<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/quarters/tag-72516" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>quarters - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/72516/rss</link>
                <description>quarters RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>असर खबर का : एमबीएस अस्पताल में नशेड़ियों के अड्डे बने 17 खंडहर क्वार्टर ढहाने का काम शुरू, 14 जमींदोज</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति ने खबर प्रकाशित  कर जर्जर  इमारतों से होने वाले खतरों पर आगाह किया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--demolition-work-begins-on-17-dilapidated-quarters-at-mbs-hospital%E2%80%94which-had-become-dens-for-drug-addicts%E2%80%94with-14-already-razed-to-the-ground/article-151936"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/asar-khabar-ka--mbs-aspatal-mein-nashediyon-k-adde-bane-17-khandahar-kvaartar-dhahaane-ka-kam-shuru,-14-jamendoj...kota-news-28.04.2026.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल परिसर में सालों से सुरक्षा और स्वच्छता के लिए सिरदर्द बने खंडहर सरकारी आवासों (सर्वेन्ट क्वार्टर्स) पर आखिरकार प्रशासन का डंडा चल गया है। लंबे समय से चल रही खींचतान और फाइलों के चक्कर के बाद, अस्पताल प्रशासन द्वारा बजट जारी करते ही सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इन खतरनाक ढांचों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। दैनिक नवज्योति के 21 फरवरी को प्रकाशित अंक में ''सर्वेन्ट क्वार्टर्स खाली, कंटकों ने आबाद कर डाला'' शीर्षक से प्रकाशित खबर में जर्जर व खाली पड़ी इमारतों से होने वाले खतरों पर आगाह किया था। जिसके तुरन्त बाद 24 फरवरी को ही अस्पताल प्रशासन ने 5लाख 70 हजार राशि का चैक पीडब्ल्यूडी को सौप दिया था। जिसके बाद पीडब्ल्यूडी ने प्रकिया के तहत इन्हे हटाने का काम चालू कर दिया।</p>
<p><strong>खतरें से मुक्ति, भूमि विकास के लिये</strong><br />अस्पताल प्रशासन ने बताया कि अस्पताल लगातार विकसीत हो रहा है। जर्जर भवनों के हटने के बाद खाली हुई जमीन को अस्तपताल की भावी जरूरतों के लिये इस्तेमाल किया जा सकेगा। साथ यहां होने वाली गंदगी से भी निजात मिलेंगी। साथ ही किसी भी प्रकार की संभावित जान माल के खतरा भी समाप्त हो गया।</p>
<p><strong>17 में से 14 क्वार्टर गिराए गए</strong><br />सर्वे के अनुसार, परिसर में कुल 17 आवास ऐसे चिह्नित किए गए थे जो पूरी तरह रहने लायक नहीं थे और ढहने की कगार पर थे। ताजा जानकारी के अनुसार, अब तक इनमें से 14 क्वार्टर्स को सफलतापूर्वक गिरा दिया गया है बाकी बचे 3 ढांचों को भी जल्द ध्वस्त करने की तैयारी है।</p>
<p><strong>15 दिन पहले शुरू हुआ एक्शन</strong><br />अस्पताल प्रशासन ने इन खंडहरों को हटाने के लिए 5 लाख 70 हजार की राशि पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित की। प्रशासन का उद्देश्य इन असुरक्षित ढांचों को खत्म कर परिसर को असामाजिक तत्वों से मुक्त कराना है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारीयों ने बताया कि साल भर पहले ही इन्हे गिराने का प्रस्ताव मिला था। जिसके बाद हमारी तरफ से एस्टीमेट बनाया गया था। 24 फरवरी को हमे आंकलित राशि का चैक मिलने के बाद इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी अप्रेल के पहले सप्ताह से ठेकेदार ने इन्हे गिराने का काम शुरू कर दिया है। पिछले 15 दिनों से इन जर्जर मकानों को गिराने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।</p>
<p>हमने 17 गिराने योग्य क्वार्टर्स में से 14 को अब तक हटा दिया है। इस सप्ताह के भीतर बाकी बचा काम भी पूरा कर लिया जाएगा। पीडब्ल्यूडी इन निर्माणों को गिराने के बाद पूरी जमीन को समतल करके अस्पताल प्रशासन को सौंप देगी।<br /><strong>-अशोक सनाढ्य, अधिशाषी अभियंता (प्रोजेक्ट खंड), पीडब्ल्यूडी कोटा</strong></p>
<p> भवनों की उम्र पुरी हाे चुकी थी इसिलिये पीडब्ल्यूडी के द्वारा इन्हें हटवाया गया है। आगे जाे भी आवश्यकता पड़ेगी उस हिसाब से काम करवाया जायेगा।<br /><strong>-डॉ. धर्मराज मीणा अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--demolition-work-begins-on-17-dilapidated-quarters-at-mbs-hospital%E2%80%94which-had-become-dens-for-drug-addicts%E2%80%94with-14-already-razed-to-the-ground/article-151936</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--demolition-work-begins-on-17-dilapidated-quarters-at-mbs-hospital%E2%80%94which-had-become-dens-for-drug-addicts%E2%80%94with-14-already-razed-to-the-ground/article-151936</guid>
                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:30:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-04/asar-khabar-ka--mbs-aspatal-mein-nashediyon-k-adde-bane-17-khandahar-kvaartar-dhahaane-ka-kam-shuru%2C-14-jamendoj...kota-news-28.04.2026.jpg"                         length="1882185"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सर्वेन्ट क्वार्टर्स खाली, कंटकों ने आबाद कर डाला</title>
                                    <description><![CDATA[17 आवास पूरी तरह से खण्डहर बन चुके हैं, 10 मरम्मत योग्य हैं ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/servant-quarters-empty--vermin-infested/article-144052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल परिसर के सरकारी आवासीय कॉलोनी की बदहाल स्थिति ने स्थानीय निवासियों और अस्पताल कर्मचारियों के लिए सुरक्षा में गंभीर समस्या पैदा कर दी है। अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई ध्यान न दिए जाने के कारण यह सरकारी आवास खण्डहरों में तब्दील हो चुके है। यहाँ रहने वाले परिवारों ने इन्हें पूरी तरह से छोड़ दिया  है। एक समय ये आवास चिकित्सकों और अस्पताल कर्मचारियों के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब इनकी हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि इनमें रहने की संभावना न के बराबर है। कर्मचारयों के यहां से जाने के बाद इन्हे तुड़वाने का एस्टीमेट बनाने के लिये सार्वजनिक निर्माण विभाग को कहा गया लेकिन तभी से यह खाली घर और भी जानलेवा हो चुके हे।</p>
<p><strong>खण्डहर में तब्दील आवासों की खौफनाक तस्वीर</strong><br />अस्पताल परिसर में 64 सरकारी आवासों में से 35 आवासों की संख्या आवंटित की गई थी। हालांकि, इनमें से 17 आवास पूरी तरह से खण्डहर बन चुके हैं, 10 मरम्मत योग्य हैं और 7 ही ऐसे हैं जो किसी तरह रहने योग्य माने जा सकते हैं। इन खण्डहरों के अंदर की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि दीवारें, छतें और अन्य संरचनाएं गिरने का खतरा बनी रहती हैं। अस्पताल प्रशासन ने इन आवासों को पूरी तरह छोड़ दिया है, जिससे न केवल आवासीय कॉलोनी, बल्कि आसपास के लोग भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।</p>
<p><strong>नशेड़ियों से सुरक्षा को गम्भीर खतरा</strong><br />नशा मुक्ति केन्द्र के पास स्थित खाली आवासीय ढांचे दिन भर दवाई लेने आने वाले लोगों से भरे रहते हैं, लेकिन रात के समय ये खाली मकान नशे के आदि लोगों के आश्रय स्थल में बदल जाते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्मैक और इंजेक्शन से नशा करने वाले नशेड़ियों की टोलियां यहाँ मंडराती रहती हैं और कभी-कभी अपने साथ महिलाओं को भी लेकर आती हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि इन खंडहरों में नशेड़ी गैंग के जमा होने से कई सुरक्षा खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। खाली मकानों की दीवारें गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है, साथ ही इन जगहों पर चोरी और अन्य अपराध की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इसके चलते अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन खंडहरों को नशेड़ी और स्मैकचियों का अड्डा बनने से न केवल चोरी और अव्यवस्था बढ़ी है, बल्कि यह सामाजिक और मानसिक सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।</p>
<p><strong>झाड़ियां और पेड़ों से बढ़ता जंगली जानवरों का खतरा</strong><br />परिसर में स्थित इस क्षेत्र में काफी घनी झाड़ियाँ उग आई है यहां पुराने पेड़ होने से घना जंगल बन गया है अभाी हाल ही में यहां सांभर नजर आ रहा है ।साथ ही जहरीले सांप, बिच्छू और गिरगिट जैसे खतरनाक जानवरों की उपस्थिति से क्षेत्र के निवासियों के लिए खतरा बढ़ गया है। खासकर बरसात के मौसम में इस समस्या में वृद्धि हो जाती है। इन जानवरों के कारण, न केवल अस्पताल परिसर में रहने वाले लोग, बल्कि आसपास के नागरिक भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।</p>
<p><strong>मोर्चरी की टूटी सड़क पर फैला सीवरेज का पानी</strong><br />इन्ही खाली पड़े आवासों के पास नयी मोर्चरी भवन की शुरूआत की गयी थी । ऐसे में यहां आने वाले परिजनों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है इस सड़क के दोनों और मिट्टी और कंस्ट्रक्शन का मलबा पड़ा हुआ है । साथ ही नयी क्वार्टरर्स के पास सड़क पर ही सीवरेज का पानी जमा हुआ रहता है।</p>
<p><strong>चुप्पी तुड़वाने  में ही लग गये 2 साल</strong><br />अस्पताल प्रशासन भले ही खण्डहर हो चुके आवासों की जगह नये आवास बनाने के लिये प्रक्रिया प्रारम्भ करने की बात कह रहा है लेकिन पिछले ढ़ाई सालों से अव्यवस्थाओं के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। अन्य डुप्लेक्स आवासों में रह रहे स्टाफ इस स्थिति से परेशान हैं और उनका कहना है कि अगर प्रशासन जल्द ही इस पर ध्यान नहीं देता, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है। खण्डहर आवासों की मरम्मत और रख-रखाव की प्रक्रिया तुरंत शुरू करनी चाहिए। साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार, साफ-सफाई की व्यवस्था, और जहरीले जानवरों से सुरक्षा के लिए यहां की जंगली झाड़ियां कटवाकर सफाई हेतु कदम उठाए जाने चाहिए।</p>
<p> साल 2012 से इन क्वार्टरर्स में रह रहा था, करीब 14 पैड़ अमरूद 3 पेड़ आम के लगायें थे । जबसे यहां पर नशामुक्ति केन्द्र चालू हुआ तब से एक एक करके सारे आवास खाली हो गये। सारी रौनक खत्म हो गयी।<br /><strong>-कमलेश, निवासी के आर 221</strong></p>
<p> मै यहां सालों से नौकरी करता हूँ, यहां सबकुछ ठीक ठाक था सुख दु:ख में साथ देते थे। अब केवल दिन में मोर्चरी को आने वाले लोग नजर आते है रात के समय चारो तरफ अनजान नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है ।<br /><strong>-अफजल इलेक्ट्रिशियन पीएचड़ी पम्प हाउस</strong></p>
<p>इन क्वार्टर्स को नये सिरे से तैयार करवाने की और हमारा ध्यान हे इसके लिये पी डब्ल्यूडी से एस्टीमेट के लिये कहा गया है,इसके बाद ही बताया जा सकता है कि इस जगह का क्या उपयोग हो सकता है ।<br /><strong>-डा. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>
<p>इन खण्डहर आवासों जो बिल्कुुल भी रहने योग्य नहीं है इनके ध्वस्तीकरण के लिये हमनें एस्टीमेट बना दिया है, निर्णय पर आने की कार्यवाही हमारे स्तर पर की जायेगी।<br /><strong>-अशोक सनाढ्य अधिशाषी अभियन्ता प्रोजेक्ट खंड पीडब्ल्यूडी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/servant-quarters-empty--vermin-infested/article-144052</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/servant-quarters-empty--vermin-infested/article-144052</guid>
                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 14:30:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/1200-x-600-px%29-%284%295.png"                         length="1537445"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        