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                <title>Pentagon Report - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Pentagon Report RSS Feed</description>
                
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                <title>यमन में अमेरिकी एयरस्ट्राइक पर पेंटागन की रिपोर्ट: 3 हमलों में 153 नागरिकों की मौत, 243 घायल होने का खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ किए गए तीन अमेरिकी हवाई हमलों में 153 आम नागरिकों की मौत हुई और 243 घायल हुए। रिपोर्ट के अनुसार, रास ईसा बंदरगाह पर किया गया हमला सबसे अधिक घातक था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pentagon-report-on-us-airstrike-in-yemen-reveals-153-civilians/article-162860"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/yaman.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) की एक समीक्षा में पाया गया है कि पिछले वर्ष यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ किये गये तीन अमेरिकी हवाई हमलों में 153 नागरिक मारे गये और 243 घायल हुए। अमेरिकी कांग्रेस को बुधवार को भेजी गयी वार्षिक नागरिक हताहत रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आयी। समीक्षा अप्रैल 2025 में किये गये तीन हवाई हमलों पर केंद्रित थी। ये हमले यमन की राजधानी सना और उसके आसपास तथा हूती नियंत्रण वाले रास ईसा बंदरगाह को निशाना बनाकर किये गये थे। उस समय अमेरिकी सेना लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों और इजरायल पर हमले कर रहे हूती विद्रोहियों के खिलाफ अभियान चला रही थी।</p>
<p>पेंटागन की समीक्षा के अनुसार, इन तीन हमलों में कुल 153 नागरिकों की मौत हुई और 243 लोग घायल हुए। इनमें रास ईसा बंदरगाह पर किया गया हमला सबसे घातक था, जिसमें 80 लोग मारे गए और 171 घायल हुए। हमले के बाद घटनास्थल पर बड़े पैमाने पर आग लग गयी थी और कई टैंकर ट्रक जलकर नष्ट हो गये थे। हूती समर्थक अल-मसीरा टेलीविजन चैनल ने हमले के बाद के दृश्य प्रसारित किये थे। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने उस समय कहा था कि हमले का उद्देश्य यमन के लोगों को नुकसान पहुंचाना नहीं था। कमांड के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के लिए ईंधन के स्रोत को नष्ट करने और उनकी आय के अवैध स्रोतों को रोकने के लिए कार्रवाई की थी। समीक्षा में इन हमलों के पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा या सांत्वना राशि देने की सिफारिश नहीं की गयी। रिपोर्ट में इसका कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।</p>
<p>पेंटागन के अनुसार, अमेरिकी सैन्य अभियानों में नागरिकों के मारे जाने या घायल होने की स्थिति में ऐसी सांत्वना राशि दी जा सकती है। कानून के तहत इसे देना अनिवार्य नहीं है और इसका भुगतान किसी गलती को स्वीकार करना भी नहीं माना जाता। अमेरिकी सेना ने इससे पहले भी ऐसे मामलों में सांत्वना राशि देने की पेशकश की है। वर्ष 2021 में अफगानिस्तान में एक अमेरिकी ड्रोन हमले में 10 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें सात बच्चे थे। उस घटना के बाद पेंटागन ने पीड़ित परिवारों को ऐसी राशि देने की प्रतिबद्धता जतायी थी।</p>
<p>पेंटागन की यह समीक्षा ऐसे समय सामने आयी है जब ट्रंप प्रशासन के सैन्य अभियानों में नागरिकों की मौत को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में चिंता बढ़ रही है। इस वर्ष ईरान के साथ शुरू हुए युद्ध के शुरुआती दिनों में अमेरिकी मिसाइल हमले में एक प्राथमिक विद्यालय को निशाना बनाए जाने से कथित तौर पर 168 लोगों की मौत हुई थी। अमेरिकी सेना ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ पहली बार 2023 में हमले शुरू किए थे। यह कार्रवाई उस समय शुरू हुई थी जब हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाना शुरू किया था। लाल सागर वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो स्वेज नहर के रास्ते भूमध्य सागर से जुड़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Aug 2026 18:15:39 +0530</pubDate>
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                <title>अरुणाचल सीमा के पास चीन ने सिचुआन में गुप्त परमाणु अड्डे को किया अपग्रेड, तेजी से बना रहा परमाणु हथियार </title>
                                    <description><![CDATA[सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार चीन अरुणाचल सीमा के पास सिचुआन में परमाणु ठिकानों का तेजी से विस्तार कर रहा है। 2030 तक चीन के पास 1,000 से अधिक परमाणु वारहेड होने का अनुमान है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-upgrades-secret-nuclear-base-in-sichuan-near-arunachal-border/article-143590"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/china.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने अरुणाचल प्रदेश की सीमा के नजदीक अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम का तेजी से विस्तार कर रहा है। इसका खुलासा द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट से हुआ है। इसमें सैटेलाइट इमेजरी का विश्लेषण कर बताया गया है कि दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत में चीन के न्यूक्लियर हथियार प्रोग्राम का तेजी से विस्तार हो रहा है। इमेजरी से पता चलता है कि अरुणाचल प्रदेश से लगभग 800 किलोमीटर दूर कई न्यूक्लियर-लिंक्ड साइट्स पर लगातार कंस्ट्रक्शन और मॉडर्नाइजेशन का काम किया जा रहा है। इससे भविष्य में भारत की चिंता बढ़ने की आशंका है, क्योंकि चीन अरुणाचल प्रदेश पर अधिकार का दावा करता है।</p>
<p><strong>परमाणु हथियारों के मामले में दुनिया का तीसरा बड़ा देश</strong></p>
<p>चीन अपने परमाणु हथियारों के भंडार को तेजी से बढ़ा रहा है। पिछले 10 वर्षों में चीन परमाणु हथियारों के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। अनुमान के मुताबिक, 2026 की शुरूआत तक चीन के परमाणु वॉरहेड्स की संख्या लगभग 600 होगी, जो सिर्फ रूस और अमेरिका से पीछे है। रूस के पास लगभग 5,400 वॉरहेड्स हैं और अमेरिका के पास 5,100 से 5,200 के बीच वारहेड्स हैं। पेंटागन का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक चीन के पास 1000 से अधिक परमाणु वारहेड्स होंगे।</p>
<p><strong>सिचुआन में चीन की नापाक चाल का खुलासा</strong></p>
<p>द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन सिचुआन में स्थित परमाणु फैसिलिटी को तेजी से अपग्रेड कर रहा है। इस फैसिलिटी की शुरूआत छह दशक पहले शीत युद्ध के दौरान हुई थी। इसे चीन के पहले तानाशाह माओत्से तुंग के थर्ड फ्रंट प्रोग्राम के तहत बनाया गया था, ताकि जरूरी रक्षा उद्योग को सुरक्षा की दृष्टि से कमजोर तटीय इलाकों से हटाकर पहाड़ी इलाकों में शिफ्ट किया जा सके। इसका मकसद अमेरिका या उस समय के सोवियत यूनियन के हमलों की हालत में तबाही के खतरे को कम करना था। इस पहल के तहत, दक्षिण-पश्चिमी चीन की दूर-दराज की घाटियों में न्यूक्लियर प्रोडक्शन फैसिलिटीज, लैबोरेटरी और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए गए।</p>
<p><strong>परमाणु फैसिलिटी को अपग्रेड कर रहा चीन</strong></p>
<p>पिछले दो दशकों में खासकर 2019 के बाद से चीन ने कई परमाणु फैसिलिटी पर कंस्ट्रक्शन के काम तेज किए हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया है। इसे चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में परमाणु हथियारों की बढ़ती भूमिका का संकेत माना जा रहा है। </p>
<p><strong>भारत की सुरक्षा को खतरा </strong></p>
<p>अरुणाचल प्रदेश के पास चीन के परमाणु फैसिलिटी के अपग्रेडेशन से भारत की चिंता बढ़ सकती है। भारत और चीन में पुराना सीमा विवाद है। चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश पर दावा जताता रहता है। ऐसे में अरुणाचल प्रदेश के पास चीन के परमाणु हथियारों के निर्माण और मौजूदगी से भारत की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 11:13:28 +0530</pubDate>
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