, कहानियां और संस्मरण पढ़ाए जा रहे हैं, लेकिन इनमें महिलाएं महज 13 हैं। आदिवासी, अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक वर्ग के मौजूदा दौर के साहित्यकारों की रचनाएं बमुश्किल एक-एक या दो-दो हैं। अल्पसंख्यकों में सिर्फ असगर वजाहत को पढ़ाया जाता है। अनुसूचित जाति से ओमप्रकाश वाल्मीकि की ग्यारहवीं कक्षा में 'खानाबदोश' कहानी है। हिन्दी में कक्षा छह से बारहवीं तक हिन्दी साहित्य के कुछ लेखकों की कहानियां या कविताएं छह से बारहवीं तक पांच-पांच या चार-चार बार पढ़ाई जाती हैं, जबकि बहुत से समकालीन लेखकों को शामिल ही नहीं किया गया है। </p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति ने छठी से 12वीं तक की हिंदी पाठ्यपुस्तकों की गहन स्कैनिंग की तो आए चौंकाने वाले नतीजे</strong><br />आज की बहुत सी महिला साहित्यकार चर्चा में हैं, लेकिन उनका कुछ भी स्कूलों में नहीं पढ़ाया जा रहा है। महादेवी वर्मा को कक्षा नौ में 'मेरे बचपन के दिन', कक्षा ग्यारह में 'कविता जाग तुझे दूर जाना' और कक्षा 12वीं में 'भक्तिन' कहानी के रूप में पढ़ाया जा रहा है। मन्नू भंडारी को कक्षा दस में 'एक कहानी यह भी' और कक्षा ग्यारहवीं में 'रजनी' के रूप में पढ़ाया जा रहा है। </p>
<p><strong>जिस लेखक को छठी में पढ़ा, उसी को 8वीं-10वीं और 11वीं में फिर पढ़ा रहे</strong><br />मुंशी प्रेमचन्द की कहानियों को कक्षा छह से बारहवीं तक पांच बार पढ़ाया जा रहा है। कक्षा छह में कहानी 'परीक्षा', कक्षा नौ में 'दो बैलों की कथा', कक्षा ग्यारह में 'नमक का दरोगा', बारहवीं में 'सूरदास की झोपड़ी' और बारहवीं में ही ऐच्छिक विषय के रूप में 'ईदगाह' कहानी पढ़ाई जाती है। कबीर चार बार पढा़ए जा रहे हैं, जिसमें कक्षा आठ में कबीर की 'साखियां', कक्षा नौ में 'साखियां एवं 'सबद', कक्षा ग्यारह में 'हम तो एक-एक करि जाना' और कक्षा ग्यारह में ही 'अरे इन दोहुन राह न पाई देह में' उनकी रचना पढ़ाई जाती हैं। व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई तीन कक्षाओं में पढ़ाए जाते हैं, जिसमें कक्षा आठ में 'बस की यात्रा', कक्षा नौ में 'प्रेमचन्द के फटे जूते' और ग्यारहवीं कक्षा में 'टार्च बेचने' वाला व्यंग्य पढ़ाया जा रहा है। संत तुलसीदास की रचनाएं भी कक्षा दस, बारहवीं में अनिवार्य और ऐच्छिह विषय के रूप में पढ़ाई जा रही हैं। जिसमें कक्षा दस में 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद', कक्षा बारहवीं में 'कवितावली' उत्तर कांड से 'लक्ष्मण-मूच्र्छा और राम का विलाप' के रूप में पढ़ रहे हैं। सूरदास जी कक्षा छह, आठ, दस, ग्यारह में पढ़ाए जाते हैं। शिक्षाविद कहते हैं, राजस्थान का समूचा हिंदी पाठ्यक्रम नये सिरे से तैयार करने की जरूरत जता रहा है। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि इसे ठीक करने के नाम पर और खराब कर दिया जाये, जैसा कि होता रहा है।  </p>
<p>सरकार किसी भी दल की हो, एक मात्र उद्देश्य रहता है कि राजसत्ता के समर्थक लोगों को आगे बढ़ाया जाए। उनको डर है कि यदि महिलाओं के लेखन को बढ़ावा दिया जाएगा तो महिलाएं लेखन के माध्यम से अधिकारों की मांग करेंगी। इससे पुरुष सत्तात्मक समाज को चोट लगेगी। इससे चुनौती राजसत्ता को भी मिलेगी। वंचित समाज को भी इसलिए स्थान नहीं मिल पाता है कि वे अपने शोषण की चर्चा करेंगे।<br />-प्रो.राजीव गुप्ता, प्रख्यात समाजशास्त्री, जयपुर</p>
<p>कक्षा छह से बारहवीं तक की हिन्दी की पुस्तकों में महिला, अदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक लेखकों को स्थान नहीं मिलना हमारी मानसिकता को दर्शाता है। हालांकि, प्रेमचन्द ने हिन्दी साहित्य में बहुत कुछ लिखा है। समाज के वंचित समाज की वेदना को अपनी कलम के माध्यम से मुखर किया है, लेकिन वंचित  और दलित आदिवासी समाजों के ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने दर्द को भोगा है। ऐसे में प्रेमचन्द के साथ अन्य हाशिए के समाज को भी स्थान मिलना चाहिए।<br />-प्रो.सविता सिंह, <br />प्रोफेसर इग्नू, नई दिल्ली</p>
<p>वर्चस्ववादी लोगों के कारण अन्य लेखकों को मौका ही नहीं मिल पाता है। आज एससी, एसटी, अल्पसंख्यक वर्ग के हजारों लोग लेखक हैं। उनको स्थान मिलना चाहिए। साहित्य में अब तक महिला को नायिक के रूप में दिखाया जाता है, जबकि उसके संघर्ष नायिका से बहुत अलग होते हैं। उसका अपना दर्द है,पीड़ा और बैचेनी हैं, जिसे स्थान नहीं मिल पाया है।<br />-हरिराम मीणा, पूर्व आईपीएस एवं प्रख्यात आदिवासी साहित्यकार </p>
<p><br />यह निश्चय ही बहुत दुखद और चिंताजनक बात है कि करीब सवा सौ लेखकों में पाठ्यक्रम तैयार करने वालोें में स्त्री, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के महज इक्का-दुक्का ही लेखक मिले हैं। देश में इन समुदाय के अत्यंत महत्वपूूर्ण विद्वान लेखक-रचनाकारों की बहुत बड़ी संख्या हैं। यह चयन इस तथ्य को सिद्ध करता है कि पाठ्यक्रम निर्माण में भी पितृसत्तात्मक, जातिवादी और साम्प्रदायिक मानसिकता का वर्चस्व है। इस तरह से तैयार पाठ्यकम बच्चांे की कैसी मानसिकता का निर्माण करेंगे,यह स्वत: सिद्ध हो जाता है।<br />-प्रेमचन्द गांधी,<br /> प्रगतिशील लेखक एवं साहित्यकार </p>
<p>मेरे ध्यान में यह विषय नहीं है। इसे दिखवा लेंगे। अभी तो नया सत्र शुरू हो गया। आगे देखेंगे।<br />-राजेश यादव, अति.मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग, राजस्थान </p>
<p>लेखकों में भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। जो अच्छा लिख रहे हैं, जिन्होंने समाज, संस्कृति, उत्पीड़न, दर्द और अनुभव पर लिखा हैं,उनको मौका दिया जाना चाहिए। आज सभी वर्गों में बहुत ही काबिल लेखक हैं, जिन पर शोध कार्य हो रहे हैं, लेकिन हाशिए के समाज को छोड़ देना ठीक नहीं है।<br />-प्रो.जनक सिंह मीणा,<br />केन्द्रीय विश्वविद्यालय,गुजरात </p>
<p>यह दिखवा लेंगे। सभी प्रमुख लेखकों को स्थान मिलना चाहिए। <br />-मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री, राजस्थान सरकार।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 10:45:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजस्थान बोर्ड 10वीं रिजल्ट में देरी : कॉपियों के अंक अपलोड न होने से अगले सप्ताह तक टला परिणाम</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर बोर्ड द्वारा 10वीं का परीक्षा परिणाम अब अगले सप्ताह जारी होने की संभावना है। उत्तर पुस्तिकाओं के अंक ऑनलाइन अपडेट न होने और चेटीचंड, ईद की छुट्टियों के कारण 20 मार्च की डेडलाइन टल गई है। सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ ने लंबित अंकों को तुरंत मंगवाने के निर्देश दिए हैं ताकि छात्रों का इंतजार जल्द खत्म हो सके।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/delay-in-rajasthan-board-10th-result-result-postponed-till-next/article-147211"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajasthan1.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के 10वीं का परीक्षा परिणाम अब अगले सप्ताह से पहले संभव नहीं हो सकेगा। हालांकि, बोर्ड प्रशासन ने 20 मार्च तक दसवीं परीक्षा का परिणाम घोषित करने की घोषणा भी कर दी थी, लेकिन अभी तक करीब 200 उत्तर पुस्तिकाओं को जचने वाले परीक्षक द्वारा जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं के अंक ही बोर्ड को ऑनलाइन नहीं भिजवाए है। इसके अलावा बोर्ड द्वारा स्कूलों को भी सत्रांक भेजने के लिए 19 मार्च तक का समय दिया गया था।</p>
<p>ऐसी स्थिति में बोर्ड की खुद की परीक्षा परिणाम जारी करने की समस्त तैयारी पूरी नहीं हुई थी। अब शुक्रवार को चेटीचंड का अवकाश शनिवार को ईद का अवकाश और रविवार को राजकीय अवकाश के बाद सोमवार से शुरू होने वाले नए सप्ताह के दौरान ही बोर्ड द्वारा परिणाम जारी किया जा सकेगा। शुक्रवार को चेटीचंड के अवकाश के बावजूद बोर्ड में अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। बोर्ड के सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ ने सभी सहायक निदेशक को निर्देशित किया है, कि अभी तक जिन भी परीक्षक द्वारा ऑनलाइन बोर्ड को अंक नहीं भेजे गए हैं। उन्हें तुरंत निर्देशित करते हुए अंक मंगवा जाएं ताकि परिणाम में बिना वजह देरी नहीं हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 15:25:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>स्कूल छोड़ने की दर आधी : भजनलाल सरकार में शिक्षा ने पकड़ी रफ्तार, बजट से मिलेगा नई पीढ़ी को मजबूत आधार</title>
                                    <description><![CDATA[बजट वर्ष 2026-27 में शिक्षा क्षेत्र को मजबूत आधार देने के लिए प्रारम्भिक शिक्षा के लिए 21 हजार 646 करोड़ रुपये तथा माध्यमिक शिक्षा के लिए 19 हजार 473 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/school-dropout-rate-halved-education-gained-record-pace-under-bhajan/article-143272"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/cm-bhjan-lal-sharma.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में ड्रॉप आउट रेट में ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई है, जिससे शिक्षा व्यवस्था की मजबूती का संकेत मिलता है।</p>
<p>आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार वर्ष 2024-25 में प्राथमिक स्तर पर ड्रॉप आउट रेट 7.6 प्रतिशत से कम होकर 3.6 प्रतिशत रह गई है। उच्च प्राथमिक स्तर पर यह 6.8 प्रतिशत से कम होकर 3.6 प्रतिशत और माध्यमिक स्तर पर 11.1 प्रतिशत से कम होकर 7.7 प्रतिशत हो गई है। वहीं संक्रमण दर में भी  सुधार हुआ है। माध्यमिक से उच्च माध्यमिक में संक्रमण दर 82.6 प्रतिशत से बढ़कर 88.2 प्रतिशत तथा प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में 90.7 प्रतिशत से बढ़कर 93.8 प्रतिशत हो गई है।</p>
<p>बजट वर्ष 2026-27 में शिक्षा क्षेत्र को मजबूत आधार देने के लिए प्रारम्भिक शिक्षा के लिए 21 हजार 646 करोड़ रुपये तथा माध्यमिक शिक्षा के लिए 19 हजार 473 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही समग्र शिक्षा अभियान, आरटीई शुल्क पुनर्भरण और पीएमश्री योजना के लिए भी पर्याप्त राशि निर्धारित की गई है।</p>
<p>सरकार ने टेबलेट-लैपटॉप, साइकिल और यूनिफॉर्म वितरण में डीबीटी और ई-वाउचर प्रणाली लागू कर पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की पहल की है। ‘स्कूल टू वर्क’ और ‘स्कूल ऑन व्हील्स’ जैसे नवाचारों के माध्यम से व्यावसायिक एवं समावेशी शिक्षा को नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक और तकनीक आधारित शिक्षा के जरिए नई पीढ़ी को सशक्त बनाना है, ताकि राजस्थान शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/school-dropout-rate-halved-education-gained-record-pace-under-bhajan/article-143272</link>
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                <pubDate>Sun, 15 Feb 2026 19:00:59 +0530</pubDate>
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