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                <title>staff - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>हवामहल में ईमानदारी की मिसाल : स्टाफ ने लौटाया पर्यटक का कीमती बैग, नकदी और आभूषण सही-सलामत पर्यटक को वापस मिले</title>
                                    <description><![CDATA[हवामहल स्मारक में ईमानदारी की मिसाल। हैदराबाद के पवन कुमार वर्मा भ्रमण के दौरान 42 हजार रुपए नकद, चांदी के आभूषण व जरूरी दस्तावेजों वाला बैग भूल गए। स्टाफ ने बैग सुरक्षित रखकर अनाउंसमेंट करवाया। मालिक को बैग लौटा दिया। पर्यटक ने प्रशासन की ईमानदारी की सराहना की।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/an-example-of-honesty-in-hawa-mahal-the-staff-returned/article-153521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)61.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जयपुर। जयपुर की शान हवामहल स्मारक में मंगलवार को ईमानदारी और जिम्मेदारी की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली। हैदराबाद निवासी पवन कुमार वर्मा अपने परिवार के साथ हवामहल स्मारक घूमने आए थे। भ्रमण के दौरान वे द्वितीय चौक में अपना बैग भूल गए। कुछ देर बाद स्मारक प्रशासन के स्टाफ की नजर बैग पर पड़ी। स्टाफ ने बिना देर किए बैग को सुरक्षित कार्यालय में जमा कराया। जब बैग की जांच की गई तो उसमें 42 हजार रुपए नकद, चांदी के आभूषण, आईडी कार्ड और अन्य कीमती सामान मिला। हवामहल स्मारक अधीक्षक सरोजनी चंचलानी ने बताया कि स्मारक प्रशासन ने तुरंत वायरलेस सेट के माध्यम से अनाउंसमेंट करवाया। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अनाउंसमेंट सुनकर पर्यटक पवन कुमार वर्मा कार्यालय पहुंचे, जहां पहचान की पुष्टि के बाद उन्हें उनका बैग सुरक्षित सौंप दिया गया। अपना सामान सही-सलामत वापस मिलने पर उन्होंने हवामहल प्रशासन और स्टाफ का आभार जताया।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 12:57:40 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पहले बांटते थे नोट, अब पांच जिलों के दफ्तर आलमारियों में सिमटे</title>
                                    <description><![CDATA[सभी कार्यालय कारोबार से ज्यादा कर्मचारियों की कमी से बंद हुए ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/originally-distributing-notes--offices-in-five-districts-are-now-confined-to-cupboards/article-144050"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(6)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान प्रदेश को रूग्ण से ओद्योगिक प्रदेश बनाने में रोड़मेप की भूमिका में रहा वित्त निगम आज खुद समाप्ति की कगार पर है। बात कोटा रीजन की करें तो यहां बारा, बून्दी झालावाड़,सवाईमाधोपुर सहित गंगापुर व करौली के आरएफसी के कार्यालय बंद हो चुके हैं । वित्त निगम के यह सभी कार्यालय कारोबार से ज्यादा कर्मचारियों की कमी के कारण बन्द हुये है। वित्त वर्ष 2024-25 में 8.82 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित करने और एनपीए में 34 प्रतिशत की कमी दर्ज करने वाला निगम जमीनी स्तर पर अपनी शाखाएं समेटता नजर आ रहा है। राज्य मुख्यालय जयपुर में वित्तीय मजबूती के आंकड़े प्रस्तुत किए जा रहे हैं, वहीं कोटा संभाग में हालात अलग कहानी बयां कर रहे हैं। कोटा सहित बारां, बूंदी, झालावाड़, सवाई माधोपुर और गंगापुर सिटी में आरएफसी के कार्यालय बंद हो चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन कार्यालयों पर ताले कारोबार की कमी से नहीं, बल्कि कर्मचारियों की भारी कमी के कारण लगे हैं।</p>
<p><strong>तो क्या इसी तरह अगले साल तक कोटा कार्यालय भी होगा बन्द</strong><br />कोटा कार्यालय को लेकर भी अब यही आशंका नजर आ रही है। इसी साल कोटा कार्यालय के मैनेजर सीताराम मीणा के 30 जनवरी का रिटायरमेंट हो जोने के बाद यहां पर अब कार्यारत रहे दो स्थाई कर्मचारियो में एक सहायक शाख प्रबंधक और एक स्टेनों के पद पर शेष रह गये है। इनका भी सेवाकार्य इसी वर्ष पूर्ण हो जायेगा। स्टेनो इन्द्रकुमार गर्ग का सेवाकाल जून में समाप्त होने जा रहा है, वहीं सहायक शाखा प्रबन्धक रमेशचन्द मीणा का कार्यकाल इसी सितम्बर के बाद समाप्त हो जायेगा।</p>
<p>वर्तमान में कार्य संपादन के लिये किशनगढ़ अजमेर से अशोक मौर्य को लगाया गया है। जिनको सप्ताह में दो दिन कोटा कार्यालय देखने का जिम्मा दिया गया है। ऐसे में यहां कार्यरत स्थाई कार्मिकों के रिटायरमेन्ट के बाद इसी साल के अन्त तक ताला लग जायेगा। हालांकि कोटा आये अशोक मौर्य का कार्यकाल भी आने वाले 2027 के शुरूआत में ही समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में यदि शीघ्र ही दूसरे कर्मचारियों को यहां नहीं लगाया गया तो आरएफसी का कोटा कार्यालय भी बन्द हो जायेगा।</p>
<p><strong>ऐसे हुए बन्द</strong><br />वर्ष 2013-14 में बारां और बून्दी में राजस्थान वित्त निगम के कार्यालय बन्द करके कोटा के कार्यालय में मिला दिया गया। बही 2021 में झालावाड़ व सवाई माधोपुर के कार्यालय भी स्टाफ की रिटायरमेंन्ट के कारण बन्द करने पडे यहां के सारे दस्तावेजोें को भी कोटा में डीसीएम रोड़ स्थित राजस्थान वित्त निगम के कार्यालय में पहुचां दिया गया । ऐसे ही बाकी करौली और और गंगापुर के आॅफिसों पर भी कार्मिकों की सेवा समाप्तियां जारी रही और सारे कार्यालय एक-एक करके कोटा के इस कार्यालय में मर्ज होते गये।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />राजस्थान वित्त निगम में कर्मचारयों के रिटायरमेन्ट के चलते कार्मिकों कमी होती जा रही हे। शीघ्र ही 10 नये पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जारी है ।<br /><strong>- पंकज पुरोहित, जनरल मैनेजर एंड सेक्रेटरी, आरएफसी जयपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 14:20:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दुर्गंध के बीच कैसे करें उपचार, डॉक्टर खुद होने लगे बीमार, बदबू के कारण सांस लेना  हो रहा  मुश्किल </title>
                                    <description><![CDATA[राजकीय पशु चिकित्सालय से नहीं उठ रहे मृत मवेशी  चिकित्सालय सटाफ व पशुपालक हो रहे परेशान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/how-to-provide-treatment-amidst-the-stench--doctors-themselves-are-falling-ill--breathing-is-becoming-difficult-due-to-the-foul-smell/article-137177"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px45.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में बीते कई दिनों से मृत मवेशियों को नहीं उठाए जाने से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। अस्पताल परिसर में पड़े मृत पशुओं से उठ रही दुर्गंध के कारण न सिर्फ उपचार कार्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि चिकित्सक, स्टाफ और पशुपालकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में पशुपालक अपने बीमार मवेशियों को इलाज के लिए लेकर पहुंचते हैं, लेकिन परिसर में फैली बदबू के चलते वहां रुकना तक मुश्किल हो गया है। दुर्गंध के कारण कई पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों की तबीयत बिगड़ चुकी है। इसके बावजूद मृत मवेशियों के निस्तारण को लेकर जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।</p>
<p><strong>कई चिकित्सकों की बिगड़ी तबीयत</strong><br />अस्पताल में कार्यरत पशु चिकित्सकों और कर्मचारियों ने बताया कि लगातार दुर्गंध के संपर्क में रहने से उन्हें सिरदर्द, उल्टी, चक्कर, सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो रही हैं। कुछ चिकित्सकों को तो इलाज के बाद खुद चिकित्सकीय परामर्श लेना पड़ा है। एक चिकित्सक ने बताया कि मृत मवेशियों से निकलने वाली दुर्गंध में अमोनिया और सड़ांध की गैसें होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। लगातार ऐसे माहौल में काम करने से हमारी तबीयत बिगड़ रही है, फिर भी मजबूरी में हमें पशुओं का इलाज करना पड़ रहा है। एक अन्य चिकित्सक ने कहा कि यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।</p>
<p><strong>पशु उपचार कार्य भी प्रभावित</strong><br />पशु चिकित्सकों का कहना है कि दुर्गंध और अस्वच्छ वातावरण में पशुओं का इलाज करना बेहद कठिन हो गया है। संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे अन्य बीमार पशुओं की सेहत पर भी असर पड़ सकता है। दुर्गंध और असहज वातावरण के चलते कई बार पशुओं का उपचार जल्दी-जल्दी निपटाना पड़ रहा है या फिर पशुपालकों को इंतजार करने को कहा जा रहा है। इससे गंभीर रूप से बीमार पशुओं के इलाज में देरी हो रही है। चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह की स्थिति में गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित उपचार संभव नहीं हो पा रहा है। बदबू के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है।</p>
<p><strong>अब संक्रमण का खतरा बढ़ा</strong><br />पशु चिकित्सकों का कहना है कि मृत पशुओं के लंबे समय तक पड़े रहने से बैक्टीरिया और कीटाणुओं के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। इससे न सिर्फ अस्पताल परिसर अस्वच्छ हो रहा है, बल्कि अन्य बीमार पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी हुई है। दुर्गंध के कारण मक्खियों और अन्य कीटों की संख्या भी बढ़ गई है, जो बीमारियों को और फैलाने का कारण बन सकती हैं। चिकित्सकों का कहना है कि दुर्गंध इतनी तीव्र है कि उपचार कक्षों में लंबे समय तक रुकना मुश्किल हो गया है, जिससे नियमित जांच, इंजेक्शन, ड्रेसिंग और आॅपरेशन जैसी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p>-हमारे पशु बीमार हैं, उन्हें आराम और साफ माहौल चाहिए, लेकिन यहां बदबू के कारण पशु भी बेचैन हो जाते हैं। प्रशासन को यहां की समस्या का जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए।<br /><strong>- रमेश गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>-राजकीय पशु चिकित्सालय में मृत मवेशियों को कई दिनों से नहीं उठाए जाने के कारण फैली दुर्गंध अब गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप ले चुकी है। बदबू के चलते पशुओं की उपचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई पशु चिकित्सकर्मियों की तबीयत तक बिगड़ चुकी है।<br /><strong>- डॉ. भंवर सिंह, वरिष्ठ पशु चिकित्सक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Dec 2025 16:30:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चिकित्सकों व स्टाफ के अभाव में समय पर नहीं मिल रहा ग्रामीणों को इलाज, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[इलाज के लिए मरीजों को कोटा , रामगंजमंडी या अन्य स्थानों पर जाना पड़ता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/villagers-are-not-receiving-timely-treatment-due-to-a-shortage-of-doctors-and-staff/article-137035"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/etws6.png" alt=""></a><br /><p>सातलखेड़ी। सातलखेड़ी स्थित आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की जमीनी हकीकत सरकारी दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। गांव के सैकड़ों ग्रामीण आज भी बुनियादी इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं, कारण है स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर की नियमित मौजूदगी का अभाव, जिससे मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि यहां नियुक्त डॉक्टर मुकेश कुमार की ड्यूटी सुकेत में लगा दी गई है, जिसके चलते सातलखेड़ी स्वास्थ्य केंद्र अक्सर डॉक्टर विहीन रहता है। ग्रमीणों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में मरीज की जान की जिम्मेदारी तय नहीं है। मजबूरी में मरीजों को पहले सातलखेड़ी लाया जाता है और इलाज न मिलने पर सुकेत या रामगंजमंडी रेफर करना पड़ता है। इस देरी में कई बार मरीज की हालत गंभीर हो जाती है। </p>
<p><strong>परिसर की हालत भी चिंताजनक</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि अस्पताल परिसर की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। अस्पताल के चारों ओर नशेड़ियों का जमावड़ा बना रहता है। बाउंड्री और मुख्य गेट के पास शराब की खाली बोतलें, गुटखा और सिगरेट के पैकेट बिखरे पड़े रहते है। जिससे साफ जाहिर होता है कि रात के समय अस्पताल परिसर नशेड़ियों का अड्डा बन जाता है। इससे गंदगी के साथ मरीजों और महिलाओं की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़े हो रहे है। </p>
<p><strong>स्टाफ नदारद, कुर्सियां खाली </strong><br />ग्रामीणों ने बताया  कि सातलखेड़ी के आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, बल्कि नर्सिंग स्टाफ, कंपाउंडर और अन्य सहायक कर्मचारी भी अक्सर नदारद रहते हैं। कई बार अस्पताल खुला होने के बावजूद अंदर सभी स्टाफ की कुर्सियां खाली पाई जाती हैं, जिससे मरीजों को न तो प्राथमिक उपचार मिल पाता है और न ही जरूरी दवाएं।</p>
<p><strong>नाम का ही आदर्श है अस्पताल</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि यह स्वास्थ्य केंद्र अब इलाज का नहीं, बल्कि सिर्फ नाम और इमारत तक सीमित होकर रह गया है। जब पूरा स्टाफ ही नियमित रूप से मौजूद नहीं रहता, तो सरकार द्वारा इसे आदर्श स्वास्थ्य केन्द्र का दर्जा आखिर किस आधार पर दिया गया है। जब तक नया डॉक्टर नियुक्त नहीं होता तब तक गांव के मरीजों का क्या होगा। </p>
<p>सातलखेड़ी में करीबन 25 हजार की आबादी निवास करती है। कस्बे में अस्पताल से जुड़ी हÞुई सभी सुविधाएं होनी चाहिए। ताकि मरीजों को कोटा या रामगंजमंडी आदि अस्पतालों का रूख नहीं करना पड़े। अस्पताल में सुविधाओं के अभाव में कई बार मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है, जहां उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। <br /><strong>-नयन अखंड, जनप्रतिनिधि</strong></p>
<p> सुकेत में डॉक्टरों की कमी के चलते सातलखेड़ी के डॉक्टर की ड्यूटी वहां लगाई गई है। जिला कलेक्टर को इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है। <br /><strong>-डॉ. राजेन्द्र मीणा, बीसीएमएचओ</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Dec 2025 15:45:23 +0530</pubDate>
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                <title>राजपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भगवान भरोसे  </title>
                                    <description><![CDATA[मौसमी बीमारियों के चलते दूर-दराज क्षेत्रों से आते हैं लोग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/rajpur-primary-health-center-is-at-the-mercy-of-god/article-123579"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)34.png" alt=""></a><br /><p>शाहाबाद। उपखंड मुख्यालय शाहाबाद क्षेत्र के राजपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भगवान भरोसे है। इसमें ना तो चिकित्सक मिलते हैं और ना ही नर्सिंग स्टाफ मौजूद रहता है। पूरा चिकित्सालय बिना कर्मचारियों के सुनसान पड़ा रहता है। लोग इलाज के लिए तरसते रहते हैं। बरसात के मौसम में बीमारियां अधिक फैलती है, ऐसे में चिकित्सकों का व नर्सिंग स्टाफ का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर नहीं रहना चिकित्सा विभाग पर सवालिया निशान लगता है। एक तरफ सरकार द्वारा जहां विज्ञापनों के माध्यम से अनेकों प्रकार से लोगों को जागरूक करते है कि झोलाछाप चिकित्सकों के पास जाने से  बचें और सरकारी चिकित्सालय में इलाज करवाने के लिए कहते है। परंतु चिकित्सालय न चिकित्सक मिलते हैं ना नर्सिंग स्टाफ मजबूरी बस लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ता है जानकारी के अनुसार बरसात के मौसम में जहां आसपास क्षेत्र में सर्प/ डसने के  की घटनाएं बरसात में अधिक होती हैं ऐसे में चिकित्सकों को नर्सिंग स्टाफ को चिकित्सालय में बैठकर लोगों का इलाज करना चाहिए परंतु एमपी बॉर्डर से लगे होने के कारण चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ अपनी मनमर्जी मालिक बन जाते हैऔर लोग इलाज के लिए तरसते रहते हैं।</p>
<p><strong>अस्त व्यस्त पड़ा रहता है सामान</strong><br />प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर में चिकित्सक कुर्सी भी अव्यवस्थ्ति पड़ी है। दवा भी इधर-उधर फैली हुई है। इस ना चिकित्सक ध्यान देते है और ना कर्मचारी परवाह करते है। क्षेत्र के चोखाराम सहरिया दुलारी बाई ने बताया कि हम सरकार से मांग करते हैं की प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ रहना चाहिए ताकि मरीजों को इलाज मिल सके। विपिन मेहता, तेलनी गुड्डी मेहता, तेलनी जितेश मेहता व बेहटा क्षेत्र के लोगों ने जिला कलक्टर से मांग की है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर में पूरे चिकित्सक स्टाफ को समय पर आने के लिए पाबंद किया जाए ताकि लोगों को इलाज के इधर-उधर भटकना ना पड़े।</p>
<p><strong>चिकित्सा में फैली अव्यवस्थाएं</strong><br />प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर पर एक चिकित्सक नर्सिंग स्टाफ एक फार्मासिस्ट कुल पांच का स्टाफ है। परंतु लापरवाही के चलते चिकित्सालय में नहीं पहुंचते तथा मरीज परेशान होते रहते हैं। रात्रि में कोई इमरजेंसी होने पर भी मरीज को इलाज नहीं मिल पाता। एमपी बॉर्डर के नजदीक होने के कारण चिकित्सा नर्सिंग स्टाफ पर अन्य लोग नहीं पहुंचते हैं और चिकित्सालय में व्यवस्थाएं फैली हुई है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />राजपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आए दिन चिकित्सक नहीं मिलते हैं इसे इलाज करने वालों को परेशानी होती है हम मांग करते हैं कि नियमित रूप से चिकित्सा स्टाफ स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूद रहे।<br /><strong>- विपिन मेहता ग्रामीण तेलनी</strong></p>
<p>ग्रामीण क्षेत्र में सरकार की ओर से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इसलिए खोला गया है कि लोगों को समय पर इलाज मिल सके और अधिक दूरी पर लोग इलाज करवाने के लिए ना जाए। उनका इलाज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ही हो। लेकिन लापरवाही के चलते चिकित्सक अपनी मनमानी करते हैं।<br /><strong>-जितेश मेहता, बेहटा</strong></p>
<p>जिला चिकित्सा अधिकारी को समय-समय पर शाहाबाद क्षेत्र के चिकित्सालयों का निरीक्षण करना चाहिए जिससे दूर दराज में चलने वाले चिकित्सालय की हकीकत पता चल सके।<br /><strong>-कलाराम प्रजापति,राजपुर</strong></p>
<p><strong>लापरवाही करने पर कार्यवाही तय</strong><br />यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है। यदि चिकित्सक व नर्सिंग कर्मचारी तय समयानुसार नहीं आत है तो उन्हें पाबंद किया जाएगा। वहीं इलाज में लापरवाही बरतने पर उसके प्रभावी कार्यवाही की जाएगी। क्षेत्रवासियों को सही इलाज मिलेगा।<br /><strong>- आरिफ शेख, मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी, शाहाबाद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Aug 2025 15:42:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - विज्ञान संकाय खुला, छात्र-छात्राओं को नहीं जाना पड़ेगा बाहर</title>
                                    <description><![CDATA[ दैनिक नवज्योति ने खबर प्रकाशित कर उठाया था मामला ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/impact-of-the-news---science-faculty-opened--students-will-not-have-to-go-outside/article-119356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news8.png" alt=""></a><br /><p>पेच की बावड़ी। कस्बे के राउमावि में विज्ञान एवं कृषि संकाय की मांग को लेकर विगत एक वर्ष से जारी प्रयास को बुधवार को विराम लग गया। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर द्वारा राजस्थान में कुल 93 विद्यालयों में इसी सत्र में 11 कक्षा के लिए विज्ञान, कला, कृषि, वाणिज्य संकाय शुरू करने की स्वीकृति प्रदान की गई। जिसमें बूंदी जिले के दो तलवास और पेच की बावड़ी विद्यालय में संकाय खोले जाने की स्वीकृति प्राप्त हुई। गौरतलब है कि दैनिक नवज्योति ने स्थानीय छात्र-छात्राओं की परेशानी देखते हुए प्रमुखता के साथ स्टोरी प्रकाशित कर इस मामले को उठाया था।  राउमावि पेच की बावड़ी में विज्ञान, कृषि संकाय नहीं होने की वजह से क्षेत्र के छात्र-छात्राएं मजबूरन देवली, कोटा व बूंदी जाकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर थे। इस समस्या को लेकर दैनिक नवज्योति ने सबसे प्रथम जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर छात्र छात्राओं की आवाज को बुलंद करने का काम किया। एक वर्ष के निरंतर प्रयास की वजह से स्थानीय विद्यालय को विज्ञान संकाय का तोहफा मिला। जिसमें 11 कक्षा में इसी सत्र में छात्र छात्राएं जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान में प्रवेश लेकर अध्ययन कर सकेंगे।</p>
<p><strong>डॉक्टर बनने का सपना अब हो सकेगा साकार </strong><br />स्थानीय विद्यालय में विज्ञान संकाय की स्वीकृति मिलने पर अब कस्बे सहित आसपास के गांवों के सैंकड़ों छात्र-छात्राओं को अब विज्ञान विषय पढ़कर डॉक्टर बनने का सपना संजोए बैठे युवाओं का अब सपना साकार हो सकेगा। बुधवार को ज्योंहि विज्ञान संकाय स्वीकृति आदेश प्राप्त होते ही स्कूल प्राचार्य शंकर लाल मीना सहित विद्यालय स्टाफ एवं ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय विद्यालय में जनप्रतिनिधियों, विद्यालय स्टाफ सहित छात्र छात्राओं ने मुंह मीठा करवा कर खुशियां मनाई। स्थानीय विद्यालय में बुधवार को प्राचार्य शंकर लाल मीना द्वारा भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष शौकीन राठौर, भाजपा मंडल अध्यक्ष बाबूलाल मीना, समाजसेवी सीपी योगी का तिलक एवं माला पहनाकर मुंह मीठा कराकर आभार जताया।</p>
<p><strong>एक वर्ष से नहीं बनाई दाढ़ी </strong><br />स्थानीय विद्यालय में विज्ञान संकाय की मांग को लेकर भाजपा मंडल अध्यक्ष बाबूलाल मीना ने एक वर्ष से अपनी दाढ़ी नहीं बनाई। उन्होंने दृढ़ संकल्पित होकर पिछले वर्ष जुलाई में कहा था कि जब तक विज्ञान संकाय नहीं खुलता में दाढ़ी नहीं बनाऊंगा। अब स्वीकृति प्राप्त हुई हे जल्द ही अपना संकल्प पूरा करेंगे।</p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति का जताया आभार</strong><br />भाजपा मंडल अध्यक्ष बाबूलाल मीना ने स्थानीय विद्यालय में विज्ञान संकाय खुलने की स्वीकृति प्राप्त होने पर मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष प्रभुलाल सैनी, मोतीलाल मीना, सांसद दामोदर अग्रवाल, भाजपा जिला अध्यक्ष रामेश्वर मीना व दैनिक नवज्योति का आभार प्रकट किया। रमेशचंद वर्मा, सतीश तोषनीवाल, मधुबाला मीना, ओमप्रकाश प्रजापत, सीताराम कुमावत, शिवांगी दाधीच, रामराज मीना, धर्मसिंह मीना, अशोक लाठी, चंद्रशेखर स्वर्णकार सहित छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कस्बे के राउमावि में विज्ञान संकाय खुलवाने की मांग को लेकर विगत एक वर्ष से प्रयासरत थे। हम सब लोगों का प्रयास एवं मेहनत रंग लाई। अब क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को देवली, कोटा या बूंदी नहीं जाना पड़ेगा।<br /><strong>-सीमा मीणा, प्रशासक, ग्राम पंचायत पेच की बावड़ी </strong></p>
<p>स्थानीय विद्यालय में विज्ञान संकाय में जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान विषय में अब छात्र-छात्राएं इसी सत्र में 11 वीं कक्षा में प्रवेश ले सकेंगे। क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को अन्यत्र नहीं जाना पड़ेगा।<br /><strong>-शंकरलाल मीना, प्राचार्य, राउमावि, पेच की बावड़ी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Jul 2025 17:48:20 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>स्टाफ की कमी का खामियाजा भुगत रहे आम उपभोक्ता, अपनी समस्याएं लेकर जलदाय विभाग के चक्कर काटने को मजबूर </title>
                                    <description><![CDATA[छोटे-छोटे कामों के लिए कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं पेयजल उपभोक्ता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/common-consumers-are-bearing-the-brunt-of-staff-shortage/article-112418"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news59.png" alt=""></a><br /><p>सुकेत। सुकेत के जलदाय विभाग में काफी समय से स्टाफ की कमी का खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। आम उपभोक्ता अपनी समस्याएं लेकर जलदाय विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कई बार उनको काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। जानकारी के अनुसार नगर के जलदाय विभाग में काफी समय से सहायक अभियंता और कनिष्ठ सहायक के पद रिक्त चल रहे हैं। वहीं एक क्लर्क फील्ड में रहता है। जिसके कारण उपभोक्ताओं को अपने कामों और समस्याओं के लिए दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार उनको छोटे-छोटे कामों के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। हाल ही में विभाग ने जल कनेक्शन के लिए शुल्क में बदलाव किया है। वहीं कब्जा धारियों को भी कनेक्शन लेने की अनुमति दी गई है। जिससे उपभोक्ता काफी भ्रमित हैं। इसकी जानकारी के लिए जब वे विभाग के कार्यालय में जाते हैं तो उनको जानकारी देने के लिए कार्यालय में कोई नहीं मिलता। मजबूर होकर उन्हें या तो इंतजार करना पड़ता है या फिर बाद में आना पड़ता है। कई उपभोक्ताओं ने पानी के बिलों में अनियमितताओं की शिकायत की है। लेकिन  स्टाफ की कमी के कारण उनकी यह समस्या भी हल नहीं हो पा रही है। जिससे ऐसे उपभोक्ता विभागीय कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>बदलावों के कारण भ्रमित हो रहे उपभोक्ता</strong><br />जलदाय विभाग ने हाल ही में पेयजल कनेक्शन के लिए प्रक्रिया में बदलाव किए हैं। जैसे कि अब कब्जेधारी भी कनेक्शन ले सकते हैं और शुल्क भी पहले से अलग है। इन बदलावों के कारण कई उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। जानकारी प्राप्त करने के लिए ऐसे उपभोक्ताओं को कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>पेयजल बिलों में अनियमितता </strong><br />नगर के कुछ उपभोक्ताओं ने अपने पेयजल बिलों में अनियमितता की शिकायत की है। जैसे कि बिल की राशि में अचानक वृद्धि होना। इससे उपभोक्ता परेशान हैं और वे विभाग के दफ्तरों में जानकारी के लिए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं ने विभागीय अधिकारियों से इस समस्या को सुलझाने की मांग की है। </p>
<p>भीषण गर्मी में भी अधिकारी कार्यालय में नजर नहीं आते। आने वाले समय में नगर की पेयजल व्यवस्था गड़बड़ा सकती है। नगर वासियों को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। <br /><strong>-इमरान, उपभोक्ता, सुकेत </strong></p>
<p>मुझे अपने घर के नल कनेक्शन को स्थानान्तरण करवाना है। जिसके लिए मैं काफी समय से प्रयास कर रहा हूं। लेकिन जलदाय विभाग में काफी समय से कनिष्क अभियंता व कनिष्ठ सहायक दोनों के पद रिक्त हैं। जिससे मेरे कार्य में समय लग रहा है। मुझे बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। <br /><strong>-शाकिर, उपभोक्ता, सुकेत </strong></p>
<p>जलदाय विभाग सुकेत में सहायक अभियंता का पद रिक्त है। पूर्व में इस पद के लिए वंदना शर्मा के आदेश हुए थे। लेकिन उन्होंने चार्ज नहीं संभाला। साथ ही जहां-जहां पाइप लाइन बिछी हुई है, वहां पर रेगुलर पानी की सप्लाई की जा रही है। जहां पाइप लाइन लाइन नहीं बिछी है वहां पर मई-जून तक नई पाइप लाइन बिछा दी जाएगी। जिससे सभी उपभोक्ताओं को पेयजल की सुविधा मिल जाएगी। <br /><strong>-बच्चू सिंह मीणा, एक्सईएन, जलदाय विभाग, रामगंजमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Apr 2025 16:19:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अस्पताल खुद बीमार, कैसे होगा उपचार !</title>
                                    <description><![CDATA[औषधालय चल रहा सिर्फ और सिर्फ एक ही चिकित्सक के भरोसे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/the-hospital-itself-is-sick--how-will-the-treatment-be-done/article-99105"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(3)24.png" alt=""></a><br /><p>बकानी।  झालावाड़ जिले के बकानी के सलावद राजकीय आयुर्वेद औषधालय  के हाल बेहाल है। बिगड़ रही व्यवस्थाओं पर जाकर हाल जाना तो औषधालय में आयुर्वेद चिकित्सक प्रात: ग्यारह बजे तक भी औषधालय में नहीं मिले, मरीज उनके आने का इंतजार करते नजर आए। इस तरह चिकित्सक का समय पर नहीं पहुंचना गंभीर सवाल खड़ा करता है। वही जहां रेजिडेंस नहीं बना हुआ है। उस बिल्डिंग को भी चिकित्सक रेजिडेंस के रूप में काम में ले रहे है। राजकीय आयुर्वेद औषधालय सलावद में तैनात चिकित्सक पर गंभीर आरोप निकलकर भी सामने आया है। जिसमें उन पर अक्सर यह आरोप लगता है कि वो जब चिकित्सालय के बाहर की जो दवाईयां लिखते है वो सिर्फ सलावद के ही मेडिकल से मरीजों को लाने के लिए बाध्य करते है। अक्सर ओपीडी समय पर भी गेट बंद रहता:  राजकीय आयुर्वेद औषधालय सलावद में औषधालय खुलने के समय भी हमेशा मेनगेट लगा रहता है। जिससे मरीजों को खोलकर अंदर जाना पड़ता है। जबकि नियम से किसी भी आॅफिस कार्यालय का कार्यालय आदि खुलने के समय मुख्य द्वार खुला रहना चाहिए।</p>
<p><strong>स्टॉफ की कमी बड़ी परेशानी</strong><br />राजकीय आयुर्वेद औषधालय सलावद में एक महत्वपूर्व विषय यह निकलकर आया कि यह औषधालय सिर्फ और सिर्फ एक ही चिकित्सक के भरोसे चल रहा है। यहां ना तो कोई कंपाउंडर है, ना कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जो बड़ा गंभीर विषय है, लेकिन बड़ा ही विचलित करने वाला विषय यह निकलकर आया कि इस औषधालय में लगे चिकित्सक ने कभी उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र आदि लिखकर मांग करना उचित नहीं समझा कि यहां स्टॉफ की कमी है।   राजकीय आयुर्वेद औषधालय सलावद में दो योग टीचर लगा रखे, जिनका काम योग करवाना है। जब इनके बारे में चिकित्सक से पूछा गया कि यह कब आते है, तो उन्होंने कहा योग टीचर सिर्फ एक घंटे आते है। सुबह उनकी ड्यूटी एक घंटे की होती उनको योग करवाने के लिए लगा रखा है। जब उनके बारे में चिकित्सक से पूछा कि क्या वो योग करवाते है, तो उन्होंने मना कर दिया कि यहां कोई योग नहीं हो रहा कोई योग करने नहीं आता है। </p>
<p>इनका कहना है मामला आप लोगों के द्वारा मेरी जानकारी में आया है। इस चिकित्सक ने व्यवस्थाएं बिगाड़ रखी है। मैं जल्द औचक निरीक्षण करूंगा और योगाचार्य के बारे में भी देखते है।<br /><strong>- राजेंद्र शर्मा, जिला आयुर्वेद अधिकारी झालावाड़(राज.)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Dec 2024 18:19:18 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> हिंडोली अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ की कमी, मरीजों का बढ़ा रहे दर्द</title>
                                    <description><![CDATA[आॅपरेशन थिएटर के समान जंग खा गए लेकिन डेढ़ दशक में एक भी डॉक्टर नहीं लगाए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/lack-of-doctors-and-staff-in-hindoli-hospital--increasing-the-pain-of-patients/article-86866"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1111444444447888888888888.png" alt=""></a><br /><p>हिंडोली। राज्य सरकार हर बार ग्रामीण अंचल में अच्छी चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए जनता से वादा करती है लेकिन हिंडोली अस्पताल में तीन दशक से कभी भी पूरा स्टाफ नहीं रहा।  हद तो तब हो गई जब लगभग डेढ़ दशक से आॅपरेशन थिएटर बन चुका है उसके सामान जंग खा रहे हैं लेकिन सरकार एक सर्जन चिकित्सक नहीं लगा पाई। एक भी स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है। डॉॅक्टरों और स्टाफ  की कमी के चलते मरीजों बूंदी, टोंक और कोटा जाने को मजबूर है। ज्ञात रहे कि हिंडोली कस्बा राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर स्थित है और हिंडोली चिकित्सालय की श्रेणी यहां के नेता समय-समय पर बदलते रहे हैं।  शायद उनके दिमाग में नहीं आई कि जब चिकित्सालय की श्रेणी बदलता है तो चिकित्सक और अन्य स्टाफ की भी जरूरत होती होगी। ऐसा नहीं है कि स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं या आम जनता ने उनको समय-समय पर चिकित्सकों की याद नहीं दिलाई हो ? लेकिन इससे लगता है कि सरकार से बड़े तो डॉक्टर हो गए जो अपनी मर्जी से अपनी मनचाही जगह पर रहना चाहते हैं? चेनपुरिया निवासी हरिराम गुर्जर ने बताया कि हिंडोली चिकित्सालय में केवल जुखाम,खांसी बुखार का ही इलाज होता है। छोटे से आॅपरेशन के लिए ही देवली,बूंदी और कोटा जाना पड़ता है  केवल ऐसी चिकित्सालय का भवन बनाने की क्या जरूरत है ,जहां चिकित्सक नहीं हो?</p>
<p><strong>डेढ़ दशक से आॅपरेशन थिएटर के औजार जंग खा रहे </strong><br />डेढ़ दशक से हिंडोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आॅपरेशन थिएटर बनकर तैयार हो गया था। आॅपरेशन थिएटर की आवश्यकता अनुसार मशीनरी और औजार लगा दिए गए थे लेकिन एक सोचनीय प्रश्न है कि राज्य सरकार एक सर्जन चिकित्सक हिंडोली चिकित्सालय में नहीं लगा पाई। जो ग्रामीण समय-समय पर अपने जनप्रतिनिधियों से मांग करते आ रहे हैं।</p>
<p><strong>लाखों की सोनोग्राफी मशीन बनी  शो पीस  </strong><br />ज्ञात रहे की भीलवाड़ा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुभाष बाहेड़िया ने अपने सांसद कोष से बजट स्वीकृत कर आम जनता की मांग पर हिंडोली चिकित्सालय में लाखों रुपए की सोनोग्राफी मशीन लगाई थी लेकिन सरकार है कि एक महिला चिकित्सक भी नहीं लगा पाई और लाखों की सोनोग्राफी मशीन शॉपीस बनकर रह गई है। </p>
<p><strong>ये पद है खाली</strong><br />एक सर्जन चिकित्सक, एक स्त्री रोग चिकित्सक, हड्डी रोग चिकित्सक, एक शिशु रोग विशेषज्ञ, दो प्रथम श्रेणी कंपाउंडर, 10 द्वितीय श्रेणी नर्स स्टाफ के पद रिक्त हैं।</p>
<p>हिंडोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन पर्याप्त है। सुविधाओं के संसाधन भी पर्याप्त हैं लेकिन कमी स्टाफ की है सरकार अगर पूरा स्टाफ उपलब्ध करा देती है तो ग्रामीण अंचल के लोगों को कम पैसे में अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती हैं। <br /><strong>- डॉ रमेश कुशवाहा, चिकित्सा प्रभारी हिंडोली</strong></p>
<p>हिंडोली चिकित्सालय में महिला चिकित्सक नहीं होने से महिलाओं को छोटी-छोटी बीमारी के लिए बूंदी कोटा जाना पड़ता है जबकि आधा आबादी के लिए राज्य सरकार एक महिला चिकित्सक भी नहीं लगा पाई। यह सबसे बड़ी शर्म की बात है, जबकि  पूर्व सांसद सुभाष बाहेड़िया की महिलाओं की समस्या को जानते हुए हिंडोली चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन  लगाई थी। <br /><strong>- अंजना गुर्जर, सुखपुरा निवासी</strong></p>
<p>हिंडोली चिकित्सालय में सुविधाओं का अभाव है पूरे डॉक्टर नहीं होने से ग्रामीण अंचल के लोगों को बूंदी, देवली और कोटा भागना पड़ता है। सुविधा के नाम पर चिकित्सालय का भवन ही है सरकार को चाहिए कि डॉक्टर लगाएं जिससे ग्रामीण अंचल में लोगों को कम पैसे में अच्छी सुविधा और स्वास्थ्य चिकित्सा मिल सके। <br /><strong>- दुर्गा लाल कहार, हनुमान जी का झोपड़ा</strong></p>
<p>हिंडोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन पर्याप्त है। सुविधाओं के संसाधन भी पर्याप्त हैं लेकिन कमी स्टाफ की है सरकार अगर पूरा स्टाफ उपलब्ध करा देती है तो ग्रामीण अंचल के लोगों को कम पैसे में अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती हैं। <br /><strong>- डॉ रमेश कुशवाहा, चिकित्सा प्रभारी हिंडोली</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Aug 2024 18:00:55 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अव्यवस्था के घड़े में बंद पड़ा बच्चों का ‘अमृत’</title>
                                    <description><![CDATA[मदर मिल्क बैंक के संचालन के लिए आॅपरेटर और आवश्यक स्टाफ जून माह में आना प्रस्तावित था। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/children-s--amrit--lying-closed-in-the-pot-of-chaos/article-86864"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/avyavastha-k-ghde-me-bnd-pda-bachho-ka-amrut...kota-news-05-08-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जेके लोन अस्पताल में नवजात शिशुओं के लिए बनाए गए मदर मिल्क बैंक को अभी भी चालू नहीं हो सका है। बैंक के संचालन के लिए जरूरी स्टाफ और आॅपरेटर अभी भी उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। जिसके चलते लाखों रुपए की लागत से तैयार यह बैंक किसी काम नहीं आ पा रहा है। साथ ही इसमें मौजूद उपकरण भी स्थापित होने के बाद से यूं ही पड़े हैं। ऐसे में नवजात शिशुओं को मां का दूध उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए इस बैंक का लाभ मिलने में और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>जून में आना था स्टाफ, अभी भी कागजी कारवाई में</strong><br />मदर मिल्क बैंक के संचालन के लिए आॅपरेटर और आवश्यक स्टाफ जून माह में आना प्रस्तावित था। लेकिन उससे पहले आचार संहिता लगने के कारण प्रक्रिया रुक गई और स्टाफ लगाने का कार्य धीमा पड़ गया। वहीं उसके बाद अस्पताल प्रशासन ने भी अपने स्तर पर स्टाफ को ट्रेनिंग देकर इसके संचालन की कोशिश करने की बात कही थी। जिसमें अभी कोई ट्रेनर नहीं होने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाइ है। बैंक के संचालन के लिए स्टाफ एनएचएम नेशनल हेल्थ मिशन जयपुर से आना था जिसकी प्रक्रिया अभी भी कागजी कारवाई में रुकी पड़ी है। </p>
<p><strong>2017 में बना 2021 में हुई चलाने की कोशिश</strong><br />नेशनल हेल्थ मिशन के तहत प्रदेश के 23 जिलों में मदर मिल्क बैंक की स्थापना की गई थी। वहीं नेशनल हेल्थ मिशन के तहत ही प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर कोटा, बीकानेर, झालावाड़ और जोधपुर में 2017 में मदर मिल्क बैंक की शुरूआत की थी। लेकिन उपकरण नहीं आने के चलते कोटा में इसका संचालन नहीं हो सका था। जिसके बाद इसे अस्पताल में ही अस्थाई रूप से साल 2021 में शुरू करने की कोशिश की गई थी। लेकिन कोरोना काल में अंतराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते जरूरी उपकरण नहीं आ पाए थे और मामला तब से अटका हुआ था। इस पर जेके लोन पिडियाट्रिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष अमृता मंयागर ने बताया कि मदर मिल्क बैंक का भवन 80 लाख रुपए की लागत से बनकर तैयार हुआ है। इसके लिए नेशनल हेल्थ मिशन जयपुर से कुछ संसाधन मंगवाए गए थे जो आ चुके हैं। लेकिन उपकरणों को चलाने के लिए जरूरी स्टाफ नहीं आ पाया है।</p>
<p><strong>500 से 700 बच्चों के लिए तीन माह तक उपलब्ध होगा दूध</strong><br />मदर मिल्क बैंक में एक समय में 500 से 700 नवजातों को दूध उपलब्ध करवाने का स्टोरेज रहेगा। साथ ही यहां पर जो मशीनरी स्थापित की गई और जो डीप फ्रीजर लग हैं, उनमें इस दूध को 3 महीने तक प्रिजर्व रखा जा सकता है। कई बार प्रसव के बाद नवजात की मां को सही से दूध नहीं आ पाता है ऐसे में नवजात को दूध उपलब्ध कराने के लिए इस बैंक को बनाया गया है। जहां जेके लोन अस्पताल में भर्ती शिशुओं को यह दूध प्राथमिकता पर उपलब्ध करवाया जाएगा। वहीं अतिरिक्त मदर मिल्क बचने पर उसे दूसरे अस्पतालों को उपलब्ध कराया जा सकेगा। अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह सेवा पूरी तरह से निशुल्क रहेगी जिस पर किसी तरह का कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मदर मिल्क बैंक बनकर तैयार है उसके सभी उपकरण भी स्थापित कर दिए गए हैं। केवल स्टाफ और आॅपरेटर की आवश्यकता है। जिसके लिए एनएचएम जयपुर पत्र लिखा हुआ है, बैंक को इसी माह से शुरू करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।<br /><strong>- निर्मला शर्मा, अधीक्षक, जेके लोन अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Aug 2024 17:47:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मंत्रियों को स्टाफ मिला, अफसरों को सचिवालय में कमरे</title>
                                    <description><![CDATA[नई सरकार में महकमों  की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब मंत्रियों को स्टाफ उपलब्ध करवाया गया है। वहीं दूसरी और प्रशासनिक बेड़े में भारी फेरबदल के बाद ब्यूरोक्रेसी के प्रमुख अधिकारियों को सचिवालय में कमरे आवंटित किए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/ministers-got-staff-officers-got-rooms-in-the-secretariat/article-66731"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/sachivalayaa.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नई सरकार में महकमों  की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब मंत्रियों को स्टाफ उपलब्ध करवाया गया है। वहीं दूसरी और प्रशासनिक बेड़े में भारी फेरबदल के बाद ब्यूरोक्रेसी के प्रमुख अधिकारियों को सचिवालय में कमरे आवंटित किए गए हैं। कुछ अधिकारियों के कमरे बदले गए हैं, जबकि सचिवालय के बाहर से आने वाले अधिकारियों को मुख्य भवन, फूड बिल्डिंग और एसएसओ बिल्डिंग में कमरें आवंटित किए गए हैं। </p>
<p><strong>71 अराजपत्रित कर्मियों की नियुक्ति</strong></p>
<p>मंत्रियों के स्टाफ और विभागों में पोस्टिंग की गई है। सरकार बनने के बाद अब यह पोस्टिंग मिली है। पूर्ववर्ती सरकार के बाद स्टाफ को एपीओ कर दिया गया था। एक माह से ज्यादा समय तक ये एपीओ रहे। अब कार्मिक विभाग ने 71 अराजपत्रित कर्मियों की नियुक्ति आदेश जारी किया है।</p>
<p><strong>तबादले के बाद इन अधिकारियों को सचिवालय में कक्ष आवंटित</strong></p>
<p>प्रशासनिक बेड़े में फेरबदल करने के बाद अब नए सिरे से अधिकारियों को कमरों का आवंटन किया गया है। इसमें अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार को मुख्य भवन में 4101 नंबर, श्रेया गुहा को SSO भवन में 8145 नंबर का कक्ष आवंटित, भास्कर सावंत मुख्य भवन में 2217 नंबर के कक्ष में बैठेंगे, आलोक गुप्ता मुख्य भवन में 5213 नंबर के कक्ष में बैठेंगे, वैभव गालरिया मुख्य भवन में 2024 नंबर के कक्ष में बैठेंगे, डॉ. पृथ्वी SSO भवन में 8223 नंबर के कक्ष में बैठेंगे, समित शर्मा मुख्य भवन में 4210 नंबर के कक्ष में बैठेंगे, शिखर अग्रवाल का कक्ष अब 4224 के बजाय होगा 3205, संदीप वर्मा का मुख्य भवन में 1036 नंबर के कक्ष की जगह होगा 4224 नंबर का कक्ष, कुलदीप रांका मुख्य भवन में 1036 नंबर के कक्ष में बैठेंगे, अजिताभ शर्मा का मुख्य भवन में कक्ष होगा 4213 नंबर का, टी. रविकांत मुख्य भवन में 5105 नंबर के कक्ष में बैठेंगे, आशुतोष पेढ़नेकर का कक्ष होगा मुख्य भवन में 2213 नंबर का, कृष्ण कुणाल मुख्य भवन में 5008 नंबर के कक्ष में बैठेंगे, जोगाराम का मुख्य भवन में 2103 नंबर का कक्ष होगा, गौरव गोयल का मुख्य भवन में 2102 नंबर का कक्ष होगा, आरती डोगरा का मुख्य भवन में 2007 नंबर का कक्ष होगा, शुचि त्यागी मुख्य भवन में 2020 नंबर के कक्ष में बैठेंगी, राजन विशाल मुख्य भवन में 5121 नंबर के कक्ष में बैठेंगे, शैली किसनानी खाद्य भवन में 7015 नंबर के कक्ष में बैठेंगे, हृदयेश शर्मा खाद्य भवन में बैठेंगे 8119 नंबर के कक्ष में, अपर्णा गुप्ता मुख्य भवन में 1041 नंबर के कक्ष में बैठेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jan 2024 16:20:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> न्यास ने पूरा अमला झौंका, दस दिन बाद भी शहर में हर तरफ घूम रहे पशु</title>
                                    <description><![CDATA[नगर विकास न्यास द्वारा जिन पशु पालकों के लिए देव नारायण आवासीय योजना बनाई गई है। वहां पशु पालकों को ले जाने में नाकामयाब रहा है।  न्यास का पूरा प्रशासनिक अमला लगाने के बाद भी शहर से न बाड़े कम हुए और न ही पशु पालक। अभी भी शहर में सड़कों पर जगह-जगह मवेशियों के झुंड देखे जा रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-uit-deployed-full-administrative-staff--even-after-ten-days--animals-roaming-everywhere-in-the-city/article-13292"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/new-22.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर विकास न्यास द्वारा जिन पशु पालकों के लिए देव नारायण आवासीय योजना बनाई गई है। वहां पशु पालकों को ले जाने में नाकामयाब रहा है।  न्यास का पूरा प्रशासनिक अमला लगाने के बाद भी शहर से न बाड़े कम हुए और न ही पशु पालक। अभी भी शहर में सड़कों पर जगह-जगह मवेशियों के झुंड देखे जा रहे हैं। जबकि न्यास सचिव ने आठ दिन में सभी पशु पालकों को शिफ्ट कर देने  का दावा किया था। न्यास द्वारा करीब 300 करोड़ रुपए की लागत  से शहर से करीब 12 किमी. दूर बंधा धर्मपुरा में देव नारायण आवासीय योजना विकसित की है। न्यास द्वारा पशु पालकों को हर तरह की सुविधा दी गई। कई बार बिजली-पानी के कनेक् शन लेने के शिविर लगाए गए। पशु पालकों को योजना में हर तरह की सुविधा दी गई। लेकिन पशुपालकों का रुझान नजर नहीं आ रहा। इस योजना में सभी पशु पालकों को शिफ्ट कर शहर को पशु मुक्त करना है। <br /><br />न्यास सचिव राजेश जोशी ने घोषणा की थी कि पहले फेज में कोटा दक्षिण क्षेत्र के 501 पशु पालकों को शिफ्ट किया जाएगा।  उद्घाटन से पहले ही योजना की तैयारी में न्यास ने पूरा पुलिस व प्रशासनिक अमला लगा दिया। साथ ही न्यास के भी सभी अधिकारी सिर्फ देव नारायण योजना के काम में लगे रहे। स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने 19 जून को योजना का उद्घाटन कर उसी दिन पशु पालकों को कब्जा पत्र देकर गृह प्रवेश कराया था।  उद्घाटन के दिन न्यास सचिव राजेश जोशी ने दावा किया था कि 8 दिन में सभी पशु पालकों को योजना में शिफ्ट कर दिया जाएगा। न्यास सचिव ने पशुओं व पशु पालकों को योजना में शिफ्ट करने के लिए  कई दिन तक नि:शुल्क वाहन भी लगाए। लाखों रुपए योजना में शिफ्टिंग पर खर्च कर दिए। उसके बाद भी हालात जस के तस हैं। योजना का उद्घाटन हुए दस दिन बीत चुके हैं। उसके बाद भी योजना में कोटा दक्षिण के ही पहले फेज के भी पूरे पशु पालक शिफ्ट नहीं हो सके हैं। पशुपालक नारायण गुर्जर ने बताया कि वर्तमान में योजना में मात्र 200 पशु पालक भी शिफ्ट नहीं हो सके हैं। जो पशु पालक वहां शिफ्ट हुए हैं उनमें भी अधिकतर ऐसे हैं जिन्होंने कब्जा तो ले लिया लेकिन अपने पशु लेकर नहीं गए हैं। <br /><br /><strong>न्यास के सर्वे में मिले थे 14 हजार पशु</strong> <br />देव नारायण योजना बनाने से पहले नगर विकास न्यास के अधिकारियों ने शहर में पशुओं व पशु पालकों का सर्वे कराया था। उस सर्वे में शहर में कुल 14 हजार 14 पशु पाए गए थे। जिनमें से 4909 गाय, 4190 भैंस,4915 छोटे पशु शामिल हैं। वहीं 940 पशु पालक सर्वे में शामिल हुए थे। जिनमें भी स्वयं की भूमि पर बाड़े बनाकर रहने वाले 511 व न्यास व सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर रहने वाले 429 पशु पालक शामिल हुए थे। <br /><br /><strong>हर सड़क मवेशियों का झुंड</strong><br />न्यास  द्वारा दावा किया जा रहा था कि देव नारायण योजना बनने के बाद शहर पशु मुक्त हो जाएगा।  पशुओं के कारण होने वाले दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। लेकिन हालत यह है कि वर्तमान में कोटा दक्षिण क्षेत्र के ही हर सड़क पर मवेशियों के झुंड देखे जा सकते हैं। मेन रोड हो या गली मौहल्ले। डिवाइडर हो या चौराहे। गाय हो या भैंस हर तरह के मवेशियों के झुंड शहर की सड़कों पर वाहन चालकों के रास्ते रोके हुए देखे जा सकते हैं। <br /><strong>-आशीष भारद्वाज, एडवोकेट</strong> <br /><br /><strong>छोटों पर दबाव, बड़ों पर बस नहीं</strong> <br />न्यास कार्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित घोड़ा बस्ती के मेन रोड से ही न  तो पशु पालक शिफ्ट  हुए और न ही पशु। गोबर व गंदगी से लोगों का उस मार्ग से निकलना मुश्किल हो रहा है। सूत्रों के अनुसार छोटे पशु पालकों पर तो जबरन दबाव बनाकर उन्हें शिफ्ट होने को मजबूर किया गया। बड़े पशु पालकों पर न्यास सचिव का जोर नहीं चलने से वे अभी भी शहर में ही डेरे डाले हुए  हैं। नए कोटा क्षेत्र में अभी भी बाड़े कम नहीं हुए हैं। <br /><strong>-जगदीश भांड घोड़ा बस्ती</strong><br /><br /><strong> न्यास सचिव ने नहीं किया फोन रिसीव</strong><br />देव नारायण योजना में पशु पालकों की शिफ्टिंग के बारे में न्यास सचिव से फोन पर बात कर जानकारी करने का प्रयास किया गया। लेकिन उन्होंने फोन ही रिसीव नहीं किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jun 2022 14:29:17 +0530</pubDate>
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