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                <title>Maritime Trade - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Maritime Trade RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र की अपील : होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखना जरूरी, गुटेरेस ने कहा-मौजूदा संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की अपील की है। उन्होंने कूटनीतिक समाधान पर जोर देते हुए कहा कि समुद्री व्यापार में व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। यूएन ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के मध्यस्थता प्रयासों की सराहना करते हुए शांति वार्ता जारी रखने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/uns-appeal-amid-west-asia-crisis-it-is-necessary-to/article-150405"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(13).png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच सभी पक्षों से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान बनाए रखने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इस जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार में व्यवधान का असर क्षेत्र से बाहर भी पड़ा है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता तथा विभिन्न क्षेत्रों में असुरक्षा बढ़ी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि मौजूदा संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है और कूटनीतिक प्रयासों को जारी रखना जरूरी है। उन्होंने इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता को "सकारात्मक कदम" बताते हुए कहा कि युद्धविराम बनाए रखना और उल्लंघनों को रोकना आवश्यक है।</p>
<p>एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि गहरे मतभेदों के कारण समझौता तुरंत संभव नहीं है, लेकिन रचनात्मक बातचीत जारी रहनी चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान, सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किये सहित मध्यस्थ देशों के प्रयासों की सराहना की। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान से लगभग 20,000 नाविक प्रभावित हुए हैं और वैश्विक व्यापार, खाद्य सुरक्षा तथा आपूर्ति शृंखलाओं पर गंभीर असर पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियां सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए तंत्र विकसित करने में जुटी हैं, जबकि महासचिव के विशेष दूत क्षेत्र में बातचीत जारी रखे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 18:26:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिकी नाकेबंदी पर ईरान का पलटवार : राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार ; इरावानी ने इसे संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का &quot;घोर उल्लंघन&quot; बताया </title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र में ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की कड़ी निंदा करते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है। राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा बताते हुए सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की मांग की है। तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है और पड़ोसी देशों से भारी हर्जाने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/irans-counterattack-on-us-blockade-is-a-gross-violation-of/article-150373"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-war.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। ईरान ने अमेरिका द्वारा उसके बंदरगाहों की कथित नौसैनिक नाकेबंदी की कड़ी निंदा करते हुए इसे उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का "घोर उल्लंघन" बताया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को लिखे पत्र में इस कदम को "अवैध आक्रामक कार्रवाई" करार दिया, जो क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है।</p>
<p>इरावानी ने कहा कि 12 अप्रैल को यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा घोषित यह नाकेबंदी संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत "आक्रामकता का स्पष्ट उदाहरण" है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात को रोकने का प्रयास है, जिससे न केवल ईरान के संप्रभु अधिकारों में हस्तक्षेप हो रहा है, बल्कि तीसरे देशों और वैध समुद्री व्यापार के अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है। ईरानी दूत ने चेतावनी दी कि तेहरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए "सभी आवश्यक और उचित कदम" उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।</p>
<p>ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप कर नाकेबंदी की निंदा करने और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को रोकने की अपील की है। इस बीच, अमेरिकी नौसेना ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जिसमें यूएसएस अब्राहम लिंकन सहित कई युद्धपोत और 11 विध्वंसक तैनात हैं। हालांकि, ऑपरेशन में शामिल जहाजों की सटीक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में सप्ताहांत में हुई वार्ता विफल रहने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को मंजूरी दी।</p>
<p>इसके अलावा, ईरान ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन से भी मुआवजे की मांग की है। ईरान का आरोप है कि इन देशों ने अमेरिका-इज़राइल अभियान में भूमिका निभाई और कुछ मामलों में ईरान के भीतर नागरिक ठिकानों पर "अवैध हमलों" में भी शामिल रहे। इरावानी ने पत्र में श्री एंटोनियो गुटेरेस और बहरीन (जो अप्रैल में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाल रहा है) को संबोधित करते हुए कहा कि बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन को ईरान को "पूर्ण क्षतिपूर्ति" देनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन देशों को अपने "अंतरराष्ट्रीय रूप से अवैध कृत्यों" के कारण हुए सभी भौतिक और नैतिक नुकसान की भरपाई करनी होगी। ईरान के अनुसार, इन कार्रवाइयों से उसे भौतिक और नैतिक दोनों प्रकार का नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई संबंधित देशों को करनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 15:34:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज़ पार करने वाले चुनिंदा ज़हाज़ों को ईरान ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम, 18 करोड़ की करेगा वसूली</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने घोषणा की है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को अब $20 लाख (₹18.76 करोड़) शुल्क देना होगा। डोनाल्ड ट्रंप की 48 घंटे की चेतावनी और बिजली संयंत्रों को "मिटाने" की धमकी के बावजूद ईरान ने अपना नियंत्रण सख्त कर लिया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में तनाव बढ़ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-gives-48-hour-ultimatum-to-selected-ships-crossing-hormuz-will/article-147476"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran7.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। मीडिल ईस्ट तनाव के बीच ईरान ने बड़ा फैसला करते हुए श्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण और भी सख्त कर दिया है। ईरानी राष्ट्रपति ने मीडिया से रूबरू होते हुए कहा है कि इस जलमार्ग से जो भी ज़हाज़ गुजरेगा अब ईरान उससे 20 लाख डॉलर ट्रांजिट शुल्क लेगा और यदि कोई भी देश ऐसा नहीं करेगा तो वो इस मार्ग से नहीं जा सकता है।</p>
<p>गौरतलब है कि, ईरान ने ये सख्त कदम ऐसे समय में उठाया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को जलडमरूमध्य मार्ग को खोलने के लिए 48 घंटों का समय दिया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि अब से वो होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कुछ चुनिंदा जहाहों पर 18,76,00,300 रुपये का शुल्क लेगा। इस बात की पुष्टि राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने अपने सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के माध्यम से की है।</p>
<p>इससे पहले ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले के चौथे सप्ताह में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह अगले 48 घंटों के भीतर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को पूरी तरह से नहीं खोलता है, तो अमेरिका ईरानी बिजली संयंत्रों को "मिटा" देगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 10:57:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विजिन्जम इंटरनेशनल सीपोर्ट: भारत का उभरता ग्लोबल ट्रांसशिपमेंट हब, समुद्र के बीच बनाई जा रही सड़क</title>
                                    <description><![CDATA[केरल का विजिन्जम पोर्ट जनवरी 2026 में 1.23 लाख TEUs हैंडल कर वैश्विक स्तर पर 83वें स्थान पर पहुँचा। ₹16,000 करोड़ के दूसरे चरण के विस्तार से इसकी क्षमता 5.7 मिलियन TEUs हो जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/vizhinjam-international-seaport-indias-emerging-global-transshipment-hub-road-being/article-143317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>तिरुअनंतपुरम। केरल के तिरुअनंतपुरम स्थित विजिन्जम इंटरनेशनल सीपोर्ट तेजी से भारत के समुद्री व्यापार के नक्शे पर छा रहा है। यह भारत का पहला गहरा समुद्री ट्रांसशिपमेंट पोर्ट है, जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट्स पर अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह फुल ऑटोमेटिक है, जिसे मशीनों से कंट्रोल किया जाता है। यहां समुद्र के बीच करीब तीन किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जा रही है। जनवरी 2026 में विजिन्जम पोर्ट ने अब तक का सबसे बड़ा मासिक कंटेनर थ्रुपुट दर्ज किया। पोर्ट ने 1 लाख 23 हजार 092 ट्वेंटी फुट इक्विवेलेंट यूनिट्स हैंडल किए, जो अब तक का सर्वोच्च आंकड़ा है। इसी महीने में 62 जहाजों को संभाला गया और ग्रॉस क्रेन रेट 30.12 कंटेनर लिफ्ट्स प्रति घंटा तक पहुंचा। इन उपलब्धियों के साथ पोर्ट वैश्विक कंटेनर हैंडलिंग में 83वें स्थान पर पहुंच गया है। दिसंबर, 2024 से जनवरी, 2026 तक यहां 50 से अधिक अल्ट्रा लार्ज कंटेनर वेसल्स (399 मीटर से लंबे) सफलतापूर्वक हैंडल किए जा चुके हैं। </p>
<p><strong>फेज-2 विस्तार: 16 हजार करोड़ का मेगा निवेश</strong></p>
<p>अदानी विजिंजम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ प्रदीप जयरामन ने बताया कि 24 जनवरी, 2026 को अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड ने विजिन्जम पोर्ट के दूसरे चरण के विस्तार की औपचारिक शुरुआत की। इस चरण में 16 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त निवेश किया जा रहा है, जिससे कुल निवेश 30 हजार करोड़ रुपए के आसपास पहुंच जाएगा। यह केरल में अब तक का सबसे बड़ा निजी निवेश है।</p>
<p><strong>विस्तार के प्रमुख बिंदु</strong></p>
<p>- कंटेनर बर्थ की लंबाई 800 मीटर से बढ़ाकर 2000 मीटर।<br />- ब्रेकवॉटर की लंबाई बढ़ाकर लगभग 3900 मीटर।<br />- वार्षिक क्षमता 1 मिलियन टीईयू से बढ़ाकर 5.7 मिलियन ट्वेंटी फुट इक्विवेलेंट यूनिट्स (2028-29 तक)।<br />- अत्याधुनिक ऑटोमेशन, 21  ऑटोमेटेड एसटीएस क्रेन और 45 आरएमजी क्रेन सहित आधुनिक सुविधाएं।<br />- यह विस्तार भारत को कोलंबो, सिंगापुर जैसे विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा और देश को वैश्विक समुद्री व्यापार में मजबूत स्थिति दिलाएगा।</p>
<p><strong>लॉजिस्टिक्स ईकोसिस्टम को मजबूत करने के कदम</strong></p>
<p>केरल सरकार ने हाल ही में विजिन्जम के आसपास दो मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क की मंजूरी दी है। कॉनकोर और सेंट्रल वेयरहाउस कॉपरेशन की ओर से विकसित ये पार्क पोर्ट की क्षमता को और मजबूत करेंगे। इसके अलावा पोर्ट से सटे क्षेत्र में 550 एकड़ से अधिक भूमि की पहचान की है, जहां पोर्ट-लिंक्ड इंडस्ट्रियल क्लस्टर और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किए जाएंगे। विजिन्जम इंटरनेशनल सीपोर्ट न केवल केरल बल्कि पूरे भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रहा है। यह मैरीटाइम विजन 2030 और अमृत काल विजन 2047 के लक्ष्यों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे भारत वैश्विक समुद्री व्यापार में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 11:14:18 +0530</pubDate>
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