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                <title>Uranium Enrichment - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Uranium Enrichment RSS Feed</description>
                
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                <title>परमाणु मुद्दे पर अमेरिका और ईरान के बीच तीसरे दौर की बातचीत समाप्त, मिसाइल क्षमताओं पर संभावित सीमाएं और छिपे हुए नेटवर्क पर रोक</title>
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                        <![CDATA[जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच तीसरे दौर की परमाणु वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हुई। अमेरिका ने यूरेनियम भंडार हटाने और केंद्र बंद करने का दबाव बनाया है, जबकि विफल होने पर सैन्य हमले की चेतावनी दी है। क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों और विमानों की भारी तैनाती के बीच अब अगले हफ्ते वियना में तकनीकी चर्चा होगी।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/third-round-of-talks-between-us-and-iran-on-nuclear/article-144880"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/us-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु हथियारों के मुद्दे पर तीसरे दौर की बातचीत यहां समाप्त हो गयी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों देश अगले हफ्ते वियना में तकनीकी स्तर की बातचीत कर सकते हैं। अमेरिका इस बात को लेकर सोच रहा है कि क्या नयी कूटनीति से ईरान के परमाणु हथियारों के इरादों पर रोक लग सकती है या आखिरकार सैन्य बलों का ही सहारा लेना पड़ सकता है। </p>
<p>बातचीत से जुड़े सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान पर फोर्डो, नतांज और इस्फ़ाहान में अपने परमाणु केंद्रों को खत्म करने और यूरेनियम के बचे हुए भंडार को देश से बाहर भेजने का दबाव डाला है। सूत्रों के अनुसार ईरान के अपने परमाणु केंद्रों को खत्म करने, काफी यूरेनियम को अमेरिका को भेजने और एक स्थायी समझौते के लिए अमेरिका की ओर से रखी गयी शर्तों मानने की उम्मीद कम है। ईरान का प्रस्ताव अमेरिका की मुख्य मांगों को पूरा नहीं करता है और ईरान अमेरिका से रियायतें लेने के लिए ऐसे आर्थिक फायदे पाने की कोशिश कर रहा है जिनका अमेरिका की मांगों से कोई लेना-देना नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों ने पहले कहा था कि अगर दोनों पक्ष समझौता पर नहीं पहुंच पाते हैं तो अमेरिका ईरान पर हमला करेगा। </p>
<p>यह कूटनीतिक कोशिश ऐसे समय में हो रही है जब इस इलाके में अमेरिका काफी संख्या में सैनिकों की तैनाती कर रहा है। अधिकारियों ने इसे 2003 में इराक पर हमले के बाद से हवाई और नौसैनिक हथियारों की सबसे बड़ी तैनाती बताया है। ईंधन भरने वाला विमानों और जमीनी हमला करने वाले ए-10 विमानों को इजरायल और ग्रीक आइलैंड क्रीट में नागरिक हवाई अड्डे से दिखने वाली जगहों पर तैनात किया गया है, जो ताकत प्रदर्शन का प्रतीक है।</p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीति को प्राथमिकता दी है, भले ही वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रवैया अपनाए हुए हैं। ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के पिछले हमलों से कम नुकसान हुआ था, जबकि ट्रंप ने कहा था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म कर दिया गया है। ट्रम्प ने बार-बार कहा है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करना चाहता है जबकि ईरान इससे इनकार करता है। </p>
<p>अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान अभी यूरेनियम भंडार को बढ़ा रहा है, लेकिन चेतावनी दी कि ऐसा लगता है कि ईरान अपने परमाणु अवसंरचना के कुछ हिस्सों को फिर से बनाने की कोशिश कर रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का सुझाव है कि बातचीत से समझौता करना ही बेहतर नतीजा है, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु  हथियारों के बिना रहे और कड़े अंतरराष्ट्रीय निगरानी के दायरे में रहे। फिर भी अमेरिका की शर्तों को लेकर काफी सवाल बने हुए हैं। </p>
<p>यह साफ नहीं है कि अमेरिका नागरिक या चिकित्सा मकसदों के लिए यूरेनियम के सीमित संवर्धन को स्वीकार करेगा, या वह इसे पूरी तरह से रोकने के लिए तैयार होगा। ट्रंप के हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन में यूरेनियम संवर्धन को खत्म करने की साफ तौर पर बात नहीं की गयी थी। अधिकारियों ने इशारा किया है कि यूरेनियम संवर्धन को लेकर एक तय सीमा पर विचार किया जा सकता है। यूरेनियम संवर्धन के अलावा, अनसुलझे मुद्दों में ईरान की मिसाइल क्षमताओं पर संभावित सीमाएं और ईरान के  छिपे हुए नेटवर्क पर रोक शामिल हैं।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 18:10:02 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>ईरान-अमेरिका बातचीत: 26 फरवरी को होगी तीसरे दौर की बातचीत, समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में अतिरिक्त प्रयास</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर अगले दौर की वार्ता इस गुरुवार को जिनेवा में होगी। ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने प्रतिबंध हटाने और शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम की मान्यता पर जोर दिया है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-us-talks-to-be-held-on-february-26-third-round/article-144320"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/america-or-iran.png" alt=""></a><br /><p>काहिरा। अमेरिका और ईरान ने परमाणु समझौते को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण के बावजूद बातचीत जारी रखने का फैसला किया है मगर अमेरिका की ओर से सैन्य तैनाती में उल्लेखनीय वृद्धि ने इस प्रक्रिया की नाजुकता और टकराव के जोखिम को उजागर किया है। ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी ने रविवार को कहा कि अमेरिका-ईरान (एजेंसी) का अगला दौर गुरुवार को जिनेवा में होगा। </p>
<p>उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका-ईरान (एजेंसी) इस गुरुवार को जिनेवा में तय हुई है, और समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में अतिरिक्त प्रयास किए जाएंगे। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, रविवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रोसी के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसमें रचनात्मक सहभागिता और संवाद के रास्ते को अपनाने के महत्व पर जोर दिया गया, ताकि एक टिकाऊ परमाणु समझौता हासिल किया जा सके। </p>
<p>यह बातचीत अराघची के उस बयान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने शुक्रवार को अमेरिकी मीडिया आउटलेट एमएसएनबीसी को दिए साक्षात्कार में कहा था कि तेहरान दो से तीन दिनों के भीतर संभावित परमाणु समझौते का मसौदा तैयार कर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को सौंपेगा। सीबीएस न्यूज को रविवार को दिए साक्षात्कार में अराघची ने एक बार फिर कहा कि ईरान अमेरिका के साथ मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने को तैयार है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि वह गुरुवार को जिनेवा में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात कर सकते हैं और यह अब भी संभव है कि ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक समाधान निकाला जाए। अराघची ने कहा कि दोनों पक्ष संभावित समझौते के विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहे हैं और गुरुवार को प्रारंभिक मसौदे पर चर्चा हो सकती है।</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौते में ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को मान्यता मिलनी चाहिए और अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय परमाणु कार्यक्रम के तहत यूरेनियम संवर्धन के अधिकार पर ईरान के अडिग रुख को दोहराया। </p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि ईरान और अमेरिका 2015 में हुए समझौते से बेहतर परमाणु समझौता कर सकते हैं। उनके अनुसार, इस बार अत्यधिक बारिकियों में जाने की जरूरत नहीं है, बल्कि बुनियादी बातों पर सहमति बनाकर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहे और साथ ही अधिक प्रतिबंध हटाए जाएं। </p>
<p>अराघची ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो ईरान को आत्मरक्षा का अधिकार है। उन्होंने कहा, हमें क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमला करना पड़ेगा। इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने रविवार को कहा कि अमेरिका के साथ हालिया एजेंसीओं से उत्साहजनक संकेत मिले हैं, लेकिन ईरान किसी भी संभावित स्थिति के लिए तैयार है। </p>
<p>उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, ईरान क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है। हालिया (एजेंसी)ओं में व्यावहारिक प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ और उत्साहजनक संकेत मिले, हालांकि हम अमेरिका की गतिविधियों पर करीबी नजर रख रहे हैं और हर संभावित स्थिति के लिए तैयारियां की गयी हैं।</p>
<p>अमेरिका का कहना है कि किसी भी समझौते में ईरान द्वारा यूरेनियम संवर्धन पर प्रतिबंध, समृद्ध सामग्री को हटाना, लंबी दूरी की मिसाइलों पर सीमाएं और क्षेत्रीय सहयोगी समूहों को समर्थन में कटौती शामिल होनी चाहिए। विश्लेषकों का मानना है कि ये शर्तें ईरान के लिए स्वीकार करना बेहद कठिन होगा। </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 18:48:51 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका ईरान वार्ता: जून 2025 के हमलों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा, जिनेवा में ईरान से समझदारी की उम्मीद</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[राष्ट्रपति ट्रंप ने जिनेवा परमाणु वार्ता से पूर्व ईरान को 'तर्कसंगत' होने की सलाह दी है। उन्होंने बी-2 बमवर्षक हमलों का हवाला देते हुए कहा कि समझौता न करने के परिणाम गंभीर होंगे।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-iran-talks-referring-to-the-june-2025-attacks-trump-said/article-143470"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर जून 2025 में हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा है कि जिनेवा में होने वाली बैठक में ईरान से समझदारी की उम्मीद है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार को जिनेवा में होने वाली उच्च स्तरीय परमाणु (एजेंसी) में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहेंगे। उन्होंने फोर्दो, इस्फहान और नतांज पर हुए अमेरिकी हमलों का उल्लेख करते हुए ईरान से बातचीत के दौरान तर्कसंगत रुख अपनाने की अपील की। </p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में कहा, मैं अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहूंगा और ये बेहद महत्वपूर्ण होंगी। मुझे उम्मीद है कि ईरान अधिक तर्कसंगत होंगे। जिनेवा बैठक में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के सलाहकार जेरेड कुशनर के शामिल होने की संभावना है। समझौते की संभावनाओं पर ट्रंप ने कहा कि ईरान पारंपरिक रूप से कड़ा रुख अपनाता रहा है, लेकिन पिछले वर्ष अमेरिकी हमलों से उसने सबक लिया है और अब (एजेंसी) के लिए अधिक इच्छुक है। </p>
<p>उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि वे समझौता न करने के परिणाम चाहते हैं। यह बहुत महत्वपूर्ण होगा। ईरान कठिन (एजेंसी)कार है, बल्कि मैं कहूंगा कि वे खराब (एजेंसी)कार हैं। हम समझौता कर सकते थे, बी-2 भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा, वे समझौता करना चाहते हैं। पश्चिमी एशिया में शांति है, क्योंकि हमने उनके परमाणु ठिकानों पर बी-2 बॉम्बर से हमले किये। अगर हम हमले न करते तो उन्होंने एक महीने के भीतर परमाणु हथियार हासिल कर लिया होता। अगर ऐसा होता, तो समझौता ही अलग होता। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि, जून में हुए अमेरिकी हमलों से पहले अमेरिका चाहता था कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोके, जबकि ईरान ऐसा करने के अपने अधिकार पर जोर दे रहा था। जिनेवा की बैठक छह फरवरी को ओमान में हुए पहले अप्रत्यक्ष दौर के बाद हो रही है। उस बैठक को दोनों पक्षों ने अच्छी शुरुआत बताया था, हालांकि मतभेद बने रहे। अमेरिका मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय समूहों जैसे हिजबुल्लाह पर भी चर्चा चाहता है, जबकि ईरान का कहना है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम (एजेंसी) का विषय नहीं है और वह केवल प्रतिबंधों में राहत के बदले परमाणु प्रतिबंधों पर बात करेगा। </p>
<p>इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) प्रमुख से मुलाकात की और सोशल मीडिया पर लिखा कि वह निष्पक्ष और न्यायसंगत समझौते के लिए वहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा, धमकियों के सामने आत्मसमर्पण की कोई संभावना नहीं है।</p>
<p>आईएईए ने पिछले वर्ष इजरायल-अमेरिका हमलों के बाद ईरान के 440 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार पर स्पष्टता मांगी है और नतांज, फोर्दो तथा इस्फहान स्थलों तक पूर्ण पहुंच की मांग की है। ईरान ने सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक सैन्य अभ्यास भी किया। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसके ऊपर कोई भी हमला करता है तो वह होर्मुज को बंद कर देगा, जिससे दुनिया का 20 प्रतिशत तेल व्यापार बाधित होगा और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आएगा। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियारों के अलावा अपने मिसाइल कार्यक्रम पर भी बात करे, लेकिन ईरान का कहना है कि वह प्रतिबंध हटाने के लिए सिर्फ परमाणु मुद्दों पर ही बात करेगा। </p>
<p>इस बीच, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को हंगरी के दौरे पर कहा कि ईरान के साथ समझौता करना मुश्किल होगा। रुबियो ने कहा, मुझे लगता है कि यहां कूटनीतिक तरीके से एक समझौते पर पहुंचने का मौका है. लेकिन मैं इसे बढ़ा-चढ़ाकर भी नहीं बताना चाहता।</p>
<p>रुबियो ने कहा, यह मुश्किल होने वाला है। किसी के लिए भी ईरान के साथ असली समझौता करना बहुत मुश्किल रहा है, क्योंकि हम कट्टरपंथी शिया मौलवियों के साथ काम कर रहे हैं जो धार्मिक फैसले ले रहे हैं, भू-राजनैतिक नहीं। ईरान के साथ समझौता करना आसान नहीं है, लेकिन हम कोशिश करेंगे। </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 14:11:24 +0530</pubDate>
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                <title>ईरानी सरकार की बड़ी घोषणा, कहा अगर अमेरिका प्रतिबंध हटा दें तो हम समझौते के लिये तैयार, दोनों पक्षों ने बैठक को बताया अच्दी शुरूआत </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते हेतु मंगलवार को जिनेवा में अहम वार्ता होगी। ईरानी उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने प्रतिबंध हटाने की शर्त पर यूरेनियम संवर्धन में कटौती का संकेत दिया है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-announcement-of-iranian-government-said-that-if-america-lifts/article-143406"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(19).png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका प्रतिबंधों को हटाने पर चर्चा के लिए तैयार है तो वह वह अमेरिका के साथ परमाणु समझौते की पेशकश कर सकता है। अमेरिका-ईरान परमाणु (एजेंसी) का एक नया दौर मंगलवार को जिनेवा में होने वाला है, जिसमें अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के सलाहकार जारेड कुशनर के शामिल होने की उम्मीद है।</p>
<p>यह छह फरवरी को ओमान में हुए पहले अप्रत्यक्ष दौर के बाद हो रही है, जहाँ ईरान ने यूरेनियम संवर्धन के अधिकार की मांग की थी, जबकि अमेरिका ने बैलिस्टिक मिसाइलों और हिजबुल्लाह जैसे क्षेत्रीय सहयोगियों पर व्यापक चर्चा के लिए दबाव डाला था। दोनों पक्षों ने पिछली बैठक को एक अच्छी शुरुआत बताया था, हालांकि बड़े मतभेद अभी भी बने हुए हैं।</p>
<p>ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि ईरान परमाणु समझौते पर अमेरिका के साथ समझौते के लिए तैयार है, बशर्ते अमेरिकी प्रशासन प्रतिबंधों को हटाने पर चर्चा करने का इच्छुक हो। ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने भी एक साक्षात्कार में कहा कि अब गेंद अमेरिका के पाले में है कि वह यह साबित करे कि वे समझौता करना चाहते हैं। यदि वे ईमानदार हैं, तो मुझे यकीन है कि हम समझौते की राह पर होंगे।</p>
<p>रवांची ने मीडिया को बताया, अगर वे प्रतिबंधों के बारे में बात करने के लिए तैयार हैं, तो हम अपने कार्यक्रम से संबंधित इस और अन्य मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ निपटने में कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं और प्रशासन वर्तमान में बातचीत पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।</p>
<p>स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ ब्रातिस्लावा में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान रुबियो ने कहा, राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि वह कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं। अमेरिका क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति बनाए रखते हुए ईरान के परमाणु मुद्दे का कूटनीतिक समाधान तलाश रहा है। इस बीच, ईरानी अधिकारियों ने भी हमला होने पर जवाब देने की तैयारी का संकेत दिया है, जिससे जिनेवा (एजेंसी) से पहले तनाव बना हुआ है।</p>
<p>यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब ट्रंप ने अनुपालन के मामले में ईरान के पिछले रिकॉर्ड का हवाला देते हुए संभावित समझौते पर संदेह व्यक्त किया है। विटकॉफ और कुशनर ओमान की मध्यस्थता के माध्यम से जिनेवा में ईरानी प्रतिनिधिमंडल से मिलेंगे, जो ईरान के परमाणु संवर्धन कार्यक्रम और अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार पर ध्यान केंद्रित करेंगे। रुबियो ने पुष्टि की कि यदि कोई सैन्य कार्रवाई आवश्यक होती है, तो अमेरिका संसद के साथ परामर्श करने की सभी कानूनी आवश्यकताओं का पालन करेगा।</p>
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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 18:41:34 +0530</pubDate>
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