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                <title> Rajasthan Highcourt - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description> Rajasthan Highcourt RSS Feed</description>
                
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                <title>ST के 12% आरक्षण में से क्यों ना 9% दें भील समुदाय को : हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने एसटी आरक्षण में भील समुदाय को 9 फीसदी हिस्सेदारी देने की मांग वाली याचिका पर मुख्य सचिव, कार्मिक विभाग, एसटी आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मांगा। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि एसटी आरक्षण का अधिकांश लाभ मीणा समुदाय को मिला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/why-doesnt-the-high-court-give-9-out-of-12/article-165894"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, प्रमुख कार्मिक सचिव, एसटी आयोग और केन्द्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि एसटी वर्ग को दिए जा रहे 12 फीसदी आरक्षण में से क्यों ना 9 फीसदी आरक्षण भील समुदाय को दिया जाए। जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने यह आदेश शंकर लाल दहिया व अन्य की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।</p>
<p>याचिका में अधिवक्ता मनोज चौधरी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता आदिवासी भील आरक्षण संघर्ष समिति के सदस्य हैं। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने आरक्षित वर्गों में जातियों को शामिल करते समय उनके वास्तविक सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक पिछडेपन के आंकडेÞ एकत्र नहीं किए। एसटी वर्ग में शामिल मीणा समुदाय सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से काफी आगे बढ़ चुका है और एसटी आरक्षण का करीब 99 फीसदी लाभ यह जाति उठा रही है। दूसरी ओर आजादी के इतने सालों बाद भी भील समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। याचिका में बताया गया की नेशनल एसटी आयोग ने गत 25 फरवरी को अनुच्छेद 338ए के तहत राज्य सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर एसटी श्रेणी के उप वर्गीकरण और पंजाब राज्य बनाम देवेन्द्र सिंह में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए निर्णय को लागू करने को कहा। इसके बावजूद एसटी श्रेणी का उप वर्गीकरण नहीं किया गया है। राज्य सरकार के पास भील समुदाय के पिछड़ेपन के कोई ठोस आंकडे नहीं है। साल 1931 के बाद भीलों के राज्य सेवाओं में प्रतिनिधित्व, शैक्षिक और आर्थिक स्थिति का कोई सर्वेक्षण नहीं किया गया है। भील समुदाय गरीबी रेखा से नीचे है, लेकिन उन्हें बीपीएल सहित अन्य योजनाओं में शामिल नहीं किया।</p>
<p>याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य सरकार एसटी कोटा के बाहर भील बाहुल इलाकों में जिलेवार विशेष आरक्षण दे रही है, लेकिन राज्यवार आरक्षण नहीं मिलने से भील और सहरिया के साथ स्पष्ट रूप से सामाजिक भेदभाव हो रहा है। लोकुर समिति ने भी मीणा के बजाए चौकीदार मीणा को ही एसटी में शामिल किया था। याचिका में गुहार की गई है कि भील समुदाय को एसटी के लिए आरक्षित 12 फीसदी आरक्षण में से 9 फीसदी आरक्षण दिया जाए और तब तक किसी को नियुक्ति नहीं दी जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 10:25:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बांध क्षेत्र से खुद हटाएं अतिक्रमण, नहीं तो सरकार वसूले खर्चा : राजस्थान हाईकोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट ने रामगढ़ बांध को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए सख्त निर्देश दिए। अदालत ने अतिक्रमियों को 15 दिन में कब्जे स्वयं हटाने को कहा। अन्यथा सरकार कार्रवाई कर खर्च अतिक्रमी से वसूलेगी। बाधा डालने वालों पर आपराधिक कार्रवाई। अदालत ने अतिक्रमियों के नाम सार्वजनिक करने और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/remove-encroachment-from-the-dam-area-yourself-otherwise-the-government/article-162915"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/rajasthan-high-cour1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर के रामगढ़ बांध को अतिक्रमण मुक्त करने को लेकर सख्ती दिखाई है। अदालत ने अतिक्रमियों को चेतावनी दी है कि वे एक पखवाड़े में अपने अतिक्रमणों को स्वयं हटा लें।</p>
<p>अदालत ने राज्य सरकार को कहा कि यदि इस अवधि में कब्जे नहीं हटाए जाए तो वह अपने स्तर पर कार्रवाई कर एरिया को अतिक्रमण मुक्त करें और उसमें होने वाला खर्चा संबंधित अतिक्रमी से वसूला जाए। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कोई व्यक्ति बाधा डालता है तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस चन्द्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश रामगढ़ बांध सहित प्रदेश के अन्य जल स्रोतों में अतिक्रमण से जुड़े मामले में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए।</p>
<p>सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि अतिक्रमियों के नामों को सार्वजनिक करते हुए अखबारों में प्रकाशित करे। इसके साथ ही आम सूचना भी प्रकाशित कराई जाए, ताकि अतिक्रमियों को इसकी जानकारी मिल सके। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों सहित सभी को एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए कि रामगढ़ में कोई अतिक्रमण नहीं हो। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने रिपोर्ट पेश कर कर कहा कि विराटनगर तहसील में 351 अतिक्रमण में से 349 कब्जों को हटाया गया है।</p>
<p>शाहपुरा में 90 अतिक्रमण में से 84, जमवारामगढ़ में 522 में से 417 हटाए गए हैं। आंधी में 6 अतिक्रमण  हटाए गए। इसी तरह आमेर तहसील में 81 अतिक्रमण चिह्नित कर 31 हटाए गए हैं। जेडीए की ओर से गत 10 से 12 अगस्त को इसके लिए विशेष अभियान चलाया गया था। इस दौरान निम्स विवि का अतिक्रमण भी सामने आया है।</p>
<p><strong>एनिकट और अतिक्रमण पर कार्रवाई :</strong></p>
<p>महाधिवक्ता ने बताया कि एनिकट हटाने के आदेश की पालना में गत 6 अगस्त कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक में संबंधित अफसरों को तत्काल एनिकट हटाने को कहा गया है। बांध में सात पंप मिले हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आ रहा। जात सरकारी पंपों से 3,274 लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।</p>
<p><strong>न्याय मित्र ने रिपोर्ट पर जताई आपत्ति :</strong></p>
<p>राज्य सरकार की रिपोर्ट पर न्यायमित्र डॉ. अभिनव शर्मा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जिन अतिक्रमणों को हटाने का हवाला दिया जा रहा है, उनमें कोई होटल, रिसोर्ट या पक्का निर्माण नहीं है। खेत से फसल हटाना, तारबंदी, खेत की मेड, छप्पर व झोंपड़ी को हटाकर अतिक्रमण हटाने की बात कही जा रही है। सरकार खेत में फसल काटकर उसे काश्तकार को ही दे देती है और मामूली जुर्माना वसूल लेती है। इसके अलावा बहाव क्षेत्र में रोड तक बना दी गई है। अदालत ने यह जानकारी सामने आने पर आश्चर्य जताया। इसके जवाब में एजी ने कहा कि रोड को अब हटा दिया गया है।</p>
<p><strong>कलेक्टर को कर सकते हैं शिकायत :</strong></p>
<p>अदालत ने कहा है कि मीडिया और पत्रकार कोर्ट के आंख और कान की तरह हैं। ऐसे में कोई भी पत्रकार या आमजन स्थानीय कलेक्टर को अतिक्रमण की शिकायत दे सकता है, उसका नाम गोपनीय रखा जाएगा। कलेक्टर शिकायत पर तुरंत जांच कर सही मिलने पर अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 14:04:15 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान हाईकोर्ट में फिर बम ब्लास्ट की धमकी : कर्मचारियों को बाहर सुरक्षित निकाला, कई बार मिल चुके धमकी भरे ई-मेल</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल। सूचना पर पुलिस, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड ने परिसर खाली कराकर सघन जांच, कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। पिछले कुछ महीनों में हाईकोर्ट को कई बार ऐसी धमकियां मिल चुकी, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bomb-blast-threat-received-again-in-rajasthan-high-court-employees/article-146769"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajasthan-high-court-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल भेजा गया है। अब तक हाईकोर्ट को एक दर्जन बार इस तरह की धमकी भरे ई-मेल मिल चुके हैं।</p>
<p>मेल मिलने के बाद हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से पुलिस उच्चाधिकारियों को इसकी सूचना दी गई। इस पर दौरान जांच एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर हाईकोर्ट की मुख्य बिल्डिंग की गहनता से जांच की। इस दौरान मुख्य परिसर में मौजूद कोर्ट कर्मचारियों सहित अन्य लोगों को बाहर निकाला गया। वहीं बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड ने चप्पे-चप्पे की तलाशी ली। हाईकोर्ट के चौकी प्रभारी सुमेर सिंह ने बताया कि धमकी भरा ई-मेल हाईकोर्ट प्रशासन की आधिकारिक ईमेल आईडी पर भेजा गया है। फिलहाल जांच पूरी कर ली गई है और जांच में कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है।</p>
<p>गौरतलब है कि हाईकोर्ट प्रशासन को सबसे पहले गत वर्ष 31 अक्टूबर को बम विस्फोट की पहली धमकी मिली थी। इसके बाद 5 दिसंबर को दूसरी धमकी दी गई। वहीं 8 दिसंबर से लगातार चार दिनों तक बम ब्लास्ट को लेकर हाईकोर्ट प्रशासन को ईमेल भेजे गए। इसके बाद गत 6 फरवरी, 17 फरवरी, 19 फरवरी, 20 फरवरी और 25 फरवरी को ब्लास्ट की धमकी दी गई थी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 11:16:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान हाईकोर्ट में फिर से बम ब्लास्ट की मिली धमकी, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ को फिर ईमेल से बम ब्लास्ट की धमकी मिली। सूचना पर पुलिस, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड ने परिसर की जांच की, लेकिन कुछ संदिग्ध नहीं मिला। एहतियातन सुनवाई एक घंटे टाली गई और परिसर खाली कराया गया। पूर्व में भी कई बार ऐसी धमकियां मिल चुकी हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ के परिसर में एक बार फिर बम ब्लास्ट की धमकी मिली है। हर बार की तरह इस बार भी हाईकोर्ट प्रशासन के ईमेल पर समान पैटर्न में धमकी भरा मेल भेजा गया है। मेल मिलने के बाद हाईकोर्ट प्रशासन ने इसकी सूचना पुलिस के उच्चाधिकारियों को दी है। वहीं मुकदमों की सुनवाई एक घंटा बाद में शुरू करने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>सूचना पर पुलिस के उच्चाधिकारी बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड के साथ हाईकोर्ट परिसर पहुंचे हैं। सुरक्षा दस्तों की ओर से हाईकोर्ट की मुख्य बिल्डिंग की गहनता से जांच की गई। हालांकि इस दौरान कुछ भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।</p>
<p>हाईकोर्ट चौकी प्रभारी सुमेर सिंह ने बताया कि बम की सूचना मिलते ही पुलिस के बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड की ओर से पूरे हाईकोर्ट परिसर के चप्पे-चप्पे की जांच की गई। वहीं हाईकोर्ट के मुख्य परिसर से न्यायिक कर्मचारियों, अधिवक्ताओं व पक्षकारों को बाहर निकाला गया है। मौके पर किसी भी अनहोनी ने निपटने के लिए फायर बिग्रेड और एंबुलेंस तैनात की गई है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के पूर्व अध्यक्ष प्रहलाद शर्मा का कहना है कि हाईकोर्ट परिसर में सुरक्षा के माकूल इंतजाम किए गए हैं, लेकिन यहां अब तक कई बार बम ब्लास्ट के मेल मिल चुके हैं। जांच एजेंसियां अभी तक यह तक मालूम नहीं कर पाई है कि मेल कहां से आया है। हर बार मेल मिलने के बाद मुकदमों की सुनवाई बीच में बंद कर दी जाती है और कोर्ट परिसर खाली करा लिया जाता है। जिससे एक और भय का माहौल पैदा हो गया है, वहीं मुकदमों की सुनवाई भी प्रभावित होती है।</p>
<p>गौरतलब है कि हाईकोर्ट प्रशासन को सबसे पहले गत वर्ष 31 अक्टूबर को बम विस्फोट की पहली धमकी मिली थी। इसके बाद 5 दिसंबर को दूसरी धमकी दी गई। वहीं 8 दिसंबर से लगातार चार दिनों तक बम ब्लास्ट को लेकर हाईकोर्ट प्रशासन को मेल भेजे गए। इसके बाद गत छह फरवरी को ब्लास्ट की धमकी दी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 11:46:50 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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