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                <title>TMC Leader - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>TMC के पूर्व विधायक आशीष बनर्जी ने की आत्महत्या: पार्टी कार्यालय से शव बरामद, मौके से कथित सुसाइड मिला नोट</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी का शव बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित टीएमसी पार्टी कार्यालय में फांसी के फंदे से लटका पाया गया। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसकी मदद से मौत से जुड़े कारणों की गहन जांच की जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/former-tmc-mla-ashish-banerjee-committed-suicide-body-recovered-from/article-163036"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/tmc.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्विम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष एवं बीरभूम के रामपुरहाट से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व विधायक आशीष बनर्जी रविवार को पार्टी कार्यालय में फांसी के फंदे से लटके पाए गए। पुलिस ने रामपुरहाट के वार्ड पांच में हत्तला पाड़ा स्थित पार्टी कार्यालय से उनका शव बरामद किया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सूत्रों के मुताबिक घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है। पुलिस उनकी मौत से जुड़ी परिस्थितियों और नोट में लिखी बातों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या बनर्जी ने आत्महत्या की थी और अगर ऐसा है, तो उन्हें ऐसा कदम उठाने के लिए किस बात ने मजबूर किया।</p>
<p>टीएमसी के वरिष्ठ नेता बनर्जी 2001 से 2021 तक लगातार रामपुरहाट से विधायक चुने गए थे। पार्टी ने उन्हें 2026 के विधानसभा चुनाव में मैदान में उतारा था, लेकिन वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार ध्रुव साहा से 24,000 से ज़्यादा वोटों से हार गए थे। उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार के कार्यकाल के दौरान पश्चिम बंगाल विधानसभा के उपाध्यक्ष के तौर पर काम किया और स्कूल शिक्षा व कृषि जैसे मंत्रालयों का जिम्मा संभाला। बनर्जी पार्टी के पूर्व ज़िला अध्यक्ष अनुब्रत मंडल के कार्यकाल के दौरान बीरभूम टीएमसी की राजनीति से जुड़े रहे थे। उन्हें रामपुरहाट में 2022 के बोगतुई नरसंहार के बाद राजनीतिक जांच-पड़ताल का भी सामना करना पड़ा था।</p>
<p>वह 2026 में राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद राजनीति में बहुत ज़्यादा सक्रिय नहीं दिखे। उनकी मौत ऐसे समय में हुई है जब पार्टी में राजनीतिक उथल-पुथल का दौर चल रहा है। कई पूर्व विधायकों और पार्षदों पर भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण कार्रवाई हो रही है और पार्टी का एक धड़ा पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के नेता अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व से दूर हो रहा है। पुलिस अब बनर्जी की मौत के हालात की जांच कर रही है, जिसमें कथित सुसाइड नोट की बातें और मौत की वजह बनने वाली कोई भी बात शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 11:57:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>''बंगाल राजनीति का चाणक्य'' कहे जाने वाले मुकुल रॉय का निधन; 71 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, टीएमसी ने जताया शोक</title>
                                    <description><![CDATA[वयोवृद्ध नेता मुकुल रॉय का 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्य और पूर्व रेल मंत्री रॉय को बंगाल की चुनावी राजनीति का माहिर रणनीतिकार माना जाता था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mukul-roy-known-as-chanakya-of-bengal-politics-passed-away/article-144218"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/mukul-roy-dies.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ राजनेता एवं विधायक मुकुल रॉय का रविवार देर रात कोलकाता में निधन हो गया। वह 71 साल के थे। रॉय का लंबे समय से शहर के एक निजी अस्पताल में गुर्दे से जुड़ी दिक्कतों समेत कई बीमारियों का इलाज चल रहा था। मुकुल रॉय को इलाज के दौरान दिल का दौरा पड़ा था। उनके निधन से पूरे राजनीतिक माहौल में मातम छा गया है।     </p>
<p>मुकुल रॉय के निधन की खबर आने के तुरंत बाद, तृणमूल कांग्रेस के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक उनके घर के बाहर जमा होने लगे। पार्थिव शरीर को दोपहर में पश्चिम बंगाल विधानसभा ले जाया जाएगा, जहां अध्यक्ष और विधायकों के अंतिम दर्शन करने की उम्मीद है। बाद में पार्थिव शरीर को कांचरापाड़ा में उनके घर ले जाया जाएगा। मुकुल रॉय को अक्सर बंगाल राजनीति का चाणक्य कहा जाता है। वह कई सालों से सेहत से जुड़ी दिक्कतों से जूझ रहे थे और अक्सर अस्पताल में भर्ती रहते थे।</p>
<p>उनके हाल के सालों में राजनीतिक करियर में कई उतार-चढ़ाव आए। तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद उन्होंने 2021 का विधानसभा चुनाव कृष्णानगर उत्तर से भाजपा के टिकट पर लड़ा और जीत हासिल की। बाद में वह तृणमूल कांग्रेस में लौट आए लेकिन उन्होंने अपने विधायक पद से इस्तीफ़ा नहीं दिया और रिकॉर्ड में भाजपा विधायक बने रहे। बाद में उन्हें लोक लेखा समिति का अध्यक्ष बनाया गया।</p>
<p>रॉय की विधायकी को रद्द करने की कानूनी कार्रवाई अदालत तक पहुँची और कलकत्ता उच्च न्यायालय ने इसे रद्द करने का आदेश दिया था, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने इस फैसले पर रोक लगा दी। मुकुल रॉय ने तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्य बनने से पहले कांग्रेस के साथ अपना राजनीतिक करियर शुरू किया था। उन्होंने राज्यसभा सदस्य के तौर पर काम किया और केंद्र में शिपिंग और बाद में रेलवे सहित अहम मंत्रालय संभाले थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/mukul-roy-known-as-chanakya-of-bengal-politics-passed-away/article-144218</link>
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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 14:03:34 +0530</pubDate>
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