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                <title>Missile Defense - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अमेरिका को बड़ा झटका : ईरान ने किया दूसरे F-35 फाइटर जेट गिराने का दावा, ट्रंप के दावे को बताया झूठा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान की IRGC ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों को चुनौती देते हुए दो उन्नत अमेरिकी लड़ाकू विमानों, जिनमें एक F-35 स्टील्थ शामिल है, को मार गिराने की पुष्टि की है। तेहरान का दावा है कि उनकी स्वदेशी हवाई रक्षा प्रणाली अभी भी पूरी तरह सक्रिय है। इस कार्रवाई ने खाड़ी क्षेत्र में जारी सैन्य संघर्ष को और अधिक विस्फोटक बना दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-blow-to-america-iran-claims-to-have-shot-down/article-148968"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/fighter-jet.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान की हवाई रक्षा प्रणाली के नष्ट करने के दावों के बावजूद, ईरानी सेना ने शुक्रवार को दो उन्नत अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराने की बात कही है। जिनमें दूसरा एफ-35 विमान भी शामिल है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने इन हमलों की "पुष्टि" की है। एक बयान में, आईआरजीसी ने कहा कि उसकी नव विकसित हवाई रक्षा प्रणालियों ने मध्य ईरान में एक स्टील्थ एफ-35 लड़ाकू विमान को सफलतापूर्वक निशाना बनाकर मार गिराया है।</p>
<p>आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिकी वायु सेना के लेकनहीथ स्क्वाड्रन से संबंधित यह विमान पूरी तरह से नष्ट हो गया और पायलट के बारे में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। आईआरजीसी ने ईरान की हवाई रक्षा प्रणाली के पूर्ण विनाश के बारे में ट्रम्प के दावे को "झूठा दावा" बताया है। इस बयान में ईरान के एकीकृत हवाई रक्षा नेटवर्क की निरंतर प्रभावशीलता पर जोर देते हुए कहा गया, " अमेरिकी राष्ट्रपति के झूठे दावे के बाद, कुछ ही क्षण पहले क़ेशम द्वीप के दक्षिण में आईआरजीसी नौसेना की आधुनिक उन्नत हवाई रक्षा प्रणाली ने शत्रु के उन्नत लड़ाकू विमानों को मार गिराया है।"</p>
<p>ईरानी मीडिया के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिकी सेना के लिए हाल ही में बड़ा झटका है। ईरानी मीडिया ने बताया है कि युद्ध की शुरुआत के बाद से, ईरान ने दो एफ-35, एक एफ-18, दो एफ-16 और चार एफ-15 सहित कई उन्नत अमेरिकी विमानों को मार गिराया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 14:27:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मिडिल ईस्ट संकट: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को तेल बिक्री की दी छूट, होर्मुज़ तनाव के बीच 14 करोड़ बैरल बाजार में उतारने की तैयारी, </title>
                                    <description><![CDATA[ग्लोबल मार्केट में स्थिरता के लिए ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 14 करोड़ बैरल कच्चा तेल बेचने की अस्थायी छूट दी है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान की मिसाइल क्षमता को कमजोर करने का दावा किया। हालांकि, डिएगो गार्सिया पर हमलों और क्षेत्रीय धमकियों ने पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताओं को बरकरार रखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-president-trump-gives-permission-to-iran-to-sell-oil/article-147368"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चौथे सप्ताह में प्रवेश के बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता कम करने के लिए ईरान को अस्थायी रूप से लगभग 14 करोड़ बैरल कच्चा तेल बेचने की अनुमति दे दी है। शुक्रवार देर रात जारी इस छूट के तहत तेहरान टैंकरों में संग्रहित तेल को बाजार में उतार सकेगा, जो वैश्विक मांग के करीब डेढ़ दिन के बराबर है। यह फैसला होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण पैदा हुई आपूर्ति चिंताओं को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।</p>
<p>एक ओर राष्ट्रपति ट्रंप ने तनाव कम करने के संकेत देते हुए ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों को समेटने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अपने सैन्य लक्ष्यों को पूरा करने के "काफी करीब" पहुंच गया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमता, लॉन्चर और रक्षा औद्योगिक ढांचे को "पूरी तरह कमजोर" कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को परमाणु क्षमता हासिल करने से रोकना और क्षेत्र में सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि अमेरिका इज़राइल, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत जैसे सहयोगियों की सुरक्षा बहाल करने के करीब पहुंच गया है।</p>
<p>होर्मुज़ जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रबंधन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इसका नियंत्रण और निगरानी उन देशों को करनी चाहिए जो इसका उपयोग करते हैं। उन्होंने जोड़ा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका सहयोग करेगा। हालांकि, क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है। हजारों अतिरिक्त अमेरिकी मरीन और नौसैनिक कर्मियों की तैनाती की जा रही है, जो सैन्य तैयारी को दर्शाता है। इस बीच, ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया में अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला किया, जिसे अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार विफल कर दिया गया।</p>
<p>बहरीन होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयासों का समर्थन करने वाला पहला क्षेत्रीय देश बन गया है, जबकि यूरोपीय देशों, जापान और कनाडा ने भी समर्थन जताया है। हालांकि, अब तक किसी देश ने नौसैनिक तैनाती को लेकर ठोस प्रतिबद्धता नहीं दी है।<br />ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात को चेतावनी दी है कि यदि खाड़ी में उसके कब्जे वाले द्वीपों पर हमला हुआ तो वह रस अल-खैमाह जैसे बंदरगाह शहरों को निशाना बना सकता है। वहीं, कुवैत और सऊदी अरब ने मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम करने की जानकारी दी है।<br />ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों से हमले किये हैं जिसके जवाब में इजरायल ने बेरूत में हिज़बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 18:51:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने दक्षिण कोरिया को दिया धोखा, ट्रंप ने छीना थॉड एयर डिफेंस सिस्टम, किम जोंग के लिए बड़ा मौका?</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी मिसाइलों से निपटने के लिए ट्रंप प्रशासन ने दक्षिण कोरिया से 'थाड' (THAAD) सिस्टम हटाकर मिडिल ईस्ट में तैनात करना शुरू कर दिया है। इस फैसले से सियोल में सुरक्षा को लेकर खलबली मच गई है। उत्तर कोरिया के खतरे के बीच दक्षिण कोरिया अब अपनी रक्षा रणनीति और अमेरिकी भरोसे पर पुनर्विचार करने को मजबूर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-betrayed-south-korea-trump-snatched-thod-air-defense-system/article-146181"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(6)1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरानी मिसाइलों से बचने के लिए अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से थाड एयर डिफेंस सिस्टम को धीरे धीरे बाहर निकालना शुरू कर दिया है। इनकी तैनाती मिडिल ईस्ट में की जा रही है। सिर्फ थाड एयर डिफेंस सिस्टम ही नहीं बल्कि अमेरिका ने दक्षिण कोरिया से कई और मिलिट्री हार्डवेयर भी ले जाना शुरू कर दिया है। अमेरिकी मीडिया ने मामले से परिचित दो अधिकारियों के हवाले से बताया है कि पेंटागन थाड सिस्टम के कुछ हिस्सों को मिडिल ईस्ट ले जा रहा है।</p>
<p>अमेरिका के इस फैसले से दक्षिण कोरिया में खलबली मच गई है। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने बताया है कि दक्षिण कोरिया को डोनाल्ड ट्रंप के इरादों पर गहरा शक पैदा हो गया है। उसने चेतावनी दी है कि परमाणु हथियारों वाला उत्तर कोरिया इस मौके का फायदा उठा सकता है। वहीं दक्षिण कोरिया में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है कि आखिर उसने उत्तर कोरिया के इतने गंभीर खतरे के सामने अमेरिका के ऊपर भरोसा ही क्यों किया था? जबकि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजरायल में तबाही मचा रही हैं।</p>
<p>हालांकि, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि बगैर अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम के भी दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया की तरफ से आने वाले खतरों को रोकने की क्षमता रखता है। राष्ट्रपति ली ने कैबिनेट की बैठक के दौरान कहा कि अगर पूछा जाए कि क्या इससे उत्तर कोरिया के खिलाफ हमारी रोकथाम की रणनीति में कोई बड़ी रुकावट आएगी तो मैं पक्के तौर पर कह सकता हूं कि ऐसा नहीं होगा। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण कोरिया दुनिया में सबसे ज्यादा डिफेंस बजट पर खर्च करने वाले देशों की लिस्ट में आता है और देश का रक्षा बजट उत्तर कोरिया के जीडीपी का 1.4 गुना ज्यादा है। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने शुक्रवार को कहा कि यूएस और साउथ कोरिया की सेनाएं मिडिल ईस्ट में कुछ अमेरिकी पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम को फिर से तैनात करने पर भी चर्चा कर रही हैं। </p>
<p>वहीं दक्षिण कोरिया के कई अखबारों ने दावा किया है कि कुछ मिसाइल बैटरी को सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात में अमेरिकी बेस पर तैनात किए जाने की संभावना है।</p>
<p>दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति या विदेश मंत्री कुछ भी दावा करें लेकिन हकीकत यही है कि उत्तर कोरिया की घातक मिसाइलें देश पर भारी पड़ सकती हैं। अमेरिकी डिफेंस सिस्टम के दक्षिण कोरिया से बाहर निकलने के बाद देश की सुरक्षा कमजोर हो गई है। उत्तर कोरिया ने भी ईरान की तरह की हथियारों के निर्माण में ही भारी भरकम खर्च किए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 11:39:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खाड़ी देशों पर ईरान के हमले: दुबई हवाई अड्डे पर कई ड्रोन हमले, विमान सेवाएं बाधित हुई</title>
                                    <description><![CDATA[खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है। ईरान ने सऊदी, यूएई और कतर पर मिसाइल व ड्रोन हमले किए, जिससे दुबई एयरपोर्ट ठप हो गया। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पड़ोसियों से माफी मांगी, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी दबाव में 'आत्मसमर्पण' बताया। इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर 230 बम गिराए हैं, जिसमें अब तक 1,332 मौतें हुई हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-attacks-on-gulf-countries-several-drone-attacks-on-dubai/article-145673"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump1.png" alt=""></a><br /><p>रियाद। खाड़ी क्षेत्र में जारी भीषण तनाव के बीच शनिवार को सऊदी अरब, कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर ईरान की ओर से ताजा ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए। दूसरी ओर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पड़ोसी देशों पर ईरान के हमलों के लिए माफी भी मांगी।  इन हमलों के कारण पश्चिमी एशिया का हवाई क्षेत्र प्रभावित हुआ है और दुबई जैसे व्यस्त हवाई अड्डों पर परिचालन बाधित रहा। दुबई हवाई अड्डे पर शनिवार को कई ड्रोन हमले हुए, जिससे विमानों की आवाजाही कई घंटों तक ठप रही। इसके कारण क्षेत्र की प्रमुख विमानन कंपनी एमिरेटस ने विमान संचालन को रोकने का फैसला किया है। कतर के रक्षा मंत्रालय ने भी एक बैलिस्टिक मिसाइल हमले को विफल करने की पुष्टि की है, जिसके बाद दोहा में सुरक्षा अलर्ट जारी कर लोगों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई। </p>
<p><strong>सऊदी अरब ने भी 16 ड्रोन गिराए</strong></p>
<p>वहीं बहरीन की सेना ने बताया कि हमलों की शुरुआत से अब तक उसने 86 मिसाइलों और 148 ड्रोनों को मार गिराया है। सऊदी अरब ने भी अपने विशाल ‘शयबाह’ तेल क्षेत्र की ओर बढ़ रहे 16 ड्रोनों को शनिवार तड़के नष्ट करने का दावा किया है।</p>
<p><strong>अरब लीग की अहम बैठक आज</strong></p>
<p>खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और कई अरब देशों पर हुए कथित ईरानी हमलों पर चर्चा करने के लिए अरब लीग के विदेश मंत्रियों की एक आपात बैठक रविवार को होगी। अरब लीग के सहायक महासचिव होसाम जकी ने शनिवार को यह घोषणा की और कहा कि यह महत्वपूर्ण सत्र वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित किया जाएगा। इस आपातकालीन बैठक का अनुरोध कुवैत, सऊदी अरब, कतर, ओमान, जॉर्डन और मिस्र जैसे प्रमुख सदस्य देशों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है।</p>
<p><strong>खाड़ी देश किसी के हाथों की कठपुतली न बनें: पेजेशकियन</strong></p>
<p>इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि तेहरान अपने पड़ोसियों पर हमला नहीं करना चाहता और भविष्य में तब तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी जब तक ईरान पर उन देशों की जमीन से हमला न हो। राष्ट्रपति ने खाड़ी देशों से ‘साम्राज्यवाद’ के हाथों की कठपुतली न बनने की अपील की, हालांकि उनके इस बयान के बाद भी क्षेत्र में हवाई हमले और जवाबी कार्रवाई जारी रही। उन्होंने यह भी कहा ईरान कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा।</p>
<p><strong>ईरान के सैन्य ठिकानों पर इजरायली हमले जारी </strong></p>
<p>इजरायली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने शनिवार तड़के ईरान की राजधानी तेहरान और मध्य ईरान के कई खास सैन्य ठिकानों पर भीषण हवाई हमले किए। इनमें एक भूमिगत बैलिस्टिक मिसाइल कारखाने और एक प्रमुख सैन्य अकादमी को निशाना बनाया गया। आईडीएफ के अनुसार इस अभियान में 80 से अधिक लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया और निर्धारित लक्ष्यों पर लगभग 230 बम गिराए।</p>
<p><strong>ईरान ने पड़ोसियों के सामने किया ‘आत्मसमर्पण’: ट्रम्प</strong></p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को दावा किया कि ईरान ने भविष्य में अपने पड़ोसी देशों पर हमला न करने का वादा करके उन देशों के सामने ‘आत्मसमर्पण’ कर दिया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जारी एक कड़े बयान में ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी कि आज उस पर ‘बहुत भीषण’ हमले किए जाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने तर्क दिया कि ईरान द्वारा अपने पड़ोसी देशों से माफी मांगना और उन पर दोबारा हमला न करने का वादा केवल अमेरिका और इजरायल के निरंतर हमलों के दबाव के कारण संभव हुआ है।</p>
<p><strong>पहली बार ईरान पड़ोसी देशों से हारा</strong></p>
<p>उन्होंने यह भी कहा, यह पहली बार है जब ईरान हजारों सालों में, आस-पास के देशों से हारा है। ट्रम्प ने आगामी हमलों की घोषणा करते हुए कहा कि ईरान के ‘बुरे व्यवहार’ के कारण अब उन क्षेत्रों और समूहों को भी पूरी तरह नष्ट करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जिन्हें अभी तक निशाना नहीं बनाया गया था। ईरान पश्चिम एशिया पर कब्ज़ा करके राज करना चाहता था। ईरान अब पश्चिम एशिया का धौंस जमाने वाला नहीं है, बल्कि वे पश्चिम एशिया के फिसड्डी हैं।</p>
<p><strong>हमलों में 1,332 ईरानी नागरिकों की मौत</strong></p>
<p>इस बीच ईरान के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने कहा है कि अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों में अब तक कम से कम 1,332 ईरानी नागरिकों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग घायल हुए हैं। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका-इजरायल ने ईरान में नागरिकों और नागरिक अवसंरचनाओं को जानबूझकर निशाना बनाया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे अपने सैन्य अभियानों में किसी भी तरह का संयम नहीं बरत रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 17:09:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के बीच ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी का बडा बयान: अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए उठाएंगे कदम, ईरान के खिलाफ आवश्यक और आनुपातिक रक्षात्मक कार्रवाई के लिए तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ई-3 देशों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को उनके स्रोत पर ही नष्ट करने की चेतावनी दी है। ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर ने स्पष्ट किया कि वे केवल रक्षात्मक सैन्य कार्रवाई और सहयोगियों की सुरक्षा हेतु प्रतिबद्ध हैं, न कि किसी आक्रामक युद्ध की शुरुआत के लिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/amidst-the-ongoing-conflict-in-west-asia-britain-france-and/article-145143"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/bratin-pm.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के बीच कहा है कि वे ईरान के खिलाफ आवश्यक और आनुपातिक रक्षात्मक कार्रवाई के लिए तैयार हैं। तीनों देशों की ओर से रविवार को जारी संयुक्त बयान में कहा गया, हम क्षेत्र में अपने और अपने सहयोगियों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाएंगे, जिसमें आवश्यक और आनुपातिक रक्षात्मक कार्रवाई सक्षम करना शामिल हो सकता है, ताकि ईरान की मिसाइल और ड्रोन दागने की क्षमता को उनके स्रोत पर नष्ट किया जा सके।</p>
<p>बयान में आगे कहा गया कि इस मुद्दे पर तीनों देश अमेरिका और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम करेंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन ने अमेरिकी अनुरोध स्वीकार करते हुए अपने ठिकानों के उपयोग की अनुमति विशिष्ट और सीमित रक्षात्मक उद्देश्य के लिए दी है। स्टारमर ने कहा, खाड़ी क्षेत्र में हमारे साझेदारों ने हमसे उनकी रक्षा के लिए और अधिक करने का आग्रह किया है। समन्वित रक्षात्मक अभियानों के तहत ब्रिटेन के जेट विमान पहले से ही हवा में हैं और उन्होंने ईरानी हमलों को सफलतापूर्वक रोका है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि खतरे को रोकने का एकमात्र तरीका मिसाइलों को उनके स्रोत पर नष्ट करना है,चाहे वे भंडारण डिपो में हों या लॉन्चर पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन ईरान पर प्रारंभिक हमलों में शामिल नहीं था और अब भी किसी आक्रामक सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Mar 2026 15:36:02 +0530</pubDate>
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                <title>ईरानी हमलों से बचाव के लिए जार्डन में तैनाती; ईरान को भी मिला इनपुट, चीनी सैटेलाइट्स ने दिखाई अमेरिकी थाड की तैनाती</title>
                                    <description><![CDATA[चीनी सैटेलाइट तस्वीरों ने जॉर्डन के एयरबेस पर अमेरिकी थाड मिसाइल डिफेंस सिस्टम की गुप्त तैनाती उजागर की है। ईरान से बढ़ते तनाव के बीच यह कदम क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा को अभेद्य बनाने की रणनीति है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/deployed-in-jordan-to-protect-against-iranian-attacks-iran-also/article-143311"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)14.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच चीनी कॉमर्शियल सैटेलाइट कंपनी मिजारविजन की तस्वीरों ने बड़ा खुलासा किया है। इनमें जॉर्डन के मुवाफक साल्टी एयर बेस पर अमेरिकी आर्मी की थाड (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनाती साफ दिख रही है। यह बेस अमेरिकी फौजों का मिडिल ईस्ट में सबसे महत्वपूर्ण फॉरवर्ड लोकेशन बनता जा रहा है। ईरान के खिलाफ किसी कार्रवाई से पहले अमेरिका अपनी रक्षा मजबूत करनी करना चाहाता है। </p>
<p><strong>थाड सिस्टम क्या है और क्यों तैनात किया गया?</strong></p>
<p>थाड एक एडवांस एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है जो ऊंचाई पर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराता है। यह वायुमंडल के अंदर और बाहर दोनों जगह काम करता है। अमेरिकी आर्मी के पास सिर्फ 8 थाड बैटरी हैं। इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक बहुत सीमित है।</p>
<p><strong>जॉर्डन में तैनाती का मतलब...</strong></p>
<ul>
<li>अमेरिकी फौजों की बड़ी संख्या को ईरान के संभावित हमलों से बचाना।</li>
<li>अक्टूबर 2024 से इजरायल में भी कम से कम एक बैटरी तैनात है।</li>
<li>जॉर्डन का बेस ईरान के करीब है, इसलिए यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।</li>
</ul>
<p><strong>चीनी सैटेलाइट्स का रोल और संभावित संकेत</strong></p>
<p>ये तस्वीरें सार्वजनिक होने से पहले यह तैनाती गुप्त थी। अब सवाल उठ रहा है कि क्या चीन जानबूझकर यह जानकारी ईरान तक पहुंचा रहा है? कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीनी युद्धपोत पर्सियन गल्फ के पास तैनात हैं, जो अपने सेंसर से अमेरिकी गतिविधियों पर नजर रखकर ईरान को इंटेलिजेंस दे सकते हैं। इससे चीन अमेरिका को संदेश दे रहा हो सकता है कि वह ईरान की मदद करेगा, जिससे अमेरिकी हमले की संभावना कम हो। सैटेलाइट टेक्नोलॉजी की वजह से अब जमीनी तैनाती छिपाना मुश्किल हो गया है। इजरायल ने भी ईरान के हमलों के बाद सैटेलाइट जैमिंग की थी ताकि नुकसान का आकलन न हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 11:04:19 +0530</pubDate>
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