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                <title>विस्फोट में दोनों हाथ-पैर क्षतिग्रस्त, पिता भाई चल बसे फिर भी सुनील ने दौड़कर स्वर्ण की झड़ी लगा दी</title>
                                    <description><![CDATA[सुनील हार ना मानते हुए अपनी प्रतिभा को निखारते हैं और राज्य से लेकर राष्टÑीय स्तर तक पदक जीतकर अपनी परिस्थितियों को पटखनी दे रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/both-hands-and-legs-were-damaged-in-the-explosion--father-and-brother-passed-away--yet-sunil-ran-and-won-gold/article-66817"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/visfot-me-dono-hath-per-khtigrast,-pita-bhai-chal-bse-fr-bhi-sunil-ne-dorkar-swarn-ki-jhadi-lga-di...kota-news-13-01-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। इंसान चाहे तो कितनी भी बुरी परिस्थिति आ जाए लेकिन उसके हौसलों को नहीं तोड़ सकती। इंसान चाह ले तो विषम से विषम परिस्थिति में भी खुद को चमकाकर दिखा सकता है। ऐसा ही करके दिखाया है कोटा के केशवपुरा निवासी सुनील कुमार साहू ने, जिन्होंने दोनों हाथ व दाहिना पैर क्षतिग्रस्त होने और घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद जिला स्तर से लेकर राष्टÑीय स्तर तक की प्रतियोगिताओं में लगातार मेडल जीतकर अपनी विषम परिस्थितियों को कमजोर साबित कर दिया। सुनील के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ वर्ष 2013 में आया तब सबकुछ सामान्य चल रहा था तभी एक उनकी आइसक्रीम फैक्ट्री में एक तेज विस्फोट होता है जिसमें सुनील के दोनोें हाथ, दायां पैर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। वहीं इस हादसे के कुछ महीने बाद ही सुनील के पिता का हार्ट अटैक से देहांत हो जाने से उनकी पूरी जिंदगी उलट जाती है। लेकिन बावजूद इसके सुनील हार ना मानते हुए अपनी प्रतिभा को निखारते हैं और राज्य से लेकर राष्टÑीय स्तर तक पदक जीतकर अपनी परिस्थितियों को पटखनी दे रहे हैं।</p>
<p><strong>पहली बार में मिली निराशा फिर पदकों की लगा दी झड़ी</strong><br />सुनील ने पहली बार वर्ष 2018 में जब जिला स्तरीय प्रतियोगिता में रनिंग में स्वर्ण पदक हासिल किया तो लगा कि अब समय ठीक हो जाएगा लेकिन उसके किस्मत ने परीक्षा लेते हुए सुनील को कई कठिन रास्तों पर लाकर खड़ा कर दिया। साल 2018 में स्वर्ण पदक जीतने के बाद सुनील का राज्य स्तर पर तो चयन हुआ लेकिन कोई पदक नहीं लगा वहीं राष्टÑीय स्तर में चयन होने से भी चूक गए। इसके बाद भी सुनील ने कोशिशें लगातार जारी रखी लेकिन साल 2020 में पैर की चोट के कारण व साल 2021 में कोविड के कारण वो किसी भी प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सके। पर कहते है ना कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ऐसा ही हुआ जब सुनील ने 19 फरवरी 2022 को जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इसके कुछ दिनों बाद ही मार्च माह में उड़Þीसा के कलिंगा स्टेडियम में 100 मीटर में स्वर्ण पदक हासिल करते हुए आॅल आॅवर प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं पिछले वर्ष फरवरी में अलवर जिले में आयोजित 100, 400 व 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया। वहीं मार्च 2023 में पुणे में आयोजित प्रतियोगिता के 400 मीटर में स्वर्ण व 100 मीटर में कांस्य पदक जीता। इसके अलावा दिसंबर 2023 में दिल्ली में आयोजित खेलो इंडिया पैरा गेम में 100 मीटर दौड़ में रजत पदक हासिल किया। वहीं दिसंबर में ही चुरू में आयोजित प्रतियोगिता में 100, 400 व 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक अपने नाम किए। </p>
<p><strong>भाई व पिता के जाने के बाद खुद उठाई जिम्मेदारी</strong><br />सुनील वर्तमान में कोटा के केशव पुरा इलाके में रहते हैं। उनका जन्म अलवर जिले के मालाखेड़ा गांव में हुआ था जहां साल 2018 में सुनील  भारतीय सेना में जाने का सपना देखकर बड़े हुए लेकिन दुर्भाग्यवश वर्ष 2012 में उनके बड़े भाई का देहांत हो जाने के कारण पिता के कारोबार में हाथ बटाने की जिम्मेदारी उन पर आ गई। लेकिन किस्मत को कहां मंजूर था तो साल 2013 में सुनील के पिता की आईसक्रीम फैक्ट्री में हुए हादसे मेंं सुनील के दोनों हाथ और दायां पैर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं उसके बाद सुनील पूरी तरह ठीक भी नहीं हुए थे की उसी साल उनके पिता का हार्ट अटैक के कारण देहांत हो जाता है। पिता के देहांत को एक साल पूरा ही हुआ था कि उनकी बड़ी बहन का भी वर्ष 2014 में बीमारी के चलते निधन हो जाता है। खुद के बीमार रहने और पिता के ना होने के कारण उनकी फैक्ट्री भारी नुकसान के कारण बंद हो जाती है। जिससे घर पर मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से पहाड़ टूट पड़ता है। लेकिन समय के साथ सुनील खुद को मजबूत करते हैं और खुद को पैरालंपिक के लिए तैयार करने लगते हैं।</p>
<p><strong>मां ने बेटे की तैयारी के लिए मजदूरी तक की</strong><br />सुनील की सफलता में जितना योगदान उनका खुदका है उससे कहीं ज्यादा योगदान उनकी मां प्रेमदेवी का है। जिन्होंने अपने बड़े बेटे और पति के ना होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और बेटे को पैरालम्पिक के लिए तैयार करती रहीं। सुनील कहते हैं कि मां प्रेमदेवी ने उन्हें कभी निराश नहीं होने दिया उन्होंने हमेशा मुझे आगे बढ़ते रहने के लिए प्रोत्साहित किया। सुनील ने आगे बताया कि पिता की फैक्ट्री बंद हो जाने से घर पर आर्थिक संकट आ गया था, लेकिन मां प्रेमदेवी ने घरों में काम व मजदूरी कर घर का और मेरी ट्रैनिंग दोनों को खर्च उठाया मुझे हमेशा काम की जगह तैयारी करने को कहा। मां ने मेरा हमेशा हौसला बढ़ाते हुए बस देश का गौरव बढ़ाने के लिए कहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jan 2024 17:04:56 +0530</pubDate>
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                <title>29 करोड़ का अंडरपास चलने लायक भी नहीं बचा</title>
                                    <description><![CDATA[नगर विकास न्यास द्वारा झालावाड रोड स्थित गोबरिया बावड़ी चौराहे पर करीब 29 करोड़ रुपए खर्च कर अंडरपास तो बना दिया। लेकिन सी पेज की समस्या गले की फांस बन गई है। न्यास के इंजीनियर द्वारा छोडी गई तकनीकी खामी और सीपेज की समस्या के चलते अंडर पास के सीसी रोड को पहले तो जगह-जगह से खोद दिया। अब वह चलने लायक तक नहीं बचा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/29-crore-underpass-is-not-even-worth-running/article-19605"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/29-crore-ka-underpass-chalne-layak-bhi-nahi-bacha-..kota-news-19.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर विकास न्यास द्वारा झालावाड रोड स्थित गोबरिया बावड़ी चौराहे पर करीब 29 करोड़ रुपए खर्च कर अंडरपास तो बना दिया। लेकिन सी पेज की समस्या गले की फांस बन गई है। न्यास के इंजीनियर द्वारा छोडी गई तकनीकी खामी और सीपेज की समस्या के चलते अंडर पास के सीसी रोड को पहले तो जगह-जगह से खोद दिया। अब वह चलने लायक तक नहीं बचा है। हालत यह है कि पिछले कई दिन से अंडरपास से वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बंद है। जनता के करोड़ों रुपए की इस तरह बर्बादी न्यास के इंजीनिेयरों की कार्य क्षमता पर सवाल खड़े कर रही है। न्यास ने करीेब 24 करोड़ रुपए से अधिक की राशि अंडरपास निर्माण पर खर्च की है। वहीं करीब 4 करोड़ रुपए से अधिक की राशि उसके सौन्दर्यीकरण पर खर्च की गई। फरवरी 2020 में शुरु हुआ अंडरपास का काम करीब डेढ़ साल में पूरा भी हो गया। काम पूरा होते ही न्यास अधिकारियों ने अंडरपास से ट्रैफिक भी चालू कर दिया। लेकिन अंडरपास बनने के बाद से ही उसमें तकनीकी खामी इतनी अधिक छोड़ दी कि उसमें सीपेज का पानी आने लगा। शुरुआत में यह कम था लेकिन इंजीनियरों व अधिकारियों ने उस पर ध्यान नहीं दिया। संवेदक फर्म द्वारा भी उसे हल्के में लिया गया। जिससे यह समस्या लगातार गम्भीर होती गई। अब हालत यह है कि न्यास इंजीनियरों से लेकर अधिकारियों तक अपनी पूरी ताकत झौंकने के बाद भी उस खामी को अभी तक ठीक नहीं किया जा सका है। अंडरपास की पूरी सीसी रोड को जगह-जगह से इस तरह से खोद दिया कि उस पर से वाहन नहीं निकल सकते। सीसी रोड की खुदाई भी इतनी चौड़ाई में की गई है कि दो पहिया छोड़ चार पहिया वाहन तक आसानी से नहीं निकल पा रहे। अंडरपास के दोनों तरफ की सीसी रोड पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए हैं।सीसी रोड के सरिये तक नजर आने लगे हैं। न्यास अधिकारियों ने पहले एरोड्राम से अनंतपुरा की तरफ जाने वाले रास्ते को बंद किया। वर्तमान में अनंतपुरा से एरोड्राम की तरफ आने वाला रास्ता भी बंद करना पड़ा। नतीजा करीब 29 करोड़ की लागत से बने अंडरपास से ट्रैफिक का आवागमन कई दिन से बंद है। इससे आमजन को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ट्रैफिक भी अंडरपास की साइड की सड़कों से ही निकल रहा है। स्थानीय लोगों व दुकानदारों ने बताया कि न्यास ने चौराहे को ट्रैफिक सुधार की जगह उसे बिगाड़ दिया। लोगों के मकान व दुकानें तोड़कर उन्हें भी परेशान किया। लेकिन अंडरपास का लाभ भी लोगों को नहीं मिल रहा है। तकनीकी खामियों को दूर करने की थी जरूरत इधर इंजीनियरिंग से जुड़े जानकारों का कहना है कि न्यास ने बिना किसी तैयारी के अंडरपास का निर्माण कराया है। संवेदक फर्म के साथ ही न्यास के इंजीनियरों को भी पहले यहां की सीपेज समस्या का समाधान करना चाहिए था। ड्रेनेज सिस्टम बनाना चाहिए था। पथरीला क्षेत्र होने से उसका पूरा मैजरमेंट करने के बाद ही अंडरपास बनाना था। लेकिन अब अंडरपास बनने के बाद उस समस्या का स्थायी व लम्बे समय के लिए समाधान कर पाना संभव नहीं है। साथ ही अंडरपास में बनाई गई सीसी रोड के एक बार खराब होने के बाद उसे फिर से वैसा भी नहीं बनाया जा सकता। सीसी रोड पर पेबंद ही लगाया जाएगा। संवेदक फर्म ने तो काम कर दिया। न्यास से पैसा भी ले लिया। लेकिन उसका लाभ नहीं मिला। जबकि यहां अंडरपास बनाने की जगह चौराहे को सही करके भी कम बजट में काम चलाया जा सकता था। सुंदरता पर फोकस, जनता की सुविधा पर नहीं न्यास अधिकारियों द्वारा अंडरपास को बनाना तो आमजन की सुविधा के हिसाब से था। लेकिन उसे बनाने के दौरान आमजन की सुविधा का ध्यान नहीं रखते हुए उसकी सुंदरता बढ़ाने पर ही फोकस रखा गया। यही कारण है कि जिस सड़क पर वाहन निकलने हैं उसी सीसी तो बना दिया। लेकिन नीचे से आने वाले सीपेज के पानी की समस्या का समाधान नहीं किया गया। इससे सड़क को मजबूत बनाने की जगह उसे चलने लायक तक नहीं छोड़ा। जबकि अंडरपास की दीवारों को पेंटिंग, डिजाइन व लाइटिंग से इस तरह सजाया है कि रात के समय उसकी सुंदरता देखते ही बनती है। लेकिन पिछले कई दिन से अंडरपास की सुंदरता को देखने वाला कोई नहीं है। चलने लायक सड़क चाहिए ,सुंदरता नहीं न्यास ने गोबरिया बावड़ी में अंडरपास तो अच्छा बनाया। उसकी चार दीवारी को भी सजाया। रात को रोशनी से जगमग भी होता है। लेकिन इस सुंदरता का कोई मतलब नहीं है। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी उसकी सड़क चलने लायक नहीं है। अंडरपास के दोनों तरफ की सीसी रोड जैसी मजबूत सड़क को खोदकर पटक दिया। इससे आमजन को तो कोई लाभ नहीं हुआ। ठेकेदार को लाभ हुआ। न्यास अधिकारियों की गलती और इंजीनियरों के तकनीकी ज्ञान की कमी का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। - राकेश सुमन, दादाबाड़ी जनता के धन की बर्बादी गोबरिया बावड़ी में करोड़ों रुपए खर्च करके अंडरपास बनाने की जरूरत ही नहीं थी। यदि बनाया भी तो उसे सही बनाते। जिससे लोगों के काम आता। लेकिन वह तो बनने के बाद शुरुआत से ही तकनीकी खामी की भेंट चढ़ा हुआ है। कई साल बाद खराब होता तो समझ में भी आता। लेकिन गुणवत्ता व समय पर काम करने के दावे तो किए लेकिन उसका कोई लाभ नहीं हुआ। सिर्फ जनता के धन की बर्बादी की गई है। - जगदीश पांचाल, भीमगंजमंडी एक्सपर्ट व्यू - नींव खुदाई के समय की कमी अब उजागर गोबरिया बावड़ी अंडरपास जब से बना है शुरुआत से ही विवादों में रहा है। झालावाड़ रोड पर चट्टाने अधिक हैं। अंडरपास के लिए जिस गहराई तक खुदाई की गई वह पानी की लेबल तक की गई है। साथ ही इसकी नींव खुदाई करते समय सीपेज की समस्या का ध्यान नहीं रखा गया। जिससे बनने के बाद भी सीपेज की समस्या बनी हुई है। नगर विकास न्यास के इंजीनियरों ने अपने स्तर पर उसे सही करने के प्रयास कर लिए लेकिन वे सफल नहीं हो सके है। ऐसे में इंजीनियरिंग कॉलेज से विशेषज्ञों या बाहर से एक्सपर्ट इंजीनियरों की राय लेकर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। इसके लिए सीपेज का ट्रीटमेंट करके नए सिरे से सॉफ्ट डालनी होगी। बार-बार सड़क खोदने से समस्या का समाधान नहीं होगा। यदि तात्कालिक तौर पर समाधान कर भी दिया गया तो कुछ समय बाद फिर से समस्या हो जाएगी। इसके लिए स्थायी समाधान करना होगा। - धीरेन्द्र माथुर, रिटायर्ड मुख्य अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग न्यास सचिव ने नहीं दिया जवाब गोबरिया बावड़ी अंडरपास के बंद होने व उसके कब तक ठीक होकर चालू होने के बारे में जानने के लिए नगर विकास न्यास के सचिव राजेश जोशी को कई बार मोबाइल पर फोन किए। लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। उसके बाद वाट्सअप मर मैसेज भी किया। लेकिन देखने के बाद भी उसका कोई जवाब नहीं दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 19 Aug 2022 14:57:44 +0530</pubDate>
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                <title> असर खबर का -  जर्जर भवनों में चल रहे सरकारी कार्यालय का मामला अदालत पहुंचा </title>
                                    <description><![CDATA[ कोटा शहर में विभिन्न स्थानों पर पुराने तथा जर्जर मकानों में लोग रहे हैं और जर्जर भवनों में संचालित  सरकारी कार्यालय के मामले में न्यायालय ने आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण तथा अधीक्षण अभियंता सहायक निर्माण विभाग और  जिला कलक्टर को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/asar-of-the-news---the-matter-of-the-government-office-running-in-dilapidated-buildings-reached-the-court/article-19319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/asar-khaber-ka---jarjar-bhavanon-mein-chal-rahe-sarakaaree-kaaryaalay-kota-news-17.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोटा शहर में विभिन्न स्थानों पर पुराने तथा जर्जर मकानों में लोग रहे हैं और जर्जर भवनों में संचालित सरकारी कार्यालय के मामले में न्यायालय ने आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण तथा अधीक्षण अभियंता सहायक निर्माण विभाग और जिला कलक्टर को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। इस मामले में 22 अगस्त को सुनवाई होगी। न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। इस मामले में स्थाई लोक अदालत में एडवोकेट लोकेश कुमार सैनी ने एक जनहित याचिका दायर करते हुए बताया कि कोटा शहर में कई जर्जर मकानों में लोग रह रहे हैं तथा सरकारी कार्यालय भी जर्जर भवनों में ही संचालित हो रहे हैं। ऐसे में बरसात के समय में भी बड़ा हादसे होने की संभावना रहती है । हर वर्ष बरसात में दो से चार मकान गिर जाते हैं। पुराने मकानों को उनके मालिक मजबूती से ठीक भी नहीं करवाते और नहीं नगर निगम दक्षिण आयुक्त ऐसे मकान मालिकों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। याचिका में बताया गया कि बरसात में किसी भी जर्जर मकान के गिरने पर कभी भी बड़ा हादसा होने से लोगों की जानें जा सकती हंै। पुराने कोटा शहर में सूरजपोल से मौखापाड़ा तक अधिकतर मकानों की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं । उनका प्लास्टर निकल चुका है। किसी मकान का ऊपरी हिस्सा एक तरफ झुका हुआ है। बरसात के समय में उन मकानों की छत और कमरों में पानी टपकता रहता है। जिससे ऐसे मकानों में दरारें भी आ रही है। जर्जर मकानों में अधिकतर कई वर्षों से किराएदार भी रह रहे हैं, ऐसे ही सूरजपोल स्थित झाला हाउस काफी पुरानी बिल्डिंग हंै जिसमें पीएचईडी कर्मचारी स्टाफ है। भवन कार्यालय की हालत जर्जर है। इसी तरह से महिला पुलिस थाना भी पुराने भवन में संचालित हो रहा है। नगर निगम आयुक्त दक्षिण, पीडब्ल्यूडी अधीक्षण अभियंता और जिला कलेक्टर की अनदेखी के कारण लोगों के सामने समस्याएं उत्पन्न होती जा रही हैं । इस मामले में न्यायालय ने जनहित याचिका को स्वीकार करते हुए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Aug 2022 14:58:58 +0530</pubDate>
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                <title>धर्मशाला और स्कूलों में चल रहे हाडौती के सरकारी कॉलेज</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के कई सरकारी महाविद्यालय धर्मशाला, अस्पताल भवन और जर्जर स्कूलों में चल रहे हैं, जहां सुविधाएं तो न के बराबर हैं लेकिन हादसों का खतरा भरपूर है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-colleges-of-hadoti-running-in-dharamshala-and-schools/article-18958"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/dharamshala-mei-chal-rahe-sarkari-college-kota-news-13.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। विद्यार्थियों को घर के पास ही बेहतर उच्च शिक्षा मुहैया कराने के उद्देश्य से सरकार ने ग्रामीण अंचलों में भी सरकारी कॉलेज तो खोल दिए, लेकिन पढाने को शिक्षक ही नहीं दिए। साधन-संसाधनों की अनुपलब्धता से अपंग हुए गवर्नमेंट कॉलेजों में क्वालिटी एजुकेशन मिलने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हाड़ौती के कई सरकारी महाविद्यालय धर्मशाला, अस्पताल भवन और जर्जर स्कूलों में चल रहे हैं, जहां सुविधाएं तो न के बराबर हैं लेकिन हादसों का खतरा भरपूर है। इन कॉलेजों को आज तक खुद का भवन नसीब नहीं हुआ। गांवों के सरकारी स्कूलों में उधार के कमरों में यह कॉलेज चल रहे हैं। विद्यार्थियों को फेसिलिटी से लेकर फैकल्टी तक नहीं मिल रही। इनमें से कुछ कॉलेज तो हाल ही में खुले हैं। अब सवाल यह उठता है कि मूलभूत सुविधाओं की कमी वाले इन कॉलेजों में उच्च शिक्षा के हीरे कैसे चमक पाएंगे। इटावा - 50 साल पुरानी जर्जर धर्मशाला में चल रहा कॉलेज राजकीय इटावा महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी, तब से यह करीब 50 साल पुरानी त्यागी धर्मशाला में चल रहा है। भवन जितना पुराना है, उतना ही जर्जर अवस्था में है। कक्षा-कक्षों में पानी टपक रहा है। छत का पलास्टर जगह-जगह से उखड़ चुका है। पिछले साल पलास्टर का बड़ा टुकड़ा गिरकर फर्श पर विद्यार्थियों के बीच गिर गया था। गनीमत रही कि बच्चों की संख्या कम होने से वह जगह खाली थी, ऐसे में गंभीर हादसा होने से टल गया। वहीं, पीने के पानी की भी समूचित व्यवस्था नहीं है। 600 विद्यार्थियों पर चार क्लास रूम यूजीसी की गाइड लाइन के अनुसार 40 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए, लेकिन इटावा कॉलेज में तो 600 बच्चों पर 1 ही शिक्षक है और प्रिंसिपल भी वही हैं। वहीं, धर्मशाला में कुल 5 कमरे हैं, जिनमें से एक प्राचार्य ऑफिस और दूसरा असुरक्षित होने के कारण बंद कर दिया है। ऐसे में 3 ही कक्षा कक्ष बचे हैं, जबकि वर्तमान में 600 स्टूडेंट्स का नामांकन है। बच्चों को बिठाने की जगह नहीं होने से कॉलेज में 7 में से 3 विषय की ही कक्षाएं लग पाती है। ऐसे में 4 कक्षाओं को बिठाने की जगह और शिक्षकों के अभाव के चलते उनकी क्लासें नहीं लगा पाते। टीनेशेड व पेड़ के नीचे लगती बीए की क्लासें प्राचार्य नरेंद्र मीणा ने बताया कि त्यागी धर्मशाला का भवन जर्जर है। यहां बच्चों को बिठाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बीए द्वितीय व तृतीय वर्ष की कुछ क्लासें खुले में टीनशेड व पेड़ के नीचे लगानी पड़ती है। वहीं, गत वर्ष से अब तक अंगे्रजी के प्रोफेसर नहीं होने से बच्चों को पढ़ाई नहीं करा पाते। विद्यार्थी अपने स्तर पर ही कोचिंग व ट्यूशन जाकर अपना कोर्स पूरा करते हैं। हालांकि, कॉलेज में संचालित 7 विषयों में से 5 विषय के शिक्षक तो विद्या सम्बल योजना के तहत लगा लिए थे लेकिन अंग्रेजी के शिक्षक नहीं मिलते, जिससे पढ़ाई का नुकसान होता है। उन्होंने बताया कि यूजीसी के मापदंड के अनुसार अंगे्रजी शिक्षक नेट क्वालिफाइड होना चाहिए, जो ग्रामीण इलाकों में नहीं मिल पाते। पांच माह पहले ही मिली जमीन, कब्जा नहीं सौंपा प्राचार्य मीणा ने कहा, कॉलेज के लिए फरवरी 2022 में ही जमीन व बजट मिला है। लेकिन अभी तक राजस्व विभाग ने कब्जा नहीं दिया। क्योंकि, कॉलेज के रास्ते पर अतिक्रमण हो रहा है। जब तक अतिक्रमण नहीं हटेगा तब तक कब्जा नहीं मिलेगा। इसी वजह से निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हो पाएगा। उन्होंने बताया कि गत दो वर्ष पहले ही जमीन आवंटित हो गई थी लेकिन वह भूमि डूब क्षेत्र में होने के कारण निरस्त कर दी गई थी। जब तक कॉलेज के लिए स्थाई भवन की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक पास में ही संचालित हो रहा आईआईटी भवन में ही बीए की कक्षाएं लगाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था हो जाए तो काफी राहत मिल सकती है। कनवास - स्कूल में चल रहा गवर्नमेंट कॉलेज कनवास के राजकीय आर्ट्स महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 2018 में हुई थी। तब से यह कॉलेज राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में चल रहा है। मजेदार बात यह है, स्कूल और कॉलेज एक ही भवन में संचालित हो रहे हैं। इस भवन में तीन दर्जन से अधिक कमरे हैं, जबकि कॉलेज के लिए 6 ही कमरे दिए हुए हैं। इनमें से एक कक्ष प्राचार्य आॅफिस है और 5 कक्षों में ही कक्षाएं चलानी हैं। जबकि, महाविद्यालय में 600 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, यहां बैठने तक की जगह नहीं है और पढ़ाने के लिए एक ही प्रोफेसर है और वो ही प्रिंसिपल है। ऐसे में यहां क्वालिटी एजुकेशन तो दूर सिलेबस पूरा करवाना ही चूनौतिपूर्ण बना है। टपक रही कमरों की छतें अधिकतर कमरों की छतें टपक रही है। स्कूल और कॉलेज एक ही शिफ्ट में एक साथ संचालित होने से शोर शराबा ज्यादा रहता है। स्कूल भवन भी जर्जर है। गत वर्ष भी कॉलेज प्राचार्य ने अपने स्तर पर ही छत की मरम्मत करवाई थी, बजट के अभाव में काम पूरा नहीं करवा सके। दीवारों में सीलन आ रही है। बरसात के समय हादसे की आशंका बनी रहती है। हालांकि गत वर्ष कॉलेज भवन के लिए जमीन आवंटित हो चुकी है। सात में से एक ही विषय की कक्षा चलती है कनवास महाविद्याय के प्राचार्य ललित कुमार नामा ने बताया कि यहां आर्ट्स कॉलेज में 7 विषय संचालित होने से सात शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं लेकिन, यहां मैरे अलावा कोई अन्य शिक्षक नहीं है। हालांकि संविदा पर एक व्याख्याता को लगा रखा है, जो हिन्दी पढ़ाते हैं। ऐसे में महाविद्यालय में केवल हिन्दी की ही कक्षा चलती है। जबकि, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, भूगोल और चित्रकला के शिक्षकों के पद रिक्त होने से इनकी कक्षाएं नहीं लगती। ऐसे में इन विषयों के विद्यार्थियों की पढ़ाई नहीं हो पाती। हालांकि, विद्या संबल के माध्यम से कुछ शिक्षक लगाकर कामचलाऊ व्यवस्था कर लेते हैं लेकिन स्थाई शिक्षकों के बिना शिक्षा के स्तर में सुधार नामुमकिन है। भवन के लिए जारी हुआ छह करोड़ का बजट प्राचार्य नामा ने कहा, गत वर्ष ही कॉलेज के लिए साढ़े बारह बीघा जमीन आवंटित हुई है, जिस पर भवन निर्माण के लिए 6 करोड़ का बजट भी जारी हो गया है। दो माह पहले जून में ही वित्तिय स्वीकृति जारी हुई है और पीडब्ल्यूडी ने भी तकनीकी स्वीकृति जारी कर दी है, जिससे जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय चलाने के लिए विकास समिति बनाई थी लेकिन पदाधिकारी शिक्षकों के तबादले होने से समिति का संचालन ही नहीं हो सका और संविदा शिक्षक इस समिति का हिस्सा नहीं हो सकते। जर्जर अस्पताल भवन में चल रहा मांगरोल कॉलेज कॉलेज शिक्षा सहायक निदेशक डॉ. रघुराज सिंह परिहार के मुताबिक, मांगरोल में 2016 में सरकार ने कॉलेज खोला था, तब से यह सरकारी अस्पताल के जर्जर भवन में चल रहा है। यहां 20 जनों का स्टाफ स्वीकृत है, जिनमें प्रिंसिपल, 7 असिस्टेंट प्रोफेसर के अलावा नॉन टीचिंग स्टाफ शामिल हैं। एकमात्र असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रिचा मीणा ही कार्यरत थी, जिनका हाल ही में ट्रांसफर हो गया। ऐसे में यहां बारां और कोटा से दो शिक्षक डेपुडेशन पर लगाए हैं। कॉलेज में करीब 600 विद्यार्थी हैं, प्रोफेसरों के अभाव में विद्यार्थियों की हिंदी के अलावा 6 विषयों की क्लासें लग ही नहीं पाती, क्योंकि पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं है। कॉलेज का ताला भी यही शिक्षक खोलते हैं। जर्जर भवनों में बच्चों की सुरक्षा को भी खतरा है। कोई छात्रावास तो कोई पंचायत भवन में चल रहे सरकार ने जितनी रफ्तार से नए महाविद्यालय खोले हैं, उतनी ही फुर्ती फेसिलिटी व फैकल्टी उपलब्ध करवाने में नहीं दिखाई। कोटा शहर में रामपुरा गर्ल्स आर्ट्स कॉलेज वर्तमान में गवर्नमेंट आर्ट्स बॉयज कॉलेज के कन्या छात्रावास में संचालित हो रहा है। यहां एडमिशन प्रक्रिया चल रही है। वहीं, बारां जिले में हाल ही में खुले 4 गर्ल्स महाविद्यालयों के लिए भी स्थाई भवन नहीं है। ऐसे में कुछ तो पंचायत भवन में चल रहे हैं तो कुछ पास के बड़े कॉलेज के भवन में शामिल कर संचालित किया जा रहा है। भवन निर्माण के लिए बजट आवंटन के लिए पत्र लिखा है सरकार ने लगभग सभी महाविद्यालयों को भूमि आवंटित कर दी है। वहीं, कुछ कॉलेजों के भवन निर्माण के लिए बजट भी जारी कर दिया गया है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। आयुक्तालय की ओर से इस संबंध में सकारात्मक संकेत मिले हैं। वहीं, छात्रसंघ चुनाव के बाद विद्या संबल योजना के तहत विषयवार शिक्षकों को लगाया जाएगा।</p>
<p>कुछ स्थाई शिक्षकों की व्यवस्था स्थानांतरण, डेपुटेशन के माध्यम से की जाएगी। आरपीएससी द्वारा साक्षात्कार चल रहे हैं। प्रदेश के कुछ महाविद्यालयों में चयनित प्रोफेसरों को पोस्टिंग दे दी है। हाड़ौती में भी जल्द पोस्टिंग दिए जाने की उम्मीद है। - डॉ. रघुराज सिंह परिहार, सहायक निदेशक कॉलेज शिक्षा निदेशालय कोटा</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Aug 2022 15:34:41 +0530</pubDate>
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                <title>साढ़े तीन साल से अधिकारी ही चला रहे यूआईटी </title>
                                    <description><![CDATA[ स्वायत्त शासी संस्थाओं में नगर विकास न्यास सबसे बड़ी संस्था है। चार विधानसभाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली यूआईटी का संचालन साढ़े तीन साल से अधिकारी कर रहे हैं।  जिला कलक्टर का स्थानान्तरण प्रकरण होने के बाद यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि अब तक न्यास में अध्यक्ष की नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/for-three-and-a-half-years--officers-have-been-running-uit/article-13952"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/sade-3-saal-se-adhikari-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्वायत्त शासी संस्थाओं में नगर विकास न्यास सबसे बड़ी संस्था है। चार विधानसभाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली यूआईटी का संचालन साढ़े तीन साल से अधिकारी कर रहे हैं। जिला कलक्टर का स्थानान्तरण प्रकरण होने के बाद यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि  अब तक न्यास में अध्यक्ष की नियुक्ति  क्यों नहीं की जा रही। न्यास अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं करने से यूआईटी के कामों में जन भागीदारी  नहीं हो पा रही है।  स्वायत्त शासन मंत्री कोटा के होने के बावजूद  विकास कार्यों में अधिकारी अपनी मनमर्जी कर रहे हैं। उन कामों में न तो जनता की जरुरतों को देखा जा रहा है और न ही जनता की भागीदारी हो रही है। न्यास में अधिकतर वही काम हो रहे हैं जिन्हें अधिकारी करना चाह रहे हैं।  राज्य सरकार के कार्यकाल का डेढ़  साल बाकी है।  अंतिम 6 माह चुनाव में निकल जाएंगे। वहीं सरकार ने इस साल बजट में कोटा में न्यास की जगह कोटा विकास प्राधिकरण बनाने की घोषणा की है। हालांकि उसे अभी तक मूर्त रूप देने में समय लगेगा। लेकिन स्थानीय मंत्री होने के बाद भी अभी तक न्यास में अध्यक्ष नियुक्त नहीं करने से सरकार की मंशा ऐसी लगती है  कि इस बार वह किसीे को भी अध्यक्ष नियुक्त नहीं करना चाहती। <br /><br /><strong>22 साल में एक बार ही हुई न्यासियों की नियुक्ति</strong><br />जिस तरह से नगर निगम में महापौर के साथ पार्षद निवाचित होते हैं। वे जनता के प्रतिनिधि के रूप में निगम में जनता के कामों को अधिकारियों व बोर्ड के समक्ष रखते हैं।  उसी तरह से नगर विकास न्यास में भी अध्यक्ष के साथ  सदस्यों के रूप में न्यासी मनोनीत करने का प्रावधान है। ये न्यासी ट्रस्ट मंडल की बैठक में जनता के मुद्दों को रखते हैं। जिससे उन कामों को किया जा सके। लेकिन पिछले 22 साल में अभी तक मात्र एक बार ही वर्ष 2000 में न्यास में 15 न्यासी सदस्य मनोनीत हुए थे। जिनमें से 13 राज्य सरकार द्वारा और दो नगर निगम के विशेष कोटे से थे। उसके बाद भाजपा और कांग्रेस सरकार में अध्यक्ष तो मनोनीत हुए लेकिन न्यासी नहीं बने। जिससे जनता के प्रतिनिधि के रूप में मात्र अध्यक्ष ही भागीदारी निभाते रहे हैं।  वर्तमान में न्यास में जनता की आवाज व उनके मुद्दे उठाने वाला कोई नहीं है। <br /><br /><strong>वर्ष 1971 में हुआ था न्यास का गठन</strong><br />कोटा में वर्ष 1971 में नगर विकास न्यास का गठन किया गया थो। उसके बाद से यहां कई जनप्रतिनिधि अध्यक्ष रह चुके हैं। जबकि जनवरी 2019 के बाद से अभी तक भी न्यास में अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने से न्यास अध्यक्ष के रूप में जिला कलक्टर व न्यास के सचिव ही काम कर रहे हैं। हालांकि इस सरकार में न्यास अध्यक्ष को तो नियुक्त नहीं किया।  उनके स्थान पर सेवानिवृत आरएएस अधिकारी व न्यास में ही सचिव रहे आर.डी. मीणा को विशेषाधिकाारी नियुक्त किया हुआ है। शुरुआत में उनकी नियुक्ति एक साल के लिए की गई थी। जिसमें उनकी भूमिका न्यास के कामों में सलाहकार के रूप में थी। लेकिन उनका कार्यकाल हर साल बढ़ रहा है। वर्तमान में हालत यह है कि विशेषाधिकारी ही पूरी यूआईटी का संचालन कर रहे हैं।  <br /><br /><strong>न्यास में मेहता रहे अंतिम अध्यक्ष</strong> <br />नगर विकास न्यास में अंतिम अध्यक्ष के रूप में रामकुमार मेहता रहे हैं। उनका कार्यकाल 7 जुलाई 2016 से 21 दिसम्बर 2018 तक रहा है। उसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन होने के कारण उन्होंने त्याग पत्र दे दिया था। जबकि कांग्रेस के दो कार्यकाल में रविन्द्र त्यागी दो बार अध्यक्ष रह चुके हैं। पहले कार्यकाल में वर्ष 2000 से 2003 तक व दूसरे कार्यकाल में 2011 से 2013 तक। <br /><br /><strong>जिला कलक्टर के पास न्यास अध्यक्ष का चार्ज</strong><br />न्यास में अध्यक्ष की राजनीतिक नियुक्ति नहीं करने से करीब साढ़े तीन साल से जिला कलक्टर ही न्यास अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे हैं। पूरे जिले के रोजाना सैकड़ों काम होने के बाद एक जिला कलक्टर अरबों रुपए के विकास कार्य करवाने वाली संस्था न्यास के अध्यक्ष का अतिरिक्त चार्ज संभालकर कितना काम करवा सकता है। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि स्वायत्त शासन मंत्री कोटा के होने और न्यास में विशेषाधिकारी का मंत्री के नजदीकी होने से जिला कलक्टर द्वारा कलक्ट्री के काम में देरी की जा सकती है लेकिन यूआईटी के काम में नहीं। इसकी पुष्टि एक दिन पहले निवर्तमान जिला कलक्टर ने अपने फेसबुक पोस्ट में जताई पीड़ा में भी कर दी है। <br /><br /><strong>शहरवासियों का मत</strong><br />नगर विकास न्यास में जब अध्यक्ष का पद है तो उसमें जनता की भागीदारी के लिए नियुक्ति होनी ही चाहिए। जिससे वह जनता के हित के कामों को करवा सके। जबकि जिला कलक्टर बाहर से आए अधिकारी होते हैं उनके पास पहले से ही काम का इतना अधिक बोझ होता है कि वे न्यास में विकास के कामों पर पूरा फोकस नहीं कर पाते। जन भागीदारी नहीं होने से अधिकारी मनमानी करते हैं। वर्तमान में जिस तरह के हालात बने हैं उनके लिए न्यास के अधिकारी जिम्मेदार हैं। एक साथ सभी जगह के काम बिखेर दिए। बरसात में ये काम परेशानी का कारण बनेंगे। <br /><strong>- जी.डी. पटेल, समाजसेवी</strong><br /><br />नगर विकास न्यास में अध्यक्ष का पद राजनीतिक नियुक्ति से किया ही इसलिए जाता है कि वह जनता के कामों को करवा सके। जनता की प्राथमिकता के कामों को अधिकारियों को बता सके। लेकिन साढ़े तीन साल से न्यास में अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं करने से जनता को ही नुकसान हो रहा  है। व्यक्तिगत हितों की पूर्ति एक व्यक्ति विशेष के माध्यम से की जा रही है। जनप्रतिनिधि नेताओं व आमजन सभी के काम करेगा जबकि अधिकारी एक व्यक्ति विशेष के लिए काम कर रहे हैं। <br /><strong>- महेश गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता</strong><br /><br />शहर में पहले भी नगर विकास न्यास के माध्यम से काम हुए हैं। उसमें जनता को उतनी परेशानी नहीं हुई। जिनती वर्तमान में हो रही है। इसका कारण पहले चाहे कांग्रेस शासन रहा हो या भाजपा न्यास में अध्यक्ष जनता का प्रतिनिधि व स्थानीय व्यक्ति होता था। जिससे वह काम को प्राथमिकता से और एक काम पूरा होने के बाद दूसरा शुरू करवाता था। लेकिन वर्तमान में अध्यक्ष का कार्य भार जिला कलक्टर के पास होने से उन्हें शहर के बारे में अधिक जानकारी नहीं होती। ऐसे में अधिकारी जहां चाहे जो चाहे वैसा काम कर रहे हैं। उन पर लगाम लगाने वाला एक मंत्री के अलावा कोई  अन्य जनप्रतिनिधि नहीं है। इसाका खामियाजा जनता को ही परेशानी के रूप में भुगतना पड़ रहा है। <br /><strong>- राजेश गुप्ता, व्यवसायी</strong> <br /><br /><strong>इनका कहना है...</strong><br />नगर विकास न्यास में अध्यक्ष और न्यासी होने से जनता का प्रतिनिधित्व तो होता ही है। साथ ही जनता के काम भी तीव्रता से होते हैं। जनता की समस्याओं को सुनकर उनका त्वरित निस्तारण भी होता है। अध्यक्ष व न्यासी जनता की बात को अधिकारियों तक रखते हैं और विकास के कामों की प्राथमिकता बताते हैं। बिना अध्यक्ष व  न्यासी के अधिकारी अपनी मनमर्जी से काम करते हैं। भाजपा शासन की तुलना में कांग्रेस शासन में अध्यक्ष तो नियुक्त हुए हैं। <br /><strong>- महेन्द्र शर्मा, पूर्व न्यासी</strong><br /><br />शहर के विकास की सबसे बड़ी संस्था है नगर विकास न्यास। हर साल अरबों रुपए के बजट से विकास कार्य करवाए जाते हैं। न्यास में अध्यक्ष की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है। अध्यक्ष जनप्रतिनिधि होने से जनता की भागीदारी व जनता के कामों को प्राथमिकता से करवाने का प्रयास किया जाता है। साथ ही अधिकारियों पर भी लगाम रहती है। जबकि बिना अध्यक्ष के जनता की सुनवाई और काम उतनी तीव्र गति से नहीं हो सकते। जिला कलक्टर के पास न्यास अध्यक्ष का चार्ज रहता है तो उनके पास पहले से ही पूरे जिले का इतना अधिक काम है कि वे न्यास के कामों पर पूरा ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाते हैं।  न्यास में पूर्णकालिक अध्यक्ष होना ही चाहिए। <br /><strong>- रामकुमार मेहता, पूर्व अध्यक्ष नगर विकास न्यास</strong><br /><br />नगर विकास न्यास में अध्यक्ष की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है। दो बार अध्यक्ष रहते हुए शहर में विकास के काफी काम करवाए। जनता का प्रतिनिधि न्यास में होने से उनकी सुनवाई व काम को समय पर करवाने का प्रयास किया जाता है। जबकि जिला कलक्टर के पास न्यास अध्यक्ष का चार्ज होने से वह जिले के अन्य कामों के साथ न्यास के कामों पर उतना ध्यान नहीं दे पाते। न्यास में अध्यक्ष की नियुक्ति होनी चाहिए। लेकिन यह अधिकार राज्य सरकार का है। <br /><strong>- रविन्द्र त्यागी, पूर्व अध्यक्ष नगर विकास न्यास</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/for-three-and-a-half-years--officers-have-been-running-uit/article-13952</link>
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                <pubDate>Sat, 09 Jul 2022 14:38:50 +0530</pubDate>
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                <title>बिना चिकित्सक और रजिस्ट्रेशन के चला रहे निजी अस्पताल, प्रतिनिधि के खिलाफ मामला दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[बीदासर। कस्बे मे बुधवार की देर शाम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा के नेतृत्व मे गठित दल ने राजकीय बांठिया माध्यमिक विद्यालय के सामने चल रहे एक निजी हॉस्पीटल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद निजी अस्पताल मे मिली अनियमिताओं के खिलाफ बीदासर पुलिस थाना में सीएमएचओ मनोज शर्मा की ओर से देर रात्रि में अस्पताल के संस्थान प्रतिनिधि के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया। है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/churu/private-hospitals-running-without-doctor-and-registration/article-12416"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/25.jpg" alt=""></a><br /><p>बीदासर। कस्बे मे बुधवार की देर शाम मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा के नेतृत्व मे गठित दल ने राजकीय बांठिया माध्यमिक विद्यालय के सामने चल रहे एक निजी हॉस्पीटल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद निजी अस्पताल मे मिली अनियमिताओं के खिलाफ बीदासर पुलिस थाना में सीएमएचओ मनोज शर्मा की ओर से देर रात्रि में अस्पताल के संस्थान प्रतिनिधि के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया। है। सीएमएचओ मनोज शर्मा ने बताया कि निरीक्षण के दौरान लैब संचालित मिली जो क्लिनिकल स्टेबलिस्टमेन्ट एक्ट 2010 के अन्तर्गत पंजीकृत नही मिली जिसके चलते लैब को सीज कर दिया गया साथ ही गर्भवती महिलाओं के प्रसव करवाने के उपकरण व दवाइयां भी सीज किए।</p>
<p>निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ के साथ गठित टीम मे औषधी नियंत्रण अधिकारी मनोज कुमार गढ़वाल, बीसीएमएचओ डॉ. ओमप्रकाश धानिया, पीसीपीएनडीटी समन्वयक चूरू राजकुमार, जिला आशा समन्वयक फरजाना साथ थे।संस्थान प्रतिनिधि के विरुद्ध कराया मामला दर्ज पुलिस थाना में बुधवार की देर रात सीएमएचओ मनोज शर्मा ने मामला दर्ज करवाया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रतनगढ़ को प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर गठित टीम के सदस्यों द्वारा जीवन रक्षा हॉस्पीटल का निरीक्षण किया। इस दौरान संस्थान प्रतिनिधि ऋषिकेश कडवासरा द्वारा हॉस्पीटल का संचालन करना पाया गया तथा मौके पर फर्द बनाई गई।</p>
<p>मौके पर ऋषिकेश कड़वासरा द्वारा आधुनिक चिकित्सा पद्धति से चिकित्सा अभ्यास करने के लिए आवश्यक कोई प्रमाण पत्र डिग्री प्रस्तुत नही की गई। उक्त संस्थान मे आधुनिक चिकित्सा पद्धति से चिकित्सा अभ्यास करने के लिये आधुनिक चिकित्सा परिषद अधिनियम के अन्तर्गत पंजीयन नहीं पाए गए। इस प्रकार भोलीभाली ग्रामीण जनता के साथ गुमराह कर आधुनिक चिकित्सा पद्धति से चिकित्सा अभ्यास कर रहा है। जो भारतीय दण्ड संहिता की धारा 419, 420 के तहत दण्डनीय अपराध है। पुलिस ने सीएमएचओ की रिपोर्ट पर संस्थान के प्रतिनिधि के खिलाफ मामला दर्ज किया है।</p>
<p>इस दौरान सीएमएचओ शर्मा ने एक अन्य सूचना पर प्राइवेट क्लिनिक का भी निरीक्षण किया। शर्मा ने बताया कि क्लिनिक की जैसी सूचना मिली थी वो निरीक्षण के दौरान नहीं मिली। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की संस्था हो या झोला छाप नीम हकीम हो उनके खिलाफ भविष्य मे ऐसी कार्यवाही लगातार की जाएगी। किसी भी सुरत में आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का कोई अवसर नहीं दिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने रात्रि मे सीएचसी बीदासर तथा मणोत डिस्पेंसरी का भी औचक निरीक्षण किया। इस दौरान ओटी में सफाई व्यवस्था को लेकर असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि ठेकेदार को सफाई को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा तथा सुधार नहीं होने पर ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। इस मौके पर सीएमएचओ ने सीएचसी प्रभारी डॉ. धर्मवीर स्वामी को निर्देश दिये कि रात्रि मे भी रोगियों की जो सुविधा मिलने चाहिये वो मिलनी चाहिये। इस दौरान बीसीएमएचओ सुजानगढ डॉ. औमप्रकाश धानिया भी उनके साथ थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चूरू</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jun 2022 13:00:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सड़कों पर दौड़ रही, खटारा लो-फ्लोर बसें  </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। जयपुर शहर में संचालित जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड की लो फ्लोर बसें सही तरीके से मेंटिनेंस नहीं होने के कारण आए दिन ब्रेक डाउन हो रही हैं। इसके चलते यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही हादसा होने की संभावना भी बनी रहती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news-khatara-low-floor-buses-running-on-the-roads/article-11981"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/bus2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर शहर में संचालित जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड की लो फ्लोर बसें सही तरीके से मेंटिनेंस नहीं होने के कारण आए दिन ब्रेक डाउन हो रही हैं। इसके चलते यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही हादसा होने की संभावना भी बनी रहती है। जेसीटीएसएल की करीब 305 बसों का संचालन हो रहा है। बगराना डिपो से संचालित बसों की मेंटिनेंस का कार्य पारस ट्रेवल्स कंपनी और विद्याधर नगर व टोडी डिपो की बसों का मेंटिनेंस मातेश्वरी कंपनी कर रही है। बसों का सही मेंटिनेंस नहीं होने से आए दिन ब्रेक डाउन होकर सड़कों पर ही खड़ी हो जाती हैं। जेसीटीएसएल की बीती नौ जून को एमआई रोड पर भी एक बस ब्रेक फेल होकर दीवार में घुस गई थी। इसी बस का रविवार को रामबाग सर्किल चौराहे पर दोबारा से ब्रेक फेल हो गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jun 2022 11:26:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेज रफ्तार में दौड़ रहे ट्रैक्टर से गिरा युवक,  टायर की चपेट में आने से मौत</title>
                                    <description><![CDATA[ उनियारा की ओर से बांसला गांव से होकर इन्द्रगढ़ की ओर तेज स्पीड से अवैध बजरी भरे बजरी परिवहन करने जा रहे एक ट्रैक्टर में बैठकर उनियारा से चौथमल मीना पुत्र रामभजन मीणा व विनोद पुत्र राजाराम जाति निवासी धोली प्याल ट्रैक्टर लेकर उनियारा से इन्द्रगढ़ जा रहे थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/youth-falls-from-tractor-running-at-high-speed--dies-due-to-tire-grip/article-11865"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/101.jpg" alt=""></a><br /><p> सोप। थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह करीब दस बजे को उनियारा की ओर से बांसला गांव से होकर इन्द्रगढ़ की ओर तेज स्पीड से अवैध बजरी भरे बजरी परिवहन करने जा रहे एक ट्रैक्टर में बैठकर उनियारा से चौथमल मीना पुत्र रामभजन मीणा व विनोद पुत्र राजाराम जाति निवासी धोली प्याल ट्रैक्टर लेकर उनियारा से इन्द्रगढ़ जा रहे थे। जैसे ही बांसला गांव के आगे पहुंचे ट्रैक्टर को साइड में खड़ा कर दोनों पेशाब करने नीचे उतरे और जब वापस इन्द्रगढ़ जाने के लिए जैसे ही ट्रैक्टर पर बैठे तो चालक विनोद ने अपना ट्रैक्टर तेज गति एवं लापरवाही पूर्वक चलाया। जिससे ट्रैक्टर के मरगाड़ पर बैठा चौथमल उछलकर ट्रैक्टर के आगे जा गिरा और ट्रैक्टर उपर चढ़ जाने की वजह से मौत हो गई। जानकारी के अनुसार इस हादसे में चौथमल मीना (24) पिता भजन लाल मीना निवासी काशपुरिया नैनवा जिला बूंदी की मृत्यु हो गई। मृतक युवक ट्रैक्टर में उनियारा से सवार होकर इन्द्रगढ़ जा रहा था। इसी दौरान बांसला गांव के पास तेज स्पीड से जा रहे ट्रैक्टर न्यूट्रल होकर जंप लेने लगा तो युवक ट्रैक्टर से उछलकर नीचे सड़क पर जा गिरा। घटना के दौरान हुई तेज आवाज को सुनकर आस पास बैठे ग्रामीण बचाव के लिए दौड़कर मौके पर पहुंचे और तब तक उसके सिर में गहरी चोट आने से मौत हो चुकी थी। दुर्घटना के बाद चालक ट्रैक्टर व ट्राली मौके पर ही छोड़कर भाग निकला। ट्रैक्टर चालक व ग्रामीणों ने घटना की जानकारी सोप थानाधिकारी एएसआई सीताराम गुर्जर को दिए जाने के बाद घटनास्थल पर पुलिस जाब्ता के साथ पहुंचे। एएसआई सीताराम गुर्जर ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर अलीगढ़ सीएचसी में पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद मृतक के शव को परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 12:42:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी कोकस के चलते तिलम संघ ले रहा अंतिम सांसें,167 करोड़ के घाटे में चल रहा तिलम संघ, 151 करोड़ रुपए की देनदारी बकाया</title>
                                    <description><![CDATA[ डेढ़ दशक पहले तक किसानों की लिए वरदान साबित हो रहा तिलम संघ अधिकारियों, कर्मचारियों और सरकारी उदासीनता के चलते मरणासन्न होकर अपनी अंतिम सांसे ले रहा है। स्थिति यह है कि संघ 167 करोड़ के घाटे में है। इस पर 151 करोड़ रुपए की देनदारियां बकाया है। अकेले कोटा में ही बीज उत्पादक किसानों का लगभग 50 लाख रुपए संघ पर बकाया चल रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/tilam-sangh-is-breathing-its-last-due-to-government-caucus--tilam-sangh-is-running-in-loss-of-167-crores--dues-of-rs-151-crore-are-outstanding/article-11536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/31.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। डेढ़ दशक पहले तक किसानों की लिए वरदान साबित हो रहा तिलम संघ अधिकारियों, कर्मचारियों और सरकारी उदासीनता के चलते मरणासन्न होकर अपनी अंतिम सांसे ले रहा है। स्थिति यह है कि संघ 167 करोड़ के घाटे में है। इस पर 151 करोड़ रुपए की देनदारियां बकाया है। अकेले कोटा में ही बीज उत्पादक किसानों का लगभग 50 लाख रुपए संघ पर बकाया चल रहा है। 15 साल पहले हाड़ौती संभाग की पहली |यल मिल से तिलम संघ को अच्छा प्रतिसाद मिला था। किसानों को तिलहनी फसलों के अच्छे दाम मिल रहे थे। एक दशक पहले तक खाद्य तेलों में शुद्धता में अपनी अलग पहचान बना चुका कोटा तिलम संघ अब अंतिम सांसें गिन रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों ने समय के साथ ना तो मशीनों को अपग्रेट किया ना ही व्यवसाय के तरीकों को। धीरे-धीरे तिलम संघ पर 167 करोड़ घाटा हो गया । अब यह बंद होने के कागार पर है।<br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>किसानों के एक करोड़ रुपए अब भी तिलम संघ में अटके</strong></span> <br />किसान नेता व भाजपा देहात जिला अध्यक्ष मुकट नागर ने बताया कि तिलम संघ अपने को बाजार के अनुरूप ढालने में ना कामयाब रहा है। किसानों  के साथ रिश्ते बेहतर नहीं रखने बीज उत्पादन किसानों प्रीमियम राशि समय पर नहीं लौटाने किसानों में तिलम संघ के प्रति रूझान घट रहा है।  2017 से 19 के बीच करीब 50 लाख रुपए बाकी चल रहे है।  इसके अलावा खरीफ के बीज उत्पादन किसानों के वर्ष 2020-21 के करीब 50 लाख रुपए का भुगतान अटका पड़ा है। दोनों भुगतान मिलाकर करीब एक करोड के आसपास किसानों अभी भुगतान बाकी चल रहा है। <br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>तिलम संघ बीज उत्पादन और ग्रेडिंग में नहीं हुआ सफल</strong></span><br />किसान नेता अब्दुल हामिद गौड ने बताया कि तिलम संघ ने अपने वजूद को बचाने के लिए 2008 के बाद से बीज ग्रेडिंग में अपने हाथ अजमाए लेकिन यहां भी कर्मचारियों और किसानों के बीच समन्वय नहीं करने से फेल हो गया।  वर्ष 2016-17 में किसानों ने बीज उत्पादित करके तिलम संघ में 20 हजार क्विंटल गेहूं बीज जमा करवाया था। किसानों को सरकार  प्रति क्विंटल 250 रुपए की प्रीमियम राशि देती है। ऐसे में करीब 5 करोड़ रुपए की राशि नवंबर 2017 में किसानों को दी जानी थी। लंबे समय तक चक्कर कटाने के बाद कुछ किसानों को प्रीमयम राशि दी तो कुछ के अब भी अटकी हुई है। ऐसे में किसानों का तिलम संघ से विश्वास कम होता गया। वर्तमान में तिलम संघ बीजों की ग्रेडिंग कर गेहूं, चना, सरसों, सोयाबीन, उडद का बीज उपलब्ध करा रहा है। लेकिन बाजार में चल रही गला काट प्रतिस्पर्द्वा के आगे तिलम संघ के गुणवत्ता वाले बीज किसानों में गहरी पेठ नहीं बना सके। <br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>दो साल पहले राजफेड में विलय की घोषणा भी अमल नहीं आई</strong></span> <br />काफी समय से घाटे में चल रहे तिलम संघ को 2020 में राजफैड में विलय किए जाने की घोषणा की थी लेकिन उसके बाद ये घोषणा तकनीकी कारणों से मुर्त रूप नहीं ले सकी। उल्लेखनीय है कि 2020 में तिलम संघ को  विलय करने की राज्य सरकार ने मुहर लगा दी थी।  सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने यह घोषणा की थी। लेकिन बाद में कोरोना और कई तकनीकी कारणों से घोषणा मूर्तरूप नहीं ले पार्ई। <br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>1990 में हुई थी स्थापना</strong></span><br /> तिलम संघ की स्थापना 1990 में हुई थी। इसका कार्य सोयाबीन, सरसों, मंूगफली आदि का संग्रहण और प्रोसेसिंग कर विपणन करना है। तिलम संघ के अधीन आठ तेल मिल कोटा, बीकानेर, फतेहनगर, श्रीगंगानगर, जालौर, मेड़तासिटी, गंगापुर सिटी, झुंझुनू में स्थापित की गई थीं। संघ की जालौर, मेड़तासिटी, गंगापुरसिटी, झुंझुनू और बीकानेर इकाईयां लगातार घाटे में चलने के कारण बंद कर दी गई। झुंझुनू और जालौर परियोजना को बेच दिया गया।<br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>1991 से पहले तक  तिलम संघ राजफैड का रहा था अंग</strong></span><br />वर्ष 1991 से पहले तिलम संघ राजफैड का ही अंग था लेकिन विश्व बैंक की शर्तो के आधार पर 1991 में राजफैड से अलग होकर तिलम संघ की स्थापना की गई थी । 18 साल तक तिलम संघ किसानों के उत्पादन का बड़ा खरीदार था। कोटा,श्रीगंगानगर और फतेहनगर आॅयल संयंत्रों से खाद्य तेल का अच्छा उत्पादन होता था । अधिकारियों और कर्मचारियों ने संयंत्रों को अपग्रेट  नहीं किया और बाजार के अनुसार अपने को नहीं ढालने के कारण प्रतिस्पर्द्वा में पिछड़ता गया।  आज प्लांट बंद होने पर पहुंच गया है। <br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>2008 से तीनों ऑयल प्लांट बंद</strong></span> <br />तिलम संघ के वर्ष 2008 से तीनों खाद्य तेल उत्पादन संयत्र कोटा, श्रीगंगानगर एवं फतेहनगर बंद हैं। इन संयत्रों की मशीनरी भी पुरानी हो चुकी है। कोटा के तेल संयत्र को बंद हुए करीब 15 साल हो गए है। कोटा में तेल का पहला प्लांट तिलम संघ का था उसके बाद एक- एक कर आज 12 से अधिक खाद्य तेल उत्पादक प्लांट लगे हुए जो प्रतिदिन 2500 टन खाद्य तेल का उत्पदान कर रहे है ऐसे में सवाल उठता है कि तिलम संघ का अच्छा खास चलता प्लांट अधिकारियों की उदासिनता से आज जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। जहां अन्य आॅयल मिले प्रतिदिन 2500 टन उत्पादन कर रहे वहीं तिलम संघ 200 टन उत्पादन ही करता रहा जिससे बाजार में पिछड़ता गया। मशीनों को अपग्रेट नहीं किया। किसानों के बीच समन्वय और पेठ नहीं बना सका जिससे प्लांट बंद हो गया। <br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>84 कर्मचारियों का होना था समायोजन अब 33 बचे</strong></span> <br />तिलम संघ का 2020 में राजफैड में विलय की प्रक्रिया शुरू हुई तब तिलम संघ के कर्मचारियों का भी राजफैड में ही विलय करना था। तिलम संघ में 2020  में 113 कार्मिक कार्यरत थे। जिसमें से 2021 में  40 कार्मिक  रिटायर हो  गए। ऐसे में शेष बचे 84 कार्मिकों का राजफैड में समायोजन किया जाना था लेकिन दो साल में  तिलम संघ के राजफैड में विलय नहीं हुआ और वर्तमान में जीएम सहित 33 कर्मचारी रह गए है।  तिलम संघ के पास बाजार दर से लगभग 500 करोड़ की संपत्तियां हैं, जो राजफैड में तिलम संघ के विलय होने पर राजफैड के पास आ आएगी। <br /><br />तिलम संघ की ओर से अभी बीज ग्रेडिंग और समर्थन मूल्य पर जिंसों की खरीद का कार्य किया जाता है। तेल प्लांट करीब 15 साल से बंद पड़ा है। मशीने पुरानी होने और अपग्रेट नहीं होने से उत्पादन बंद हो गया था। हमारी लैब तेल का टेस्टिंग कर तिलम संघ ब्रांड नाम से बाजार में सरसों, मूंगफली और सोयाबीन का तेल बिक रहा है। इसके अलावा किसानों से बीज उत्पादन कराकर उसकी ग्रेडिंग का कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में 33 कर्मचारी कार्यरत है। नई भर्ती नहीं हुई है।<strong>- सुनील अग्रवाल, जीएम तिलम संघ कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jun 2022 15:37:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाकाबंदी देख भागते शराब तस्करों की कार पलटी, चालक की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[कपासन। चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन में सांवलियाजी चौराहे पर नाकाबंदी देखकर शराब तस्कर कार वापस मोड़ कर भागने लगे। अस्पताल के बाहर उनकी कार असंतुलित होकर पलट जाने से एक की मौत हो गई, वहीं एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/chittorgarh/seeing-the-blockade-the-car-of-the-running-liquor-smugglers/article-11246"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/qq.jpg" alt=""></a><br /><p><br />न्यूज सर्विस/नवज्योति, कपासन। चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन में सांवलियाजी चौराहे पर शुक्रवार शाम को नाकाबंदी देखकर शराब तस्कर कार वापस मोड़ कर भागने लगे। अस्पताल के बाहर उनकी कार असंतुलित होकर पलट जाने से एक की मौत हो गई, वहीं एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया।</p>
<p><br /> कपासन थाना पुलिस की नाकाबंदी के दौरान चित्तौड़गढ़ की तरफ से एक क्रेटा कार तेज रफ्तार से आई जिसे उसका चालक चौंकन्ना हो गया। उसने कार को बेरिकेट से टकराते हुए पुन: चित्तौड़गढ़ की तरफ मोड़ दिया और तेज रफ्तार से वाहन को भगाने का प्रयास किया। अस्पताल के पास बने गति अवरोधक से कार उछल गई। बाद में बाइक सवार को बचाने के प्रयास में कार असन्तुलित होकर पलट गई। हादसे में चालक राशमी निवासी दीपक पुत्र कन्हैयालाल खटीक गंभीर रूप से घायल हो गया, वहीं उसके पास बैठा कीरखेड़ा निवासी किशनलाल पुत्र उदयराम की मौके पर ही मौत हो गई।  गाड़ी में 51 पेटी बीयर व देशी शराब भरी थी। बताया गया ये दोनों राजमार्ग पर स्थित किसी ठेके से शराब भरकर उदयपुर ले जा रहे थे। सूचना पर डीएसपी गीता चौधरी व थानाधिकारी फूलचंद टेलर मौके पर पहुंचे व घायल को चिकित्सालय पहुंचाया, वहीं मृतक के परिजनों को सूचना दी।  <br /><br /></p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>चित्तौड़गढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jun 2022 13:09:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[udaipur]]></dc:creator>
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                <title> बीकानेर में कछुआ गति से चल रहा है जल जीवन मिशन</title>
                                    <description><![CDATA[जिले में जल जीवन मिशन जेजेएम का काम कछुआ गति से चल रहा है। योजना के तहत वर्ष 2024 तक जिले के हर घर को कवर करना है। हर घर नल कनेक्शन का लक्ष्य प्राप्त करना है मगर अब तक केवल 162 गांवों में योजना की सहयोग राशि प्राप्त की गई है। कलक्ट्रेट सभागार में बुधवार को आयोजित योजना की समीक्षा बैठक में कलक्टर भगवती प्रसाद कलाल ने कहा कि यदि कार्यकारी एजेंसी समयबद्ध समय पर  प्रगति नहीं कर रही हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bikaner/jal-jeevan-mission-is-running-at-tortoise-pace-in-bikaner/article-11099"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/dfasfasdvdfbv-casdfvgsddfvszfv.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बीकानेर।</strong> जिले में जल जीवन मिशन जेजेएम का काम कछुआ गति से चल रहा है। योजना के तहत वर्ष 2024 तक जिले के हर घर को कवर करना है। हर घर नल कनेक्शन का लक्ष्य प्राप्त करना है मगर अब तक केवल 162 गांवों में योजना की सहयोग राशि प्राप्त की गई है। कलक्ट्रेट सभागार में बुधवार को आयोजित योजना की समीक्षा बैठक में कलक्टर भगवती प्रसाद कलाल ने कहा कि यदि कार्यकारी एजेंसी समयबद्ध समय पर  प्रगति नहीं कर रही हैं तो नोटिस जारी किया जाए।  इसके बावजूद भी परिणाम नहीं देने पर सम्बन्धित ठेकेदार का टेंडर रद्द कर नये सिरे से टेंडर जारी किया जाए। जल जीवन मिशन सरकार का एक समयबद्ध महत्वाकांक्षी अभियान है। उन्होंने अब तक हुए कार्य की प्रगति पर असंतोष जताते हुए कहा कि अभी तक प्रगति काफी कम हुई है। अधिकारी रणनीतिक रुप से लोगों तक पहुंचें और सघन जागरुकता गतिविधियों के माध्यम से इसमें आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करवाएं। ताकि लोग इस योजना से जुड़ाव महसूस करते हुए आगे आ कर इसके रखरखाव आदि की जिम्मेदारी ले सकें। योजना में हुए कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश देते हुए कलक्टर कलाल ने कहा कि सभी ब्लॉक में हो रहे कार्यों की नियमित और बारिकी से मानिटरिंग की जाए, गुणवत्ता में किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। कलक्टर ने कहा कि योजना के तहत 2024 तक हर घर को कवर करना है। विशेष रूप से कोलायत ब्लाक पूर्ण सेचुरेशन के लक्ष्य के साथ काम करें।  बैठक में जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी नित्या के, अधीक्षण अभियंता पीएचईडी बलबीर सिंह, जलदाय विभाग के अधिशाषी अभियन्ता नफीस खान, विजय वर्मा, केके डोगरा, जिला एम एंड ई समन्वयक योगेश बिस्सा, स्पोर्ट एजेंसी कर्मचारी  सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>वंचित स्कूलों में लगे नल</strong></p>
<p>कलक्टर ने कहा कि जिले में जहां भी सरकारी विद्यालय इस योजना में कनेक्शन से वंचित हैं उन्हें प्राथमिकता से जोड़ा जाए। आंगनबाड़ी केंद्रों को भी नल से जोड़ें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बीकानेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jun 2022 16:15:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>जेडीबी के सामने वाले घोड़े जल्द ही तालाब में दौड़ते दिखेंगे </title>
                                    <description><![CDATA[ कुछ समय पहले तक जेडीबी कॉलेज के सामने लगे घोड़े शीघ्र ही किशोर सागर तालाब में दौड़ते नजर आएंगे। नगर विकास न्यास ने इसका काम भी शुरू कर दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/horses-in-front-of-jdb-will-soon-be-seen-running-across-the-pond/article-10306"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/jdb-ke-saamne-wale-horse.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । कुछ समय पहले तक जेडीबी कॉलेज के सामने लगे घोड़े शीघ्र ही किशोर सागर तालाब में दौड़ते नजर आएंगे। नगर विकास न्यास ने इसका काम भी शुरू कर दिया है।  कांग्रेस के पिछले शासन काल में नगर विकास न्यास द्वारा जेडीबी कॉलेज के सामने घोड़े लगाए गए थे। उन घोड़ों के बीच-बीच में फव्वारे लगे हुए थे। रात के समय रोशनी से जगमग फव्वारों के बीच लगे घोड़े दौड़ते हुए नजर आते थे। लेकिन अब उन घोड़ों को वहां से हटा दिया है। उनकी जगह पर अब वहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु व लोह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल की आपस में बात करते हुए बैठी हुई मूर्तियां लगाई जाएंगी। जेडीबी कॉलेज के सामने से हटाए गए घोड़ों को अब किशोर सागर तालाब में लगाया जाएगा। न्यास ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। <br /><br /><strong>पानी के नीचे बनेगा पैडेस्टल</strong><br />नगर विकास न्यास के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सत्येश्वर महादेव मंदिर से कोटड़ी चौराहे के बीच तालाब की चार दीवारी से करीब 100 मीटर दूर पानी के अंदर पैडेस्टल बनाया जाएगा। पानी के अंदर करीब 8 मीटर नीचे तक पैडेस्टल बनेगा। वह तालाब में पानी की सतह तक होगा। उस पैडेस्टल पर घोड़ों कीे 9 मूर्तियां लगाई जाएगी। पैडेस्टल बनाने के लिए तालाब के बीच तक जाने का  अस्थायी रास्ता बनाने का काम शुरू हो गया है। लकड़ी की पाल बनाई जा रही है। जहां तक वह पाल है उसी जगह पर पैडेस्टल बनाया जाएगा। <br /><br /><strong>चार करोड़ से हो रहा काम</strong><br />नगर विकास न्यास द्वारा करीब 4 करोड़ रुपए से यह काम कराया जा रहा है। इस काम को शुरू कर दिया है। जिसके पूृरा होने में करीब दो माह का समय लगेगा। <br /><br /><strong>चार दीवारी हटाकर लोहे की रैलिंग लगना शुरू</strong><br />न्यास सूत्रों के अनुसार सत्येश्वर महादेव मंदिर से कोटड़ी चौराहे तक सड़क की साइड पर बनी करीब 3 फीट की चार दीवारी को हटाया जा रहा है। उसके स्थान पर करीब 4 फीट ऊंचाई कीे लोहे की रैलिंग लगाई जा रही है। जिससे उस रोड से गुजरने वालों को तालाब में घोड़े आसानी से नजर आ सकेंगे।  वहीं कुछ लोगों का कहना है कि तालाब की पाल की चार दीवारी सही बनी हुई है। उसे जबरन हटाकर जनता के धन का दुरूपयोग किया जा रहा है। जबकि लोहे की रैलिंग लगाने का कोई लाभ नहीं होगा। पहले भी स्मैकची लोहे की रैलिंग को चोरी कर ले जा चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 17:19:51 +0530</pubDate>
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