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                <title>Electoral Integrity - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Electoral Integrity RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: मतदाता सूची से नाम हटाने के मामले में मुर्शिदाबाद सबसे अधिक प्रभावित, साढ़े चार लाख से अधिक मतदाताओं के कटे नाम </title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के बाद मुर्शिदाबाद सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। चुनाव आयोग ने राज्य भर में कुल 90.8 लाख नाम हटाए हैं, जिनमें से अकेले मुर्शिदाबाद के 4.5 लाख मतदाता शामिल हैं। इस बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई ने राज्य की सियासत और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर नई बहस छेड़ दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/murshidabad-is-the-most-affected-in-the-case-of-removal/article-149822"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/west-bengal2.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में मतदाताओं का नाम हटाए जाने के मामले में मुर्शिदाबाद जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, जहां साढ़े चार लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग की ओर से जारी जिलावार आंकड़ों के अनुसार, मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 74,775 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी यही स्थिति है, जहां लालगोला में 55,420, रघुनाथगंज में 46,100 से अधिक, फक्का में 38,222 और सूती में 37,965 नाम हटाए गए हैं। मतदाताओं के नाम हटाने के मामले में मुर्शिदाबाद राज्य का सबसे अधिक प्रभावित जिला बनकर उभरा है, जहां कुल 4,55,137 नाम हटाए गए हैं। डोमकल, जंगीपुर, खरग्राम और भगवानगोला में भी 30 से 50 हजार के बीच नाम हटाए गए हैं।</p>
<p>अधिकारियों के अनुसार, लगभग 60 लाख नामों को 'विचाराधीन' श्रेणी में रखा गया था, जिसकी जांच करीब 700 न्यायिक अधिकारियों ने की। इनमें से 27,16,393 नाम हटा दिए गए हैं, जिससे राज्य में हटाए गए मतदाताओं की कुल संख्या 90,83,345 हो गई है। इसके अलावा, मालदा जिले के सुजापुर में 26,829 नाम हटाए गए हैं। उत्तर दिनाजपुर के चोपड़ा में 27,898 और इस्लामपुर में 15 हजार से अधिक नाम सूची से बाहर हुए हैं। दक्षिण 24 परगना के मटियाबुर्ज में 39,579 नाम हटाए गए, जबकि कैनिंग पूर्व, बसंती और गोसाबा में भी हजारों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसके विपरीत, भांगड़ में यह संख्या अपेक्षाकृत कम 2,183 रही।</p>
<p>कोलकाता में भी इस प्रक्रिया का व्यापक असर दिखा है। कोलकाता पोर्ट में 13,395, चौरंगी में 10,424, बेलेघाटा में 9,532 और एंयली में 9,092 नाम हटाए गए। भवानीपुर में 3,893 और बालीगंज में 6,174 नाम हटाए गए, जबकि मानिकतला में सबसे कम 733 नाम हटाए गए। पश्चिम वर्धमान के आसनसोल उत्तर, कुल्टी और बाराबनी में 10,000 से 14,000 के बीच नाम हटाए गए हैं। कुल मिलाकर चुनाव आयोग के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि राज्य के कई निर्वाचन क्षेत्रों में 30,000 से 70,000 तक नाम हटाए गए हैं। विशेष रूप से अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों और मुर्शिदाबाद एवं मालदा जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई ने एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Apr 2026 14:04:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पुडुचेरी विधानसभा चुनाव: पीएमएमएमके ने 9 अप्रैल को होने वाले चुनावों का बहिष्कार करने का किया फैसला, केंद्र सरकार कार्रवाई करने में विफल</title>
                                    <description><![CDATA[पीएमएमएमके ने 9 अप्रैल को होने वाले पुडुचेरी विधानसभा चुनावों के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान किया है। संस्थापक प्रो. एम. रामदास ने 14 वर्षों से स्थानीय निकाय चुनाव न होने, पूर्ण राज्य के दर्जे की कमी और चुनावी राजनीति में धनबल के प्रभाव को मुख्य कारण बताया। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और क्षेत्रीय पहचान की रक्षा के लिए एक कड़ा विरोध करार दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/puducherry-assembly-elections-pmmmk-decides-to-boycott-elections-to-be/article-147724"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/puducherry1.png" alt=""></a><br /><p>पुडुचेरी। पुडुचेरी मानिला मक्कल मुन्नेत्र कझगम (पीएमएमएमके) ने मंगलवार को केंद्र शासित प्रदेश में लोकतांत्रिक सिद्धांतों के लगातार हो रहे हनन के विरोध में नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करने का फैसला किया है। पीएमएमएमके के संस्थापक-अध्यक्ष प्रो. एम. रामदास ने यहाँ जारी एक बयान में कहा कि पुडुचेरी में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को सुनियोजित तरीके से कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों जो शासन का तीसरा स्तर हैं, के चुनाव 2011 से अब तक नहीं कराए गए हैं। पिछले 14 वर्षों से एक के बाद एक आने वाली सरकारों ने लोगों को पंचायत और नगरपालिका स्तर पर अपने प्रतिनिधियों को चुनने के उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित रखा है। पीएमएमएमके द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों के बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।</p>
<p>रामदास ने कहा, "हमें मजबूर होकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा, जिसने हमारी याचिका स्वीकार कर ली और अधिकारियों से जवाब मांगा है। हालाँकि, अनुचित जल्दबाजी दिखाते हुए चुनाव आयोग ने अदालत को जवाब देने से पहले ही विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया। हमारा दृढ़ विश्वास है कि लोकतंत्र की शुरुआत जमीनी स्तर से होनी चाहिए और स्थानीय निकायों के चुनाव न कराना विधानसभा चुनाव को मौलिक रूप से दोषपूर्ण बना देता है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, पुडुचेरी विधानसभा आज बिना किसी वास्तविक शक्ति के काम कर रही है। वर्तमान केंद्र शासित प्रदेश के ढांचे के तहत सत्ता केंद्र सरकार के हाथों में केंद्रित है और इसका प्रयोग उपराज्यपाल के माध्यम से किया जाता है। मुख्यमंत्री और मंत्रियों सहित चुनी हुई सरकार के पास वह स्वायत्तता नहीं है जो पूर्ण राज्यों को प्राप्त होती है। तीन दशकों से अधिक समय से राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर विधानसभा में 100 से अधिक प्रस्ताव पारित होने के बावजूद केंद्र सरकार कार्रवाई करने में विफल रही है।</p>
<p>रामदास ने आगे कहा, "ऐसे चुनाव में भाग लेना केवल उसी व्यवस्था को वैधता प्रदान करना होगा जो वास्तविक लोकतांत्रिक सत्ता से वंचित करती है। हमारा बहिष्कार राज्य का दर्जा और लोकतांत्रिक अधिकारों से लगातार वंचित रखे जाने के खिलाफ एक मजबूत विरोध है।" उन्होंने तीसरी बात कहते हुए कहा कि पुडुचेरी में चुनावी राजनीति अब पूरी तरह से पैसे के जोर पर चलने वाली कवायद बनकर रह गई है। चुनाव अब विचारों, नीतियों या जन कल्याण की प्रतिस्पर्धा नहीं रहे, बल्कि वित्तीय शक्ति की होड़ बन गए हैं। हम ऐसी व्यवस्था का हिस्सा बनने से इनकार करते हैं जहाँ जीत का फैसला पैसा करता हो। इसके बजाय हम लोगों के बीच जागरूकता पैदा करना चाहते हैं ताकि वे वोट खरीदने और भ्रष्टाचार को नकारें तथा सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और शुचिता को बनाए रखें।</p>
<p>रामदास ने यह भी कहा कि पुडुचेरी नागरिकता आदेश, 1962 के तहत केवल उन्हीं व्यक्तियों को जिनका 1962 से पहले पुडुचेरी के साथ जन्म, माता-पिता या निवास के आधार पर कोई वास्तविक जुड़ाव था, इस क्षेत्र के ऐतिहासिक और कानूनी संदर्भ में नागरिक के रूप में मान्यता दी जाती है।</p>
<p>हालांकि, व्यवहार में चुनाव आयोग इस सिद्धांत की अनदेखी करते हुए भारत के किसी भी राज्य के किसी भी नागरिक को पुडुचेरी में चुनाव लड़ने की अनुमति दे देता है। यह पुडुचेरी के लोगों की विशिष्ट राजनीतिक पहचान और अधिकारों को कमजोर करता है। हमारा दृढ़ मत है कि पुडुचेरी के साथ वैध और मान्यता प्राप्त जुड़ाव रखने वाले लोग ही यहाँ चुनाव लड़ने के पात्र होने चाहिए। रामदास ने कहा कि जब तक इस सिद्धांत का सम्मान और पालन नहीं किया जाता, तब तक चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी को उचित नहीं ठहराया जा सकता। इन्हीं कारणों को देखते हुए हमारी पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 17:11:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मतदाता सूची विवाद: पश्चिम बंगाल में SIR के लिए 9 मार्च को 200 न्यायाधीश संभालेंगे कार्यभार, मतदाता सूची की विसंगतियों से जुड़े मामलों का करेंगे निपटारा</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में सुधार हेतु ओडिशा और झारखंड से 200 न्यायाधीश 7 मार्च को कोलकाता पहुंचेंगे। ये न्यायिक अधिकारी 60 लाख लंबित प्रविष्टियों और तथ्यात्मक विसंगतियों की जांच करेंगे। विधानसभा चुनाव से पूर्व पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए कुल 732 जज इस विशेष अभियान की कमान संभालेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/200-judges-will-take-charge-for-sir-in-west-bengal/article-145482"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/benbal-sir.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में विसंगतियों को दूर करने में सहायता के लिये ओडिशा और झारखंड के लगभग 200 न्यायाधीश इस सप्ताह यहां पहुंचेंगे। चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि ओडिशा और झारखंड से 100-100 न्यायाधीशों के सात मार्च को पश्चिम बंगाल पहुंचने की उम्मीद है। ये न्यायिक अधिकारी एसआईआर के तहत तैयार की गयी मतदाता सूची में तथ्यात्मक विसंगतियों से संबंधित मामलों की जांच और उनका निपटारा करेंगे।</p>
<p>राज्य में पहुंचने के बाद न्यायाधीश दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेंगे और फिर नौ मार्च से अपना कार्यभार संभालेंगे। उनके काम शुरू करने के बाद, पूरे पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की विसंगतियों से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए कुल 732 न्यायाधीश तैनात होंगे।</p>
<p>आयोग के सूत्रों के अनुसार, बाहर से आने वाले न्यायाधीशों के ठहरने की व्यवस्था कोलकाता के प्रमुख स्थानों जैसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, सियालदह रेलवे स्टेशन और हावड़ा रेलवे स्टेशन के पास की गई है। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में मामलों के त्वरित निपटारे के लिए कुछ न्यायाधीशों को वर्धमान, आसनसोल, खडग़पुर और सिलीगुड़ी जैसे महत्वपूर्ण जिलों में तैनात किया जाएगा।</p>
<p>मतदाता सूची की विसंगतियों को सुलझाने के मुद्दे पर राज्य प्रशासन और चुनाव आयोग के बीच चल रहे विवाद पर उच्चतम न्यायालय द्वारा असंतोष जताए जाने के बाद न्यायिक अधिकारियों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है। न्यायालय ने निर्देश दिया था कि इस मामले को न्यायिक हस्तक्षेप के माध्यम से सुलझाया जाए।</p>
<p>न्यायालय के निर्देशानुसार, विसंगतियों के निपटारे का कार्य कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। न्यायालय ने इस कार्य के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की भी अनुमति दी है। इसी क्रम में, कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल ने न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति से पहले राज्य प्रशासन और चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कीं।</p>
<p>उच्चतम न्यायालय ने यह भी संकेत दिया था कि यदि आवश्यकता हुई तो अन्य राज्यों से भी अतिरिक्त न्यायाधीश बुलाए जा सकते हैं। इसके बाद ही ओडिशा और झारखंड से न्यायिक अधिकारियों की मांग की गई। सूत्रों का कहना है कि काम का बोझ बढऩे पर इन राज्यों से और भी न्यायाधीश बुलाए जा सकते हैं। एसआईआर के तहत संशोधित मतदाता सूची का पहला चरण 28 फरवरी को प्रकाशित किया गया था। हालांकि, यह सूची अभी भी अधूरी है क्योंकि लगभग 60 लाख मतदाताओं की प्रविष्टियों को विचाराधीन रखा गया है।</p>
<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण अब यह अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या इन मामलों का समय पर समाधान हो पाएगा और क्या वे मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे। इस बीच, चुनाव की तैयारियों के हिस्से के रूप में केंद्रीय सशस्त्र बल पहले ही राज्य में पहुंच चुके हैं और कई जिलों में रूट मार्च कर रहे हैं। इसी क्रम में राजनीतिक हलचल को बढ़ाते हुए चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ चुनावी तैयारियों और मतदाता सूची संशोधन की प्रगति की समीक्षा करने के लिए आठ मार्च को पश्चिम बंगाल पहुंचने वाली है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2026 17:37:31 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट का आर्टिकल 142 का उपयोग: बंगाल चुनाव से पहले 'पूर्ण न्याय' का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपनी खास शक्तियों का इस्तेमाल किया ताकि यह पक्का किया जा सके कि प्रोसेस की टाइमलाइन की वजह से पश्चिम बंगाल में कोई भी योग्य वोटर वोटर रोल से छूट न जाए, और राज्य विधानसभा चुनावों से पहले यह एक बहुत बड़ा दखल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-courts-use-of-article-142-to-order-complete-justice/article-144398"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/supreme-court-of-india.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सशक्त बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह सुनिश्चित किया कि समय सीमा की बाधाओं के कारण कोई भी पात्र मतदाता मताधिकार से वंचित न रहे।</p>
<p><strong>सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट और ज्यूडिशियल मैनपावर</strong></p>
<p>अदालत ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद भी सप्लीमेंट्री (पूरक) लिस्ट जारी रखी जाए। यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में 'लॉजिकल डिसकम्पेन्सी' जैसे तकनीकी कारणों से लगभग 80 लाख मामलों का निपटारा होना अभी बाकी है। कोर्ट ने माना कि मौजूदा गति से इन दावों को निपटाने में 80 दिन लग सकते हैं, जो चुनाव की संभावित तारीखों के हिसाब से बहुत अधिक है।</p>
<p>काम में तेजी लाने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को झारखंड और ओडिशा के मौजूदा व सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की मदद लेने का अधिकार दिया गया है। कोर्ट ने इसे "युद्ध स्तर पर" पूरा करने का निर्देश दिया है।</p>
<p><strong>चुनावी शुद्धता और समावेशिता</strong></p>
<p>बेंच ने स्पष्ट किया कि पहचान के सबूत के तौर पर आधार, एडमिट कार्ड और सर्टिफिकेट मान्य रहेंगे। इस हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच "भरोसे की कमी" को पाटते हुए मतदाता सूची की पवित्रता बनाए रखना है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अनुच्छेद 142 के तहत दिए गए इन निर्देशों को भविष्य के लिए 'मिसाल' (Precedent) नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह केवल बंगाल की "असाधारण स्थिति" के लिए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 14:11:51 +0530</pubDate>
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                <title>बंगाल वोटर लिस्ट विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल SIR को ज्यूडिशियल निगरानी में रखा, माइक्रो-ऑब्जर्वर पर भी आपत्ति जताई</title>
                                    <description><![CDATA[ममता बनर्जी सरकार ने आयोग को पर्याप्त संख्या में ग्रुप-B अधिकारी उपलब्ध कराए हैं। सरकार ने चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर पर भी आपत्ति जताई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bengal-voter-list-controversy-supreme-court-puts-bengal-sir-under/article-143962"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/sc.png" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल। एसआईआर को लेकर पूरे देश में विवाद खड़ा हुआ है जिसको लेकर अलग अलग जगहों पर अलग अलग पार्टियों ने मिलकर विरोध प्रदर्शन किया। इसी बीच पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी गतिरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए शुक्रवार 20 फरवरी को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने निर्देश देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मौजूदा या सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों (ADJs) को नियुक्त करें।</p>
<p><strong>संवैधानिक संस्थाओं के बीच 'भरोसे की कमी'</strong></p>
<p>अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, राज्य सरकार और भारत निर्वाचन आयोग के बीच "दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप" और भरोसे की भारी कमी के कारण उसके पास न्यायिक हस्तक्षेप के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। यह विवाद मुख्य रूप से इस बात पर था कि क्या ममता बनर्जी सरकार ने आयोग को पर्याप्त संख्या में ग्रुप-B अधिकारी उपलब्ध कराए हैं। सरकार ने चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर पर भी आपत्ति जताई थी।</p>
<p><strong>निष्पक्षता के लिए न्यायिक हस्तक्षेप</strong></p>
<p>इसके आगे सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के दावों पर निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक अधिकारी Logical Error की श्रेणी में लंबित मामलों का निपटारा करेंगे। पीठ ने कलकत्ता हाई कोर्ट के सीजे से अनुरोध किया कि वे ईमानदार अधिकारियों का चयन करें, जिन्हें राज्य सरकार और माइक्रो-ऑब्जर्वर सहयोग देंगे। साथ ही, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को इन टीमों को पूर्ण लॉजिस्टिक सहायता प्रदान करने का आदेश दिया गया है।</p>
<p><strong>समयसीमा और सुरक्षा</strong></p>
<p>अदालत ने निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी है, जबकि शेष दावों के लिए सप्लीमेंट्री लिस्ट बाद में जारी की जा सकती है। इसके अलावा, राज्य के डीजीपी को उन शिकायतों पर हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है जिनमें पुनरीक्षण अधिकारियों को धमकियां मिलने की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले कोर्ट में पेश होकर आरोप लगाया था कि चुनाव से पहले राज्य को निशाना बनाया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 16:56:04 +0530</pubDate>
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