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                <title>असर खबर का - राहत: अब 7 किसानों का समूह भी होगा लाभांवित,नियम बदलने से आवेदनों की बढ़ेगी संख्या</title>
                                    <description><![CDATA[छोटे किसान भी समूह बनाकर फसल सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेंगे। 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---relief--now-even-groups-of-7-farmers-will-benefit--the-number-of-applications-will-increase-due-to-the-change-in-rules/article-143898"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(6)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  राज्य सरकार ने अब किसानों को बड़ी राहत देते हुए सामुदायिक तारबंदी योजना में अहम बदलाव किया है। अब तक इस योजना का लाभ लेने के लिए 10 किसानों का समूह अनिवार्य था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब केवल 7 किसानों का समूह बनाकर भी योजना का लाभ उठाया जा सकेगा। इससे विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार ने प्रदेश में 20 हजार किलोमीटर तारबंदी कराने का लक्ष्य रखा है। इस पर 228 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। योजना का उद्देश्य नीलगाय व अन्य आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा करना है, ताकि किसानों को बार-बार होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।</p>
<p><strong>पहले समूह बनाना था मुश्किल</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार 10 किसानों का समूह बनाना कई गांवों में चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। छोटे जोत वाले किसानों की संख्या अधिक होने और खेतों की भौगोलिक स्थिति अलग-अलग होने के कारण समूह तैयार नहीं हो पा रहे थे। अब 7 किसानों की अनिवार्यता से अधिक किसान योजना में शामिल हो सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार इस बदलाव से फसलों की सुरक्षा बेहतर होगी और किसानों की आय में वृद्धि की संभावना है। विभाग का मानना है कि अब योजना में बदलाव करने से आवेदन की संख्या में तेजी आ सकती है।</p>
<p><strong>फसलों को मिलेगा संरक्षण</strong><br />क्षेत्र में इन दिनों गेहूं, चना, सरसों, जौ, लहसुन, धनिया सहित कई फसलें खेतों में खड़ी हैं। आवारा पशुओं से होने वाला नुकसान किसानों के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। तारबंदी से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और उत्पादन में स्थिरता आएगी। योजना में बदलाव के बाद किसानों में उत्साह का माहौल है। उनका कहना है कि समूह की संख्या कम होने से अब योजना का लाभ लेना आसान होगा। छोटे किसान भी अब अपने स्तर पर समूह बनाकर फसल सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेंगे। सरकार की इस पहल को ग्रामीण अंचल में खेती की मजबूती और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />खेतों में तारबंदी के नियम को लेकर दैनिक नवज्योति में 17 फरवरी के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि खेतों को आवारा पशुओं और नीलगायों से बचाने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही तारबंदी अनुदान योजना जिले के किसानों के लिए राहत से ज्यादा परेशानी बनती जा रही है। योजना का उद्देश्य सामूहिक तारबंदी के जरिए फसलों को सुरक्षा देना है, लेकिन अनुदान पाने के लिए कम से कम दस किसानों का समूह बनाना अनिवार्य होने से अधिकांश किसान लाभ से वंचित हैं। तारबंदी योजना में दस किसानों का समूह बनाकर सामूहिक आवेदन करना अनिवार्य है। व्यवहारिक रूप से यह प्रक्रिया आसान नहीं है।</p>
<p>राज्य सरकार ने सामुदायिक तारबंदी योजना में अहम बदलाव किया है। अब तक इस योजना का लाभ लेने के लिए 10 किसानों का समूह अनिवार्य था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब केवल 7 किसानों का समूह बनाकर भी योजना का लाभ उठाया जा सकेगा।<br /><strong>- आर. के. जैन, संयुक्त निदेशक, उद्यान विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 14:25:25 +0530</pubDate>
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